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ईरान में जंग: भारत के आर्थिक विकास की गति पर ब्रेक लगने का खतरा, सरकार की रिपोर्ट में तेल-गैस की कीमत पर क्या?


पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत में महंगाई बढ़ने और विकास की गति धीमी होने का खतरा बढ़ गया है। भारत सरकार ने शनिवार को जारी अपनी मासिक आर्थिक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते देश की आर्थिक विकास पर दर बुरा असर पड़ सकता है। 1 अप्रैल से शुरू होने वाले आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 7.0 फीसदी से 7.4 फीसदी की वृद्धि के अनुमान में अब गिरावट का खतरा है।

अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर हमले के बाद एक महीने पहले शुरू हुए इस संघर्ष ने महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है। इससे दुनिया के 20 फीसदी तेल का परिवहन होता है। इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा और माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है और आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव बढ़ गया है। सरकारी समीक्षा में कहा गया है कि इससे भारत में मुद्रास्फीति और विकास को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटा प्रभावित हो रहा है।

CEA नागेश्वरन ने क्या कहा?

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने रिपोर्ट में लिखा है कि अप्रैल और संभवतः मई के आंकड़ों से नए वित्तीय वर्ष के विकास की संभावनाओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। उन्होंने कहा कि चालू खाता घाटा, जो मौजूदा वित्तीय वर्ष की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में पहले ही सकल घरेलू उत्पाद के 1.3 फीसदी तक बढ़ चुका है, अगले वित्तीय वर्ष में और भी बदतर हो जाएगा।

कमजोर व्यवसायों-परिवारों को मदद की जरूरत

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को सबसे अधिक प्रभावित और कमजोर व्यवसायों और परिवारों को तत्काल, लक्षित राहत प्रदान करने की आवश्यकता होगी। घरेलू मांग अब तक अपेक्षाकृत स्थिर रही है, लेकिन विकास के जोखिम बढ़ रहे हैं, विशेष रूप से आयातित इनपुट पर निर्भर क्षेत्रों में। ऊर्जा संकट से जुड़े पूंजी के बाहर जाने और उच्च आयात लागत के कारण मार्च में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 95 तक कमजोर हो गया है।



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राजस्थान से बीजेपी को सालभर में 112.97 करोड़ चंदा मिला: जोधपुर के एक व्यक्ति ने 15 करोड़ दिए, कांग्रेस को हिंदुस्तान जिंक से 10 करोड़ मिले – Jaipur News




राजस्थान में साल 2024-25 में राजनीतिक पार्टियों को कुल 112.97 करोड़ का चंदा मिला है। सबसे ज्यादा 87.51 करोड़ बीजेपी को और कांग्रेस को 25 करोड़ मिले हैं। चुनाव आयोग में राजनीतिक पार्टियों की तरफ से दिए गए चंदे के ब्यौरे पर एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। राजस्थान में कांग्रेस और बीजेपी को ही सबसे ज्यादा डोनेशन मिला है। बाकी पार्टियों को नाममात्र की रकम मिली है। आम आदमी पार्टी को 39 लाख और सीपीआई (एम) को 7 लाख रुपए मिले हैं। भाजपा और कांग्रेस को छोड़ दें तो अन्य दलों को मिलाकर कुल 46 लाख रुपए ही मिले हैं। राजस्थान में 77.46% चंदा BJP को, कांग्रेस को 22.12%
प्रदेश में राजनीकि पार्टियों को दिए गए चंदे में सबसे ज्यादा 77.46% रकम BJP के पास आया है। कांग्रेस को कुल 22.12% चंदा मिला है। बाकी पार्टियों की इसमें 1 फीसदी की हिस्सेदारी भी नहीं है। बिजनेस घरानों ने दिए सबसे ज्यादा डोनेशन
पार्टियों को चंदा देने में राजस्थान देश में 7वें नंबर पर है। राजस्थान में कॉर्पोरेट और बिजनेस घरानों ने पार्टियों को 69.271 करोड़ दिए हैं। व्यक्तिगत दानदाताओं की बात करें तो रकम करीब 43.70 करोड़ है। हिंदुस्तान जिंक ने बीजेपी को 15 करोड़, कांग्रेस को 10 करोड़ दिए
हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने साल 2024-25 में बीजेपी को 15 करोड़ और कांग्रेस को 10 करोड़ का चंदा दिया। हिंदुस्तान जिंक कांग्रेस को सर्वाधिक चंदा देने वालों में शामिल है। हिंदुस्तान जिंक की पेरेंट ग्रुप की कंपनी वेदांता ने बीजपी को 67 करोड़ रुपए दिए हैं। जोधपुर के सत्यनाराण धूत ने बीजेपी को 15 करोड़ दिए
व्यक्तिगत कैटेगरी में राजस्थान से सबसे ज्यादा चंदा जोधपुर के सत्यनारायण धूत ने दिया है। सत्यनारायण धूत ने बीजेपी को 15 करोड़ चंदा दिया है। इसके बाद जोधपुर के संजय धूत ने बीजेपी को 7 करोड़ का चंदा दिया है। जोधपुर के ही अनिश धूत ने बीजेपी को 2 करोड़ और दिनेश धूत ने 1 करोड़ दिए हैं। वंडर सीमेंट ने 11 करोड़ दिए
राजस्थान की कंपनियों में सबसे ज्यादा बीजेपी को हिंदुस्तान जिंक और श्रीसीमेंट ने 15-15 करोड़ दिए हैं। वंडर सीमेंट ने 11 करोड़, आरएसडब्ल्यूएम लिमिटेड, उदयपुर ने 5 करोड़ और जोधपुर की श्रीराम इंडस्ट्रीज ने 3 करोड़ रुपए का चंदा दिया है।



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Ghaziabad Schools: आज गाजियाबाद में स्कूल खुले हैं या बंद? घर से निकलने से पहले चेक करें DM का आदेश


Uttar Pradesh

oi-Sohit Kumar

Ghaziabad Schools: गाजियाबाद के अभिभावकों और छात्रों के लिए शनिवार सुबह एक बड़ी अपडेट सामने आई है। जिला प्रशासन ने 24 मार्च को जारी किए गए अपने पुराने आदेश को पलटते हुए आज, 28 मार्च 2026 को सभी स्कूलों को फिजिकल मोड में खोलने का निर्देश दिया है।

जिलाधिकारी (DM) रविंद्र कुमार मंदर ने स्पष्ट किया है कि अब ऑनलाइन क्लास नहीं होंगी, बल्कि छात्र पहले की तरह स्कूल जा सकेंगे।

ghaziabad-schools

क्यों रद्द हुआ ऑनलाइन क्लास का आदेश?

प्रशासन ने पहले एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह के लिए लाभार्थियों को लाने-ले जाने के मकसद से 800 स्कूल बसों को अधिग्रहित किया था। इसी वजह से 28 मार्च को स्कूलों को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन ताज़ा आदेश के अनुसार, पिछले फैसले को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओ.पी. यादव ने पुष्टि की है कि स्कूल अब नियमित रूप से खुलेंगे और फिजिकल क्लासेस चलेंगी।

800 बसों के अधिग्रहण पर सस्पेंस बरकरार

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुराने आदेश में 800 बसों को सरकारी कार्यक्रम के लिए मांगा गया था, लेकिन नए आदेश में इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि क्या बसें अब छात्रों को लेने आएंगी या उन्हें कार्यक्रम के लिए ही इस्तेमाल किया जाएगा। परिवहन विभाग के अधिकारियों और आरटीओ (प्रवर्तन) सियाराम वर्मा की ओर से इस पर अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाया है, जिससे अभिभावकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

अभिभावकों के लिए क्या है जरूरी सलाह?

अगर आपका बच्चा स्कूल बस से जाता है, तो घर से निकलने से पहले स्कूल प्रबंधन से ट्रांसपोर्ट की स्थिति जरूर जान लें। प्रशासन का कहना है कि बसों की व्यवस्था अलग तरीके से की जाएगी, लेकिन इसकी जिम्मेदारी अब परिवहन विभाग पर है। स्कूल खुलना तय है, लेकिन ट्रांसपोर्ट की समस्या आज सुबह छात्रों और माता-पिता को परेशान कर सकती है।



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Hormuz Block: फारस की खाड़ी में 20 जहाजों पर फंसे 540 भारतीय नाविक सुरक्षित, सरकार ने क्या कहा जानिए सबकुछ


पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में होर्मूज जलडमरूमध्य पर आवागमन बाधित होने के कारण 20 भारतीय ध्वज वाले जहाज वहां मौजूद हैं। इन जहाजों पर कुल 540 भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय इन सभी जहाजों और नाविकों की सक्रियता से निगरानी कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार क्षेत्र में भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय भी किए हैं।

मंत्रालय ने साफ किया है कि क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले किसी भी जहाज से जुड़ी कोई घटना दर्ज नहीं हुई है। महानिदेशालय शिपिंग, जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के समन्वय से इनकी सक्रिय निगरानी की जा रही है। महानिदेशालय शिपिंग ने अब तक 938 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी में सहायता की है।

इनमें से 25 नाविकों को पिछले 24 घंटों में वापस लाया गया है। भारत भर में बंदरगाहों का संचालन सामान्य बना हुआ है। किसी भी बंदरगाह पर कोई भीड़भाड़ दर्ज नहीं की गई है। गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के राज्य समुद्री बोर्डों ने अपने यहां सुचारु कामकाज की पुष्टि की है।

भारतीय नाविकों का कल्याण और वापसी

मंत्रालय ने बताया कि विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशनों और समुद्री हितधारकों के साथ समन्वय जारी है। इसका मुख्य उद्देश्य नाविकों का कल्याण सुनिश्चित करना और समुद्री संचालन को निर्बाध बनाए रखना है। 28 फरवरी से अब तक युद्ध प्रभावित क्षेत्र से करीब चार लाख संतानवे हजार यात्री भारत लौट चुके हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय मिशन और पोस्ट भारतीय समुदाय के संपर्क में हैं। वे उनकी सुरक्षा और भलाई के लिए आवश्यक सलाह जारी करने के साथ-साथ सहायता भी प्रदान कर रहे हैं। भारतीय समुदाय की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

खाड़ी क्षेत्र में घटनाक्रम की निगरानी

सरकार खाड़ी और पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रही है। यह निगरानी क्षेत्र में किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय मिशनों को भी इस संबंध में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कार्य स्थानीय भारतीय समुदाय को हर संभव मदद पहुंचाना है। सुरक्षा संबंधी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और नौसेना की तैनाती

28 मार्च को भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पाद ले जाने वाले दो और व्यापारी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे। भू-राजनीतिक तनाव के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही बाधित हो रही है। भारतीय नौसेना के युद्धपोतों को सहायता प्रदान करने के लिए प्रमुख बंदरगाहों के पास तैनात किया गया है। यह तैनाती समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है। आने वाले दिनों में जलडमरूमध्य से और अधिक जहाजों के पहुंचने की उम्मीद है। भारतीय नौसेना क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।





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RCB vs SRH: IPL 2026 के पहले मैच के लिए प्लेइंग-11 फाइनल! कौन होगा पहला इम्पैक्ट प्लेयर, किसे मिलेगी जीत?


Cricket

oi-Amit Kumar

RCB vs SRH IPL 2026 Playing 11: करीब 17 साल के लंबे इंतजार के बाद पिछले साल आईपीएल ट्रॉफी पर कब्जा करने वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) अब एक नए अवतार में नजर आएगी। आईपीएल 2026 के पहले मुकाबले में डिफेंडिंग चैंपियन का सामना सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) से होगा। अपने होम ग्राउंड एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में आरसीबी की कोशिश जीत के साथ आगाज करने की होगी।

इन खिलाड़ियों को मिल सकता है मौका (RCB vs SRH IPL 2026 Playing 11)

आरसीबी की सबसे बड़ी ताकत उनकी ओपनिंग जोड़ी है। विराट कोहली और फिल साल्ट पारी का आगाज करेंगे। मिडिल ऑर्डर में अनुभव और आक्रामकता का मेल है। नंबर तीन पर देवदत्त पडिक्कल और नंबर चार पर कप्तान रजत पाटीदार खुद कमान संभालेंगे। टीम ने ऑलराउंडर्स पर काफी भरोसा जताया है। क्रुणाल पांड्या, वेंकटेश अय्यर और टिम डेविड के होने से बल्लेबाजी में काफी गहराई है। वहीं, गेंदबाजी की कमान अनुभवी भुवनेश्वर कुमार के साथ जोश हेजलवुड और जैकब डफी संभालेंगे।

RCB vs SRH 1

कौन होगा पहला इम्पैक्ट प्लेयर?

आरसीबी की टीम में स्पिन विभाग को मजबूती देने के लिए सुयश शर्मा इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर आ सकते हैं। यदि अतिरिक्त पेसर की जरूरत पड़ी, तो रसिक डार विकल्प होंगे। वहीं हैदराबाद पिच की स्थिति के अनुसार अनिकेत वर्मा या हर्ष दुबे में से किसी एक को इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में आजमा सकती है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा इस सीजन का पहला इम्पैक्ट प्लेयर कौन होगा?

हैदराबाद की टीम है बेहद खतरनाक

सनराइजर्स हैदराबाद की टीम इस बार ईशान किशन की कप्तानी में मैदान में उतरेगी। टीम की ओपनिंग जोड़ी काफी खतरनाक है, जहां अभिषेक शर्मा और ट्रेविस हेड विपक्षी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने के लिए तैयार हैं। मिडल ऑर्डर में हेनरिक क्लासेन और लियाम लिविंगस्टोन जैसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ टी-20 फिनिशर मौजूद हैं। गेंदबाजी में हर्षल पटेल, शिवम मावी और जयदेव उनादकट का अनुभव टीम को मजबूती देगा। युवा जीशान अंसारी स्पिन विभाग की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

एसआरएच की संभावित प्लेइंग इलेवन: ट्रेविस हेड, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (कप्तान), हेनरिक क्लासेन, लियाम लिविंगस्टोन, नीतीश कुमार रेड्डी, कामिंडु मेंडिस, हर्षल पटेल, शिवम मावी, जयदेव उनादकट, जीशान अंसारी।
इम्पैक्ट प्लेयर: अनिकेत वर्मा / हर्ष दुबे

आरसीबी की संभावित प्लेइंग इलेवन: विराट कोहली, फिल साल्ट, देवदत्त पडिक्कल, रजत पाटीदार, वेंकटेश अय्यर, क्रूणाल पांड्या, जितेश शर्मा, टिम डेविड, भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड, जैकब डफी।



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Petrol Diesel Prices: आपके शहर में कितना सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल? ₹10 की कटौती के बाद ये रही नई रेट लिस्ट


Business

oi-Sohit Kumar

Petrol Diesel Rate 28 March Update: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर मचे घमासान के बीच आज, 28 मार्च 2026 के नए रेट जारी कर दिए गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की ऐतिहासिक कटौती की गई है। आइए जानते हैं इस कटौती के बाद आम आदमी की जेब को सीधी राहत मिली है या नहीं?

देश की राजधानी दिल्ली में आज ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। यहां 1 लीटर पेट्रोल के लिए आपको 94.77 रुपए चुकाने होंगे। वहीं, डीजल की कीमत 87.67 रुपए प्रति लीटर पर टिकी है। प्रीमियम पेट्रोल (XP95) इस्तेमाल करने वालों के लिए रेट 101.89 रुपए है।

Petrol-Diesel

Petrol Diesel Price in Major Cities: प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम

  • नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77, डीजल ₹87.67 प्रति लीटर
  • मुंबई: पेट्रोल ₹103.54, डीजल ₹90.03 प्रति लीटर
  • बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.96, डीजल ₹90.99 प्रति लीटर
  • हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46, डीजल ₹95.70 प्रति लीटर
  • कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45, डीजल ₹92.02 प्रति लीटर
  • चेन्नई: पेट्रोल ₹100.85, डीजल ₹92.81 प्रति लीटर
  • गुरुग्राम: पेट्रोल ₹95.57, डीजल ₹87.83 प्रति लीटर
  • नोएडा: पेट्रोल ₹94.90, डीजल ₹87.81 प्रति लीटर
  • अहमदाबाद: पेट्रोल ₹94.63, डीजल ₹90.61 प्रति लीटर
  • लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69, डीजल ₹87.81 प्रति लीटर
  • पटना: पेट्रोल ₹105.23, डीजल ₹91.49 प्रति लीटर
  • पुणे: पेट्रोल ₹103.95, डीजल ₹90.03 प्रति लीटर

राज्यों के अनुसार औसत दाम: State-Wise Average Fuel Prices

  • उत्तर प्रदेश: पेट्रोल ₹94.69, डीजल ₹87.81 प्रति लीटर
  • बिहार: पेट्रोल ₹105.23, डीजल ₹91.49 प्रति लीटर
  • हरियाणा: पेट्रोल ₹95.95, डीजल ₹88.40 प्रति लीटर
  • राजस्थान: पेट्रोल ₹104.72, डीजल ₹90.21 प्रति लीटर
  • मध्य प्रदेश: पेट्रोल ₹106.52, डीजल ₹91.89 प्रति लीटर
  • आंध्र प्रदेश: पेट्रोल ₹109.65, डीजल ₹97.47 प्रति लीटर
  • गोवा: पेट्रोल ₹97.30, डीजल ₹89.04 प्रति लीटर
  • गुजरात: पेट्रोल ₹94.94, डीजल ₹90.61 प्रति लीटर
  • कर्नाटक: पेट्रोल ₹102.92, डीजल ₹90.99 प्रति लीटर
  • केरल: पेट्रोल ₹107.48, डीजल ₹96.48 प्रति लीटर
  • तमिलनाडु: पेट्रोल ₹100.85, डीजल ₹92.40 प्रति लीटर
  • पश्चिम बंगाल: पेट्रोल ₹105.45, डीजल ₹92.02 प्रति लीटर

एक्साइज ड्यूटी घटने के बाद भी पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं हुआ?

आम उपभोक्ताओं के मन में बड़ा सवाल यह है कि सरकार द्वारा टैक्स घटाने के बाद भी पंप पर कीमतें कम क्यों नहीं हुईं? दरअसल, IOCL, BPCL और HPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) इस टैक्स राहत का फायदा आम जनता तक पहुंचाने के बजाय अपने पुराने घाटे (Under-recoveries) को भरने में इस्तेमाल कर रही हैं।

दूसरी ओर, नायरा एनर्जी (Nayara Energy) जैसे प्राइवेट रिटेलर्स ने अपनी लागत निकालने के लिए पेट्रोल में ₹5 और डीजल में ₹3 तक की बढ़ोतरी कर दी है। ऐसे में सरकारी पंपों पर रेट तो स्थिर हैं, लेकिन निजी पंपों और प्रीमियम फ्यूल वेरिएंट्स पर ग्राहकों को पहले से ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है।

How much Oil and LPG stock does India have? भारत के पास कितने दिनों का स्टॉक बचा है?

मिडल-ईस्ट (Middle East) में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल सप्लाई को लेकर है। केंद्र सरकार ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और घबराने (Panic Buying) की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

वर्तमान में भारत के पास अपनी रणनीतिक भंडार (SPR) और तेल कंपनियों (OMCs) का स्टॉक मिलाकर लगभग 74 दिनों का तेल भंडार सुरक्षित है। वहीं, रसोई गैस की बात करें तो देश के 33 करोड़ परिवारों के लिए 30 दिनों का LPG सिलेंडर स्टॉक मौजूद है। सरकार ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए घरेलू उत्पादन में 25% बढ़ोतरी के कड़े निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

पेट्रोल-डीजल के दाम कैसे तय होते हैं और क्यों बदलती हैं कीमतें?

अक्सर लोग पूछते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल होते ही भारत में तेल के दाम क्यों प्रभावित होते हैं? दरअसल, भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करता है, इसलिए विदेशी युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ता है।

ईंधन की अंतिम कीमत मुख्य रूप से चार कारकों पर टिकी होती है: कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दर, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स (Excise Duty और VAT), और रिफाइनिंग व परिवहन लागत। पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में आश्वस्त किया है कि सरकार नए देशों के साथ तेल आयात के कॉन्ट्रैक्ट (Contracts) तेजी से साइन कर रही है ताकि सप्लाई चैन में कोई रुकावट न आए।



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PM Kisan Yojana: 31 मार्च से पहले कर लें यह काम, वरना अटक जाएगी पीएम किसान की अगली किस्त


India

oi-Kumari Sunidhi Raj

PM Kisan Yojana: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। अगर आपने इस महीने के अंत तक अपनी फॉर्मर रजिस्ट्री पूरी नहीं की, तो सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो सकता है। जिले में जुलाई 2024 से चल रहे इस सघन अभियान के बावजूद, अब भी 25 प्रतिशत किसान पंजीकरण की दौड़ में पीछे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, कुल 2,51,390 पंजीकृत किसानों में से केवल 1,88,708 की रजिस्ट्री हो सकी है, जबकि 62,682 किसान अब भी अधर में लटके हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि मार्च की समयसीमा बीतने के बाद न केवल पीएम किसान सम्मान निधि, बल्कि फसल बीमा, फसली ऋण और आपदा राहत जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं पर भी संकट गहरा सकता है। तकनीकी खामियों और दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण डेढ़ साल बाद भी यह लक्ष्य अधूरा है।

PM Kisan Samman Nidhi Yojana

75% काम पूरा, लेकिन बाकी किसानों की बढ़ी धड़कनें

जिले में कृषि विभाग और राजस्व टीम के तमाम प्रयासों के बावजूद लक्ष्य अब भी दूर नजर आ रहा है। जिले की पांचों तहसीलों में लगभग 75 प्रतिशत किसानों ने ही अब तक अपनी यूनिक आईडी (फॉर्मर आईडी) बनवाई है। शेष 62,682 किसान इस प्रक्रिया से बाहर होने के कारण खासे परेशान हैं। प्रशासन ने दिसंबर से विशेष शिविर लगाए और कर्मचारियों को घर-घर भी भेजा, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।

इन 3 मुख्य वजहों से अटका है पंजीकरण का पहिया

किसानों की रजिस्ट्री न हो पाने के पीछे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर तकनीकी और कागजी बाधाएं भी हैं:

  • नाम में अंतर: बड़ी संख्या में किसानों के आधार कार्ड और भूलेख (खतौनी) में दर्ज नाम अलग-अलग हैं, जिससे वेरिफिकेशन फेल हो रहा है।
  • गायब भूलेख: जिले के कई गांवों का रिकॉर्ड अब तक ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट नहीं हुआ है, जिससे डेटा मिलान संभव नहीं हो पा रहा।
  • सर्वर और डेटा अपडेट: तकनीकी खराबी के कारण कई बार आवेदन करने के बाद भी पोर्टल पर डेटा अपडेट नहीं हो रहा है, जिससे किसान चक्कर काटने को मजबूर हैं।

क्यों अनिवार्य है फॉर्मर रजिस्ट्री?

सरकार का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाना है। फॉर्मर रजिस्ट्री के माध्यम से प्रत्येक किसान का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा, जिससे:

  • बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और लाभ सीधे पात्र किसानों को मिलेगा।
  • जमीन से जुड़े विवादों का निपटारा आसान होगा।
  • खाद, बीज और सब्सिडी का वितरण अधिक व्यवस्थित होगा।

With AI Inputs

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हिमाचल में बर्फ में फंसा केरल का ट्रैकर: अकेले व्यासकुंड पहुंचा, मनाली पुलिस ने रेस्क्यू किया, पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया – Manali News




हिमाचल प्रदेश कुल्लू जिले के मनाली क्षेत्र में व्यासकुंड के पास भारी बर्फबारी के बीच फंसे केरल के एक युवा ट्रैकर को पुलिस ने बीती शाम को सुरक्षित रेस्क्यू किया। युवक की पहचान केरल के मलप्पुरम निवासी 20 वर्षीय अर्शद नरिक्कोट्टु मेचेरी के रूप में हुई है, जो अकेले ट्रैकिंग पर निकले थे। पुलिस को 112 हेल्पलाइन पर मिली सूचना के अनुसार, ट्रैकिंग के दौरान अर्शद के जूते बर्फ में गुम हो गए या भीग गए, जिससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गए और बर्फ में फंस गए। सूचना मिलते ही अटल टनल रोहतांग की सुरक्षा में तैनात सब-इंस्पेक्टर राज कुमार अपनी टीम के साथ तुरंत व्यासकुंड की ओर रवाना हुए। पुलिस टीम ने धुंधी ब्रिज से करीब 2 से 3 किलोमीटर ऊपर बर्फ के बीच फंसे युवक का पता लगाया। पुलिस ने रेस्क्यू के बाद उपचार को भर्ती कराया रेस्क्यू टीम ने कठिन परिस्थितियों में ऑपरेशन चलाते हुए अर्शद को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस कर्मियों ने उन्हें पीठ पर उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया और बाद में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। युवक की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। बिना गाइड और प्रशासन को सूचित किए बगैर ट्रेकिंग पर न जाए: DSP डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि ट्रैकर को सुरक्षित बचा लिया गया है। उन्होंने पर्यटकों से अपील की है कि वे बिना गाइड और प्रशासन को सूचित किए ट्रैकिंग पर न जाएं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मनाली क्षेत्र के ट्रैकिंग रूटों पर भारी बर्फ जमी हुई है, जिससे ट्रैकिंग करना जोखिम भरा हो सकता है।



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KP Oli Arrested: बालेन शाह के पीएम बनते ही नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली गिरफ्तार, क्या हैं आरोप?


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‘बचपना शुडन्ट रिटायर’: बुढ़ापे को फिर से परिभाषित करने का आह्वान; खुशी, सम्मान, बचाव व देखभाल के लिए मुहिम


वापी में मेरिल के ग्लोबल हेडक्वार्टर के अपने पहले दौरे पर, पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने “बचपना शुडन्ट रिटायर” विषय पर दिल को छू लेने वाली और प्रेरणा देने वाली बातचीत की। “बचपना शुडन्ट रिटायर” मेरिल के देश भर में चल रहे पब्लिक हेल्थ मूवमेंट, “ट्रीटमेंट ज़रूरी है” पर आधारित है, जिसे समय पर डायग्नोसिस और एडवांस्ड मेडिकल थेरेपी तक पहुंच के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था।

इस बड़े मूवमेंट को और आगे बढ़ाते हुए, “बचपना शुडन्ट रिटायर” ट्रीटमेंट ज़रूरी है के तहत एक खास सीनियर सिटिज़न हेल्थ पहल शुरू की गई है। यह कैंपेन इस बात पर ज़ोर देता है कि जल्दी पता लगाने, बचाव के लिए स्क्रीनिंग और नए इलाज के तरीकों तक पहुंच से कार्डियक, ऑर्थोपेडिक और उम्र से जुड़ी दूसरी बीमारियों में नतीजों में काफ़ी सुधार हो सकता है- आखिर में, सुनहरे वर्षों में आज़ादी और ज़िंदगी की क्वालिटी बनी रहती है। यह कैंपेन एक आसान लेकिन मज़बूत सोच को बढ़ावा देता है- उम्र भले ही बढ़ती जाए, लेकिन मज़ाक, उत्सुकता और खुशी की भावना कभी कम नहीं होनी चाहिए। इस बातचीत में ज़िंदगी के हर पड़ाव पर इज़्ज़त और उत्साह बनाए रखने की अहमियत पर ज़ोर दिया गया , खासकर इसलिए क्योंकि भारत में बुज़ुर्गों में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ लगातार बढ़ रही हैं।

कैंपेन के गहरे मकसद के बारे में बात करते हुए, MS धोनी ने ज़ोर देकर कहा, “ मेरा हमेशा से मानना रहा है कि अपनी सेहत का ध्यान रखना सबसे ज़रूरी कामों में से एक है जो आप कर सकते हैं- अपने लिए और उन लोगों के लिए जो आपसे प्यार करते हैं। हम सबकी ज़िम्मेदारी है, खासकर नई पीढ़ी की, कि हम यह पक्का करें कि हमारे माता-पिता और दादा-दादी को वह देखभाल, ध्यान और सपोर्ट मिले जिसके वे हकदार हैं। ट्रीटमेंट ज़रूरी है जैसी पहल इसी दिशा में एक कदम है, और मुझे इसका हिस्सा बनकर खुशी हो रही है।”

परिवारों के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन

पूरे देश में डिजिटल पार्टिसिपेशन मूवमेंट के तौर पर सोचा गया यह कैंपेन, युवा भारतीयों को अपने दादा-दादी के साथ अच्छा समय बिताने के लिए बढ़ावा देता है — चाहे बचपन का कोई खेल दोबारा खेलकर, कोई हॉबी शेयर करके, या बस रोज़मर्रा के किसी खुशी भरे पल को कैद करके। इमोशनल कनेक्शन को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर अवेयरनेस के साथ मिलाकर, यह पहल इस बात को पक्का करती है कि इमोशनल वेलबीइंग और फिजिकल हेल्थ साथ-साथ चलते हैं।

भारत में जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य स्थितियों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है जो स्वस्थ उम्र बढ़ने को काफी प्रभावित करती हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज अध्ययन के अनुसार, भारत में होने वाली सभी मौतों में से लगभग 28% हृदय रोगों के कारण होती हैं, जो उन्हें देश में मृत्यु दर का प्रमुख कारण बनाता है। साथ ही, बदलती जीवनशैली और कम होती शारीरिक गतिविधियों ने मोटापे को बढ़ा दिया है, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) की रिपोर्ट के अनुसार 24% से अधिक भारतीय वयस्क अब अधिक वजन वाले या मोटे हैं।

ये कारक गतिशीलता संबंधी विकारों में वृद्धि में भी योगदान दे रहे हैं- इंडियन जर्नल ऑफ ऑर्थोपेडिक्स और NIH शोध डेटाबेस में प्रकाशित अध्ययनों का अनुमान है कि घुटने का ऑस्टियोआर्थराइटिस भारत में लगभग 4 में से 1 वयस्क को प्रभावित करता है, जो इसे विकलांगता का एक प्रमुख कारण बनाता है और देश में घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी का एक प्रमुख चालक बनाता है। ये सभी रुझान मिलकर रोगनिवारक स्क्रीनिंग, समय पर डॉक्टरी सलाह और उन्नत उपचारों तक पहुँच की बढ़ती ज़रूरत को उजागर करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ और अधिक सक्रिय जीवन भी मिले।

इस कैंपेन को ‘ट्रीटमेंट ज़रूरी है’ प्लेटफॉर्म और मेरिल के ऑफिशियल मीडिया हैंडल पर बढ़ाया जाएगा। इसे प्रिंट, टेलीविज़न, रेडियो, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैली एक बड़ी मल्टी-चैनल आउटरीच स्ट्रेटेजी का सपोर्ट मिलेगा, ताकि यह पूरे देश में आसानी से दिखे। टारगेटेड डिजिटल व्यूअरशिप माइलस्टोन, मेज़रेबल एंगेजमेंट मेट्रिक्स और क्यूरेटेड वीडियो बाइट्स और एक्सपर्ट की बातचीत के ज़रिए स्ट्रेटेजिक KOL पार्टिसिपेशन के साथ, इस मूवमेंट का मकसद सीनियर हेल्थ और एक्टिव एजिंग के बारे में लगातार, मेजरेबल बातचीत शुरू करना है।

जैसे-जैसे भारत की आबादी लगातार बूढ़ी हो रही है, हेल्दी और इज्ज़तदार बुढ़ापे के बारे में बातचीत और भी ज़रूरी होती जा रही है। “बचपना शुडन्ट रिटायर” यह याद दिलाता है कि उम्र बढ़ने का मतलब जिंदगी के जोश से दूर जाना नहीं है- और समय पर हेल्थकेयर के बारे में जानकारी उस जोश को बनाए रखने में बहुत ज़रूरी भूमिका निभाती है। यह कैंपेन देश भर के परिवारों से अपनी कहानियाँ शेयर करके इसमें हिस्सा लेने के लिए कहता है- छोटे वीडियो रिकॉर्ड करके, दिल से श्रद्धांजलि पोस्ट करके, या अपने दादा-दादी के साथ की प्यारी यादों को सेलिब्रेट करके। ‘ट्रीटमेंट ज़रूरी है’ प्लेटफॉर्म और कैंपेन मैसेजिंग के ज़रिए सोशल मीडिया पर इन पलों को शेयर करके, लोग अपनी यादों को एक ऐसी नेशनल कहानी में बदल सकते हैं जो बुज़ुर्गों की सेहत, सम्मान और साथ रहने को बढ़ावा दे।



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