Home Blog Page 365

‘घर की याद नहीं आई तुझे, जस्सी?’ Sanjana Ganesan ने पति बुमराह को किया बुरी तरह ट्रोल, फिल्म ‘धुरंधर’ बनी वजह!


Cricket

oi-Amit Kumar

Sanjana Ganesan Trolls Jasprit Bumrah: भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह मैदान पर अपनी यॉर्कर से बल्लेबाजों के स्टंप्स उखाड़ने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन घर के मैदान पर उनकी पत्नी और मशहूर स्पोर्ट्स एंकर संजना गणेशन की गुगली ने उन्हें क्लीन बोल्ड कर दिया है। संजना ने हाल ही में रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ के एक बेहद पॉपुलर डायलॉग का इस्तेमाल कर बुमराह की मजेदार खिंचाई की है।

संजना गणेशन ने किया बुमराह को ट्रोल (Sanjana Ganesan Trolls Jasprit Bumrah)

संजना गणेशन ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक मीम शेयर किया है, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। इस पोस्ट में उन्होंने फिल्म ‘धुरंधर 2’ के उस हाई-टेंशन सीन के डायलॉग का इस्तेमाल किया है, जिसमें ‘पिंडा’ नाम का किरदार कहता है घर की याद नहीं आई तुझे, जस्सी? संजना ने इसे अपनी निजी जिंदगी से जोड़ते हुए कैप्शन दिया कि जब भी जसप्रीत ‘बॉयज नाइट’ (दोस्तों के साथ बाहर जाने) की प्लानिंग करते हैं, तो मेरा रिएक्शन होता है घर की याद नहीं आई तुझे, जस्सी?

Sanjana Ganesan 1

धूम मचा रही है फिल्म ‘धुरंधर 2’

संजना का यह मजाकिया अंदाज क्रिकेट फैंस को काफी पसंद आ रहा है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘धुरंधर 2’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बना रही है। फिल्म के डायलॉग्स, खासकर ‘जस्सी’ वाला यह लाइन अब केवल सिनेमाघरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर एक ‘पॉप-कल्चर फिनोमिना’ बन चुका है। संजना के इस पोस्ट ने यह साबित कर दिया है कि सेलिब्रिटी कपल्स भी आम लोगों की तरह ही फिल्मी मीम्स के जरिए अपनी आपसी केमिस्ट्री और हंसी-मजाक को शेयर करना पसंद करते हैं।

IPL 2026 से पहले रिलैक्स मूड में बुमराह

28 मार्च से शुरू हो रहे आईपीएल 2026 में जसप्रीत बुमराह मुंबई इंडियंस के लिए एक बार फिर धारदार गेंदबाजी करते नजर आएंगे। टूर्नामेंट के भारी तनाव और व्यस्त शेड्यूल से ठीक पहले, संजना और बुमराह के बीच की यह ‘फिल्मी जंग’ फैंस को काफी सुकून दे रही है। फैंस का कहना है कि संजना की कॉमेडी टाइमिंग बुमराह की गेंदबाजी की तरह ही सटीक है।



Source link

‘सिर्फ 11 विधायक दो फिर देखो एनकाउंटर करने वालों का’, कौन है ये नेता? जिसके बयान पर बवाल मचने पर FIR दर्ज


Uttar Pradesh

oi-Bhavna Pandey

AIMIM UP President Shaukat Ali: उत्तर प्रदेश की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब हाजी शौकत अली ने मेरठ में आयोजित ईद मिलन समारोह को चुनावी मंच में बदल दिया। उन्होंने 2027 विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंकते हुए न सिर्फ अपनी पार्टी की रणनीति का खुलासा किया, बल्कि कई विवादित बयान देकर राजनीतिक तापमान भी बढ़ा दिया।

दरअसल, शौकत अली ने दावा किया कि जनता अगर सिर्फ 11 विधायक जिताती है, तो किसी मुसलमान का एनकाउंटर नहीं होने देंगे। साथ ही चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी किसी मुसलमान का एनकाउंटर हुआ, तो उन अधिकारियों का भी एनकाउंटर किया जाएगा। इस विवादास्पद बयान पर को लेकर विवाद खड़ा हो गया और पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया।

AIMIM UP President Shaukat Ali

सपा पर निशाना-‘111 विधायक, फिर भी खामोशी’

सोशल म‍ीडिया पर शौकत अली का जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें उन्‍होंने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उनका कहना था कि जिन्हें जनता ने 111 विधायक दिए, वे अब अन्याय के मुद्दों पर चुप हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल इल्जामों के आधार पर लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाए गए और गोलियां चलाई गईं, लेकिन विपक्षी नेता जिम्मेदारी से बच रहे हैं।

‘एक डंडा, एक झंडा, एक नेता’

मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए शौकत अली ने लोगों से घर-घर जाकर नाइंसाफी के मुद्दे उठाने की अपील की। उन्होंने एक साल तक ‘जमात’ में सक्रिय रहने का संकल्प लेने को कहा, ताकि उनकी आवाज लखनऊ तक पहुंचे। साथ ही मस्जिदों और मदरसों की सुरक्षा पर जोर देते हुए ‘एक डंडा, एक झंडा और एक नेता’ का नारा दिया।

अपनी सफाई में क्‍या बोले शौकत अली?

अपने बयान पर सफाई देते हुए शौकत अली ने कहा कि उन्होंने जो कुछ कहा, वह संविधान के दायरे में रहकर कहा। उन्होंने फिर से सपा पर हमला दोहराते हुए कहा कि 90% मुस्लिम वोट मिलने के बावजूद उनके विधायक अन्याय के खिलाफ खामोश हैं।

कौन है हाजी शौकत अली?

हाजी शौकत अली उत्तर प्रदेश में एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वे पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधि के रूप में जाने जाते हैं। शौकत अली उत्तर प्रदेश की सियासत में सक्रिय हैं और विशेषकर कमजोर और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते हैं।

AIMIM की रणनीति के तहत वे उत्तर प्रदेश में पार्टी का विस्तार और आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। वे उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में रैलियाँ और जनसभाएँ करते रहे हैं और कई बार विवादित बयानबाज़ी के कारण चर्चा में रहे हैं

2027 में 200 सीटों पर चुनाव, दलित-मुस्लिम गठजोड़

शौकत अली ने घोषणा की कि AIMIM 2027 के विधानसभा चुनाव में 200 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने मायावती के साथ मिलकर दलित-मुस्लिम गठबंधन बनाने की भी बात कही। उन्होंने इस कार्यक्रम को महज ईद मिलन नहीं, बल्कि “सत्ता संघर्ष का आगाज” बताया-जिससे साफ है कि पार्टी आने वाले चुनावों में आक्रामक रणनीति के साथ उतरने की तैयारी कर रही है।



Source link

रेप के आरोपी बाबा के 100 आपत्तिजनक वीडियो मिले: 1500 करोड़ की संपत्ति का भी पता लगा, पुलिस ने कोर्ट में कहा- बलि देने का शक


  • Hindi News
  • National
  • Nashik Rape Accused Baba Found With ₹1500 Cr Assets & 100 Objectionable Videos

नासिक/ मुंबई25 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

नासिक जिले के सिन्नर में मंदिर ट्रस्ट चलाने वाले खरात को 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।

नासिक के स्वयंभू बाबा और रेप के आरोपी अशोक भोंदू खरात के खिलाफ जांच तेज हो गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को जांच के दौरान करीब 1,500 करोड़ रुपए की संपत्ति और 100 आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं। पुलिस ने खरात को मंगलवार को नासिक सेशन कोर्ट में पेश किया जहां से उसे फिर पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

कोर्ट में संक्षिप्त सुनवाई में पुलिस ने खरात पर 5 मानव बलि देने का संदेह जताया है। कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों खरात की गाड़ी पर हमला करने की कोशिश की।

जांच का दायरा बढ़ने के बाद नासिक पुलिस और आयकर विभाग को भी इस मामले में शामिल किया गया है।

नासिक जिले के सिन्नर में मंदिर ट्रस्ट चलाने वाले खरात को 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। 35 वर्षीय महिला ने उस पर तीन साल तक बार-बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है।

खरात से मिलने कई राजनेता भी आते रहे हैं। वह खुद को कैप्टन कहता था।

खरात से मिलने कई राजनेता भी आते रहे हैं। वह खुद को कैप्टन कहता था।

दो और केस दर्ज

इस मामले में दो और केस भी दर्ज किए गए हैं। इनमें एक सात महीने की गर्भवती महिला के साथ यौन शोषण और दूसरी महिला को दोबारा शादी कराने का झांसा देकर शोषण करने के आरोप शामिल हैं।

अधिकारी ने बताया कि साइबर पुलिस इन वीडियो की जांच कर रही है। खरात से मिलनें कई राजनेता भी आते रहे हैं।

मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए कई एजेंसियां मिलकर जांच कर रही हैं। इसमें डिजिटल सबूतों और पैसों के लेन-देन की भी जांच शामिल है।

लोगों से जांच में मदद मांगी

आईपीएस अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में SIT इस समय खरात के खिलाफ दर्ज छह मामलों की जांच कर रही है। टीम ने लोगों से अपील की है कि अगर उनके पास इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी है, तो वे आगे आकर साझा करें।

SIT ने भरोसा दिलाया है कि जानकारी देने वालों और शिकायत करने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

जांच टीम में क्राइम ब्रांच के 5 से 10 अधिकारी शामिल हैं, जिनमें महिला पुलिसकर्मी भी हैं, ताकि पीड़ितों के बयान संवेदनशील तरीके से दर्ज किए जा सकें।

महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) सदानंद दाते और राज्य सरकार इस जांच पर नजर रखे हुए हैं, ताकि जांच तेजी और पारदर्शिता के साथ पूरी हो सके।

फार्महाउस से पिस्तौल, कारतूस मिले

एसआईटी अधिकारी किरण कुमार सूर्यवंशी ने कोर्ट में बताया कि आरोपी अशोक महिलाओं को पत्थर और लाठी देता था। वह उन्हें नशीले पदार्थ मिला पानी पिलाता था। इसके बाद वह उनका यौन शोषण करता था। हमें संदेह है कि अशोक ने कुछ मानव बलि भी दी थी।

पुलिस ने आरोपी के फार्महाउस से पिस्तौल, कारतूस, रॉड और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं।अभियुक्तों के पास से कुछ कारतूस गायब हैं।

अशोक नकली सांपों और बाघों का इस्तेमाल करके दहशत फैला रहा था। वह कस्तूरी जैसी चीजों का भी इस्तेमाल कर रहा था। इसलिए, उस पर वन्यजीव अधिनियम का उल्लंघन करने का भी संदेह है।

कोर्ट में अशोक बोला- मुझे कुछ नहीं पता

कोर्ट में बहस के दौरान अशोक खरात सिर झुकाए खड़ा रहा। उसे फिर, हिरासत में भेजने से पहले कोर्ट ने पूछा गया, ‘क्या आपको कुछ कहना है?’ इस पर खरात ने कहा, ‘मुझे सांपों और बाघों के बारे में कुछ नहीं पता। मैं यह पहली बार सुन रहा हूं। मैं कभी-कभी मंदिर जाता था। उस समय वहां करीब 100 लोग होते थे।

————————————

ये खबर भी पढ़ें:

महाराष्ट्र ज्योतिषी रेप केस में महिला आयोग अध्यक्ष का इस्तीफा:विपक्ष का आरोपी से तांत्रिक क्रिया कराने का आरोप, दावा- अनुष्ठान में तीसरी उंगली काटी

शिवसेना (UBT) की प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने शुक्रवार को मीडिया को एक तस्वीर दिखाई। दावा किया कि महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने तांत्रिक अनुष्ठान के लिए तीसरी उंगली काट ली थी।

शिवसेना (UBT) की प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने शुक्रवार को मीडिया को एक तस्वीर दिखाई। दावा किया कि महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने तांत्रिक अनुष्ठान के लिए तीसरी उंगली काट ली थी।

महाराष्ट्र में रेप के आरोपी ज्योतिषी अशोक खरात मामले में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने शुक्रवार देर रात इस्तीफा दे दिया। विपक्ष ने चाकणकर पर आरोपी खरात से संबंध के आरोप लगाए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का इस्तीफा मांगा था। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…



Source link

गुजरात UCC बिल पास करने वाला दूसरा राज्य बना: विधानसभा में बहुमत से बिल पास, कांग्रेस ने वोटिंग से वॉकआउट किया था




गुजरात विधानसभा में मंगलवार रात को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास हो गया। गुजरात UCC बिल पास करने वाला देश का दूसरा राज्य बना है। इससे पहले उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया था। विधानसभा में बिल पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया था। बिल बहुमत से पास हो गया। इस विधेयक में वसीयत न होने की स्थिति में माता-पिता, बच्चों और पति/पत्नी को संपत्ति में बराबर हिस्सा देने का प्रावधान है। अब विवाह, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में सभी पर समान नियम लागू होंगे। गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि आज का दिन गुजरात के लिए ऐतिहासिक है। यूसीसी एक ऐसा कानून है, जो किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए समान न्याय प्रदान करता है। शादी रजिस्टर्ड न कराने पर ₹25 हजार तक का जुर्माना UCC के मसौदे में नियमों को साफ और एक जैसा बनाने की बात है। इसके तहत हर शादी का रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा। अगर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया, तो शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन 10 से 25 हजार रुपए तक जुर्माना लग सकता है। पुराने विवाहों के लिए भी अलग रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था होगी। अगर कोई व्यक्ति बिना वसीयत के मरता है, तो उसकी संपत्ति माता-पिता, पति/पत्नी और बच्चों में बराबर बांटी जाएगी। उत्तराखंड और गुजरात की समान नागरिक संहिता में कई समानताएं हैं… समान संपत्ति अधिकार उत्तराखंड: संपत्ति में पुत्र और पुत्री दोनों को समान अधिकार प्राप्त होंगे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किस वर्ग से संबंधित हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर, समान नागरिक संहिता के तहत उसकी संपत्ति को पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, मृतक के माता-पिता को भी संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त होंगे। पूर्व कानून में यह अधिकार केवल मृतक की माता को ही प्राप्त था। गुजरात: वसीयत न करने की स्थिति में, संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। लिव-इन रिलेशनशिप उत्तराखंड: पंजीकरण अनिवार्य है। उत्तराखंड में रहने वाले लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले दंपत्तियों को पंजीकरण कराना होगा। हालांकि यह स्व-घोषणा के समान होगा, अनुसूचित जनजातियों के लोगों को इस नियम से छूट दी जाएगी। बच्चे की जिम्मेदारी: यदि बच्चा लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी लिव-इन कपल की होगी। दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा। इससे राज्य में प्रत्येक बच्चे को पहचान मिलेगी। गुजरात: लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है। यदि आयु 21 वर्ष से कम है, तो अभिभावक को सूचित करना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन घोषणा के 30 दिनों के भीतर करवाना होगा और रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्ट्रेशन करके प्रमाण पत्र जारी करना होगा, अन्यथा रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति बिना रजिस्ट्रेशन के 1 महीने से अधिक समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे 3 महीने की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बच्चे की जिम्मेदारी: लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे वैध माने जाएंगे। यदि महिला को छोड़ दिया जाता है, तो वह भरण-पोषण की हकदार है। तलाक उत्तराखंड: तलाक केवल आपसी सहमति के आधार पर ही दिया जाएगा। पति-पत्नी को तलाक तभी दिया जाएगा जब दोनों के पास एक समान कारण और तर्क हों। यदि केवल एक पक्ष कारण बताता है, तो तलाक नहीं दिया जाएगा। गुजरात: प्रथागत या व्यक्तिगत कानून के तहत तलाक मान्य नहीं होगा। क्रूरता, धर्म परिवर्तन, असाध्य मानसिक बीमारी या सात साल तक लापता रहने जैसे आधारों पर तलाक मांगा जा सकता है। यदि पति-पत्नी एक वर्ष या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं, तो वे आपसी सहमति से भी तलाक ले सकते हैं। अदालत द्वारा तलाक का आदेश जारी होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास तलाक के आदेश को पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। UCC संविधान सभा में 1948 में पेश किया गया सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था। ————————————————- गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गुजरात में गैस की किल्लत, प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे:लोग बोले- सिलेंडर ₹5 हजार में मिल रहा, फ्लैट में चूल्हा नहीं जला सकते देश में एलपीजी गैस कि कमी से चलते गुजरात से अब प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। सूरत के रेलवे स्टेशनों पर बिहार और यूपी लौटने वाले लोगों की लाइनें लगी हैं। रसोई गैस की कमी के चलते राज्य में रेस्टोरेंट-ढाबा और दूसरे खाने-पीने के स्टॉल चलाने वालों का रोजगार ठप होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…



Source link

गुजरात विधानसभा में UCC बिल पेश: सभी पर समान नियम लागू होंगे, गृह मंत्री संघवी बोले- राज्य के लिए स्वर्णिम दिन




गुजरात विधानसभा में मंगलवार को यूसीसी विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक में वसीयत न होने की स्थिति में माता-पिता, बच्चों और पति/पत्नी को संपत्ति में बराबर हिस्सा देने का प्रावधान है। आज का दिन स्वर्णिम रहेगा: हर्ष संघवी
गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि आज का दिन गुजरात के लिए ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया, जो राज्य के लिए स्वर्णिम दिन है। देश को आजादी मिलने के बाद भी समाज और धर्म के आधार पर व्यक्तिगत कानून अलग-अलग रहे, जिसके कारण बहनों और बेटियों को सबसे ज्यादा कष्ट सहना पड़ा। सभी पर समान नियम लागू होंगे: हर्ष संघवी
अब विवाह, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में सभी पर समान नियम लागू होंगे। उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रही थीं और आज वे मुख्यमंत्री को बधाई दे रही हैं। यूसीसी एक ऐसा कानून है, जो किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए समान न्याय प्रदान करता है। विवाह पंजीकरण न कराने वालों पर 10-25 हजार रुपए का जुर्माना
यूसीसी के मसौदे में व्यक्तिगत कानूनों को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। नई प्रणाली के तहत, राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा। हालांकि, पंजीकरण न कराने पर भी विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा, लेकिन पंजीकरण न कराने वालों को 10-25 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यूसीसी के लागू होने से पहले हुए विवाहों के लिए एक विशिष्ट पंजीकरण प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। सामान्य कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु वसीयत न करने के कारण हो जाती है, तो संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। यदि उत्तराधिकार में कोई वसीयत नहीं है, तो माता-पिता, बच्चे और पति/पत्नी सभी को संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलेगा। उत्तराखंड और गुजरात की समान नागरिक संहिता में कई समानताएं हैं…
समान संपत्ति अधिकार उत्तराखंड: संपत्ति में पुत्र और पुत्री दोनों को समान अधिकार प्राप्त होंगे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किस वर्ग से संबंधित हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर, समान नागरिक संहिता के तहत उसकी संपत्ति को पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, मृतक के माता-पिता को भी संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त होंगे। पूर्व कानून में यह अधिकार केवल मृतक की माता को ही प्राप्त था। गुजरात: वसीयत न करने की स्थिति में, संपत्ति माता-पिता (एक हिस्सा), पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से विभाजित की जाएगी। लिव-इन रिलेशनशिप उत्तराखंड: पंजीकरण अनिवार्य है। उत्तराखंड में रहने वाले लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले दंपत्तियों को पंजीकरण कराना होगा। हालांकि यह स्व-घोषणा के समान होगा, अनुसूचित जनजातियों के लोगों को इस नियम से छूट दी जाएगी। बच्चे की जिम्मेदारी: यदि बच्चा लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी लिव-इन कपल की होगी। दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा। इससे राज्य में प्रत्येक बच्चे को पहचान मिलेगी। गुजरात: लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है। यदि आयु 21 वर्ष से कम है, तो अभिभावक को सूचित करना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन घोषणा के 30 दिनों के भीतर करवाना होगा और रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्ट्रेशन करके प्रमाण पत्र जारी करना होगा, अन्यथा रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति बिना रजिस्ट्रेशन के 1 महीने से अधिक समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे 3 महीने की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बच्चे की जिम्मेदारी: लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे वैध माने जाएंगे। यदि महिला को छोड़ दिया जाता है, तो वह भरण-पोषण की हकदार है। तलाक उत्तराखंड: तलाक केवल आपसी सहमति के आधार पर ही दिया जाएगा। पति-पत्नी को तलाक तभी दिया जाएगा जब दोनों के पास एक समान कारण और तर्क हों। यदि केवल एक पक्ष कारण बताता है, तो तलाक नहीं दिया जाएगा। गुजरात: प्रथागत या व्यक्तिगत कानून के तहत तलाक मान्य नहीं होगा। क्रूरता, धर्म परिवर्तन, असाध्य मानसिक बीमारी या सात साल तक लापता रहने जैसे आधारों पर तलाक मांगा जा सकता है। यदि पति-पत्नी एक वर्ष या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं, तो वे आपसी सहमति से भी तलाक ले सकते हैं। अदालत द्वारा तलाक का आदेश जारी होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास तलाक के आदेश को पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा।
समान नागरिक संहिता का मुद्दा सर्वप्रथम कब उठा?
सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था। ———————– गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गुजरात में गैस की किल्लत, प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे:लोग बोले- सिलेंडर ₹5 हजार में मिल रहा, फ्लैट में चूल्हा नहीं जला सकते देश में एलपीजी गैस कि कमी से चलते गुजरात से अब प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। सूरत के रेलवे स्टेशनों पर बिहार और यूपी लौटने वाले लोगों की लाइनें लगी हैं। रसोई गैस की कमी के चलते राज्य में रेस्टोरेंट-ढाबा और दूसरे खाने-पीने के स्टॉल चलाने वालों का रोजगार ठप होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…



Source link

‘नहीं तो यूपी, बिहार की एस्‍प्रेस ट्रेनों को रोक देंगे’, राज ठाकरे MNS ने आखिर क्‍यों दी ये धमकी?


Maharashtra

oi-Bhavna Pandey

Raj Thackeray’s MNS ultimatum:मुंबई और कोंकण के यात्रियों की सुविधा से जुड़ा रत्नागिरी-दादर पैसेंजर ट्रेन का मुद्दा अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने इस ट्रेन को दोबारा दादर तक शुरू करने की मांग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर 15-20 दिनों में मांग पूरी नहीं हुई, तो उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों को रोका जाएगा।

मनसे प्रमुख राज ठाकरे की पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि यह मुद्दा अब आंदोलन का रूप ले सकता है। पार्टी का कहना है कि सरकार और रेलवे को जल्द फैसला लेना होगा, वरना विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा।

Raj Thackeray s MNS ultimatum

ये चेतावनी नेता संदीप देशपांडे ने मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए दी। उन्‍होंने कहा मुंबई से कोंकण आने-जाने वाले यात्रियों के लिए रत्नागिरी-दादर पैसेंजर ट्रेन महत्वपूर्ण है। यह पहले दादर से रत्नागिरी तक चलती थी, लेकिन कोरोना काल के बाद इसे दिवा तक सीमित कर दिया गया जो बडा अन्‍याय है।

उन्‍होंने कहा इससे यात्रियों को भारी असुविधा होती है, क्योंकि अब उन्हें दिवा स्टेशन से ट्रेन पकड़नी पड़ती है। मनसे चाहती है कि ट्रेन को पुनः दादर तक चलाया जाए।

मनसे नेता नितिन सरदेसाई ने रेलवे विभाग पर लगातार इस मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि ट्रेन का दिवा तक सीमित रहना मनसे को अस्वीकार्य है। उन्होंने जोड़ा, कोंकण रेलवे के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन दी थी, पर अब उनकी जरूरतों की अनदेखी हो रही है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेनेचे नेते श्री. नितीन सरदेसाई यांच्या नेतृत्वाखाली मनसेच्या शिष्टमंडळाने रेल्वे प्रशासनातील वरिष्ठ अधिकाऱ्यांची भेट घेत दादर–रत्नागिरी रेल्वे पॅसेंजर सेवा रद्द करून तिच्या ऐवजी दादर–गोरखपूर रेल्वे सुरू करण्याच्या निर्णयाचा तीव्र निषेध नोंदवला.

या निर्णयाची… pic.twitter.com/XATMOrgsHH

— MNS Adhikrut – मनसे अधिकृत (@mnsadhikrut) March 24, 2026 “>

रेलवे तर्क देता है कि दादर तक ट्रेन चलाने से लोकल ट्रेनों की समय-सारिणी प्रभावित होगी, पर मनसे इसे महज बहाना मानती है। सरदेसाई ने स्पष्ट किया कि समाधान न होने पर ‘मनसे स्टाइल’ में जवाब दिया जाएगा। उन्होंने सरकार और जनप्रतिनिधियों से सवाल उठाए।

सरदेसाई ने पूछा कि कोंकण और मुंबई-गोवा हाईवे की समस्याओं पर वर्षों से चर्चा के बावजूद समाधान क्यों नहीं हुआ। वे जानना चाहते हैं कि ये मुद्दे संसद में क्यों नहीं उठते और कोंकण के लोग आखिर कब तक ऐसी परेशानियों से जूझते रहेंगे।





Source link

I-PAC रेड में दखल, सुप्रीम कोर्ट ने ममता से पूछा: केंद्र में आपकी सरकार होती तो क्या करते; ED अफसरों के भी अपने अधिकार हैं


नई दिल्ली6 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

तस्वीर 8 जनवरी की है, जब बंगाल CM ममता ने कोलकाता में ED की छापेमारी के बीच मीडिया को संबोधित किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में I-PAC के ऑफिस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने मंगलवार को ममता बनर्जी की बंगाल सरकार से पूछा कि अगर केंद्र में आपकी सरकार होती और कोई राज्य ऐसी कार्रवाई करता तो आपका रुख क्या होता।

जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने पूछा कि क्या ड्यूटी पर मौजूद ED अधिकारी अपने अधिकार खो देते हैं। कोर्ट ने बताया कि ED के कुछ अधिकारियों ने निजी तौर पर भी याचिका दायर की है।

राज्य की ओर से सीनीयर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि ED के पास अन्य कानूनी विकल्प हैं, इसलिए वह आर्टिकल 32 के तहत याचिका नहीं दे सकती। जांच करना अधिकारी का मौलिक अधिकार नहीं, सिर्फ कानूनी अधिकार है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि ED अधिकारियों के मौलिक अधिकार भी हैं। सिर्फ यह न कहें कि वे अधिकारी हैं, इसलिए नागरिक नहीं हैं। उनकी याचिकाओं को भी महत्व देना होगा।

short text 41 1774353265

कोर्ट रूम लाइव :

  • सिब्बल- ED आर्टिकल 32 के तहत याचिका दायर नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास दूसरे कानूनी उपाय मौजूद हैं। किसी अधिकारी के पास जांच करने का मौलिक अधिकार नहीं होता। यह सिर्फ कानून से मिला अधिकार है, इसलिए इसमें दखल देने को मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
  • सिब्बल- अगर ऐसा माना गया तो हर पुलिस अधिकारी सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने लगेगा, जिससे आपराधिक कानून की मूल संरचना प्रभावित होगी।
  • जस्टिस मिश्रा- ED अधिकारियों के मौलिक अधिकारों पर भी ध्यान दें। सिर्फ यह न कहें कि वे अधिकारी हैं, इसलिए नागरिक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग अधिकारियों की याचिकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब पूरे मामले को समझिए

8 जनवरी को ED की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं।

कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं।

ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं। उन्होंने कहा- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं। ED ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की गई।

ममता 8 जनवरी की दोपहर 12 बजे I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंची थीं।

ममता 8 जनवरी की दोपहर 12 बजे I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंची थीं।

I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस

I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी।

पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था।

ED के अफसरों ने प्रतीक के घर और ऑफिस से कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए।

ED के अफसरों ने प्रतीक के घर और ऑफिस से कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए।

रेड के दौरान फाइलें लेकर चली गईं थी CM ममता

सर्च ऑपरेशन के दौरान, CM ममता बनर्जी अन्य TMC नेताओं के साथ I-PAC ऑफिस पहुंचीं। इसके बाद काफी हंगामा हुआ। ममता ऑफिस से कई फाइलें लेकर बाहर निकलीं और मीडिया से बात की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी पर हद से ज्यादा दखलंदाजी का आरोप लगाया।

पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि I-PAC पार्टी के चुनाव रणनीतिकार के रूप में काम करता है और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ED ने गोपनीय चुनाव रणनीति से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए रेड डाली।

पश्चिम बंगाल में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। TMC ने ED की कार्रवाई में बाधा डालने के आरोप का खंडन किया। वहीं पश्चिम बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR भी दर्ज की।

ed 21767937306176794323917680459431768278313 1774353899

—————————————-

ये खबर भी पढ़ें…

जहां चुनाव, वहां ED ने फाइलें खोलीं, बंगाल से पहले 3 राज्यों महाराष्ट्र-दिल्ली-झारखंड में यही पैटर्न

58pti01082026000095b17682669611768279203 1774354858

पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बढ़ती सक्रियता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ED का काम आर्थिक अपराधों की जांच करना, काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाना है, लेकिन कई बार उसकी कार्रवाई की टाइमिंग सवालों के घेरे में आ जाती है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Badshah Divorce Story: बादशाह ने रचाई थी इस ईसाई लड़की से शादी, 8 साल बाद तलाक क्यों? कौन है बेटी और कहां है?


Entertainment

oi-Divyansh Rastogi

Badshah Jasmine Masih Divorce Reason: ‘टटीरी’ Tateeree गाने वाले रैपर-सिंगर बादशाह (असली नाम आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया) अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर हमेशा कम बात करते हैं, लेकिन अपनी दूसरी शादी (ईशा रिखी के साथ) को लेकर सुर्खिंयों में बने हुए हैं।

ऐसे में, उनकी पहली शादी और तलाक की कहानी फिर चर्चा में आ गई है। बादशाह ने 2012 में जैस्मिन मसीह से शादी की थी, जो करीब 8 साल चली और 2020 में दोनों का तलाक हो गया। दोनों को एक बेटी भी है। आखिर क्या थी वजह? कहां है बेटी? कौन है बेटी? आइए जानते हैं…

Badshah Jasmine Masih Divorce Reason

Badshah Jasmine Marriage: बादशाह और जैस्मिन की लव स्टोरी कैसे शुरू हुई?

बादशाह और जैस्मिन मसीह की मुलाकात फेसबुक पर हुई। एक कॉमन फ्रेंड के जरिए वे कनेक्ट हुए, फिर चंडीगढ़ में एक पार्टी में मिले। करीब 1 साल डेटिंग करने के बाद 2012 में दोनों ने शादी कर ली। शादी ईसाई रीति-रिवाज से हुई थी। दोनों की एक बेटी 10 जनवरी 2017 को हुई, जिसका नाम जेसेमी ग्रेस मसीह सिंह (Jessemy Grace Masih Singh) है।

Who Is Jasmin Masih : जैस्मिन मसीह कौन हैं?

badshah-jasmine-masih-divorce

बादशाह और जैस्मिन मसीह की शादी 2012 में हुआ।

जैस्मिन मसीह का जन्म 8 दिसंबर को पंजाब के जालंधर में हुआ। मसीह, लंदन में पली-बढ़ीं। वे नॉन-सेलिब्रिटी हैं और हमेशा लाइमलाइट से दूर रहीं। परिवार में मां ग्रेस मसीह हैं। धर्म की बात करें तो, जैस्मिन ईसाई (क्रिश्चियन) हैं। जैस्मिन अपनी बेटी जेसेमी के साथ लंदन में सेटल हैं।

Badshah Divorce Reason: तलाक क्यों हुआ? बादशाह ने खुद बताया

badshah-jasmine-masih-divorce

बादशाह की पहली पत्नी जस्मिन मसीह।

बादशाह ने प्रखर के प्रवचन पॉडकास्ट में खुलासा किया था। बताया था कि उनके माता-पिता ने शादी से पहले ही चेतावनी दी थी कि कल्चरल डिफरेंस की वजह से दिक्कतें आएंगी। जैस्मिन लंदन में बड़ी हुईं, इसलिए भारतीय परिवार और संस्कृति में एडजस्ट नहीं कर पाईं। बादशाह ने कहा, ‘वो हमारे कल्चर में एडजस्ट नहीं कर पाईं। सब कुछ बेहद खराब हो गया। हम दोनों ने बहुत कोशिश की, लेकिन कुछ नहीं हो सका।’ अंत में फैसला लिया कि रिश्ता बेटी के लिए हेल्दी नहीं रह गया है, इसलिए अलग होना बेहतर है। बादशाह ने साफ कहा कि जैस्मिन के प्रति उनके मन में कोई नफरत या बुरी भावना नहीं है। दोनों आज भी अच्छे दोस्तों की तरह हैं और को-पेरेंटिंग कर रहे हैं।

Badshah Daughter: कौन है बादशाह की बेटी? कहां रहती है?

बादशाह और जैस्मिन ईसाई की बेटी का नाम जेसेमी ग्रेस मसीह सिंह (Jessemy Grace Masih Singh) है। बेटी फिलहाल अपनी मां जैस्मिन के साथ लंदन (UK) में रहती है। बादशाह कहते हैं कि वे बेटी से मिलते हैं, लेकिन इतनी बार नहीं जितना चाहते हैं। जेसेमी ब्लैकपिंक की बड़ी फैन है और पापा के गानों की उतनी फैन नहीं है।

बादशाह ने क्या सीखा?

badshah-jasmine-masih-divorce

बादशाह ने इंटरव्यू में कहा कि शादी से पहले अच्छी तरह सोचना चाहिए और कल्चरल बैकग्राउंड को समझना बहुत जरूरी है। उन्होंने माता-पिता की भविष्यवाणी को भी सही बताया।

अब बादशाह अपनी लाइफ के नए चैप्टर में हैं। उनकी पहली शादी सांस्कृतिक अंतर और एडजस्टमेंट की कमी की वजह से टूटी, लेकिन उन्होंने इसे बेटी के भले में लिया। दोनों पक्ष आज भी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। ये कहानी दिखाती है कि प्यार के साथ-साथ समझ, एडजस्टमेंट और परिवार की संस्कृति भी रिश्ते को मजबूत रखने में बड़ी भूमिका निभाती है।



Source link

Harish Rana Death: गाजियाबाद के हरीश राणा का 13 साल बाद एम्स में निधन, बिना अन्न-जल के बीते आखिरी 6 दिन


India

oi-Kumari Sunidhi Raj

Harish Rana Death: गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा (Harish Rana) ने आखिरकार दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में अंतिम सांस ली। वो पिछले 13 वर्षों से कोमा जैसी स्थिति (विजिटेटिव स्टेट) में थे। 2013 में एक दर्दनाक हादसे का शिकार हुए हरीश के माता-पिता ने उनके असहनीय कष्ट को देखते हुए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (इच्छामृत्यु) की अनुमति प्रदान की थी, जिसके बाद से वे एम्स के उपशामक देखभाल वार्ड में डॉक्टरों की विशेष निगरानी में थे। यह मामला देश के उन दुर्लभ मामलों में से एक बन गया है जहां अदालत ने गरिमामय मृत्यु के अधिकार को स्वीकार किया। 11 मार्च 2026 को आए ऐतिहासिक फैसले के बाद, हरीश ने 24 मार्च को दुनिया को अलविदा कह दिया।

Harish Rana Death

एम्स में चल रही थी कड़ी निगरानी
हरीश राणा दिल्ली स्थित एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (IRCH) में भर्ती थे। उन्हें अस्पताल के उपशामक देखभाल (Palliative Care) वार्ड में रखा गया था, जहाँ विशेषज्ञों की एक टीम उनकी स्थिति पर पल-पल नजर रख रही थी। अस्पताल प्रशासन ने 23 मार्च को ही संकेत दिए थे कि उनकी शारीरिक स्थिति अत्यंत नाजुक है और उन्हें कुछ और समय के लिए सघन निगरानी में रखा जा सकता है।

बिना अन्न-जल के बीते अंतिम दिन
इच्छामृत्यु की कानूनी प्रक्रिया के पालन के दौरान हरीश पिछले छह दिनों से बिना भोजन और पानी के थे। यह उनके जीवन के सबसे कठिन और अंतिम क्षण थे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके बुजुर्ग माता-पिता एक पल के लिए भी उनसे दूर नहीं हुए। वे वार्ड के बाहर और पास रहकर किसी दैवीय चमत्कार की आस लगाए बैठे थे, लेकिन विधि को कुछ और ही मंजूर था।

माँ की भावुक पुकार: “वह हमें छोड़कर जा रहा है”
अस्पताल के गलियारों में हरीश की माँ की करुण पुकार ने हर किसी को झकझोर दिया। वे अपने बेटे के सिरहाने बैठकर और कॉरिडोर में हनुमान चालीसा का पाठ करती रहीं। रुंधे गले से उन्होंने कहा, “मेरा बेटा अभी सांस ले रहा है, उसकी धड़कन चल रही है, लेकिन वह अब हमें छोड़कर जा रहा है।” एक माँ के लिए अपने बेटे की मृत्यु की अनुमति मांगना और फिर उसे आंखों के सामने जाते देखना बेहद हृदयविदारक रहा।

रक्षाबंधन के दिन हुआ था वह भयानक हादसा
हरीश राणा के दुखों का सिलसिला जुलाई 2010 में शुरू हुआ था जब उन्होंने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया। साल 2013 में वे अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे। अगस्त 2013 में रक्षाबंधन के दिन, अपनी बहन से फोन पर बात करते समय वे पीजी (PG) की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे।

13 साल तक बिस्तर पर रहा ‘जिंदा शव’
उस हादसे ने हरीश की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। पीजीआई चंडीगढ़ और बाद में एलएनजेपी (LNJP) अस्पताल दिल्ली में चले लंबे इलाज के बाद डॉक्टरों ने पुष्टि की कि वे क्वाड्रिप्लेजिया (Quadriplegia) से पीड़ित हो चुके हैं। इस स्थिति में मरीज के हाथ-पैर और शरीर के बाकी अंग पूरी तरह काम करना बंद कर देते हैं। पिछले 13 सालों से वे एक बेड पर सिमटे हुए थे, जहाँ न वे बोल सकते थे और न ही हिल सकते थे।

दिल्ली हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक की कानूनी जंग
बेटे की तड़प और आर्थिक-मानसिक बोझ को देखते हुए परिवार ने इच्छामृत्यु की गुहार लगाई।

8 जुलाई 2025: दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।

11 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए ‘पैसिव यूथेनेशिया’ की अनुमति दी।

24 मार्च 2026: करीब 8 महीने की लंबी कानूनी प्रक्रिया और 13 साल के शारीरिक कष्ट के बाद हरीश की सांसें थम गईं।



Source link

7 लाख कर्ज लिया, फिर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया! युवक ने मौत से पहले खोला राज, गांव में मचा हड़कंप


Last Updated:

Sawai Madhopur Man Burning News : सवाई माधोपुर के धनौली में कर्ज विवाद के बीच लोकेश मीणा को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया गया, जयपुर ले जाते समय मौत, गांव में तनाव, पुलिस जांच में जुटी. सबसे अहम बात यह है कि मरने से पहले लोकेश मीणा ने कुछ लोगों के नाम लिए. उसने आरोप लगाया कि धनौली गांव के कुछ लोगों ने उससे 7 से 8 लाख रुपये उधार ले रखे थे. उसका कहना था कि इसी पैसे के विवाद को लेकर उसके साथ यह खौफनाक वारदात की गई.

Zoom

Sawai Madhopur में कर्ज विवाद, लोकेश मीणा को जिंदा जलाने का खुलासा

सवाई माधोपुर. जिले के धनौली गांव से आई खबर ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. एक युवक को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की वारदात सामने आई है. मामला इतना गंभीर है कि सुनने वाला हर व्यक्ति सन्न रह गया. यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि गांव के माहौल को भी हिला देने वाली घटना बन गई है.

बताया जा रहा है कि भारजा गांव निवासी लोकेश मीणा के साथ यह वारदात हुई. घटना के बाद वह बुरी तरह झुलस गया था. आसपास के लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की और तुरंत अस्पताल ले जाया गया. हालत बेहद गंभीर थी, इसलिए डॉक्टरों ने उसे जयपुर रेफर कर दिया. लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया.

मरने से पहले लगाए आरोप, कर्ज बना वजह
सबसे अहम बात यह है कि मरने से पहले लोकेश मीणा ने कुछ लोगों के नाम लिए. उसने आरोप लगाया कि धनौली गांव के कुछ लोगों ने उससे 7 से 8 लाख रुपये उधार ले रखे थे. उसका कहना था कि इसी पैसे के विवाद को लेकर उसके साथ यह खौफनाक वारदात की गई. आरोप है कि उन्हीं लोगों ने उस पर पेट्रोल डाला और आग के हवाले कर दिया. यह बयान अब पूरे मामले का सबसे बड़ा आधार बन गया है. पुलिस भी इसी एंगल से जांच को आगे बढ़ा रही है.

गांव में तनाव, पुलिस जांच में जुटी
घटना के बाद धनौली और आसपास के इलाकों में माहौल भारी हो गया है. लोग इस घटना को लेकर गुस्से में हैं और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई जा रही हैं. अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि घटना किस तरह हुई और उसमें कितने लोग शामिल थे. लेकिन मरने से पहले दिए गए बयान को पुलिस काफी गंभीरता से ले रही है.

About the Author

authorimg

Anand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें



Source link