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जम्मू यूनिवर्सिटी में जिन्ना से जुड़े टॉपिक्स हटाने की सिफारिश: अल्पसंख्यकों का नेता बताया; नए सिलेबस में जिन्ना, सर सैयद और इकबाल को जोड़ा था


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जम्मू5 मिनट पहले

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जम्मू यूनिवर्सिटी में एमए पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस से मोहम्मद अली जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद इकबाल से जुड़े टॉपिक्स हटाने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिश विभागीय मामलों की समिति (DAC) ने की है। अब इस पर अंतिम फैसला 24 मार्च को बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में होगा।

यूनिवर्सिटी के मुताबिक, 22 मार्च को HOD ऑफिश में DAC की बैठक हुई। इसमें वन-ईयर और टू-ईयर एमए पॉलिटिकल साइंस प्रोग्राम के सिलेबस पर चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से जिन्ना, सर सैयद और इकबाल से जुड़े टॉपिक्स हटाने की सिफारिश की गई।

अब यह प्रस्ताव बोर्ड ऑफ स्टडीज को भेजा गया है, जिसकी बैठक 24 मार्च को सुबह 11:30 बजे ऑनलाइन होगी।

सिलेबस में जिन्ना को जोड़ने के बाद हुआ विवाद

पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस में ‘माइनॉरिटीज एंड द नेशन’ पेपर के तहत जिन्ना के राजनीतिक विचार शामिल किए गए थे, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शनिवार को यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन कर इन टॉपिक्स को तुरंत हटाने की मांग की थी। संगठन ने कहा कि अकादमिक स्वतंत्रता के नाम पर राष्ट्रीय भावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी नहीं हो सकती।

ABVP के जम्मू-कश्मीर राज्य सचिव सन्नक श्रीवत्स ने बताया कि पहले जिन्ना का जिक्र ‘टू-नेशन थ्योरी’ के संदर्भ में होता था, जहां उन्हें विभाजन की सोच से जोड़ा जाता था।

अब संशोधित सिलेबस में उन्हें ‘माइनॉरिटीज एंड the Nation’ के तहत अल्पसंख्यकों के नेता के रूप में पेश किया गया है, जिस पर आपत्ति जताई जा रही है।

कांग्रेस नेता बोलीं- विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और JKPCC महासचिव नम्रता शर्मा ने कहा कि सिलेबस को लेकर विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जिन्ना, सावरकर और गोलवलकर से जुड़ा यह हिस्सा 2025 में तैयार किए गए ड्राफ्ट सिलेबस में शामिल था, लेकिन 11-12 महीने तक इस पर कोई सवाल नहीं उठा। अब अचानक इसे मुद्दा बनाया जा रहा है।

नम्रता शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि जब सिलेबस तैयार किया गया था, तब क्या यूनिवर्सिटी प्रशासन और वाइस चांसलर उमेश राय की अगुवाई वाली अकादमिक टीम ने इसकी ठीक से जांच नहीं की थी।

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भारत तेल और गैस संकट से कैसे निपट रहा?: संसद में पीएम मोदी बोले- 27 से बढ़कर 41 हुए आयात के स्रोत


पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत ने बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अहम चीजें होर्मुज से आती हैं। होर्मुज में फिलहाल जहाजों का आना-जाना मुश्किल हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारी सरकार का प्रयास रहा है कि पेट्रोल-डीजल और गैस की सप्लाई प्रभावित न हो। हम सभी जानते हैं कि दे अपनी जरूरत की 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है। इसकी सप्लाई में अनिश्चितता के कारण सरकार ने इसके घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी है। साथ ही इसके देश में उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार और उद्योग के साझा प्रयास से हम परिस्थितियों का बेहतर तरीके से सामना कर पाएंगे।”

पेट्रोल-डीजल की सुचारु आपूर्ति बरकरार रखने की कोशिश जारी

पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति लगातार बरकरार रखने की कोशिश की जा रही है। बीते एक दशक में उठाए गए कदम अब और भी प्रासंगिक हो गए हैं। भारत ने बीते 11 साल में अपनी ऊर्जा जरूरतों की आपूर्ति का डायवर्सिफिकेशन किया है। पहले भारत में 27 देशों से कच्चे तेल और गैस का आयात किया जाता था। अब भारत 41 देशों से ऊर्जा जरूरतों का आयात किया जाता है। भारत ने कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है। आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का स्ट्रैटिजिक रिजर्व है और 65 लाख मीट्रिक टन के रिजर्व पर काम किया जा रहा है। पिछले 11 वर्ष में हमारी रिफाइनरिंग क्षमता भी बढ़ी है।

इथेनॉल मिक्सिंग की तैयारी से मिल रहा फायदा: पीएम

भारत लगातार अलग-अलग सप्लायर्स से भी संपर्क में है। हमारा प्रयास है कि जहां से संभव हो वहां से सप्लाई होती रहे। हमारा प्रयास है कि तेल हो गैस हो, फर्टिलाइजर हो, ऐसे सभी जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें। हम सभी वैश्विक सहयोगियों के साथ निरंतर संवाद कर रहे हैं, ताकि हमारे मैरिटाइम कॉरीडोर सुरक्षित रहें। इन वार्ताओं के चलते होर्मुज में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं। हमारी एक और तैयारी बहुत काम आ रही है। बीते 10-11 साल में इथेनॉल की मिक्सिंग को बढ़ाया गया है। आज पेट्रोल में 20 फीसदी तक इथेनॉल की मिक्सिंग को बढ़ाया गया है। रेलवे के विद्युतीकऱण से भी काफी फायदा हो रहा है। इतना इलेक्ट्रिफिकेशन आज न होता तो भारत को 180 करोड़ लीटर तेल अतिरिक्त लगता।

ऊर्जा आज अर्थव्यवस्था की रीढ़: पश्चिम एशिया संकट के बीच लोकसभा में पीएम

आज जिस स्केल पर वैकल्पिक ईंधन पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा। एनर्जी आज इकोनॉमी की रीढ़ है और वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला स्रोत पश्चिम एशिया है। दुनियाभर की इकोनॉमी अभी प्रभावित हो रही है। भारत पर इसका कम से कम प्रभाव हो इसके प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार इसके छोटी अवधि, मध्यम और लंबी अवधि के हल पर काम कर रही है। इससे देश को काफी मदद मिली है। हम हर सेक्टर के स्टेकहोल्डर के साथ चर्चा कर रहे हैं। हर सेक्टर को आवश्यक सपोर्ट दिया जा रहा है। सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया है। यह समूह हर दिन मिलता है और हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट पर बात करता है और समाधान पर चर्चा करता है।

अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट अस्वीकार्य: पीएम

पीएम ने कहा कि भारत ने नागरिकों, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े हुए इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है। कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है। भारत कूटनीति के जरिए युद्ध के इस माहौल में भी भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत हमेशा से ही मानवता के हित में और शांति के पक्ष में अपनी आवाज उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि मैं फिर कहूंगा कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का समाधान है। हमारे हर प्रयास तनाव को कम करने इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए है। इस संघर्ष में किसी के भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है।



पीएम मोदी ने कहा कि भारत का प्रयास सभी पक्ष को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है। जब ऐसे संकट आते हैं तो कुछ तत्व इसका गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। इसलिए कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने वाली सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है।

कृषि क्षेत्र के बारे में क्या बोले पीएम मोदी?

किसानों और कृषि क्षेत्र के बारे में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पास खाद्यान्न है। खरीफ सीजन की ठीक से बुआई हो सके, इसकी तैयारी है। दुनिया में जारी संकट का किसानों पर असर न पड़े हमारी सरकार ने हमेशा इसे प्राथमिकता दी है। दुनिया के बारे में जब यूरिया की बोरी 3000 तक पहुंच गई तब भी भारत के किसनों को वही बोरी 300 रुपये में मुहैया कराई गई। पिछले एक दशह में देश में छह यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं। इससे देश की क्षमता बढ़ी है। तेल और गैस की तरह खाद के आयात को भी डायवर्सिफाई किया है।



सरकार ने देश के किसानों को मेड इन इंडिया नेनो यूरिया का विकल्प दिया है। हम किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहित कर रहे हैं। किसानों को 22 लाख से ज्यादा सोलर पंप दिए गए हैं। मैं सदन को विश्वास दिलाता हूं, सरकार किसानों को हरसंभव मदद करती रहेगी। बीते 11 वर्षों में देश ने अपनी सोलर कैपिसिटी में बड़ा इजाफा किया है।





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आरबीआई का बड़ा कदम: बैंकिंग सिस्टम में डाली ₹79,256 करोड़ की नकदी, जानें अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में बैंकिंग प्रणाली में तरलता को प्रबंधित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने एक रात की अवधि वाली वेरिएबल रेट रेपो (वीआआर) नीलामी के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में ₹79,256 करोड़ की अतिरिक्त नकदी डाली है। यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में तरलता की कमी को दूर करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

क्या है वेरिएबल रेट रेपो नीलामी?

वेरिएबल रेट रेपो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक मौद्रिक नीति उपकरण है। इसके माध्यम से आरबीआई, बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है। इस प्रक्रिया में, बैंक सरकारी प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर RBI से नकदी उधार लेते हैं। इस नीलामी की खासियत यह है कि इसमें ब्याज दर निश्चित नहीं होती, बल्कि यह बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती है, जिसे ‘कट-ऑफ’ और ‘भारित औसत दर’ कहा जाता है।

हालिया तरलता इंजेक्शन के बारे में क्या बताया गया?

हालिया वीआरआर नीलामी में, आरबीआई ने ₹79,256 करोड़ की राशि इंजेक्ट की। यह राशि ₹1 लाख करोड़ के अधिसूचित राशि से काफी कम थी। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में बैंकिंग प्रणाली में अधिशेष तरलता में तेज गिरावट देखी गई है, जिसका एक मुख्य कारण अग्रिम कर का भुगतान है।

बैंकिंग प्रणाली में तरलता की क्या स्थिति है?

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 23 मार्च तक बैंकिंग प्रणाली में लगभग ₹65,395.64 करोड़ की तरलता की कमी का अनुमान लगाया गया था। इस कमी को पूरा करने के लिए RBI द्वारा यह तरलता इंजेक्शन एक आवश्यक कदम था।

तरलता प्रबंधन के लिए पहले क्या उपाय किए गए?

यह पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने तरलता प्रबंधन के लिए वीआरआर नीलामी का सहारा लिया है। इससे पहले भी, केंद्रीय बैंक ने विभिन्न अवधियों की नीलामी के माध्यम से नकदी डाली है:


  • 20 मार्च: तीन-दिवसीय वीआरआर नीलामी के माध्यम से ₹25,101 करोड़ की तरलता।

  • 17 मार्च: सात-दिवसीय वीआरआर के माध्यम से ₹48,014 करोड़ की तरलता।

इन अल्पकालिक तरलता इंजेक्शनों के अलावा, RBI जनवरी 2026 से खुले बाजार परिचालन (ओपन मार्केट परचेज या ओएमपी) के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद द्वारा बैंकिंग प्रणाली में ₹3.50 लाख करोड़ की स्थायी तरलता भी डाल चुका है।

तरलता प्रबंधन अर्थव्यवस्था के लिए क्यों जरूरी?

तरलता प्रबंधन भारतीय अर्थव्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी होती है, तो बैंक आसानी से ऋण दे पाते हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इसके विपरीत, तरलता की कमी से ऋण की उपलब्धता कम हो सकती है, ब्याज दरें बढ़ सकती हैं और आर्थिक विकास धीमा पड़ सकता है। आरबीआई का यह कदम अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने और वित्तीय बाजारों को सुचारू रूप से चलाने के उसके निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।



आरबीआई की ओर से बैंकिग प्रणाली में ₹79,256 करोड़ की तरलता डालना, अग्रिम कर भुगतान के कारण उत्पन्न हुई नकदी की कमी को दूर करने की दिशा में एक सक्रिय कदम है। यह विभिन्न मौद्रिक नीति उपकरणों के माध्यम से अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि बैंकों के पास ऋण देने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए पर्याप्त नकदी बनी रहे।





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आम आदमी पार्टी के शासन संबंधी मुद्दों के बीच पंजाब की विपक्षी पार्टियों ने मोगा के डिप्टी कमिश्नर द्वारा पीसीएस अधिकारी के उत्पीड़न का आरोप लगाया।


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-Oneindia Staff

पंजाब में एक पीसीएस अधिकारी द्वारा कथित मानसिक उत्पीड़न को लेकर शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) और कांग्रेस ने चिंता जताई है। अधिकारी, बबदीप सिंह वालिया, जो बाघपुराना के उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पद पर कार्यरत हैं, ने कथित तौर पर मोगा के उपायुक्त (डीसी) सागर सेतिया पर स्थानीय चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवारों के पक्ष में दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

 पंजाब विपक्ष ने पीसीएस अधिकारी के उत्पीड़न का आरोप लगाया

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एसएडी नेताओं सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया ने, कांग्रेस नेताओं प्रताप सिंह बाजवा और परगट सिंह के साथ, वालिया द्वारा कथित तौर पर लिखे गए एक पत्र को साझा किया। पत्र में दावा किया गया है कि वालिया को बाघपुराना पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनावों के संबंध में सेतिया से अत्यधिक उत्पीड़न और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा।

पत्र के अनुसार, 17 मार्च को होने वाली चुनाव प्रक्रिया कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण बाधित हो गई थी। वालिया का आरोप है कि उन्होंने इस मुद्दे के बारे में मोगा डीसी को तुरंत सूचित किया था। उन्होंने आगे दावा किया कि विशिष्ट उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव परिणाम घोषित करने के लिए अनुचित दबाव था, जिसे वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के सिद्धांतों का उल्लंघन मानते हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

एसएडी अध्यक्ष बादल ने आप सरकार पर अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए बलपूर्वक रणनीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव से वालिया की शिकायत के बावजूद न्याय नहीं मिला है। मजीठिया ने इन भावनाओं को दोहराते हुए आरोप लगाया कि वालिया पर स्थापित नियमों के विरुद्ध कार्य करने का दबाव डाला गया था।

कांग्रेस नेता बाजवा ने इन आरोपों के बाद आप सरकार की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों को राजनीतिक एजेंटों तक सीमित किया जा रहा है, और इस स्थिति को लोकतंत्र और शासन पर सीधा हमला बताया। बाजवा ने अधिकारियों के जबरन वसूली और उत्पीड़न को तत्काल समाप्त करने की मांग की।

मोगा डीसी की प्रतिक्रिया

मोगा डीसी सागर सेतिया ने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पंचायत समिति के सदस्यों की शिकायतों के आधार पर एसडीएम वालिया के खिलाफ पहले से ही जांच चल रही है। सेतिया ने उत्पीड़न के दावों को खारिज करते हुए कहा कि आरोप निराधार हैं।

आरोपों का संदर्भ

यह विवाद आम आदमी पार्टी की सरकार की सावर्जनिक वितरण निगम से जुड़े एक अन्य मामले में हो रही आलोचनाओं के बीच आया है, जिसमें कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले गगनदीप सिंह रंधावा का मामला शामिल है। विपक्षी दल रंधावा की मौत के संबंध में पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

यह स्थिति पंजाब में राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है, जिसमें सत्ता के दुरुपयोग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप तेजी से प्रमुख हो रहे हैं।

With inputs from PTI

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Survey: दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय ₹5.31 लाख के पार, CM रेखा बोलीं यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से 2.5 गुना ज्यादा


राजधानी दिल्ली की अर्थव्यवस्था को लेकर जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बड़ा संकेत मिला है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, चालू कीमतों पर दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय 2025-26 में बढ़कर 5,31,610 रुपये होने का अनुमान है। यह 2024-25 के मुकाबले 7.92 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से करीब 2.5 गुना अधिक रहने की संभावना है, जो राजधानी की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।

जीएसडीपी को लेकर क्या अनुमान?

वहीं, 2025-26 में दिल्ली का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 13,27,055 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 9.42 फीसदी की बढ़त को दिखाता है।


  • राजकोषीय स्थिति पर नजर डालें तो बजट अनुमान (BE) 2025-26 में 9,661.31 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष रहने की उम्मीद है, जो GSDP का 0.73 फीसदी है।

  • टैक्स कलेक्शन में भी मजबूती देखने को मिल रही है। सरकार ने 2025-26 के लिए कर संग्रह में 15.54 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य रखा है।

एक लाख करोड़ रुपये का कुल बजट

दिल्ली सरकार का कुल बजट एक लाख करोड़ रुपये का है, जिसमें से 59,300 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं पर खर्च किए जाएंगे। यह पिछले साल के 39,000 करोड़ रुपये के मुकाबले बड़ा इजाफा है। सेक्टरवार खर्च में परिवहन को सबसे ज्यादा 20 फीसदी हिस्सा मिला है, इसके बाद सामाजिक सुरक्षा व कल्याण (17 फीसदी) और जल आपूर्ति व स्वच्छता (15 फीसदी) शामिल हैं।

दूसरे क्षेत्रों में क्या है स्थिति?

इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी विस्तार देखा गया है। राजधानी में बिजली की अधिकतम मांग 8,442 मेगावाट तक पहुंच गई है, जो एक दशक पहले 5,846 मेगावाट थी। जनवरी 2026 तक नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता 509 मेगावाट हो गई है।



उद्योग क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग प्रमुख योगदानकर्ता बना हुआ है, जिसका ग्रॉस स्टेट वैल्यू एडेड 50,144 करोड़ रुपये आंका गया है। हालांकि, महंगाई का असर भी दिखा है। औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 2024 के 132.5 से बढ़कर 2025 में 139.4 हो गया, यानी 4.9 फीसदी की वृद्धि।



परिवहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा मिला है। इलेक्ट्रिक बसों की संख्या अप्रैल 2025 के 2,150 से बढ़कर मार्च 2026 में 4,338 हो गई है, जबकि कुल बस बेड़ा 6,100 है। दिल्ली मेट्रो में प्रतिदिन औसतन 67 लाख यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई।



स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार हुआ है। दिसंबर 2025 तक सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़कर 15,659 हो गई है। प्रति 1,000 आबादी पर बेड की उपलब्धता बढ़कर 2.84 हो गई है।



सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को प्रति माह 2,500 रुपये की सहायता दी जा रही है। चालू वित्त वर्ष में 4.40 लाख वरिष्ठ नागरिकों और 4.09 लाख जरूरतमंद महिलाओं को इसका लाभ मिला।



सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत 1,953 उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से 72.21 लाख लाभार्थियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। अंत्योदय अन्न योजना के तहत परिवारों को हर महीने 35 किलोग्राम अनाज दिया जा रहा है, साथ ही एक  किलो चीनी मुफ्त प्रदान की जा रही है।


वायु प्रदर्शन को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े?

राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण के स्तर में आंशिक सुधार दर्ज किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पीएम2.5 और पीएम10 का वार्षिक औसत स्तर कोविड वर्ष 2020 को छोड़कर 2015 के बाद सबसे कम रहा है। 

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में पीएम10 का औसत स्तर 209 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम2.5 का 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। यह आंकड़े 9 दिसंबर 2025 तक के डेटा पर आधारित हैं।



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बंगाल में आज आ सकती है सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट: 27 लाख वोटरों पर असर; दावा- काम के दबाव में एक और BLO की मौत


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  • West Bengal Voter List Update | BLO Death Claims Mount; 27 Lakh Voters Affected

कोलकाता25 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल में आज सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी हो सकती है। चुनाव आयोग के मुताबिक, ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में रखे गए करीब 60 लाख वोटरों में से 27 लाख के मामलों का वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है।

दरअसल, 28 फरवरी को जारी फाइनल वोटर लिस्ट में करीब 60 लाख वोटरों को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में रखा गया था। यानी जिनके दस्तावेज या पात्रता पर संदेह था, उनके नाम पर अंतिम फैसला रोककर जांच शुरू की गई।

इनमें से 27 लाख मामलों का वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है। इन वोटरों के नाम रखने या हटाने का फैसला सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा।

इसी बीच मालदा में एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि काम के दबाव की वजह से उनकी जान गई।

मालदा में BLO की मौत, परिवार ने काम के दबाव का आरोप लगाया

मालदा जिले में एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की हार्ट अटैक से मौत हो गई। 54 साल के BLO उत्पल ठाकुर चांचल-II ब्लॉक के एक बूथ पर तैनात थे।

परिवार का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान उन पर लगातार काम का दबाव था। उनके बूथ पर करीब 110 वोटर ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में थे। जिससे लोग लगातार उनसे जानकारी लेने पहुंच रहे थे। हालांकि इस मामले में कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

63.66 लाख नाम हटे, 60 लाख की जांच जारी

SIR प्रक्रिया के बाद अब तक 63.66 लाख नाम हटाए जा चुके हैं, जो कुल वोटरों का करीब 8.3% है। इससे वोटर बेस 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गया है। वहीं, 60 लाख से ज्यादा वोटर अब भी ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में हैं, जिन पर आगे फैसला होना है।

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23 और 29 अप्रैल को वोटिंग, 4 मई को काउंटिंग

पश्चिम बंगाल के 294 सीटों पर 23 और 29 अप्रैल को दो फेज में वोटिंग होगी। 4 मई को रिजल्ट आएगा।

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4 राज्यों में SIR, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा नाम कटे

जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें SIR के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं। राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं।

वहीं पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। फिर केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) कराया गया था।

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प. बंगाल, 60 लाख वोटर जांच के घेरे में:मुर्शिदाबाद और मालदा में 19 लाख के डॉक्यूमेंट्स पेंडिंग; भाजपा ने कहा- घुसपैठियों पर कार्रवाई

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पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी थी। लिस्ट के मुताबिक, राज्य के करीब 60.06 लाख वोटर्स के दस्तावेज अभी भी जांच के घेरे में थे। इनमें सबसे बड़ी संख्या मुस्लिम बहुल और सीमावर्ती जिलों की है। आयोग ने राज्य की मतदाता सूची से कुल 63.66 लाख नाम हटा दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समावेशी विकास के लिए डिजिटल इंडिया और विकसित भारत पर जोर दिया


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-Oneindia Staff

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने डिजिटल इंडिया और विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के साथ राज्य के संरेखण पर जोर दिया, जिसमें समावेशी विकास और शासन पर ध्यान केंद्रित किया गया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एक क्षेत्रीय दिशा (DISHA) कार्यशाला में बोलते हुए, सैनी ने वास्तविक विकास के लिए सामाजिक जागरूकता और न्याय तक पहुंच के महत्व पर प्रकाश डाला।

 हरियाणा के मुख्यमंत्री ने डिजिटल इंडिया विजन पर प्रकाश डाला

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इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भाग लिया, जिसका आयोजन कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा किया गया था। इसमें कानून के छात्रों, कानूनी पेशेवरों और नागरिक समाज के सदस्यों को इकट्ठा किया गया। प्रमुख गतिविधियों में एक दिशा जागरूकता वैन का शुभारंभ, पूर्वोत्तर के प्रथागत कानूनों पर ई-पुस्तकों का विमोचन, और एक दूरदर्शन वृत्तचित्र शामिल थे।

सैनी ने 250 करोड़ रुपये से समर्थित दिशा योजना के महत्व को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य सभी के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना है। यह पहल प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित है और इसमें तीन कार्यक्रम शामिल हैं: टेली-लॉ (Tele-Law), न्याय बंधु (Nyaya Bandhu), और कानूनी साक्षरता और जागरूकता (Legal Literacy and Awareness)। इन प्रयासों का उद्देश्य न्याय वितरण की पहुंच और पारदर्शिता को बढ़ाना है।

टेली-लॉ कार्यक्रम दिशा (DISHA) के भीतर महत्वपूर्ण है, जो प्रौद्योगिकी के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में कानूनी सलाह पहुंचाता है। 777 जिलों में ग्राम पंचायत स्तर पर लगभग 2.5 लाख कॉमन सर्विस सेंटरों (Common Service Centres) का एक नेटवर्क संचालित होता है। नागरिक टेली-लॉ मोबाइल ऐप और टोल-फ्री नंबर 14454 के माध्यम से कानूनी सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

प्रो बोनो कानूनी सेवाओं को बढ़ावा देना

न्याय बंधु (Nyaya Bandhu) कार्यक्रम प्रो बोनो (pro bono) कानूनी सेवाओं को प्रोत्साहित करता है, जिसमें 28 फरवरी तक 10,263 वकील पंजीकृत हो चुके थे। सैनी ने आधुनिक प्रौद्योगिकी के समर्थन से ह हरियाणा द्वारा नए आपराधिक कानूनों को तेजी से लागू करने में नेतृत्व का उल्लेख किया।

कानून मंत्री मेघवाल ने दोहराया कि दिशा (DISHA) कार्यक्रम पीएम के सभी नागरिकों, जिनमें सबसे गरीब वर्ग भी शामिल हैं, के लिए न्याय तक पहुंच बढ़ाने के विज़न के अनुरूप है। इस कार्यशाला का उद्देश्य संवैधानिक गारंटी के अनुरूप इस पहुंच का विस्तार करना है।

With inputs from PTI



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वाल्मीकि समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू होने पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को गिरफ्तार किया गया।


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-Oneindia Staff

पिल्लुभित में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को वाल्मीकि समुदाय के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के बाद हिरासत में लिया गया है, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन और सड़क अवरुद्ध हुई। यह घटना स्टेशन हाउस ऑफिसर नरेश त्यागी द्वारा बताई गई, जब वसीम रज़ा, जो ऑनलाइन मिस्टर पिल्लुभित के नाम से जाने जाते हैं, ने पिल्लुभित टाइगर रिजर्व की यात्रा के दौरान एक विवादास्पद वीडियो पोस्ट किया।

 वाल्मीकि के खिलाफ टिप्पणी करने पर एक इन्फ्लुएंसर गिरफ्तार

Representative image

वीडियो में, रज़ा ने कथित तौर पर वाल्मीकि समुदाय को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया पर वीडियो के प्रसार ने तनाव पैदा कर दिया, जिससे सैकड़ों समुदाय के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया और गैस चौराहा पर यातायात बाधित किया। इसके जवाब में, सुंगरही पुलिस ने इन्फ्लुएंसर को गिरफ्तार कर लिया।

अधिकारियों ने रज़ा पर भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उन्हें हिरासत में भेज दिया गया है। समुदाय के सदस्यों ने रज़ा पर उनके खिलाफ बार-बार आपत्तिजनक टिप्पणियां करने और पहले भी हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने का आरोप लगाया है।

रविवार सुबह, निवासियों ने नखासा इलाके में एक वाल्मीकि मंदिर में इकट्ठा होकर गैस चौराहा पर सड़क अवरुद्ध कर दी। कई वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया, सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर और सर्किल ऑफिसर सिटी दीपक चतुर्वेदी शामिल थे, ने स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। स्थानीय निवासी हिमांशु नंदन की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। एहतियात के तौर पर, नखासा और अन्य संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और प्रादेशिक सशस्त्र कांस्टेबलरी कर्मियों को तैनात किया गया है।

पुलिस ने जनता से शांति बनाए रखने और अफवाहों से गुमराह होने से बचने का आग्रह किया है। अधिकारियों द्वारा घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी जारी रखने के कारण स्थिति नियंत्रण में है।

With inputs from PTI



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MP News: एक्शन मोड में सीएम मोहन यादव, सीधी कलेक्टर और गुना एसपी हटाए


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सीधी और संबंधित जिलों में प्रशासन की सीधे समीक्षा की, एक जिला सहकारी बैंक के प्रमुख और जिला कलेक्टर को निलंबित कर दिया, और गुना में पुलिस अधीक्षक को गैर-अनुपालन के लिए हटा दिया। इस कदम से विभागों में सख्त जवाबदेही और संभावित आगे के बदलावों का संकेत मिलता है।

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-Oneindia Staff

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav एक्शन मोड में नजर आए। रविवार (22 मार्च) को उन्होंने अचानक सीधी जिले का दौरा कर प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाया। दौरे के दौरान मिली शिकायतों के आधार पर मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से कई बड़े प्रशासनिक फैसले लिए, जिससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

Madhya Pradesh CM Mohan Yadav Takes Action

सीएम ने आम जनता और जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। कई मामलों में लापरवाही सामने आने पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि अधिकारियों की जवाबदेही तय है और किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सीधी जिले के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान मिली शिकायतों के आधार पर मुख्यमंत्री ने जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक पी.एस. धनवाल को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सीधी कलेक्टर स्वरोचित सोमवंशी को भी पद से हटाने का आदेश दिया गया।

गुना एसपी भी हटाए गए

इसके अलावा गुना जिले में तलाशी के दौरान मिली नकद राशि के हेरफेर के मामले में पुलिस अधीक्षक की भूमिका संतोषजनक नहीं पाए जाने पर मुख्यमंत्री ने एसपी अंकित सोनी को भी तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए।

प्रशासनिक समीक्षा और सख्त संदेश

मुख्यमंत्री ने जिला मुख्यालय पर विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक ली और कहा कि दौरे के दौरान उन्हें कई गंभीर शिकायतें मिली हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जो अधिकारी मैदान में काम नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें जिम्मेदारी से हटाना ही बेहतर विकल्प है।

सीएम ने संकेत दिए कि प्रशासनिक व्यवस्था में और भी बदलाव किए जा सकते हैं, जिनके परिणाम देर रात तक सामने आने की संभावना है। इस कार्रवाई को राज्य सरकार की सख्त प्रशासनिक नीति और जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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Viral News: जब एक महिला की लाश ने किया 13 घंटे का हवाई सफ़र, 331 यात्रियों की कांप गई रूह


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oi-Sumit Jha

Death on British Airways flight: ब्रिटिश एयरवेज की एक फ्लाइट में हुई यह घटना वाकई चौंकाने वाली और दुखद है। हांगकांग से लंदन जा रही इस उड़ान में एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद शव को 13 घंटे तक विमान में ही रखना पड़ा। नियमों के चलते विमान को बीच में नहीं रोका गया।

गैली (किचन एरिया) के गर्म फर्श पर शव रखने की वजह से यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। 331 यात्रियों के लिए यह सफर काफी तनावपूर्ण रहा। आइए जानते हैं इस पूरी घटना के मुख्य पहलुओं को आसान भाषा में।

Viral News british airways death

Viral News: अचानक हुई मौत और फैसला

हांगकांग से उड़ान भरने के मात्र एक घंटे बाद ही 60 साल की एक महिला ने दम तोड़ दिया। एयरबस A350 जैसे बड़े विमान में ऐसी स्थिति आने पर पायलट के पास दो रास्ते थे: या तो विमान वापस मोड़ते या सफर जारी रखते। चूंकि मौत को ‘मेडिकल इमरजेंसी’ नहीं माना जाता, इसलिए एयरलाइन ने तय किया कि विमान को सीधे लंदन ले जाना ही बेहतर होगा। इससे बाकी यात्रियों का समय तो बचा, लेकिन स्थिति काफी गंभीर हो गई।

शव को रखने की जगह

जब फ्लाइट में किसी की मौत होती है, तो सबसे बड़ी चुनौती शव को सम्मानपूर्वक रखने की होती है। क्रू ने पहले टॉयलेट का सोचा, लेकिन वह जगह सही नहीं लगी। आखिरकार, उन्होंने शव को कंबल में लपेटकर विमान के पिछले हिस्से यानी ‘गैली’ में रख दिया। गैली वह जगह है जहां क्रू खाना और ड्रिंक्स तैयार करता है। हालांकि, यह फैसला बाद में भारी पड़ा क्योंकि वहां का तापमान शव के लिए सही नहीं था।

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बदबू से परेशान हुए यात्री

इस लंबी उड़ान का सबसे मुश्किल हिस्सा तब शुरू हुआ जब शव से तेज बदबू आने लगी। दरअसल, गैली का फर्श काफी गर्म था, जिससे शव खराब होने लगा। जैसे-जैसे 13.5 घंटे का सफर खत्म होने की ओर बढ़ा, पीछे बैठे यात्रियों के लिए वहां बैठना दूभर हो गया। विमान में सवार 331 लोगों के लिए यह एक डरावना अनुभव बन गया, क्योंकि वे एक बंद जगह में उस असहज स्थिति से बाहर नहीं निकल सकते थे।

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क्या कहते हैं विमानन नियम

इंटरनेशनल नियमों के मुताबिक, फ्लाइट में मौत होने पर क्रू को शव को बॉडी बैग या कंबल से ढककर किसी खाली सीट या कम भीड़ वाली जगह पर रखना होता है। रिपोर्ट बताती है कि विमान में मौत होना बहुत ही दुर्लभ है-हजारों मेडिकल केसों में से मात्र 0.3% मामलों में ही ऐसा होता है। लंदन पहुंचने पर पुलिस ने जांच की और यात्रियों को उतरने से पहले 45 मिनट इंतजार करना पड़ा। एयरलाइन ने इसे नियमों के तहत की गई कार्रवाई बताया है।



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