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Bihar News; धार्मिक आयोजनों में बेहतर व्यवस्था के लिए 1.63 करोड़ रुपये की स्वीकृति


बिहार सरकार ने प्रमुख धार्मिक और सामाजिक आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ 63 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इस फंड में जिलों में सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है, जिसमें धन के उपयोग और पारदर्शिता पर कड़े नियम हैं।

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-Oneindia Staff

बिहार सरकार ने धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के सुचारु संचालन, बेहतर व्यवस्था और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 1 करोड़ 63 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार आस्था और परंपरा से जुड़े आयोजनों को सुरक्षित, व्यवस्थित और जनहितकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Bihar funds religious events with INR 1 crore 63 lakh

सरकार द्वारा विभिन्न जिलों में आयोजित मेलों और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए राशि स्वीकृत की गई है—

* पटना (रामनवमी शोभा यात्रा): 50 लाख रुपये
* दरभंगा (रामनवमी मेला): 5 लाख रुपये
* औरंगाबाद (देव चैती छठ मेला): 30 लाख रुपये
* पटना, उलार धाम (चैती छठ मेला): 6 लाख रुपये
* मुंगेर (सीताकुंड मेला): 21 लाख रुपये
* मुजफ्फरपुर (श्रावणी मेला): 5 लाख रुपये
* बांका (श्रावणी मेला): 31 लाख रुपये
* अररिया (महाशिवरात्रि मेला, सुन्दरनाथ धाम): 15 लाख रुपये

सुरक्षा और सुविधाओं पर रहेगा फोकस

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इन आयोजनों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वीकृत राशि का उपयोग केवल निर्धारित मदों में ही किया जाए और पूरी पारदर्शिता बरती जाए।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय पर राशि का उपयोग सुनिश्चित करें और उपयोगिता प्रमाण-पत्र विभाग को उपलब्ध कराएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो और आयोजन में कोई बाधा न आए। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि हर धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यादगार बने। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।

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Iran Vs America War: ‘अमेरिका के बिना NATO कागजी शेर’, यूरोपीए देशों पर भड़के ट्रंप, कहा – याद रखेंगे


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oi-Sumit Jha

Iran Vs America War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नाटो (NATO) देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य सहयोग न मिलने पर यूरोपीय देशों को ‘कायर’ करार दिया है। उनका मानना है कि अमेरिका की शक्ति के बिना नाटो की कोई हैसियत नहीं है। ट्रंप विशेष रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) के रास्ते को खुलवाने में सहयोग न मिलने से नाराज हैं, जिसे वे तेल की बढ़ती कीमतों का मुख्य कारण मानते हैं।

दूसरी ओर, यूरोपीय देशों और जापान ने मिलकर एक बयान जारी किया है, लेकिन वे सीधे युद्ध में कूदने के बजाय कूटनीतिक और उचित प्रयासों पर जोर दे रहे हैं।

Iran Vs America War

Trump NATO Paper Tiger: ट्रंप का ‘कागजी शेर’ वाला वार

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने सहयोगियों की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका के बिना नाटो सिर्फ एक ‘कागजी शेर’ है, जिसमें दहाड़ने की शक्ति तो है पर लड़ने की हिम्मत नहीं। ट्रंप इस बात से खफा हैं कि जब ईरान को सैन्य रूप से रोकने की बात आई, तो इन देशों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका अपने सहयोगियों के इस स्वार्थी रवैये और “कायरता” को आने वाले समय में याद रखेगा।

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होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जो फिलहाल युद्ध के कारण बंद पड़ा है। ट्रंप का दावा है कि इस रास्ते को खोलना एक “आसान फौजी कार्रवाई” है, लेकिन यूरोपीय देश जोखिम लेने से डर रहे हैं। इस रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रंप का तर्क है कि ये देश तेल की महंगाई का रोना तो रोते हैं, लेकिन संकट सुलझाने के लिए सेना भेजने को तैयार नहीं हैं।

Iran Conflict 2026: यूरोपीय देशों और जापान का स्टैंड

ट्रंप की तीखी आलोचना के बीच ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान जैसे देशों ने एक साझा बयान जारी किया है। इन देशों ने ईरान की शत्रुतापूर्ण गतिविधियों, जैसे समुद्री सुरंगें बिछाना और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। हालांकि, वे अमेरिका की तरह सीधे युद्ध की भाषा नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत “उचित प्रयासों” में शामिल होने की बात कही है, जो ट्रंप की उम्मीदों से काफी कम है।

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Strait of Hormuz Crisis Hindi: 21 दिनों से ठप है तेल की सप्लाई

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष अब तीसरे हफ्ते (21वें दिन) में प्रवेश कर चुका है। इस तनाव की वजह से होर्मुज का समुद्री रास्ता पूरी तरह से बंद है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन टूट गई है। ईरान लगातार मिसाइलों और बारूदी सुरंगों के जरिए जहाजों को डरा रहा है। इस स्थिति ने न केवल आर्थिक संकट पैदा किया है, बल्कि पश्चिमी देशों और अमेरिका के पुराने रिश्तों में भी बड़ी दरार डाल दी है।

क्या नाटो में पड़ गई है फूट?

इस पूरे घटनाक्रम ने नाटो गठबंधन की एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप की “हम यह बात याद रखेंगे” वाली धमकी संकेत देती है कि भविष्य में अमेरिका अपने रक्षा समझौतों पर पुनर्विचार कर सकता है। जहां ट्रंप सैन्य ताकत के इस्तेमाल को इकलौता समाधान मानते हैं, वहीं ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर और अन्य यूरोपीय नेता संयम बरतने की वकालत कर रहे हैं। यह वैचारिक मतभेद आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है।



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Anthony Albanese: ‘यहां से बाहर निकलो’, मस्जिद पहुंचे ऑस्ट्रेलियाई पीएम, फिर जो हुआ उसे देख दंग रह गई दुनिया


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oi-Sumit Jha

Anthony Albanese Sydney Mosque Protest: सिडनी की लेकम्बा मस्जिद में ईद के जश्न के दौरान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। जैसे ही पीएम और गृह मंत्री टोनी बर्क मस्जिद पहुंचे, वहां मौजूद भीड़ ने ‘बाहर निकलो’ के नारे लगाते हुए उनकी हूटिंग शुरू कर दी। लोग गाजा युद्ध पर सरकार के रुख और एक इस्लामी संगठन पर लगे बैन से नाराज थे।

आयोजकों की शांति की अपील के बावजूद गुस्सा कम नहीं हुआ और स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पीएम को महज 15 मिनट में वहां से जाना पड़ा। जाते समय भी भीड़ ने ‘शर्म करो’ के नारों के साथ उनका पीछा किया।

Anthony Albanese Sydney Mosque Protest


Lakemba Mosque Eid Incident: मस्जिद में भारी हंगामा और हूटिंग

लेकम्बा मस्जिद में ईद की नमाज के लिए हजारों लोग जुटे थे। जैसे ही पीएम अल्बानीज़ अंदर दाखिल हुए, वहां खुशी के माहौल की जगह तनाव फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने चिल्लाकर उन्हें वहां से जाने को कहा। भीड़ का गुस्सा इतना ज्यादा था कि सुरक्षा घेरे के बावजूद लोग पीएम के बेहद करीब तक पहुंच गए।

ऑस्ट्रेलियाई PM को मस्जिद से बाहर निकाला गया

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज को सिडनी की लाकेम्बा मस्जिद में ईद-उल-फित्र की नमाज़ और समारोह के दौरान भारी विरोध झेलना पड़ा।

मुख्य वजह गाज़ा युद्ध और इज़राइल के समर्थन पर ऑस्ट्रेलियाई सरकार के रुख से नाराज़गी थी।… pic.twitter.com/QCF21g8Am1

— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) March 20, 2026 “>

Australia PM Hooting Gaza: गाजा युद्ध को लेकर नाराजगी

विरोध की सबसे बड़ी वजह गाजा में चल रही जंग है। वहां मौजूद लोग इस बात से खफा थे कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार इजराइल का समर्थन कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने पीएम को ‘नरसंहार का समर्थक’ तक कह डाला। उन्हें लगा कि सरकार गाजा के पीड़ितों की तुलना में इजराइल का पक्ष ज्यादा ले रही है।

ये भी पढ़ें: Israel-Gaza War: क्या होता है वैक्यूम बम? जिससे भाप बनकर गायब हुए 2800 लोग, ‘इजारयल ने गाजा पर दागा’

Australian PM mosque exit: इस्लामी संगठन पर बैन का असर

हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ‘हिज्ब-उत-तहरीर’ नाम के संगठन पर प्रतिबंध लगाया है। समुदाय के एक हिस्से में इस फैसले को लेकर काफी गुस्सा है। मस्जिद में हुए इस हंगामे के पीछे इस बैन से उपजी नाराजगी को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

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पीएम की रवानगी और सुरक्षा का संघर्ष

हंगामा बढ़ता देख पीएम को अपनी यात्रा बीच में ही छोड़नी पड़ी। जब वे मस्जिद से बाहर निकलने लगे, तो भीड़ ने काफी दूर तक उनका पीछा किया। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई और एक सुरक्षा गार्ड को प्रदर्शनकारी को काबू करने के लिए जमीन पर पटकना पड़ा। हालांकि, पीएम ने बाद में कहा कि कुछ लोगों के शोर को पूरे समुदाय की राय नहीं समझना चाहिए।





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चुनाव के विज्ञापनों के लिए पार्टियों को सर्टिफिकेट लेना होगा: चुनाव आयोग का निर्देश- बिना इजाजत इलेक्ट्रोनिक या सोशल मीडिया पर एड जारी नहीं होंगे


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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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चुनाव आयोग (ECI) ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर किसी भी पॉलिटिकल एड से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) से परमिशन लेना जरूरी होगा।

यह निर्देश पांच राज्यों असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों और छह राज्यों के उपचुनावों के लिए लागू होगा।

आयोग के मुताबिक बिना प्रमाणन के कोई भी राजनीतिक विज्ञापन टीवी, रेडियो, सार्वजनिक स्थानों पर ऑडियो-वीडियो डिस्प्ले, ई-पेपर, बल्क SMS/वॉयस मैसेज, इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी नहीं किया जा सकेगा।

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पेड न्यूज और सोशल मीडिया पर निगरानी

चुनाव आयोग ने MCMC को पेड न्यूज के मामलों पर कड़ी निगरानी रखने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उम्मीदवारों को अपने नामांकन पत्र में अपने सभी आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी देना भी अनिवार्य होगा।

खर्च का पूरा हिसाब देना होगा

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत, राजनीतिक दलों को चुनाव खत्म होने के 75 दिनों के भीतर पूरा खर्च विवरण देना होगा। इसमें इंटरनेट और सोशल मीडिया पर विज्ञापन, कंटेंट तैयार करने और अकाउंट संचालन से जुड़े सभी खर्च शामिल होंगे।

फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी और दुष्प्रचार पर नियंत्रण के लिए 19 मार्च को आयोग ने सभी चुनावी राज्यों के अधिकारियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की।

फोटो AI जनरेटेड।

फोटो AI जनरेटेड।

5 राज्यों में अप्रैल में चुनाव

अप्रैल में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। बंगाल में दो फेज 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में सिंगल फेज में चुनाव होंगे।

तमिलनाडु में 23 अप्रैल, केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा। पांचों राज्यों का रिजल्ट 4 मई को आएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 15 मार्च को इसका ऐलान किया था।

पांच राज्यों-केंद्र शासित प्रदेश में 17.4 करोड़ मतदाता हैं। यहां 824 सीटों पर चुनाव होने हैं। 2021 में इन सभी पांच राज्यों के चुनाव का ऐलान 26 फरवरी को किया गया था। पिछली बार बंगाल में 8 चरणों में चुनाव हुए थे।

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ममता का ऐलान- SC-ST महिलाओं को हर महीने ₹1700 देंगे, बाकी को ₹1500 मिलेंगे, TMC घोषणापत्र में पक्के घर

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया। ममता ने लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं को हर महीने मिलने वाली सहायता राशि 500-500 रुपए बढ़ाने का वादा किया है। पूरी खबर पढ़ें…



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राजनीतिक विज्ञापनों पर चुनाव आयोग सख्त: सोशल-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर एड से पहले सर्टिफिकेट लेना होगा; पेड-फेक न्यूज की भी निगरानी होगी


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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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चुनाव आयोग (ECI) ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर किसी भी पॉलिटिकल एड से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) से परमिशन लेना जरूरी होगा।

यह निर्देश पांच राज्यों असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों और छह राज्यों के उपचुनावों के लिए लागू होगा।

आयोग के मुताबिक बिना प्रमाणन के कोई भी राजनीतिक विज्ञापन टीवी, रेडियो, सार्वजनिक स्थानों पर ऑडियो-वीडियो डिस्प्ले, ई-पेपर, बल्क SMS/वॉयस मैसेज, इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी नहीं किया जा सकेगा।

कैसे मिलेगा सर्टिफिकेशन

राज्य या केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर पंजीकृत राजनीतिक दलों को राज्य स्तरीय MCMC से अनुमति लेनी होगी, जबकि उम्मीदवारों को जिला स्तरीय MCMC में आवेदन करना होगा। साथ ही, राज्य स्तर पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की अध्यक्षता में अपील समिति भी बनाई गई है, जहां फैसलों के खिलाफ अपील की जा सकेगी।

पेड न्यूज और सोशल मीडिया पर निगरानी

चुनाव आयोग ने MCMC को पेड न्यूज के मामलों पर कड़ी निगरानी रखने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उम्मीदवारों को अपने नामांकन पत्र में अपने सभी आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी देना भी अनिवार्य होगा।

खर्च का पूरा हिसाब देना होगा

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत, राजनीतिक दलों को चुनाव खत्म होने के 75 दिनों के भीतर पूरा खर्च विवरण देना होगा। इसमें इंटरनेट और सोशल मीडिया पर विज्ञापन, कंटेंट तैयार करने और अकाउंट संचालन से जुड़े सभी खर्च शामिल होंगे।

फेक न्यूज पर रोक के लिए बैठक

फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी और दुष्प्रचार पर नियंत्रण के लिए 19 मार्च को आयोग ने सभी चुनावी राज्यों के अधिकारियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की।



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कौन थे कैप्टन राकेश रंजन? होर्मुज में 18 दिनों से फंसा था शिप ‘अवाना’, रांची में अब परिवार की हो रही ऐसी हालत


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oi-Pallavi Kumari

Captain Rakesh Ranjan: रांची के अरगोड़ा इलाके में रहने वाले कैप्टन राकेश रंजन सिंह एक अनुभवी मर्चेंट नेवी अधिकारी थे, जिन्होंने करीब 24 साल तक समुद्र में सेवाएं दीं। 47 साल के राकेश मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ के रहने वाले थे, लेकिन पिछले 18 साल से उनका परिवार रांची में ही बस गया था। अपने काम के प्रति समर्पित राकेश रंजन कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के साथ काम कर चुके थे और अंतिम समय में ‘अवाना’ नाम के ऑयल टैंकर जहाज पर कैप्टन के तौर पर तैनात थे।

रांची के अरगोड़ा इलाके में रहने वाले कैप्टन राकेश रंजन सिंह एक अनुभवी मर्चेंट नेवी अधिकारी थे, जिन्होंने करीब 24 साल तक समुद्र में सेवाएं दीं। 47 साल के राकेश मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ के रहने वाले थे, लेकिन पिछले 18 साल से उनका परिवार रांची में ही बस गया था। अपने काम के प्रति समर्पित राकेश रंजन कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के साथ काम कर चुके थे और अंतिम समय में ‘अवाना’ नाम के ऑयल टैंकर जहाज पर कैप्टन के तौर पर तैनात थे।

Captain Rakesh Ranjan

आखिरी कॉल और अचानक मौत

परिवार के मुताबिक 18 मार्च को कैप्टन राकेश रंजन ने आखिरी बार फोन किया था। उसी दिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह कुर्सी से गिरकर बेहोश हो गए। जहाज पर मौजूद स्टाफ ने तुरंत मदद की कोशिश की, लेकिन वहां कोई उन्नत मेडिकल सुविधा नहीं थी। स्थिति गंभीर होते देख दुबई एटीसी से एयर एंबुलेंस की मांग की गई, लेकिन युद्ध की वजह से अनुमति नहीं मिल सकी।

इलाज में देरी बनी मौत की वजह

एयरलिफ्ट की अनुमति न मिलने के बाद उन्हें बोट के जरिए दुबई के तट तक ले जाया गया, लेकिन इसमें काफी समय लग गया। जब तक उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई, लेकिन असल वजह समय पर इलाज न मिल पाना माना जा रहा है।

परिवार में मचा कोहराम

रांची के वसुंधरा अपार्टमेंट में उनके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी और दो बच्चे सदमे में हैं। बड़े भाई उमेश कुमार ने बताया कि राकेश उनके बेटे जैसे थे। परिवार की सबसे बड़ी चिंता अब उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने की है, ताकि अंतिम दर्शन हो सके। पत्नी चाहती हैं कि आखिरी बार उन्हें देख सकें, जबकि बच्चे अपने पिता के इंतजार में हैं।

दुबई में रखा है शव, भारत लाने की कोशिश

फिलहाल कैप्टन राकेश रंजन का शव दुबई के शेख राशिद अस्पताल के मॉर्चरी में रखा गया है। परिजन लगातार सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक शव को भारत लाने की प्रक्रिया जारी है। पटना एयरपोर्ट पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार बिहारशरीफ में किया जाएगा।

युद्ध का आम लोगों पर असर

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर सिर्फ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी भारी पड़ा है। कैप्टन राकेश रंजन की मौत इसका दर्दनाक उदाहरण है, जहां एक अनुभवी अधिकारी सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा बैठे क्योंकि युद्ध के हालात में समय पर इलाज नहीं मिल सका। यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए गहरा सदमा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष कैसे दूर बैठे लोगों की जिंदगी को भी झकझोर देते हैं।



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Mumbai Water Metro: समंदर के सीने पर दौड़ेगी मेट्रो, 36 रूट्स वाले मेगा प्रोजेक्ट से घंटो की दूरी मिनटों में


Maharashtra

oi-Smita Mugdha

Mumbai Water Metro: महानगर में ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ की समस्या को कम करने के लिए Maharashtra सरकार ने एक महत्वाकांक्षी वॉटर मेट्रो परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत मुंबई में 36 रूट्स का विशाल जल परिवहन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जो शहर और आसपास के क्षेत्रों को तेज, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल सफर का विकल्प देगा।

यह परियोजना कोच्चि वॉटर मेट्रो मॉडल पर आधारित है, जहां पहले से ही आधुनिक जल परिवहन प्रणाली सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। मुंबई में भी इसी तर्ज पर बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड फेरियों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी।

Mumbai Water Metro

Mumbai Water Metro: परियोजना की खास बातें

– इस वॉटर मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई लगभग 340 किलोमीटर होगी। इसमें 11 नए जलमार्ग (करीब 215 किमी) विकसित किए जाएंगे और 24 नए टर्मिनल बनाए जाएंगे।

– इसके अलावा, 21 मौजूदा रूट्स (125 किमी) और 20 टर्मिनलों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। महत्वपूर्ण रूट्स में नरिमन पॉइंट-वर्ली-बांद्रा-जुहू-वर्सोवा कॉरिडोर शामिल है। इसके अलावा वर्सोवा-मड, मार्वे-मनोरी और गोराई-बोरीवली जैसे कनेक्शन भी विकसित किए जाएंगे।

– सबसे खास बात यह है कि दक्षिण मुंबई के रेडियो क्लब जेटी से नए नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक का सफर सिर्फ 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इसके अलावा ठाणे, कल्याण, वसई, बेलापुर और एलिफेंटा जैसे इलाकों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

Water Metro: बजट और टाइमलाइन

इस परियोजना के लिए महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (Maharashtra Maritime Board) करीब ₹3,436 करोड़ का निवेश करेगा, जबकि निजी ऑपरेटर 207 फेरियों के संचालन के लिए लगभग ₹3,156 करोड़ खर्च करेंगे। परियोजना का पहला चरण दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है। किराया एसी लोकल ट्रेन या मेट्रो के बराबर रखने की योजना है, ताकि आम लोग आसानी से इसका लाभ उठा सकें।

Mumbai Water Metro Update: ट्रैफिक से राहत और ग्रीन मोबिलिटी

यह वॉटर मेट्रो परियोजना मुंबई की सड़कों और लोकल ट्रेनों पर बढ़ते दबाव को कम करेगी। वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे जैसे जाम वाले मार्गों के लिए यह एक प्रभावी विकल्प बन सकती है। साथ ही, इलेक्ट्रिक फेरियों के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे शहर में वायु प्रदूषण भी घटेगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक यह सेवा सालाना 7.5 करोड़ यात्रियों को सुविधा प्रदान करे, जिससे मुंबई में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का नया अध्याय शुरू होगा।



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Iran America War: ईरान के इन कमांडरों की खबर देने वाले को मिलेगा 92 करोड़ रुपये, अमेरिका का ऐलान


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oi-Sumit Jha

Iran America War Update: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहां गोलियों से ज्यादा इनामों की चर्चा हो रही है। अमेरिका के ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम ने ईरान की सबसे ताकतवर सेना IRGC के 5 बड़े कमांडरों पर 10 मिलियन डॉलर (करीब 84 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम इनाम रखा है।

अमेरिका ने बाकायदा एक पोस्टर जारी कर इन नेताओं को ‘वैश्विक शांति के लिए खतरा’ बताया है। इस कार्रवाई का मकसद ईरान के सैन्य ढांचे की गुप्त जानकारी हासिल करना और उनके खतरनाक मंसूबों को नाकाम करना है।

Iran America War Update

पोस्टर में कौन से 5 बड़े नाम हैं?

अमेरिका ने जिन 5 कमांडरों के पोस्टर जारी किए हैं, वे ईरान की सैन्य शक्ति की रीढ़ माने जाते हैं। इनमें अहमद वाहिदी (कमांडर-इन-चीफ) और अली अब्दोल्लाही (KCHQ चीफ) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा, ड्रोन हमलों के मास्टरमाइंड सईद अघजानी, साइबर हमलों के एक्सपर्ट हामिदरेजा लश्गरियन और खुफिया विभाग के चीफ माजिद खादेमी को भी निशाना बनाया गया है। अमेरिका का मानना है कि ये लोग ही दुनिया भर में आतंकी साजिशों का ब्लूप्रिंट तैयार करते हैं।

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10 मिलियन डॉलर का इनाम और सुरक्षा

अमेरिका ने केवल इनाम की घोषणा ही नहीं की है, बल्कि जानकारी देने वालों के लिए बड़े वादे भी किए हैं। पोस्टर में साफ लिखा है कि जो व्यक्ति इन कमांडरों या उनकी गतिविधियों के बारे में ठोस सबूत देगा, उसे 10 मिलियन डॉलर तक की राशि दी जाएगी। साथ ही, मुखबिर की जान को खतरा न हो, इसके लिए उसे किसी सुरक्षित देश में बसाने (रिलोकेशन) और उसकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखने की गारंटी भी दी गई है।

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US reward for information on Iran: ड्रोन और साइबर एक्सपर्ट्स पर पैनी नजर

इस लिस्ट में ड्रोन कमांडर सईद अघजानी और साइबर चीफ हामिदरेजा लश्गरियन का नाम होना काफी अहम है। पिछले कुछ समय में ईरान ने ड्रोन तकनीक और साइबर हमलों के जरिए पश्चिमी देशों को काफी परेशान किया है। अमेरिका चाहता है कि इन कमांडरों की लोकेशन और इनके ऑपरेशन के तरीकों का पता चले ताकि भविष्य में होने वाले हवाई या डिजिटल हमलों को पहले ही रोका जा सके। यह कदम ईरान की ‘टेक-वॉल्फेयर’ क्षमता को तोड़ने की एक बड़ी कोशिश है।

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जानकारी साझा करने के लिए अमेरिका ने हाई-टेक और सुरक्षित तरीके अपनाए हैं। पोस्टर में व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे मैसेजिंग ऐप्स के नंबरों के साथ-साथ एक विशेष ‘टॉर लिंक’ (Tor Link) भी दिया गया है। टॉर लिंक का इस्तेमाल इसलिए किया गया है ताकि जानकारी देने वाले की डिजिटल लोकेशन को ट्रेस न किया जा सके। अमेरिका का यह डिजिटल जाल सीधे तौर पर ईरान के उन लोगों को निशाना बना रहा है जो अंदरूनी जानकारी रखते हैं।



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Punjab में औद्योगिक क्रांति का आगाज, लुधियाना में टाटा स्टील के ₹3200 करोड़ के ‘ग्रीन’ प्लांट का उद्घाटन!


Punjab

oi-Kumari Sunidhi Raj

CM Bhagwant Mann Inaugurates India’s 1st Green Steel Plant: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब ने औद्योगिक पुनर्जीवन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। लुधियाना में टाटा स्टील के भारत के दूसरे सबसे बड़े और देश के पहले इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस-आधारित ‘ग्रीन’ स्टील प्लांट का भव्य उद्घाटन किया गया। 3200 करोड़ रुपये के निवेश से 115 एकड़ में फैला यह अत्याधुनिक प्रोजेक्ट न केवल पर्यावरण अनुकूल तकनीक का प्रमाण है, बल्कि पंजाब की बदलती आर्थिक तस्वीर का प्रतीक भी है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछली सरकारों की गलत नीतियों के कारण जो उद्योग राज्य छोड़ गए थे, वे अब उद्योग-समर्थक शासन के तहत वापस लौट रहे हैं। यह प्लांट सीधे तौर पर 2700 और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10,000 परिवारों के भविष्य को रोशन करेगा, जो राज्य में रोजगार सृजन का एक नया अध्याय है।

CM Bhagwant Mann

ग्रीन ऊर्जा और आधुनिक तकनीक से रचा इतिहास

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह पंजाब के लिए एक गौरवशाली दिन है। उन्होंने बताया कि पंजाब अब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस तकनीक के माध्यम से 100% स्टील स्क्रैप का उपयोग कर ‘ग्रीन स्टील’ का उत्पादन शुरू हुआ है।

यह तकनीक न केवल उत्पादन दक्षता बढ़ाएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी वैश्विक मानकों को पूरा करेगी। टाटा स्टील जैसी वैश्विक कंपनी का निवेश यह दर्शाता है कि दुनिया का पंजाब की औद्योगिक क्षमता और शासन पर भरोसा बढ़ा है।

रोजगार और युवाओं के लिए स्वर्णिम अवसर

इस मेगा प्रोजेक्ट के माध्यम से पंजाब के इंजीनियरों और कुशल श्रमिकों के लिए अवसरों के द्वार खुल गए हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा:

  • प्रत्यक्ष रोजगार: 2600-2700 परिवारों को सीधा लाभ।
  • अप्रत्यक्ष रोजगार: 8000-10,000 लोगों को काम के अवसर।
  • निवेश वृद्धि: शुरुआती 2600 करोड़ रुपये का निवेश बढ़कर अब 3200 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।

रतन टाटा को दी श्रद्धांजलि, “देश के बेटे” का योगदान

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के योगदान को याद किया। उन्होंने रतन टाटा को “देश का बेटा” बताते हुए कहा कि टाटा समूह केवल व्यापार नहीं करता, बल्कि अपनी साख और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए जाना जाता है। उन्होंने बॉम्बे हाउस में डॉग शेल्टर बनाने के रतन टाटा के उदाहरण का जिक्र करते हुए उनके मानवीय दृष्टिकोण की सराहना की।

निवेश का नया हब बनता पंजाब

अपनी जापान यात्रा का संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। राज्य का मजबूत हवाई, रेल और सड़क नेटवर्क इसे निवेश के लिए आदर्श बनाता है। पिछले चार वर्षों में पंजाब में 1.58 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है, जिससे करीब 5 लाख युवाओं को रोजगार मिला है। मुख्यमंत्री ने टाटा समूह से यूरोप और पश्चिमी देशों के लिए पंजाब से सीधी उड़ानें शुरू करने पर भी चर्चा की है।

औद्योगिक और सांस्कृतिक विरासत का संगम

पंजाब की धरती को गुरुओं और शहीदों की भूमि बताते हुए मान ने कहा कि यहाँ नफरत के अलावा हर बीज पनपता है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंजाब अब न केवल “अन्नदाता” के रूप में, बल्कि एक प्रमुख “औद्योगिक केंद्र” के रूप में भी देश का नेतृत्व करेगा। इस अवसर पर उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा, कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां और मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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Bengaluru Power Cut Update: वीकेंड पर बेंगलुरु के इन इलाकों में होगा पावर कट, पहले से ही कर लें सारी तैयारी


India

oi-Smita Mugdha

Bengaluru Power Cut Update: आईटी सिटी के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। बेंगलुरु बिजली बोर्ड (BESCOM) के ताजा अपडेट के मुताबिक, 21 मार्च 2026 को बेंगलुरु में किसी बड़े आधिकारिक पावर कट की योजना नहीं है। शनिवार को शहर में बिजली आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, बिजली विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर मेंटेनेंस और मरम्मत कार्यों के चलते थोड़े समय के लिए बिजली बाधित हो सकती है।

ऐसी कटौती आमतौर पर कुछ मिनटों तक ही सीमित रहती हैं और जल्द बहाल कर दी जाती हैं, जिससे जनजीवन पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। रविवार, 22 मार्च को लंबे समय के लिए कटौती का अलर्ट है। हालांकि, शहर के मौसम विभाग के मुताबिक अचानक बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका है। इसे देखते हुए कटौती हो सकती है।

Bengaluru Power Cut Update

Bengaluru Power Cut Update: 22 मार्च को पावर कट का अलर्ट

– 21 मार्च को स्थिति सामान्य बनी हुई है, वहीं 22 मार्च से शहर के कुछ हिस्सों में बिजली कटौती शुरू हो सकती है। यह कटौती इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की वजह से होगी।

– इसमें RBI लेआउट, खोडेज़ और सेंट जॉन्स सबस्टेशन से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में अपग्रेड और तकनीकी कार्यों के चलते कुछ समय के लिए बिजली सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

– लोगों से संभावित कटौती को देखते हुए पहले से ही पर्याप्त इंतजाम (इन्वर्टर, बैटरी बैकअप) करने की अपील की गई है।

Bengaluru Power Cut: मौसम का भी पड़ सकता है असर

मौसम विभाग (IMD) ने शनिवार को बेंगलुरु में गरज के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई है। मौसम में बदलाव के कारण कभी-कभी बिजली ग्रिड में तकनीकी खराबी आ सकती है, जिससे अचानक पावर कट की स्थिति बन सकती है। बारिश और तेज हवाओं के दौरान ट्रांसमिशन लाइनों और उपकरणों पर दबाव बढ़ता है, जिससे सप्लाई प्रभावित हो सकती है। बिजली विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे संभावित कटौती को ध्यान में रखते हुए जरूरी तैयारी रखें।

खासकर जिन क्षेत्रों में 22 मार्च से मेंटेनेंस कार्य होने हैं, वहां के लोगों को पहले से योजना बनानी चाहिए। 21 मार्च को बेंगलुरु में बिजली आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद है, लेकिन आने वाले दिनों में मेंटेनेंस और मौसम की वजह से कुछ इलाकों में बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।



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