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‘Goa में AAP को मौका दें, 1 महीने में बिजली FREE कर देंगे’, Arvind Kejriwal का तगड़ा वादा


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Goa Elections 2027: गोवा के पोंडा उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपना दम दिखाया। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार (1 अप्रैल 2026) को पोंडा में पार्टी प्रत्याशी गीतेश नाइक के समर्थन में ‘परिवर्तन सभा’ को संबोधित किया। उन्होंने गोवा की जनता से सीधा आह्वान किया- 2027 के विधानसभा चुनाव में AAP को एक मौका दो, सरकार बनते ही एक महीने में पूरे गोवा में बिजली मुफ्त कर देंगे।

केजरीवाल ने कहा, ‘दिल्ली और पंजाब में AAP सरकार ने घर का बिजली बिल जीरो कर दिया है। गोवा में भी यही होगा। पूरे देश में सिर्फ दो जगह मुफ्त बिजली मिलती है- दिल्ली और पंजाब- और वो भी AAP ने किया है।’

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14 साल की BJP सरकार पर केजरीवाल का तीखा हमला

केजरीवाल ने BJP पर जमकर निशाना साधा-

  • 14 साल से गोवा में BJP की सरकार है, लेकिन लोगों को न शिक्षा मिली, न स्वास्थ्य, न बिजली, न साफ पानी।
  • सिर्फ लूट का काम किया गया।
  • पोंडा में कूड़ा-कचरा हर तरफ बिखरा पड़ा है, सड़कें टूटी हुई हैं, स्ट्रीट लाइटें खराब हैं।
  • पीने के पानी में कीड़े पड़ रहे हैं।
  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर एक साल से बंद पड़ा है।
  • ID अस्पताल में मशीनें नहीं चलतीं, दवाइयां नहीं मिलतीं, सिर्फ GMC रेफर कर देते हैं।

उन्होंने पूछा, ‘मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत एक गिलास पानी पीकर दिखाएं जिसमें कीड़े हैं? 14 साल में साफ पानी भी नहीं दे पाए?’

कांग्रेस प्रत्याशी पर भी सवाल

केजरीवाल ने दावा किया कि पोंडा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी केतन भाई के साथ BJP की सेटिंग है। उन्होंने कहा कि केतन भाई BJP टिकट मांग-मांगकर थक गए थे। BJP ने उन्हें कांग्रेस टिकट दिलवा दी ताकि जीतकर बाद में BJP में आ जाएं। चुनाव जीतोगे तो भी विधायक हमारा ही बनेगा।

AAP के गोवा विधायकों का उदाहरण

केजरीवाल ने अपनी पार्टी के दो गोवा विधायकों का जिक्र कर लोगों को आकर्षित करने की कोशिश की:

  • वेंजी वीगास (बेनौलिम): कोई बड़ी गाड़ी नहीं, छोटे घर में रहते हैं। अपनी तनख्वाह से 450 मोतियाबिंद के ऑपरेशन कराए। हर हफ्ते मुफ्त क्लिनिक चलाते हैं। 200 से ज्यादा युवाओं को नौकरी दिलाई।
  • क्रूज सिल्वा: खेती-बाड़ी के क्षेत्र में अच्छे काम किए।
  • केजरीवाल बोले, ‘ये दोनों आम आदमी हैं। राजनेतिक परिवार से नहीं आए। अपनी तनख्वाह से लोगों की सेवा करते हैं। BJP वाले बड़े-बड़े मॉल, गाड़ियां और स्विस बैंक में पैसा भरते हैं।’

BJP पार्षद के बेटे पर गंभीर आरोप

केजरीवाल ने एक संवेदनशील मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि BJP पार्षद के बेटे पर 30 छोटी-छोटी बच्चियों के साथ कुकर्म का आरोप है, लेकिन पूरी BJP सरकार उसे बचाने में लगी हुई है। प्रदेश अध्यक्ष बेटे के पिता के साथ हमदर्दी जता रहे हैं, लेकिन पीड़ित बच्चों के परिवारों के प्रति कोई संवेदना नहीं।

केजरीवाल का आखिरी आह्वान

‘पोंडा की जनता ने पहले MGP, कांग्रेस और BJP को मौका दिया। अब सिर्फ 8 महीने बाकी हैं। इस बार झाड़ू को मौका दो। अगर हम काम नहीं किए तो अगले चुनाव में बदल देना। लेकिन एक बार ट्राई तो करो।’

9 अप्रैल को पोंडा उपचुनाव है। केजरीवाल ने साफ कहा- इस बार AAP को जिताओ, 2027 में गोवा की सत्ता सौंपी और बिजली फ्री करवा लो।

आप क्या सोचते हैं?

क्या गोवा की जनता 2027 में AAP को मौका देगी और बिजली मुफ्त की उम्मीद करेगी? या BJP के 14 साल पुराने रिकॉर्ड पर भरोसा रखेगी? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं। अपडेट्स के लिए बने रहें!



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IndiGo 2 अप्रैल से फ्यूल चार्ज बढ़ाने का किया ऐलान, कितना महंगा हो जाएगा एयर टिकट?


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oi-Bhavna Pandey

IndiGo increase fuel Charges: जेट ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के चलते इंडिगो ने ऐलान किया कि 2 अप्रैल से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन शुल्क बढ़ जाएगा। इसका असर सीधे हवाई किराए पर पड़ेगा, लेकिन एयरलाइन ने कहा कि उन्होंने यात्रियों पर बोझ कम रखने की कोशिश की है।

कितना महंगा हो जाएगा किराया?

नई दरों के अनुसार, घरेलू फ्लाइट्स में दूरी के हिसाब से ईंधन शुल्क ₹275 से ₹950 तक और अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर ₹900 से ₹10,000 तक होगा। इंडिगो के मुताबिक, पिछले महीने एटीएफ की कीमतों में दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में अब एटीएफ ₹1,04,927 प्रति किलोलीटर और मुंबई में ₹98,247 प्रति किलोलीटर हो गई है।

IndiGo increase fuel charges

यात्रियों और एयरलाइन दोनों के लिए राहत

हालांकि ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, इंडिगो ने पूरी भरपाई के लिए सिर्फ मामूली वृद्धि की है, ताकि टिकट बहुत महंगे न हो जाएँ। इस कदम से अधिकांश यात्रियों के लिए हवाई किराया ज्यादा बढ़ने से बचा रहेगा, जबकि गैर-अनुसूचित और चार्टर उड़ानों के लिए असर थोड़ी ज्यादा गंभीर हो सकता है।



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Kal Ka Mausam: Delhi-UP समेत इन राज्यों में तूफानी बारिश का IMD अलर्ट! 2–5 अप्रैल तक कहां-कहां आंधी-ओलावृष्टि?


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oi-Divyansh Rastogi

Kal Ka Mausam, 2 April 2026, Thursday, Ekadashi Weather Alert: अप्रैल शुरू होते ही जहां लोग तेज गर्मी की उम्मीद कर रहे थे, वहीं मौसम ने फिर से करवट ले ली है। देश के कई हिस्सों में बारिश, आंधी और बिजली का सिलसिला जारी है, और आने वाले कुछ दिन भी राहत नहीं देने वाले हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 2 अप्रैल से लेकर 6-7 अप्रैल तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम काफी एक्टिव रहेगा।

अगर आप कहीं बाहर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले ये अपडेट जरूर जान लें। अगले 5-6 दिनों तक देश के बड़े हिस्से में बारिश, आंधी-बिजली और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की वजह से उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में मौसम खराब रहेगा। अगर आप दिल्ली, यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश या पूर्वोत्तर जा रहे हैं तो प्लान चेक कर लें।

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IMD Weather Alert: 2 अप्रैल से कहां-कहां बारिश-आंधी का खतरा?

  • उत्तर-पश्चिम भारत (Delhi-UP, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, HP, UK, J&K): 2 से 5 अप्रैल तक हल्की से मध्यम बारिश। 3-4 अप्रैल को ओलावृष्टि की सबसे ज्यादा संभावना। कश्मीर में 3 अप्रैल को भारी बारिश संभव।
  • मध्य भारत (मध्य प्रदेश, विदर्भ, महाराष्ट्र): 2 से 6 अप्रैल तक तेज हवाओं के साथ बारिश। 3 अप्रैल तक ओलावृष्टि का अलर्ट।
  • पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल): उमस भरा मौसम के साथ आंधी-बारिश। 3-4 अप्रैल को गस्ती हवाएं।
  • पूर्वोत्तर राज्य (असम, मेघालय, अरुणाचल, सिक्किम आदि): भारी बारिश की चेतावनी। अरुणाचल में 3-7 अप्रैल तक भारी बारिश जारी रह सकती है।

पीक एक्टिविटी: 3 और 4 अप्रैल को मौसम सबसे खराब रहेगा। इन दो दिनों में ओलावृष्टि, तेज आंधी और बिजली गिरने की सबसे ज्यादा घटनाएं हो सकती हैं।

तापमान पर क्या असर पड़ेगा?

  • उत्तर-पश्चिम भारत: 2 अप्रैल तक दिन का तापमान 2-4°C बढ़ सकता है, लेकिन 3-4 अप्रैल को 2-4°C की गिरावट। 6 अप्रैल तक सामान्य से कम तापमान रहेगा।
  • मध्य भारत: 1-2 अप्रैल को 2-3°C बढ़ोतरी, फिर 2-4 अप्रैल को गिरावट।
  • पूर्वी भारत: 4 अप्रैल तक 4-6°C बढ़ोतरी, उसके बाद गिरावट।
  • पूर्वोत्तर: 3-5 अप्रैल को 3-4°C बढ़ सकता है।

तापमान में क्या बदलाव होगा?

उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 2 से 4 अप्रैल के बीच तापमान 2 से 4 डिग्री तक गिर सकता है। इसके बाद 5 से 7 अप्रैल के बीच तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा, लेकिन यह सामान्य या सामान्य से कम ही रहेगा। पूर्वी भारत में पहले तापमान बढ़ेगा, फिर 5 अप्रैल के बाद उसमें हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है।

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पिछले 24 घंटे में क्या हुआ?

  • भारी बारिश: असम, मेघालय, त्रिपुरा, सिक्किम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, पश्चिम बंगाल और दक्षिणी कर्नाटक।
  • ओलावृष्टि: हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, यूपी, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश और झारखंड।
  • 5 अप्रैल के बाद: उत्तर-पश्चिम में बारिश की तीव्रता कम होगी, लेकिन 7 अप्रैल को एक नया पश्चिमी विक्षोभ फिर सक्रिय हो सकता है।

सावधानी बरतें

  • फसल वाले किसान ओलावृष्टि से सतर्क रहें।
  • दोपहिया वाहन चलाने वाले आंधी-बारिश में सावधानी बरतें।
  • बाहर निकलने से पहले IMD ऐप या वेबसाइट चेक करें।

मौसम पूरी तरह बदल गया है। गर्मी की जगह अचानक ठंड और बारिश का दौर चल रहा है। 2 अप्रैल से 4 अप्रैल तक सबसे ज्यादा सतर्क रहें।



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VIDEO: तेज गेंदबाज या जादुई स्पिनर? लुंगी एनगिडी की रहस्यमयी गेंद ने उड़ाए पूरन के डंडे, वायरल हुआ वीडियो



LSG vs DC: कैसे दिल्ली कैपिटल्स के लुंगी एनगिडी ने अपनी 112kmph वाली जादुई धीमी गेंद से निकोलस पूरन को बोल्ड किया। गेंद ऑफ-स्पिनर की तरह अंदर आई और बल्लेबाज देखता ही रह गया।



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Khar Island Explained: US क्यों नहीं कर पाएगा खार्ग आईलैंड पर कब्जा? 3 मुसीबतें एकदम रेडी, रूस भी कर चुका गलती


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oi-Siddharth Purohit

Khar Island Explained: अमेरिका-ईरान की जंग में ईरान का खार्ग आईलैंड एक बड़ा कीवर्ड बनकर सामने आया है। यहां अमेरिका का लालच और ईरान के हित दोनों साफ-साफ दिखते हैं। लेकिन इस जंग के बाद इस पर किसका कब्जा होगा, इस बारे में एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग है। कई एक्सपर्ट मानते हैं कि ईरान के सख्त रुख और मजबूत जवाबी क्षमता को देखते हुए यह ऑपरेशन कितना सफल नहीं होगा, कुछ कहते हैं कि अमेरिका ऐसा कर सकता है तो वहीं कुछ का मानना है कि कब्जा कर भी लिया तो टिके रहना मुश्किल होगा क्योंकि ईरान भी तो जवाब देगा। आइए इसे आसानी से समझते हैं।

रूस की गलती से सीखे अमेरिका

इस मुद्दे को समझने के लिए एक पुराना उदाहरण दिया जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर में स्नेक आइलैंड (ज़मीनी द्वीप) को बहुत महत्वपूर्ण माना गया था। फरवरी 2022 में रूस ने इस द्वीप पर कब्जा कर लिया था, लेकिन यूक्रेन के लगातार हमलों के कारण जून 2022 के अंत में उसे इसे छोड़ना पड़ा।

Khar Island Explained

छोटे द्वीप पर कब्जा रखना क्यों मुश्किल होता है?

स्नेक आइलैंड पर कब्जा बनाए रखना रूस के लिए बहुत मुश्किल साबित हुआ। उसे सैनिकों, एयर डिफेंस सिस्टम और सप्लाई जहाजों में भारी नुकसान उठाना पड़ा। आखिरकार रूस को पीछे हटना पड़ा, जो उसके लिए एक तरह से शर्मनाक स्थिति थी। यह उदाहरण ट्रंप की खार्ग द्वीप योजना पर भी सवाल खड़े करता है।

खार्ग द्वीप क्यों है इतना अहम?

स्नेक आइलैंड की तरह ही खार्ग द्वीप भी बेहद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह फारस की खाड़ी में ईरान की मुख्य भूमि से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा सा 8 किलोमीटर लंबा कोरल द्वीप है। यही से ईरान का ज्यादातर तेल निर्यात होता है, इसलिए इसे देश का सबसे संवेदनशील आर्थिक केंद्र माना जाता है।

हर दिन लाखों बैरल तेल का निर्यात

खार्ग द्वीप से औसतन हर दिन करीब 1.5 मिलियन बैरल तेल निर्यात होता है। लेकिन संभावित हमले के डर से ईरान ने बीच फरवरी से इस निर्यात को बढ़ाकर लगभग 3 मिलियन बैरल प्रति दिन कर दिया था। जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट बताती है कि, करीब 18 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल खार्ग पर बैकअप के तौर पर स्टोर किया गया है।

ट्रंप की योजना की पहली बड़ी समस्या

ट्रंप की योजना में पहली बड़ी दिक्कत यह है कि अगर अमेरिका खार्ग पर कब्जा कर लेता है, तो ईरान का लगभग पूरा तेल निर्यात रुक जाएगा। इससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका असर दुनिया भर पर पड़ेगा और इसका राजनीतिक नुकसान खुद ट्रंप को भी उठाना पड़ सकता है।

दूसरी समस्या: ईरान का आसान जवाब

दूसरी बड़ी समस्या यह है कि अगर अमेरिका खार्ग के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करना चाहे, तो तेल को ईरान की जमीन से खार्ग तक आना जरूरी होगा। लेकिन ईरान के पास एक आसान तरीका है, वह पाइपलाइन के वाल्व बंद कर सकता है। ऐसा होने पर पूरा अमेरिकी ऑपरेशन बेकार हो जाएगा। इसके बाद खार्ग आईलैंड पर बने रहना एक खाली मैदान में खड़े रहने जैसा होगा।

तीसरी समस्या: कब्जा बनाए रखना होगा मुश्किल

तीसरी चुनौती यह है कि जैसे रूस स्नेक आइलैंड पर अपनी पकड़ नहीं बना पाया, वैसे ही अमेरिका के लिए भी खार्ग पर कंट्रोल बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। ईरानी सेना और खाड़ी में मौजूद जहाज लगातार हमले कर सकते हैं, जिससे अमेरिकी सैनिकों को भारी खतरा रहेगा। जितने ज्यादा सैनिक होंगे, ईरान के निशाने उतने ज्यादा लगने की संभावना होगी। साथ ही खार्ग पर अगर ट्रंप का बारूद खत्म हो तो वापस लाने के लिए अलग मशक्कत करना पड़ेगी, जबकि ईरान बिना रुके ताबड़तोड़ हमले जारी रख सकता है। जिसमें अमेरिका जल्दी निशाने पर आता रहेगा और बचने की संभावना कम होगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर असर

भौगोलिक नजरिए से देखें तो खार्ग द्वीप काफी अंदर की ओर स्थित है और यह Strait of Hormuz पर सीधा कंट्रोल नहीं देता। उस इलाके में एक शिपिंग एक्सपर्ट के मुताबिक, स्नेक आइलैंड की तरह इसका बड़ा और कई दूसरे कामों में आ सके ऐसा फायदा नहीं है, बल्कि इसकी अहमियत सिर्फ इसके तेल इंफ्रास्ट्रक्चर तक ही सीमित है।

अमेरिकी सेना की संभावित तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन के लिए करीब 5,000 अमेरिकी मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 2,000 पैराट्रूपर्स को तैयार रखा गया है। पैराट्रूपर्स हवाई हमले कर सकते हैं, जबकि मरीन समुद्र के रास्ते या स्टीमर और छोटी नावों से उतर सकते हैं।

मिशन कितना खतरनाक हो सकता है?

इस मिशन के दौरान अमेरिकी जहाजों को ईरान के नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना होगा, जहां उन्हें दुश्मन की फायरिंग का सामना करना पड़ सकता है। वहीं हवाई लैंडिंग के दौरान भी ईरानी सेना, जहाजों और जमीन से हमले का खतरा रहेगा।

आखिर क्यों मुश्किल है यह ऑपरेशन?

भले ही अमेरिकी सेना शुरुआती हमलों को झेल ले, लेकिन खार्ग द्वीप पर लंबे समय तक कब्जा बनाए रखना बेहद कठिन होगा। ईरानी मुख्य भूमि से लगातार हमले होते रहेंगे, जिससे स्थिति रूस के स्नेक आइलैंड जैसे अनुभव की तरह हो सकती है। जहां कब्जा बनाए रखना लगभग नामुमकिन साबित हुआ था।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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Iran America War: ईरान ने Amazon पर किया हमला, बहरीन का उड़ाया डेटा सेंटर, क्‍यों है बेहद खतरनाक?


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oi-Bhavna Pandey

Iran America War: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। 1 मार्च 2026 (बुधवार) को ईरान के शाहेद ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में Amazon Web Services (AWS) के दो डेटा सेंटरों को निशाना बनाया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में इमारतों को सीधा नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा बहरीन में एक कामर्शियल डेटा सेंटर भी क्षतिग्रस्त हुआ है। हालांकि यह साफ नहीं है कि वह जानबूझकर निशाना था या नहीं।

Iran America War

ईरान ने एक दिन पहले दी थी धमकी

याद रहे मंगलवार को ईरान ने एक दिन पहले गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी दिग्गज अमेरिकी तकनीकी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी थी और 18 दिग्गज कंपनियों की हिट लिस्‍ट जारी थी। इस धमकी के एक दिन बाद अब ईरान ने कथित तौर पर ये हमला किया है।

ईरान ने क्‍यों डेटा सेंंटरों पर किया अटैक?

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि ये हमले उन डेटा सेंटरों पर किए गए जो “दुश्मन” की सैन्य और खुफिया गतिविधियों में सहायता कर रहे थे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी सेना वास्तव में इन खास डेटा सेंटरों का उपयोग कर रही थी या नहीं। विश्लेषकों के अनुसार, यह हमला UAE को अमेरिका से करीबी संबंधों के लिए “संदेश” देने की कोशिश भी हो सकता है।

Civil Defence is extinguishing a fire in a facility of a company as a result of the Iranian aggression. Relevant authorities are taking their measures at the site.

— Ministry of Interior (@moi_bahrain) April 1, 2026 “>

डेटा सेंटरों पर हमले क्‍यों है बेहद खतरनाक

आज के दौर में डेटा सेंटर सिर्फ इंटरनेट चलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड सिस्टम की रीढ़ बन चुके हैं। अमेरिकी सेना भी अपने सैन्य अभियानों और निर्णय समर्थन प्रणालियों में AI का तेजी से उपयोग कर रही है, जिसमें क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका होती है। ऐसे में इन डेटा सेंटरों का रणनीतिक महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।

आम जिंदगी पर बड़ा असर

इन हमलों का असर सिर्फ टेक्‍नालॉजी सिस्‍टम तक सीमित नहीं रहा। UAE में स्थानीय बैंकिंग सेवाओं में बाधा आई और इंटरनेट आधारित कई सेवाएं प्रभावित हुईं। चूंकि डेटा सेंटर मनोरंजन, समाचार, सरकारी कामकाज और डिजिटल सेवाओं को संचालित करते हैं, इसलिए इनके ठप होने से व्यापक व्यवधान पैदा हुआ।

कमजोर कड़ी क्यों बने डेटा सेंटर?

विशेषज्ञों का मानना है कि वाणिज्यिक डेटा सेंटर बड़े, स्थिर और अपेक्षाकृत असुरक्षित होते हैं, जिनके पास समर्पित हवाई सुरक्षा नहीं होती। ऐसे में वे “आसान लक्ष्य” बन जाते हैं। UAE पर हुए व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमलों में डेटा सेंटरों पर हमला कुल हमलों का छोटा हिस्सा था, लेकिन इसका प्रतीकात्मक और रणनीतिक महत्व बड़ा है।

क्या बदल रही है युद्ध की प्रकृति?

हालांकि विशेषज्ञ इसे युद्ध की प्रकृति में पूरी तरह बदलाव नहीं मानते, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर है। पहले जहां डेटा सेंटर साइबर हमलों का शिकार होते थे, अब वे सीधे भौतिक हमलों के दायरे में आ गए हैं। AI और क्लाउड पर बढ़ती निर्भरता के साथ, भविष्य में ये इंफ्रास्ट्रक्चर और भी बड़े निशाने बन सकते हैं।





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7 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने हैं, पर अभी है ‘कड़की’, IRCTC लाया खास ऑफर


नई दिल्‍ली. आपका 7 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का मन कर रहा है लेकिन अभी पैसे नहीं हैं. ऐसे लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है. इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) आपके लिए खास ऑफर लेकर आया है. यात्रा करने वालों के लिए ईएमआई की व्‍यवस्‍था की है, यानी अभी पैसे नहीं हैं तो बाद में दे सकते हैं. पहले दर्शन कर आइए. इसके लिए बुकिंग शुरू हो चुकी है और पहले आओ पहले पाओ के तहत बुकिंग की जा रही है.

आईआरसीटीसी द्वारा गोरखपुर रेलवे स्टेशन से भारत गौरव पर्यटक ट्रेन द्वारा उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिलिंग, ओंमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, गुजरात में द्वारकाधीश, भेंट द्वारिका, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, सिग्नेचर ब्रिज, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, नासिक में त्रियंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, पंचवटी, कालाराम मंदिर, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, संभाजी नगर में घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और स्थानीय मंदिरों के दर्शन के लिए पैकेज लांच किया गया है.
इस यात्रा के मुख्य आर्कषण निम्नवत हैं: श्रेणी अनुसार कुल बर्थों की 751 होंगी, जिसमें 02 एसी (कुल 49 सीटें), 03 एसी (कुल 210 सीटें) और स्लीपर (कुल 492 सीटें) होगी.

यहां से हो सकते हैं सवार

गोरखपुर – मनकापुर – अयोध्या कैंट – सुल्तानपुर – मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ – प्रयागराज संगम – रायबरेली – लखनऊ – कानपुर सेंट्रल – उरई – वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी – ललितपुर से चढ़ा और उतरा सकता है. ट्रेन 27 अप्रैल को जाएगी और 08 मई वापस आएगी. यानी 11 रात और 12 दिन का सफर होगा.

ये सुविधाएं

पैकेज में 02 एसी, 03 एसी और स्लीपर क्लास यात्रा, नाश्ता तथा दोपहर व रात का शाकाहारी भोजन मिलेगा. एसी और नॉन एसी बसों द्वारा स्थानीय भ्रमण कराया जाएगा.

इतना होगा किराया

इकोनामी श्रेणी (स्लीपर क्लास) में ठहरने पर पैकेज का 23500 रुपए प्रति व्यक्ति और अगर आपके साथ बच्च है जिसकी उम्र 5-11 वर्ष के बीच है. उसके लिए 22160 रुपए चुकाने होंगे. स्लीपर क्लास ट्रेन यात्रा, डबल या ट्रिपल पर नॉन एसी होटलों में ठहरने, नॉन एसी होटल के कमरे में मल्टी शेयर पर होगी (शेयरिंग/नॉन शेयरिंग-पैकेज के अनुसार) वॉश एंड चेंज और नॉन एसी ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था).

स्टैंडर्ड श्रेणी (3एसी क्लास) में ठहरने पर पैकेज का मूल्य 40000 रुपए प्रति व्यक्ति और प्रति बच्चे (5-11 वर्ष) 38430 रुपए है. (3एसी क्लास ट्रेन यात्रा, डबल/ट्रिपल पर एसी होटलों में ठहरने, नॉन एसी होटल के कमरे में डबल/ट्रिपल पर (शेयरिंग/नॉन शेयरिंग-पैकेज के अनुसार) वॉश एंड चेंज एवं नॉन एसी ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था).

कम्फर्ट श्रेणी (2एसी क्लास) में ठहरने पर पैकेज का 53260 रुपए प्रति व्यक्ति तथा प्रति बच्चे (5-11 वर्ष) का पैकेज 51370 रुपए है. (2एसी क्लास ट्रेन यात्रा, डबल/ट्रिपल पर एसी होटलों में ठहरने, एसी होटल के कमरे में डबल/ट्रिपल पर (शेयरिंग/नॉन शेयरिंग-पैकेज के अनुसार) वॉश एंड चेंज एवं एसी ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था). इस यात्रा में एलटीसी और ईएमआई की सुविधा भी उपलब्ध है. ईएमआई की सुविधा आईआरसीटीसी पोर्टल पर उपलब्ध सरकारी और गैर सरकारी बैंक से ली जा सकती है.



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PM मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों पर बैठक जारी: पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा; शाह-जयशंकर सहित कई केंद्रीय मंत्री मौजूद




दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर PM मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम 7 बजे से कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक जारी है। इसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत में मौजूदा हालात की समीक्षा हो रही है। मीटिंग में अमित शाह, एस जयशंकर, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जेपी नड्डा, अश्विनी वैष्णव, मनोहर लाल खट्टर, प्रल्हाद जोशी, किंजरापु राममोहन नायडू और हरदीप सिंह पुरी समेत कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, PM के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन भी मौजूद हैं। मीटिंग में आम लोगों की जरूरी जरूरतों जैसे खाद्य, LPG और पेट्रोल-डीजल उपलब्धता पर चर्चा हो रही है। 10 दिन में दूसरे बार CCS मीटिंग कर रहे PM मोदी पिछले 10 दिनों के भीतर CCS की यह दूसरी मीटिंग है। इससे पहले 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CCS मीटिंग की अध्यक्षता की थी। इसमें भारत पर पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रभाव को कम करने के उपायों का आकलन किया गया था। PM ने कहा था कि यह समस्या लगातार बढ़ रही है और पूरी दुनिया इससे प्रभावित हो रही है। उन्होंने निर्देश दिया था कि सरकार के सभी विभाग मिलकर काम करें ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अन्य अधिकारी मौजूद थे। कैबिनेट सचिव ने अब तक उठाए गए और प्रस्तावित कदमों की जानकारी दी थी। इसके अलावा कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, MSMEs, निर्यात, शिपिंग, व्यापार, वित्त और सप्लाई चेन जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा हुई।



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CPL 2026 में अंपायरों की छुट्टी? क्या मैदान पर अब इंसान नहीं बल्कि एआई करेगा फैसला! जानें वायरल पोस्ट का सच


Cricket

oi-Naveen Sharma

क्रिकेट के मैदान पर अंपायर का फैसला आखिरी माना जाता है, लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मैदान से इंसान गायब हो जाएं और उनकी जगह ‘AI’ ले ले? हाल ही में कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) के आधिकारिक हैंडल से एक ऐसी ही पोस्ट सामने आई जिसने सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है। पोस्ट में दावा किया गया कि CPL 2026 सीजन में कोई भी ऑन-फील्ड अंपायर नहीं होगा और पूरी तकनीक AI-विजुअल्स पर आधारित होगी।

कैरेबियन प्रीमियर लीग का यह पोस्ट वायरल भी हो गया है क्योंकि वर्ल्ड क्रिकेट में अभी तक अंपायर का काम एआई ने नहीं किया है। अन्य तकनीकी कामों में एआई का इस्तेमाल काफी ज्यादा होने लगा है। मैदान पर अंपायर नहीं हो, ऐसा कैसे हो सकता है।

cpl 2026

आखिर क्या है सच?

अगर आप इस खबर को पढ़कर हैरान हैं, तो थोड़ा ठहरिए। CPL ने इस पोस्ट के अंत में #AprilFoolsDay का इस्तेमाल किया है। जी हां, यह क्रिकेट प्रेमियों के साथ किया गया एक मजेदार मज़ाक है। फिलहाल क्रिकेट की दुनिया इतनी बड़ी क्रांति के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है कि अंपायरों को मैदान से पूरी तरह हटा दिया जाए।

क्या भविष्य में यह संभव है?

भले ही यह आज एक मज़ाक हो, लेकिन खेल के जानकारों का मानना है कि तकनीक जिस रफ्तार से बढ़ रही है, वह दिन दूर नहीं जब ऑन-फील्ड अंपायरों की भूमिका सीमित हो जाएगी। हम पहले ही देख रहे हैं कि LBW और नो-बॉल जैसे फैसलों में तकनीक का दखल बढ़ गया है। DRS में एआई का उपयोग होने लगा है।

फ़िलहाल तो ऐसा नहीं होगा

फिलहाल अंपायर सुरक्षित हैं और मैदान पर उनकी उंगली ही तय करेगी कि बल्लेबाज आउट है या नहीं। लेकिन CPL का यह ‘अप्रैल फूल’ पोस्ट हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि भविष्य का क्रिकेट कैसा होगा। भविष्य में ऐसा हो सकता है लेकिन फ़िलहाल तो कई सालों तक ऐसा नहीं होगा। यह हो सकता है कि टीवी अंपायर की जगह एआई काम करने लगे।



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Petrol-Diesel Price Hike: Shell पंप पर नॉर्मल-प्रीमियम फ्यूल के दाम बढ़े, पेट्रोल ₹7-डीजल ₹25 प्रति लीटर महंगा


Business

oi-Divyansh Rastogi

Petrol-Diesel Price Hike: 1 अप्रैल 2026 से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में नया तूफान आ गया है। निजी कंपनी शेल इंडिया (Shell India) ने अपने पंपों पर भारी बढ़ोतरी कर दी। बेंगलुरु में पेट्रोल ₹7.41 प्रति लीटर और डीजल ₹25.01 प्रति लीटर महंगा हो गया।

इससे पहले नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने भी दाम बढ़ाए थे। अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसी का सीधा असर अब भारत के पेट्रोल पंपों पर दिख रहा है।

Petrol-Diesel Price Hike

Shell के पंपों पर नई कीमतें (बेंगलुरु)

  • नॉर्मल पेट्रोल: ₹119.85 प्रति लीटर (₹7.41 की बढ़ोतरी)
  • प्रीमियम पेट्रोल (Power): ₹129.85 प्रति लीटर
  • नॉर्मल डीजल: ₹123.52 प्रति लीटर (₹25.01 की बढ़ोतरी)
  • प्रीमियम डीजल: ₹133.52 प्रति लीटर

दो हफ्ते पहले भी Shell ने कुछ स्टेशनों पर ₹2-2.50 तक पेट्रोल और डीजल बढ़ाया था। अब यह बढ़ोतरी पूरे बोर्ड पर है।

Nayara Energy ने पहले ही कर दी थी बढ़ोतरी

27 मार्च को Nayara Energy (जिसके देशभर में 7,000 से ज्यादा पंप हैं) ने भी दाम बढ़ाए थे। महाराष्ट्र में पेट्रोल ₹108.82 और डीजल ₹93.09 प्रति लीटर हो गया। कंपनी ने कहा कि ‘ईंधन आपूर्ति और वितरण में अभूतपूर्व चुनौतियां’ हैं।

क्यों बढ़े दाम? ईरान युद्ध का असर

  • ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार (कुछ समय पहले $116 तक पहुंचा)
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से दुनिया की 20% तेल सप्लाई प्रभावित
  • युद्ध शुरू होने के बाद से क्रूड में 60% तक उछाल
  • Shell और Nayara जैसी प्राइवेट कंपनियां अब घाटा कम करने के लिए कीमतें बढ़ा रही हैं।

असल में कीमतें तय कौन करता है?

  • 2010 में पेट्रोल और 2014 में डीजल को सरकारी नियंत्रण से मुक्त (Deregulation) कर दिया गया। अब कंपनियां खुद कीमतें तय करती हैं।
  • Shell दुनिया की बड़ी ब्रिटिश कंपनी है-भारत में विदेशी लाइसेंस वाला इकलौता रिटेलर।
  • Nayara Energy (पहले Essar Oil) भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट ईंधन कंपनी है।

सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन प्राइवेट पंपों पर दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, टैक्सी, ट्रक और आम गाड़ी मालिकों पर बोझ बढ़ गया है।

क्या होगा आगे?

युद्ध अगर लंबा चला तो और बढ़ोतरी आ सकती है। फिलहाल सरकारी पंप अभी राहत दे रहे हैं, लेकिन Shell-Nayara के पंपों पर टैंक भरवाने वाले लोगों को जेब ढीली करनी पड़ेगी। आपके शहर में Shell या Nayara पंप पर कितना महंगा हो गया? कमेंट में अपनी लोकेशन और नई कीमत जरूर बताएं। अपडेट्स के लिए बने रहें-ईंधन की कीमतें अब रोज बदल सकती हैं!



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