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उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े राज्य अधिकारी की आत्महत्या के बाद पंजाब के पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर की गिरफ्तारी।


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-Oneindia Staff

पंजाब के पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को सोमवार को पंजाब राज्य वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या के बाद गिरफ्तार किया गया। रंधावा ने सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में भुल्लर पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। भुल्लर को फतेहगढ़ साहिब जिले के मंडी गोबिंदगढ़ में हिरासत में लिया गया था, और वह मंगलवार को अमृतसर की अदालत में पेश होंगे।

 आत्महत्या की घटना के बाद लालजीत सिंह भुल्लर गिरफ्तार

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भुल्लर, एक आप विधायक, ने दावा किया कि उन्होंने मंडी गोबिंदगढ़ में स्वेच्छा से आत्मसमर्पण कर दिया। रंधावा ने कथित तौर पर शनिवार तड़के जहर खा लिया था, और उनके परिवार ने उनकी मौत की परिस्थितियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग की है। उन्होंने चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर में पोस्टमार्टम के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का भी रुख किया है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को भुल्लर का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और कहा कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे उसकी स्थिति कुछ भी हो। “मेरे लिए, पूरा पंजाब एक परिवार है,” मान ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा। “किसी को भी बचाना हमारी पार्टी का एजेंडा नहीं है।”

गिरफ्तारी से पहले, भुल्लर ने फेसबुक पर पोस्ट किया, न्याय प्रणाली में अपना विश्वास व्यक्त किया और भागने की अफवाहों का खंडन किया। उन्होंने कहा, “मैं कभी भी सच्चाई से भागूंगा नहीं।” आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भुल्लर के खिलाफ पंजाब सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई पर प्रकाश डाला।

केजरीवाल ने हरियाणा में एक एडीजीपी से जुड़े एक पिछले घटनाक्रम की तुलना की, जहां उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने आरोपियों का बचाव किया। केजरीवाल ने कहा, “यह आप और भाजपा के बीच का अंतर है।” इस घटना ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है, जिसमें विपक्षी दलों ने मान सरकार की आलोचना की है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यदि सभी पंजाब सांसदों ने लिखित अनुरोध प्रस्तुत किया तो सीबीआई जांच शुरू करने की पेशकश की। कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने लोकसभा में यह मुद्दा उठाया। पंजाब भाजपा प्रमुख सुनील जाखड़ ने सुझाव दिया कि भुल्लर की गिरफ्तारी शाह के संभावित सीबीआई जांच के संकेत से प्रभावित थी।

कई कांग्रेस सांसदों और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी सीबीआई जांच की मांग की है। पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से रंधावा की आत्महत्या की अदालत-निगरानी जांच के लिए स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया।

एसएडी नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भुल्लर की गिरफ्तारी में देरी के लिए आप सरकार की आलोचना की, उन्हें बचाने के प्रयासों का आरोप लगाया। भाजपा ने रंधावा की आत्महत्या को लेकर आप सरकार के खिलाफ जिला-वार विरोध प्रदर्शन आयोजित किए।

रंधावा के परिवार ने भुल्लर की गिरफ्तारी के लिए पंजाब सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर ने कहा, “अगर 24 घंटे में कुछ नहीं किया गया, तो मैं अपने बच्चों, दो बेटियों और एक बेटे के साथ सड़कों पर उतरूंगी।”

सोशल मीडिया पर एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें रंधावा को कथित तौर पर जहर खाते हुए दिखाया गया है। अपनी पुलिस शिकायत में, उपिंदर कौर ने आरोप लगाया कि उनके पति पर भुल्लर के पिता को एक गोदाम की निविदा आवंटित करने का दबाव डाला गया और अगर उन्होंने अनुपालन नहीं किया तो भुल्लर द्वारा धमकी दी गई।

With inputs from PTI

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जयशंकर और रुबियो ने पश्चिम एशिया संघर्ष के वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की।


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-Oneindia Staff

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के साथ फोन पर बातचीत की, जिसमें पश्चिमी एशिया संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह चर्चा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को पांच दिनों में फिर से खोलने की समय सीमा बढ़ाने के ठीक बाद हुई।

 जयशंकर और रुबियो ने ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा की

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एक सोशल मीडिया अपडेट में, जयशंकर ने उल्लेख किया कि रुबियो के साथ उनकी बातचीत पश्चिमी एशिया संघर्ष और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसके निहितार्थों पर केंद्रित थी। दोनों अधिकारियों ने संचार बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर जोर दिया गया। विदेश विभाग के एक वक्तव्य में पुष्टि की गई कि रुबियो और जयशंकर ने आपसी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर सहयोग के महत्व को स्वीकार किया।

प्रमुख डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि सचिव रुबियो और मंत्री जयशंकर के बीच हुई चर्चा में मध्य पूर्व की वर्तमान स्थिति भी शामिल थी। दोनों पक्षों ने साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने के महत्व पर सहमति व्यक्त की।

एक संबंधित घटनाक्रम में, जयशंकर ने पश्चिमी एशिया संघर्ष पर चर्चा करने के लिए खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों के राजदूतों से मुलाकात की। उन्होंने क्षेत्र में भारतीय समुदाय को उनके चल रहे समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत के दूत शामिल थे।

इस बैठक के दौरान ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं को उजागर किया गया, जो चल रहे संघर्ष के वैश्विक तेल और गैस की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए महत्वपूर्ण है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का लगभग 20% हिस्सा संभालता है, ईरान द्वारा लगभग अवरुद्ध कर दिया गया है। पश्चिमी एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।

अंतर्राष्ट्रीय समकक्षों के साथ बातचीत

जयशंकर ने पश्चिमी एशिया संघर्ष के परिणामों पर श्रीलंकाई समकक्ष विजा हेराथ से भी बातचीत की। उन्होंने अपनी “पड़ोसी प्रथम” नीति और “विजन महासागर” के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके अतिरिक्त, जयशंकर ने रविवार रात को जर्मन समकक्ष जोहान वेडेफहल से भी इसी मुद्दे पर बात की।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि उन्होंने ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की समय सीमा बढ़ा दी है, जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शिपिंग लेन है। उन्होंने पांच दिनों के लिए ईरानी ऊर्जा स्थलों पर हड़ताल स्थगित करने का भी उल्लेख किया। ट्रम्प ने पश्चिमी एशिया संघर्ष को पूरी तरह से हल करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच उत्पादक बातचीत का उल्लेख किया।

With inputs from PTI

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LNG: कतर के एलएनजी टर्मिनल पर हमले के बाद बढ़ सकती हैं मुश्किलें, जानें वैश्विक गैस सप्लाई खतरे में कैसे


पिछले हफ्ते 19 मार्च को कतर के रास लाफान स्थित दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टर्मिनल पर ईरानी मिसाइलों और ड्रोन से हमला हुआ। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है। यह टर्मिनल दुनिया की कुल एलएनजी सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है।

हमले के बाद परिसर में स्थित गैस-टू-लिक्विड्स (GTL) प्लांट में भीषण आग लग गई। करीब 295 वर्ग किलोमीटर में फैले इस विशाल कॉम्प्लेक्स को भारी नुकसान पहुंचा है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, करोड़ों-करोड़ डॉलर के निवेश को नुकसान हुआ है।

मरम्मत में लग सकता है पांच साल तक का समय

कतर एनर्जी के सीईओ साद शेरिदा अल-काबी ने संकेत दिए हैं कि कंपनी को फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ सकता है, यानी हालात के चलते लंबे समय के सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट पूरे नहीं किए जा सकेंगे। इसका असर इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों को पांच साल तक झेलना पड़ सकता है। कंपनी के अनुसार, हमलों में प्रमुख उत्पादन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे सालाना लगभग 20 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। मरम्मत कार्य में तीन से पांच साल तक का समय लग सकता है।

एलएनजी सप्लाई पर बड़ा असर

रास लाफान टर्मिनल कतर की एलएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर का करीब 17% हिस्सा संभालता है। इसके क्षतिग्रस्त होने से वैश्विक गैस बाजार में सप्लाई संकट गहराने की आशंका है। कतर की लगभग 75% एलएनजी सप्लाई एशियाई देशों खासतौर पर चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, ताइवान और पाकिस्तान को जाती है।

मरम्मत में लगेगा लंबा समय

विशेषज्ञों के मुताबिक एनएनजी प्लांट की मरम्मत बेहद जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। प्लांट को पहले धीरे-धीरे गर्म और फिर ठंडा करना पड़ता है, क्योंकि अचानक तापमान बदलाव से पाइपलाइन और उपकरण टूट सकते हैं। भारी-भरकम मशीनें जैसे 50 मीटर लंबे हीट एक्सचेंजर और हजारों टन वजनी कंप्रेसर को बदलना भी आसान नहीं होता।

गैस बाजार में संरचनात्मक संकट

इस घटना ने एलएनजी संकट को सिर्फ लॉजिस्टिक समस्या से आगे बढ़ाकर संरचनात्मक संकट में बदल दिया है। पहले जहां होर्मुज जलडमरूमध्य की बाधा चिंता का कारण थी, अब उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ा है।



यूरोप में गैस के बेंचमार्क दाम डच टाइटल ट्रांसफर फैसिलिटी (TTF) मिड जनवरी के बाद से दोगुने से ज्यादा हो चुके हैं। वहीं, कोयले की मांग भी बढ़ी है, हालांकि उसकी कीमतों में अपेक्षाकृत कम तेजी आई है।

भारत समेत एशिया पर सबसे ज्यादा असर

ऊंची कीमतों का असर सबसे ज्यादा एशियाई देशों पर पड़ने की संभावना है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश, जो ईंधन की कीमतों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं, महंगे गैस के विकल्प के तौर पर कोयले की ओर रुख कर सकते हैं।

वैश्विक असर तय

एलएनजी एक वैश्विक बाजार का हिस्सा है, इसलिए किसी एक क्षेत्र में सप्लाई घटने का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कतर के इस प्रमुख टर्मिनल को हुए नुकसान की भरपाई में कई साल लग सकते हैं, जिससे गैस की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।





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2029 चुनाव से पहले लागू होगा 33% महिला आरक्षण: लोकसभा सीटें बढ़कर 816 होंगी, महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंचेगी




केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो बिल लाए जा सकते हैं। इन बिलों के जरिए महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्त में बदलाव किया जाएगा। इससे लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़कर 816 हो सकती है। वहीं महिला सांसदों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 273 हो जाएगी। गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर सहमति बनाने के लिए सोमवार को एनडीए और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। सहमति बनने पर बिल इसी हफ्ते पेश किए जा सकते हैं। दरअसल, 2023 में महिला आरक्षण कानून संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। इसके तहत महिला आरक्षण नई जनगणना के बाद लागू होना है। अब सरकार का प्रस्ताव है कि नई जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए। इससे प्रोसेस में तय समय पर पूरी हो सकेगी और आरक्षण लागू किया जा सकेगा। दो बिल लाए जाएंगे, संविधान संशोधन भी शामिल इस बदलाव के लिए सरकार दो बिल लाएगी। एक बिल के जरिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन होगा, जबकि दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव से जुड़ा होगा। इसे पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा। इसी वजह से सरकार विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी है। गृह मंत्री अमित शाह ने इसके लिए कई नेताओं से बैठकें की हैं। इनमें वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी और एआईएमआईएम के नेता शामिल रहे। बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) से भी बातचीत हुई है, जबकि कांग्रेस से चर्चा बाकी है। सहमति बनने पर बिल इसी हफ्ते संसद में पेश किए जा सकते हैं। लोकसभा में 816 सीटों की हो सकती है, 273 महिलाओं के लिए आरक्षण प्रस्ताव के मुताबिक लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। इसके बाद करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण का ढांचा ऐसा होगा, जिसमें एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा मिलेगा। ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है। इसी फॉर्मूले पर राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाने और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना है, ताकि पूरे देश में एक जैसा ढांचा रहे। 2023 में पास हुआ था कानून, अभी लागू नहीं महिला आरक्षण कानून 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसकी मंजूरी दे चुकी हैं। लोकसभा में यह बिल लगभग सर्वसम्मति से और राज्यसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ था। हालांकि, यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है। इसकी लागू होने की तारीख केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए तय करेगी और जरूरत पड़ने पर संसद इसमें संशोधन कर सकती है। महिलाओं के लिए राजनीतिक आरक्षण की मांग की टाइम लाइन 1931: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिलाओं के लिए राजनीति में आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसमें बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसी नेताओं ने महिलाओं को पुरुषों पर तरजीह देने के बजाय समान राजनीतिक स्थिति की मांग पर जोर दिया। संविधान सभा की बहसों में भी महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। तब इसे यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि लोकतंत्र में खुद-ब-खुद सभी समूहों को प्रतिनिधित्व मिलेगा। 1947: फ्रीडम फाइटर रेणुका रे ने उम्मीद जताई कि भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले लोगों के सत्ता में आने के बाद महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की गारंटी दी जाएगी। हालांकि यह उम्मीद पूरी नहीं हुई और महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सीमित ही रहा। 1971: भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया, जिसमें महिलाओं की घटती राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रकाश डाला गया। हालांकि समिति के कई सदस्यों ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया, उन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन किया। 1974: महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए महिलाओं की स्थिति पर एक समिति ने शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की सिफारिश की गई थी। 1988: महिलाओं के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perpective Plan) ने पंचायत स्तर से संसद तक महिलाओं को आरक्षण देने की सिफारिश की। इसने पंचायती राज संस्थानों और सभी राज्यों में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य करने वाले 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की नींव रखी। 1993: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया है। 1996: एचडी देवेगौड़ा की सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में संसद में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया। इसके तुरंत बाद, उनकी सरकार अल्पमत में आ गई और 11वीं लोकसभा भंग हो गई 1998: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने 12वीं लोकसभा में 84वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में विधेयक को फिर से पेश किया। इसके विरोध में एक राजद सांसद ने विधेयक को फाड़ दिया। विधेयक फिर से लैप्स हो गया, क्योंकि वाजपेयी सरकार के अल्पमत में आने के साथ 12वीं लोकसभा भंग हो गई थी। 1999: NDA सरकार ने 13वीं लोकसभा में एक बार फिर विधेयक पेश किया, लेकिन सरकार फिर से इस मुद्दे पर आम सहमति जुटाने में नाकाम रही। NDA सरकार ने 2002 और 2003 में दो बार लोकसभा में विधेयक लाया, लेकिन कांग्रेस और वामपंथी दलों ने समर्थन का आश्वासन दिए जाने के बाद भी इसे पारित नहीं कराया जा सका। 2004: सत्ता में आने के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार ने साझा न्यूनतम कार्यक्रम (CMP) में अपने वादे के तहत बिल पारित करने की अपनी मंशा की घोषणा की। 2008: मनमोहन सिंह सरकार ने विधेयक राज्यसभा में पेश किया और 9 मई, 2008 को इसे कानून और न्याय पर स्थायी समिति को भेजा गया। 2009: स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और विधेयक को समाजवादी पार्टी, जेडीयू और राजद के विरोध के बीच संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया। 2010: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दी। विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया, लेकिन सपा और राजद के UPA सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकियों के बाद मतदान स्थगित कर दिया गया। 9 मार्च को राज्यसभा से महिला आरक्षण विधेयक को 1 के मुकाबले 186 मतों से पारित कर दिया गया। हालांकि, लोकसभा में 262 सीटें होने के बावजूद मनमोहन सिंह सरकार विधेयक को पारित नहीं करा पाई। 2014 और 2019: भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्रों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का वादा किया, लेकिन इस मोर्चे पर कोई ठोस प्रगति नहीं की।



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प्रयागराज में कोल्ड स्टोरेज ढहने से चार लोगों की मौत हो गई और अमोनिया गैस का रिसाव हुआ।


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-Oneindia Staff

सोमवार दोपहर को चांदपुर गांव में एक कोल्ड स्टोरेज सुविधा के ढहने से कम से कम चार मजदूरों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए। इस घटना से अमोनिया गैस का रिसाव भी हुआ, जिससे इसे नियंत्रित करने के प्रयास शुरू हो गए। बचाव दल मलबे में जीवित बचे लोगों की सक्रिय रूप से तलाशी ले रहे हैं।

 प्रयागराज कोल्ड स्टोरेज दुर्घटना में जानमाल का नुकसान

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जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार वर्मा ने पुष्टि की है कि घायलों का एसआरएन अस्पताल में इलाज चल रहा है। मृतकों की पहचान बिहार के सहरसा निवासी 22 वर्षीय ज्योतिश कुमार, 36 वर्षीय मनोज उर्फ बिल्लर चौधरी, 19 वर्षीय मसींदर कुमार और चांदपुर के 42 वर्षीय जगदीश कुमार के रूप में हुई है।

जिला प्रशासन, पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल और दमकल विभाग की टीमें राहत कार्यों में जुटी हुई हैं। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि फाफामऊ थाना क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज का एक हिस्सा ढह गया। यह सुविधा पूर्व समाजवादी पार्टी के विधायक अंसारी अहमद की है।

कोल्ड स्टोरेज का लाइसेंस आखिरी बार कब नवीनीकृत हुआ था और ऐसी खराब स्थिति वाली सुविधा को यह कैसे दिया गया था, यह जानने के लिए एक विस्तृत जांच की जाएगी। इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अमोनिया गैस रिसाव

पुलिस उपायुक्त कुलदीप गुनावत ने बताया कि ढहने से अमोनिया गैस का रिसाव हुआ, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। दमकल विभाग की टीमें रिसाव को रोकने के लिए काम कर रही हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर शोक व्यक्त किया है। मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की गई है।

मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से इस हादसे पर दुख व्यक्त किया, जबकि आदित्यनाथ ने घायलों के तत्काल इलाज और प्रभावित परिवारों को वित्तीय सहायता के लिए निर्देश जारी किए।

With inputs from PTI



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थारूर ने केंद्र की ज्ञान भारतम पहल और पांडुलिपियों तक पहुंच को लेकर चिंता जताई।


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-Oneindia Staff

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ज्ञान भारतम् पहल की पहुंच और पारदर्शिता पर चिंता जताई है, जिसका उद्देश्य भारत की पांडुलिपि विरासत को डिजिटल बनाना है। 1.29 लाख पांडुलिपियों तक सार्वजनिक पहुंच के दावों के बावजूद, थरूर ने पहुंच तंत्र, भाषा इंटरफेस और पहुंच पर जानकारी की कमी पर ध्यान दिया। उन्होंने 2 फरवरी को अपनी पूछताछ पर सरकार की प्रतिक्रिया की एक स्कैन की गई प्रति साझा की।

 थरूर ने ज्ञान भारतम पहुंच के मुद्दों पर सवाल उठाए

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थरूर ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरदचंद्र पवार के साथ मिलकर इस पहल के विवरण पर सवाल उठाए थे। सरकार ने लोकसभा को सूचित किया कि ज्ञान भारतम् के तहत 7.5 लाख से अधिक पांडुलिपियों को डिजिटाइज किया गया है, जिनमें से 1.29 लाख इसके पोर्टल पर उपलब्ध हैं। हालांकि, थरूर ने बताया कि पांडुलिपियों पर कोई राज्य या भाषा-विशिष्ट डेटा प्रदान नहीं किया गया है।

केंद्रीय सरकार की प्रतिक्रिया में प्रत्येक क्लस्टर सेंटर से जुड़े भागीदार संस्थानों की संख्या पर विवरण की कमी थी। थरूर ने पांडुलिपि कवरेज और डिजिटलीकरण की प्रगति पर केरल-विशिष्ट जानकारी की अनुपस्थिति पर प्रकाश डाला। हालांकि 2025-2031 के लिए 491.66 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन साल-वार आवंटन या व्यय डेटा नहीं है।

थरूर ने तकनीकी मानकों के अनुपालन की निगरानी या प्रवर्तन पर स्पष्टता की कमी की आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि यह संसदीय निरीक्षण को कमजोर करता है और सार्वजनिक विरासत मिशन को विद्वानों और संरक्षक संस्थानों से डिस्कनेक्ट करने का जोखिम उठाता है।

ज्ञान भारतम् पहल का विवरण

ज्ञान भारतम्, जिसे केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित किया गया है, संस्कृति मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य भारत की पांडुलिपि विरासत को सुरक्षित रखना और संरक्षित करना है, जो विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह पहल सांस्कृतिक संरक्षण को मानव पूंजी विकास के साथ सामंजस्य स्थापित करने की मांग करती है।

वित्त संबंधी स्थायी समिति ने इस पहल का समर्थन करने के लिए 2025-2031 की अवधि के लिए 491.66 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। 16 मार्च को, ज्ञान भारतम् के तहत पांडुलिपियों के दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण और डिजिटलीकरण के लिए तीन महीने का राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण शुरू हुआ।

सर्वेक्षण और दस्तावेज़ीकरण के प्रयास

यह सर्वेक्षण भारत भर में जिला स्तरों तक विस्तारित होगा, जिसका उद्देश्य देश की पांडुलिपि विरासत का व्यापक रूप से दस्तावेज़ीकरण और संरक्षण करना है। अधिकारियों ने कहा है कि यह प्रयास भविष्य की पीढ़ियों के लिए भारत के प्राचीन ज्ञान को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

थरूर की चिंताएं ऐसी पहलों के कार्यान्वयन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर प्रकाश डालती हैं। इन प्रयासों की सफलता और राष्ट्रीय सांस्कृतिक लक्ष्यों के साथ संरेखण के लिए सार्वजनिक पहुंच और इन प्रयासों के बारे में स्पष्ट संचार सुनिश्चित करना आवश्यक है।

With inputs from PTI



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स्थानीय उत्पादों के लिए आवाज: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राष्ट्र निर्माण के लिए चलाए जा रहे आंदोलन पर प्रकाश डाला।


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-Oneindia Staff

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि “वोकल फॉर लोकल” पहल सिर्फ एक नारा नहीं है; यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक आंदोलन है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने से अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और कारीगरों तथा छोटे उद्यमियों के जीवन में स्थिरता आती है। सैनी ने स्वदेशी को एक आर्थिक दर्शन बताया जो व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए सशक्त बनाता है।

 हरियाणा के मुख्यमंत्री ने वोकल फॉर लोकल आंदोलन को बढ़ावा दिया

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नांगल, पंजाब में स्वदेशी मेला और युवा सम्मेलन में बोलते हुए, सैनी ने स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनके बलिदानों ने राष्ट्रीय गौरव को काफी बढ़ाया। इन नायकों को ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा 23 मार्च, 1931 को लाहौर जेल में पुलिस अधिकारी जॉन सॉंडर्स की मौत में उनकी संलिप्तता के लिए फाँसी दी गई थी। उनके शहादत को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।

सैनी ने टिप्पणी की कि शहीदी दिवस राष्ट्रीय एकता, अखंडता और समृद्धि की दिशा में काम करने के लिए एक प्रेरणा के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने वाले युवाओं से स्वदेशी सिद्धांतों को अपनाने, नशीली दवाओं के दुरुपयोग से लड़ने और राष्ट्रीय विकास में योगदान करने की अपनी प्रतिबद्धता का संकल्प लेने का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अवैध या जोखिम भरे साधनों से विदेश में अवसरों की तलाश के खिलाफ चेतावनी दी।

मुख्यमंत्री ने नांगल मेले में हरियाणा की सक्रिय भागीदारी पर प्रकाश डाला। राज्य की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन पहल, पर्यावरण संरक्षण के प्रयास और डेयरी उत्पादों को प्रमुख आकर्षण के रूप में प्रदर्शित किया गया। सैनी के अनुसार, ये तत्व हरियाणा की प्रगति और समृद्धि को दर्शाते हैं।

With inputs from PTI

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पुणे के Dr Vishal Khalane बना रहे मातृत्व देखभाल की नई मिसाल, नॉर्मल डिलीवरी को दे रहे बढ़ावा


Bhopal

oi-Laxminarayan Malviya

महाराष्ट्र के पुणे में स्त्री-रोग विशेषज्ञ Dr. Vishal Khalane मातृत्व देखभाल के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसे समय में जब निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन (ऑपरेशन) डिलीवरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं डॉक्टर विशाल खालाने प्राकृतिक और सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी को प्राथमिकता देकर मरीजों का भरोसा जीत रहे हैं।

हाल ही में Omkar Khalane Hospital में सफल नॉर्मल डिलीवरी ने एक बार फिर उनकी कार्यशैली को चर्चा में ला दिया है, जहां मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।

Pune doctor Vishal Khalane is setting a new example in maternity care promoting normal delivery

प्राकृतिक मातृत्व यात्रा पर फोकस

Dr. Vishal Khalane केवल डिलीवरी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरी प्रेग्नेंसी जर्नी को सहज और सुरक्षित बनाने पर काम करते हैं। उनकी देखरेख में गर्भवती महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार किया जाता है, जिससे वे प्राकृतिक प्रसव के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। साथ ही लैक्टेशन (स्तनपान) सपोर्ट, डाइट गाइडेंस और प्रसव के बाद रिकवरी पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इससे मातृत्व अनुभव अधिक सकारात्मक और सुरक्षित बनता है।

परिवार का अनुभव: भरोसे और सहयोग की कहानी

हाल ही में नॉर्मल डिलीवरी का अनुभव साझा करते हुए नवजात के पिता ने बताया कि डॉक्टर और उनकी टीम ने हर चरण में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक हर स्टेज पर उन्हें पूरी जानकारी और आत्मविश्वास मिला। प्रसव के समय डॉक्टर का शांत और सहयोगी व्यवहार परिवार के लिए बेहद सहायक रहा। अस्पताल स्टाफ की देखभाल ने पूरे अनुभव को और भी सहज बना दिया।

किफायती इलाज और पारदर्शिता सबसे बड़ी ताकत

आज के दौर में जहां मातृत्व सेवाएं महंगी होती जा रही हैं, वहीं Dr. Khalane मरीजों को किफायती और पारदर्शी इलाज प्रदान करने पर जोर देते हैं। अनावश्यक मेडिकल प्रक्रियाओं से बचाते हुए वे केवल जरूरी उपचार ही अपनाते हैं, जिससे मरीजों का आर्थिक बोझ कम होता है। यही वजह है कि कई परिवार उन्हें एक भरोसेमंद डॉक्टर के रूप में देखते हैं।

नॉर्मल डिलीवरी के फायदे, क्यों है बेहतर विकल्प

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गर्भावस्था सामान्य हो तो नॉर्मल डिलीवरी के कई फायदे होते हैं। इससे मां की रिकवरी जल्दी होती है, बच्चे की इम्युनिटी बेहतर बनती है और सर्जरी से जुड़े जोखिम कम हो जाते हैं। यही कारण है कि प्राकृतिक प्रसव को बढ़ावा देना न केवल स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर है, बल्कि यह जागरूकता का भी महत्वपूर्ण कदम है।

समाज के लिए सकारात्मक संदेश

Dr. Vishal Khalane की पहल मातृत्व देखभाल को अधिक सुरक्षित, सुलभ और प्राकृतिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह उन परिवारों के लिए प्रेरणा है जो बिना जरूरत ऑपरेशन के डर से जूझते हैं। उनके प्रयास यह संदेश देते हैं कि सही मार्गदर्शन और देखभाल के साथ नॉर्मल डिलीवरी आज भी संभव और सुरक्षित है।



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Iran America War: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच जयशंक ने अमेरिकी विदेश मंत्री से की बात, किन मुद्दों पर चर्चा


International

oi-Sumit Jha

Jaishankar Marco Rubio Phone Call: भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच एक महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत हुई। इस चर्चा का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा तनाव और उसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला असर था।

दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए इस क्षेत्र में शांति जरूरी है। यह बातचीत भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते कूटनीतिक रिश्तों को दर्शाती है, जहाँ दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

jaishankar marco rubio telephonic talk

West Asia conflict Update in Hindi: पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा

डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि, आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ विस्तृत टेलीफोनिक बातचीत हुई। हमारी चर्चा पश्चिम एशिया संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव पर केंद्रित रही। हमने विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा की चिंताओं के बारे में बात की। संपर्क में बने रहने पर सहमति बनी।”

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

बैठक का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक चिंताओं पर आधारित था। पश्चिम एशिया में अस्थिरता की वजह से पूरी दुनिया की सप्लाई चेन (माल की आवाजाही) प्रभावित होने का डर रहता है। डॉ. जयशंकर ने बताया कि कैसे इस तनाव से सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे गरीब और विकासशील देशों पर बोझ बढ़ता है। दोनों देशों ने सहमति जताई कि वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए मिलकर काम करना जरूरी है ताकि आर्थिक मंदी जैसे हालात न बनें।

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ऊर्जा सुरक्षा की चिंता

भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि हम अपनी जरूरत का अधिकांश तेल और गैस बाहर से मंगवाते हैं। जयशंकर और रुबियो ने इस बात पर गहराई से चर्चा की कि युद्ध की स्थिति में तेल की कीमतों को बढ़ने से कैसे रोका जाए। अगर तेल के दाम बढ़ते हैं, तो इसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ता है। दोनों नेताओं ने ऊर्जा के स्रोतों को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।

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आगे के लिए आपसी सहमति

बातचीत के अंत में, दोनों मंत्रियों ने भविष्य में भी एक-दूसरे के संपर्क में रहने का वादा किया। इस कॉल का मकसद केवल मौजूदा समस्याओं पर चर्चा करना नहीं था, बल्कि भविष्य की रणनीतियों पर तालमेल बिठाना भी था। भारत और अमेरिका का यह सहयोग दिखाता है कि दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं और वैश्विक संकट के समय एक-दूसरे के अनुभवों और सुझावों को महत्व देते हैं। यह दोस्ती दुनिया में स्थिरता लाने के लिए अहम है।



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Colombia plane crash: कोलंबिया में सेना का विमान क्रैश, 110 जवान थे सवार, कैसे हुआ हादसा


International

oi-Sumit Jha

Colombia plane crash: कोलंबिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां वायुसेना का एक विमान उड़ान भरते ही हादसे का शिकार हो गया। जानकारी के मुताबिक, इस ‘हरक्यूलिस C-130’ विमान में कुल 110 सैनिक सवार थे। यह दुर्घटना कोलंबिया के दक्षिणी अमेज़न क्षेत्र में हुई, जो पेरू की सीमा के पास स्थित है।

स्थानीय मीडिया और रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि विमान ने प्यूर्टो लेगुइज़ामो से उड़ान भरी थी और कुछ ही देर बाद वह क्रैश हो गया। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है और पूरे देश में इस घटना को लेकर चिंता का माहौल है।

Colombia plane crash

कैसे हुआ यह हादसा?

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, लॉकहीड मार्टिन का यह भारी-भरकम विमान सैनिकों को लेकर जा रहा था। जैसे ही विमान ने रनवे से उड़ान भरी, वह तकनीकी खराबी या किसी अन्य कारण से अनियंत्रित होकर गिर गया। रिपोर्ट बताती है कि यह हादसा रिहायशी इलाके से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर हुआ। हादसे के तुरंत बाद आसमान में धुएं का गुबार देखा गया और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी ताकि दुर्घटना की सही वजह पता चल सके।

• BREAKING: Colombian Air Force C-130 Hercules crashed during takeoff while transporting approximately 100 members of the countrys security forces, Defense Minister Pedro Arnulfo Sanchez said. Military personnel have responded to the scene, but casualty figures have not yet… pic.twitter.com/MecJZemIYs

— Red Intel (@RedIntelX) March 23, 2026 “>

विमान में कौन थे सवार?

विमान में सवार सभी लोग सेना से जुड़े थे। स्थानीय न्यूज एजेंसी ‘ब्लू रेडियो’ के मुताबिक, इसमें 110 सैनिक मौजूद थे जो एक मिशन या ट्रांसफर के सिलसिले में यात्रा कर रहे थे। इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों के सवार होने की वजह से यह कोलंबियाई वायुसेना के सबसे बड़े हादसों में से एक माना जा रहा है। रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज ने बताया कि फिलहाल हताहतों की सही संख्या का पता लगाया जा रहा है और सेना के परिवारों को सूचित किया जा रहा है।

कहां पर हुई दुर्घटना?

यह घटना कोलंबिया के दक्षिणी हिस्से में स्थित अमेज़न के घने जंगलों वाले इलाके में हुई है। प्यूर्टो लेगुइज़ामो का यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से काफी कठिन माना जाता है और यह पेरू की अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब है। शहर के केंद्र से दूरी कम होने की वजह से राहत कर्मियों को पहुंचने में तो आसानी हुई, लेकिन घने पेड़ों और मलबे के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

जांच और बचाव कार्य

सरकार ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। एयरफोर्स के विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या विमान में कोई तकनीकी खराबी थी या मौसम की वजह से यह हादसा हुआ। रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता अभी मलबे से लोगों को बाहर निकालना और घायलों को इलाज मुहैया कराना है। पूरा देश अब उन 110 सैनिकों की सलामती की दुआ कर रहा है जो इस उड़ान का हिस्सा थे।





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