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Mujtaba Khamenei: अब इजराइल और अमेरिका होगा बर्बाद! मुजतबा खामेनेई का महा-ऐलान


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oi-Sumit Jha

Mujtaba Khamenei on Ali Larijani Death: मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष अब एक निर्णायक और खौफनाक मोड़ पर आ गया है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अली लारिजानी और इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब की हत्या के बाद इजराइल और अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है।

लारिजानी जैसे कद्दावर रणनीतिकार का खोना तेहरान के लिए केवल एक व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा संरचना में एक बड़ी दरार है। मुजतबा ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अब केवल रक्षात्मक नहीं रहेगा, बल्कि अपने दुश्मनों को उनके किए की भारी कीमत चुकानी होगी।

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Iran Israel War 2026: मुजतबा खामेनेई का कड़ा रुख और बदले का संकल्प

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अली लारिजानी की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इजराइल को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि लारिजानी ने दशकों तक ईरान की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के लिए काम किया। मुजतबा का नेतृत्व अब “रणनीतिक धैर्य” की पुरानी नीति को त्यागकर आक्रामक जवाबी कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, दुश्मनों के ये कायराना कृत्य ईरान के संकल्प को और अधिक फौलादी बनाएंगे और न्याय की प्रक्रिया अब रुकने वाली नहीं है।

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अली लारिजानी: ईरान के परमाणु और सुरक्षा स्तंभ का पतन

अली लारिजानी ईरान की राजनीति के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक थे। 2005 में राष्ट्रीय सुरक्षा पद संभालने के बाद से वे देश के प्रमुख परमाणु वार्ताकार रहे। उनकी और उनके बेटे की हत्या ने तेहरान के भीतर निर्णय लेने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इजराइल द्वारा ईरान के इस शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि दुश्मन ने ईरान के सुरक्षा घेरे में गहरी सेंध लगा दी है, जिससे अब ईरान के पास विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।

Israel US vs Iran: इंटेलिजेंस चीफ की मौत और सुरक्षा ढांचे में बड़ी दरार

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने 18 मार्च को इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब की मौत की पुष्टि की, जो इजराइल के सटीक हवाई हमलों का परिणाम था। खातिब और लारिजानी जैसे शीर्ष अधिकारियों का एक के बाद एक मारा जाना यह संकेत देता है कि ईरान का खुफिया तंत्र भीतर से असुरक्षित हो चुका है। इन हत्याओं ने तेहरान को हिलाकर रख दिया है और अब मुजतबा खामेनेई के सामने अपनी सुरक्षा संरचना को फिर से खड़ा करने की एक बहुत बड़ी चुनौती है।

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क्षेत्रीय टकराव और वैश्विक व्यवस्था पर पड़ता व्यापक प्रभाव

यह युद्ध अब केवल इजराइल और ईरान के बीच का हवाई अभियान नहीं रह गया है, बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष बन चुका है। लेबनान, खाड़ी देश और वैश्विक शिपिंग मार्ग इस आग की चपेट में हैं। मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान यदि ऊर्जा मार्गों को बाधित करता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और शिपिंग इंडस्ट्री को अपूरणीय क्षति हो सकती है। यह टकराव अब केवल सैन्य सीमाओं तक सीमित न रहकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।

ईरान का अगला कदम: क्या अमेरिका और इजराइल का अंत निकट है?

मुजतबा खामेनेई के गुस्से और ईरान के शीर्ष नेतृत्व की हत्याओं ने तेहरान को “आर-पार” की लड़ाई के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। ईरान अब अपने मिसाइल बेड़े और क्षेत्रीय सहयोगियों को पूरी तरह सक्रिय करने की योजना बना रहा है। यदि मुजतबा ने सीधे युद्ध का आदेश दिया, तो यह इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। ईरान का मानना है कि अब शहादत का बदला लेने का समय आ गया है और यह संघर्ष एक नए विनाशकारी अध्याय की शुरुआत है।



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Durga Mata ki Aarti: इस आरती बिना अधूरी है नवरात्रि की पूजा, जरूर करें इसका पाठ, भरी रहेगी तिजोरी


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oi-Ankur Sharma

Shardiya Navratri 2025 , Durga Mata ki Aarti : शारदीय नवरात्रि 2025 की शुरूआत आज से हो गई है, इस बार का नवरात्र पूरे 10 दिन का है। सुबह से मंदिर में मां शेरावाली के जयकारे गूंज रहे हैं, चारों ओर ‘जय माता दी’ का उदघोष है। कहते हैं मां दुर्गा की आराधना में मंत्र, स्तोत्र, पाठ और विशेष रूप से आरती का बहुत महत्व होता है। आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। दुर्गा माता की आरती करने से साधक के जीवन में शक्ति, सुख-समृद्धि और आत्मबल का संचार होता है।

Durga Mata ki Aarti

दुर्गा मां की आरती (Durga Mata ki Aarti)

  • जय अंबे गौरी,
  • मैया जय श्यामा गौरी ।
  • तुमको निशदिन ध्यावत,
  • हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • मांग सिंदूर विराजत,
  • टीको मृगमद को ।
  • उज्ज्वल से दोउ नैना,
  • चंद्रवदन नीको ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • कनक समान कलेवर,
  • रक्ताम्बर राजै ।
  • रक्तपुष्प गल माला,
  • कंठन पर साजै ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • केहरि वाहन राजत,
  • खड्ग खप्पर धारी ।
  • सुर-नर-मुनिजन सेवत,
  • तिनके दुखहारी ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • कानन कुण्डल शोभित,
  • नासाग्रे मोती ।
  • कोटिक चंद्र दिवाकर,
  • सम राजत ज्योती ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • शुंभ-निशुंभ बिदारे,
  • महिषासुर घाती ।
  • धूम्र विलोचन नैना,
  • निशदिन मदमाती ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • चण्ड-मुण्ड संहारे,
  • शोणित बीज हरे ।
  • मधु-कैटभ दोउ मारे,
  • सुर भयहीन करे ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • ब्रह्माणी, रूद्राणी,
  • तुम कमला रानी ।
  • आगम निगम बखानी,
  • तुम शिव पटरानी ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
  • नृत्य करत भैरों ।
  • बाजत ताल मृदंगा,
  • अरू बाजत डमरू ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • तुम ही जग की माता,
  • तुम ही हो भरता,
  • भक्तन की दुख हरता ।
  • सुख संपति करता ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • भुजा चार अति शोभित,
  • वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]
  • मनवांछित फल पावत,
  • सेवत नर नारी ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • कंचन थाल विराजत,
  • अगर कपूर बाती ।
  • श्रीमालकेतु में राजत,
  • कोटि रतन ज्योती ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • श्री अंबेजी की आरति,
  • जो कोइ नर गावे ।
  • कहत शिवानंद स्वामी,
  • सुख-संपति पावे ॥
  • ॐ जय अम्बे गौरी..॥
  • जय अम्बे गौरी,
  • मैया जय श्यामा गौरी ।

दुर्गा माता की आरती का महत्व (Durga Mata ki Aarti)

आरती के समय दीपक की लौ और शंख-घंटियों की ध्वनि वातावरण को शुद्ध कर देती है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। आरती मन को शांति प्रदान करती है तो वहीं ये माता के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी है। दुर्गा माता की आरती करने से भय, रोग और शत्रु से रक्षा होती है औप पूजा पूर्ण होती है।

Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।



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Delhi Flight Alert: खराब मौसम ने रोका दिल्ली का रास्ता, 22 फ्लाइट्स डायवर्ट, घर से निकलने से पहले देखें लिस्ट



Delhi Airport news: दिल्ली में खराब मौसम और भारी बारिश के कारण IGI एयरपोर्ट पर 22 उड़ानों को डायवर्ट किया गया है। जयपुर और लखनऊ की ओर मोड़े गए विमानों और उड़ानों में देरी की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें। अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक करें।



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Pakistan ICBM: पाकिस्तान की मिसाइलें अब सीधे अमेरिका पर गिरेंगी? तुलसी गबार्ड के खुलासे से हड़कंप


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oi-Sumit Jha

Tulsi Gabbard Pakistan ICBM: हाल ही में अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की है। उन्होंने सीनेट की सुनवाई के दौरान बताया कि पाकिस्तान अब ऐसे लंबी दूरी के मिसाइल सिस्टम विकसित कर रहा है, जो अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता रख सकते हैं।

गबार्ड के अनुसार, रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के साथ-साथ पाकिस्तान भी अपनी मिसाइल तकनीक को आधुनिक बना रहा है। यह बयान वैश्विक सुरक्षा और बदलती सैन्य ताकतों की ओर इशारा करता है। अमेरिका अब इन देशों की बढ़ती मिसाइल रेंज को अपनी सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहा है।

Tulsi Gabbard Pakistan ICBM

पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य ताकत

तुलसी गबार्ड ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान अपनी मिसाइल तकनीक को लगातार उन्नत बना रहा है। अब आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान ऐसी इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) बना सकता है, जो सीधे अमेरिकी जमीन को निशाना बनाने में सक्षम हों। पहले पाकिस्तान की मिसाइलें क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित मानी जाती थीं, लेकिन अब इनका दायरा बढ़ता दिख रहा है। यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इससे दक्षिण एशिया में शक्ति का संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।

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चीन और रूस से बड़ा खतरा

अमेरिकी इंटेलिजेंस का मानना है कि रूस और चीन दुनिया के लिए सबसे सक्रिय और निरंतर बने रहने वाले खतरे हैं। ये दोनों देश ऐसे आधुनिक मिसाइल सिस्टम तैयार कर रहे हैं जो अमेरिका के डिफेंस सिस्टम को भी मात दे सकते हैं। वे लगातार रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में निवेश कर रहे हैं ताकि उनकी मिसाइलें अधिक सटीक और घातक हो सकें। गबार्ड के मुताबिक, चीन और रूस का मकसद अपनी मिसाइलों को इतना उन्नत बनाना है कि उन्हें पकड़ना नामुमकिन हो जाए।

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उत्तर कोरिया की साइबर चोरी

रिपोर्ट में उत्तर कोरिया के खतरनाक इरादों का भी जिक्र किया गया है। उत्तर कोरिया न केवल मिसाइलें बना रहा है, बल्कि वह साइबर चोरी के जरिए पैसा भी जुटा रहा है। साल 2025 में उत्तर कोरिया ने क्रिप्टोकरेंसी हैक करके करीब 2 अरब डॉलर की चोरी की। इस बड़ी रकम का इस्तेमाल वह अपने परमाणु हथियारों और मिसाइल प्रोग्राम को और मजबूत करने के लिए कर रहा है। यह दिखाता है कि कैसे एक देश तकनीकी चोरी के जरिए अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है।

साल 2035 तक की बड़ी चुनौतियां

इंटेलिजेंस कम्युनिटी का अनुमान है कि 2035 तक अमेरिका के लिए मिसाइलों का खतरा पांच गुना बढ़ जाएगा। वर्तमान में करीब 3,000 मिसाइलों का खतरा है, जो बढ़कर 16,000 से ज्यादा हो सकता है। ईरान भी 2035 तक ऐसी मिसाइलें तैयार कर सकता है जो लंबी दूरी तक वार करें। गबार्ड ने साफ किया कि अमेरिका का परमाणु सुरक्षा घेरा अभी सुरक्षित है, लेकिन आने वाले सालों में कई देशों के पास ऐसी तकनीक होगी जो सीधे अमेरिका के घरों तक पहुंच सकती है।



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PM Modi Phone Call Kuwait Crown Prince: कुवैत के क्राउन प्रिंस से PM मोदी ने की बात, किन मुद्दों पर चर्चा


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oi-Sumit Jha

PM Modi Eid greetings: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद से फोन पर बात की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य आने वाले ईद के त्योहार की बधाई देना और आपसी रिश्तों को मजबूत करना था।

दोनों नेताओं ने न केवल त्योहार की खुशियां बांटी, बल्कि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के बदलते हालातों पर भी गहराई से चर्चा की। यह बातचीत भारत और कुवैत के बीच बढ़ते भरोसे और दोस्ती को दिखाती है।

pm modi kuwait crown prince phone call

क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर चर्चा

पीएम मोदी और क्राउन प्रिंस ने पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल पर अपनी चिंता जताई। मोदी जी ने साफ कहा कि कुवैत की संप्रभुता और उसकी सीमाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने समुद्री रास्तों, खासकर ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को बहुत जरूरी बताया। दोनों नेताओं का मानना है कि किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी ही सबसे सही रास्ता है, ताकि इलाके में शांति बनी रहे।

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भारतीय समुदाय का ख्याल

कुवैत में लाखों भारतीय रहते हैं और काम करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने क्राउन प्रिंस को वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और देखभाल के लिए शुक्रिया कहा। कुवैत सरकार हमेशा से भारतीय प्रवासियों की मदद करती रही है, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत कड़ी है। क्राउन प्रिंस ने भी भरोसा दिलाया कि कुवैत में भारतीयों का कल्याण उनकी प्राथमिकता बनी रहेगी। यह हमारे नागरिकों के लिए राहत की बात है।

रमजान में दूतावास की सेवाएं

कुवैत में भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि रमजान के पवित्र महीने के दौरान भी सभी जरूरी सेवाएं चालू रहेंगी। काम के समय में थोड़ा बदलाव किया गया है-अब सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक कामकाज होगा। इससे वहां रहने वाले भारतीयों को पासपोर्ट या वीजा से जुड़े कामों में कोई परेशानी नहीं आएगी। दूतावास ने साफ किया है कि त्यौहारों के बावजूद वे अपने नागरिकों की मदद के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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सहायता केंद्रों की जानकारी

भारतीय नागरिकों की सुविधा के लिए कुवैत में चार प्रमुख जगहों पर ‘कौंसुलर सेवा केंद्र’ (ICAC) चलाए जा रहे हैं। ये केंद्र कुवैत सिटी, जलीब अल-शुयेख, फहाहिल और जहादरा में स्थित हैं। दूतावास ने इन केंद्रों के सटीक पते भी जारी किए हैं ताकि किसी को भटकना न पड़े। चाहे वह अल-जौहरा टावर हो या नेस्टो हाइपरमार्केट बिल्डिंग, हर जगह भारतीय अधिकारियों की टीम लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए मौजूद है।



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Bengal Assembly Elections: हुमायूं कबीर का 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान, ममता के खिलाफ मुस्लिम उम्मीदवार


India

oi-Sumit Jha

Humayun Kabir Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निकाले गए नेता हुमायूं कबीर ने अपनी नई ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के साथ चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। कबीर ने 15 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है और कुल 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

उनका मुख्य फोकस मुस्लिम बहुल इलाकों पर है, जहां वे खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में देख रहे हैं। यह कदम बंगाल चुनाव के समीकरणों को बदल सकता है।

Humayun Kabir Bengal Assembly Elections

ममता बनर्जी को भवानीपुर में चुनौती

हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर सीट से पूनम बेगम को उम्मीदवार बनाया है। माना जा रहा है कि यह ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक को बांटने की एक सोची-समझी रणनीति है। भवानीपुर में मुख्य मुकाबला वैसे तो ममता बनर्जी और बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी के बीच देखा जा रहा है, लेकिन एक मुस्लिम उम्मीदवार के आने से वहां के चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प और त्रिकोणीय हो सकते हैं।

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हुमायूं कबीर का चुनावी दांव

हुमायूं कबीर खुद मुर्शिदाबाद की दो अहम सीटों, रेजिनगर और नाओदा से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने अपनी पुरानी सुरक्षित सीट भरतपुर को इस बार छोड़ दिया है। दो सीटों से चुनाव लड़ना उनके आत्मविश्वास या फिर हार के डर से खुद को सुरक्षित रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वह मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे इलाकों में अपना दबदबा कायम कर खुद को किंगमेकर की भूमिका में देख रहे हैं।

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नए चेहरे और ओवैसी से हाथ मिलाने के संकेत

कबीर की पार्टी ने फिरहाद हकीम के पूर्व दामाद यासीन हैदर और बपन घोष जैसे चर्चित नामों को टिकट दिया है। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे आने वाले समय में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के साथ गठबंधन कर सकते हैं। अगर यह गठबंधन होता है, तो मुस्लिम बहुल सीटों पर टीएमसी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। कबीर की कोशिश है कि वे छोटे दलों को साथ लेकर एक मजबूत मोर्चा बनाएं।

बंगाल चुनाव की तारीखें और नतीजे

पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव दो बड़े चरणों में होने जा रहे हैं। पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को होगी, जिसमें 152 सीटों पर मतदान किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, जिसमें बाकी बची 142 सीटों पर जनता अपना फैसला सुनाएगी। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। हुमायूं कबीर की पार्टी की एंट्री ने इस बार के मुकाबले को पहले से ज्यादा रोमांचक बना दिया है।



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पंजाब में रातों-रात बहने लगी ‘नई भाखड़ा नहर’, भगवंत मान ने कर दिखाया वो जो 75 साल में नहीं हुआ!


Punjab

oi-Sumit Jha

Punjab Irrigation Reform: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य के कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव करते हुए मात्र 4 वर्षों में सिंचाई नेटवर्क को पुनर्जीवित कर दिया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार ने बरसाती नदियों और नालों से 10,000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी खेतों तक पहुंचाया है, जो प्रसिद्ध भाखड़ा नहर की क्षमता के बराबर है।

2022 तक जहां केवल 26.50% खेतों को नहरी पानी मिलता था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 78% हो गया है। सरकार की इस दूरदर्शी नीति ने गिरते भूजल स्तर को बचाने और किसानों की लागत घटाने में बड़ी सफलता हासिल की है।

Punjab Irrigation Reform

नहरी सिंचाई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: 26% से 78% का सफर

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि मार्च 2022 तक पंजाब में केवल 20.89 लाख एकड़ भूमि को नहरी पानी मिल रहा था। बीते चार वर्षों में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर 6,700 करोड़ रुपए खर्च किए गए, जिससे अब नहरी सिंचाई का रकबा बढ़कर 58 लाख एकड़ हो गया है। यह उपलब्धि पिछली सरकारों के मुकाबले लगभग तीन गुना अधिक है, जिससे खेती के लिए नहरी पानी का उपयोग 78% तक सुनिश्चित हो सका है।

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लुप्त हो चुकी नहरों और खालों का पुनरुद्धार

राज्य सरकार ने उन नहरों को फिर से जीवित किया है जिन्हें पिछली सरकारों ने नजरअंदाज कर दिया था। 22 किलोमीटर लंबी सरहाली माइनर नहर, जो मिट्टी में दबकर गायब हो चुकी थी, उसे पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। इसके अलावा, पंजाब के इतिहास में पहली बार 101 बंद पड़ी नहरों (लगभग 545 किमी) को बिना किसी नई जमीन का अधिग्रहण किए दोबारा चालू किया गया और 18,349 जल मार्गों (खालों) की सफाई की गई।

फिरोजपुर और सरहिंद फीडर का आधुनिक अपग्रेड

मालवा क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली सरहिंद नहर को करीब 75 साल बाद अपग्रेड किया गया है, जिससे इसकी क्षमता में 2,844 क्यूसेक की वृद्धि हुई है। इसी तरह, फिरोजपुर फीडर की क्षमता को रिकॉर्ड 35 दिनों में 2,682 क्यूसेक बढ़ाया गया। अब इन फीडरों में 24×7 पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए अपनी बारी का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।

आजादी के बाद पहली बार 1,446 गांवों तक पहुंचा पानी

कंडी क्षेत्र जैसे दुर्गम इलाकों में सिंचाई की समस्या को दूर करने के लिए मान सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। कंडी नहर को बहाल कर होशियारपुर और आसपास के 1,446 गाँवों तक आजादी के बाद पहली बार नहरी पानी पहुंचाया गया है। इनमें से कई गांवों ने दशकों से नहरी पानी नहीं देखा था। इस कदम से न केवल कृषि को बढ़ावा मिला है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

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शाहपुर कंडी डैम और जल संरक्षण की बड़ी जीत

पिछले 25 सालों से लटका हुआ शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट अब 3394.49 करोड़ रुपए की लागत से पूरा हो गया है। इस बांध के बनने से पाकिस्तान की ओर जा रहे अतिरिक्त पानी पर रोक लगेगी और रणजीत सागर डैम की क्षमता बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, गुरदासपुर जैसे जिलों में भूजल की निकासी 61.48% से घटकर 31% पर आ गई है, जो पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी राहत है।

पर्यटन और राजस्व मॉडल के रूप में सिंचाई विभाग

भगवंत मान सरकार ने सिंचाई विभाग को केवल सेवा तक सीमित न रखकर इसे राजस्व मॉडल के रूप में विकसित किया है। राज्य में नहरों के किनारे बोटिंग, रेस्ट हाउस और हेडवर्क्स जैसे 26 पर्यटन स्थल विकसित किए गए हैं। साथ ही, बाढ़ की रोकथाम के लिए 206 किलोमीटर नदी तटबंधों को मजबूत किया गया है और ‘पंजाब नहर एवं ड्रेनेज एक्ट, 2023’ के तहत जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।



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Iran America War: शशि थरूर की अध्यक्षता में संसदीय समिति की बैठक, किन-किन मुद्दों पर चर्चा


International

oi-Sumit Jha

Iran America War: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच भारत सरकार की विदेश मामलों की संसदीय समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य युद्ध जैसे हालातों के बीच वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भारत के आर्थिक हितों पर पड़ने वाले असर का जायजा लेना था।

बैठक के बाद थरूर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि चर्चा काफी व्यापक रही, जिसमें 17 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इसमें प्रवासियों की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और छात्रों की शिक्षा जैसे गंभीर विषयों पर सरकार से सवाल-जवाब किए गए।

Parliamentary Standing Committee

West Asia Crisis: भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वापसी

बैठक में पश्चिम एशिया, खासकर ईरान और खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। थरूर ने स्पष्ट किया कि ईरान में अभी भी लगभग 9,000 भारतीय मौजूद हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि स्थिति अब ‘फंसे होने’ जैसी नहीं है। यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों से कमर्शियल उड़ानें सामान्य रूप से चल रही हैं, जिससे लोग अपनी मर्जी से आ-जा सकते हैं। सरकार लगातार वहां के हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों की मदद की जा सके।

#WATCH | Delhi: On the meeting of the Parliamentary Standing Committee on External Affairs, Congress MP Shashi Tharoor says, “It was a very good discussion… The first discussion on West Asia was the most comprehensive. We had 17 members attending, and every single one of them… pic.twitter.com/H6uo2dQf0V

— ANI (@ANI) March 18, 2026 “>

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External Affairs Meeting: छात्रों की पढ़ाई और CBSE परीक्षाएं

युद्ध के हालातों का सबसे बुरा असर वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों पर पड़ा है। थरूर ने जानकारी दी कि खाड़ी देशों के करीब 23,000 छात्र अपनी कक्षा 10वीं और 12वीं की CBSE परीक्षाएं नहीं दे पाए हैं। इस गंभीर मुद्दे पर विदेश मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है। सरकार इन छात्रों के लिए ‘रेमेडियल अरेंजमेंट’ (उपचारात्मक व्यवस्था) करने की योजना बना रही है ताकि उनका शैक्षणिक वर्ष खराब न हो और उन्हें परीक्षा देने का दूसरा मौका मिल सके।

ऊर्जा सुरक्षा और तेल की आपूर्ति

भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है। बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि तनाव के कारण पेट्रोलियम ले जा रहे जहाजों की आवाजाही पर क्या असर पड़ा है। हालांकि अधिकारियों के पास फंसे हुए जहाजों की सटीक संख्या उपलब्ध नहीं थी, लेकिन यह स्वीकार किया गया कि कुछ जहाज प्रभावित हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जरिए ऊर्जा की सप्लाई लाइन को सुरक्षित रखा जाए ताकि देश में ईंधन की कमी न हो।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक कूटनीति

बैठक का एक हिस्सा तकनीक और भविष्य की कूटनीति पर भी केंद्रित था। इसमें ‘AI इम्पैक्ट समिट’ के परिणामों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के वैश्विक प्रभावों पर चर्चा हुई। थरूर ने बताया कि कैसे भारत तकनीक के क्षेत्र में ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) का नेतृत्व कर सकता है। भारत अपनी ‘टेक डिप्लोमेसी’ के माध्यम से अन्य देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहता है, ताकि भविष्य की डिजिटल चुनौतियों और अवसरों का मिलकर सामना किया जा सके।

प्रवासी भारतीयों का समग्र कल्याण

समिति ने इस बात पर जोर दिया कि विदेश में रहने वाला भारतीय समुदाय भारत की बहुत बड़ी ताकत है। उनकी सुरक्षा से लेकर उनकी आजीविका तक, हर पहलू पर सरकार को सक्रिय रहना होगा। थरूर ने कहा कि यद्यपि विदेश सचिव की अनुपलब्धता के कारण कुछ तकनीकी सवालों के जवाब नहीं मिल सके, लेकिन अधिकांश मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संकट की इस घड़ी में हर भारतीय को यह महसूस हो कि उनका देश उनके साथ खड़ा है।





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‘आप हुक्म नहीं चला सकते हैं’ , ED छापों में ममता बनर्जी के ‘दखल’ पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार


India

oi-Bhavna Pandey

सुप्रीम कोर्ट ने आईपैक के दफ्तर और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर हुई छापेमारी के मामले में ममता बनर्जी सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई टालने की पश्चिम बंगाल सरकार की अपील को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप हुक्म नहीं चला सकते हैं।” कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छापेमारी के दौरान बीच में हस्तक्षेप करने को भी गलत ठहराया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 18 मार्च (बुधवार) को पश्चिम बंगाल सरकार को आगाह किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC के कार्यालय पर छापेमारी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप की स्थिति “खुशगवार नहीं है।”

Supreme Court lams Mamata Banerjee

न्यायमूर्ति पंकज मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज में बाधा डालना गंभीर मामला है और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा’ “जो आपने ने जो किया वो गलत था। जो हुआ वह कोई अच्‍छी स्थिति नहीं थी। यह आसामान्‍य है।”

ममता सरकार ने दिया तर्क- ED कोई कानूनी इकाई नहीं

राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत में दलील दी कि ईडी कोई स्वतंत्र कानूनी इकाई नहीं है, बल्कि सरकार का एक विभाग मात्र है। उनका कहना था कि अगर कोई केंद्रीय एजेंसी अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर कर सकती है, तो यह देश के संघीय ढांचे के लिए खतरनाक मिसाल बन जाएगी और संवैधानिक जांच-और-संतुलन को दरकिनार कर देगी।

ममता की दलील- ईडी को रिट याचिका दायर करने का अधिकार नहीं

मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि ईडी सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए बाध्य करने वाली रिट याचिका दायर नहीं कर सकता। सिब्बल ने कहा कि जब तक कोई मूल अपराध न हो, ईडी जांच में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

जानिए क्‍या है पूरा मामला?

दरअसल, यह पूरा मामला इस साल की शुरुआत में हुई एक कार्रवाई से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने वाली एजेंसी आईपैक और उसके मुखिया प्रतीक जैन के आवासों व दफ्तरों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई हवाला कारोबार और कोयला तस्करी से संबंधित एक मामले की जांच के सिलसिले में अंजाम दी गई थी।

कोर्ट ने कहा- आपने जो किया, वह गलत था

इस छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंच गई थीं। वहां उनका सीधा सामना जांच एजेंसी के अधिकारियों से हुआ था, जिसके बाद तीखी नोकझोंक भी हुई। ममता बनर्जी ने उस वक्त आरोप लगाया था कि ईडी टीएमसी का संवेदनशील डेटा और हार्ड डिस्क अपने साथ ले जा रही थी, जिसे उन्होंने गलत बताया। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की रेड के दौरान ममता बनर्जी के अचानक बीच में आने पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “आपने जो किया, वह गलत था।



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LPG Oil Crisis: हॉर्मुज में तैर रहे हैं 3.2 लाख टन गैस, भारत पहुंचा तो कितने सिलेंडर भरे जा सकते हैं


International

oi-Sumit Jha

LPG Oil Crisis: पश्चिम एशिया में युद्ध के गहराते बादलों ने भारत की ‘एनर्जी लाइफलाइन’ पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग, ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा अब दांव पर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस रणनीतिक समुद्री रास्ते के पश्चिमी हिस्से में भारत के झंडे वाले 20 विशाल जहाज फंसे हुए हैं।

इन जहाजों पर कुल 16.7 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल, 3.2 लाख मीट्रिक टन रसोई गैस (LPG) और 2 लाख मीट्रिक टन LNG लदा है। जहाजों पर मौजूद 611 भारतीय नाविकों की सुरक्षा और देश में ईंधन की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार हर पल की निगरानी कर रही है। इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि इन फंसे हुए जहाजों का भारत की अर्थव्यवस्था और आपकी जेब पर क्या असर होगा।

LPG Oil Crisis

Strait of Hormuz oil crisis: भारत की ‘एनर्जी लाइफलाइन’ पर संकट

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है, जिससे होकर वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 80% आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसे हालातों ने इस मार्ग को असुरक्षित बना दिया है। यदि यह मार्ग पूरी तरह बाधित होता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर प्रभावित होगी, जिससे देश के औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों में ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है।

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समुद्र में फंसी 2.25 करोड़ परिवारों की रसोई

अगर हम भारत में इस्तेमाल होने वाले मानक घरेलू सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) को आधार मानें, तो गणित कुछ इस प्रकार है

  • कुल LPG भार: 3.2 लाख मीट्रिक टन = 32,00,00,000 किलोग्राम (32 करोड़ किलो)
  • सिलेंडरों की संख्या: 32,00,00,000/ 14.2= 2.25 करोड़ से ज्यादा घरेलू सिलेंडर

कितने लोगों को मिलेगी राहत?

यह स्टॉक भारत की एक बड़ी आबादी के लिए ‘संजीवनी’ की तरह है:

  • करोड़ परिवारों को सीधा फायदा: यदि एक औसत भारतीय परिवार में एक सिलेंडर 30 दिन चलता है, तो यह स्टॉक 2.25 करोड़ परिवारों की एक महीने की जरूरत को अकेले दम पर पूरा कर सकता है।
  • उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अहम: भारत में 10 करोड़ से अधिक उज्ज्वला लाभार्थी हैं। यह स्टॉक उनमें से लगभग 25% परिवारों को संकट के समय राहत पहुंचाने के लिए पर्याप्त है।
  • LNG और कच्चे तेल का महत्व: इसके अलावा जो 2 लाख टन LNG फंसी है, वह हज़ारों कारखानों को चलाने और बिजली पैदा करने के काम आती है। वहीं 16.7 लाख टन कच्चा तेल इतना है कि इससे करोड़ों लीटर पेट्रोल और डीजल बनाया जा सकता है, जो देश की रफ़्तार को थमने नहीं देगा।

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Indian vessels stuck crude oil: 75 करोड़ लीटर पेट्रोल, 110 करोड़ लीटर डीजल

इसके अलावा, 16.7 लाख टन कच्चा तेल इतना ज्यादा है। एक अनुमान के मुताबिक, इतने कच्चे तेल को रिफाइन करने पर लगभग 75 करोड़ लीटर पेट्रोल और 110 करोड़ लीटर डीजल तैयार किया जा सकता है। यह ईंधन भारत की सड़कों पर दौड़ने वाली लाखों कारों, ट्रकों और बसों को कई दिनों तक चलाने के लिए काफी है। यही कारण है कि इन जहाजों का सुरक्षित निकलना भारत की अर्थव्यवस्था और सामान्य जनजीवन की रफ्तार बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

611 नाविकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

इन 22 जहाजों पर केवल तेल और गैस ही नहीं, बल्कि 611 भारतीय नाविक भी मौजूद हैं। युद्ध वाले इलाके के करीब होने के कारण इन भारतीयों की जान जोखिम में है। शिपिंग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय लगातार इन जहाजों के संपर्क में हैं। भारतीय नौसेना भी स्थिति पर नजर रख रही है ताकि जरूरत पड़ने पर नाविकों को सुरक्षा दी जा सके। सरकार की पहली कोशिश यह है कि इन सभी को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाला जाए।

आपकी जेब और महंगाई पर कैसे पड़ेगा असर?

अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर आपकी जेब पर होगा। सप्लाई कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। जब डीजल महंगा होता है, तो ट्रक और मालगाड़ियों का किराया बढ़ जाता है, जिससे फल, सब्जी और अनाज जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। यानी समुद्र में फंसे ये जहाज सीधे तौर पर आपकी रसोई के बजट से जुड़े हैं।

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संकट से निपटने के लिए सरकार का ‘प्लान बी’

भारत सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। पेट्रोलियम मंत्रालय अन्य तेल उत्पादक देशों (जैसे रूस या अमेरिका) से सप्लाई बढ़ाने पर बातचीत कर रहा है ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता थोड़ी कम की जा सके। साथ ही, सरकार अपने ‘रणनीतिक तेल भंडार’ (Strategic Petroleum Reserve) का उपयोग करने पर भी विचार कर रही है। यह भारत का वह इमरजेंसी स्टॉक है जो संकट के समय देश की तेल जरूरतों को कुछ हफ्तों तक पूरा कर सकता है।



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