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पेट्रोल पंप पर न लगाएं भीड़: पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय तेल कंपनी की अपील, कहा- हमारे पास पर्याप्त ईंधन


पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

कंपनी ने क्या कहा?

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर फैल रही खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं। भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार उपलब्ध है और सप्लाई चेन बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से काम कर रही है। बीपीसीएल के अनुसार, भारत पेट्रोल और डीजल का नेट एक्सपोर्टर है और कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल व एटीएफ (ATF) का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि वह पूरी तरह परिचालन में है और निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

बीपीसीएल ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर अनावश्यक रूप से ईंधन की खरीदारी न करें। कंपनी के अनुसार, देशभर में ईंधन की उपलब्धता स्थिर और पर्याप्त बनी हुई है।

डीलर्स एसोसिएशन ने दिया आश्वासन

इसी बीच, तेलंगाना पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने भी प्रेस नोट जारी कर कहा कि एचपीसीएल, आईओसीएल और बीपीसीएल के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है और सप्लाई चेन सामान्य रूप से संचालित हो रही है।



एसोसिएशन के अनुसार, फर्जी और भ्रामक खबरों के कारण लोग पेट्रोल पंपों पर जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवा रहे हैं, जिससे बिक्री सामान्य से 2.5 से 3 गुना तक बढ़ गई है। इसके चलते कई जगहों पर अस्थायी रूप से स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति भी देखने को मिली।

नागरिकों से की क्या अपील?

एसोसिएशन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल अपनी जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें और पैनिक बायिंग से बचें। साथ ही, पेट्रोल या डीजल को डिब्बों में स्टोर करने से भी मना किया गया है। पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) के नियमों के अनुसार ऐसा करना खतरनाक है और इससे आग जैसी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।








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ये हैं दुनिया के 6 सबसे खूबसूरत चेरी ब्लॉसम डेस्टिनेशन, नजारा देख हो जाएंगे…


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Cherry Blossom Destinations In World: जब वसंत की दस्तक होती है, तो प्रकृति एक जादुई करवट लेती है. दुनिया के कुछ चुनिंदा शहर गुलाबी और सफेद पंखुड़ियों की ऐसी चादर ओढ़ लेते हैं कि देखने वाला मंत्रमुग्ध रह जाए. अगर आप भी फूलों की इस बारिश का अनुभव करना चाहते हैं, तो ये 6 स्थान आपकी लिस्ट में होने चाहिए.

वॉशिंगटन डी.सी., यूएसए: यहां का सबसे प्रतिष्ठित नज़ारा ‘टाइडल बेसिन’ (Tidal Basin) है, जहां सफेद और गुलाबी ‘योशिनो’ फूलों की कोमल पंखुड़ियां पानी में प्रतिबिंबित होकर फूलों का एक घेरा बनाती हैं. अगर आप मार्च के अंत में ‘नेशनल चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल’ के दौरान यहां आते हैं, तो आपको पूरा शहर परेड, पतंग उत्सव और “सकुरा फीवर” (चेरी ब्लॉसम का जुनून) में डूबा हुआ मिलेगा.

Shillong, India: While most of the world associates cherry blossoms with the awakening of spring, the "Scotland of the East" offers a rare and moody alternative by blooming in November. Shillong is home to the Prunus cerasoides, or the Himalayan Wild Cherry Blossom, which paints the Khasi Hills in shades of deep rose and light pink just as the winter chill begins to set in. Unlike the manicured rows of trees in urban parks, these blossoms line winding mountain roads and the misty perimeter of Ward’s Lake, creating an ethereal, wild atmosphere.

शिलांग, भारत: जहां पूरी दुनिया चेरी ब्लॉसम को वसंत के आगमन से जोड़ती है, वहीं “पूर्व का स्कॉटलैंड” यानी शिलांग, नवंबर में खिलने वाले फूलों के साथ एक दुर्लभ और जादुई विकल्प पेश करता है. शिलांग ‘प्रूनस सेरासोइड्स’ या हिमालयी जंगली चेरी ब्लॉसम का घर है, जो सर्दियों की आहट के साथ खासी पहाड़ियों को गहरे और हल्के गुलाबी रंगों से सराबोर कर देता है.

Paris, France: Paris is already considered the height of romance, but during the peak of April, the "City of Light" softens into the "City of Pink." While the trees surrounding the Eiffel Tower at the Champ de Mars offer the most famous photo opportunities, the true soul of Parisian Sakura is found at Square Jean XXIII, tucked directly behind the Notre Dame Cathedral. Here, the heavy, double-petaled Kwanzan blossoms create a dense canopy that feels like a floral ceiling. For a more local experience, Parisians head just outside the city to Parc de Sceaux, which boasts one of the largest cherry orchards in Europe, specifically designed for "Hanami" picnics where you can spend an afternoon sipping wine under a rain of falling petals.

पेरिस, फ्रांस: पेरिस पहले से ही रोमांस का केंद्र माना जाता है, लेकिन अप्रैल के शिखर के दौरान, “रोशनी का शहर” (City of Light) “गुलाबी शहर” में बदल जाता है. यहां ‘क्वान्ज़ान’ फूलों की घनी छतरी एक फूलों की छत जैसा महसूस कराती है.

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Bonn, Germany: If you have ever seen a viral photo of a narrow, cobblestone street completely arched over by a ceiling of neon-pink flowers, it was likely Heerstraße in Bonn’s Altstadt (Old Town). Planted in the 1980s, these Japanese cherry trees have grown so large that their branches meet in the middle, creating a breathtaking "Pink Tunnel" that feels like a scene from a fairytale. The contrast between the vibrant, fluffy blossoms and the historic, shuttered buildings of the old city creates a visual masterpiece that peaks in mid-April. Because the street is narrow and incredibly popular, the best way to experience it is to arrive just after sunrise, when the morning light filters through the blossoms and the city is still quiet.

बॉन, जर्मनी: अगर आपने कभी किसी संकरी, पत्थर वाली सड़क की वायरल फोटो देखी है जो पूरी तरह से नियॉन-गुलाबी फूलों की छत से ढकी हो, तो वह बॉन के पुराने शहर की ‘हीयरस्ट्रासे’ है. 1980 के दशक में लगाए गए ये जापानी चेरी के पेड़ अब इतने बड़े हो गए हैं कि उनकी शाखाएं बीच में मिल जाती हैं, जिससे एक लुभावना “गुलाबी टनल” बन जाता है. यहां सुबह जल्दी पहुंचना सबसे अच्छा है, जब सुबह की रोशनी फूलों से छनकर आती है.

Jinhae, South Korea: South Korea’s cherry blossom season is every bit as spectacular as Japan's, and the coastal city of Jinhae hosts the country’s crown jewel: the Gunhangje Festival. The most photographed spot is the Yeojwa Stream, where the water is lined with trees and the banks are decorated with colorful umbrellas and light installations that illuminate the flowers at night. Another must-visit is the Gyeonghwa Station, where the vintage train tracks are flanked by miles of blossoming trees. When the train slows down to enter the station, it kicks up a "flower storm" of white petals, creating a cinematic moment so perfect it has served as the backdrop for countless K-Dramas and romantic films.

जिन्हे (Jinhae), दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरिया का चेरी ब्लॉसम सीजन जापान की तरह ही शानदार होता है, और तटीय शहर ‘जिन्हे’ देश के सबसे बड़े ‘गुन्हांगजे उत्सव’ की मेजबानी करता है. सबसे प्रसिद्ध जगह ‘योजवा स्ट्रीम’ (Yeojwa Stream) है, जहां पानी के किनारों को फूलों और रंगीन छतरियों से सजाया जाता है. एक और दर्शनीय स्थल ‘ग्योंगह्वा स्टेशन’ (Gyeonghwa Station) है, जहां पुराने ट्रेन ट्रैक के दोनों ओर मीलों तक खिले हुए पेड़ हैं. जब ट्रेन यहां से गुजरती है, तो फूलों की पंखुड़ियों की एक “बारिश” शुरू हो जाती है, जो इसे पूरी तरह से फिल्मी दृश्य बना देती है.

Vancouver, Canada: With over 40,000 cherry trees scattered across its neighborhoods, Vancouver is one of the most concentrated blossom spots in North America. The city’s unique geography allows you to see the soft pink canopy against a dramatic backdrop of the sparkling Pacific Ocean and the snow-capped North Shore Mountains. Stanley Park and Queen Elizabeth Park offer expansive groves where you can walk for miles under the flowers, but even the residential streets of Kitsilano turn into pastel corridors. The city celebrates this season with the Vancouver Cherry Blossom Festival, which includes "Bike the Blossoms" group rides and Japanese-inspired fairs that honour the cultural roots of the trees.

वैंकूवर, कनाडा: अपने पड़ोस में 40,000 से अधिक चेरी के पेड़ों के साथ, वैंकूवर उत्तरी अमेरिका के सबसे सघन ब्लॉसम वाले स्थानों में से एक है. यहां आपको प्रशांत महासागर और बर्फ से ढके ‘नार्थ शोर’ पहाड़ों के सामने गुलाबी फूलों की छतरी देखने का अनूठा भौगोलिक मेल मिलता है.



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गर्मियों में फिनलैंड की यात्रा के लिए ये हैं बेहतरीन टिप्स और अनुभव!


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Finland Traveling Tips In Hindi: फिनलैंड की गर्मियों का अनुभव किसी जादू से कम नहीं है. अगर आप लैपलैंड के उत्तरी छोर से लेकर राजधानी हेलसिंकी तक की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यहां कुछ बेहतरीन सुझाव और अनुभव दिए गए हैं, जो आपकी यात्रा को सचमुच यादगार बना देंगे.

Finland Traveling Tips In Hindi: फ़िनलैंड को अक्सर ‘हज़ारों झीलों और अनगिनत चट्टानों की धरती’ के रूप में जाना जाता है, लेकिन गर्मियों में यह और भी ज़्यादा जादुई रूप ले लेता है. दिन की लंबी रोशनी, रंग-बिरंगे त्योहार और सांसें थाम देने वाले प्राकृतिक नज़ारों के साथ, यह देश यात्रियों को शांति और रोमांच का एक अनोखा मेल पेश करता है. अगर आप इस गर्मी में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां कुछ ऐसे अनुभव दिए गए हैं जो फ़िनलैंड को सचमुच खास बनाते हैं.

Experience the Midnight Sun in Lapland: One of Finland’s most extraordinary natural phenomena is the midnight sun, where daylight lasts almost 24 hours in the northern regions. In Lapland, you can hike through pristine wilderness, go canoeing on glassy lakes, or simply sit by a campfire under a sky that never darkens. It’s a surreal experience that makes summer in Finland unlike anywhere else.

फिनलैंड की सबसे असाधारण प्राकृतिक घटनाओं में से एक है ‘मिडनाइट सन’, जहां उत्तरी क्षेत्रों में दिन का उजाला लगभग 24 घंटे रहता है. लैपलैंड में, आप प्राचीन जंगलों में पदयात्रा कर सकते हैं, झीलों में नाव चला सकते हैं और एक ऐसी रात में अलाव के पास बैठ सकते हैं जहां कभी अंधेरा नहीं होता.

Relax in the Lakeland Region: Finland’s Lakeland is a paradise for those who love water and tranquility. With thousands of interconnected lakes, it’s perfect for boating, fishing, or just soaking in the peaceful scenery. Traditional lakeside cottages offer the quintessential Finnish summer experience, complete with private saunas and opportunities to swim in crystal-clear waters.

फिनलैंड का लेकलैंड उन लोगों के लिए स्वर्ग है जिन्हें पानी और शांति पसंद है. हजारों जुड़ी हुई झीलों के साथ, यह नौका विहार और मछली पकड़ने के लिए आदर्श है. यहां के पारंपरिक ‘लेकसाइड कॉटेज’ फिनिश गर्मियों का असली अनुभव देते हैं, जहां निजी सौना और साफ पानी में तैरने की सुविधा होती है.

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Discover Finnish Sauna Culture: No trip to Finland is complete without experiencing a sauna, and summer makes it even more enjoyable. Many lakeside cottages and urban spas offer the chance to sweat it out in a traditional wood-heated sauna before plunging into cool waters. It’s not just relaxation, it’s a cultural ritual that embodies Finnish identity.

फिनिश सौना संस्कृति का अनुभव किए बिना फिनलैंड की यात्रा अधूरी है. गर्मियों में यह और भी आनंददायक हो जाता है. कई कॉटेज और शहरी स्पा पारंपरिक लकड़ी से गर्म किए गए सौना का अवसर देते हैं, जिसके बाद आप ठंडे पानी में डुबकी लगा सकते हैं. यह सिर्फ आराम नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक अनुष्ठान है जो फिनिश पहचान को दर्शाता है.

Attend Summer Festivals: From music festivals to food fairs, Finland’s summer calendar is packed with events. Flow Festival in Helsinki attracts international artists, while smaller folk and jazz festivals showcase local talent. These gatherings highlight Finland’s vibrant cultural scene and provide a chance to mingle with locals in a festive atmosphere.

संगीत समारोहों से लेकर फूड फेयर तक, फिनलैंड का ग्रीष्मकालीन कैलेंडर कार्यक्रमों से भरा रहता है. हेलसिंकी का ‘फ्लो फेस्टिवल’ अंतरराष्ट्रीय कलाकारों को आकर्षित करता है, जबकि छोटे जैज़ और लोक उत्सव स्थानीय प्रतिभाओं को प्रदर्शित करते हैं. ये आयोजन फिनलैंड के जीवंत सांस्कृतिक परिदृश्य को करीब से देखने का मौका देते हैं.

Visit Turku and the Archipelago: Turku, Finland’s oldest city, is a charming destination with medieval history and a lively riverside. From here, you can explore the Turku Archipelago, a chain of thousands of islands connected by ferries and bridges. Cycling or sailing through this region offers a unique way to experience Finland’s coastal beauty.

लसिंकी के पास ‘नूक्सियो’ (Nuuksio) दिन की पदयात्रा के लिए बेहतरीन है, जबकि उत्तर में ‘उलांका’ (Oulanka) नाटकीय परिदृश्य और वन्यजीव पेश करता है. खिले हुए फूलों और खुले रास्तों के साथ गर्मियों का समय इन पार्कों को देखने के लिए सबसे अच्छा है.



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Beer Price Hike: शराब के शौकीनों के लिए बुरी खबर, भारत में महंगी होगी ‘Beer’! दो वजहों ने बढ़ाई लागत और खर्च


International

oi-Siddharth Purohit

Beer Price Hike: अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग मिडिल ईस्ट से निकलकर यूरोप और एशिया तक पहुंच गई है। भले ही यहां सीधे हमले नहीं हो रहे हैं लेकिन गैस और तेल के दाम ने एक अलग जंग छेड़ दी है। भारत में सरकार गैस आपूर्ति के दावे कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों के बाहर लगी लाइन इसकी गवाही खुद दे रही हैं। वहीं, अब ये जंग एल्कोहल इंडस्ट्री को भी अपनी जद में लेने के लिए तैयार है। खबर आई है कि भारत में जल्द बीयर के दाम बढ़ सकते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि मैन्युफैक्चरिंग भारत में हो रही है तो दाम किस बात के लिए बढ़ रहे हैं। चलिए इसे समझते हैं।

बीयर कंपनियों की बढ़ रही टेंशन

भारत में काम कर रहे प्रमुख वैश्विक ब्रुअर्स ने इस नई चुनौती पर चिंता व्यक्त की है। ‘ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’, जो हीनेकेन, एनह्यूसर-बुश इनबेव और कार्लस्बर्ग जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, उसके मुताबिक, कांच की बोतलों की कीमतें लगभग 20% बढ़ गई हैं। इसके अलावा, कागज के डिब्बों और लेबल, टेप जैसी अन्य पैकेजिंग सामग्रियों की दरें भी दोगुनी हो गई हैं, जिससे लागत में काफी इजाफा हुआ है।

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एल्यूमिनियम भी बना दाम बढ़ने का कारण

बीयर कैन जिसे हम उंगली से उठाकर खोलते हैं और मुंह से लगाकर पीते हैं, वह एल्युमिनियम से बनती है। एल्युमिनियम के लिए भारत मुख्त: खाड़ी देशों पर निर्भर करता है। जैसा कि आपको पता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जंग का थिएटर बना हुआ है। ऐसे में गैस-तेल के साथ-साथ एल्युमिनियम की भी किल्लत होने लगी है। चूंकि यह रोजमर्रा की जिंदगी से उतना नहीं जुड़ा है तो इस पर असर देर से पड़ रहा है।

पीक सीजन से पहले बड़ा झटका

यह संकट ऐसे समय में आया है जब भारत में गर्मियों का पीक सीजन आ रहा है, जब बीयर की बिक्री सामान्य रूप से बढ़ जाती है। गैस की कमी के कारण, भट्टियों और उत्पादन लाइनों को चलाने के लिए आवश्यक ईंधन न मिलना जैसे समस्याओं ने कई कांच की बोतल निर्माताओं को आंशिक या पूरी तरह से संचालन बंद करने के लिए मजबूर किया है। साथ ही बीयर कैन का निर्माण भी अधर में लटकता दिख रहा है।

कीमतें बढ़ाने की तैयारी

रॉयटर्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एसोसिएशन के महानिदेशक विनोद गिरी ने बताया, “हम 12-15% की सीमा में कीमतों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत कुछ संचालनों को अस्थिर बना रही है। कुल मिलाकर गैस और एल्यूमिनियम के भारत पहुंचने में हो रही दिक्कतों की वजह से अब आपकी ठंडी बीयर गर्म हो सकती है।

तेजी से बढ़ता भारतीय बीयर बाजार

ग्रैंड व्यू रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारतीय बीयर बाजार का मूल्य $7.8 बिलियन था और 2030 तक इसके दोगुना होने की उम्मीद है। एसोसिएशन ने बताया कि हीनेकेन अकेले इस बाजार का लगभग आधा हिस्सा रखता है, जबकि एबी इनबेव और कार्लस्बर्ग 19-19% बाजार हिस्सेदारी रखते हैं। इस क्षेत्र में बीरा और सिम्बा जैसे कई छोटे खिलाड़ी भी एक्टिव हैं।

कीमत बढ़ाने में सरकारी नियम अड़चन

भारत में शराब क्षेत्र अत्यधिक विनियमित है, और खुदरा (रिटेल) कीमतों में वृद्धि के लिए आमतौर सरकार की रजामंदी लगती है। देश के 28 राज्यों में से लगभग दो-तिहाई को पैसा बढ़ाने के लिए राजी करना पड़ता है। लिहाजा एसोसिएशन ने जानकारी दी है कि, “वे राज्य जो कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति नहीं देते हैं, वहां ब्रुअर्स को आपूर्ति बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है।”

पूरे इंडस्ट्री पर असर

शराब कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली ‘कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज’ (CIABC) ने भी कई राज्यों को पत्र लिखकर बढ़ती माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स और इनपुट लागतों को समायोजित करने के लिए मूल्य समायोजन की मांग की है। यह बताता है कि यह संकट केवल बड़ी ब्रुअरीज तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे उद्योग को प्रभावित कर रहा है, जिसमें छोटी घरेलू कंपनियां भी शामिल हैं।

कांच उद्योग पर सीधा असर

कांच निर्माण उद्योग इस संकट से सीधे प्रभावित हो रहा है। उत्तरी उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में स्थित फाइन आर्ट ग्लास वर्क्स के सीईओ नितिन अग्रवाल ने बताया कि गैस की कमी के कारण उन्हें अपने कांच की बोतल बनाने वाले कारखाने में उत्पादन में 40% की कटौती करनी पड़ी है। उनके ग्राहकों में कई शराब कंपनियों के साथ-साथ जूस और केचप की बोतलें बनाने वाले भी शामिल हैं। लिहाजा इन प्रोडक्ट्स के भी दाम आने वाले दिनों में बढ़ सकते हैं।

उत्पादन घटा, कीमतें बढ़ीं

अग्रवाल ने पुष्टि की, “हमने उत्पादन में कटौती की है और कीमतों में 17-18% की वृद्धि की है।” साथ ही इनपुट लागत में बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों तक पहुंचने की संभावना है। इसी बीच बोतलों की आपूर्ति में अड़चन भी दाम बढ़ने का इशारा कर रही है।

ढक्कन भी होगा महंगा

यह संकट अब केवल बीयर उद्योग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी फैल रहा है। भारत के $5 बिलियन के बोतल बंद पानी के बाजार पर भी इसका असर पड़ा है, जहां प्लास्टिक की बोतलों और ढक्कनों की बढ़ती दरों के कारण कुछ उत्पादकों ने कीमतों में 11% का उछाल आया है।

भारत की कतर पर भारी निर्भरता

प्राकृतिक गैस का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा आयातक होने के कारण भारत ईंधन उपलब्धता के मामले में बेहद संवेदनशील है। देश अपनी गैस आपूर्ति का लगभग 40% कतर से प्राप्त करता है और डिलीवरी के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी हद तक निर्भर करता है। ईरान और कतर के बीच बढ़ते तनाव ने गैस को भारत पहुंचना मुश्किल कर दिया है, जिससे भारतीय निर्माताओं के लिए स्थिति और बिगड़ गई है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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West Asia: पश्चिम एशिया संकट के बीच खाद आपूर्ति पर सरकार सतर्क, कृषि मंत्री चौहान ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक


पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार खाद आपूर्ति को लेकर सतर्क हो गई है। इसी कड़ी में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जल्द ही एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण और कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा की जाएगी। वहीं बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को उच्चस्तरीय बैठक कर देश की रक्षा तैयारियों की समीक्षा की थी। 

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पीएम ने किसानों को किया आश्वास्त

पिछले दिनों संसद में पीएम मोदी किसानों को आश्वास्त किया था। किसानों को संसद से हरसंभव मदद का भरोसा दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, बुवाई में उर्वरक-खाद की कमी नहीं होगी। सरकार हर परिस्थिति में साथ खड़ी है। उन्होंने राज्यसभा में अपने वक्तव्य के दौरान कहा, ‘मैं किसानों को आश्वस्त करता हूं कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। बुवाई के मौसम में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिल सकें, सरकार ये सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।’

(यह खबर अपडेट की जा रही है)



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कांग्रेस को नोटिस- अकबर रोड-रायसीना हिल के दफ्तर खाली करें: 28 मार्च तक का वक्त; दावा- एस्टेट डिपार्टमेंट के खिलाफ कोर्ट जाएगी पार्टी




कांग्रेस पार्टी को 24 अकबर रोड वाला दफ्तर 28 मार्च तक खाली करना होगा। एस्टेट डिपार्टमेंट ने पार्टी को नोटिस दिया है। न्यूज एजेंसी ANI ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से कहा है कि दफ्तर खाली करने के लिए 3 दिन का समय दिया गया है। 5 रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के कार्यालय के लिए भी एक और नोटिस जारी किया गया है। कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि कांग्रेस सरकार के इस रवैए के खिलाफ कोर्ट में अपील करेगी। 2025 में बदला कांग्रेस का पता, इंदिरा भवन नया दफ्तर कांग्रेस ने 14 जनवरी 2025 को ही अकबर रोड वाले ऑफिस से अपना दफ्तर इंदिरा भवन में शिफ्ट किया है। 46 साल बाद पार्टी ने अपना पता बदला था। इंदिरा भवन की आधारशिला 2009 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने रखी थी। इसे बनने में 252 करोड़ रुपए लगे। बर्मा हाउस बना कांग्रेस का लकी चार्म 70 के दशक में कांग्रेस का ऑफिस डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर था। इसका एड्रेस 3, रायसीना रोड था। इसके ठीक सामने 6, रायसीना रोड पर अटल बिहारी वाजपेयी रहा करते थे। 1978 में कांग्रेस में टूट के बाद ऑफिस पार्टी सांसद जी वेंकटस्वामी को अलॉट बंगले 24, अकबर रोड में शिफ्ट किया गया था। तब से अब तक यह कांग्रेस मुख्यालय का पता रहा। 24, अकबर रोड कभी इंडियन एयरफोर्स के चीफ का घर हुआ करता था। इसके अलावा यह इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की पॉलिटिकल सर्विलांस विंग का ऑफिस भी रहा। इसे बर्मा हाउस भी कहा जाता था। बंगले को यह नाम पंडित जवाहर लाल नेहरू ने दिया था। दरअसल, इसी बंगले में म्यांमार की भारत में राजदूत डॉ. खिन काई रहती थीं। वे म्यांमार की आयरन लेडी कही जाने वाली आंग सान सू की, की मां थीं और करीब 15 साल तक आंग के साथ इस बंगले में रही थीं। इंदिरा ने जब 24, अकबर रोड को कांग्रेस मुख्यालय के तौर पर चुना था, तब पार्टी काफी मुश्किलों से जूझ रही थी। लेकिन यह ऑफिस कांग्रेस और इंदिरा दोनों के लिए काफी लकी साबित हुआ। 1980 के मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटी। यह ऑफिस चार प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह का गवाह रहा। सुप्रीम कोर्ट ने दफ्तर बदलने का निर्देश दिया था सुप्रीम कोर्ट ने लुटियंस जोन में भीड़-भाड़ की वजह से सभी पार्टियों को अपना दफ्तर बदलने का निर्देश दिया था। इसके बाद सबसे पहले भाजपा ने 2018 में दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर अपना ऑफिस बनाया। कांग्रेस ने भी अपना नया ठिकाना भाजपा के पड़ोस में ढूंढा। नए ऑफिस ‘इंदिरा भवन’ में शिफ्ट होने के बाद भी कांग्रेस अपना पुराना ऑफिस खाली नहीं किया था। यहां बड़े नेताओं का उठना-बैठना जारी है। केंद्र सरकार ने 2015 में कांग्रेस को दिए गए चार बंगलों का आवंटन रद्द किया था। इसमें 24, अकबर रोड भी शामिल था। इसके अलावा 26 अकबर रोड (कांग्रेस सेवा दल ऑफिस), 5-रायसीना रोड (यूथ कांग्रेस ऑफिस) और C-II/109 चाणक्यपुरी (सोनिया गांधी के सहयोगी विन्सेंट जॉर्ज को आवंटित) का आवंटन भी रद्द कर दिया था।



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Gold Rate Today: सोने के दामों में मामूली उछाल, निवेशक हैरान, कहां पहुंचा 24, 22 और 18 कैरट का भाव?


Business

oi-Ankur Sharma

Gold Rate Today 25 March 2026: ईरान-इजराइल-अमेरिका में चल रहे युद्ध के बीच सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार 24 मार्च को 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 3.58% बढ़कर 4971 हो गया है जिसके बाद सोने का रेट इस वक्त 1,43,883 रुपये प्रति 10 ग्राम रैंक कर रहा है।

तो वहीं गुडरिटर्न्स के मुताबिक 24 कैरेट का सोना का भाव 1,43,060 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। आइए जानते हैं इस वक्त 24, 22 और 18 कैरेट सोने का भाव क्या है?

Gold Rate Today 25 March 2026

Gold Rate Today: IBJA के मुताबिक आज का सोने का भाव

  • सोना 24 कैरेट 140420 रुपये प्रति 10 ग्राम
  • सोना 22 कैरेट 128625 रुपये प्रति 10 ग्राम
  • सोना 18 कैरेट 105315 रुपये प्रति 10 ग्राम

24 कैरेट, 22 कैरेट, 18 कैरेट सोना का भाव आपके शहर में क्या है? City wise Gold Price (प्रति 10 ग्राम)

दिल्ली

  • सोना 24 कैरेट ₹143060
  • सोना 22 कैरेट₹131150
  • सोना 18 कैरेट ₹107340

मुंबई

  • सोना 24 कैरेट ₹142910
  • सोना 22 कैरेट ₹131000
  • सोना 18 कैरेट ₹107190

कोलकाता

  • सोना 24 कैरेट ₹142910
  • सोना 22 कैरेट ₹131000
  • सोना 18 कैरेट ₹107190

पटना

  • सोना 24 कैरेट ₹142960
  • सोना 22 कैरेट ₹131050
  • सोना 18 कैरेट ₹107240

लखनऊ

  • सोना 24 कैरेट ₹143060
  • सोना 22 कैरेट ₹131150
  • सोना 18 कैरेट ₹107340

अयोध्या

  • सोना 24 कैरेट₹143060
  • सोना 22 कैरेट₹131150
  • सोना 18 कैरेट ₹107340

मेरठ

  • सोना 24 कैरेट₹143060
  • सोना 22 कैरेट₹131150
  • सोना 18 कैरेट ₹107340

कानपुर

  • सोना 24 कैरेट ₹143060
  • सोना 22 कैरेट₹131150
  • सोना 18 कैरेट ₹107340

गाजियाबाद

  • सोना 24 कैरेट ₹143060
  • सोना 22 कैरेट ₹131150
  • सोना 18 कैरेट ₹107340

Sone Ka Bhav: क्यों सोने का भाव बढ़ा?

आपको बता दें कि भारत में सोने की कीमतें वैश्विक बाजार से प्रभावित होती हैं। सोने की कीमतों में उछाल के पीछे ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध है, आमतौर पर ऐसे हालात में सोना महंगा हो जाता है, क्योंकि निवेशक इसे Safe Haven Asset यानी सुरक्षित निवेश मानते हैं। कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर युद्ध लंबा चला या तेल की सप्लाई प्रभावित हुई तो सोने की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ सकती हैं।

डिस्क्लेमर: बताए गए विचार और सुझाव सिर्फ़ अलग-अलग एनालिस्ट या एंटिटी के हैं, वनइंडिया हिंदी किसी भी तरह के कोई निवेश सलाह नहीं देता है देता हैं और ना ही सिक्योरिटीज़ की खरीद या बिक्री के लिए कहता है। सारी जानकारी सिर्फ़ सूचना देने और एजुकेशनल मकसद के लिए दी गई है और कोई भी निवेश का फ़ैसला लेने से पहले लाइसेंस वाले फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र से इसे अलग से वेरिफ़ाई कर लेना चाहिए।



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आगरा घूमने का है प्लान? तो अपनी ट्रिप को बनाएं खास, ताजमहल के साथ इन जगहों की भी करें सैर


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Agra Best Historical Picnic Spots: अगर आप आगरा घूमने का प्लान बना रहे है और सिर्फ ताजमहल तक ही सीमित रहना चाहते है तो आपकी यात्रा अधूरी रह सकती है. मुगलकालीन इतिहास और शानदार वास्तुकला से भरा यह शहर कई ऐसी खूबसूरत इमारतों और बागों का घर है, जो आपकी ट्रिप को और भी यादगार बना देते है. चीनी का रोजा से लेकर मेहताब बाग, मरियम का मकबरा, अकबर का मकबरा और एत्मादुद्दौला मकबरा जैसी ऐतिहासिक धरोहरें पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. इन इमारतों की खूबसूरती, इतिहास और वास्तुकला आपकी यात्रा को दोगुना मजेदार बना सकती है.

आगरा में ताजमहल के अलावा मुगलकालीन इमारते भी आपकी ट्रिप को मजेदार बना सकती है. ऐसी ही पहली ईमारत है जिसे चीनी का रोजा कहा जाता है. यह ईमारत आगरा में यमूना किनारे स्थित है. इसे सन 1635 से 1639 के बीच बादशाह शाहजहां के वजीर और फारसी कवि अल्लामा अफजल खान मुल्ला का एक अनूठा मकबरा है. यह भारत में फारसी वास्तुकला का एक दुर्लभ उदाहरण है, जो अपनी नीली-हरी रंगीन चीनी मिट्टी’ की टाइलों (Glazed iles) के कारण प्रसिद्ध है.

घूमने का स्थान

आगरा में घूमने के लिए प्राकृतिक बगीचे भी है. ऐसा ही एक बगीचा है जिसे मेहताब बाग कहा जाता है. यहां से ताजमहल की खूबसूरती को आसानी से देखा जा सकता है. आगरा का यह मेहताब बाग जिसे चांदनी बाग भी कहते है. यह यमुना के किनारे, ताजमहल के ठीक सामने स्थित 16वीं शताब्दी का एक मुगल उद्यान है. बाबर द्वारा निर्मित 11 उद्यानों की श्रंखला में अंतिम, शाहजहां ने इसे ‘चांदनी रात’ में ताजमहल को निहारने के लिए विकसित किया था. यह बाग अपनी चारबाग शैली, फव्वारों और ताजमहल के शानदार दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है.

इमारत

आगरा के सिकंदरा स्थित मरियम का मकबरा मौजूद है. इस मकबरे को मरियम- उज-जमानी का मकबरा भी कहते है. यह बादशाह अकबर की बेगम और जहांगीर की मां मरियम जमानी (जोधा बाई)का मकबरा है. इतिहासकार बताते है कि जहांगीर ने सन 1623-1627 के बीच अपनी मां की याद में इस लाल बलुआ पत्थर की संरचना को सन 1495 में बनी एक पुरानी बारादरी का पुननिर्माण करके बनवाया था, जो अपनी अनोखी मुगल-राजपूत स्थापत्य शैली के लिए जानी जाती है.

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इमारत

अकबर का मकबरा आगरा के सिकंदरा में स्थित एक भव्य मुगल स्मारक है. बताया जाता है जिसे स्वयं अकबर ने शुरू किया था. बाद में उनकी मौत के बाद अकबर के बेटे जहांगीर ने सन 1613 में इसे पूरा करवाया था. यह लाल बलूआ पत्थर और सफेद संगमरमर से निर्मित पांच मंजिला पिरामिडनुमा इमारत है, जो 119 एकड में फैले सुंदर बगीचे के बीच स्थित है.

इमारत

आगरा में ताजमहल जैसा दिखने वाला यह ईमारत बेहद अद्धभुत है, इसे बेबी ताज भी कहा जाता है. हम बात कर रहे है एत्मादुद्दौला मकबरे की. यह आगरा में यमुना किनारे स्थित एक बेहद खृबसूरत मूगलकालीन स्मारक है, जिसे मूगल महारानी नूरजहां ने सन 1622-1628 के बीच अपने पिता मिर्जा गियास बेग की याद में बनवाया था. यह मुग़ल धरोहर सफेद संगमरमर से बनी भारत की पहली ऐसी मुगलकालीन इमारत है. जिसमें बडे पैमाने पर पिएत्रा ड्यूरा यानि की बेहद कीमती पत्थरों की पच्चीकारी का इस्तेमाल हुआ था. जिसके कारण इसे बेबी ताज़ तक कहा जाता है.

ईमारत

आगरा में ताजमहल और किला देखने के बाद देशी विदेशी पर्यटक फतेहपुर सिकरी घूमने भी जाता है. यहां विश्व का सबसे बड़ा दरवाजा यानि की बुलंद दरवाजा स्थित है जिसकी सुंदरता और आकृति लोगों को खूब लुबती है. यह ईमारत फतेहपुर सिकरी जो सन 1571 से वर्ष 1585 के बीच मुग़ल सम्राट अकबर की राजधानी थी. यह मुग़ल इमारत लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित एक वास्तुकला का एक अद्भत उदाहरण है. यह ईमारत सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के सम्मान से भी फेमस है. यह शहर हिंदू और फारसी शैलियों के मिश्रण से बना है. पानी की कमी के कारण त्यागे जाने के बावजूद, यह अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. वर्तमान में इस ईमारत को देखने के लिए देश दुनिया से पर्यटक आते है.



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Crude Oil: युद्ध विराम के संकेतों के बीच तेल की कीमतों में दिखी नरमी, ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 99 डॉलर पर आया


युद्ध विराम के संकेतों के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत में 4.78 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह करीब 99 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट

कच्चे तेल की कीमतों में पांच फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले सत्र की बढ़त काफी हद तक खत्म हो गई। तेल कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में संभावित कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें बढ़ी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सामने 15 बिंदुओं वाला प्रस्ताव रखा है, जिसका मकसद जारी संघर्ष को खत्म करना है।

युद्ध विराम के संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच फिलहाल बातचीत चल रही है और ईरान समझौते के लिए इच्छुक नजर आ रहा है। हालांकि, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रत्यक्ष वार्ता से इनकार किया है।

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है और युद्ध खत्म होता है, तो तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं, कूटनीतिक प्रगति की उम्मीदों ने बाजार में सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं को कुछ हद तक कम कर दिया है, जिससे कीमतों पर दबाव बना है।



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