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Iran Donation Money: खामेनेई की मौत के बाद भारत में जुटाया गया मोटा चंदा क्यों ईरान नहीं जा सकता? क्या होगा?


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oi-Divyansh Rastogi

Iran Donation Money Funds Stuck Reason: अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान जंग अपने पांचवें हफ्ते में दहशत बरपा कर रही है। आत्मघाती मिसाइल हमलों और बमबारी में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई टॉप कमांडरों की मौत हो चुकी है। इंटरनेशनल रेड क्रॉस (IFRC) के अनुसार, अब तक 1900 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 20,000 से अधिक घायल हैं।

इसी संकट के बीच भारत के शिया समुदाय ने ईरान के लिए अभूतपूर्व चंदा इकट्ठा किया। मेरठ के तीन भाइयों ने ₹15 लाख की जमीन दान कर दी। कश्मीर घाटी में लोगों ने सोना, नकद, निजी बचत और घर के बर्तन-जेवर बेचकर रकम जुटाई। मकसद था कि ईरान के जरूरतमंदों तक मदद पहुंचे और देश कमजोर न पड़े। लेकिन अब एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। जुटाए गए करोड़ों रुपये ईरान नहीं पहुंच पा रहे। आखिर क्यों अटक गया यह चंदा? सीधे तेहरान ट्रांसफर क्यों नहीं हो सका? और अब इन पैसों का क्या होगा? पूरी कहानी विस्तार से समझते हैं…

Iran Donation Money Funds Stuck Reason

Iran Donation Money Funds: चंदा इकट्ठा करने की प्रक्रिया में आए बदलाव

भारत में ईरानी दूतावास ने युद्ध राहत के नाम पर चंदा अभियान चलाया। शुरू में 14 मार्च को दूतावास ने अपने मुख्य बैंक खाते से ही दान मांगा। लेकिन भारतीय नियमों के मुताबिक, विदेशी मिशनों को चंदा जुटाने के लिए अलग खाता खोलना जरूरी है।

इसलिए बाद में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में एक विशेष खाता खोला गया। 15 मार्च को एक दिन के लिए नकद दान का विकल्प भी दिया गया, मगर जल्द ही प्रक्रिया को पूरी तरह औपचारिक बना दिया गया। अब साफ निर्देश है कि सभी दान सिर्फ निर्धारित बैंक खाते से ही स्वीकार किए जाएंगे। नकद या अनौपचारिक तरीका पूरी तरह बंद।

Iran Donation Money Funds Stuck Reason: क्यों नहीं जा रहा पैसा ईरान? क्या है भारत का प्लान?

ईरानी दूतावास ने फैसला लिया है कि जुटाए गए पैसे को अब भारत में ही दवाएं खरीदने में लगाया जाएगा। भारत सरकार ने भी इसकी अनुमति दे दी है। मुख्य वजह है कि राजनयिक चैनलों से पैसा सीधे तेहरान ट्रांसफर करना संभव नहीं है। विदेश मंत्रालय (MEA) और RBI की सख्त बैंकिंग नियमों के चलते ऐसे फंड अक्सर भारत में ही फंस जाते हैं।

भारत पहले ही ईरान को दवाओं की एक खेप भेज चुका है। अब बाकी दवाएं दिल्ली के बाजार से खरीदकर एयरलिफ्ट की जाएंगी। ईरान की महान एयर का एक विमान मशहद से दिल्ली आने वाला था, लेकिन अमेरिकी हवाई हमले में एयरबेस पर क्षतिग्रस्त हो गया। ईरान अब नई उड़ान भेजने की तैयारी में है।

सोना-आभूषणों का क्या होगा?

कश्मीर समेत देश के कई हिस्सों से सोना और आभूषण चंदे के रूप में आए हैं। ‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इन आभूषणों को ‘डिप्लोमैटिक पाउच’ जैसे राजनयिक बैग से भी ईरान नहीं भेजा जा सकता। सूत्र बताते हैं कि इन वस्तुओं को स्थानीय बैंकों में जमा करके पहले नकदी में बदलना होगा। फिर वही बैंकिंग नियम लागू होंगे जो नकद चंदे पर हैं।

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सोशल मीडिया पर भड़का विवाद

ईरानी दूतावास ने अपने अभियान को प्रमोट करने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। इनमें कश्मीरी दानदाताओं को धन्यवाद दिया गया और एक कश्मीरी महिला को सोना दान करते हुए दिखाया गया। पाकिस्तान स्थित कुछ अकाउंट्स के विरोध के बाद पोस्ट हटा लिए गए। इससे कश्मीर पर ईरान के रुख को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया। दूतावास को भारी आलोचना झेलनी पड़ी।

राजनयिक और बैंकिंग नियमों का पेंच

‘वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस’ में विदेशी मिशनों द्वारा चंदा जुटाने का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है। दूतावासों को बैंकिंग सुविधा सिर्फ आधिकारिक कामों के लिए मिलती है।

नियम साफ हैं:

  • मुख्य बैंक खाते से चंदा नहीं लिया जा सकता।
  • MEA की अनुमति से अलग खाता खोलना जरूरी।
  • RBI की कड़ी जांच के बाद ही पैसा स्वदेश भेजा जा सकता है।

अक्सर पैसा भारत में ही अटक जाता है। 2023 में सीरिया भूकंप के बाद भारत में जुटाए गए चंदे आज भी स्थानीय बैंक खातों में पड़े हैं। खामेनेई की मौत और जंग के इस संकट में भारत के शिया समुदाय ने दिल खोलकर मदद की। मेरठ से कश्मीर तक। लेकिन राजनयिक प्रोटोकॉल, सख्त बैंकिंग नियम और भू-राजनीतिक तनाव ने चंदे को ईरान पहुंचने से रोक दिया।

अब ये पैसे भारत में ही दवाओं में बदलकर एयरलिफ्ट किए जाएंगे। व्यावहारिक फैसला है, लेकिन कई दानदाता निराश जरूर हैं। विदेशी दूतावासों के चंदा अभियान का भविष्य भारत में हमेशा अनिश्चित रहता है। कभी मदद पहुंचती है, कभी बैंक खातों में फंस जाती है। इस बार ईरान ने जो रास्ता चुना, वह नियमों के दायरे में सबसे सुरक्षित और त्वरित है।



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अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में AAP नेताओं पर अत्‍याचार को लेकर सीएम भूपेंद्र को लिखा लेटर, मांगा मिलने का समय


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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर सीएम भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर उनसे मिलने का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि गुजरात में पंचायत और नगर पालिका चुनावों के पहले बहुत बड़े स्तर पर हमारे कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से गिरफ्तार किया जा रहा है।

160 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है और अभी 10 हज़ार से ज्यादा को गिरफ़्तार करने की गुजरात सरकार की योजना है। उन्होंने कहा कि “आप” की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा बुरी तरह से बौखलाई हुई है। पर इस तरह की गिरफ़्तारियों और गुंडागर्दी को गुजरात के लोग पसंद नहीं करते। लोग इसका जवाब ज़रूर देंगे।

Kejriwal

अरविंद केजरीवाल ने गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल को लिखे पत्र में कहा है कि पिछले 30 साल से गुजरात में भाजपा की सरकार है। भाजपा के भ्रष्टाचार, अत्याचार और दमन के कुशासन से जनता बहुत परेशान हो चुकी थी। भाजपा गुजरात में कांग्रेस के साथ मिलीभगत से पिछले 30 साल से सरकार चला रही है। जिस कारण गुजरात में कोई विकल्प नहीं था।

आम आदमी पार्टी के रूप में लोगों को पहली बार एक मजबूत विकल्प मिला है। लोग जानते हैं, आम आदमी पार्टी एक निडर, ईमानदार, देशभक्त और अच्छे पढ़े-लिखे लोगों की पार्टी है। आम आदमी पार्टी भाजपा से कभी समझौता नहीं करेगी। इसी कारण पिछले कुछ सालों में गुजरात में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता बहुत तेज़ी से बढ़ रही है। पूरे गुजरात में अब यह आम चर्चा का विषय है कि भाजपा जा रही है, आम आदमी पार्टी की सरकार आ रही है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि इसी कारण भाजपा ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ अब एक षडयंत्र रचा है। कि आम आदमी पार्टी के अधिकतर नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लौ, जिससे कि आम आदमी पार्टी ही न बचे। इसी षडयंत्र के तहत पिछले तीन महीनों में गुजरात में आम आदमी पार्टी के 160 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को भाजपा सरकार गिरफ्तार कर चुकी है।

इसी कड़ी में 1 अप्रैल को गुजरात पुलिस ने गुजरात में आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ईशुदान गढ़वी को भी गिरफ्तार किया और देर रात छोड़ा। वह अपने कार्यकर्ताओं की हो रही अवैध गिरफ्तारी की जानकारी लेने थाने गए थे। गुजरात पुलिस की यह कार्रवाई गुजरात में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले और तेजी से बढ़ी है। इससे यह संदेश जा रहा है कि भाजपा पुलिस के दम पर स्थानीय निकाय चुनाव जीतना चाहती है।

उन्होंने कहा कि पिछले 48 घंटों में गुजरात पुलिस की आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के पीछे भी एक खास पैटर्न साफ तौर पर दिख रहा है। जिसके तहत आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सड़क पर स्कूटर या मोटर साइकिल में पीछे से आए कुछ गुंडे रोकते है, उनसे मारपीट, गाली गलौज करते हैं। वै गुंडे क्राइम ब्रांच को फोन करते हैं, क्राइम ब्रांच वाले दो मिनट में मौके पर पहुंच जाते हैं और हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लेते हैं। ऐसे लगता है कि क्राइम ब्रांच वाले आसपास उन गुंडों के फ़ोन का ही इंतज़ार कर रहे हों।

क्राइम ब्रांच वाले बिना कुछ पूछताछ के, एक तरफा कार्रवाई करते हुए हमला करने वाले गुंडों को छोड़ देते है और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओ को गुजरात पुलिस के हवाले कर देते हैं जो फिर धारा 307 (हत्या का प्रयास) लगा कर उन्हें जेल भेज देती है। पिछले 48 घंटो में हुए तीन ऐसे मामलो से यह साफ़ प्रतीत होता है की यह सब कुछ एक पूर्व नियोजित साजिश के तहत किया जा रहा है।

1. खंभालिया- 31 मार्च 2026 को दीपक सिंह दोपहर लगभग 3 बजे घर जा रहे थे। तभी 2 लोग बाइक से आए, ओवरटेक किया और मारपीट की। शिकायत दर्ज कराने के लिए जब वह खंभालिका पुलिस स्टेशन पहुंचे तो उन्ही पर केस दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

2. पोरबंदर- 30-31 मार्च 2026 को पवन और जगदीश अपने काम से जा रहे थे, तभी एक स्कूटी सवार ने जानबूझ कर उनकी गाड़ी के आगे स्कूटी लगाकर मारपीट की। पुलिस ने बिना जाँच पवन और जगदीश पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) लगा दी। दोनों गिरफ्तार हैं और जेल में हैं।

3. जामनगर- 31 मार्च 2026 को नवीन काकरान, मुन्ना कुमार, आलोक सिंह, पुनीतराज, प्रियव्रत की गाड़ी को एक स्कूटी सवार की ने टच किया। उसने आलोक सिंह से बहस की, धक्का दिया। पुलिस ने पीड़ितों पर ही 307 का केस कर दिया।

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सबसे बड़ी आश्चर्य की बात है कि ये स्कूटर सवार आखिर कौन हैं? इन्हें हर जगह ”आप” के कार्यकर्ताओं से टक्कर मारने के लिए कौन भेज रहा है? और हर जगह ऐसा लगता है कि पुलिस उनकी शिकायत पर एक जैसी एफआईआर करने को तैयार बैठी है। इस से साफ जाहिर है कि ये सब एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हो रहा है।

केवल यही तीन मामले नहीं, अभी तक हमारे जितने कार्यकर्ता अन्य मामलों में भी गिरफ्तार किए गए हैं, उन सभी पर लगाएं गए कैस पूरी तरह से झूठे और फर्जी हैं। यही नहीं, आम आदमी पार्टी के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं के घर पर पुलिस जाकर खुलेआम धमकी दे रहे हैं। उन्हें गुजरात छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जा रही है। उनके परिवारों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्हें विभिन्न तरीकों से डराने की कोशिश की जा रही है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात में आम आदमी पार्टी को खत्म करने की यह साजिश टॉप लेवल पर रची गई है। सुनने में यह भी आ रहा है कि अगले कुछ दिनों में दस हजार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने की योजना है। जिससे स्थानीय निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी उम्मीदवार ही न उतार पाए और भाजपा एक तरफा चुनाव जीत जाए। क्या इस तरह से भाजपा गुजरात में चुनाव जीतना चाहती है? यह तो लोकतंत्र के लिए भद्दा मजाक है। अगर विपक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डाल कर ही चुनाव जीतना है तो चुनाव कराने की ही जरूरत क्या है?

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। अगर हम चाहे तो पंजाब में हम भी भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं को इसी तरह झूठे केस करके जेल में डाल सकते हैं। लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि हम अच्छे और शरीफ लोग हैं। संविधान में विश्वास रखते हैं। हम गुडागर्दी नहीं करते हैं। और फिर हमें ऐसा करने की जरूरत भी नहीं है। क्योंकि हमने पंजाब में बहुत अच्छे काम किए हैं। अपने कामों से हमने लोगों का दिल जीता है। हम चुनाव अपने कामों के बल पर लड़ते हैं। हम अपने अच्छे काम के नाम पर वोट मांगेंगे। आपको गुजरात में यह दमन इसलिए करना पड़ रहा है, क्योंकि आपने सब गलत काम किए हैं, गुंडागर्दी की है, चोरी की है, अत्याचार और दमन किया है। आपने कोई अच्छा काम नहीं किया है। गुजरात की जनता को दिखाने के लिए आपके पास कोई अच्छा काम नहीं है। इसलिए आपको चुनाव जीतने के लिए यह दमन और अत्याचार करना पड़ रहा है।

अंत में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात की जनता सबकुछ देख रही है। वह भाजपा की तानाशाही से न तो डरेगी और ना ही दबेगी। आप कितने लोगो को जेल में डालोगे? क्या आप गुजरात की पूरी 6 करोड़ जनता को जेल में डाल सकते हो? आज आम आदमी पार्टी की सोच गुजरात के हर घर में पहुंच चुकी है। बीजेपी उसे जितना दबाने की कोशिष करेगी, ”आप” की सोच और अधिक फैलेगी। मैं और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान हमारे गुजरात के नेताओं के साथ आपसे मिलना चाहते हैं। उम्मीद है कि आप जल्द से जल्द मिलने का समय देंगे।



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IPL ने किया 2 साल के लिए बैन, अब पाकिस्तान पहुंचा यह खिलाड़ी! बीच सीजन में हुई PSL में एंट्री?


Cricket

oi-Amit Kumar

IPL 2026, Harry Brook: इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज हैरी ब्रूक एक बार फिर क्रिकेट के मैदान पर अपनी बल्लेबाजी का जौहर दिखाने को तैयार हैं। लेकिन इस बार आईपीएल नहीं वह पाकिस्तान सुपर लीग में खेलते नजर आएंगे। बीसीसीआई (BCCI) द्वारा आईपीएल से दो साल के लिए बैन किए जाने के बाद हैरी ब्रूक ने पीएसएल का रुख किया है। इस्लामाबाद यूनाइटेड ने उन्हें टूर्नामेंट के बीच में विदेशी खिलाड़ी के रिप्लेसमेंट के रूप में साइन किया है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट में इसे अफवाह भी करार दिया जा रहा है। टीम ने अब तक ब्रूक को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है।

क्यों लगा आईपीएल में 2 साल का बैन? (IPL 2026, Harry Brook)

हैरी ब्रूक पर आईपीएल के आगामी दो सीजन (2026 और 2027) के लिए बैन लगाया गया है। दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 6.25 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल किया था, लेकिन ब्रूक ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को प्राथमिकता देने का हवाला देते हुए टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया। बीसीसीआई नियमों के मुताबिक यदि कोई खिलाड़ी नीलामी में चुने जाने के बाद बिना किसी गंभीर चोट या वैध कारण के हटता है तो उस पर दो साल का बैन लगाया जाता है।

Islamabad United 1

दिल्ली कैपिटल्स को ब्रूक ने दिया था धोखा

ब्रूक ने दिल्ली कैपिटल्स के साथ दूसरी बार ऐसा किया, जिसके चलते यह सख्त सजा तय हुई। अब वे अगले दो साल तक न तो आईपीएल खेल पाएंगे और न ही नीलामी में हिस्सा ले सकेंगे। पाकिस्तान सुपर लीग की शुरुआत में ही इस्लामाबाद यूनाइटेड को तब झटका लगा था, जब जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी ने केकेआर के साथ आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद पीएसएल से हटने का फैसला किया।

मुजरबानी को किया रिप्लेस

इस्लामाबाद ने मुजरबानी के रिप्लेसमेंट के तौर पर हैरी ब्रूक को चुना है। ब्रूक कराची लेग से टीम के साथ जुड़ेंगे और प्लेइंग-11 का हिस्सा बनेंगे। हैरी ब्रूक के लिए पाकिस्तान की पिचों पर बल्लेबाजी करना नया नहीं है। उन्होंने 2022 के सीजन में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से तहलका मचाया था। साल 2022 में उन्होंने 10 मैचों में 264 रन बनाए थे, जिसमें एक विस्फोटक शतक भी शामिल था। उनकी वापसी इस्लामाबाद यूनाइटेड के मिडिल ऑर्डर को मजबूती देगी।



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Apple की नौकरी छोड़, बेंगलुरू में ऑटो ड्राइवर बने राकेश बी. पाल, इनकी ‘कहानी’ सुन आप भी हो जाएंगे ‘फैन’


Motivational Stories

oi-Bhavna Pandey

Bangalore Auto driver Inspirational story: एआई (Artificial Intelligence) आने के बाद कॉर्पोरेट कंपनियों में नौकरी करने वालों का भविष्य अब असुरक्षित नहीं लग रहा है। AI के बाद लाखों लोग पहले ही बेरोजगार हो चुके हैं और जो अभी नौकरी में हैं, उन्हें हमेशा नौकरी खोने का खतरा सताता रहता है। ऐसे में बेंगलुरु के राकेश बी. पाल की कहानी से ऐसे लाखों के लोगों के लिए प्रेरणा देने वाली है।

जिस कॉर्पोरेट दुनिया की चमक-धमक, मोटी तनख्वाह और ग्लोबल कंपनियों में नाम कमाने का सपना लाखों युवा देखते हैं वहीं बेंगलुरू निवासी राकेश बी. पाल ने इस सबको ठुकराकर एक अलग राह चुनी। ऐपल जैसी कंपनी के पूर्व कर्मचारी राकेश अब बेंगलुरू में इलेक्ट्रिक ऑटो चला रहे हैं। राकेश बी पाल ने ये रास्‍ता क्‍यों चुना उसे जानकर आप भी इनके फैन हो जाएंगे?

Bangalore Auto driver Rakesh B Pal

राकेश पाल ने क्‍यों छोड़ा कॉर्पोरेट वर्ल्‍ड?

बेंगलुरू के राकेश बी पाल ने अपने करियर की शुरूआत Apple Inc. जैसी दिग्गज कंपनी ने की और बाद में प्रमुख बैंकों और कंप्यूटर निर्माता कंपनियों के साथ भी काम किया। इंस्‍टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में राकेश ने बताते हैं शुरुआत में सब अच्छा लगा, लेकिन जल्द ही मुझे महसूस हुआ कि कॉर्पोरेट दुनिया में लोग अक्सर ‘मैनिपुलेशन’ और निजी स्वार्थ के जाल में फंस जाते हैं। राकेश बताते हैं, “मैं एक पीपल प्लीजर बन गया था, जो दूसरों को खुश करने में खुद को भूल गया था। पास सुविधाएं थीं, लेकिन मन की खुशी नहीं।”

सब-कुछ था लेकिन खुशी नहीं थी! मिला डिप्रेशन

कॉर्पोरेट चुनौतियों के साथ-साथ राकेश की पर्सनल लाइफ में काफी उथल-पुथल रही। बचपन में पिता से मिले अनुभव और मैरिड लाइफ में निराशा ने उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर दिया। स्थिति इतनी बिगड़ी कि उन्हें NIMHANS और विक्टोरिया अस्पताल में इलाज कराना पड़ा, जहां उन्होंने लंबे समय तक एंटी-डिप्रेसेंट दवाइयों का सहारा लिया। राकेश कहते हैं, “मैं घंटों एक ही ख्याल में फंस जाता था और खुद को घर में कैद कर लिया था।”

उबरने के लिए राकेश बी पाल ने चुना ये रास्‍ता

दवाइयों पर निर्भर न रहते हुए, राकेश ने मानसिक मुक्ति का रास्ता चुना। उन्होंने मनोविज्ञान और ‘डार्क ट्रायड’ की अवधारणा (नार्सिसिज्म, मैकियावेलियनवाद और साइकोपैथी) का अध्ययन किया और स्वयं पर काम शुरू किया। इंटरमिटेंट फास्टिंग के जरिए उन्होंने 15 किलो वजन घटाया और बचपन के शौक जैसे मुवा थाई और जू-जित्सू में लौट आए। इस सफर में उन्होंने स्टेट लेवल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल भी जीता।

कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने के बाद किए ये काम

कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने के बाद राकेश ने जीवनयापन के लिए फूड डिलीवरी, बाइक टैक्सी और जिम सहायक जैसे काम किए। कोई काम छोटा नहीं था-हर काम उन्हें असली पहचान के करीब लाता। आज, चार साल के संघर्ष के बाद, वे बेंगलुरु की सड़कों पर गर्व से इलेक्ट्रिक ऑटो चलाते हैं। इसके साथ ही, डांस क्लासेस पढ़ाते हैं और पेंटिंग जैसी शौक पूरी कर रहे हैं, एक ऐसा जीवन जिसमें स्वतंत्रता और संतोष का मेल है।



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RCB के खिलाड़ी ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, IPL में खेलने से रोकने पर कर दिया बोर्ड पर केस


Cricket

oi-Naveen Sharma

IPL 2026: आईपीएल 2026 के बीच क्रिकेट जगत से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के तेज गेंदबाज नुवान तुषारा ने क्रिकेट बोर्ड के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। तुषारा ने बोर्ड को कोर्ट में घसीट लिया है क्योंकि उन्हें आईपीएल में खेलने के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं दिया गया।

इस विवाद की मुख्य जड़ बोर्ड द्वारा आयोजित फिटनेस टेस्ट है, जिसमें तुषारा फेल हो गए थे। श्रीलंका बोर्ड के नए नियमों के अनुसार, जो खिलाड़ी फिटनेस टेस्ट पास नहीं करेगा, उसे विदेशी लीग में खेलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस वजह से अब मामला कोर्ट में चला गया है, तुषारा अपने बोर्ड के खिलाफ जंग पर उतर आए हैं।

rcb nuwan thushara

नुवान तुषारा ने बोर्ड के इस फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा है कि उनका सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट 31 मार्च को ही खत्म हो चुका था। ऐसे में बोर्ड उन्हें फिटनेस का हवाला देकर आईपीएल जैसे बड़े मंच पर खेलने से नहीं रोक सकता। तुषारा के मुताबिक, बोर्ड के इस अड़ियल रवैये के कारण उन्हें आरसीबी के साथ हुए 1.6 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लेने से इनकार

अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए इस तेज गेंदबाज ने अब सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लेने से भी इनकार कर दिया है, जिससे उनके अंतरराष्ट्रीय करियर पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कोर्ट तक पहुंचने के बाद अब मामला काफी गंभीर हो चला है।

लसित मलिंगा जैसे गेंदबाजी एक्शन के लिए मशहूर तुषारा आरसीबी के गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा हैं। आरसीबी ने सीजन का अपना पहला मैच खेल लिया है, लेकिन तुषारा अब भी श्रीलंका में ही फंसे हुए हैं और कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

कोर्ट के फैसले के ऊपर रहेंगी नजरें

अगर कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिलती है, तो यह न सिर्फ तुषारा के लिए व्यक्तिगत घाटा होगा, बल्कि आरसीबी के लिए भी एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। फिलहाल, पूरे क्रिकेट जगत की नजरें अब इस अदालती फैसले पर टिकी हैं।



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CM भगवंत मान ने गांव चीमा में संत अतर सिंह जी महाराज अस्पताल का किया उद्घाटन, हाई-क्‍वालिटी हेल्‍थ सर्विस


Punjab

oi-Bhavna Pandey

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज गांव चीमा में संत अतर सिंह जी महाराज अस्पताल का उद्घाटन किया। उल्लेखनीय है कि 11.70 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित और 30 बिस्तरों वाला यह अत्याधुनिक अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में हजारों लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए शुरू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि यह अस्पताल न केवल 15 गांवों के लगभग 50 हजार निवासियों को लाभ पहुंचाएगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों की लगभग 35 से 40 हजार आबादी को भी किफायती और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराएगा।

CM Bhagwant Mann

अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का जमीनी स्तर पर जायजा लिया, मरीजों का हालचाल पूछा और उनके परिवारों से भी बातचीत की।

अस्पतालों की बदलती तस्वीर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को अधिकतर संगरूर, पटियाला और लुधियाना रेफर किया जाता था, लेकिन अब मरीज स्थानीय स्तर पर ही आधुनिक मशीनों और समर्पित इमरजेंसी तथा जच्चा-बच्चा वार्डों से सुसज्जित इस अस्पताल में इलाज करवा सकेंगे।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “संत बाबा अतर सिंह के नाम पर मेडिकल कॉलेज का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा और राज्य सरकार ने इसके लिए सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देना और लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है। इस परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए राज्य सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।”

इस नए अस्पताल के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “आज संत अतर सिंह जी महाराज के जन्म स्थान गांव चीमा में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर का उद्घाटन किया गया है। संत अतर सिंह जी महाराज ने शिक्षा और समाज सेवा में अमूल्य योगदान दिया और उनके सम्मान में इस केंद्र का नाम रखा जाना गर्व की बात है।” गौरतलब है कि 11.75 करोड़ रुपये की लागत वाला यह केंद्र 30 बिस्तरों की क्षमता वाला होगा।

इस परियोजना के बारे में विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह केंद्र 1975 में 10 बिस्तरों के साथ स्थापित किया गया था, जिसे बाद में 20 बिस्तरों तक बढ़ाया गया। अब क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए इसे 30 बिस्तरों तक विस्तारित किया गया है। लगभग 50 हजार लोगों को आपातकालीन और विशेष चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाला यह केंद्र क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा। सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और गंभीर बीमारियों वाले मरीजों को यहां आपातकालीन देखभाल मिलेगी और सर्जिकल प्रक्रियाओं की सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।”

अस्पताल में उपलब्ध डाक्टरी सेवाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “ईएनटी और दंत सेवाओं के साथ-साथ बच्चों के इलाज के लिए बाल रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध होंगे। मुफ्त जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य सेवाएं, एक्स-रे और रक्त जांच की सुविधाएं भी दी जाएंगी। इसके अलावा नशा मुक्ति के लिए भी यहां उपचार उपलब्ध होगा।”

नशे के दुष्प्रभावों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने नशों को कानूनी मान्यता देने के विचार को खारिज करते हुए कहा, “यह तर्कहीन है क्योंकि एक नशा दूसरे की जगह नहीं ले सकता। इसके बजाय युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए। राज्य सरकार ने पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए पहले ही कई पहल शुरू की हैं।”

राज्य में चल रही नशा विरोधी मुहिम के सकारात्मक परिणामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “युद्ध नशों के विरुद्ध अभियान ने राज्य में नशे के कारोबार की कमर तोड़ दी है। नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, उनकी संपत्तियां जब्त की गई हैं और सप्लाई चेन को तोड़ा गया है। ‘आप’ सरकार जल्द ही उन बहादुर लोगों को सम्मानित करेगी जिन्होंने नशा तस्करों के खिलाफ अहम जानकारी दी।”

प्रशासन की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “‘आप’ सरकार ने हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे बड़े बदलाव आए हैं। जनता के टैक्स का पैसा जनता के हित में खर्च किया जा रहा है। विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के माध्यम से यह पैसा लोगों तक वापस पहुंच रहा है।

सरकार ने 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली, 65 हजार से अधिक युवाओं को बिना भ्रष्टाचार के रोजगार, बेहतर सड़कें और बंद किए गए टोल प्लाजा से रोजाना 70 लाख रुपये की बचत सुनिश्चित की है और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहे हैं।”

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक अमन अरोड़ा तथा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह भी उपस्थित थे।



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ब्लू-आइड बॉय से साइडलाइन तक: राघव चड्ढा की बदलती राजनीति की कहानी


Opinion

oi-Divyansh Rastogi

Raghav Chadha Sidelined: आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव आया है। पार्टी ने अपने युवा चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता (Deputy Leader) के पद से हटा दिया है। उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक कुमार मित्तल को नया उपनेता नियुक्त कर दिया गया है।

ऐसा लगता है कि कल की बात हो। आंदोलन के बाद पार्टी जनलोकपाल का आंदोलन केंद्र के विरोध का आंदोलन बन चुका था। हर दिन एक-एक करके केंद्र के मंत्रियों से लेकर देश के बड़े उद्योगपतियों के खिलाफ आम आदमी पार्टी मोर्चा खोले हुए थी। पर जब भी आर्थिक आंकड़े की बात हो या फिर कोई पॉलिसी की, एक स्मार्ट सा यंग लड़का बड़े नेताओं के पीछे-पीछे कॉलेज स्टूडेंट्स की तरफ फाइल लेकर आगे-पीछे करता रहता। बाद के दिनों में प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद मीडिया के क्वेरी को समझाते रहते। इसके बाद जल्द ही पार्टी के प्रवक्ता बनने से लेकर टीवी डिबेट में पार्टी को डिफेंड करने से लेकर पार्टी के रणनीति के कोर हिस्से में चले गए।

Raghav Chadha Sidelined

एक चेहरा ऐसा था, जो हमेशा बड़े नेताओं के पीछे-पीछे फाइल लिए नजर आता था। स्मार्ट, पढ़ा-लिखा और हर मुद्दे पर तैयार, ये हैं राघव चड्ढा। जनलोकपाल आंदोलन के बाद जब पार्टी केंद्र सरकार और बड़े उद्योगपतियों के खिलाफ आक्रामक रुख में थी, तब राघव बैकग्राउंड में रहकर डेटा और पॉलिसी की समझ के साथ अपनी पहचान बना रहे थे। धीरे-धीरे वही लड़का प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मीडिया के सवालों को समझाने लगा और फिर पार्टी का ऑफिशियल प्रवक्ता बन गया। टीवी डिबेट्स में आक्रामक अंदाज में पार्टी का पक्ष रखने वाले राघव जल्द ही AAP की रणनीतिक टीम का अहम हिस्सा बन गए।

जब पार्टी की दिल्ली में दूसरी बार सरकार बनी तो दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष बनाए गए। इसके साथ ही पार्टी के मुखिया और उस वक्त के तात्कालिक उपमुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सबसे खास सिपहसालारों में नजर आने लगे। एक दौर ये भी जब पार्टी के पुराने साथी प्रशांत भूषण से लेकर कुमार विश्वास तक एक-एक कर के जा रहे थे, तब तमाम मौकों पर अरविंद केजरीवाल और उनकी नीति को बढ़-चढ़कर डिफेंड करने वाले मुखर वक्ता के तौर पर उभरकर सामने आए राघव चढ्ढा।

पार्टी ने 2019 में राघव चड्ढा को साउथ दिल्ली से लोकसभा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ाया पर रमेश बिधूड़ी से चुनाव हार गए। इसके बावजूद भी राघव का बढ़ता कद उनको दिल्ली के अलावा बाहर के राज्यों में भी पार्टी का कामकाज संभालने की जिम्मेदारी मिलनी शुरू हो गई। 2017 के विधानसभा चुनाव में जब संजय सिंह की नेतृत्व में पंजाब में पार्टी को सफलता नहीं मिली तो पार्टी ने इसके बाद राघव चढ्ढा को पंजाब की जिम्मेदारी दी। इधर राघव ने अपने आप को चुनावी राजनीति के भी दांव आजमाने के लिए 2020 में दिल्ली के राजेंद्र नगर से विधायक चुने गए। पर असल जीत उनको पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव में मिली पर उनकी पार्टी ने भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार बनाई। जीत का सेहरा राघव चड्ढा के माथे चढ़ा और इसका फल भी उनको मिला जब पार्टी ने 2022 में उनको पंजाब से राज्यसभा के लिए मनोनीत किया।

राघव की गिनती पार्टी के टॉप के नेताओं में होने लगी। राज्यसभा में पहले से मौजूद दिल्ली से राज्यसभा के सांसद संजय सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राघव सरकार को घेरते नजर आए। वहीं पंजाब में भगवंत मान की सरकार के दिल्ली से भेजे गए रिमोट कंट्रोल के तौर पर काम करने का आरोप भी लगा। कांग्रेस-अकाली दल समेत राजनीति दलों ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा दिल्ली के उस वक्त के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इशारे पर पूरी सरकार का न केवल संचालन कर रहे हैं बल्कि मुख्यमंत्री सचिवालय में बैठकर फाइलों की निगरानी और अपने मुताबिक बदलाव करने का निर्देश भी दे रहे हैं। हालांकि पार्टी से लेकर खुद राघव चड्ढा इस बात से इनकार करते रहे, पर इतना जरूर है कि उनके काफिले में पंजाब पुलिस का कार्केट से लेकर दिल्ली के कोपरनिकस मार्ग स्थित पंजाब भवन में उनका पार्लियामेंट ऑफिस, उनके पीआर टीम के लोगों का बैठना, साथ में उनकी खुद की पीआर टीम का पार्लियामेंट के आकर मीडिया वालों के वन-टू-वन करना, कई बार पंजाब भवन में मीडिया से इंटरेक्शन इस बात की गवाही देते थे कि ये एक आम राज्यसभा सांसद नहीं बल्कि सरकार में गहरी पकड़ रखने वाले सांसद का प्रोटोकॉल हैं।

खैर, समय बीतता गया। इधर जब दिल्ली में पार्टी के एक-एक कर से सभी बड़े नेता एक्साइज घोटाले में जेल गए तो पार्टी को उम्मीद थी कि पार्टी ने जिनको इतना कुछ दिया, वो पार्टी के बड़े नेताओं के समर्थन में आगे केंद्र सरकार का विरोध करेंगे। साथ में दुख के घड़ी में दिल्ली में कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने के लिए दिल्ली में रहेंगे। पर उस वक्त आंख के ईलाज कराने के नाम पर राघव लगातार दिल्ली से बाहर रहे। यही नहीं, सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले राघव वहां भी चुपचाप नजर आए। बिना नाम लिए पार्टी के भीतर दबे रूप से आवाज भी आई कि वो लोग कहां हैं जिनको पार्टी ने सबकुछ दिया। ये भी कहा गया कि पंजाब चुनाव में फंडिंग से लेकर दिल्ली जल बोर्ड में हुए बिलिंग के घपले के चक्कर में कहीं राघव ने पाला तो नहीं बदल लिया। इधर दिल्ली से राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल वाले मामले पर भी राघव अलग नजर आए।

बाद में राज्यसभा में पार्टी की लाइन से ज्यादा राघव खुद की ब्रीडिंग के तहत आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाकर काफी चर्चा में रहे। मामला एयरपोर्ट पर मिलने वाले महंगे स्नेक्स का हो या फिर ट्रेनों के बेहतर सुविधा से लेकर बढ़ते एजुकेशन खर्च का मुद्दा। राघव ने अपने आप को राज्यसभा में मिडिल क्लास की आवाज बनकर अपनी एक अलग ब्रांडिंग की। हाल के दिनों में राघव पार्टी के किसी भी बड़े एक्टिविटी में भी नज़र नहीं आए। पर दिल्ली एक्साइज पॉलिसी में केजरीवाल समेत नेताओं को कोर्ट से राहत मिली तब भी पार्टी में हो रहे जश्न में कहीं नजर नहीं आए। साथ ही सोशल मीडिया में भी कहीं नजर नहीं आए। ऐसा नहीं कि सोशल मीडिया से उन्होंने दूरी बना ली हो। अपनी खुद की ब्रांडिंग से लेकर एयरपोर्ट्स पर खोले नए उड़ान कैफे पर खुद चाय पीकर खुद को तो प्रमोट करते नजर आए। अपनी निजी जिंदगी को लेकर गाहे-बगाहे सोशल मीडिया पोस्ट के सहारे नजर आए पर पार्टी को डिफेंड करने से लेकर पार्टी लाइन को लेकर सरकार को घेरते कम दिखे हैं।

टर्निंग पॉइंट तब आया जब दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले में पार्टी के बड़े नेता जेल जाने लगे। उस वक्त पार्टी को उम्मीद थी कि राघव खुलकर सामने आएंगे, लेकिन वे आंखों के इलाज के नाम पर लंबे समय तक दिल्ली से दूर रहे। सोशल मीडिया पर भी उनकी चुप्पी ने कई सवाल खड़े किए। पार्टी के भीतर भी धीरे-धीरे ये चर्चा होने लगी कि जिन लोगों को पार्टी ने आगे बढ़ाया, वे मुश्किल वक्त में कहां हैं। स्वाति मालीवाल विवाद हो या अन्य राजनीतिक घटनाक्रम, राघव का रुख अलग नजर आने लगा। हाल के समय में वे पार्टी के बड़े कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों से भी दूर दिखे। यहां तक कि जब कोर्ट से राहत मिलने के बाद पार्टी जश्न मना रही थी, तब भी उनकी गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि, अपनी पर्सनल ब्रांडिंग और अलग मुद्दों पर वे लगातार एक्टिव रहे।

और आखिरकार वही हुआ जिसकी आशंका थी। पार्टी ने उनको अपनी पार्टी के राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया और इनकी सूचना सचिवालय को दे दी। इससे ज्यादा पार्टी कर ही क्या सकती है। पहले ही दिल्ली से सांसद स्वाति मालीवाल बगावत कर चुकी हैं। ऐसे राघव चड्ढा की बारी थी। खैर बतौर सांसद राघव चड्ढा को बोलने की आजादी तो होगी पर पार्टी के कोटे से मिलने वाले समय और मौके का फायदा नहीं मिल पाएगा। पर ये सब इतनी जल्दी होगा उम्मीद नहीं थी। खैर कहावत है कि जितना जल्दी मिलता है वो खत्म भी उतना ही जल्दी होता है।

कभी जो पार्टी के सबसे भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते थे, आज वही धीरे-धीरे साइडलाइन होते नजर आ रहे हैं। राजनीति में उभरना जितना तेजी से होता है, उतनी ही तेजी से हालात बदल भी जाते हैं, राघव चड्ढा इसका ताजा उदाहरण हैं। ब्लू-आइड बॉय की छवि वाले इस युवा नेता ने पार्टी के भीतर जो तेजी से तरक्की की, उसी तेजी से आज साइडलाइन पर आ गए हैं। पार्टी के पुराने साथियों के जाने के बाद राघव ने जो जगह भरी, वो जगह आज खाली पड़ गई है। पर ये सब इतनी जल्दी होगा, उम्मीद नहीं थी। खैर कहावत हैं कि जितना जल्दी मिलता हैं, वो खत्म भी उतना ही जल्दी होता हैं। कभी आंखों के तारे रहे, आज आंखों में खटकने लगे।

लेखक के निजी विचार हैं। इसे ओपिनियन के तौर पर लिया जाए।

कुन्दन सिंह
डेप्युटी एडिटर, वन इंडिया



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IPL 2026 के बीच क्रिकेट जगत पसरा मातम, सचिन के पहले शतक के ‘असली हीरो’ का निधन! शराब ने डुबोया करियर


Cricket

oi-Amit Kumar

IPL 2026, Anil Gurav Death: आईपीएल 2026 के शोर में क्रिकेट फैंस इन दिनों डूबे हुए हैं। इस बीच एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। सचिन तेंदुलकर के सीनियर और दिग्गज कोच रमाकांत आचरेकर के सबसे प्रतिभाशाली शिष्य रहे अनिल गुरव का 31 मार्च को 61 वर्ष की आयु में निधन हो गया। नालासोपारा की एक 200 स्क्वायर फीट की जर्जर खोली में रहने वाले गुरव ने गुमनामी और अभावों के बीच अंतिम सांस ली।

सचिन तेंदुलकर ने गुरव के बल्ले से लगाया था पहला शतक (IPL 2026, Anil Gurav Death)

आज सचिन तेंदुलकर के नाम 100 अंतरराष्ट्रीय शतक हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि सचिन ने अपना पहला शतक अनिल गुरव के ही ‘SG’ बल्ले से लगाया था। गुरव उस समय सत्तमान क्लब के कप्तान थे। सचिन उनकी बल्लेबाजी के इतने मुरीद थे कि उन्हें ‘सर’ कहकर बुलाते थे। आचरेकर सर अक्सर सचिन और विनोद कांबली को गुरव के कट और हुक शॉट देखने की सलाह देते थे।

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कहा जाता था ‘मुंबई का विवियन रिचर्ड्स’

अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के कारण उन्हें ‘मुंबई का विवियन रिचर्ड्स’ कहा जाता था। जानकारों का मानना था कि सुनील गावस्कर के बाद मुंबई से निकलने वाला अगला बड़ा नाम अनिल गुरव ही होंगे। गुरव के पतन की कहानी किसी फिल्मी त्रासदी से कम नहीं है। जब उनका करियर परवान चढ़ रहा था, उनका छोटा भाई अजीत मुंबई के एक गैंग का शार्प शूटर बन गया।

शराब ने डुबोया करियर

पुलिस अजीत की तलाश में अक्सर अनिल को उठा ले जाती। उन्हें थाने में उल्टा लटकाकर पीटा जाता था। प्रताड़ना इतनी भयानक थी कि कई बार वे मैदान पर खड़े होने की स्थिति में भी नहीं रहते थे। पुलिस के डर से वे अपना घर छोड़कर नालासोपारा चले गए, लेकिन वहां भी खाकी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। इसी मानसिक तनाव ने उन्हें शराब की लत की ओर धकेल दिया।



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Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 2 April: आज के मैच का टॉस कौन जीता- KKR vs SRH


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oi-Naveen Sharma

Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta: आईपीएल 2026 का रोमांच लगातार बढ़ता जा रहा है और अब बारी है टूर्नामेंट के छठे मुकाबले की, जहां केकेआर का सामना सनराइजर्स हैदराबाद से है। दोनों ही टीमें इस मैच में जीत की तलाश में उतरेंगी, क्योंकि यह इस सीजन में उनका दूसरा मुकाबला है और शुरुआत कुछ खास नहीं रही है। केकेआर के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला लिया।

केकेआर को अपने पिछले मैच में मुंबई इंडियंस के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था, वहीं सनराइजर्स हैदराबाद को भी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के सामने टिक नहीं पाई। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह मुकाबला काफी अहम हो जाता है, जहां वे जीत के साथ वापसी करना चाहेंगी।

Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta

हालांकि कोलकाता के लिए राहत की बात यह है कि यह मुकाबला उनके घरेलू मैदान ईडन गार्डंस में खेला जाएगा। घरेलू दर्शकों का समर्थन और पिच की बेहतर समझ के चलते केकेआर इस मैच में बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी, जबकि हैदराबाद की टीम भी वापसी के इरादे से पूरी ताकत झोंक देगी।

अजिंक्य रहाणे और ईशान किशन दोनों कप्तानों को देखा जाए, तो रहाणे को कप्तानी का ज्यादा अनुभव है। हालांकि हैदराबाद के पास जिताने की क्षमता वाले कई खिलाड़ी हैं। ट्रेविस हेड, अभिषेक शर्मा की ऊपर ज्यादा निर्भरता रहेगी। दोनों की बैटिंग चल गई, तो केकेआर के लिए मुश्किल हो सकती है।

कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) की प्लेइंग इलेवन

अजिंक्य रहाणे (कप्तान), कैमरून ग्रीन, अंगकृष रघुवंशी (विकेटकीपर), रिंकू सिंह, रमनदीप सिंह, अनुकूल रॉय, सुनील नरेन, वरुण चक्रवर्ती, वैभव अरोड़ा, कार्तिक त्यागी, ब्लेसिंग मुजरबानी।

सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) की प्लेइंग इलेवन

अभिषेक शर्मा, ट्रेविस हेड, ईशान किशन (कप्तान/विकेटकीपर), हेनरिक क्लासेन, अनिकेत वर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, सलिल अरोड़ा, हर्ष दुबे, शिवांग कुमार, जयदेव उनादकट, डेविड पेन।



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ईशान किशन को SRH का कप्तान बनाने से खुश नहीं हैं युवराज सिंह, टीम के फैसले पर उठाया सवाल


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oi-Naveen Sharma

Ishan Kishan and Yuvraj Singh: सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने पैट कमिंस की गैरमौजूदगी में जब ईशान किशन को टीम की कमान सौंपी, तो उन्हें उम्मीद रही होगी कि फैंस इस फैसले का स्वागत करेंगे। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और सिक्सर किंग युवराज सिंह को शायद इस फैसले से थोड़ी शिकायत है।

स्पोर्ट्स तक को दिए एक बेबाक इंटरव्यू में युवराज ने सीधे तौर पर हैदराबाद मैनेजमेंट को आड़े हाथों लिया है। युवराज सिंह के अनुसार इस ईशान किशन की जगह अभिषेक शर्मा को सनराइजर्स हैदराबाद टीम की कप्तानी सौंपनी चाहिए थी।

ishan kishan

युवराज सिंह ने क्या कहा?

युवराज सिंह का मानना है कि अभिषेक शर्मा इस जिम्मेदारी के लिए सबसे सही और प्रबल दावेदार थे। अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए युवी ने कहा, “अभिषेक शर्मा ने पिछले एक साल में असाधारण प्रदर्शन किया है। वह पिछले 7 सालों से एक ही फ्रेंचाइजी (SRH) के लिए खेल रहे हैं और लगातार अच्छा कर रहे हैं। इसके अलावा वह पंजाब टीम की कप्तानी भी कर रहे हैं, इसके बाद भी उनको कप्तानी नहीं दी गई।”

युवराज के इस बयान से साफ है कि वे ईशान किशन को कप्तानी मिलने से खुश नहीं हैं। अपने पिता की बयानबाजी को लेकर भी युवी ने दमदार बात कही। उन्होंने कहा कि मैं अपने पापा को समझाता हूं कि वह जो कह रहे हैं, उन बातों में सच्चाई नहीं है लेकिन वह नहीं मानते।

किशन को कप्तानी मिलने का कारण?

गौरतलब है कि ईशान किशन को आईपीएल के शुरुआती मैचों के लिए हैदराबाद की कमान थमाई गई है। पैट कमिंस ठीक होकर जब तक वापस आ जाएंगे, तो टीम को लीड करेंगे। हालांकि ईशान किशन ही इस कप्तानी के दावेदार थे। हाल ही में झारखंड को उन्होंने अपनी कप्तानी में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब दिलाया था। कप्तानी के साथ बल्ले से भी ईशान किशन ने धमाका किया था, इस वजह से हैदराबाद में उनको कप्तानी मिली।



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