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RBI: कैपिटल मार्केट नियमों पर रिजर्व बैंक ने दी अतिरिक्त मोहलत, 1 जुलाई से प्रभावी होंगे बदलाव, जानिए


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पूंजी बाजार एक्सपोजर से जुड़े संशोधित फ्रेमवर्क के लागू होने की समयसीमा तीन महीने के लिए बढ़ा दी है। अब ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 के बजाय 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे।

केंद्रीय बैंक का यह फैसला बैंकों, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (CMIs) और उद्योग संगठनों से मिले फीडबैक के बाद लिया गया है। इन संस्थाओं ने नए नियमों को लागू करने में परिचालन और व्याख्यात्मक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया था।

किन क्षेत्रों में स्पष्टता प्रदान की गई?

आरबीआई ने इस फ्रेमवर्क के लिए 13 फरवरी 2026 को संशोधन निर्देश जारी किए थे, जो सार्वजनिक परामर्श के बाद तैयार किए गए थे। अब RBI ने अधिग्रहण वित्त , वित्तीय परिसंपत्तियों के खिलाफ ऋण और सीएमआई को दिए जाने वाले क्रेडिट एक्सपोजर जैसे क्षेत्रों में स्पष्टता भी प्रदान की है।

संशोधित नियमों में क्या खास?

संशोधित नियमों के तहत अधिग्रहण वित्त के दायरे को बढ़ाकर अब इसमें विलय और समामेलन को भी शामिल किया गया है। हालांकि, इस तरह की फंडिंग केवल गैर-वित्तीय कंपनियों में नियंत्रण हासिल करने के लिए ही दी जाएगी, जिससे स्पष्ट है कि आरबीआई का फोकस केवल नियंत्रण आधारित सौदों पर है, न कि छोटे निवेशों पर।

अगर लक्ष्य कंपनी एक होल्डिंग कंपनी है, तो बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संभावित तालमेल सिर्फ मूल कंपनी ही नहीं बल्कि उसकी सभी सहायक कंपनियों में भी मौजूद हो।

कंपनियों के लिए अधिग्रहण वित्त नियमों में बदलाव

नए फ्रेमवर्क में कंपनियों को अधिग्रहण वित्त को भारतीय या विदेशी सहायक कंपनियों के माध्यम से लेने की अनुमति भी दी गई है। वहीं, रीफाइनेंसिंग नियमों को सख्त किया गया है। बैंक अब केवल उसी स्थिति में अधिग्रहण ऋण का पुनर्वित्त कर सकेंगे जब सौदा पूरा हो जाए और नियंत्रण स्थापित हो जाए। साथ ही, यह राशि केवल मूल ऋण चुकाने के लिए ही इस्तेमाल की जा सकेगी।



इसके अलावा, अगर अधिग्रहण वित्त किसी सहायक कंपनी या विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) को दिया जाता है, तो अधिग्रहण करने वाली कंपनी की कॉरपोरेट गारंटी अनिवार्य होगी, जिससे क्रेडिट सुरक्षा मजबूत होगी।



बैंकों के लिए यह स्थगन  सिस्टम और प्रक्रियाओं को नए नियमों के अनुरूप ढालने का अतिरिक्त समय देगा, जबकि स्पष्ट परिभाषाओं से कानूनी अस्पष्टता और जोखिम भी कम होने की उम्मीद है।



वहीं, अधिग्रहण करने वाली कंपनियों के लिए यह फ्रेमवर्क अवसर और सीमाएं दोनों लेकर आया है, जहां एक ओर विलय और सहायक कंपनियों के जरिए फंडिंग के विकल्प बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर केवल नियंत्रण आधारित अधिग्रहण की अनुमति और सख्त रीफाइनेंसिंग शर्तें लागू की गई हैं।

कोलैटरल को लेकर क्या हुए बदलाव?

कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज को भी राहत देते हुए आरबीआई ने 100% नकद या नकद-समान संपार्श्विक या कोलैटरल के खिलाफ प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक फंडिंग की अनुमति दी है। साथ ही, मार्केट मेकर्स को उन्हीं सिक्योरिटीज़ के खिलाफ फंडिंग लेने की पाबंदी भी हटा दी गई है, जिनका वे बाजार निर्माण में उपयोग करते हैं।







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Bengal Election: BJP की चौथी लिस्ट में बड़ा ट्विस्ट! 13 नामों का ऐलान, एक सीट पर बदला उम्मीदवार, पूरी लिस्ट


India

oi-Pallavi Kumari

West Bengal Election 2026:पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की चौथी सूची जारी कर चुनावी रणनीति को और स्पष्ट कर दिया है।

इस लिस्ट में जहां 13 नए नामों का ऐलान किया गया है, वहीं एक अहम सीट पर उम्मीदवार बदलकर पार्टी ने संकेत दिया है कि वह कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। दो चरणों में होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है।

West Bengal Election 2026 list

चौथी लिस्ट में 13 नाम, मयनागुड़ी में बदलाव

बीजेपी ने मंगलवार को जारी चौथी सूची में कुल 13 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। सबसे बड़ा बदलाव मयनागुड़ी (आरक्षित) सीट पर देखने को मिला, जहां पहले घोषित उम्मीदवार को बदलते हुए अब दालिम रॉय को टिकट दिया गया है।

इसके अलावा पार्टी ने सोनारपुर उत्तर से देबाशीष धर, हावड़ा दक्षिण से श्यामल हाती, बाराबनी से अरिजीत रॉय, मेमारी से मानव गुहा, चंडीपुर से पीयूष कांति दास और पंचला से रंजन कुमार पॉल को उम्मीदवार बनाया है। यह सूची साफ दिखाती है कि बीजेपी स्थानीय समीकरण और सीट दर सीट रणनीति के आधार पर उम्मीदवार तय कर रही है।

भाजपा ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 13 उम्मीदवारों की चौथी सूची जारी की है और साथ ही मयनागुड़ी निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवार को बदल दिया है। pic.twitter.com/Bl5bF9Q5wQ

— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 31, 2026 “>

अब तक 287 सीटों पर उम्मीदवार घोषित

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है और अब तक 287 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार चुकी है। पार्टी ने पहली लिस्ट में 144, दूसरी में 111 और तीसरी सूची में 19 नामों का ऐलान किया था। चौथी सूची के 13 नाम जोड़ने के बाद अब लगभग पूरी तस्वीर साफ हो चुकी है।

इस बार बीजेपी ने कई बड़े चेहरों को मैदान में उतारा है। इनमें सुवेंदु अधिकारी, दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, स्वपन दासगुप्ता, निशीथ प्रामाणिक, रूपा गांगुली, जितेंद्र कुमार तिवारी, कौस्तव बागची जैसे नाम शामिल हैं।

बीजेपी ने इस बार कुछ ऐसे चेहरों को भी मौका दिया है, जो हाल के दिनों में चर्चा में रहे हैं। संदेशखाली हिंसा के बाद सुर्खियों में आई Rekha Patra को एक बार फिर हिंगलगंज सीट से टिकट दिया गया है। वहीं पानीहाटी सीट से आरजीकर कांड में मृत लेडी डॉक्टर की मां को उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने भावनात्मक और सामाजिक मुद्दों को भी चुनावी रणनीति में शामिल किया है।

दो चरणों में होगा चुनाव

पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। बीजेपी इस बार राज्य में अकेले दम पर चुनाव लड़ रही है और पूरी ताकत के साथ सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है।

चौथी सूची के साथ बीजेपी ने यह साफ कर दिया है कि वह हर सीट पर जीत के लिए माइक्रो मैनेजमेंट कर रही है। उम्मीदवार बदलने से लेकर नए चेहरों को मौका देने तक, पार्टी हर स्तर पर चुनावी समीकरण साधने की कोशिश में है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इन उम्मीदवारों के साथ बीजेपी बंगाल में कितना बड़ा उलटफेर कर पाती है या फिर मुकाबला पहले की तरह ही कांटे का बना रहता है।





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Crude Oil: पश्चिम एशिया जंग से होर्मुज संकट बढ़ा; वैश्विक तेल बाजार का कैसा है हाल, जानें ब्रेंट का अपडेट


पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते वैश्विक तेल बाजार में मंगलवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें कई हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.26 डॉलर यानी करीब 2% बढ़कर 115.04 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 3.10 डॉलर यानी लगभग 3% की तेजी के साथ 105.96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस महीने तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड में करीब 59% और WTI में लगभग 58% की बढ़ोतरी हुई है, जो मई 2020 के बाद सबसे बड़ा मासिक उछाल है।

क्या है इस तेजी का कारण?

इस तेजी की मुख्य वजह वैश्विक आपूर्ति पर बढ़ता खतरा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बाधित करने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है।

जंग के किसी भी नरमी के संकेत नहीं

अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष में फिलहाल किसी भी तरह की नरमी के संकेत नहीं हैं। यही कारण है कि पिछले एक महीने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल बना हुआ है। WTI ने जुलाई 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार किया और 106 डॉलर के आसपास पहुंच गया।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर और हमले करने की चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया, तो ईरान के बिजली संयंत्रों, तेल सुविधाओं, खार्ग आइलैंड और डीसैलिनेशन प्लांट्स को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास कई विकल्प हैं।

खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद अहम तेल निर्यात केंद्र है, जहां से देश के करीब 90% तेल का निर्यात होता है। ऐसे में इस पर किसी भी संभावित हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा झटका लग सकता है।

तनाव को और बढ़ाते हुए यमन के हूती विद्रोहियों ने सप्ताहांत में इस्राइल पर बैलिस्टिक मिसाइल दागे। इसके साथ ही अमेरिका द्वारा क्षेत्र में जमीनी सैनिक तैनात करने की तैयारियों की खबरों ने बाजार में बेचैनी और बढ़ा दी है।

क्या है विशेषज्ञों की राय?

कोटक सिक्योरिटीज की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी रिसर्च) कायनात चैनवाला के मुताबिक, एक महीने में 50% से ज्यादा की तेजी केवल सप्लाई टाइट होने का संकेत नहीं है, बल्कि यह गहरे भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ना तय है।





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बिहार- नालंदा के शीतलाष्टमी मंदिर में भगदड़, 8 की मौत: 6 से ज्यादा घायल; चैत्र के आखिरी मंगलवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी – Nalanda News




नालंदा के मघड़ा में माता शीतलाष्टमी मंदिर में भगदड़ से 8 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में सभी महिलाएं हैं। 6 से ज्यादा लोग घायल हैं। भगदड़ के बाद मंदिर और अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल है। मृतकों में से 2 की पहचान हो पाई है। इनमें नालंदा निवासी रीता देवी (50),और रेखा देवी (45) है। घायलों को इलाज के लिए मॉडल अस्पताल भेजा गया है। चैत्र महीने का आज आखिरी मंगलवार है। इसके लेकर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर में जुटी थी। प्रशासन ने हादसे के बाद मंदिर और मेला को बंद करवा दिया है। आज ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नालंदा पहुंच रही हैं। वो नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। घटनास्थल राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थल से 30km दूर है। हादसे के बाद की कुछ तस्वीरें देखिए मंदिर का गर्भ गृह बहुत छोटा है। मंदिर गई महिला ने बताया कि भीड़ इतनी थी कि लोग एक-दूसरे पर चढ़ रहे थे। सबको जल्दी थी आगे जाकर पूजा करने की। कोई लाइन में लगकर पूजा नहीं करना चाह रहे थे। मृतका रेखा देवी के बेटा ने बताया कि मम्मी मेला देखने गई थी। हजारों की भीड़ थी। मघड़ा मेला लगा था। मैं घर पर था, जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचा। मां को अस्पताल लेकर आए, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। जानिए आज मंदिर में क्यों उमड़ी थी भक्तों की भीड़ ये मंदिर बिहारशरीफ (नालंदा) से लगभग 5 किलोमीटर दूर मघड़ा गांव में स्थित है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (शीतला अष्टमी) को मुख्य पूजा होती है।
परंपरा है कि शीतला अष्टमी के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलता है। भक्त माता को एक दिन पहले बना ठंडा भोजन (बासी) भोग लगाते हैं। अष्टमी के दिन यहां भारी भीड़ होती है, लोग लंबी कतारों में लगकर माता के दर्शन करते हैं। खबर लगातार अपडेट हो रही है….



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इंडिगो: एयरलाइन के सह-संस्थापक राहुल भाटिया बोले- मैं कुछ ही दिनों का मेहमान; नए CEO की नियुक्ति पर क्या कहा?


इंडिगो के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने मंगलवार को खुद को ‘कुछ ही दिनों का मेहमान’ बताया। भाटिया फिलहाल एयरलाइन के कामकाज को संभाल रहे हैं। कंपनी नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में विलियम वॉल्श का स्वागत करने जा रही है।

10 मार्च को तत्कालीन सीईओ पीटर एल्बर्स के अचानक पद से इस्तीफा दिया था। इसके तीन हफ्ते से भी कम समय बाद इंडिगो ने मंगलवार को घोषणा की कि विमानन क्षेत्र के अनुभवी वॉल्श उनकी जगह लेंगे और इस साल 3 अगस्त तक या उससे पहले कार्यभार संभाल सकते हैं।

कर्मचारियों को भेजे संदेश में राहुल भाटिया ने क्या कहा?

कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक संदेश में भाटिया ने कहा कि उनके अनुसार इंडिगो खुद को भाग्यशाली मानती है कि वॉल्श जैसे अनुभवी व्यक्ति उसका नेतृत्व करेंगे। इतना ही नहीं, मुझे इस बात पर भी गर्व है कि निदेशक बोर्ड के निमंत्रण को स्वीकार करके उन्होंने यह भरोसा जताया है कि आप सभी ने वर्षों में जो मेहनत से बनाया है, उस पर उनका भरोसा है। मुझे उम्मीद है कि मुझे 3 अगस्त 2026 तक या उससे पहले उन्हें जिम्मेदारी सौंपने का सौभाग्य मिलेगा। 

ये भी पढ़ें: ‘आज ही आखिरी दिन’, इस दिग्गज टेक कंपनी में अचानक हुई छंटनी; 30 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

‘कुछ ही दिनों का मेहमान’ लिखकर हस्ताक्षर किए

उन्होंने संदेश के अंत में ‘राहुल’ या ‘कुछ ही दिनों का मेहमान’ लिखकर हस्ताक्षर किया, जिसका मतलब है कि वे थोड़े समय के लिए ही इस भूमिका में हैं। इंडिगो के संदर्भ में इसका मतलब है कि अब एयरलाइन का कामकाज संभालने की उनकी जिम्मेदारी कुछ समय के लिए ही है, क्योंकि नए सीईओ जल्द ही पद संभालेंगे।

जब 10 मार्च को सीईओ एल्बर्स ने इस्तीफा दिया, तब राहुल भाटिया ने कर्मचारियों से कहा कि वे अब इंडिगो की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और इसे बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी सिर्फ ग्राहकों और निवेशकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी के हर कर्मचारी के प्रति भी है जो इस एयरलाइन को चलाता है।



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Alka Yagnik की हालत बिगड़ी? खतरनाक बीमारी ने किया ये हाल, छलका सिंगर का दर्द, कहा- दुआ मांगो


Entertainment

oi-Purnima Acharya

Alka Yagnik Health: बॉलीवुड की दिग्गज प्लेबैक सिंगर अलका याग्निक इस समय सुर्खियों में छाई हुई हैं। सिंगर ने अपनी सेहत को लेकर एक नया अपडेट लोगों के साथ शेयर किया है। साल 2024 में अपनी बीमारी का खुलासा करने के बाद अब अलका याग्निक ने बताया है कि वह अब भी उसी समस्या से जूझ रही हैं और काफी परेशान हैं।

सिंगिंग असाइनमेंट्स से दूरी, करियर पर पड़ा असर
इस गंभीर बीमारी वजह से अलका याग्निक लंबे समय से लाइमलाइट और प्रोफेशनल कमिटमेंट्स से दूरी बनाए हुए हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में अलका याग्निक ने बताया कि उनकी बीमारी का असर उनके काम पर साफ नजर आ रहा है।

Alka Yagnik

‘मैं फिलहाल काम करने की स्थिति में नहीं हूं’

अलका याग्निक ने कहा कि वह फिलहाल कोई नया सिंगिंग असाइनमेंट स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। हालांकि संगीतकार अब भी उनसे संपर्क करते रहते हैं। अलका याग्निक ने कहा- लोग अब भी मेरे पास काम लेकर आते हैं लेकिन मैं फिलहाल उसे कर पाने की स्थिति में नहीं हूं।

पद्म भूषण मिलने पर जताया आभार

-बीमारी के बीच अलका याग्निक के लिए एक बड़ी खुशी तब आई जब उन्हें इस साल देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्म भूषण से नवाजा गया। इस सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा- मुझे इस बारे में मेरी बेटी से पता चला। ये मेरे लिए बेहद खुशी की बात थी। मैं भारत सरकार की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे इस सम्मान के लिए चुना।

-जब अलका याग्निक से पूछा गया कि क्या उन्हें इसकी उम्मीद थी तो उन्होंने विनम्रता से जवाब दिया- सच कहूं तो नहीं लेकिन जब भी ऐसा सम्मान मिलता है, वो हमेशा खास होता है।

अलका याग्निक को हुई कौन सी दुर्लभ बीमारी?

अलका याग्निक ने साल 2024 में सोशल मीडिया के जरिए लोगों को बताया था कि वह सेंसरी न्यूरल नर्व हियरिंग लॉस नाम की एक दुर्लभ समस्या से पीड़ित हैं। ये बीमारी आमतौर पर वायरल इंफेक्शन के कारण सुनने की क्षमता को प्रभावित करती है। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का अचानक लगा बड़ा झटका बताया था और फैंस से दुआओं में याद रखने की अपील की थी।

सिंगर का आखिरी गाना और अधूरे प्रोजेक्ट्स

बीमारी के कारण अलका याग्निक ने कोई नया गाना रिकॉर्ड नहीं किया है। उनका आखिरी गाना ‘नरम कालजा’ था, जो फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ के लिए रिकॉर्ड किया गया था। इस फिल्म का निर्देशन इम्तियाज अली ने किया था जबकि संगीत एआर रहमान ने दिया था।

फैंस कर रहे जल्द स्वस्थ होने की दुआ

मेलोडी क्वीन के नाम से मशहूर सिंगर अलका याग्निक की आवाज आज भी करोड़ों दिलों में बसती है। उनके फैंस और संगीत प्रेमी लगातार उनके जल्द स्वस्थ होकर फिर से संगीत की दुनिया में वापसी की कामना कर रहे हैं।



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Layoffs: ‘आज ही आखिरी दिन’, इस दिग्गज टेक कंपनी में अचानक हुई छंटनी; 30 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला


दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में एक बार फिर छंटनी का दौर तेज हो गया है। ओरेकल ने अपने वैश्विक ऑफिसों में कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है। खास बात यह है कि कर्मचारियों को इसकी जानकारी अचानक एक ईमेल के जरिए दी गई, जिसमें साफ लिखा था कि आज ही आपका आखिरी कार्य दिवस है। इस फैसले ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ओरेकल ने लागत कम करने और संगठन में बदलाव के तहत यह कदम उठाया है। मंगलवार सुबह कर्मचारियों को ईमेल भेजकर बताया गया कि उनकी भूमिका खत्म कर दी गई है। कंपनी ने कहा कि यह फैसला मौजूदा बिजनेस जरूरतों को देखते हुए लिया गया है और यह एक बड़े संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा है।

क्या लिखा था छंटनी वाले ईमेल में?

कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में कहा गया कि “हम आपके पद से जुड़ी कठिन खबर साझा कर रहे हैं। कंपनी की जरूरतों को देखते हुए आपकी भूमिका समाप्त की जा रही है। आज आपका आखिरी कार्य दिवस है।” कंपनी ने कर्मचारियों के काम की सराहना भी की, लेकिन साथ ही तुरंत नौकरी खत्म होने की बात कही।

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क्या कर्मचारियों को कोई मुआवजा मिलेगा?

ईमेल में यह भी बताया गया कि कर्मचारियों को सेवेरेंस पैकेज दिया जाएगा, जो कंपनी की शर्तों के अनुसार होगा। इसके लिए कर्मचारियों को कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने होंगे। इसके बाद उन्हें उनकी निजी ईमेल आईडी पर आगे की जानकारी भेजी जाएगी।

क्या तुरंत एक्सेस भी बंद कर दिया गया?

कंपनी ने साफ कहा कि कर्मचारियों का सिस्टम एक्सेस जल्द ही बंद कर दिया जाएगा। इसमें कंप्यूटर, ईमेल, फाइल्स और अन्य सभी एक्सेस शामिल हैं। कर्मचारियों को यह भी चेतावनी दी गई कि वे किसी भी गोपनीय जानकारी को डाउनलोड या कॉपी न करें।

क्या कर्मचारियों में डर और अनिश्चितता बढ़ी है?

छंटनी के बाद कर्मचारियों की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। कई कर्मचारियों ने बताया कि उनका एक्सेस तुरंत बंद कर दिया गया और उन्हें नई नौकरी की तलाश शुरू करनी पड़ी। कुछ कर्मचारियों ने कहा कि छंटनी अलग-अलग देशों में चरणबद्ध तरीके से की जा रही है, जिससे असमंजस और बढ़ गया है।

क्या यह छंटनी ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा है?

ओरेकल की यह छंटनी ऐसे समय में हुई है, जब टेक सेक्टर में लागत कम करने का दबाव बढ़ रहा है। इससे पहले भी कई बड़ी कंपनियां कर्मचारियों की संख्या घटा चुकी हैं। यह साफ संकेत है कि टेक इंडस्ट्री में अभी भी अस्थिरता बनी हुई है और आने वाले समय में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस घटनाक्रम के बाद ओरेकल तेजी से ट्रेंड करने लगा है। इससे साफ है कि इस खबर ने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की छंटनी से कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ती है और पूरी इंडस्ट्री पर इसका असर पड़ता है।

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Mahavir Jayanti 2026 Holidays: क्या आज शेयर मार्केट बंद है? कब खुलेंगे बैंक?


Business

oi-Ankur Sharma

Mahavir Jayanti 2026 Holidays: आज (31 मार्च) महावीर जयंती के अवसर पर भारतीय शेयर बाज़ार बंद हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में पूरे दिन ट्रेडिंग बंद रहेगी। इस तरह, महावीर जयंती इस हफ़्ते की दो निर्धारित बाज़ार छुट्टियों में से पहली है जबकि दूसरी छुट्टी 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के लिए तय है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (MCX) में सुबह का सत्र बंद रहेगा लेकिन एक्सचेंज के शेड्यूल के अनुसार, शाम के सत्र में ट्रेडिंग 5 बजे से फिर शुरू होगी और रात 11:30/11:55 बजे तक चलेगी। जबकि BSE और NSE दोनों पर इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बोर्रोइंग (SLBs), करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग पूरे दिन बंद रहेगी।

Mahavir Jayanti 2026 Holidays

इन दोनों पर ट्रेडिंग गतिविधियां 1 अप्रैल (बुधवार) को फिर से शुरू होंगी। आपको बता दें कि एक ही हफ़्ते में बाज़ार की दो छुट्टियां होने से निवेशकों, खासकर शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स और डेरिवेटिव्स में हिस्सा लेने वालों के लिए टाइमिंग का रिस्क पैदा हो जाता है।

Share Market Band: सोना नीचे, चांदी में बढ़त

घरेलू बाज़ार में, पिछले हफ़्ते सोने का वायदा भाव मामूली गिरावट के साथ 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी 1,182 रुपये (या 0.52 प्रतिशत) की बढ़त के साथ MCX पर 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई, अब आज छुट्टी है इसलिए आज यही भाव मान्य रहेंगे।

Bank Holidays Today: आज बैंक खुले हैं या बंद?

31 मार्च को महावीर जयंती के मौके पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड में बैंक बंद हैं, हालांकि ऑनलाइन सेवाओं पर कोई असर नहीं है। 1 अप्रैल को भी वित्तीय वर्ष के खत्म होने पर बैंक बंद रहेंगे इसलिए बैंक का काम करने के लिए आपको गुरुवार तक का इंतजार करना होगा।

महावीर जंयती 2026

महावीर जयंती जैन धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे भगवान महावीर स्वामी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व बिहार के कुंडलपुर (वर्तमान वैशाली) में हुआ था। उन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों का प्रचार किया, जो आज भी मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक हैं।



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CAG रिपोर्ट- कई जवानों को समय पर वेतन-भत्ते नहीं मिले: मिलिट्री अस्पतालों में कमियां मिली, सेना से जुड़े काम के रिकॉर्ड डिजिटल करने की सिफारिश




CAG की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में कई मिलिट्री अस्पतालों के रखरखाव में कमी की ओर भी इशारा किया गया है। यह भी बताया गया है कि काफी संख्या में सेना के जवानों को उनके वेतन-भत्ते समय पर और सही तरीके से नहीं मिले। रिपोर्ट के मुताबिक सेना के निर्माण कार्यों से जुड़े साइट रिकॉर्ड्स ठीक से नहीं रखे गए। इससे काम की क्वालिटी और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हुआ। ऑडिट ने सिफारिश की है कि रक्षा मंत्रालय साइट रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज करे। साइट रिकॉर्ड्स वे कागज होते हैं, जिनमें काम की प्रगति, इस्तेमाल मटेरियल और टेस्ट रिपोर्ट से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड होती है। वहीं, कम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (CAG) एक संस्था है, जो सरकारी खर्च और कामकाज का ऑडिट करती है। रिपोर्ट में तीन हिस्सों की जांच की गई… कई जवानों को समय वेतन-भत्ता नहीं मिला रिपोर्ट के मुताबिक प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट ऑफ अकाउंट्स (PFSA) की समीक्षा तय समय पर नहीं हुई। इसके कारण रिटायरमेंट के समय अधिकारियों, जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCOs) और दूसरे रैंक (ORs) के कर्मीयों से एक साथ बड़ी राशि की वसूली करनी पड़ी। आईटी सिस्टम में जरूरी नियम शामिल नहीं होने से कई सेना के जवानों को उनका वेतन और भत्ता समय पर और सही तरीके से नहीं मिला। PTO (प्रिविलेज टिकट ऑर्डर) यानी छुट्टी पर जाने के लिए मिलने वाले टिकट जारी करने में देरी हो रही है। HRMS सिस्टम में जानकारी सही से नहीं मिल रही, इसलिए कई आवेदन खारिज हो रहे हैं। ऑडिट ने कहा है कि अलग-अलग सिस्टम के बीच तालमेल बेहतर किया जाए। रिजेक्ट मामलों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया जाए। मिलिट्री अस्पतालों की इमारतें पुरानी, कई जगह जरूरी सुविधाएं नहीं डिफेंस मंत्रालय के तहत आने वाले मिलिट्री अस्पतालों में कई दिक्कतें मिलीं। कई अस्पतालों की इमारतें पुरानी हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच नहीं हुई। एक मामले में जून 2022 में लैंसडाउन के एक मिलिट्री अस्पताल का हिस्सा गिर गया था। कई जगह HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) और फायरफाइटिंग सिस्टम भी पूरे नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) मिलिट्री अस्पतालों की जरूरत की दवाएं पूरी नहीं दे पाए। कॉमन ड्रग लिस्ट की दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थीं। दो डिपो में दवाओं को समय पर बदला नहीं गया, जिससे ₹13.52 करोड़ की दवाएं फंसी रहीं। बिना लाइसेंस X-ray मशीनें चल रही थी ऑडिट में पाया गया कि कई जगह बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन नहीं हुआ। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े दस्तावेज भी नहीं रखे गए। कुछ अस्पतालों में बिना लाइसेंस के X-ray मशीनें चलाई जा रही थी। सात कमांड्स की समीक्षा में वेस्टर्न कमांड में सबसे ज्यादा नियमों का उल्लंघन मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने कुछ मामलों में सुधार के कदम उठाने शुरू किए हैं, लेकिन कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। ———— ये खबर भी पढ़ें… IT रूल बदलेंगे- निर्देश नहीं माने तो सेफ हार्बर खत्म:अब हर कंटेंट के लिए सोशल मीडिया कंपनियां ही जिम्मेदार; डेटा डिलीट नहीं कर सकेंगे केंद्र सरकार ने आईटी नियमन- 2021 में बदलाव का नया मसौदा जारी कर दिया है। इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सरकारी निर्देशों की अनदेखी नहीं कर सकेंगे। उन्हें निर्देश, गाइडलाइन, एडवाइजरी माननी ही होगी। यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित डिजिटल मीडिया कंपनियां सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराई जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…



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CAG रिपोर्ट: कई जवानों को समय पर वेतन-भत्ते नहीं मिले: मिलिट्री अस्पतालों में कमियां मिली, सेना से जुड़े काम के रिकॉर्ड डिजिटल करने की सिफारिश




CAG यानी सरकारी खर्च और कामकाज का ऑडिट करने वाली संस्था की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में कई मिलिट्री अस्पतालों के रखरखाव में कमी की ओर भी इशारा किया गया है। यह भी बताया गया है कि काफी संख्या में सेना के जवानों को उनके वेतन-भत्ते समय पर और सही तरीके से नहीं मिले। रिपोर्ट के मुताबिक सेना के निर्माण कार्यों से जुड़े साइट रिकॉर्ड्स ठीक से नहीं रखे गए। इससे काम की क्वालिटी और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हुआ। ऑडिट ने सिफारिश की है कि रक्षा मंत्रालय साइट रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज करे। ये वही कागज होते हैं जिनमें काम की प्रगति, मटेरियल और टेस्ट रिपोर्ट जैसी जानकारी रिकॉर्ड होती है। रिपोर्ट में तीन प्रमुख हिस्सों की ऑडिट की गई… कई जवानों को समय पर भुगतान नहीं मिला रिपोर्ट के मुताबिक प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट ऑफ अकाउंट्स (PFSA) की समीक्षा तय समय पर नहीं हुई। इसके कारण रिटायरमेंट के समय अधिकारियों, जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCOs) और दूसरे रैंक (ORs) के कर्मीयों से एक साथ बड़ी राशि की वसूली करनी पड़ी। आईटी सिस्टम में जरूरी नियम शामिल नहीं होने से कई सेना के जवानों को उनका भुगतान समय पर और सही तरीके से नहीं मिला। PTO में देरी, सिस्टम आपस में ठीक से नहीं जुड़े रिपोर्ट में PTO (प्रिविलेज टिकट ऑर्डर) जारी करने में देरी की बात कही गई है। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) में डेटा सही से नहीं मिला, इसलिए कई आवेदन रिजेक्ट हो गए। ऑडिट ने कहा है कि अलग-अलग सिस्टम के बीच तालमेल बेहतर किया जाए और रिजेक्ट मामलों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया जाए। मिलिट्री अस्पतालों की इमारतें पुरानी, कई जगह जरूरी सुविधाएं नहीं डिफेंस मंत्रालय के तहत आने वाले मिलिट्री अस्पतालों में कई दिक्कतें मिलीं। कई अस्पतालों की इमारतें पुरानी हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच नहीं हुई। एक मामले में जून 2022 में लैंसडाउन के एक मिलिट्री अस्पताल का हिस्सा गिर गया था। कई जगह HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) और फायरफाइटिंग सिस्टम भी पूरे नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) मिलिट्री अस्पतालों की जरूरत की दवाएं पूरी नहीं दे पाए। कॉमन ड्रग लिस्ट की दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थीं। दो डिपो में दवाओं को समय पर बदला नहीं गया, जिससे ₹13.52 करोड़ की दवाएं फंसी रहीं। बिना लाइसेंस X-ray मशीनें चल रही थी ऑडिट में पाया गया कि कई जगह बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन नहीं हुआ। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े दस्तावेज भी नहीं रखे गए। कुछ अस्पतालों में बिना लाइसेंस के X-ray मशीनें चलाई जा रही थी। सात कमांड्स की समीक्षा में वेस्टर्न कमांड में सबसे ज्यादा नियमों का उल्लंघन मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने कुछ मामलों में सुधार के कदम उठाने शुरू किए हैं, लेकिन कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। ————



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