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Rail Ticket Cancellation Rules: 8 घंटे पहले टिकट किया कैंसिल तो वापस नहीं मिलेगा पैसा? क्या है नया नियम?


Business

oi-Ankur Sharma

Rail Ticket Cancellation Rules: इंडियन रेलवे ने कन्फर्म टिकट कैंसल करने के अपने नियमों में बदलाव किया है, अब अब आप कब टिकट रद्द करते हैं, उसी के हिसाब से पैसा कटेगा और उसी हिसाब से रिफंड भी मिलेगा, भारतीय रेलवे ने 1 अप्रैल 2026 से टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के नियमों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। इन नए नियमों का उद्देश्य टिकटों की कालाबाजारी को कम करना है।

अगले 24 से 8 घंटे के अंदर टिकट कैंसिल करेंगे तो कटौती का पैसा बढ़कर 50% तक हो जाएगा लेकिन अगर 8 घंटे से कम समय बचा हो या ट्रेन छूट जाए तो रिफंड नहीं मिलेगा आइए विस्तार से समझते हैं क्या है टिकट का नया नियम?

Rail Ticket Cancellation Rules

Indian Railway: कन्फर्म टिकट के नियम बदले

रिफंड की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि आप ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से कितने समय पहले टिकट रद्द कर रहे हैं, न्यूनतम फ्लैट कैंसिलेशन चार्ज यदि आप 72 घंटे से पहले कैंसिल करते हैं, तो प्रति यात्री ये चार्ज कटेंगे तो वहीं अगर 8 घंटे से कम समय बचा हो या ट्रेन छूट जाए तो रिफंड नहीं मिलेगा।

  • AC फर्स्ट क्लास / एग्जीक्यूटिव क्लास: ₹240 + GST
  • AC 2 टायर / फर्स्ट क्लास: ₹200 + GST
  • AC 3 टायर / CC / 3E: ₹180 + GST
  • स्लीपर क्लास (SL): ₹120
  • सेकंड क्लास (2S): ₹60

Indian Railways Rules Hindi:वेटिंग और RAC टिकट के नियम

  • कैंसिलेशन चार्ज: वेटिंग और RAC टिकट रद्द करने पर प्रति यात्री ₹60 (प्लस GST, यदि लागू हो) काटा जाता है।
  • समय सीमा: ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक टिकट कैंसिल करना अनिवार्य है।
  • ऑटो-कैंसिलेशन: चार्ट बनने के बाद भी यदि ऑनलाइन वेटिंग टिकट कन्फर्म नहीं होता, तो वह अपने आप कैंसिल हो जाता है और रिफंड आपके बैंक खाते में आ जाता है।

Tatkal Rules: तत्काल टिकत के नियम

  • कन्फर्म तत्काल: अपनी मर्जी से कन्फर्म तत्काल टिकट कैंसिल करने पर कोई रिफंड (Zero Refund) नहीं मिलता है।
  • वेटिंग तत्काल: इसमें सामान्य वेटिंग टिकट के नियम (₹60 कटौती) लागू होते हैं।

Train Ticket Rules: बोर्डिंग पॉइंट के नियम भी बदले गए

बोर्डिंग पॉइंट के नियम भी बदले गए हैं। यात्री अब ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं। बड़े शहरों में मल्टी-स्टेशन होने पर यह सुविधा यात्रियों के लिए विशेष उपयोगी होगी, वे अपनी सुविधानुसार कोई भी स्टेशन चुन सकेंगे। पूर्व में यह सुविधा चार्ट बनने से पहले ही उपलब्ध थी।



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Bengaluru liquor ban: बेंगलुरू में 48 घंटे तक शराब पर लगा प्रतिबंध, इन इलाकों में रोकी गई बिक्री, क्‍या है वजह


India

oi-Bhavna Pandey

Bengaluru liquor ban:बेंगलुरु शहर में बड़े विरोध प्रदर्शनों की आशंका के चलते अधिकारियों ने चयनित इलाकों में 48 घंटे के लिए शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है। बेंगलुरु के शहर पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह द्वारा जारी यह आदेश 24 मार्च सुबह 6 बजे से 25 मार्च रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसका लक्ष्य प्रदर्शनों के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना है।

यह प्रतिबंध अधिसूचित पुलिस थाना क्षेत्रों के भीतर सभी लाइसेंसी प्रतिष्ठानों पर लागू होगा, जिनमें शराब की दुकानें, बार और रेस्तरां शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह एक अस्थायी निवारक उपाय है, जिसका लक्ष्य मध्य बेंगलुरु में भीड़ के इकट्ठा होने पर किसी भी गड़बड़ी के जोखिम को कम करना है।

Bengaluru liquor ban

यह निर्णय आरक्षण संबंधी मांगों को लेकर दो संगठनों द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शनों के जवाब में आया है। कर्नाटक आरक्षण संरक्षण महासंघ 24 मार्च को फ्रीडम पार्क में एक बड़ी सभा आयोजित करेगा। इसके बाद 25 मार्च को कर्नाटक राज्य दाहिने हाथ वाले जातियों का महासंघ भी आरक्षण कोटे के कार्यान्वयन पर जोर देते हुए प्रदर्शन करेगा।

पुलिस को दोनों दिनों, विशेषकर मध्य क्षेत्रों में भारी भीड़ की आशंका है। अधिकारियों का मानना है कि शराब पर प्रतिबंध से सभाओं के दौरान संभावित झड़पों, अव्यवस्थित व्यवहार या संपत्ति के नुकसान को रोकने में मदद मिलेगी।

शराबबंदी की यह अवधि 24 मार्च की सुबह से 25 मार्च की रात तक लगातार चलेगी। यह प्रतिबंध आठ पुलिस थाना क्षेत्रों तक सीमित है जिनमें उप्परपेट, सिटी मार्केट, कॉटनपेट, कलासिपलयम, चामराजपेट, शेषद्रिपुरम, हाई ग्राउंड्स और हलसुर गेट शामिल हैं। इन क्षेत्रों में दिन-रात शराब की सभी व्यावसायिक बिक्री पूरी अवधि के लिए बंद रहेगी।

विरोध प्रदर्शन के संवेदनशील स्थानों, विशेषकर फ्रीडम पार्क के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। पुलिसकर्मी भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और शांति बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करेंगे। अधिकारियों ने निवासियों और व्यवसाय मालिकों से सहयोग का आग्रह किया है, चेतावनी देते हुए कि शराब का सेवन शरारती तत्वों द्वारा स्थिति का दुरुपयोग करने की संभावना बढ़ा सकता है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम पूरी तरह से निवारक है और इसका उद्देश्य कानूनी विरोध को बाधित करना नहीं है। बेंगलुरु में पूर्व में भी बड़े सार्वजनिक आयोजनों जैसे हुस्कुर मदुरम्मा जात्रा और धर्मराय स्वामी जात्रा महोत्सव के दौरान इसी तरह के अल्पकालिक शराब प्रतिबंध लागू किए गए हैं, जो सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मानक प्रथा बन गए हैं।

इन प्रमुख क्षेत्रों में वर्तमान 48 घंटे के प्रतिबंध को लागू करके, अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हों, साथ ही शहर के शेष हिस्सों में होने वाले व्यवधानों को भी कम से कम किया जा सके।



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US Iran War: कौन रुकवाएगा अमेरिका-ईरान की जंग? भारत, पाकिस्तान या तुर्की? किसे मिलेगा क्रेडिट?


International

oi-Siddharth Purohit

US Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग को 25 दिन हो गए हैं, लेकिन इसमें ट्विस्ट 24वें दिन आया जब ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की ईरान से 2 दिनों से प्रोडक्टिव बातचीत हो रही है, जिसके बद 5 दिनों तक ईरान की एनर्जी फेसिलिटी पर हमले नहीं होंगे। लेकिन ईरान ने अमेरिका की इस बात को सिरे से नाकारते हुए कहा कि ऐसी कोई बात हमारी अमेरिका से नहीं हुई है। वहीं, इन सब के बीच पाकिस्तान की तरफ से खबर आई कि उनसे अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता को लेकर बात कराई है। जिसको लेकर कुछ लोग पाकिस्तान का मजाक बना रहे हैं तो कुछ उसे तरजीह भी दे रहे हैं। ऐसे में ये समझना जरूरी हो जाता है कि ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता के इस खेल कौन-सा देश कितना बड़ा किरदार निभा रहा है।

समझौता नहीं सहयोगियों के दबाव में बदला रुख

एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपना रुख इसलिए बदला क्योंकि अमेरिका के सहयोगी देशों और खाड़ी देशों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर को ज्यादा नुकसान पहुंचा, तो भविष्य में यह क्षेत्र पूरी तरह अस्थिर हो सकता है। इससे युद्ध के बाद भी हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद ही ट्रंप ने समझौते जैसी बात करना शुरू किया था।

US Iran War S Jaishankar Donald Trump

मध्यस्थता मे पाकिस्तान समेत कितने देश?

मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और ओमान जैसे देश अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित कराने की कोशिश कर रहे हैं। इन देशों का मकसद है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम हो और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही फिर शुरू हो सके।

तुर्की ने जताई मध्यस्थता की इच्छा

तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने कई बार कहा है कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी चिंता जताई कि इस जंग में शामिल इजरायल इसे लंबा खींचना चाहता है।

कूटनीतिक बातचीत तेज

तुर्की के Hakan Fidan ने सोमवार को नॉर्वे के Espen Barth Eide और मिस्र के Badr Abdelatty से फोन पर बात की। इन बातचीतों में युद्ध को रोकने की कोशिशों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की और ओमान के बीच ईरान को लेकर कई संदेशों का आदान-प्रदान हुआ, जबकि सऊदी अरब और भारत के जरिए भी बातचीत के संकेत भेजे गए।

व्हाइट हाउस और ईरान के बीच इन डायरेक्ट डायलोग्स

रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने व्हाइट हाउस के दूत Steve Witkoff और ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi के साथ अलग-अलग बातचीत की। इसका मकसद दोनों देशों के बीच किसी तरह का समझौता कराना

क्रेडिट बटोरने की फिराक में शहबाज-मुनीर

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे मामले में पाकिस्तान अहम भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir ने रविवार को ट्रंप से फोन पर बात की, जबकि प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बातचीत की। लेकिन, एक्सपर्ट्स पाक की कोशिशों को कोशिश कम और क्रेडिट लेने की होड़ ज्यादा बता रही है।

कूटनीति के बीच समय का खास महत्व

इन सभी बातचीतों का समय बेहद अहम है, क्योंकि ये ठीक उसी समय हुईं जब ट्रंप ने अपनी धमकी को वापस लेते हुए हमलों को रोकने का ऐलान किया। इससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीतिक दबाव ने बड़ा रोल निभाया।

पाकिस्तान की और कोशिशें जारी

पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने भी ईरान के Abbas Araghchi से बात की और शांति व स्थिरता के लिए बातचीत पर जोर दिया। पाकिस्तान ने यह भी संकेत दिया है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत की इच्छा जताई है। हालांकि, अमेरिका ने मुनीर की इस इच्छा पर पानी फेरते हुए साफ इनकार दिया।

पाकिस्तान का बयान: “हम तैयार हैं”

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Tahir Andrabi ने कहा कि अगर दोनों देश चाहें, तो इस्लामाबाद बातचीत की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा शांति और कूटनीति का समर्थन करता है। वो बात अलग है कि पाकिस्तान का अपना इतिहास आतंकवादियों को पालने और विश्व शांति भंग करने का रहा है।

व्हाइट हाउस का सावधान जवाब

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कहा कि यह स्थिति लगातार बदल रही है और जब तक आधिकारिक घोषणा न हो, तब तक किसी भी बातचीत को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।

पाकिस्तान क्यों घुसना चाहता?

विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान इस मामले में इसलिए अहम है क्योंकि ईरान के बाद यहां शिया मुस्लिमों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। साथ ही, इसके खाड़ी देशों के साथ मजबूत रिश्ते हैं, जिसमें सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता भी शामिल है।

ट्रंप और मुनीर के संबंध

पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir और Donald Trump के बीच हाल की दिनों में संबंध बेहतर हुए हैं। ट्रंप ने पहले मुनीर को “मेरे पसंदीदा फील्ड मार्शल” और “एक असाधारण इंसान” तक कहा है। जिसके बाद मुनीर इस तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। लेकिन मुनीर का जंग रुकवाने के पीछे का मकसद पाकिस्तान के बदतर होते हाल को सुधारना पहले है। क्योंकि अगर ये जंग जारी रही तो पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बेकाबू हो सकते हैं जो पाकिस्तानी रुपए के टूटने का बड़ा कारण बनेगा।

भारत क्या कर रहा?

भारत ने पाकिस्तान से एक कदम आगे जाकर अमेरिका वो सहयोगी जो इस युद्ध में हमले झेल रहे हैं (सऊदी अरब, बहरीन, यूएई, कतर, ओमान, कुवैत, जोर्डर) से बात की। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के यूरोपीय सहयोगी जैसे फ्रांस आदि को भी भरोसे में लेकर ट्रंप से युद्ध रोकने के लिए जोर डालते हुए बात की। इसका अलावा जहां पाकिस्तान नहीं पहुंच सका, यानी कि इजरायल, वहां भी भारत ने सीधी बात कर जंग रोकने पर लंबी बात कर माहौल को हल्का किया।

इसके अलावा भारत ने सीधी ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकिया और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी बात कर खाड़ी देशों के एनर्जी फेसिलिटी को निशाना न बनाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने पर चर्चा की। जबकि पाकिस्तान की बातचीत सिर्फ खाड़ी देशों और अमेरिका तक सीमित थीं। न इसमें ईरान था, न यूरोपीय देश और न इजरायल जो इस युद्ध में एक अहम किरदार है। अब देखना होगा जंग रुकने का तमगा किसे मिलता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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महाराष्‍ट्र में 12 साल में 298 बाघों की हुई मौतें, आखिर कौन है गुनहगार?


Maharashtra

oi-Bhavna Pandey

Tiger deaths in Maharashtra: महाराष्ट्र में बाघों की लगातार हो रही मौतों को लेकर गंभीर आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने वन्यजीव प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 12 सालों में राज्य में कुल 298 बाघों की मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 110 मौतें सीधे तौर पर मानवीय हस्तक्षेप से जुड़ी पाई गई हैं, जो एक बड़ा चिंताजनक पहलू है।

इस गंभीर विषय पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। अदालत ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए राज्य और केंद्र सरकार दोनों से जवाब मांगा है। यह दर्शाता है कि बाघों के संरक्षण में मौजूदा प्रयासों पर सवाल उठ रहे हैं।

Tiger deaths in Maharashtra

सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इन मौतों के पीछे मानवीय दखलंदाजी एक प्रमुख कारण है। इसमें अवैध शिकार, बिजली के झटके और अन्य मानवीय लापरवाही शामिल हैं। विशेष रूप से, 33 बाघों ने सिर्फ बिजली के झटके के कारण अपनी जान गंवाई है। यह आंकड़ा जंगलों में बिजली लाइनों की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियों को उजागर करता है।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही बिजली लाइनों को सुरक्षित करने के निर्देश दे चुका है, लेकिन इन पर ठीक से अमल नहीं हो पाया है। राज्य की बिजली वितरण कंपनी महावितरण (MSEDCL) ने इस संबंध में करीब 82.44 करोड़ रुपये के प्रस्ताव दिए थे, पर फंड की कमी के चलते ये काम अभी तक शुरू नहीं हो सके हैं। इस वजह से बाघों पर खतरा लगातार बना हुआ है।

बाघों की मौत के मामलों की जांच में भी लगातार देरी हो रही है। जानकारी के अनुसार, साल 2025 तक लगभग 92.9 प्रतिशत मामले अभी भी लंबित हैं, और 143 मामले पूरी तरह से अनसुलझे हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के आंकड़ों पर भी सवाल उठे हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि 2021 से 2025 के बीच हुई 16 बाघों की मौतें आधिकारिक डेटा में दर्ज नहीं हैं।

इन सबके बीच, सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि 2025-26 के राज्य बजट में बाघ संरक्षण के लिए कोई विशेष फंड आवंटित नहीं किया गया। जब बाघों की मौत के आंकड़े चिंताजनक स्तर पर पहुंच रहे हैं, तो बजट में इस अहम मुद्दे को नजरअंदाज करना संरक्षण के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाता है।



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‘बाबर-शाहीन भी PSL छोड़ भारत भागेंगे,’ शोएब अख्तर की बड़ी भविष्यवाणी, आखिर क्या है मामला


Cricket

oi-Naveen Sharma

Shoaib Akhtar: क्रिकेट की दुनिया में रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर शोएब अख्तर अक्सर अपने बेबाक बयानों से तूफान खड़ा कर देते हैं। इस बार उन्होंने कुछ ऐसा कहा है जिससे सरहद के दोनों पार खलबली मच गई है। अख्तर का दावा है कि अगर बीसीसीआई (BCCI) पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए आईपीएल (IPL) के दरवाजे खोल दे, तो बाबर आजम और शाहीन अफरीदी जैसे दिग्गज खिलाड़ी अपनी घरेलू लीग यानी पीएसएल (PSL) को छोड़ने में एक पल की भी देरी नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि अगर बीसीसीआई पाकिस्तानी प्लेयर्स को आईपीएल में खेलने की अनुमति देता है, तो यकीन के साथ कह रहा हूं कि बाबर आजम, शाहीन अफरीदी जैसे कई खिलाड़ी पीएसएल को छोड़कर आईपीएल में खेलने के लिए चले जाएंगे।

Shoaib Akhtar

पाकिस्तान सुपर लीग छोड़कर कई खिलाड़ी आईपीएल में आ गए हैं। अख्तर ने उन सभी के ऊपर एक्शन लेने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि हैरी ब्रूक ने आईपीएल छोड़ दिया था, तो उनके ऊपर दो साल का बैन लगा दिया गया था। उसी तरह पीएसएल छोड़कर जाने वालों पर भी एक्शन होना चाहिए।

IPL के सामने PSL बच्चा

हैरानी की बात यह है कि शोएब अख्तर ने पीएसएल को आईपीएल के सामने एक ‘बच्चा’ तक बता दिया। हालांकि बीसीसीआई या भारत सरकार की ओर से फिलहाल पाकिस्तानी खिलाड़ियों की एंट्री को लेकर कोई भी आधिकारिक हलचल नहीं है, लेकिन अख्तर के इस तीखे बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छिड़ दी है।

अब देखना यह है कि क्या भविष्य में कभी बाबर आजम और शाहीन अफरीदी नीली या लाल जर्सी में आईपीएल के मैदान पर नजर आते हैं या यह सिर्फ एक ‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ का खयाली पुलाव बनकर रह जाएगा।

अख्तर खुद खेले हैं आईपीएल

गौरतलब है कि आईपीएल में पाकिस्तानी प्लेयर्स को सिर्फ एक ही बार खेलने का मौका मिला है। शुरुआती सीजन के दौरान साल 2008 में खुद शोएब अख्तर आईपीएल में खेले थे। उस दौरान उनको केकेआर में शामिल किया गया था, सौरव गांगुली कप्तान थे।



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Delhi Free LPG Cylinder: दिल्ली में फ्री गैस सिलेंडर, कब-कब मिलेगा? ₹260 करोड़ बजट का बड़ा ऐलान, जानिए डिटेल


Delhi

oi-Pallavi Kumari

Delhi Budget 2026 Free LPG Cylinder: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2026-27 का बजट पेश किया और इसके साथ ही आम जनता के लिए कई बड़े ऐलान किए। सबसे ज्यादा चर्चा जिस फैसले की हो रही है, वह है होली और दिवाली पर हर परिवार को दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने की योजना। इस योजना के लिए सरकार ने ₹260 करोड़ का प्रावधान किया है, जो सीधे तौर पर आम लोगों की जेब पर असर डालने वाला कदम माना जा रहा है।

इस बार दिल्ली का कुल बजट ₹1,03,700 करोड़ का है। सरकार का अनुमान है कि ₹74,000 करोड़ टैक्स से और बाकी राशि अन्य स्रोतों जैसे नॉन-टैक्स, केंद्र की मदद और कर्ज से आएगी। सीएम रेखा गुप्ता ने यह भी बताया कि दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय देश में तीसरे स्थान पर है, जो राजधानी की मजबूत आर्थिक स्थिति को दिखाता है।

Delhi Budget 2026 Free LPG Cylinder

इस बजट को सरकार ने ‘ग्रीन बजट’ बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली एक ट्रांजिशन फेज से गुजर रही है और अब विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि पहले ‘फ्रीबी कल्चर’ की वजह से विकास दर पर असर पड़ा था, खासकर 2018 से 2020 के बीच, जब राजस्व में गिरावट आई थी।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर जोर (Infrastructure Push)

🔹शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) को ₹5,921 करोड़ दिए गए हैं। वहीं शहरी विकास और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए ₹7,887 करोड़ का बजट तय किया गया है। सरकार का लक्ष्य साफ है कि दिल्ली में सुरक्षित सड़कें, बेहतर कनेक्टिविटी और क्लाइमेट फ्रेंडली कॉरिडोर तैयार किए जाएं।

🔹750 किलोमीटर सड़कों को धूल मुक्त बनाने और रीकार्पेटिंग के लिए ₹1,352 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मोदी मिल फ्लाईओवर को कालकाजी और सवित्री सिनेमा तक बढ़ाने के लिए ₹151 करोड़ का बजट रखा गया है।

बिजली और पानी पर बड़ा खर्च (Power & Water Focus)

🔹बिजली विभाग के लिए ₹3,942 करोड़ का बजट रखा गया है। सरकार ओवरहेड वायरिंग को हटाने की दिशा में काम कर रही है, जिसके लिए अलग से ₹200 करोड़ दिए गए हैं।

🔹पानी और सीवेज की समस्या को हल करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड को ₹9,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए ₹475 करोड़ का प्रावधान किया गया है ताकि लोगों को पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर न रहना पड़े।

अलग-अलग सेक्टर को मिला क्या?

🔹 नगर निगम (MCD) को ₹11,666 करोड़ दिए गए हैं, जो शहरी सेवाओं को मजबूत करने में मदद करेंगे। ट्रांस-यमुना इलाके के विकास के लिए ₹300 करोड़ और दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड को ₹787 करोड़ का बजट मिला है।

🔹औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए ₹160 करोड़ का प्रावधान पहली बार किया गया है, खासकर नॉन-कन्फॉर्मिंग एरिया के लिए। नजफगढ़ ड्रेन के सुधार के लिए ₹454 करोड़ और विधायकों के क्षेत्रीय विकास फंड के लिए ₹350 करोड़ तय किए गए हैं।

🔹पालम में हुई आग की घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की तंग गलियों में आग बुझाना चुनौतीपूर्ण है। इसे देखते हुए दमकल विभाग को ₹674 करोड़ दिए गए हैं, जिससे नए फायर स्टेशन और आधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे।

जनता से सुझाव लेकर बना बजट

इस बजट की खास बात यह भी रही कि इसे तैयार करने से पहले सरकार ने समाज के अलग-अलग वर्गों से सुझाव लिए। ट्रांसजेंडर समुदाय, गिग वर्कर्स और मजदूरों के साथ बैठक कर उनकी जरूरतों को समझा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की भागीदारी ही इस बजट की सबसे बड़ी ताकत है।

दिल्ली का यह बजट एक तरफ जहां मुफ्त गैस सिलेंडर जैसी राहत योजनाएं लेकर आया है, वहीं दूसरी तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं पर भी बड़ा फोकस दिखाता है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में दिल्ली को एक आधुनिक, साफ और सुविधाजनक शहर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।



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Mumbai Gold Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में जारी है गिरावट, कहां पहुंचा रेट?


Business

oi-Ankur Sharma

Mumbai Gold Silver Rate Today 24 march Tuesday: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच सोने की कीमतों में लगातार बदलाव जारी है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव आज 3.61% लुढ़का है, जिसके बाद इसका रेट 139,280 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है तो वहीं गुडरिटर्न्स के मुताबिक 24 कैरेट का सोना का भाव 1,35,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। चलिए आज जानते हैं कि मुंबई में 24, 22, 18 और कैरेट सोने का भाव क्या है?

Mumbai Gold Silver Rate Today

Gold Rate Today in Hindi: आज का सोने का भाव इस प्रकार है (IBJA के मुताबिक भाव)

  • सोना 24 कैरेट: 139569 रुपये प्रति 10 ग्राम
  • सोना 22 कैरेट: 127845 रुपये प्रति 10 ग्राम
  • सोना 18 कैरेट: 104677 रुपये प्रति 10 ग्राम

Mumbai Gold Silver Rate Today: मुंबई में क्या है सोने का रेट?

  • मुंबई में सोना 24 कैरेट: ₹135650 प्रति 10 ग्राम
  • मुंबई में सोना 22 कैरेट: ₹124350 रुपये प्रति 10 ग्राम
  • मुंबई में सोना 18 कैरेट:₹101740 प्रति 10 ग्राम

(लोकल ज्वैलर्स के दामों में थोड़ा अंतर संभव है)

Silver Rate Today 24 March 2026: चांदी का भाव

चांदी की कीमतों में भी उठा पटक जारी है। मंगलवार सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 0.59% लुढ़कर 2,25,423 रुपये किलो पर पहुंच गया है तो वहीं गुडरिटर्न्स की रिपोर्ट के मुताबिक चांदी की कीमत 15000 रुपये लुढ़कर 2,30,000 रुपये किलो हो गई है।

मुंबई में आज चांदी का रेट ( Mumbai Silver Rate)

  • प्रति 10 ग्राम कीमत: ₹2,300
  • प्रति 100 ग्राम कीमत: ₹23,000
  • प्रति किलोग्राम कीमत: ₹2,30,000

(शहर, ज्वेलर और GST/मेकिंग चार्ज के कारण रेट थोड़ा अलग हो सकता है)

बाजार के जानकारों (जैसे एचडीएफसी सिक्योरिटीज और मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषक) के अनुसार, इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण निम्मलिखित है..

  • मुनाफावसूली (Profit Booking): ऊंचे स्तरों पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने अपना मुनाफा निकाला है, जिससे कीमतों में गिरावट आई।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व और डॉलर: डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी पर दबाव है।
  • पश्चिम एशिया में तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती महंगाई और तेल की कीमतों के कारण बाजार में अस्थिरता है।

डिस्क्लेमर: बताए गए विचार और सुझाव सिर्फ़ अलग-अलग एनालिस्ट या एंटिटी के हैं, वनइंडिया हिंदी किसी भी तरह के कोई निवेश सलाह नहीं देता है देता हैं और ना ही सिक्योरिटीज़ की खरीद या बिक्री के लिए कहता है। सारी जानकारी सिर्फ़ जानकारी देने और एजुकेशनल मकसद के लिए दी गई है और कोई भी निवेश का फ़ैसला लेने से पहले लाइसेंस वाले फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र से इसे अलग से वेरिफ़ाई कर लेना चाहिए।



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एचडीएफसी बैंक में बड़ा घटनाक्रम: चेयरमैन के इस्तीफे के बाद बाहरी जांच शुरू, गवर्नेंस पर उठे सवाल, जानिए सबकुछ


देश के दूसरे सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी में शीर्ष स्तर पर हुए घटनाक्रम ने कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बैंक ने पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे में उठाए गए मुद्दों की जांच के लिए बाहरी लॉ फर्म्स की नियुक्ति की है।

बैंक के प्रवक्ता के अनुसार, यह कदम पूरी तरह से प्रोएक्टिव है, जिसका उद्देश्य इस्तीफे में बताए गए पहलुओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित समीक्षा करना है। प्रवक्ता ने कहा कि बैंक दशकों से अपनाए गए उच्चतम गवर्नेंस मानकों के अनुरूप खुद को लगातार परखता रहा है और यह पहल उसी दिशा में उठाया गया कदम है।

अचानक इस्तीफे से उठे सवाल

गौरतलब है कि अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च से प्रभावी अपना पद अचानक छोड़ दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में बैंक के भीतर कुछ घटनाओं और प्रथाओं का हवाला दिया, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं।

17 मार्च को लिखे अपने पत्र में उन्होंने साफ कहा कि पिछले दो वर्षों में देखी गई कुछ गतिविधियां उनके सिद्धांतों से मेल नहीं खातीं, और यही उनके इस्तीफे का मुख्य कारण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसके अलावा इस्तीफे के पीछे कोई अन्य महत्वपूर्ण वजह नहीं है।

गवर्नेंस कमेटी को लिखा था पत्र

चक्रवर्ती ने अपना इस्तीफा बैंक की गवर्नेंस, नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमेटी के चेयरमैन एच. के. भनवाला को संबोधित किया था। उनके इस कदम को बैंक के इतिहास में अभूतपूर्व माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार कोई पार्ट-टाइम चेयरमैन कार्यकाल के बीच में पद छोड़कर गया है।

चक्रवर्ती का रहा लंबा प्रशासनिक अनुभव

1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएस अधिकारी रहे चक्रवर्ती मई 2021 में बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन बने थे। इससे पहले वह वित्त मंत्रालय के तहत आर्थिक मामलों के सचिव और निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव रह चुके थे। उनका कार्यकाल 2024 में बढ़ाकर मई 2027 तक किया गया था।

एचडीएफसी-एचडीएफसी बैंक विलय के दौरान नेतृत्व

उनके कार्यकाल में ही एचडीएफसी लिमिटेड और एजडीएफसी बैंक के बीच ऐतिहासिक विलय पूरा हुआ, जो 1 जुलाई 2023 से प्रभावी हुआ। इस विलय के बाद बैंक का संयुक्त बैलेंस शीट आकार 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जिससे यह देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों में शामिल हो गया।






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केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है


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नई दिल्ली14 मिनट पहले

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द कॉन्स्टिट्यूशन शेड्यूल कास्ट ऑर्डर 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू धर्म तक सीमित था, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म जोड़ा गया- फोटो AI जनरेटेड

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा।

जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ईसाई धर्म अपनाने वाला दलित व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मिलने वाले किसी भी लाभ का दावा नहीं कर सकता है।

यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मई 2025 के फैसले के खिलाफ सुनाया गया। धर्म परिवर्तन के बाद पादरी बने चिंथदा आनंद ने याचिका लगाई थी कि उन्हें अक्काला रामिरेड्डी समेत कुछ लोगों से जातिगत भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।

चिंथदा ने SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर इस पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद चिंथदा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

यह था पूरा मामला

यह मामला विशाखापट्टनम जिले के अनाकापल्ली का है, जहां मूल रूप से एससी (माला समुदाय) के चिंथदा ने ईसाई धर्म अपना लिया और पादरी बन गया। केस की जांच के दौरान पता चला था कि ईसाई धर्म अपनाने के कारण चिंथदा का अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया था। चिंथदा एक चर्च में करीब 10 साल से पादरी के तौर पर काम कर रहा है। पढ़ें पूरी खबर…

सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका- आरक्षण का लाभ लेने धर्म बदलना, संविधान से धोखा

कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले में स्पष्ट किया था कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाने के बाद दोबारा हिंदू धर्म में लौटता है, तो उसे एससी दर्जा प्राप्त करने के लिए विश्वसनीय प्रमाण और समुदाय की स्वीकृति की जरूरत होगी। केवल लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन करने को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के साथ धोखा करार दिया।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने क्या कहा था…

  • जब पीड़ित ने खुद कहा कि वह पिछले 10 साल से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है, तो पुलिस को आरोपियों पर एससी/एसटी अधिनियम नहीं लगाना चाहिए था।
  • एससी/एसटी अधिनियम का उद्देश्य उन समूहों (अनुसूचित जातियों) से जुड़े लोगों की रक्षा करना है, न कि उन लोगों की जो दूसरे धर्मों में परिवर्तित हो गए हैं।
  • केवल इस आधार पर एससी/एसटी अधिनियम लागू करना कि उसका जाति प्रमाण पत्र रद्द नहीं किया गया है, वैध आधार नहीं हो सकता।
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संविधान में क्या प्रावधान है

संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश, 1950 के अनुसार केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुसूचित जाति समुदायों को एससी का दर्जा प्राप्त है। अगर कोई ईसाई या मुस्लिम धर्म अपना लेता है तो उनका यह दर्जा समाप्त हो जाता है। ​

आंध्र प्रदेश विधानसभा ने भी मार्च 2023 में एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया कि ईसाई धर्म अपना चुके दलितों को भी एससी दर्जा प्रदान किया जाए।

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केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है


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नई दिल्ली5 मिनट पहले

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फोटो मेटा AI जनरेटेड है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा।

जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ईसाई धर्म अपनाने वाला दलित व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मिलने वाले किसभी लाभ का दावा नहीं कर सकता है।

यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मई 2025 के फैसले के खिलाफ सुनाया गया। धर्म परिवर्तन के बाद पादरी बने चिंथदा आनंद ने याचिका लगाई थी कि उन्हें अक्काला रामिरेड्डी समेत कुछ लोगों से जातिगत भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।

चिंथदा ने SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर इस पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद चिंथदा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

यह था पूरा मामला

यह मामला विशाखापट्टनम जिले के अनाकापल्ली का है, जहां मूल रूप से एससी (माला समुदाय) के चिंतादा ने ईसाई धर्म अपना लिया और पादरी बन गया। केस की जांच के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि ईसाई धर्म अपनाने के कारण चिंतादा का एससी प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति एससी का दर्जा खो देता है और एससी/एसटी एक्ट के तहत संरक्षण का दावा नहीं कर सकता। ​

संविधान में क्या प्रावधान है

संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश, 1950 के अनुसार केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुसूचित जाति समुदायों को एससी का दर्जा प्राप्त है। अगर कोई ईसाई या मुस्लिम धर्म अपना लेता है तो उनका यह दर्जा समाप्त हो जाता है। ​

आंध्र प्रदेश विधानसभा ने भी मार्च 2023 में एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया कि ईसाई धर्म अपना चुके दलितों को भी एससी दर्जा प्रदान किया जाए।



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