एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिले चंदे में 161% की बढ़ोतरी हुई है। BJP को सभी राष्ट्रीय दलों को मिलाकर मिले कुल चंदे से भी 10 गुना ज्यादा पैसा मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 हजार रुपए से ज्यादा के कुल चंदे की राशि 6,648.563 करोड़ रुपए रही, जो 11,343 दान से मिली। इसमें अकेले BJP को 6,074.015 करोड़ रुपए (5,522 दान) मिले। इसके बाद कांग्रेस को 517.394 करोड़ रुपए (2,501 दान) मिले। BJP को मिला चंदा कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), CPI(M) और नेशनल पीपल्स पार्टी (NPEP) इन सभी के कुल चंदे से 10 गुना से ज्यादा रहा। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने बताया कि उसे 20 हजार रुपए से ज्यादा का कोई चंदा नहीं मिला, जैसा कि वह पिछले 19 सालों से कहती आ रही है। BJP का चंदा 171% बढ़ा 2024-25 में चंदा 4,104.285 करोड़ रुपए बढ़ा। BJP का चंदा 171% बढ़कर 2,243.947 करोड़ से 6,074.015 करोड़ हो गया। कांग्रेस का चंदा भी 84% बढ़कर 281.48 करोड़ से 517.394 करोड़ हो गया। AAP को 27.044 करोड़ रुपए (244% बढ़ोतरी) और NPEP को 1.943 करोड़ रुपए (1,313% बढ़ोतरी) मिले। चंदे में सबसे बड़ा हिस्सा कंपनियों का रहा। कुल 6,128.787 करोड़ रुपए (92.18%) कॉर्पोरेट दान से आए, जबकि व्यक्तियों ने 505.66 करोड़ रुपए (7.61%) दिए। BJP को कॉर्पोरेट से 5,717.167 करोड़ रुपए मिले, जो बाकी सभी पार्टियों के कुल कॉर्पोरेट चंदे (411.62 करोड़ रुपए) से 13 गुना ज्यादा है। BJP को 345.94 करोड़ रुपए व्यक्तिगत दान से मिले। कांग्रेस को 383.86 करोड़ रुपए कंपनियों से और 132.39 करोड़ रुपए व्यक्तिगत दान से मिले।
दान में ये कंपनियां आगे रहीं
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ADR रिपोर्ट- भाजपा को सबसे ज्यादा चंदा मिला: अन्य दलों को मिले चंदे का 10 गुना, पार्टियों को इस साल 161% अधिक पैसा मिला
IPL 2026: बेंगलुरु मेट्रो का RCB vs SRH मैच के लिए बढ़ाया गया टाइम, यात्रियों को मिल रही ये सुविधाएं
Cricket
oi-Bhavna Pandey
IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का रोमांच 28 मार्च से शुरू होने जा रहा है, और इस बार चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) और सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के बीच पहला मैच एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है, वहीं उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेट्रो सेवाओं में भी खास बदलाव किए गए हैं ताकि देर रात तक भी घर लौटना आसान और सुरक्षित रहे।
देर रात तक चलेंगी मेट्रो
बुधवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मैच के दिन बेंगलुरु भर में मेट्रो सर्विस सामान्य दिनों की अपेक्षा देर तक चलेगी। मैच के दिन बेंगलुरु मेट्रो की टाइमिंग बढ़ा दी गई है। यात्रियों की सुविधा के लिए, टर्मिनल स्टेशनों से आखिरी ट्रेन रात 11 बजे की बजाय अगले दिन सुबह 2 बजे तक चलेगी। इसका मतलब है कि मैच खत्म होने के बाद भी फैंस आराम से मेट्रो पकड़ सकेंगे और उन्हें जल्दबाजी नहीं करनी पड़ेगी।

अलग-अलग स्टेशनों से आखिरी ट्रेन का समय
- व्हाइटफील्ड (कडुगोड़ी) से: रात 12:30 बजे
- चालघट्टा, सिल्क इंस्टीट्यूट, मदवारा से: 12:45 बजे
- बोम्मासंद्रा से: 1:00 बजे
- आरवी रोड से: 2:00 बजे
- वहीं, मैजेस्टिक स्टेशन से चारों दिशाओं में आखिरी ट्रेन 1:30 बजे मिलेगी।
मैच टिकट ही बना है मेट्रो पास
इस बार फैंस के लिए बड़ी राहत ये है कि आईपीएल मैच का टिकट ही मेट्रो पास की तरह काम करेगा। टिकट पर मौजूद QR कोड दिखाकर आप मेट्रो में दोतरफा यात्रा कर सकते हैं-चाहे टिकट मोबाइल में हो या प्रिंटेड।
सही स्टेशन से करें एंट्री
स्टेडियम पहुंचने के लिए फैंस को उनके गेट के हिसाब से मेट्रो स्टेशन चुनने की सलाह दी गई है।
क्यूबॉन रोड एंट्री: क्यूबॉन पार्क स्टेशन
लिंक रोड एंट्री: डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधान सौधा) स्टेशन
पार्किंग की गई खास व्यवस्था
भीड़ कम करने और यात्रा आसान बनाने के लिए कई मेट्रो स्टेशनों पर अतिरिक्त पार्किंग की सुविधा दी गई है।
दोपहिया: ₹30
कार: ₹60
फैंस से अपील गई है कि वे कब्बन पार्क और एमजी रोड जैसे स्टेशनों पर वाहन पार्क करें ताकि शहर के बीचोंबीच ट्रैफिक कम हो।
सुरक्षा के सख्त इंतजाम
बीएमआरसीएल ने साफ कहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरत पड़ने पर स्टेशनों के एंट्री गेट अस्थायी रूप से बंद भी किए जा सकते हैं। यात्रियों से अनुरोध है कि वे पुलिस और मेट्रो स्टाफ के निर्देशों का पालन करें।
पिछली घटना से लिया सबक
ये सारे इंतजाम पिछले साल आरसीबी की जीत के बाद हुई भगदड़ को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं, याद रहे आरसीबी की जीत के जश्न में इसी स्टेडियम के पास भगदड़ मचने से 11 लोगों की जान चली गई थी। ये ही वजह है कि सरकार और बेंगलुरू प्रशासन की कोशिश है कि क्रिकेट फैंस सुरक्षित रहें और किसी तरह की अफरा-तफरी न हो।
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MP में बिजली की दरें 4.80% बढ़ीं: एक अप्रैल से लागू होंगे नए रेट; दिन में ईवी चार्ज करने पर 20 प्रतिशत छूट – Jabalpur News
मध्य प्रदेश में बिजली की दरों में 4.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी गई है। नए रेट एक अप्रैल से लागू होंगे। राज्य विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ आदेश जारी कर दिया है। इसके मुताबिक, इस बार घरेलू, गैर-घरेलू, औद्योगिक और कृषि श्रेणियों के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं। नए टैरिफ आदेश में लो टेंशन (LT) उपभोक्ताओं को राहत मिली है, जिनके लिए न्यूनतम शुल्क समाप्त कर दिया गया है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पहले की तरह स्लैब सिस्टम लागू रहेगा, जिसमें कम खपत पर कम और अधिक खपत पर ज्यादा दर से बिल लिया जाएगा। वहीं, गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए लोड और खपत के आधार पर रेट लगेगा। इंडस्ट्रियल कस्टमर के लिए स्थायी शुल्क और ऊर्जा शुल्क अलग-अलग तय किए गए हैं जबकि कृषि उपभोक्ताओं को चरणबद्ध दरों के अनुसार बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। EV स्टेशन के उपयोग में 20% की छूट इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को बढ़ावा देने के लिए भी नए टैरिक आदेश में विशेष प्रावधान किए गए हैं। EV चार्जिंग स्टेशनों पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली उपयोग पर 20% की छूट मिलेगी जबकि दूसरे समय में 20% अतिरिक्त शुल्क देना होगा। कंपनियों ने गिनाए बढ़ोतरी के कारण बिजली कंपनियों का कहना है कि उनकी आर्थिक हालत बहुत खराब है और वे बहुत बड़े घाटे में चल रही हैं। बिजली दर बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर उठे थे सवाल बिजली दर बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर कई गंभीर सवाल उठे थे। ये सवाल बिजली कंपनियों और सरकार की मंशा पर संदेह पैदा कर रहे हैं। 4,800 करोड़ रुपए की रुकी हुई वसूली का अनसुलझा पेंच इस मामले में एक और बड़ा वित्तीय पेंच है। विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले, तत्कालीन सरकार ने मतदाताओं को लुभाने के लिए फैसला लिया था कि 31 अगस्त 2023 तक के घरेलू उपभोक्ताओं के बढ़े हुए बिजली बिल या बकाया की वसूली रुकवा दी जाए। यह राशि कुल मिलाकर लगभग 4,800 करोड़ रुपए की है। सरकार ने वादा किया था कि इस राशि की भरपाई सरकार खुद करेगी यानी डिस्कॉम्स को सरकार से पैसे मिलेंगे। लेकिन अब तक सरकार से यह राशि नहीं मिली है। सरकार का विरोधाभासी रुख और मंत्री का बयान दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले ही अपने दो साल के कार्यकाल पर भोपाल में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा था कि सरकार का पूरा प्रयास है कि उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े और बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी न हो। उन्होंने यह भी दावा किया था कि 2028 तक प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियां घाटे से पूरी तरह बाहर आ जाएंगी और आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएंगी। जब उनसे सवाल किया गया कि बिजली को और सस्ता कैसे किया जाएगा, तो मंत्री ने कहा- प्रदेश में कुल 1 करोड़ 35 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से करीब एक करोड़ उपभोक्ता तो अटल गृह ज्योति योजना के तहत सिर्फ 100 रुपए में बिजली पा रहे हैं (सब्सिडी वाली स्कीम)। ऐसे में बिजली को और सस्ता कैसे किया जा सकता है? ये खबर भी पढ़ें… रसोई गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। वहीं, 19 KG वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से ही लागू हो गई हैं। मध्य प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो अब भोपाल में 918 रुपए, इंदौर में 941 रुपए, ग्वालियर में 996 रुपए, जबलपुर में 919 रुपए और उज्जैन में 972 रुपए में एलपीजी सिलेंडर मिलेगा। पढ़ें पूरी खबर…
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Energy Lockdown: एनर्जी लॉकडाउन क्या है? कब लगाया जाता है? आम पब्लिक पर कितना असर? हर सवाल का जवाब
India
oi-Pallavi Kumari
What is Energy Lockdown: दुनिया एक बार फिर अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ईरान-अमेरिका, इजरायल जंग जैसे हालात ने तेल और गैस की सप्लाई को झटका दिया है। इसी बीच एक शब्द तेजी से वायरल हो रहा है,जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी – “एनर्जी लॉकडाउन”।
लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि क्या फिर से कोरोना जैसा लॉकडाउन लगने वाला है? क्या घरों में बंद होना पड़ेगा? क्या पेट्रोल-डीजल खत्म होने वाला है? हालांकि सच्चाई इससे थोड़ी अलग है, लेकिन खतरे को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर ये एनर्जी लॉकडाउन क्या है, कब लगता है, और आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ता है।

🔵 एनर्जी लॉकडाउन क्या है? (What is Energy Lockdown in Hindi)
सबसे पहले ये समझ लीजिए कि “एनर्जी लॉकडाउन” कोई आधिकारिक सरकारी शब्द नहीं है। यह सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच इस्तेमाल किया जाने वाला एक आम बोलचाल वाला शब्द है, जो उस स्थिति को बताने के लिए इस्तेमाल हो रहा है जब देश में एनर्जी (फ्यूल, पेट्रोल, डीजल, LPG etc) बचाने के लिए सख्त कदम उठाने पड़ते हैं।
सीधे शब्दों में कहें तो जब तेल, गैस और बिजली की कमी होने लगती है, तब सरकारें लोगों को कम ऊर्जा इस्तेमाल करने के लिए कहती हैं। इसमें यात्रा कम करना, घर से काम करना, बिजली की बचत करना और गैर जरूरी गतिविधियों को सीमित करना शामिल हो सकता है।
एनर्जी इमरजेंसी उस स्थिति को कहा जाता है जब किसी देश में तेल, गैस या बिजली की सप्लाई अचानक बुरी तरह प्रभावित हो जाए या गंभीर कमी पैदा हो जाए। आसान शब्दों में समझें तो जब पेट्रोल, डीजल या गैस जैसी जरूरी चीजें पर्याप्त मात्रा में मौजूग नहीं होतीं और उनकी कमी महसूस होने लगती है, तब हालात को एनर्जी लॉकडाउन जैसी स्थिति माना जाता है।
यह कोरोना लॉकडाउन जैसा नहीं होता, जिसमें लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी जाती थी। यहां मकसद सिर्फ ऊर्जा की बचत करना होता है, ताकि सीमित संसाधनों को लंबे समय तक चलाया जा सके।
🔵 एनर्जी लॉकडाउन कब लगता है? (When Does Energy Lockdown Happen)
एनर्जी लॉकडाउन जैसी स्थिति आमतौर पर तब बनती है जब दुनिया में कहीं बड़ा संकट खड़ा हो जाता है। जैसे कि युद्ध, राजनीतिक तनाव या सप्लाई चेन का टूटना। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष ने इसी तरह की स्थिति पैदा की है।
खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। दुनिया का करीब बीस फीसदी तेल इसी रास्ते से गुजरता है। जब इस तरह की सप्लाई बाधित होती है तो तेल महंगा हो जाता है, गैस की कमी होने लगती है और धीरे-धीरे इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखने लगता है। ऐसे समय में सरकारें ऊर्जा बचाने के लिए सख्त फैसले ले सकती हैं।
🔵 एनर्जी लॉकडाउन जैसी स्तिथि में क्या-क्या फैसले लिए जाते हैं?
- जब ऊर्जा संकट गहराने लगता है तो सरकारें कई तरह के कदम उठाती हैं। ये कदम जरूरी नहीं कि सभी देशों में एक जैसे हों, लेकिन उनका मकसद एक ही होता है – ऊर्जा की खपत कम करना।
- कई देशों में पेट्रोल खरीदने की सीमा तय कर दी गई है। कुछ जगहों पर गाड़ियों के लिए ऑड-ईवन जैसा नियम लागू किया गया है। कहीं-कहीं स्कूल और दफ्तरों की छुट्टी बढ़ा दी गई है ताकि लोग कम यात्रा करें।
- कुछ देशों में चार दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया है, जबकि कई जगह घर से काम करने को बढ़ावा दिया जा रहा है। उड़ानों में कटौती, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा और हाईवे पर स्पीड कम करने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। बिजली बचाने के लिए मॉल और बाजार जल्दी बंद किए जा रहे हैं, और कई जगहों पर निर्धारित समय के लिए बिजली कटौती भी की जा रही है।
- पाकिस्तान में सरकार ने हफ्ते में 4 दिन काम का नियम बना दिया है। साथ ही खेती, इंडस्ट्री और जरूरी काम वाली जगहों पर 50% लोग घर से काम करेंगे।वियतनाम में सरकार ने कंपनियों से कहा है कि जहां हो सके, लोगों को घर से काम करने दें ताकि पेट्रोल की बचत हो।
- थाईलैंड में सरकारी कर्मचारियों को कहा गया है कि AC 26 डिग्री से कम ना रखें और कुछ लोगों के लिए घर से काम करना जरूरी कर दिया गया है। फिलीपींस में भी सरकार ने कई जगहों पर सरकारी कर्मचारियों के लिए Work From Home जरूरी कर दिया है और प्राइवेट कंपनियों को भी ऐसा करने की सलाह दी है। बांग्लादेश में कुछ मेडिकल कॉलेजों में क्लास और एग्जाम बंद कर दिए गए हैं और ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है।
🔵 आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?
एनर्जी लॉकडाउन का सबसे बड़ा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। सबसे पहले पेट्रोल-डीजल महंगे हो जाते हैं, जिससे सफर करना महंगा पड़ता है। इसके साथ ही खाने-पीने की चीजें भी महंगी होने लगती हैं क्योंकि ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ जाता है।
बिजली कटौती से घर और दफ्तर दोनों प्रभावित होते हैं। कई बार लोगों को कम दूरी के लिए पैदल चलना पड़ता है या सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता है।
अगर स्थिति ज्यादा खराब हो जाए तो कुछ उद्योग बंद हो सकते हैं, जिससे नौकरियों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
🔵 किन देशों में लागू हो रहे हैं सख्त फैसले?
▶️ ईंधन लिमिट और राशनिंग
- श्रीलंका में अब हर वाहन मालिक को हफ्ते में तय मात्रा में ही पेट्रोल मिल रहा है और इसके लिए क्यूआर कोड वाला सिस्टम लागू किया गया है।
- म्यांमार में गाड़ियों के नंबर के आधार पर ऑड-ईवन सिस्टम लागू है, यानी तय दिन पर ही पेट्रोल भरवाया जा सकता है, साथ ही कई पेट्रोल पंप बंद भी हो चुके हैं।
- भूटान में लोग डिब्बों में पेट्रोल जमा नहीं कर सकते, सरकार ने इस पर रोक लगा दी है और जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
- स्लोवाकिया में डीजल की जमाखोरी रोकने के लिए खरीद पर सीमा तय कर दी गई है।
- स्लोवेनिया में एक बार में कितना पेट्रोल मिलेगा, इसकी लिमिट तय कर दी गई है।
- दक्षिण अफ्रीका में अलग-अलग सेक्टर के लिए डीजल की सप्लाई को कंट्रोल किया जा रहा है ताकि घबराहट में खरीदारी न हो।
- केन्या में भी पेट्रोल की राशनिंग शुरू हो गई है और तेल का निर्यात अस्थायी तौर पर रोक दिया गया है।
▶️ कम काम के दिन और घर से काम
- पाकिस्तान में सरकारी दफ्तर अब हफ्ते में सिर्फ चार दिन खुल रहे हैं और ईंधन का इस्तेमाल आधा कर दिया गया है।
- फिलीपींस में सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिन का वर्क सिस्टम लागू किया गया है और गैर जरूरी यात्रा पर रोक लगाई गई है।
- लाओस में सरकारी कर्मचारियों के लिए घर से काम करना जरूरी कर दिया गया है और शिफ्ट सिस्टम लागू किया गया है।
- वियतनाम में कंपनियों को रिमोट वर्क अपनाने के लिए कहा गया है और लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।
▶️ यात्रा और गाड़ियों पर पाबंदी
- न्यूजीलैंड में “कार फ्री डे” लाने की तैयारी है, जिसमें हफ्ते में एक दिन गाड़ी चलाने पर रोक हो सकती है।
- वहां ईंधन स्टॉक पर नजर रखने के लिए अलर्ट सिस्टम भी लगाया गया है और महंगे ईंधन के कारण कई फ्लाइट्स रद्द हो रही हैं।
- वियतनाम में निजी गाड़ियों के बजाय बस और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
▶️ बिजली बचाने के लिए सख्ती
- बांग्लादेश में स्कूल-कॉलेज ऑनलाइन कर दिए गए हैं ताकि बिजली की खपत कम हो सके।
- वहां घरों में तय समय के लिए बिजली कटौती की जा रही है ताकि उद्योगों को बिजली दी जा सके।
- मिस्र में मॉल और रेस्टोरेंट रात 9 बजे तक बंद करने का नियम बना दिया गया है और सरकारी दफ्तर भी जल्दी बंद हो रहे हैं।
- सड़कों पर लगे बड़े विज्ञापन बोर्ड की लाइट्स भी बंद कर दी गई हैं।
▶️ पेट्रोल पंप बंद और सप्लाई संकट
- फिलीपींस ने आधिकारिक तौर पर ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है, ताकि तेल की कीमत और सप्लाई को कंट्रोल किया जा सके।
- कंबोडिया में करीब एक-तिहाई पेट्रोल पंप बंद हो चुके हैं।
- म्यांमार में भी कई पेट्रोल पंप बंद हैं और लोगों को पेट्रोल के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
🔵 क्या भारत में एनर्जी लॉकडाउन का खतरा है? (India Energy Lockdown)
भारत में इस समय एनर्जी लॉकडाउन जैसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार ने साफ कहा है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि देश को हर चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए, लेकिन उन्होंने कहीं भी लॉकडाउन लगाने की बात नहीं कही।
सरकार लगातार तेल की सप्लाई सुनिश्चित करने, नए स्रोत खोजने और कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने अतिरिक्त तेल खरीदकर अपने भंडार को मजबूत करने की तैयारी भी की है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक संकट का असर यहां जरूर पड़ता है। लेकिन सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। अलग-अलग देशों से तेल खरीदना, भंडार बढ़ाना और सप्लाई चेन को बनाए रखना – ये सभी कदम उठाए जा रहे हैं। इससे यह साफ है कि भारत स्थिति को लेकर सतर्क है और किसी भी संकट से निपटने के लिए तैयार रहने की कोशिश कर रहा है।
🔵 International Energy Agency ने क्या-क्या सुझाव दिए हैं?
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने भी सरकारों को ऊर्जा बचाने के लिए कुछ सख्त सुझाव दिए, जिससे इस शब्द को और ज्यादा हवा मिल गई। कुल मिलाकर, असली वजह है वैश्विक ऊर्जा संकट, लेकिन सोशल मीडिया ने इसे “एनर्जी लॉकडाउन” का नाम दे दिया।
- जहां संभव हो, लोगों को घर से काम करने के लिए कहा जाए ताकि रोजाना आने-जाने में ईंधन की खपत कम हो सके।
- हाईवे पर गाड़ियों की स्पीड कम से कम 10 किलोमीटर प्रति घंटा घटाई जाए, जिससे पेट्रोल-डीजल की बचत हो।
- लोगों को निजी वाहन छोड़कर बस, मेट्रो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- बड़े शहरों में निजी गाड़ियों के लिए ऑड-ईवन जैसा सिस्टम लागू किया जाए, यानी अलग-अलग दिनों में अलग-अलग गाड़ियां चलें।
- कार शेयरिंग को बढ़ावा दिया जाए, ताकि एक ही गाड़ी में ज्यादा लोग सफर करें और ईंधन की बचत हो।
- ट्रकों और डिलीवरी गाड़ियों के ड्राइवरों को बेहतर और समझदारी से ड्राइविंग करने की सलाह दी जाए ताकि ईंधन कम खर्च हो।
- एलपीजी का इस्तेमाल जहां जरूरी हो वहीं किया जाए और ट्रांसपोर्ट में इसका उपयोग कम किया जाए।
- जहां ट्रेन या सड़क से जाना संभव हो, वहां हवाई यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
- लोगों को खाना बनाने के लिए ऐसे विकल्प अपनाने के लिए कहा गया है जो कम ऊर्जा खर्च करते हों।
- पेट्रोकेमिकल सेक्टर और उद्योगों को कहा गया है कि वे कम ऊर्जा में काम करने के तरीके अपनाएं और मशीनों की समय-समय पर देखभाल करें।
🔵 सोशल मीडिया पर क्यों फैल रहा है डर?
एनर्जी लॉकडाउन शब्द अचानक इसलिए ट्रेंड करने लगा क्योंकि लोगों ने इसे कोरोना लॉकडाउन से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। इसके पीछे कई वजह हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध, तेल की कीमतों में उछाल, कुछ देशों में लगाए गए प्रतिबंध और पुरानी लॉकडाउन की यादें – इन सबने मिलकर डर का माहौल बना दिया। लेकिन हकीकत यह है कि अभी भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिसमें लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी जाए।
फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि भारत में कोरोना जैसा लॉकडाउन लगाया जाएगा। सरकार का फोकस सिर्फ इस बात पर है कि आम लोगों की जिंदगी सामान्य बनी रहे। अगर स्थिति ज्यादा बिगड़ती है तो कुछ सीमित कदम जरूर उठाए जा सकते हैं, जैसे कि ऊर्जा बचाने के लिए अपील या कुछ नियम, लेकिन पूरे देश को बंद करने जैसा फैसला बहुत आखिरी विकल्प होता है।
एनर्जी लॉकडाउन कोई आधिकारिक शब्द नहीं, बल्कि एक स्थिति को समझाने का तरीका है। इसका मतलब यह नहीं कि देश फिर से पूरी तरह बंद होने वाला है। हां, अगर हालात बिगड़ते हैं तो कुछ सख्त कदम जरूर उठाए जा सकते हैं, लेकिन फिलहाल भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
सबसे जरूरी बात यह है कि अफवाहों से बचें और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। दुनिया बदल रही है, लेकिन घबराने की नहीं, समझदारी से काम लेने की जरूरत है।
FAQs
क्या भारत ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है?
भारत पर वैश्विक ऊर्जा संकट का असर जरूर पड़ रहा है, लेकिन अभी देश में गंभीर कमी जैसी स्थिति नहीं बनी है। सरकार लगातार सप्लाई बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
एनर्जी लॉकडाउन है?
नहीं, अभी भारत में एनर्जी लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति लागू नहीं हुई है। यह सिर्फ एक चलन में आया शब्द है।
क्या भारत में तेल संकट है?
तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर है, लेकिन फिलहाल देश में तेल की सप्लाई जारी है और कोई बड़ा संकट नहीं है।
लॉकडाउन भारत में कितने समय तक चला था?
कोरोना के समय भारत में पहला लॉकडाउन मार्च 2020 में लगा था, जो कई चरणों में करीब दो महीने से ज्यादा समय तक चला।
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8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग पर सरकार ने तय की समय-सीमा, जानें कब तक बढ़ेगी सैलरी और कितना मिलेगा एरियर
India
oi-Puja Yadav
8th Pay Commission Update: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। लंबे समय से कयासों के बीच, केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और इसकी रिपोर्ट जमा करने की समय-सीमा को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 23 मार्च 2026 को लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान बताया कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन पहले ही किया जा चुका है और इसके अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति भी पूरी हो गई है।
8th Pay Commission पर कब आएगी आयोग की रिपोर्ट, कब तक बढ़ेगी सैलरी?
सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए नवंबर 2025 से 18 महीने का वक्त मिला है। इसका मतलब है कि आयोग मई 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है।
कागजों पर 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जेब में कब आएगा पैसा? विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह जनवरी 2026 से प्रभावी हो, लेकिन वास्तविक बढ़ी हुई सैलरी कर्मचारियों के खातों में 2026 के अंत या वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान ही आनी शुरू होगी।
कर्मचारियों को कितनी बढ़ सकती है सैलरी? फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन
कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल एरियर को लेकर है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चूंकि 7वें वेतन आयोग का चक्र 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है, इसलिए नई सैलरी की गणना 1 जनवरी 2026 से ही की जाएगी। भले ही सरकार की मंजूरी और भुगतान में देरी हो, लेकिन कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से लेकर भुगतान की तारीख तक का पूरा एरियर मिलने की प्रबल संभावना है।
हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है, लेकिन कर्मचारी संगठनों की मांग और पिछले रुझानों के आधार पर कुछ अनुमान लगाए जा रहे हैं:
फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor): कर्मचारी संगठन इसे 2.57 (7वें वेतन आयोग) से बढ़ाकर 3.00 या 3.25 करने की मांग कर रहे हैं।
न्यूनतम वेतन: मांग की जा रही है कि न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) को बढ़ाकर ₹57,000 के करीब किया जाए।
अनुमानित वृद्धि: विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन और भत्तों में 20% से 35% तक का इजाफा देखने को मिल सकता है।
सुझाव देने की तारीख बढ़ी 31 मार्च तक का मिला समय
सरकार ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हितधारकों (Stakeholders) से सुझाव मांगे हैं। MyGov पोर्टल पर 18 प्वॉइंट कि एक बड़ी प्रश्नावली अपलोड की गई है। इन सवालों का जवाब और सुझाव देने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी गई है। राज्य सरकारें, कर्मचारी संगठन, शिक्षाविद और व्यक्तिगत कर्मचारी इस पोर्टल के माध्यम से अपनी राय दे सकते हैं।
सैलरी और भत्तों के अलावा, 8वें वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग है। इसके साथ ही, सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6-7% करने और पदोन्नति (Promotion) के बेहतर अवसर देने जैसी मांगों पर भी आयोग को विचार करना है।
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CBSE Board Results 2026: 13 मई को आएंगे 10वीं-12वीं के नतीजे? डिजिलॉकर और SMS से ऐसे देखें मार्कशीट
Career
oi-Kumari Sunidhi Raj
CBSE Board Results 2026: सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद अब देश भर के करीब 35 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं की धड़कनें तेज हो गई हैं। हर साल की तरह इस बार भी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कॉपियों के मूल्यांकन का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है।
बोर्ड का मुख्य लक्ष्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पारदर्शी तरीके से परिणाम घोषित करना है, ताकि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लेने में कोई परेशानी न हो। शिक्षकों को कॉपियों की जांच के लिए बेहद सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि त्रुटि की गुंजाइश शून्य रहे। अभिभावकों और छात्रों के बीच अब केवल एक ही सवाल तैर रहा है कि आखिर नतीजों का इंतजार कब खत्म होगा।

मई के दूसरे हफ्ते में जारी हो सकते हैं नतीजे
सीबीएसई के पिछले कुछ सालों के अकादमिक कैलेंडर पर नजर डालें तो बोर्ड आमतौर पर फरवरी-मार्च में परीक्षाएं आयोजित करता है और मई के महीने में परिणामों की घोषणा कर देता है। साल 2026 के लिए भी यही उम्मीद जताई जा रही है कि 10वीं और 12वीं के नतीजे 12 मई से 20 मई 2026 के बीच किसी भी दिन जारी किए जा सकते हैं। परंपरा के अनुसार, बोर्ड पहले 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित करता है और उसके कुछ ही घंटों बाद या अगले दिन 10वीं के नतीजे सार्वजनिक किए जाते हैं।
क्या 13 मई को आएगा रिजल्ट?
सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में 13 मई की तारीख को लेकर काफी चर्चा है। इसका मुख्य कारण बोर्ड का पिछला रिकॉर्ड है। अगर हम पिछले तीन वर्षों के ट्रेंड को देखें, तो सीबीएसई ने एक खास पैटर्न अपनाया है:
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चूंकि 2024 और 2025 दोनों ही साल परिणाम 13 मई को आए थे, इसलिए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस बार भी बोर्ड इसी तारीख के आस-पास नतीजे जारी कर सकता है। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
ग्रेस मार्क्स और पासिंग क्राइटेरिया
सीबीएसई के नियमों के मुताबिक, छात्रों को पास होने के लिए प्रत्येक विषय में न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। बोर्ड उन छात्रों को ‘ग्रेस मार्क्स’ की सुविधा भी देता है जो पासिंग मार्क से बेहद मामूली अंकों से पीछे रह जाते हैं। इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरती जा रही है ताकि मेधावी छात्रों के साथ न्याय हो सके।
इन प्लेटफॉर्म्स पर देख सकेंगे अपना स्कोरकार्ड
रिजल्ट घोषित होने के समय वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक रहता है। ऐसे में छात्र निम्नलिखित वैकल्पिक तरीकों का उपयोग कर सकते हैं:
- आधिकारिक वेबसाइट: cbse.gov.in या cbseresults.nic.in पर जाएं।
- डिजिलॉकर (DigiLocker): सुरक्षा पिन की मदद से डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड करें।
- उमंग (UMANG) ऐप: मोबाइल के जरिए सीधे परिणाम प्राप्त करें।
- SMS सेवा: इंटरनेट न होने पर मैसेज भेजकर भी अपना स्कोर चेक किया जा सकता है।
UAE के छात्रों के लिए विशेष अपडेट
खबरों के मुताबिक, यूएई (UAE) समेत कुछ विदेशी केंद्रों पर कुछ परीक्षाएं रद्द या प्रभावित हुई थीं। बोर्ड ऐसे छात्रों के लिए मूल्यांकन की अलग पद्धति अपना सकता है या उनके परिणाम कुछ देरी से अलग से जारी किए जा सकते हैं। 12वीं का रिजल्ट आते ही देशभर की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, इसलिए यह परिणाम उच्च शिक्षा की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
With AI Inputs
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Mumbai Pune Expressway पर फिर क्यों लगा भयंकर जाम? 5 किलोमीटर लंबी कतारें, घंटों फंसे रहे यात्री, देखें Video
Maharashtra
oi-Bhavna Pandey
Mumbai Pune Expressway Traffic Jam: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 26 मार्च (गुरुवार) को यातायात पूरी तरह ठप हो गया। दोपहर 12:48 बजे बोरघाट खंड में लोनावाला के नजदीक 5 किलोमीटर से अधिक लंबी वाहनों की कतारें लगीं, जिससे यात्रियों को घंटों फंसना पड़ा। मुंबई को पश्चिमी महाराष्ट्र से जोड़ने वाली यह महत्वपूर्ण सड़क अचानक जाम में फंसने से भारी ट्रैफिक समस्या सामने आई।
बता दें मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे 94.5 किलोमीटर लंबी है और 2024 में सबसे अधिक टोल राजस्व दर्ज कर चुकी है। इसके बावजूद, यहां पर बार-बार लग रहे जाम से लोग त्रस्त हो चुके हैं? सोशल मीडिया पर यूजर्स जमकर भड़ास निकाल रहे हैं।

जाम से निपटने के लिए ‘ब्लॉक रिलीज सिस्टम’ लागू
अधिकारी ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए ‘ब्लॉक रिलीज सिस्टम’ का उपयोग कर रहे हैं। इसके तहत वाहनों को दस मिनट के अंतराल पर रोका और फिर छोड़ दिया गया, ताकि “फैंटम” ट्रैफिक जाम को रोका जा सके। इसके बावजूद, अधिकांश दिन वाहनों की गति कछुए जैसी धीमी रही।
Mumbai Pune Expressway: आखिर क्यों लगा भयंकर जाम?
रामनवमी के त्योहार की छुट्टी और इस बार वीकेंड के साथ पड़ने के कारण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की संख्या में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई। लोनावाला की एकविरा देवी, जिन्हें आगरी-कोली समाज की कुलदेवी माना जाता है, की वार्षिक यात्रा शुरू हो गई है जो तीन दिनों तक चलेगी। धार्मिक उत्सव के चलते लोग पुणे, लोनावाला और आसपास के हिल स्टेशनों की ओर रवाना हुए, वहीं वीकेंड होने की वजह से पर्यटन और पारिवारिक यात्रियों की संख्या भी पहले से अधिक थी।
तीन दिन के लिए टोल फ्री है ये एक्सप्रेसवे
बता दें 25 मार्च से चलने वाली तीन दिवसीय लोनावाला की एकविरा देवी यात्रा के चलते मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर आने वाले भक्तों को सुविधा देने के उद्देश्य इस हाईवे को ट्रोल फ्री कर दिया गया है। हालांकि टोल छूट का लाभ पाने के लिए एक अनिवार्य शर्त है। यात्रियों को सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ़ बाल्या मामा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र संबंधित टोल नाकों पर दिखाना होगा। अधिकारियों ने कहा है कि सिर्फ यह पत्र प्रस्तुत करने पर एकविरा देवी के भक्तों को टोल में छूट मिलेगी, अन्यथा सामान्य शुल्क लागू रहेगा।
इससे पहले लगा था 32 घंटे का ट्रैफिक जाम
यह जाम पिछले महीने खंडाला घाट खंड में हुए गैस टैंकर दुर्घटना की याद दिलाता है, जब 32 घंटे लंबा ट्रैफिक जाम लगा था। उस घटना के ड्रोन फुटेज में तीन लेन की सड़क 20-30 किलोमीटर तक वाहनों से भरी दिखी थी। अब भी सोशल मीडिया पर यात्रियों ने अपनी निराशा जताई है।
भड़के यूजर्स कर रहे सवाल
यात्री अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी समाधानों की मांग कर रहे हैं। यूजर्स वेंकट दुर्गा प्रसाद ने पूछा कि भारी वाहनों को निर्धारित लेन में क्यों नहीं रखा जाता। वहीं, अन्य लोग पुराने बुनियादी ढांचे की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।
मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट का लोग क्यों कर रहे जिक्र?
हालांकि तत्काल स्थिति निराशाजनक है, कई लोग आगामी ‘मिसिंग लिंक’ अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट में आशा जता रहे हैं, जो लोनावाला घाट खंड को बाईपास करेगी। कुछ नेटिज़न्स ने लिखा कि सुरंग मई 2026 में खुलने से यह समस्या समाप्त हो जाएगी।
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350 साल पुरानी परंपरा का जादू: हर साल पारो पहुंचते हैं हजारों लोग, जानें कब से शुरू होगा
Bhutan Festival: हिमालय की शांत वादियों में बसे भूटान का नाम आते ही आंखों के सामने एक सुकून भरी तस्वीर उभरती है. हरी पहाड़ियां, साफ हवा और परंपराओं में डूबा जीवन, लेकिन साल के कुछ खास दिनों में यही सुकून रंगों, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा में बदल जाता है. ऐसा ही एक मौका होता है पारो त्शेचू फेस्टिवल का, जो सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि भूटान की आत्मा को महसूस करने का अनुभव है. हर साल हजारों लोग इस उत्सव का हिस्सा बनने के लिए पारो पहुंचते हैं, जहां आस्था, इतिहास और लोकजीवन एक साथ नजर आते हैं. इस बार भी मार्च के आखिर से अप्रैल की शुरुआत तक चलने वाला यह उत्सव खास बनने जा रहा है, और इसे लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों में भी जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है.
पारो त्शेचू: सिर्फ त्योहार नहीं, एक परंपरा
पारो त्शेचू भूटान के सबसे प्रमुख धार्मिक उत्सवों में गिना जाता है. यह आमतौर पर वसंत ऋतु में आयोजित होता है और करीब पांच दिनों तक चलता है. इस साल यह 29 मार्च से 2 अप्रैल तक मनाया जा रहा है. “त्शेचू” शब्द का मतलब होता है “दसवां दिन”, जो गुरु पद्मसंभव से जुड़ा हुआ है. माना जाता है कि उन्होंने ही भूटान में बौद्ध धर्म की नींव रखी थी. यह त्योहार स्थानीय लोगों के लिए सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन का अहम हिस्सा है. गांव-शहर से लोग अपने पारंपरिक कपड़े पहनकर इस उत्सव में शामिल होते हैं और एक तरह से यह पूरे समाज को जोड़ने का काम करता है.
रंग-बिरंगे मुखौटे और जीवंत नृत्य
मुखौटा नृत्य की खासियत
पारो त्शेचू का सबसे आकर्षक हिस्सा होता है मुखौटा नृत्य, जिसे “चाम” कहा जाता है. इसमें भिक्षु और कलाकार अलग-अलग तरह के रंगीन मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं. ये नृत्य सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं होते, बल्कि इनके पीछे गहरी धार्मिक कहानियां और संदेश छिपे होते हैं. इन नृत्यों के जरिए अच्छाई और बुराई की लड़ाई, जीवन के संघर्ष और आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाया जाता है. हर स्टेप, हर मूवमेंट का एक खास मतलब होता है, जिसे समझने के लिए आपको सिर्फ आंखों से नहीं बल्कि दिल से देखना पड़ता है.
दर्शकों का अनुभव
अगर आप वहां मौजूद हों, तो आपको महसूस होगा कि ये सिर्फ एक शो नहीं है. ढोल-नगाड़ों की आवाज, मंत्रों की गूंज और लोगों की श्रद्धा मिलकर एक अलग ही माहौल बना देती है. कई पर्यटक बताते हैं कि इस अनुभव ने उन्हें अंदर तक छू लिया.
थांगका: आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक
350 साल पुरानी परंपरा
इस उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होता है विशाल “थांगका” का अनावरण. यह एक तरह की धार्मिक पेंटिंग होती है, जिसे खास मौके पर ही लोगों के दर्शन के लिए खोला जाता है. कहा जाता है कि यह परंपरा करीब 350 साल पुरानी है. थांगका को देखने के लिए लोग सुबह-सुबह ही इकट्ठा हो जाते हैं. जैसे ही इसे खोला जाता है, पूरा माहौल श्रद्धा से भर जाता है.
आस्था और विश्वास
स्थानीय मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस पवित्र चित्र की एक झलक देख लेता है, उसके मन से नकारात्मकता दूर हो जाती है और उसे शांति मिलती है. यही वजह है कि लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं, चाहे मौसम कैसा भी हो.
स्थानीय जीवन की झलक
पारो त्शेचू सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भूटान के रोजमर्रा के जीवन को करीब से देखने का मौका भी देता है. यहां आपको पारंपरिक कपड़ों में सजे लोग, स्थानीय खाने की खुशबू और हस्तशिल्प की छोटी-छोटी दुकानें देखने को मिलेंगी. कई परिवार इसे एक पिकनिक की तरह मनाते हैं. बच्चे खेलते हैं, बुजुर्ग बातें करते हैं और युवा इस मौके पर दोस्तों से मिलते हैं. यह एक ऐसा पल होता है जब पूरा समाज एक साथ खुशियां बांटता है.
पर्यटन के लिहाज से क्यों है खास?
भूटान पहले ही अपनी “हैप्पी कंट्री” की छवि के लिए मशहूर है, लेकिन पारो त्शेचू जैसे उत्सव इसे और खास बना देते हैं. इस दौरान यहां आने वाले पर्यटकों को सिर्फ घूमने का नहीं, बल्कि संस्कृति को महसूस करने का मौका मिलता है. ट्रैवल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आप भूटान की असली पहचान समझना चाहते हैं, तो इस फेस्टिवल के समय यहां आना सबसे सही रहता है. यह अनुभव किसी भी आम टूर से कहीं ज्यादा गहरा और यादगार होता है.
बदलते दौर में भी कायम परंपरा
आज जब दुनिया तेजी से बदल रही है, पारो त्शेचू जैसे उत्सव अपनी जड़ों से जुड़े रहने की मिसाल पेश करते हैं. यहां आधुनिकता की झलक भी मिलती है, लेकिन परंपराओं की अहमियत कम नहीं हुई है.
यही वजह है कि युवा पीढ़ी भी इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है. उनके लिए यह सिर्फ एक फेस्टिवल नहीं, बल्कि अपनी पहचान को समझने और आगे बढ़ाने का जरिया है.
पारो त्शेचू फेस्टिवल भूटान की संस्कृति, आस्था और सामाजिक जीवन का एक जीवंत उदाहरण है. यह हमें याद दिलाता है कि परंपराएं सिर्फ इतिहास नहीं होतीं, बल्कि वे आज भी हमारे जीवन को जोड़ने और संवारने का काम करती हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
New LPG Gas Connection: नया गैस कनेक्शन चाहिए? अब घर बैठे भी कर सकते हैं अप्लाई, जानें स्टेप-बॉय-स्टेप प्रोसेस
India
oi-Puja Yadav
New LPG Gas Connection: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। भारत में भी इसका असर एलपीजी (LPG) सप्लाई चेन पर देखने को मिल रहा है। कई हिस्सों में सिलेंडर की देरी और बढ़ती कीमतों के कारण आम जनता परेशान है।
इस अनिश्चितता के बीच, उन लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है जो नया गैस कनेक्शन लेना चाहते हैं या हाल ही में नए शहर में शिफ्ट हुए हैं।

अगर आप भी इस संकट के समय में नया एलपीजी कनेक्शन लेने की योजना बना रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार और तेल कंपनियों (Indane, Bharat Gas, HP Gas) ने अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बना दिया है।
LPG Connection Apply Online: नए कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस
अब आपको गैस एजेंसियों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। आप अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप से घर बैठे आवेदन कर सकते हैं:
एजेंसी का चयन: सबसे पहले तय करें कि आप किस कंपनी (इंडेन, भारत गैस या एचपी गैस) का कनेक्शन लेना चाहते हैं।
आधिकारिक पोर्टल: चुनी गई एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे my.indane.in, ebharatgas.com, पर जाएं।
रजिस्ट्रेशन: होमपेज पर “New LPG Connection” या “Register for New Connection” के विकल्प पर क्लिक करें।
मोबाइल वेरिफिकेशन: अपना एक्टिव मोबाइल नंबर दर्ज करें और प्राप्त OTP के जरिए इसे वेरिफाइ करें।
फॉर्म फिलिंग: ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में अपना नाम, पता, जन्मतिथि और अन्य व्यक्तिगत जानकारी भरें।
दस्तावेज अपलोड: मांगे गए जरूरी दस्तावेजों (ID और एड्रेस प्रूफ) की स्कैन कॉपी अपलोड करें।
ऑनलाइन पेमेंट: कनेक्शन के लिए निर्धारित सुरक्षा निधि (Security Deposit) और पहले सिलेंडर का शुल्क ऑनलाइन जमा करें।
कन्फर्मेशन: आवेदन सबमिट होने के बाद आपको SMS के जरिए एक रेफरेंस नंबर मिलेगा, जिससे आप अपने आवेदन को ट्रैक कर सकते हैं।
ऑफलाइन गैस कनेक्शन लेने के लिए सीधे एजेंसी से लें कनेक्शन
यदि आप ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं हैं, तो आप पारंपरिक तरीके से भी कनेक्शन ले सकते हैं:
- अपने क्षेत्र के नजदीकी गैस डिस्ट्रीब्यूटर के कार्यालय जाएं।
- वहां से KYC फॉर्म प्राप्त करें और उसे सावधानीपूर्वक भरें।
- अपने ओरिजिनल दस्तावेजों और उनकी फोटोकॉपी के साथ फॉर्म जमा करें।
- निर्धारित शुल्क का भुगतान काउंटर पर करें और रसीद (Subscription Voucher) प्राप्त करें।
LPG Connection Documents Required: कौन से दस्तावेज (Documents) हैं अनिवार्य?
नया कनेक्शन लेने के लिए आपके पास कुछ डॉक्यूमेंट्स का होने जरूरी है। जैसे-
- पहचान का प्रमाण: आधार कार्ड (अनिवार्य), वोटर आईडी या पैन कार्ड।
- पते का प्रमाण: राशन कार्ड, बिजली बिल, पानी का बिल या रेंट एग्रीमेंट।
- बैंक विवरण: सब्सिडी प्राप्त करने के लिए बैंक पासबुक की फोटोकॉपी (आधार से लिंक होना जरूरी)।
- फोटो: 2 से 3 नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ।
कितने दिनों में घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर?
अक्सर लोगों को लगता है कि नई प्रक्रिया में महीनों लग जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। आपकी लोकेशन के आधार पर शहरी क्षेत्रों में आवेदन स्वीकृत होने के 3 से 5 कार्य दिवसों के भीतर कनेक्शन मिल जाता है। वहीं ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्रों में: इसमें अधिकतम 7 दिनों का समय लग सकता है।एजेंसी का प्रतिनिधि आपके घर आकर पाइप, रेगुलेटर और सिलेंडर इंस्टॉल करेगा और सुरक्षा की जांच करेगा।
नियमों में बदलाव का रखें ध्यान
हाल ही में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को देखते हुए उन इलाकों में PNG (पाइपलाइन गैस) को प्राथमिकता दी है जहाँ ग्रिड उपलब्ध है। यदि आपके क्षेत्र में पाइपलाइन है, तो आपको एलपीजी की जगह पीएनजी कनेक्शन लेने की सलाह दी जा सकती है। इसके अलावा, वर्तमान वैश्विक संकट को देखते हुए पैनिक बुकिंग से बचें और केवल अधिकृत पोर्टल का ही उपयोग करें।
पहचान छिपाकर मजदूरी कर रहा था कातिल, 25 साल पहले 3 मर्डर कर हिला डाला था पुलिस महकमा, पढ़ें पूरी दास्तां
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Karauli Triple Murder Case: करौली पुलिस ने 25 साल से फरार ट्रिपल मर्डर के आरोपी को गिरफ्तार किया है. उसे ‘ऑपरेशन हन्ता’ के तहत जयपुर से पकड़ा गया है. उस पर 20 हजार का इनाम घोषित था. कातिल पहचान छिपाकर जयपुर में मजदूरी कर रहा था. पुलिस टीम ने उसे 1 किमी तक पीछाकर दबोचा है. वह 2001 में टोडाभीम के पीलवा गांव में हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड में शामिल था.
तीन लोगों की हत्या करके छिपकर मजदूरी कर रहा था युवक
करौली. एक कहानी जो 25 साल पहले शुरू हुई थी, अब जाकर पुलिस की गिरफ्त में खत्म होती दिख रही है. ट्रिपल मर्डर के एक ऐसे आरोपी को पकड़ा गया है, जो इतने सालों से पहचान छिपाकर आराम से जिंदगी काट रहा था. पुलिस के लिए यह सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक पुराने केस का बड़ा क्लोजर भी माना जा रहा है.
बताया जा रहा है कि यह वही आरोपी है, जिसने साल 2001 में टोडाभीम थाना इलाके के पीलवा गांव में हुए तिहरे हत्याकांड में भूमिका निभाई थी. उस समय इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी. तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. घटना के बाद से आरोपी लगातार फरार चल रहा था.
25 साल तक छिपकर रहा, मजदूर बनकर काटी जिंदगी
पुलिस के मुताबिक आरोपी जोगेंद्र सिंह, जो पीलवा हिंडौन का रहने वाला है, पिछले करीब 25 साल से अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था. वह जयपुर में अलग-अलग जगहों पर मजदूरी करता था और हर बार ठिकाना बदल लेता था, ताकि किसी को शक न हो. उस पर 20 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था, लेकिन इसके बावजूद वह इतने सालों तक पकड़ में नहीं आया.
ऑपरेशन हन्ता के तहत कार्रवाई, 1 किमी तक पीछा
इस गिरफ्तारी को ऑपरेशन हन्टा के तहत अंजाम दिया गया. पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल के निर्देशन में जिला स्पेशल टीम लगातार इस आरोपी पर नजर रख रही थी. सूचना मिली कि वह जयपुर के झोटवाड़ा इलाके की रेलवे ऑफिसर कॉलोनी के आसपास देखा गया है. इसके बाद टीम ने वहां गुप्त तरीके से निगरानी शुरू की. जैसे ही पहचान पक्की हुई, पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की. आरोपी भागने लगा, लेकिन पुलिस टीम ने करीब 1 किलोमीटर तक पीछा कर उसे दबोच लिया.
पुराना विवाद, तीन हत्याएं और लंबी फरारी
साल 2001 में पीलवा गांव में खेत के विवाद को लेकर दो पक्षों में झगड़ा हुआ था. यह झगड़ा इतना बढ़ा कि हथियार चल गए और तीन लोगों की जान चली गई. इस घटना के बाद से आरोपी फरार हो गया था. पुलिस लगातार उसकी तलाश में थी, लेकिन वह हर बार बच निकलता था. अब इतने साल बाद उसकी गिरफ्तारी को पुलिस बड़ी सफलता मान रही है. फिलहाल आरोपी को संबंधित थाने के सुपुर्द कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है. पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर की दिशा में एक मजबूत कदम है.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें


