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DMK Alliance Break: चुनाव से पहले ही टूट गया गठबंधन, TVK के अलग होने से कितनी बढ़ेगी स्टालिन की मुश्किलें?


India

oi-Smita Mugdha

DMK Alliance Break: तमिलनाडु की राजनीति में चुनाव से पहले एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) को उस समय झटका लगा जब उसकी सहयोगी पार्टी टीवीके (TVK) ने गठबंधन से अलग होने का फैसला कर लिया। पार्टी के नेता टी. वेलमुरुगन (T. Velmurugan) ने सीट बंटवारे को लेकर असहमति जताते हुए यह कदम उठाया। त्रिकोणीय मुकाबले में टीवीके के अलग होने का असर गठबंधन के समीकरणों पर पड़ सकता है। बता दें कि विजय की पार्टी का नाम भी टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) है।

जानकारी के मुताबिक, वेलमुरुगन ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए दो सीटों की मांग की थी, लेकिन डीएमके ने उन्हें केवल एक सीट देने का प्रस्ताव रखा। इसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनने के कारण उन्होंने गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया। खास बात यह है कि वेलमुरुगन वर्तमान में विधायक हैं और उत्तर तमिलनाडु में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है।

DMK Alliance Break

DMK Alliance Break: वन्नियार वोट बैंक पर असर

वेलमुरुगन का संबंध वन्नियार (OBC) समुदाय से है, जो उत्तर तमिलनाडु में प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे में उनके गठबंधन से बाहर होने से DMK को इस क्षेत्र में वोटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सीधे तौर पर डीएमकी की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

Tamil Nadu Election: गठबंधन की मजबूती पर सवाल

टीवीके को अब तक इंडिया अलायंस की उन छोटी लेकिन प्रभावशाली पार्टियों में से थी, जो स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखती हैं। ऐसे में इस पार्टी के बाहर होने से गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि टीवीके के गठबंधन से बाहर होने पर दूसरे सहयोगियों के बीच भी असंतोष की आशंका बढ़ सकती है।

तमिलनाडु के चुनावी गणित पर क्या होगा असर?

तमिलनाडु की राजनीति में सीट बंटवारा और सामाजिक समीकरण बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। वन्नियार समुदाय के वोट कई सीटों पर निर्णायक साबित होते हैं। यदि वेलमुरुगन अलग होकर चुनाव लड़ते हैं, तो यह वोट बैंक बंट सकता है, जिससे DMK को सीधा नुकसान हो सकता है और विपक्ष को फायदा मिल सकता है। अब चुनाव नतीजों के बात ही इसका पता चल सकेगा डीएमके और स्टालिन इस नुकसान की भरपाई कैसे करते हैं। फिलहाल यरह देखना है कि चुनाव से पहले क्या पार्टी नए सहयोगियों को साथ जोड़ेगी या अपनी रणनीति में बदलाव करेगी।



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सुप्रीम कोर्ट बोला- पत्नी नौकरानी नहीं, लाइफ पार्टनर: तलाक के मामले में कहा- खाना न बनाना क्रूरता नहीं, घरेलू काम पति की भी जिम्मेदारी


नई दिल्ली35 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तलाक से जुड़े एक मामले में कहा, ‘पत्नी का खाना न बनाना या घरेलू कामकाज ठीक से न करना क्रूरता नहीं माना जा सकता। आप नौकरानी से शादी नहीं कर रहे, बल्कि जीवनसाथी से कर रहे हैं।’

जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने कहा- अब समय बदल चुका है और पति को भी घर के कामों में बराबर की जिम्मेदारी निभानी होगी। आज के समय में पति को भी खाना बनाना और घर के काम करना चाहिए।’

बेंच ने इस केस में अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। मामले की अगली तारीख पर पति-पत्नी को सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का कहा है।

AI इमेज।

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दोनों की शादी 9 साल पहले हुई थी, 8 साल बेटा भी है

दोनों की शादी साल 2017 में हुई थी और उनका एक 8 साल का बेटा है। पति सरकारी स्कूल में शिक्षक है, जबकि पत्नी लेक्चरर है। दलीलों के मुताबिक, पत्नी आर्थिक रूप से पति से बेहतर स्थिति में है और उसने अब तक किसी तरह का भरण-पोषण या गुजारा भत्ता नहीं मांगा है।

पति का आरोप है कि शादी के एक हफ्ते बाद ही पत्नी का व्यवहार बदल गया। वह उसके साथ गलत तरीके से पेश आने लगी और उसके तथा उसके माता-पिता के खिलाफ गंदी भाषा का इस्तेमाल करती थी। उसने घर का खाना बनाने से भी मना कर दिया। पति ने यह भी कहा कि बच्चे के जन्म के बाद हुए नामकरण संस्कार में उसे नहीं बुलाया गया।

वहीं, पत्नी का कहना है कि वह बच्चे के जन्म के लिए पति और उसके परिवार की सहमति से अपने मायके गई थी। लेकिन पति और उसके परिवार के लोग ही नामकरण संस्कार में शामिल नहीं हुए। पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि उसके माता-पिता से नकद और सोने की मांग की गई और उस पर अपनी सैलरी छोड़ने का दबाव बनाया गया।

केस हारने के बाद पति ने लगाई थी सुप्रीम कोर्ट में याचिका

फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका मानते हुए क्रूरता के आधार पर तलाक दे दिया था। इसके बाद पत्नी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया और तलाक को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले से नाराज होकर पति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

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तलाक के मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ वॉट्सएप चैट से तलाक नहीं: पत्नी पर क्रूरता के आरोप साबित करने होंगे; फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि बिना सबूत सिर्फ वॉट्सएप चैट के आधार पर तलाक का आदेश नहीं दिया जा सकता। जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की बेंच ने महिला की फैमिली कोर्ट अपील पर सुनवाई में यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…

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CJI सूर्यकांत चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर सुनवाई से अलग: बोले- केस ऐसी बेंच को सौंपा जाए जिसमें जज चीफ जस्टिस बनने की कतार में न हो


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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को चुनाव आयोग नियुक्ति कानून से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। CJI ने कहा, “मुझ पर हितों के टकराव (conflict of interest) का आरोप लग सकता है, इसलिए इस मामले से अलग होना उचित है।”

उन्होंने सुझाव दिया कि इस केस को ऐसी बेंच को सौंपा जाए, जिसमें कोई भी जज भविष्य में चीफ जस्टिस बनने की कतार में न हो। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी CJI के साथ बेंच का हिस्सा थे।

यह बेंच उन जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें 2023 के उस कानून को चुनौती दी गई है, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति से CJI को हटा दिया गया है।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने भी CJI की इस बात का समर्थन किया। उन्होंने सुझाव दिया कि मामले को ऐसी बेंच के सामने रखा जाए, जिसमें कोई संभावित CJI न हो, ताकि पक्षपात की आशंका न रहे। इस सुझाव को स्वीकार करते हुए CJI ने निर्देश दिया कि यह मामला 7 अप्रैल को दूसरी बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- नियुक्ति एक समिति करेगी

पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक समिति करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI शामिल होंगे। दिसंबर 2023 को संसद के बनाए नए कानून के अनुसार इस समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल हैं (CJI को हटा दिया गया है)।

याचिकाकर्ताओं का दावा निष्पक्षता कम होगी

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CJI को हटाने से नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता कम हो जाती है। संसद के कानून को कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने चुनौती दी है।

केंद्र सरकार बोली-स्वतंत्रता केवल न्यायिक सदस्य पर निर्भर नहीं

इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस कानून का बचाव करते हुए कहा था कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता केवल समिति में न्यायिक सदस्य (CJI) की मौजूदगी पर निर्भर नहीं करती।

कानून मंत्रालय ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि 14 मार्च 2024 को दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जल्दबाजी में नहीं की गई थी, जैसा कि याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के तहत नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया था।

मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI की समिति की सलाह पर होनी चाहिए।

अभी यह है स्थिति

  • सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस कानून पर रोक नहीं लगाई है।
  • अब इस मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी।

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गरीबों के लिए आधी रात तक बैठ सकता हूं- सीजेआई:जस्टिस सूर्यकांत बोले-मैं यहां सबसे छोटे व्यक्ति के लिए हूं; मेरी कोर्ट में लग्जरी केस नहीं

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CJI जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि गरीबों को न्याय दिलाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, उनके लिए वे आधी रात तक कोर्ट में बैठ सकते हैं।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची के साथ बेंच में बैठे CJI ने यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई के दौरान की। पढ़ें पूरी खबर…

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Iran vs America War: ईरान के मार से सहमा ये देश, किया सरेंडर! बोला- अमेरिका को नहीं देंगे अपना एयरबेस


International

oi-Sumit Jha

Iran vs America War: मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादल गहरा रहे हैं और इसकी तपिश अब इराक और ब्रिटेन तक पहुंच गई है। इराक ने अमेरिका को अपने सैन्य बेस देने से साफ मना कर दिया है, क्योंकि उसे डर है कि वह ईरान और अमेरिका की जंग के बीच पिस सकता है।

वहीं, ईरान ने ब्रिटेन को खुली धमकी दी है कि अगर उसकी धरती का इस्तेमाल हमले के लिए हुआ, तो परिणाम गंभीर होंगे। तनाव के इस माहौल में हर देश अपनी संप्रभुता बचाने में जुटा है।

Iran vs America War

Middle East tension: इराक का अमेरिकी सेना को ‘नो’

इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने साफ कर दिया है कि वह अपने देश की जमीन पर किसी भी विदेशी सेना का विस्तार नहीं चाहते। उनका मानना है कि अमेरिकी सेना को और अधिक सैन्य बेस देना इराक की आजादी और संप्रभुता का अपमान होगा। इराक अब अपनी सुरक्षा खुद करने का दावा कर रहा है। वह नहीं चाहता कि अमेरिका और ईरान की आपसी दुश्मनी का अखाड़ा इराक बने, जिससे देश की शांति भंग हो।

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iran war update in hindi: संसद के फैसले का इंतजार

इराकी सरकार ने गेंद अब अपनी संसद के पाले में डाल दी है। सरकार का कहना है कि अमेरिकी बेस के मामले पर कोई भी बड़ा फैसला केवल जन-प्रतिनिधियों की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। इराक के भीतर अमेरिकी मौजूदगी को लेकर पहले ही काफी विरोध रहा है। जानकारों का कहना है कि इराक इस समय फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है ताकि क्षेत्र में बढ़ते किसी भी बड़े संघर्ष से खुद को दूर रख सके।

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ईरान की ब्रिटेन को सीधी धमकी

ईरान ने ब्रिटेन को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वह अपनी सीमा की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर ब्रिटेन ने अपने सैन्य ठिकानों को अमेरिका के हवाले किया, तो इसे ईरान पर सीधा हमला माना जाएगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह केवल चुप नहीं बैठेगा, बल्कि अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई करने में भी संकोच नहीं करेगा।

सहमा हुआ है अमेरिका का ये साथी

ब्रिटेन इस समय दोहरी मुश्किल में फंसा नजर आ रहा है। एक तरफ उसका पुराना साथी अमेरिका है, तो दूसरी तरफ ईरान की सीधी मिसाइल मार की धमकी। ईरान की मारक क्षमता और सख्त रुख को देखते हुए ब्रिटेन के भीतर चिंता बढ़ गई है। उसे डर है कि अमेरिका का साथ देना उसे भारी पड़ सकता है और उसके सैन्य ठिकाने ईरान के निशाने पर आ सकते हैं। फिलहाल ब्रिटेन तनाव कम करने के रास्ते तलाश रहा है।



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Delhi EV Bus: दिल्ली में 300 नई बसें लॉन्च,एक साल में 2000+ का बड़ा रिकॉर्ड, CM रेखा गुप्ता का मेगा प्लान


Delhi

oi-Pallavi Kumari

Delhi EV Bus: दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने इंद्रप्रस्थ बस डिपो से 300 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर राजधानी की जनता को समर्पित किया। यह सिर्फ बसों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि दिल्ली को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की ओर ले जाने की बड़ी पहल मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि पिछले एक साल में 2000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के बेड़े में जोड़ी जा चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य साफ है कि आने वाले समय में पूरी बस फ्लीट को EV में बदला जाए, जिससे राजधानी का पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह emission-free हो सके।

Delhi EV Bus

नई इंटर स्टेट सेवा और बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर (New Interstate Service & Infrastructure)

इस मौके पर नानकसर से गाजियाबाद के बीच नई इंटर स्टेट बस सेवा की भी शुरुआत की गई। इससे दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और रोजाना का सफर आसान होगा। इसके साथ ही DTC के नए वर्ल्ड क्लास ऑफिस बिल्डिंग का शिलान्यास भी किया गया, जिससे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और आधुनिक बनाया जाएगा।

आज इंद्रप्रस्थ बस डिपो से 300 नई EV बसों को हरी झंडी दिखाकर जनता को समर्पित किया।

यह कदम दिल्ली की रफ्तार को नई दिशा देता है। अब सफर और आसान होगा, कनेक्टिविटी और तेज़ होगी। पिछले एक वर्ष में 2000 से अधिक EV बसों को DTC के बेड़े में शामिल किया गया है। सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह… pic.twitter.com/msIp47lcrH

— Rekha Gupta (@gupta_rekha) March 20, 2026 “>

EV सब्सिडी का बड़ा अपडेट (EV Subsidy Update)

सरकार ने एक और अहम फैसला लेते हुए 2023 से बंद पड़े EV सब्सिडी पोर्टल को फिर से शुरू कर दिया है। इसके तहत 12,877 पात्र लोगों को करीब 24 करोड़ रुपये की सब्सिडी DBT के जरिए सीधे उनके खातों में दी गई है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सरकार का विजन क्या है? (Government’s Vision)

मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने साफ कहा कि यह पहल दिल्ली की रफ्तार को नई दिशा देगी। उनका फोकस है कि राजधानी में सफर सस्ता, तेज और पर्यावरण के अनुकूल हो। कैबिनेट मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह और विधायक तरविंदर सिंह मारवाह समेत कई नेता इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।

दिल्ली में EV बसों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि आने वाले समय में राजधानी का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह बदल सकता है। सरकार की यह योजना न सिर्फ प्रदूषण कम करेगी, बल्कि आम लोगों के सफर को भी ज्यादा आसान और किफायती बनाएगी।





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USS Gerald Fire Incident: अमेरिकी नौसैनिकों ने फूंक डाला वॉरशिप? जंग से बचने की तरकीब या हादसा?- Video


International

oi-Siddharth Purohit

USS Gerald Fire Incident: दुनिया के सबसे ताकतवर और सबसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लदे वॉरशिप में से एक USS Gerald R. Ford को जहाज पर लगी भीषण आग के बाद अस्थायी रूप से सक्रिय अभियानों से हटा दिया गया है। यह वॉरशिप अब मरम्मत के लिए Souda Bay, ग्रीस जा रहा है। यह घटना हाईटेक नेवी की काबिलियत और जोखिम सहने की क्षमता दोनों पर सवाल उठाती है। क्या इसमें आग अमेरिकी नौसैनिकों ने लगाई ताकि इस बिना मतलब की जंग से बाहर निकल सकें?

आग कैसे फैली?

रिपोर्ट्स के मुताबिक आग जहाज के लॉन्ड्री एरिया से शुरू हुई और धीरे-धीरे चालक दल के रहने वाले हिस्सों तक फैल गई। यह एक खतरनाक स्थिति थी क्योंकि जहाज के अंदर सीमित जगह होती है, जिससे आग तेजी से फैल सकती है। इस दौरान कई नौसैनिकों को धुएं के कारण सांस लेने में दिक्कत हुई और उनका इलाज करना पड़ा।

USS Gerald Fire Incident

लंबी तैनाती बनी बड़ी वजह?

यह जहाज करीब 10 महीनों से लगातार तैनात था, जबकि नौसेना का सामान्य गाइडलाइन 6-8 महीने का होता है। इतनी लंबी तैनाती से न सिर्फ मशीनें बल्कि इंसान भी थक जाते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यही ओवरलोड स्थिति कई समस्याओं की जड़ बन सकती है।

क्रू पर मानसिक और शारीरिक दबाव

हजारों नौसैनिक एक सीमित जगह में, तनावपूर्ण और जंग के माहौल में काम करते हैं। लंबे समय तक घर से दूर रहने की वजह से उनमें थकान, तनाव और Homesickness बढ़ जाती है। इसका सीधा असर उनके मनोबल और काम करने की क्षमता पर पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में सैनिक अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और परिवार को ज्यादा महत्व देने लगते हैं।

तैरता शहर लेकिन इंसान भी जरूरी

एयरक्राफ्ट कैरियर को अक्सर तैरता हुआ शहर कहा जाता है, क्योंकि इसमें हजारों लोग रहते और काम करते हैं। लेकिन इसके बावजूद, इंसानों को सही तरह से काम करने के लिए आराम और मानसिक संतुलन बेहद जरूरी होता है। फोर्ड पर तैनात कई नौसैनिक लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहे और लगातार बदलते मिशनों का सामना करते रहे।

तकनीकी दिक्कतें भी बनी परेशानी

जहाज पर कुछ तकनीकी समस्याएं भी सामने आई थीं। सबसे बड़ी समस्या सीवेज और प्लंबिंग सिस्टम में बार-बार रुकावट की थी। जिसकी वजह से जहाज के कई टॉयलेट्स ब्लॉक हो गए थे और नौसैनिकों में फ्रैश होने के लिए भी जद्दोजदह हो रही थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह दिक्कत कपड़ों के गलत निस्तारण के कारण होती थी, जिससे जहाज पर गंदगी भरे हालात बन जाते थे। ऐसी समस्याएं लंबे समय तक रहने वाले क्रू के लिए काफी मुश्किल पैदा करती हैं।

क्या आग जानबूझकर लगाई गई?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह आग एक हादसा थी या जानबूझकर लगाई गई। फिलहाल जांच जारी है और अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, एक्सपर्ट्स यह मानते हैं कि तोड़फोड़ (Sabotage) की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि पहले भी कुछ मामलों में आंतरिक आग को जानबूझकर की गई कार्रवाई से जोड़ा गया है।

ऑपरेशनल जोखिम बढ़ने की चेतावनी

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबी तैनाती जहाज और उसके क्रू दोनों को डीग्रेड कर देती है। रखरखाव में देरी, तकनीकी खराबियां और मानसिक तनाव मिलकर बड़े ऑपरेशनल जोखिम पैदा करते हैं। यही कारण है कि अब इस जहाज को सक्रिय ड्यूटी से हटाकर मरम्मत के लिए भेजा गया है।

आगे क्या होगा?

इस आग की जांच से यह तय किया जाएगा कि गलती कहां हुई, चाहे वह ऑपरेशन प्लानिंग में हो, क्रू मैनेजमेंट में या फिर जहाज के टेक्निकल सिस्टम में। जांच के नतीजे भविष्य के मिशनों की रणनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं, खासकर उन

क्षेत्रों में जहां पहले से ही जंग की स्थिति बनी हुई है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।





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‘इफ्तार पर एक्शन, शराब पर चुप्पी?’, वाराणसी मामले में ओवैसी ने सरकार को घेरा, बोले-मुस्लिम होने की मिली सजा?


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oi-Kumari Sunidhi Raj

Varanasi Boat Iftar Controversy Row: वाराणसी में गंगा की लहरों पर नाव पर सवार होकर रोजा इफ्तार करने का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जिस पर एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

ओवैसी ने इस कार्रवाई को भेदभावपूर्ण बताते हुए सरकार और प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल सार्वजनिक स्थान पर खाना खाने के लिए केस दर्ज करना और जेल भेजना न्यायोचित नहीं है। इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक भावनाओं और कानून के दोहरे मापदंडों पर नई बहस छेड़ दी है, जिससे काशी की सियासत में उबाल आ गया है।

Varanasi Boat Iftar Owaisi

नाव पर इफ्तार और ओवैसी का कड़ा रुख

वाराणसी के गंगा घाट पर 14 मुस्लिम युवकों द्वारा नाव पर रोजा खोलने के मामले में पुलिसिया कार्रवाई पर असदुद्दीन ओवैसी भड़क उठे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और अपने बयानों के जरिए इस घटना की कड़ी आलोचना की। ओवैसी ने कहा कि महज नाव पर बैठकर खाना खाने से किसी की धार्मिक भावनाएं कैसे आहत हो सकती हैं? उन्होंने पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमों और तत्काल गिरफ्तारी को गलत करार दिया।

ओवैसी ने सवाल उठाया कि अगर कुछ लोग नदी के बीच नाव पर इफ्तार करते हैं, तो इससे किसकी भावनाएं आहत हुईं? उन्होंने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब गंगा में शहर का सीवेज और गंदगी गिरती है, तब लोगों की भावनाएं क्यों नहीं जागतीं? गंदगी फैलाने वालों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? ओवैसी ने आरोप लगाया कि इन युवाओं को सिर्फ इसलिए जेल भेजा गया क्योंकि वे मुस्लिम हैं। उनके अनुसार, अगर यही काम कोई और करता तो शायद कार्रवाई इतनी सख्त नहीं होती।

शराब की दुकानों और दोहरे मापदंड पर प्रहार

ओवैसी ने इस मामले को लेकर प्रशासन पर ‘दोहरे मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि रमजान के पवित्र महीने में शराब की दुकानें पूरी तरह खुली रहती हैं। उन्होंने पूछा कि क्या शराब की बिक्री से मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं? ओवैसी के मुताबिक, कानून का इस्तेमाल केवल एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि हाल ही में वाराणसी में गंगा नदी में एक नाव पर इफ्तार करते हुए कुछ युवकों का वीडियो वायरल हुआ था। आरोप है कि इफ्तार के दौरान मां गंगा की मर्यादा का उल्लंघन किया गया। भाजपा युवा मोर्चा की शिकायत पर पुलिस ने धार्मिक भावनाएं भड़काने और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, ओवैसी के हस्तक्षेप के बाद अब यह मामला पूरी तरह राजनीतिक हो चुका है।

With AI Inputs

ये भी पढ़ें: ‘Farooq Abdullah पर फायरिंग…मुस्लिमों पर जुल्म होता है’, Tarun Kumar की मौत पर Owaisi ने क्या-क्या कहा?





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एअर इंडिया ने दिल्ली से कनाडा गलत फ्लाइट भेजी: 7 घंटे बाद चीन के एयरस्पेस से लौटी; बोइंग के ER मॉडल की इजाजत थी, LR भेजा


नई दिल्ली2 मिनट पहले

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एअर इंडिया ने इस घटना को ऑपरेशनल इश्यू बताया है। तस्वीर- फाइल फोटो।

भारतीय एयरलाइंस कंपनी एअर इंडिया की एक बार फिर बड़ी चूक सामने आई है, जिसके कारण दिल्ली से कनाडा के वैंकूवर जा रही फ्लाइट AI-185 को उड़ान भरने के करीब 7 घंटे बाद वापस दिल्ली लौटना पड़ा।

दरअसल, एअर इंडिया ने गुरुवार को यात्रियों को गलती से बोइंग 777-300 ER की जगह बोइंग 777-200 LR फ्लाइट में भेज दिया था। एविएशन नियमों के तहत अलग-अलग देशों में अलग-अलग विमान मॉडल के लिए इजाजत होती है।

कनाडा ने एअर इंडिया को सिर्फ B777-300 ER के लिए मंजूरी दी है, न कि LR वर्जन के लिए। गलती का पता तब चला जब विमान करीब 4 घंटे उड़ान भरकर चीन के कुनमिंग एयरस्पेस में पहुंच चुका था। इसके बाद तुरंत विमान ने यू-टर्न लिया और दिल्ली में वापस आकर लैंडिंग की।

फ्लाइट ने गुरुवार सुबह 11:34 बजे दिल्ली से उड़ान भरी थी और शाम 7:19 बजे वापस दिल्ली लैंड किया। विमान में दिल्ली से कनाडा जाने वाले 300 से ज्यादा यात्री मौजूद थे। घटना की जानकारी शुक्रवार को सामने आई है।

फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24.com के अनुसार, विमान ने चीन के एयरस्पेस से दिल्ली के लिए यू-टर्न लिया।

फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24.com के अनुसार, विमान ने चीन के एयरस्पेस से दिल्ली के लिए यू-टर्न लिया।

हर घंटे 9 टन फ्यूल खर्च, करीब ₹60 लाख नुकसान का अनुमान

एअर इंडिया ने इस घटना को ऑपरेशनल इश्यू बताया और कहा कि सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं। यात्रियों को होटल की सुविधा दी गई और उन्हें अगली सुबह यानी 20 मार्च को दूसरी फ्लाइट से वैंकूवर के लिए रवाना किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, इस गलती को गंभीरता से लिया गया है और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। जानकारी के अनुसार, एक बोइंग 777 विमान हर घंटे करीब 8-9 टन फ्यूल खर्च करता है, ऐसे में यह गलती एयरलाइन के लिए काफी महंगी साबित हुई है।

बोइंग 777 जैसे बड़े विमान के लिए, 8 टन (8,000 किलोग्राम) जेट ईंधन की कीमत मौजूदा दरों के आधार पर लगभग ₹7 लाख से ₹9 लाख के बीच हो सकती है। ऐसे में 7 घंटे हवा में रहने के दौरान एअर इंडिया फ्लाइट में करीब 60 लाख रुपए का फ्यूल खर्च हुआ।

फायर अलर्ट के बाद एअर इंडिया की न्यूयॉर्क-मुंबई फ्लाइट मदीना डायवर्ट

इधर एअर इंडिया की न्यूयॉर्क से मुंबई आ रही फ्लाइट AI-116 को गुरुवार दोपहर सऊदी अरब के मदीना में डायवर्ट करना पड़ा। कॉकपिट में कार्गो सेक्शन में आग लगने का अलर्ट मिलने के बाद एहतियातन यह फैसला लिया गया।

एयरलाइन के मुताबिक, बोइंग 777 विमान ने मदीना एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। हालांकि, लैंडिंग के बाद की जांच में यह अलर्ट गलत निकला और किसी तरह की आग नहीं पाई गई। जांच पूरी होने के बाद विमान को दोबारा ऑपरेशन के लिए क्लियर कर दिया गया।

यह फ्लाइट मुंबई के लिए रवाना हो गई। एअर इंडिया ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई और किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई।

13 फरवरी- DGCA ने एअर इंडिया पर ₹1 करोड़ जुर्माना लगाया

भारत के नागरिक उड्डयन नियामक (DGCA) ने 13 फरवरी को बताया था कि उसने एअर इंडिया पर 1.10 लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई एक एयरबस विमान को बिना ‘एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट’ (विमानल उड़ाए जाने योग्य है या फिटनेस सर्टिफिकेट) के 8 बार उड़ाए जाने के कारण की गई।

DGCA ने एक गोपनीय आदेश में कहा कि इस चूक से देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन पर जनता का भरोसा और कम हुआ है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार मामला 26 नवंबर 2025 का है, जब एअर इंडिया ने खुद DGCA को इस चूक की जानकारी दी थी।

कंपनी ने बताया था कि उनके एक एयरबस A320 नियो विमान का एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका था। फिर भी उसे 24 और 25 नवंबर को 8 रेवेन्यू सेक्टर्स (व्यावसायिक उड़ानों) में इस्तेमाल किया गया। इसके बाद 2 दिसंबर को DGCA ने मामले की जांच शुरू की थी।

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एअर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट का लैंडिंग के दौरान पहिया निकला:नोज गियर टूटा; थाइलैंड में हार्ड लैंडिंग, 133 लोग सवार थे

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थाईलैंड में एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट 18 मार्च की दोपहर लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गई। विमान के रनवे पर उतरते ही उसका नोज गियर टूट गया और आगे का पहिया अलग हो गया। फ्लाइट हैदराबाद से फुकेट जा रही थी। थाई अखबार द नेशन के मुताबिक घटना के बाद कुछ समय के लिए रनवे बंद करना पड़ा, हालांकि विमान में सवार सभी 133 यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए। पूरी खबर पढ़ें…

एअर इंडिया-इंडिगो के बाद अकासा की भी टिकटें महंगी: घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर ₹1300 तक फ्यूल सरचार्ज लगेगा

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एअर इंडिया-इंडिगो के बाद अकासा एयर की फ्लाइट्स टिकट भी महंगी हो गई हैं। एयरलाइन कंपनी ने 15 मार्च से सभी घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर फ्यूल सरचार्ज लगाने की घोषणा की है। अकासा एयर ने कहा कि 15 मार्च को रात 12:01 बजे के बाद बुक किए जाने वाले टिकटों पर 199 रुपए से लेकर 1,300 रुपए तक का एडिशनल सरचार्ज वसूला जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

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भीड़, टिकट और ठहरने की टेंशन खत्म! नवरात्रि में वैष्णो देवी यात्रा ऐसे प्लान करें


Vaishno Devi Navratri Trip: नवरात्रि आते ही माहौल बदल जाता है. घर-घर में पूजा, भक्ति और मां के जयकारे. ऐसे में अगर वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन का प्लान बन जाए, तो बात ही कुछ और होती है. हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, लेकिन सच कहें तो बिना तैयारी के ये यात्रा थोड़ी थका देने वाली भी बन सकती है. भीड़, टिकट की मारामारी और ठहरने की दिक्कत-ये सब आपके अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि आप पहले से एक सही प्लान बना लें. इस गाइड में हम आपको आसान और जमीन से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं, जिससे आपकी नवरात्रि यात्रा आरामदायक, सुरक्षित और यादगार बन सके.

नवरात्रि में वैष्णो देवी यात्रा क्यों खास होती है
नवरात्रि के दौरान माता के दरबार में एक अलग ही ऊर्जा महसूस होती है. देश के कोने-कोने से भक्त यहां पहुंचते हैं. सुबह से रात तक “जय माता दी” के जयकारे गूंजते रहते हैं, लेकिन यही भीड़ कभी-कभी परेशानी भी बन जाती है. कई लोग बिना तैयारी के पहुंचते हैं और फिर लंबी लाइनों, होटल की कमी या टिकट न मिलने जैसी दिक्कतों से जूझते हैं. ऐसे में थोड़ा सा प्लानिंग आपको इन परेशानियों से बचा सकता है.

यात्रा की प्लानिंग कब और कैसे करें
अगर आप नवरात्रि में यात्रा करना चाहते हैं, तो कम से कम 3–4 हफ्ते पहले तैयारी शुरू कर दें. कोशिश करें कि वीकेंड के बजाय वीकडेज में जाएं, क्योंकि उस समय भीड़ थोड़ी कम होती है. एक छोटा सा उदाहरण-भोपाल से गए एक परिवार ने वीकेंड चुना और उन्हें 5–6 घंटे लाइन में लगना पड़ा. वहीं, दूसरे परिवार ने मंगलवार का दिन चुना और उनका दर्शन 2–3 घंटे में हो गया.

मौसम को भी ध्यान में रखें. रात में ठंड बढ़ जाती है, इसलिए हल्का जैकेट जरूर साथ रखें.

ट्रेन और फ्लाइट टिकट कैसे बुक करें
पहले टिकट, फिर बाकी तैयारी
-वैष्णो देवी जाने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है श्री माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन.

-आप IRCTC Rail Connect ऐप या वेबसाइट से आसानी से ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं, अगर फ्लाइट से जाना है, तो जम्मू एयरपोर्ट तक टिकट लें.

-जम्मू से कटरा तक टैक्सी और बस दोनों मिल जाते हैं, लेकिन ध्यान रखें-नवरात्रि के समय टिकट बहुत जल्दी फुल हो जाते हैं, इसलिए एडवांस बुकिंग जरूरी है.

यात्रा पर्ची बनवाना क्यों जरूरी है
बिना पर्ची, आगे रास्ता बंद
वैष्णो देवी यात्रा में “यात्रा पर्ची” सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट है. इसे आप श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट या कटरा के काउंटर से बनवा सकते हैं.

ऑनलाइन प्रक्रिया आसान है:
-वेबसाइट पर जाएं
-तारीख चुनें
-ID प्रूफ डालें

कटरा पहुंचकर भी पर्ची बन जाती है, लेकिन भीड़ के समय लाइन लंबी हो सकती है. इसलिए पहले से बनवा लेना बेहतर रहता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

हेलीकॉप्टर और VIP दर्शन का ऑप्शन
कम समय में दर्शन चाहते हैं?
-अगर आपके पास समय कम है या आप पैदल यात्रा नहीं करना चाहते, तो हेलीकॉप्टर सेवा एक अच्छा विकल्प है. कटरा से संजी छत तक हेलीकॉप्टर चलता है.

-किराया आमतौर पर ₹2000 से ₹3500 के बीच होता है. बुकिंग भी श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की साइट से ही होती है.

-VIP दर्शन पास भी मिलते हैं, लेकिन इनकी संख्या सीमित होती है. इसलिए इन्हें जल्दी बुक करना जरूरी है.

ठहरने की व्यवस्था कैसे करें
होटल पहले बुक, बाद में सुकून
-कटरा में हर बजट के होटल मिल जाते हैं-साधारण से लेकर अच्छे लग्जरी ऑप्शन तक. इसके अलावा श्राइन बोर्ड के गेस्ट हाउस भी साफ-सुथरे और किफायती होते हैं.

-आप MakeMyTrip या Goibibo जैसे ऐप्स से पहले ही होटल बुक कर लें.

-नवरात्रि के समय बिना बुकिंग के पहुंचना थोड़ा रिस्की हो सकता है, क्योंकि कई बार सारे रूम पहले से फुल हो जाते हैं.

पैदल यात्रा की तैयारी
13 किलोमीटर का सफर, लेकिन यादगार
-कटरा से भवन तक करीब 13–14 किलोमीटर का ट्रैक है. आप इसे पैदल, घोड़े, पिट्ठू या पालकी से पूरा कर सकते हैं.

-कई लोग रात में यात्रा करना पसंद करते हैं क्योंकि उस समय मौसम ठंडा और रास्ता थोड़ा खाली रहता है.

-रास्ते में खाने-पीने, पानी और मेडिकल सुविधाएं मिल जाती हैं, इसलिए ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होती.

जरूरी टिप्स जो काम आएंगे
-आरामदायक जूते पहनें
-पानी की बोतल और हल्का स्नैक रखें
-मोबाइल और पैसे सुरक्षित रखें
-ज्यादा भीड़ में धैर्य रखें
-बुजुर्गों के लिए हेलीकॉप्टर या पालकी बेहतर विकल्प है

यात्रा का अनुभव कैसा रहता है
जो लोग पहली बार जाते हैं, उनके लिए ये सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि एक अनुभव बन जाता है. थकान होती है, लेकिन जब “मां के दरबार” में पहुंचते हैं, तो सब भूल जाते हैं. कई श्रद्धालु बताते हैं कि जैसे-जैसे वो ऊपर चढ़ते हैं, अंदर एक अलग ही शांति महसूस होती है. यही वजह है कि लोग बार-बार यहां आने का मन बनाते हैं.

नवरात्रि में वैष्णो देवी यात्रा करना हर भक्त का सपना होता है, लेकिन अगर आप थोड़ा पहले प्लान कर लें-टिकट, पर्ची और होटल सब समय पर बुक कर लें-तो आपकी यात्रा काफी आसान और सुखद हो सकती है. सही तैयारी के साथ आप सिर्फ दर्शन पर फोकस कर पाएंगे, बाकी झंझट अपने आप कम हो जाएंगे.



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Assam Election 2026: असम में TMC का बड़ा दांव! ममता बनर्जी से यूसुफ पठान तक 18 स्टार प्रचारकों की फौज उतारी


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Assam Assembly Election 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने 18 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का है, जो खुद असम में पार्टी के लिए माहौल बनाने की कमान संभालेंगी। उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषक बनर्जी भी चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभाएंगे।

कौन-कौन हैं स्टार प्रचारक? (TMC Star Campaigners List)

TMC की 18 सदस्यीय सूची में राजनीति, फिल्म और खेल जगत के कई बड़े चेहरे शामिल हैं। इनमें सुष्मिता देव, काकोली घोष दस्तीदार, सागरिका घोष, महुआ मोइत्रा, मोलॉय घटक, शत्रुघ्न सिन्हा, बाबुल सुप्रियो, सताब्दी रॉय, कीर्ति आजाद, सायोनी घोष, यूसुफ पठान, शांता छेत्री, जून मालिया, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, मोसरफ हुसैन और दुलु अहमद जैसे नाम शामिल हैं।

Assam Assembly Election 2026 TMC

रणनीति क्या है?

TMC की इस लिस्ट से साफ है कि पार्टी असम में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए हर वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है। एक तरफ अनुभवी नेता हैं, तो दूसरी तरफ फिल्म और क्रिकेट से जुड़े चेहरे भी हैं, जो जनता के बीच आसानी से कनेक्ट बना सकते हैं। खास तौर पर शत्रुघ्न सिन्हा, बाबुल सुप्रियो और यूसुफ पठान जैसे नाम स्टार पावर लेकर आते हैं, जबकि महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद जैसे नेता राजनीतिक मजबूती देते हैं।

असम में TMC अभी अपनी जमीन तलाश रही है और इस बार पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है। ममता बनर्जी की अगुवाई में पार्टी यहां अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है और बड़े नेताओं के जरिए वोटर्स को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है।

असम चुनाव 2026 में TMC ने स्टार प्रचारकों की मजबूत टीम उतारकर साफ कर दिया है कि वह इस बार मुकाबले को दिलचस्प बनाने के मूड में है। अब देखना होगा कि ममता बनर्जी और उनकी टीम असम में कितना असर छोड़ पाती है।



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