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Lucknow Petrol Crisis: पेट्रोल की किल्लत? बाइक में सिर्फ ₹200-कार में ₹1000 का तेल! DM बोले- मांग 35% बढ़ी


Uttar Pradesh

oi-Divyansh Rastogi

Lucknow Petrol Crisis Update: अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान जंग और वैश्विक तेल संकट की खबरों के बीच लखनऊ में पेट्रोल-डीजल को लेकर अफवाहों ने 26 मार्च की देर रात 12:25 बजे तक हंगामा मचा रखा है। ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं। कई जगहों पर पेट्रोल खत्म हो गया है तो कुछ पंपों पर बाइक वालों को सिर्फ 200 रुपये और कार वालों को 1000 रुपये तक का ही तेल मिल रहा है।

लोग टैंक फुल करवाने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। लंबी-लंबी कतारों में दो-दो घंट से लगी गाडियों ने पुलिस की तैनाती को भी मजबूर कर दिया है। लखनऊ DM और ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर बबलू कुमार खुद मैदान में उतरे। कहा कि पेट्रोल-डीजल की कोई लिमिट नहीं लगाई गई है। आइए लखनऊ का हाल विस्तार से जानें, कहां-कहां चल रही है अफरा-तफरी?

Lucknow Petrol Crisis

Lucknow Petrol Shortage Chaos: कहां-कहां पेट्रोल की किल्लत से अफरा-तफरी?

उधर अमेरिका और ईरान में युद्ध हो रहा है

इधर लखनऊ वाले पेट्रोल डीजल के युद्ध करने पर उतारू है #Lucknow pic.twitter.com/6R5s1KkZuH

— Shweta Sharma (@ShwetaaaSharmaa) March 26, 2026 “>

लाल कुआं (मालती पंप), ऐशबाग पुल (अग्रवाल पंप), अशोक मार्ग (IOCL), हजरतगंज (तलवार पंप), गोमती नगर (कोको पंप), मटियारी चौराहा, इंदिरानगर, बादशाहनगर, पॉलिटेक्निक चौराहा- इन सभी जगहों पर पेट्रोल खत्म या बेहद सीमित।

  • विभूतिखंड (कोको पंप) – बाइक को अधिकतम 5 लीटर।
  • आईटी चौराहा (HP पंप) – बाइक 200 रुपये, कार 500 रुपये।
  • देवा रोड (सुपर इंडिया) – प्रति वाहन 100 रुपये पेट्रोल, 500 रुपये डीजल।
  • नायरा पंप – सुबह 11 बजे के बाद बिक्री बंद।
  • कुछ पंपों पर पावर पेट्रोल बेचा जा रहा है क्योंकि सादा पेट्रोल की किल्लत है।

राजधानी लखनऊ के इंदिरानगर, बादशाहनगर और पॉलिटेक्निक चौराहे पेट्रोल-डीजल खत्म हो गया। जिन लोगों का नंबर आ गया है। ज्यादातर टंकी फुल करा रहे हैं। लोग पैनिक हैं। प्रशासन के समझाने का कोई असर नहीं हो रहा।

लोग मुस्करा नहीं पा रहे हैं क्योंकि लखनऊ में हैं।https://t.co/xDfkrX1dgF pic.twitter.com/S6FjEduIwx

— Sandeep Singh (@SandeepReports) March 26, 2026 “>

रात 11 बजे के बाद भी मुंशीपुलिया, बुलाकी अड्डा, जवाहर भवन, सिंकदाबाद चौराहा पर कतारें जारी रहीं।

खुद मैदान में उतरे DM, बोले- आपूर्ति जारी है

जिला मजिस्ट्रेट विशाख जी. अय्यर ने साफ कहा कि पेट्रोल पंपों पर मांग में 30-35% की बढ़ोतरी हुई। मैंने तेल विपणन कंपनियों के साथ बैठक कर ली है। कोई कमी नहीं है। लोग तेल का भंडारण न करें। पुलिस और प्रशासन हर पंप पर नजर रखे हुए हैं।

DM और ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर बबलू कुमार खुद मैदान में उतरे। उन्होंने कैंट, हजरतगंज और अन्य पंपों का निरीक्षण किया, लोगों से बात की और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कोई लिमिट नहीं लगाई गई है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ समन्वय से आपूर्ति जारी है। किसी भी पंप पर कमी नहीं आने दी जाएगी।

#WATCH लखनऊ(उत्तर प्रदेश): जिला मजिस्ट्रेट लखनऊ विशाख जी. अय्यर ने कहा, “पेट्रोल पंपों पर मांग बढ़ते ही तेल विपणन कंपनियों के साथ बैठक कर ली गई। जनपद लखनऊ के पेट्रोल पंपों पर कल लगभग 30-35% मांग बढ़ी। मैं सभी से अनुरोध करूंगा कि किसी भी तरह की कमी नहीं है। तेल का भंडारण न करें।… pic.twitter.com/147sY0QLBA

— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 26, 2026 “>

जमीनी हकीकत डराने वाली

जमीनी स्तर पर हालात ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, और यही वजह है कि अफवाहों का असर साफ दिखाई दे रहा है। Oneindia Hindi की टीम को लखनऊ के नक्खास इलाके के रहने वाले असद रिजवी बताते हैं कि जब वह कोनेश्वर पेट्रोल पंप पर अपनी कार में पेट्रोल भरवाने पहुंचे, तो वहां पहले से ही लंबी-लंबी कतारें लगी थीं। करीब दो घंटे इंतजार करने के बाद उनका नंबर आया, लेकिन उन्हें सिर्फ 500 रुपये का ही पेट्रोल मिल पाया।

सरकार ने कहा सब सामान्य है.. फिर भी लखनऊ में रात में भीड़ बढ़ रही है पेट्रोल पंप पर pic.twitter.com/6sNgf4pq7R

— AMETHI LIVE (@AmethiliveCom) March 26, 2026 “>

ऐसा ही नजारा शहर के कई बड़े इलाकों में देखने को मिला। बुलाकी अड्डा चौराहा, जवाहर भवन, हजरतगंज चौराहा, सिंकदराबाद चौराहा और तलवार पेट्रोल पंप जैसे व्यस्त स्थानों पर भी लोगों की लंबी लाइनें लगी रहीं। वहीं नक्खास निवासी आरिफ अली ने बताया कि बुलाकी अड्डा चौराहे के पास पेट्रोल पंप पर बाइक वालों को सिर्फ 200 रुपये तक और कार वालों को 1000 रुपये तक ही पेट्रोल दिया जा रहा था। यानी साफ है कि जमीनी स्तर पर लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ा, लेकिन इसकी बड़ी वजह अचानक बढ़ी भीड़, न कि असली सप्लाई की कमी।

क्यों फैली अफवाह?

ईरान-इजरायल जंग के चलते होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल की खबरों ने लोगों में घबराहट पैदा कर दी। सोशल मीडिया पर ‘पेट्रोल खत्म हो रहा है’ वाली पोस्ट्स वायरल होने से पैनिक बाइंग शुरू हो गई। नतीजा ये हुआ कि सामान्य दिनों की तुलना में 35% ज्यादा मांग।

कुछ जगहों पर स्थिति सामान्य

चारबाग (KKC पंप), ऐशबाग, कैंट सदर, गोमती नगर (शक्ति और RR पंप), माल क्षेत्र। यहां बिना किसी सीमा के पेट्रोल-डीजल मिल रहा है।

प्रशासन की तैयारियां

  • कई पंपों पर पुलिस और PAC तैनात।
  • DM ने सभी तेल कंपनियों को लगातार सप्लाई बढ़ाने के निर्देश दिए।
  • अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखी जा रही है।

अफवाह सबसे बड़ा दुश्मन है। केंद्र और राज्य सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि देशभर में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। घबराएं नहीं, धैर्य रखें।





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उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने ICAR–सेंट्रल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट, कटक का किया दौरा


Uttarakhand

oi-Pallavi Kumari

उत्तराखंड के प्रमुख मीडिया संस्थानों के 13 वरिष्ठ पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज ICAR-Central Rice Research Institute (CRRI), Cuttack का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान में धान उत्पादन से जुड़ी अनुसंधान गतिविधियों, विकास कार्यक्रमों और आधुनिक तकनीकी नवाचारों की जानकारी प्राप्त की।

इस प्रतिनिधिमंडल के साथ Press Information Bureau (PIB), देहरादून के सहायक निदेशक श्री संजीव कुमार सुंद्रीयाल तथा Press Information Bureau (PIB), भुवनेश्वर के सहायक निदेशक श्री महेंद्र प्रसाद जेना भी मौजूद रहे।

uttarakhand media delegation

संस्थान के निदेशक डॉ. प्रताप भट्टाचार्य ने पत्रकारों का स्वागत करते हुए CRRI की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान ने अब तक 194 धान की किस्में विकसित की हैं, जिनमें प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने वाली और बायोफोर्टिफाइड किस्में भी शामिल हैं। इन किस्मों का उपयोग देश के कुल धान क्षेत्र के लगभग 22 प्रतिशत हिस्से में किया जा रहा है, जिससे किसानों को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ मिला है।

डॉ. भट्टाचार्य ने संस्थान द्वारा विकसित प्रमुख नवाचारों के बारे में भी जानकारी दी, जिनमें जीनोम एडिटिंग टूल (TnpB), एआई आधारित प्रिसीजन एग्रीकल्चर, ड्रोन तकनीक, धान के भूसे के पुनः उपयोग की तकनीक, RiceXpert एडवाइजरी प्लेटफॉर्म, मीथेन उत्सर्जन कम करने वाले मेथेनोट्रॉफ फॉर्मुलेशन तथा नाइट्रोजन उपयोग दक्षता बढ़ाने वाली तकनीकें शामिल हैं।

इंटरएक्टिव सत्र के दौरान उन्होंने पत्रकारों के जलवायु अनुकूल कृषि, जैविक खेती, सुगंधित एवं GI टैग वाले चावल तथा लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली धान की किस्मों से जुड़े सवालों के जवाब भी दिए।

प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और अनुसंधान खेतों का भी दौरा किया तथा चल रहे प्रयोगों और नई तकनीकों को करीब से देखा। इस दौरे से मीडिया प्रतिनिधियों को CRRI के योगदान की बेहतर समझ मिली और कृषि अनुसंधान व तकनीकी नवाचारों को किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए संस्थान और मीडिया के बीच समन्वय और मजबूत हुआ।



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सीबीआई ने म्यांमार में साइबर गुलामी केंद्रों में भारतीयों की तस्करी करने के आरोप में मुंबई के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।


India

-Oneindia Staff

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मुंबई निवासी सुनील नेल्लाथु रामकृष्णन को गिरफ्तार किया है, जिस पर एक मानव तस्करी रैकेट का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। इस रैकेट पर कथित तौर पर म्यांमार में साइबर धोखाधड़ी के संचालन के लिए भारतीय नागरिकों को ले जाने का आरोप है। अधिकारियों के अनुसार, इन व्यक्तियों को आकर्षक नौकरियों के झूठे वादे करके बहकाया गया और बाद में धोखाधड़ी की गतिविधियों में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया।

 सीबीआई ने साइबर गुलामी तस्करी के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया

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जांचों से संगठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेटों के संचालन का खुलासा हुआ है। ये समूह पीड़ितों को थाईलैंड में नौकरी के प्रस्तावों का लालच देते हैं, केवल उन्हें दिल्ली से बैंकॉक और फिर गुप्त रूप से म्यांमार भेजने के लिए। म्यांमार में, विशेष रूप से म्यावाडी क्षेत्र के केके पार्क में, पीड़ितों को साइबर धोखाधड़ी में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसमें डिजिटल गिरफ्तारी और क्रिप्टोकरेंसी निवेश धोखाधड़ी शामिल है।

प्रताड़ना और शोषण

पीड़ितों को अवैध नजरबंदी, डराने-धमकाने और शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उनकी गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रतिबंधित किया जाता है, क्योंकि उन्हें भारत सहित वैश्विक पीड़ितों को निशाना बनाने वाले विभिन्न साइबर घोटालों को अंजाम देने के लिए मजबूर किया जाता है। सीबीआई की जांच में मार्च और नवंबर 2025 में थाईलैंड से प्रत्यर्पित किए गए पीड़ितों के विस्तृत साक्षात्कार शामिल थे।

मुख्य सूत्रधार की पहचान

जांच में सुनील उर्फ ​​कृष्ण को तस्करी रैकेट के भीतर एक प्रमुख सूत्रधार के रूप में उजागर किया गया। दक्षिण पूर्व एशिया में पीड़ितों के अवैध परिवहन और शोषण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। सुनील को निगरानी में रखा गया और मुंबई पहुंचने पर गिरफ्तार कर लिया गया। उनके आवास पर तलाशी के दौरान म्यांमार और कंबोडिया में तस्करी के संचालन से जुड़े डिजिटल सबूत मिले।

सीबीआई इन आपराधिक नेटवर्क को खत्म करने और जिम्मेदार लोगों को न्याय दिलाने के लिए अपने प्रयासों को जारी रखे हुए है, ताकि विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

With inputs from PTI



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ईरान में जंग से उर्वरक संकट: खेती पर असर से महंगी हो सकती हैं खाने-पीने की चीजें, चिंता में दुनियाभर के किसान


पश्चिम एशिया में जारी ईरान संघर्ष का असर अब वैश्विक कृषि क्षेत्र पर भी साफ दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से उर्वरकों की कमी गहराने लगी है, जिससे दुनियाभर के किसानों की लागत बढ़ रही है और आने वाले समय में खाद्य कीमतों में तेजी की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की ओर से जलडमरूमध्य से गुजरने वाली शिपमेंट को सीमित करने के कारण वैश्विक उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह जलमार्ग दुनिया के करीब 20% तेल और लगभग एक-तिहाई उर्वरक व्यापार के लिए अहम है।

सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ रहा है?

सबसे ज्यादा असर नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों, खासकर यूरिया पर पड़ा है, जिसकी वैश्विक आपूर्ति का करीब 30% हिस्सा इस संकट से प्रभावित बताया जा रहा है। यूरिया की आपूर्ति में देरी और एलएनजी की बढ़ती कीमतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि एलएनजी इसका प्रमुख कच्चा माल है।

विकासशील देशों के किसानों के लिए गंभीर खतरा

वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कार्ल स्काउ ने चेतावनी दी है कि यह संकट खासकर विकासशील देशों के किसानों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि सबसे खराब स्थिति में फसल उत्पादन घट सकता है या फसलें खराब हो सकती हैं, जबकि बेहतर स्थिति में भी बढ़ी लागत का असर खाद्य कीमतों पर दिखेगा।

अफ्रीका और एशियाई देश खाड़ी पर उर्वरक के लिए निर्भर

फॉस्फेट उर्वरक की आपूर्ति भी दबाव में है। सऊदी अरब वैश्विक फॉस्फेट उत्पादन का बड़ा हिस्सा करता है, वहीं सल्फर, जो उर्वरक का अहम घटक है। इनकी सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।

अफ्रीका और एशिया के कई देश, जो खाड़ी क्षेत्र से उर्वरक आयात पर निर्भर हैं, पहले से ही संकट का सामना कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, इथियोपिया अपनी 90% से अधिक नाइट्रोजन उर्वरक जरूरत खाड़ी क्षेत्र से पूरी करता है, जहां आपूर्ति पहले से ही प्रभावित है।

उर्वरक न मिलने से क्या होगा?

यह संकट ऐसे समय आया है जब उत्तरी गोलार्ध में बुआई का मौसम शुरू हो चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर उर्वरक न मिलने से फसलों की शुरुआती वृद्धि प्रभावित होती है, जिससे उत्पादन में गिरावट आ सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह स्थिति बनी रहती है तो किसान कम उर्वरक का उपयोग करेंगे या कम लागत वाली फसलों की ओर रुख करेंगे, जिससे उत्पादन घटेगा और उपभोक्ताओं के लिए खाद्य महंगाई बढ़ सकती है।

चीन और रूस जैसे बड़े उत्पादक देशों से भी तत्काल राहत की उम्मीद कम है, क्योंकि चीन घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि रूस की उत्पादन क्षमता पहले से ही उच्च स्तर पर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारों को इस संकट से निपटने के लिए सब्सिडी, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और निर्यात नियंत्रण जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। कुल मिलाकर, यह संकट वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बनता जा रहा है।



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कैथोलिक बिशप सम्मेलन ने अल्पसंख्यक संस्थानों पर एफसीआरए विधेयक के प्रभाव को लेकर चिंता जताई।


India

-Oneindia Staff

भारत के कैथोलिक बिशप सम्मेलन (CBCI) ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों के संबंध में महत्वपूर्ण चिंताएं व्यक्त की हैं। लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक को CBCI द्वारा संभावित रूप से खतरनाक माना जा रहा है, जिसके ऐसे निहितार्थ हो सकते हैं जो संवैधानिक रूप से गारंटीकृत स्वतंत्रताओं को खतरे में डाल सकते हैं। संगठन को डर है कि ये बदलाव अल्पसंख्यक संस्थानों और नागरिक समाज संगठनों के संचालन में कार्यकारी शक्ति के अत्यधिक हस्तक्षेप का कारण बन सकते हैं।

 एफसीआरए विधेयक अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए खतरा है

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एक औपचारिक बयान में, CBCI ने उन प्रावधानों की आलोचना की जो केंद्र सरकार को लाइसेंस नवीनीकरण से इनकार करने या उन्हें रद्द करने का अधिकार देंगे। प्रस्तावित तंत्र सरकार को गैर-सरकारी संगठनों और अल्पसंख्यक निकायों के संस्थानों, धन, संपत्तियों और परिसंपत्तियों पर नियंत्रण लेने की अनुमति दे सकता है। CBCI का तर्क है कि ऐसे उपाय निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता करते हैं।

CBCI ने संसद में विधेयक पेश करने के पीछे के इरादे पर सवाल उठाया, यह सुझाव देते हुए कि कुछ सांसदों के विरोध के बावजूद यह एकतरफा किया गया था। संगठन ने मौलिक अधिकारों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर व्यापक परामर्श और विचार-विमर्श का आह्वान किया। इसने कहा कि वे प्रावधान जो केंद्र को FCRA पंजीकरण की समाप्ति पर विदेशी धन और परिसंपत्तियों का नियंत्रण लेने की अनुमति देते हैं, अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक हैं।

CBCI इन संशोधनों को अल्पसंख्यक संस्थानों को अत्यधिक कठोर नियामक ढांचे के तहत रखने के प्रयास के रूप में देखता है। ऐसे कदमों को लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करने के रूप में देखा जाता है। संगठन ने सरकार से इन संशोधनों पर पुनर्विचार करने, विवादास्पद प्रावधानों को हटाने और सभी नागरिकों, विशेषकर अल्पसंख्यकों के लिए संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

प्रस्तावित संशोधनों का विवरण

विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026, बुधवार को लोकसभा में पेश किया गया। यह गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए एक नए प्राधिकरण के निर्माण द्वारा विदेशी-वित्त पोषित संगठनों पर निगरानी को महत्वपूर्ण रूप से कड़ा करने का प्रस्ताव करता है, जिसमें लाइसेंस खोने वाले गैर-लाभकारी संस्थाओं की संपत्तियों को जब्त करने और प्रबंधित करने की शक्तियां होंगी। इसमें एक नामित प्राधिकरण के माध्यम से विदेशी अंशदान और संपत्तियों के प्रभार, पर्यवेक्षण, प्रबंधन और निपटान के लिए एक व्यापक वैधानिक ढांचा शामिल है।

मुख्य चिंताएं विवरण
कार्यकारी शक्ति का अत्यधिक हस्तक्षेप अल्पसंख्यक संस्थानों के संचालन में संभावित हस्तक्षेप
लाइसेंस नवीनीकरण सरकार को लाइसेंस देने से इनकार करने या रद्द करने का अधिकार
संपत्ति पर नियंत्रण केंद्र विदेशी धन और संपत्तियों पर नियंत्रण कर सकता है
नियामक ढांचा अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए अत्यधिक कठोर

CBCI की चिंताएं नियामक निगरानी और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के बीच संतुलन पर व्यापक बहस को उजागर करती हैं। जैसे-जैसे चर्चा जारी है, हितधारकों से इन महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए संवाद में शामिल होने का आग्रह किया जाता है।

With inputs from PTI

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोप से संबंधित मामले में एफआईआर में दर्ज विसंगतियों को दूर करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।


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-Oneindia Staff

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस मामले के पंजीकरण में हुई महत्वपूर्ण कमियों को संबोधित किया है, जिसमें शिकायत और संबंधित एफआईआर के बीच विसंगतियों पर प्रकाश डाला गया है। शिकायत में बलात्कार का उल्लेख था, लेकिन एफआईआर में प्रासंगिक धाराओं को शामिल नहीं किया गया था। नतीजतन, उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासनिक वरिष्ठ अधिकारियों को इन विसंगतियों और उन्हें दूर करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

 इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एफआईआर में विसंगतियों पर ध्यान दिया

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न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), प्रमुख सचिव गृह और बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने और सुधारात्मक कार्रवाई लागू करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, अदालत ने डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह से पुलिस अधिकारियों को उचित एफआईआर पंजीकरण पर संवेदनशील बनाने के लिए एक तंत्र स्थापित करने का आग्रह किया है। बरेली के एसएसपी को इन कमियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का काम सौंपा गया है।

अदालत के निर्देश 17 मार्च के एक आदेश में जारी किए गए थे, जिसमें 27 अप्रैल से शुरू होने वाले सप्ताह के लिए आगे की सुनवाई निर्धारित है। ये टिप्पणियां शिवम् सिंह द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आईं, जिन्होंने बरेली के एक न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी 17 अप्रैल 2024 की चार्जशीट और 15 जनवरी 2025 के संज्ञान आदेश को रद्द करने की मांग की थी।

सिंह के खिलाफ मामला भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए (पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान, सिंह के वकील ने तर्क दिया कि एफआईआर में इन धाराओं के तहत कोई अपराध नहीं बताया गया है, यह दावा करते हुए कि पार्टियों के बीच कोई वैध विवाह मौजूद नहीं था, जिससे आरोप अस्पष्ट हो गए।

इसके विपरीत, राज्य ने कहा कि सिंह ने शादी और सरकारी नौकरी के झूठे वादे के तहत शिकायतकर्ता के साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए थे। दोनों पक्षों पर विचार करने के बाद, अदालत ने नोट किया कि एफआईआर और पीड़ित के बयान दोनों में बलात्कार के आरोप बताए गए थे, लेकिन ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया गया था, जिसे एक गंभीर चूक बताया गया।

अदालत ने लिखित शिकायत और एफआईआर के बीच विसंगतियों के बारे में चिंता व्यक्त की, जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाया। रमेश कुमारी बनाम राज्य एनसीटी दिल्ली का हवाला देते हुए, इसने दोहराया कि संज्ञेय अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, अदालत ने अधिकारियों को इन मुद्दों को हल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।

With inputs from PTI



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Andhra Bus Fire Tragedy: कैसे एक बस बनी आग का गोला? 5 महीने के बच्चे समेत 14 लोग जिंदा जले, तड़प-तड़पकर मौत


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pti-Divyansh Rastogi

Andhra Bus Fire Tragedy Reason: आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम में गुरुवार सुबह 5:30 से 6 बजे के बीच एक भयानक सड़क हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। तेलंगाना के जगतियाल से नेल्लोर जिले के कलिगिरी जा रही एक प्राइवेट बस ने पोडिली रोड पर रायवरम गांव के पास बजरी से लदे डंपर ट्रक (टिपर) से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का फ्यूल टैंक फट गया, डीजल फैल गया और पलक झपकते ही बस आग का गोला बन गई।

इस भीषण आग में 14 लोग जिंदा जल गए। मरने वालों में 5 महिलाएं और 5 महीने का एक नन्हा बच्चा भी शामिल है। बच्चे के पिता की भी मौत हो गई, जबकि मां बच गईं। ज्यादातर मृतक राजमिस्त्री और निर्माण क्षेत्र के मजदूर थे, जो अपने घर आंध्र प्रदेश लौट रहे थे।

Andhra Bus Fire Tragedy Reason

Andhra Bus Fire Tragedy: हादसा कैसे हुआ?

बस में कुल 41 यात्री सवार थे। बस विपरीत लेन में चली गई और सही लेन में आ रहे टिपर से टकराई। टक्कर ठीक ट्रक के डीजल टैंक के बीच में हुई। टैंक फटने से डीजल बस पर फैल गया और आग भड़क उठी। बस की बैटरी में भी आग लग गई, जिससे आग और तेजी से फैली। बस ड्राइवर का दावा है कि स्टीयरिंग व्हील जाम हो गया था, लेकिन पुलिस इसे जांच रही है।

क्या कहती है पुलिस?

पुलिस का कहना है कि बस ड्राइवर की गलती। मार्कापुरम जिले के प्रभारी पुलिस अधीक्षक वी. हर्षवर्धन राजू ने कहा, ‘बस अपनी लेन में रहने के बजाय विपरीत लेन में चली गई। ट्रक ड्राइवर ने बचने की कोशिश की, लेकिन बस ने उसे टक्कर मार दी।’

Andhra Bus Fire Burnt Alive: मरने वालों की स्थिति

  • कुल मौतें: 14 (5 महिलाएं + 5 महीने का बच्चा सहित)
  • ज्यादातर मृतक आंध्र प्रदेश के रहने वाले निर्माण मजदूर थे।
  • पहचान अभी पूरी नहीं हुई है। पुलिस DNA प्रोफाइलिंग कर रही है।
  • 22 यात्री घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

ड्राइवरों का क्या हुआ?

दोनों बस ड्राइवर बच गए। एक पुलिस हिरासत में, दूसरा अस्पताल में। टिपर का ड्राइवर और क्लीनर घटना के बाद फरार हो गए। बस ड्राइवर ने हादसे से सिर्फ आधा घंटा पहले स्टीयरिंग संभाला था।

सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया और मुआवजा

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हादसे पर गहरा दुख जताया।
  • PM मोदी: दुर्घटना को ‘दुखद’ बताया। PMNRF से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि घोषित की।
  • CM चंद्रबाबू नायडू: मृतकों के परिवार को ₹5 लाख और गंभीर घायलों को ₹2 लाख का मुआवजा। सभी घायलों को बेहतरीन मेडिकल सुविधा का निर्देश। टेली-कॉन्फ्रेंस कर अधिकारियों को तुरंत एक्शन का आदेश दिया।
  • राष्ट्रपति मुर्मू: X पर लिखा, ‘पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। घायलों के जल्द ठीक होने की कामना।’

तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी ने भी मृतकों-घायलों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए।



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Akhilesh Yadav Critiques Pooja Pal’s ‘Dhurandhar’ Comment as BJP Responds to SP’s History


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-Oneindia Staff

समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में पूर्व पार्टी विधायक पूजा पाल की आलोचना की, यह सुझाव देते हुए कि उन्हें गुमराह किया गया था। इसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कड़ी प्रतिक्रिया को जन्म दिया, जिसने सपा पर राजू पाल हत्या मामले से जुड़े हिंसक इतिहास का आरोप लगाया। यह आदान-प्रदान उत्तर प्रदेश में चल रहे राजनीतिक तनाव को उजागर करता है।

Akhilesh Yadav Critiques Pooja Pals Remarks

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“धुरंधर” के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, यादव ने व्यंग्य किया कि वह शायद और भी मजबूत शब्द का इस्तेमाल कर सकती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वरिष्ठ सपा नेता श्यामल लाल पाल के प्रभाव के बारे में चिंतित थी, यह दावा करते हुए कि सत्ताधारी दल के पास पाल समुदाय से उनका मुकाबला करने वाला कोई प्रमुख नेता नहीं है।

यादव ने आगे कहा कि पूजा पाल को गुमराह किया गया था और सवाल किया कि उनके विधायक फंड का उपयोग कैसे किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि महिला विधायक होने के नाते उन्हें शुरुआत में पार्टी से नहीं निकाला गया था, लेकिन बाद में आवश्यकता पड़ने पर उन्हें हटा दिया गया।

भाजपा की प्रतिक्रिया

इसके जवाब में, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सपा की आलोचना की, पूर्व विधायक राजू पाल की हत्या का जिक्र किया। चौधरी ने सपा पर राजू पाल की हत्या में शामिल लोगों को पनाह देने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान अपराधियों को राजनीतिक वैधता दी गई थी।

चौधरी ने यादव को चुनौती दी कि वह बताएं कि सपा शासन के दौरान अपराधी क्यों पनपे, जब राज्य अक्सर अराजकता से जुड़ा था। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाल समुदाय तथाकथित “नकली समाजवाद” से हटकर विकास और सुरक्षा पर केंद्रित राजनीति की ओर बढ़ गया है।

पूजा पाल के बारे में पृष्ठभूमि

कौशांबी जिले के चायल से पूर्व सपा विधायक पूजा पाल, पूर्व बसपा विधायक राजू पाल की विधवा हैं, जिनकी 2005 में प्रयागराज में हत्या कर दी गई थी। यह हमला गैंगस्टर-राजनेता अतीक अहमद से जुड़ा था। पिछले साल अगस्त में, योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा अपराधियों, जिसमें उनके पति के हत्यारे भी शामिल थे, के खिलाफ की गई कार्रवाई की प्रशंसा करने के बाद कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए उन्हें सपा से निष्कासित कर दिया गया था।

राजनीतिक निहितार्थ

भाजपा ने पूजा पाल की टिप्पणियों और बाद के घटनाक्रमों का उपयोग सपा के राजनीतिक रुख पर सवाल उठाने के लिए किया है। पार्टी का दावा है कि मतदाता तेजी से पार्टियों का मूल्यांकन शासन, कानून व्यवस्था और विकास के आधार पर कर रहे हैं। चौधरी ने सपा से आरोप लगाने के बजाय आत्मनिरीक्षण करने का आग्रह किया, इस बात पर जोर देते हुए कि जनता जानती है कि कौन सी पार्टियां विनाशकारी राजनीति पर विकास को प्राथमिकता देती हैं।

With inputs from PTI



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MP News : छिंदवाड़ा सड़क दुर्घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताया दुख, मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता के निर्देश


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा-नागपुर सड़क दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया, ऑन-साइट दौरे का आदेश दिया और अधिकारियों को सभी पीड़ितों के लिए मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मृतकों के परिवारों और गंभीर रूप से घायलों के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की गई, जिसमें राहत प्रयासों की निगरानी के लिए एक समर्पित नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया।

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-Oneindia Staff

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा के पास हुई भीषण सड़क दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने घटना में प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए दिवंगत नागरिकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

CM Directs Aid After Chhindwara Road Crash

मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा जिला प्रभारी मंत्री राकेश सिंह को निर्देश दिए हैं कि वे अपने कार्यक्रमों में परिवर्तन कर तत्काल मौके पर पहुंचें और प्रभावित लोगों से मुलाकात करें। साथ ही संबंधित अधिकारियों को घायलों के समुचित उपचार के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि गुरुवार शाम छिंदवाड़ा-नागपुर रोड पर हृदयविदारक सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें कई लोग हताहत हुए और अनेक घायल हुए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जबलपुर से डॉक्टरों का दल पैरामेडिकल स्टाफ के साथ छिंदवाड़ा और नागपुर भेजा गया है, ताकि घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।

सहायता राशि और मुफ्त इलाज की व्यवस्था

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार हादसे में मृतकों के निकटतम परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। वहीं गंभीर रूप से घायलों को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सभी घायलों का इलाज निःशुल्क किया जाएगा।

इस बीच राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जहां से घायलों के उपचार की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि राहत एवं उपचार कार्यों में किसी प्रकार की कमी न रहे।

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बांग्लादेश के राजदूत रियाज़ हामिदुल्लाह ने भारत के साथ संवेदनशील मुद्दों के सौहार्दपूर्ण समाधान का आह्वान किया।


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-Oneindia Staff

भारत और बांग्लादेश से आग्रह किया गया है कि वे चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करें, जिसमें बांग्लादेश के दूत, रियाज़ हमीदुल्लाह ने नई दिल्ली के साथ एक पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी के प्रति ढाका की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, हमीदुल्लाह ने मौजूदा मतभेदों से परे एक गहरे रिश्ते की आवश्यकता पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह और विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने भाग लिया।

 बांग्लादेश के राजदूत ने भारत के साथ मुद्दों के समाधान का आग्रह किया

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हमीदुल्लाह ने व्यापार, सुरक्षा, या प्राकृतिक संसाधनों को साझा करने में, चाहे जो भी हो, ईमानदारी और स्पष्टता के साथ कठिन मुद्दों को संबोधित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दोनों देश वैश्विक व्यवस्था में जटिलताओं और अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। आगे उथल-पुथल भरे समय की उम्मीद के बावजूद, बांग्लादेश खुले क्षेत्रीयतावाद और बहुपक्षवाद के मूल्यों को बनाए रखने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने का इच्छुक है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान, जिसका नेतृत्व मुहम्मद यूनुस ने किया था, बांग्लादेश और भारत के बीच संबंध काफी तनावग्रस्त हो गए थे। हालांकि, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के तारिक रहमान के प्रधान मंत्री बनने के बाद से, उनकी पार्टी की संसदीय चुनावों में जीत के बाद, संबंधों को फिर से बनाने के प्रयास जारी हैं।

प्रधानमंत्री रहमान ने कहा है कि बांग्लादेश भारत के साथ अपने संबंधों को उच्च महत्व देता है। उन्होंने गरिमा, समानता, आपसी विश्वास, सम्मान और साझा लाभों के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने के बारे में आशावाद व्यक्त किया। रहमान का मानना है कि आम लोगों को लाभ पहुंचाने वाले तरीकों से मुद्दों को संबोधित करने से दोनों राष्ट्रों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हो सकती हैं।

भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों में सहयोग और तनाव के विभिन्न चरण देखे गए हैं। पिछले प्रशासनों के तहत तनावपूर्ण संबंधों की अवधि के बाद अब संबंधों को मजबूत करने के हालिया प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों राष्ट्र अब विश्वास का पुनर्निर्माण और कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

भविष्य की संभावनाएं

जैसे-जैसे दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का सामना करना जारी रखते हैं, उनकी आबादी को लाभ पहुंचाने वाली साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक साझा प्रतिबद्धता है। आपसी सम्मान और साझा हितों पर जोर भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक आशाजनक भविष्य का सुझाव देता है।

With inputs from PTI



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