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MATCH Act: अमेरिकी सांसदों ने पेश किया एमएटीसीएच एक्ट, चीन की एडवांस्ड सेमीकंडक्टर तकनीक तक पहुंच पर लगेगी रोक


वैश्विक सेमीकंडक्टर और तकनीकी वर्चस्व की दौड़ में अमेरिका ने एक और आक्रामक कदम उठाया है। वाशिंगटन में अमेरिकी कांग्रेस के सीनेटरों ने चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों को एडवांस्ड चिप निर्माण तकनीक हासिल करने से रोकने के लिए एक नया विधेयक पेश किया है। मल्टीलेटरल अलाइनमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी कंट्रोल्स ऑन हार्डवेयर (एमएटीसीएच) एक्ट नामक इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य निर्यात नियंत्रण की मौजूदा खामियों को दूर करना और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों के साथ नीतियों में तालमेल स्थापित करना है। 

क्या है बिल का मकसद?

यह कानून केंद्र सरकार को सेमीकंडक्टर उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट्स’ (व्यापार और आपूर्ति के प्रमुख मार्ग) की पहचान करने और मित्र देशों के साथ मिलकर एक समान एक्सपोर्ट कंट्रोल लागू करने का निर्देश देता है। सीनेटर पीट रिकेट्स और एंडी किम द्वारा संयुक्त रूप से लाए गए इस बिल को सीनेटर जिम रिश और चक शूमर का भी समर्थन प्राप्त है। 

सीनेटर रिकेट्स के अनुसार, वर्तमान में लागू इकाई-आधारित प्रतिबंधों का ढांचा बिखरा हुआ है, जिसे चीन फ्रंट कंपनियों या बिचौलियों के माध्यम से आसानी से चकमा दे देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेमीकंडक्टर को डिजाइन करने और बनाने की क्षमता कम्युनिस्ट चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा के केंद्र में है। यह नया बिल इन खामियों को खत्म कर अमेरिकी कंपनियों के लिए एक समान अवसर तैयार करेगा। 

‘एमएटीसीएच एक्ट’ के प्रमुख प्रावधान

यह बिल सीधे तौर पर ग्लोबल सप्लाई चेन और तकनीकी बाजार को प्रभावित करेगा। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:


  • तकनीक और उपकरणों पर पाबंदी: एमएटीसीएच एक्ट में डीप अल्ट्रावॉयलेट लिथोग्राफी इक्विपमेंट सहित आवश्यक चिप निर्माण उपकरणों पर देशव्यापी रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। 

  • चीनी कंपनियों पर नकेल: इसके तहत हुआवेई, एसएमआईसी और यांग्त्जी मेमोरी टेक्नोलॉजीज जैसी प्रमुख चीनी कंपनियों के प्लांट को प्रतिबंधित इकाई घोषित कर निशाना बनाया गया है।

  • सहयोगियों पर दबाव और अधिकार क्षेत्र का विस्तार: बिल में ऐसे नियम शामिल हैं कि यदि साझेदार देश तय समय सीमा के भीतर अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन नहीं करते हैं, तो अमेरिका विदेशी निर्मित उन वस्तुओं पर भी अपना अधिकार क्षेत्र बढ़ा सकता है जो अमेरिकी तकनीक पर निर्भर हैं। 

सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के बारे में क्या बोले जॉन डब्ल्यू मैनियन?

प्रतिनिधि जॉन डब्ल्यू. मैनियन ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी श्रमिकों और नवाचार ने दुनिया की सबसे एडवांस्ड सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि यह बिल उन उपकरणों, नौकरियों और तकनीकों की सुरक्षा करेगा जो 21वीं सदी में अमेरिका को चीन से आगे रखेंगे। 



कांग्रेसी माइकल बॉमगार्टनर और विश्लेषक रयान फेडासियुक ने चेतावनी दी है कि चीन अमेरिकी और सहयोगी देशों की निर्यात व्यवस्था के गैप का लगातार फायदा उठा रहा है, क्योंकि सहयोगी देशों के नियंत्रण हमेशा एक समान लागू नहीं होते। समर्थकों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में अमेरिकी लीडरशिप बनाए रखने के लिए यह सख्त कानून अनिवार्य है। 

अब आगे क्या?

सेमीकंडक्टर अब केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि एआई, डिफेंस सिस्टम और ग्लोबल सप्लाई चेन का समर्थन करने वाली एक रणनीतिक तकनीक बन चुका है। यह नया कदम घरेलू चिप उत्पादन को मजबूत करने और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की वाशिंगटन की पूर्व की कोशिशों का ही विस्तार है। चूंकि अमेरिका और उसके सहयोगियों की नीतियों में मतभेद एक बड़ी चुनौती रहे हैं, इसलिए ‘एमएटीसीएच एक्ट’ वैश्विक स्तर पर तकनीक पर नियंत्रण के लिए अधिक समन्वित और बहुपक्षीय दृष्टिकोण स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक नीतिगत बदलाव साबित हो सकता है।





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‘समझौता कर लो वरना!’, ट्रंप ने B1 ब्रिज पर यूएस‑इज़राइल हमले के बाद ईरान को चेतावनी


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oi-Bhavna Pandey

Trump warns Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है और अमेरिका के साथ समझौता करने की बात कही है। उन्होंने ईरान के करज क्षेत्र में बी1 पुल पर गुरुवार हुए अमेरिकी-इजरायली हमले का एक वीडियो साझा करते हुए ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, “बहुत देर होने से पहले समझौता करन लो।

यह हमला तब हुआ जब दोनों देशों के बीच युद्ध दूसरे महीने में प्रवेश कर रहा है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ईरान का सबसे बड़ा पुल ढह रहा है, अब इसका उपयोग कभी नहीं हो पाएगा – आगे बहुत कुछ और होगा! ईरान के लिए अब बहुत देर होने से पहले समझौता करने का समय है, और एक महान देश बनने के लिए जो कुछ भी बचा है, वह भी नष्ट न हो जाए!”

Trump warns Iran

एयर स्‍ट्राइक कर इजराइल-अमेरिका ने बी1 पुल किया तबाह

फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिका और इज़्राइल ने करज के पास अज़िमे क्षेत्र में कई ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें बी1 पुल भी शामिल था। मध्य पूर्व का सबसे ऊंचा पुल माना जाने वाला, यह 1,050 मीटर लंबा बी1 पुल क्षेत्रीय व्यापार की अहम कड़ी था और जल्द ही इसका उद्घाटन होने वाला था। अब अमेरिकी-इजरायली हमलों के कारण यह क्षतिग्रस्त हो गया है।

ट्रंप ने तेहरान को सबसे ज्‍यादा नुकसान की दी थी चेतावनी

बुधवार सुबह राष्ट्र को अपने संबोधन में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और इज़्राइल के संयुक्त “सैन्य अभियान” के कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं बताए, और चेताया कि अगले दो-तीन हफ्तों में तेहरान को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। ट्रंप ने ईरान को “पाषाण युग में वापस” बमबारी करके पहुंचाने की योजना बताई, यह दावा करते हुए कि सैन्य, नौसैनिक व अन्य ईरानी क्षमताएं पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।

ईरान ने हालांकि पलटवार करते हुए अमेरिका और इज़्राइल पर जवाबी कार्रवाई की। ईरान ने आरोप लगाया है कि इन हमलों में मानवता के खिलाफ अपराध और बच्चों की हत्या करके वे आधुनिक दुनिया में पाषाण युग वापस ला रहे हैं।



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जन विश्वास बिल: कानून बनते ही 1000+ कृत्य अपराध के दायरे से बाहर होंगे, नागरिकों के जीवन को आसान बनाने पर जोर


केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक को अभूतपूर्व सुधार बताते हुए कहा कि इस पैमाने पर बदलाव का उदाहरण न तो भारत में पहले देखा गया है और न ही दुनिया में कहीं और। उन्होंने बताया कि एक साथ 79 संसदीय अधिनियमों के करीब 1,000 प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिनमें आजादी के पहले के छह कानून भी शामिल हैं।

विधेयक संसद से हुआ पारित

संसद ने गुरुवार को जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार ने विभिन्न कानूनों में मौजूद कई आपराधिक प्रावधानों को खत्म कर उन्हें सरल और तर्कसंगत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसका उद्देश्य कारोबार सुगमता और आम लोगों के जीवन को आसान बनाना है।

यह विधेयक पहले लाए गए जन विश्वास विधेयक, 2025 का विस्तारित रूप है। शुरुआत में इसमें 17 कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव था, लेकिन सेलेक्ट कमेटी की सिफारिशों के बाद इसका दायरा काफी बढ़ा दिया गया।

जन विश्वास बिल 2026: अपराध-मुक्ति के प्रमुख प्रावधान 


  • छोटे उल्लंघनों पर राहत: मामूली या तकनीकी गलतियों के लिए अब जेल की सजा नहीं होगी। ऐसे मामलों को आपराधिक अपराध के बजाय प्रशासनिक उल्लंघन माना जाएगा।

  • सार्वजनिक स्थानों से जुड़े नियम: मेट्रो में धूम्रपान, सड़क संकेतों को नुकसान पहुंचाना या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने के बजाय जुर्माना लगाया जाएगा।

  • व्यापार और अनुपालन में सुधार: ड्रग्स और कॉस्मेटिक कानून के तहत कुछ मानकों के उल्लंघन पर पहले जहां जेल का प्रावधान था, अब उसकी जगह एक लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जाएगा।

  • परिवहन नियमों में बदलाव: बिना बीमा के वाहन चलाने जैसे मामलों में भी कई स्थितियों में जेल के बजाय जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

  • श्रम कानूनों में नरमी: एप्रेंटिस एक्ट, 1961 के तहत पहले या दूसरे उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जगह केवल चेतावनी या सलाह दी जाएगी।

  • सजा से ज्यादा भरोसा: इस बिल का मूल उद्देश्य दंडात्मक व्यवस्था से हटकर भरोसे पर आधारित शासन को बढ़ावा देना है, जिससे व्यवसाय करने में आसानी हो और अदालतों पर अनावश्यक बोझ भी कम हो।

जेल की सजा की जगह जुर्माना

विधेयक की प्रमुख विशेषता यह है कि कई छोटे अपराधों में जेल की सजा को हटाकर मौद्रिक दंड (पेनल्टी) का प्रावधान किया गया है। सरकार पहले ही 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर चुकी है। नए कानून के तहत मामूली उल्लंघनों पर चेतावनी, सुधार नोटिस या जुर्माना लगाया जाएगा, जिससे अदालतों पर बोझ भी कम होगा।



गोयल ने बताया कि देश में ऐसे प्रावधानों के तहत पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें अधिकांश मामूली उल्लंघन से जुड़े हैं। अब अधिकारियों को सीधे पेनल्टी लगाने का अधिकार मिलेगा, जिससे लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।

ग्रेडेड एक्शन और गंभीर अपराध यथावत

विधेयक में चरणबद्ध कार्रवाई (ग्रेडेड एनफोर्समेंट) का प्रावधान है पहले सलाह, फिर चेतावनी और दोहराव पर बढ़ती पेनल्टी। हालांकि, गंभीर अपराधों को इसमें शामिल नहीं किया गया है और उनके लिए कड़े प्रावधान पहले जैसे ही रहेंगे।

औपनिवेशिक सोच से बदलाव की ओर

गोयल ने कहा कि यह सुधार औपनिवेशिक मानसिकता वाले कानूनों से आगे बढ़ने का प्रयास है, जहां दंड को प्राथमिकता दी जाती थी। अब सरकार का फोकस भरोसे पर आधारित शासन पर है, जिसमें ईमानदार नागरिकों और व्यवसायों को अनावश्यक कानूनी दबाव से राहत मिलेगी।

अन्य प्रमुख प्रावधान

विधेयक के तहत विभिन्न कानूनों में जुर्माने की राशि संशोधित की गई है और हर तीन साल में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान जोड़ा गया है। साथ ही, विवादों के निपटारे के लिए निर्णायक और अपीलीय प्राधिकरण बनाए जाएंगे। कुछ मामूली अपराधों जैसे झूठा फायर अलार्म या जन्म-मृत्यु की सूचना न देना को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे निवेश, व्यापार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।



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कानपुर में चल रहे किडनी प्रत्यारोपण रैकेट की जांच में दो और गिरफ्तारियां हुईं


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-Oneindia Staff

कानपुर में अवैध गुर्दा प्रत्यारोपण रैकेट की जांच गुरुवार को दो ऑपरेशन थिएटर तकनीशियनों की गिरफ्तारी के साथ तेज हो गई। अधिकारियों ने इस बहु-शहर नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़े अस्पतालों के खिलाफ अपनी कार्रवाई का विस्तार किया। कल्याणपुर के एक निजी अस्पताल में अवैध प्रत्यारोपण में कथित संलिप्तता के लिए कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार को गिरफ्तार किया गया, जिससे आरोपियों की कुल संख्या आठ हो गई।

 कानपुर किडनी रैकेट में और गिरफ्तारियां

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पश्चिमी दिल्ली के उप पुलिस आयुक्त, एस. एम. कासिम अबिदी ने कहा कि दोनों सर्जरी के दिन दिल्ली से यात्रा करके तुरंत वापस लौट गए थे। पूछताछ के दौरान, उन्होंने रोहित उर्फ ​​राहुल नामक एक डॉक्टर द्वारा नियमित रूप से शामिल किए जाने का खुलासा किया, जो एक प्रमुख आरोपी है जिसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए गए हैं, ताकि अवैध प्रत्यारोपण में सहायता मिल सके। उन्हें प्रति सर्जरी 35,000 रुपये से 50,000 रुपये के बीच भुगतान के साथ-साथ यात्रा और आवास व्यय भी प्राप्त होता था।

गाजियाबाद निवासी राजेश कुमार नोएडा के एक निजी अस्पताल में काम करते हैं, जबकि हापुड़ के पिलखुवा के रहने वाले राघव गाजियाबाद के एक अस्पताल में कार्यरत हैं। उनकी भूमिकाओं में सर्जिकल उपकरण की व्यवस्था करना और प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं के दौरान डॉक्टरों की सहायता करना शामिल था। जांचकर्ताओं ने खुलासा किया कि तकनीशियनों के साथ यात्रा करने वाला एक डॉक्टर अभी भी फरार है, और उसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं।

पुलिस एक संदिग्ध बिचौलिए के कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है ताकि व्यापक नेटवर्क का पता लगाया जा सके। चार डॉक्टरों—रोहित उर्फ ​​राहुल, अनुराग उर्फ ​​अमित, अफजल और वैभव—जिनके इस रैकेट के केंद्र में होने का संदेह है, के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। इन उपायों का उद्देश्य उन्हें विदेश भागने से रोकना है।

जांच में दिल्ली, मेरठ, लखनऊ और गाजियाबाद सहित कई शहरों तक फैले तार सामने आए हैं, जो एक संगठित अंतर्राज्यीय सिंडिकेट का संकेत देते हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे जांच जारी रहेगी, और गिरफ्तारियां होंगी।

चिकित्सा स्थानांतरण और अस्पताल की कार्रवाई

इस बीच, डोनर आयुष चौधरी और प्राप्तकर्ता पारुल तोमर को विशेष उपचार के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्हें गुरुवार की सुबह लाला लाजपत राय अस्पताल से ले जाया गया। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य संजय कला ने पुष्टि की कि दोनों मरीज स्थिर हैं और सुधार दिखा रहे हैं, लेकिन उन्हें उन्नत नेफ्रोलॉजी देखभाल के लिए रेफर किया गया था।

समानांतर कार्रवाई में, स्वास्थ्य विभाग ने रैकेट में कथित संलिप्तता के लिए आहूजा और प्रिया अस्पतालों के लाइसेंस रद्द कर दिए और उन्हें तीन दिनों के भीतर खाली करने का निर्देश दिया। इससे पहले, मेडलाइफ अस्पताल को मामले से उसके संबंध के कारण सील कर दिया गया था।

चल रही जांच

पुलिस रैकेट के संचालन की पूरी सीमा और वित्तीय संबंधों को स्थापित करने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए है। अधिकारी इस नेटवर्क को खत्म करने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

With inputs from PTI

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नाबालिगों के आपसी सहमति से बने रिश्तों को सावधानीपूर्वक संभालने पर जोर दिया।


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-Oneindia Staff

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नाबालिगों के बीच सहमति से बने रिश्तों से जुड़े मामलों को सावधानी से निपटाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। एकल-न्यायाधीश पीठ की अध्यक्षता करते हुए न्यायमूर्ति आलोक मेहरा ने ये टिप्पणी लगभग 15 वर्ष की आयु के दो नाबालिगों से जुड़े एक मामले की समीक्षा करते हुए की। एक अंतरिम उपाय के रूप में, अदालत ने निचली अदालत में कार्यवाही रोक दी है।

 उत्तराखंड उच्च न्यायालय में नाबालिगों के रिश्तों पर फैसला

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यह मामला लड़की के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से उत्पन्न हुआ था, जिन्होंने लड़के पर अपनी बेटी का अपहरण करने का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और बाद में आरोप-पत्र दाखिल किया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि नाबालिग एक-दूसरे को लगभग चार साल से जानते थे और उनकी गहरी दोस्ती थी। शुरू में, लड़की ने किसी भी शारीरिक संबंध से इनकार किया, लेकिन बाद में मजिस्ट्रेट को उनकी सहमति से हुए संबंधों के बारे में सूचित किया।

अदालत को सूचित किया गया कि लड़की ने लड़के को अपने घर आमंत्रित करने, उसे अलमारी में छिपाने, उसे भोजन प्रदान करने और शारीरिक संबंध बनाने की बात स्वीकार की। वकील के सबमिशन के अनुसार, उसकी मेडिकल रिपोर्ट में जबरदस्ती या बल प्रयोग के कोई संकेत नहीं थे। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि लड़के को अवलोकन गृह में रखने से उसके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और अदालत से नरमी बरतने का आग्रह किया।

न्यायमूर्ति मेहरा ने कहा कि नाबालिगों के बीच सहमति से बने रिश्तों से जुड़े मामलों में, लड़की का बयान विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में आयु को भी एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। नतीजतन, अदालत ने प्रतिवादी को नोटिस जारी किया और आगे की सुनवाई तक देहरादून स्थित किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगा दी।

With inputs from PTI



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हरियाणा उच्च न्यायालय ने जन सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर चार मंजिला से अधिक ऊंची इमारतों की नीति पर रोक लगा दी है।


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-Oneindia Staff

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए, आवासीय भूखंडों पर स्टिल्ट-प्लस-चार मंजिलों की अनुमति देने वाली हरियाणा सरकार की नीति पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। यह निर्णय टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के 2 जुलाई 2024 के आदेश के खिलाफ दायर एक याचिका के बाद आया है, जिसने स्टिल्ट-प्लस-तीन मंजिलों की पिछली सीमा को बढ़ा दिया था और अनुमोदित भवन योजनाओं के लिए एक संरचना तंत्र पेश किया था।

 हरियाणा उच्च न्यायालय ने स्टिल्ट-प्लस-फोर नीति पर रोक लगाई

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मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ नेObserved कि राज्य ने सार्वजनिक सुरक्षा पर राजस्व को प्राथमिकता दी। अदालत ने नीति को लागू करते समय गुरुग्राम की बुनियादी ढांचा की कमी को नजरअंदाज करने के लिए सरकार की आलोचना की। बेंच ने एक अवसंरचना क्षमता ऑडिट की अनुपस्थिति पर प्रकाश डाला, जो एक स्वच्छ और स्वस्थ शहरी वातावरण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

अंतरिम आदेश और निरीक्षण

अदालत ने लंबी दलीलों के कारण राज्य को नीति लागू करने से रोकने का फैसला किया। इसने देखा कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तस्वीरों में गुरुग्राम के सेक्टर 28, डीएलएफ फेज-I की संकरी आंतरिक सड़कें दिखाई दे रही थीं। नतीजतन, इन सड़कों का निरीक्षण करने के लिए एक आयोग का गठन किया गया, जिसमें हरियाणा सरकार, याचिकाकर्ता के वकील और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि शामिल थे।

निरीक्षण के निष्कर्ष

निरीक्षण से पता चला कि सेक्टर 28 में आंतरिक सड़कों की निर्धारित चौड़ाई 10 से 12 मीटर है। हालांकि, अपर्याप्त स्वच्छता, अधिक जनसंख्या, खराब योजना और अनियंत्रित निर्माण के कारण वास्तविक मोटरेबल जगह केवल 3.9 से 4.8 मीटर के बीच थी। ये कारक अवरुद्ध जलभृतों में योगदान करते हैं और भूजल पुनर्भरण में बाधा डालते हैं।

विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सरकार ने जुलाई 2024 के आदेश जारी करते समय एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया था। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पी. राघवेंन्द्र राव की अध्यक्षता वाली समिति ने ऐसी नीतियों को लागू करने से पहले एक अवसंरचना क्षमता ऑडिट करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया की सिफारिश की थी।

गुरुग्राम में बुनियादी ढांचे पर तनाव

अदालत नेObserved कि गुरुग्राम का बुनियादी ढांचा पहले से ही तनाव में है, जिसमें सीवेज ओवरफ्लो, जल निकासी की समस्याएं, यातायात की भीड़, भरी हुई सड़कें और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी समस्याएं आम हैं। समिति ने चिंता व्यक्त की कि मंजिलों की संख्या बढ़ाने से ये चुनौतियाँ बढ़ेंगी।

With inputs from PTI



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ईरान में जंग खिंचना कितना चिंताजनक?: रिपोर्ट में दावा- तेल संकट और विकराल होने की आशंका, खतरे कम आंक रहे बाजार


पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच वैश्विक वित्तीय बाजार अभी भी जोखिमों को पूरी तरह कीमतों में शामिल नहीं कर रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की हालिया रणनीति रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि बाजारों का व्यवहार जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहा।

निवेशकों का क्या मानना है?

रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में सीमित तनाव की धारणा अब भी बनी हुई है। निवेशकों का मानना है कि संघर्ष ज्यादा नहीं बढ़ेगा, जबकि हाल के घटनाक्रम इस सोच को चुनौती दे रहे हैं। अमेरिका की सैन्य सक्रियता और ईरान से जुड़े सीधे टकराव की स्थिति ने यह संकेत दिया है कि हालात और बिगड़ सकते हैं। जेफरीज ने साफ कहा है कि सैन्य टकराव के और बढ़ने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन यह जोखिम अभी बाजार की वैल्यूएशन में नजर नहीं आ रहा।

ऊर्जा आपूर्ति पर क्या अनुमान?

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, वहां आंशिक रुकावट के संकेत मिल रहे हैं। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिसका असर वैश्विक महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में उद्योग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यदि यह संकट तीन से चार महीने तक जारी रहता है, तो यह वैश्विक स्तर पर एक प्रणालीगत संकट बन सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल को लंबे समय तक खाड़ी क्षेत्र में फंसा नहीं रखा जा सकता, इसके गंभीर परिणाम होंगे।

रिपोर्ट में किन चीजों को लेकर चिंता?

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बाजार केवल प्रत्यक्ष असर ही नहीं, बल्कि इसके दूसरे चरण के प्रभावों को भी कम आंक रहे हैं। बढ़ती ऊर्जा कीमतों का असर तकनीकी क्षेत्र पर भी पड़ेगा, खासकर डेटा सेंटर के निर्माण लागत पर, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भर हैं।

इसके साथ ही, रेड सी में बढ़ती बाधाएं और हूती विद्रोहियों की सक्रियता से सप्लाई चेन पर बहुस्तरीय दबाव बनने की आशंका है। इससे वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क प्रभावित हो सकते हैं।

इसके बावजूद, वैश्विक बाजार अभी भी एक सकारात्मक आधार मानकर चल रहे हैं, जो मौजूदा परिस्थितियों में टिकाऊ नहीं दिखता। जेफरीज का मानना है कि बाजार अभी भी इस संकट की गंभीरता और कच्चे तेल से जुड़े महंगाई के जोखिम को पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं, जबकि सप्लाई में लंबे समय तक बाधा आने की संभावना लगातार बढ़ रही है।



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जम्मू और कश्मीर वित्त विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय की अधिकतम सीमा निर्धारित की है, जिसकी अंतिम तिथि 21 अप्रैल है। BEAMS अपलोड करने की अंतिम तिथि भी 21 अप्रैल है।


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-Oneindia Staff

जम्मू और कश्मीर वित्त विभाग ने 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय की सीमा की घोषणा की है, जिसमें प्रोजेक्ट विवरण को BEAMS पोर्टल पर अपलोड करने की अंतिम तिथि 21 अप्रैल निर्धारित की गई है। एक आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य समय पर प्रोजेक्ट निष्पादन के लिए धन प्राधिकरण में तेजी लाना है।

 जम्मू और कश्मीर वित्त मंत्रालय द्वारा पूंजीगत व्यय की सीमा निर्धारित की गई।

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सभी प्रशासनिक विभागों और जिला विकास आयुक्तों (DDCs) को B12 स्टेटमेंट दिशानिर्देशों का पालन करते हुए, स्वीकृत कार्यों और गतिविधियों को BEAMS पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। इससे विभाग को आवंटित धन का 50 प्रतिशत तुरंत अधिकृत करने में सक्षम बनाया जाएगा। DDCs से अपेक्षा की जाती है कि वे निर्धारित समय सीमा तक विधायकों और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों के सहयोग से अपनी योजनाओं को अंतिम रूप दें और अपलोड करें।

वित्त विभाग ने चल रहे प्रोजेक्टों के महत्व पर जोर दिया है, जिसमें पूंजीगत व्यय आवंटन का कम से कम 70 प्रतिशत उनके पूरा होने के लिए उपयोग करना अनिवार्य है। शेष धनराशि नई परियोजनाओं के लिए नामित है। विभागों को लंबित JPKCC प्रोजेक्टों को प्राथमिकता देनी होगी और उपलब्ध बजट सीमाओं के भीतर विलंबित प्रोजेक्टों में धन की कमी को दूर करना होगा।

नई परियोजनाओं के दो साल के भीतर पूरा होने की उम्मीद है, और असाधारण परिस्थितियों में केवल मेगा प्रोजेक्टों के लिए तीन साल तक विस्तार की अनुमति होगी। 2026-27 या उसके तुरंत बाद पूरा होने की उम्मीद वाले सभी चल रहे और जारी कार्यों को केपेक्स बजट में प्राथमिकता दी जाएगी।

वित्तीय पारदर्शिता और अनुपालन

यह स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि केपेक्स धन को राजस्व व्यय के लिए डायवर्ट न किया जाए। इसके अतिरिक्त, सभी केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं (CSS) और NABARD प्रोजेक्टों को पूरी वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए BEAMS पोर्टल पर केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश दोनों की हिस्सेदारी प्रदर्शित करनी होगी।

यह अनिवार्य है कि विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्टों में भूमि मुआवजा, वन मंजूरी लागत और उपयोगिता शिफ्टिंग घटकों को शामिल किया जाए। इन उपायों का उद्देश्य जवाबदेही बढ़ाना और सभी प्रोजेक्टों के लिए व्यापक वित्तीय योजना सुनिश्चित करना है।

मुख्य निर्देश विवरण
प्रोजेक्ट अपलोड करने की अंतिम तिथि 21 अप्रैल, 2026
प्रारंभिक धन प्राधिकरण आवंटित धन का 50%
जारी कार्यों पर ध्यान केपेक्स आवंटन का 70%
नई परियोजनाओं के लिए पूर्णता समय-सीमा 2 वर्ष (मेगा प्रोजेक्टों के लिए 3 वर्ष तक विस्तार योग्य)

वित्त विभाग के निर्देश जम्मू और कश्मीर में विकासात्मक पहलों के लिए संसाधनों के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करते हुए, कुशल प्रोजेक्ट प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।

With inputs from PTI

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हरिद्वार प्रशासन ने 2027 के अर्द्ध कुंभ उत्सव से पहले मांस की दुकानों को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा है।


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-Oneindia Staff

उत्तराखंड में आगामी अर्ध कुंभ को देखते हुए, हरिद्वार प्रशासन ने शहर की शहरी सीमाओं से सभी कच्चे मांस की दुकानों को बाहरी इलाके के सराय गाँव में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया है। हरिद्वार की मेयर किरण जायसवाल ने कहा कि एक प्रस्ताव तैयार किया गया है और इसे 6 अप्रैल को नगर निगम बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।

 हरिद्वार में मांस की दुकानों को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव

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हरिद्वार नगर निगम के उपनियमों में पहले से ही गंगा के शहर के मुख्य स्नान घाट, हर की पौड़ी के पांच किलोमीटर के दायरे में मांस, शराब और अंडे की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध है। जायसवाल ने बताया कि मंजूरी मिलने पर, शहरी क्षेत्र की सभी कच्चे मांस की दुकानों को सराय गाँव में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

हालांकि नगर निगम द्वारा केवल 20 मांस की दुकानों के लाइसेंस जारी किए गए हैं, फिर भी कई अवैध संचालन जारी हैं। जायसवाल के अनुसार, यह स्थिति अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में योगदान करती है और आवारा कुत्तों की समस्या को बढ़ाती है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रस्ताव पारित होने के बाद, इन अवैध दुकानों के खिलाफ जुर्माना लगाने सहित कार्रवाई की जाएगी।

होटलों और सड़क किनारे ढाबों में पके मांस परोसने के मुद्दे पर भी बोर्ड बैठक के दौरान चर्चा की जाएगी। वर्तमान में, ज्वालापुर और जगजीतपुर जैसे क्षेत्रों में कई खुले मांस की दुकानें संचालित होती हैं, जहाँ हिंदू संगठन अक्सर उन्हें हटाने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं।

धार्मिक भावनाएँ और सामुदायिक समर्थन

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अर्ध कुंभ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, और हरिद्वार में मांस और शराब की दुकानों की मौजूदगी धार्मिक भावनाओं को आहत करती है।

राज्य के मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने आश्वासन दिया कि कुंभ मेले के दौरान धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएंगे। इसमें सांस्कृतिक संवेदनशीलता के अनुरूप शहरी क्षेत्रों से मांस की दुकानों को स्थानांतरित करना भी शामिल है।

With inputs from PTI



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नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल में दिल्ली के सभी जिलों में शत्रुतापूर्ण हमले का अनुकरण किया गया


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-Oneindia Staff

गुरुवार को दिल्ली के सभी 13 जिलों में एक व्यापक नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसमें एक शत्रुतापूर्ण हमले के परिदृश्य का अनुकरण किया गया। नागरिक सुरक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित यह अभ्यास, शाम 8 बजे 17 स्थानों पर शुरू हुआ, जिनमें अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और सार्वजनिक स्थान शामिल थे। इस बड़े पैमाने के अभियान का उद्देश्य हवाई हमले की चेतावनी, ब्लैकआउट उपायों और निकासी अभ्यासों के माध्यम से तैयारियों का परीक्षण करना था।

 दिल्ली में नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया

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टीमों ने मॉक बचाव अभियान चलाया, व्यक्तियों को निर्दिष्ट बंकर क्षेत्रों में स्थानांतरित किया और नकली हताहतों के लिए चिकित्सा इकाइयों को तैनात किया। आर्जंगढ़ में वायु सेना स्टेशन को नागरिक सुरक्षा नियंत्रण केंद्रों से जोड़ने वाली हॉटलाइन के माध्यम से एक समन्वित हवाई हमले की चेतावनी जारी की गई। सायरन बजाए गए, जिसके बाद युद्ध की स्थिति का अनुकरण करने के लिए चयनित क्षेत्रों में एक क्रैश ब्लैकआउट हुआ।

ब्लैकआउट चरण के दौरान, प्रोटोकॉल के अनुपालन का परीक्षण करने के लिए बत्तियाँ बंद कर दी गईं। कमजोर स्थलों और प्रमुख प्रतिष्ठानों की पहचान छलावरण जैसे जोखिम न्यूनीकरण उपायों के लिए की गई। मालवीय नगर के रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट जितेंद्र कुमार ने नकली अलर्ट पर त्वरित प्रतिक्रियाओं को नोट किया। आपदा प्रतिक्रिया टीमों और चिकित्सा कर्मचारियों सहित कई इकाइयों ने प्रभावी ढंग से समन्वयित कार्रवाई की।

एक पुलिस अधिकारी ने सुबह की सूचना दी कि एक बंकर के रूप में पहचाने गए तहखाने में एक अलग मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी। इस अभ्यास में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और हताहतों पर चिकित्सा दल की प्रतिक्रियाओं का अभ्यास किया गया। नागरिक सुरक्षा, राष्ट्रीय कैडेट कोर, नागरिक निकायों और आपदा प्रबंधन टीमों सहित कई एजेंसियों ने भाग लिया।

इस अभ्यास में क्षेत्रीय नागरिक सुरक्षा नियंत्रण केंद्रों और राजस्व विभाग के आपातकालीन संचालन केंद्रों का सक्रिय कामकाज शामिल था। विभिन्न आपातकालीन सहायता कार्यान्वयनकर्ताओं के समन्वय केंद्रों ने भी भूमिका निभाई। दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और गृह रक्षकों जैसी एजेंसियों ने खोज और बचाव अभियान का प्रदर्शन किया।

जन भागीदारी और जागरूकता

हजारों नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों और आपातकालीन उत्तरदाताओं ने ड्रिल में भाग लिया। जन भागीदारी और जागरूकता अभ्यास का एक अभिन्न अंग थे। भाग लेने वाली एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय ने कर्मियों की त्वरित लामबंदी और आपातकालीन प्रोटोकॉल की प्रभावी सक्रियता सुनिश्चित की।

यह ड्रिल शहर भर में कई प्रमुख स्थानों पर हुई, जिसमें चांदनी चौक में ताज पैलेस होटल और ओमेक्स मॉल शामिल थे। शत्रुतापूर्ण खतरों से उत्पन्न होने वाली आपात स्थितियों के लिए तैयारियों को बढ़ाने और प्रतिक्रिया प्रणालियों को मजबूत करने के लिए ऐसे अभ्यास समय-समय पर किए जाते हैं।

रिपोर्टिंग और भविष्य की तैयारी

जिलाधिकारियों और नागरिक सुरक्षा नियंत्रकों ने अभ्यास की निगरानी की और आगे के मूल्यांकन के लिए 3 अप्रैल को नागरिक सुरक्षा मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इन रिपोर्टों का मूल्यांकन के लिए गृह मंत्रालय के साथ साझा किया जाएगा।

नागरिक सुरक्षा निदेशालय और राजस्व विभाग ने सार्वजनिक सुरक्षा और तैयारियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने नागरिकों से सलाह के प्रति सचेत रहने, ऐसे अभ्यासों के दौरान सहयोग करने और आपात स्थिति के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की अपील की।

With inputs from PTI



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