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Assam Politics: सांसद प्रद्युत बोरदोलोई बीजेपी में शामिल, प्रदेश में चुनाव से पहले कांग्रेस को करारा झटका


India

oi-Smita Mugdha

Assam Politics: असम की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने सुबह कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया था। कुछ ही घंटों में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। बोरदोलोई का बीजेपी में शामिल होना आगामी चुनावों से पहले पार्टी के लिए बड़ी मजबूती माना जा रहा है। वह दिसपुर सीट से चुनाव लड़ेंगे।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस कदम से असम में बीजेपी की स्थिति और मजबूत हो सकती है, जबकि विपक्ष को झटका लगा है। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को गर्मा दिया है और आने वाले दिनों में इसके बड़े राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं। उनके बीजेपी ज्वाइन करने पर प्रतिक्रियाओं का दौर भी जारी है।

Assam Politics Pradyut Bordoloi

Pradyut Bordoloi ने कांग्रेस पर लगाया अपमान का आरोप

कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल होने पर सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी छोड़ने का कोई एक कारण नहीं है। मैं घुटन महसूस कर रहा था और मेरा अपमान किया जा रहा था। 13 मार्च को असम CEC की बैठक हुई थी। मुझे पता चला कि इमरान मसूद जैसे एक सांप्रदायिक नेता ने मेरे खिलाफ आरोप लगाए।’

उन्होंने कहा कि जिस उम्मीदवार का मैंने विरोध किया था और जिसके खिलाफ मैंने आपराधिक संबंधों के सबूत दिए थे, उसके बारे में मेरी सारी बातें झूठी और मनगढ़ंत हैं। इमरान मसूद ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में यह कहने की हिम्मत दिखाई कि प्रद्युत बोरदोलोई द्वारा कही गई सभी बातें झूठी हैं। वहां मौजूद APCC अध्यक्ष भी चुप रहे। इससे मुझे बहुत ठेस पहुंची।’

Assam Politics: प्रियंका गांधी बोलीं, ‘बातचीत का मौका नहीं मिला’

असम कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में से एक रहे प्रद्युत बोलदोलोई के इस्तीफे पर प्रियंका गांधी ने निराशा जताई। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनका पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। प्रद्युत बड़े जनाधार वाले नेता माने जाते हैं और बीजेपी की लहर के बावजूद वह चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। प्रियंका गांधी ने कहा कि उनका इस तरीके से पार्टी छोड़ना निराशाजनक है। इस पर ज्यादा कुछ नहीं कह सकती हूं, लेकिन अगर बातचीत का मौका मिलता तो शायद स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती।



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कौन है ये सेना का जवान? जिन्‍होंने झारखंड में ड्यूटी के दौरान खुद को गोली मारकर किया सुसाइड


Jharkhand

oi-Bhavna Pandey

Chatra SSB jawan suicide: झारखंड के चतरा जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। चतरा में तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के एक जवान ने ड्यूटी के दौरान खुद को गोली मार कर खुदकुशी कर ली। मंगलवार रात करीब 10 बजे सिमरिया थाना क्षेत्र के शिला ओपी पिकेट पर हुई इस घटना ने लोगों को हैरान कर दिया है।

कौन था ये सेना का जवान?

मृतक जवान की पहचान 35वीं बटालियन के प्रह्लाद सिंह के रूप में हुई। प्रह्लाद सिंह मूल रूप से देवघर जिले के रहने वाले हैं और लंबे समय से एसएसबी में सेवा दे रहे थे। वह चतरा के शिला पिकेट पर अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात थे और मंगलवार की रात अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मारी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस खबर से सुरक्षा बलों में भी चिंता फैल गई।

Jharkhand Chatra SSB Jawan shot himself

पोस्‍टमार्टम के लिए भेजा गया शव

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सेना के जवान प्रह्लाद सिंह की खुदकुशी की खबर मिलते ही चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार अग्रवाल और एसएसबी कमांडेंट घटनास्थल पर पहुंचे और मृतक जवान के शव को पोस्टमार्टम के लिए चतरा सदर अस्पताल भेजा गया और इसमे साथ ही परिवार को भी सूचित कर दिया है।

किस वजह से जवान ने किया सुसाइड?

हालांकि प्रह्लाद सिंह ने किस वजह से खुद को गोली मार कर अपनी जीवन लीला समाप्‍त कर ली इसका खुलासा नहीं हुआ है। उनके रूम से न ही कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ है और ना अन्‍य कोई सबूत जिससे सुसाइड का कारण पता चल सके।

जांच में जुटी पुलिस

पुलिस व एसएसबी अधिकारी इस सुसाइड के हर पहलू से मामले की जांच कर रहे हैं। जवान के सहकर्मियों से भी पूछताछ जारी है, ताकि वजह सामने आ सके।

पहले कब सेना के जवान ने किया था सुसाइड

झारखंड में जवानों की आत्महत्या का यह पहला मामला नहीं है। अक्टूबर 2025 में, रांची के धुर्वा स्थित विस्थापित कॉलोनी में जेएपी-2 जवान शिव पूजन रजवार ने भी फांसी लगाकर अपनी जान ली थी। पूजन रजवार बोकारो जिले के मूल निवासी थे और उनकी रांची में पोस्टिंग थी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में CRPF और CAF के जवानों द्वारा आत्महत्या के हाल के केस सामने आए, जिनकी जांच चल रही है।कारण क्या बताते हैं रिपोर्ट/न्यूज़?

सेना में जवान क्‍यों करते हैं सुसाइड?

एक्‍सपर्ट के अनुसार जवानों के सुसाइड के कई कारण हैं, जिसमें…

मानसिक तनाव और डिप्रेशन

परिवार से दूरी

छुट्टी न मिलना / ड्यूटी प्रेशर

यूनिट के अंदर तनाव (सीनियर-जूनियर संबंध)

निजी/आर्थिक समस्याएं सरकार और सेना क्या कर रही है?

Indian Armed Forces ने इस समस्या को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं

  • काउंसलिंग और हेल्पलाइन सर्विस
  • “Buddy System” (साथी द्वारा मानसिक सपोर्ट)
  • छुट्टियों और रोटेशन में सुधार
  • योग, मेडिटेशन और तनाव प्रबंधन कार्यक्रम
  • मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता

मदद बस एक कॉल दूर

पहचान पूर्णतः गोपनीय , पेशेवर परामर्श सेवा

iCALL मेंटल हेल्पलाइन नंबर: 9152987821

सोम – शनि: सुबह 10 बजे – शाम 8 बजे



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LPG Cylinder: कमर्शियल गैस सिलेंडर पर सरकार का चौंकाने वाला फैसला, आज से बदल गए नियम!



LPG Cylinder: केंद्र सरकार ने कमर्शियल गैस सिलेंडर को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए राज्यों के लिए 10% अतिरिक्त LPG कोटा मंजूर किया है। इस कदम से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को गैस की किल्लत से राहत मिलेगी और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी। जानिए इस फैसले का बाज़ार और कीमतों पर क्या असर पड़ेगा।



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मोदी ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के साथ बैठक की: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच तेल संकट पर चर्चा; राज्यों को 10% एक्स्ट्रा LPG कोटा मिलेगा


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नई दिल्ली8 मिनट पहले

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ईरान-इजराइल जंग के बीच देश में फ्यूल-गैस की सप्लाई को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को संसद भवन में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ बैठक की। इसमें कच्चे तेल और गैस की उपलब्धता, उनके इम्पोर्ट और संभावित संकट से निपटने की रणनीति पर चर्चा की गई।

करीब 2 घंटे चली बैठक में सरकार ने अपने आपातकालीन तेल भंडार (SPR) की भी समीक्षा की है। जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक देश के पास कुछ हफ्तों का तेल स्टॉक मौजूद है, जिससे फिलहाल संकट की संभावना कम है।

वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय की अधिकारी सुजाता शर्मा ने कहा कि सरकार राज्यों को 10% ज्यादा LPG देने का ऑफर दिया गया है। राज्यों से धीरे-धीरे LPG की जगह PNG अपनाने में मदद करने को कहा गया है।

उन्होंने कहा कि LPG की दिक्कत अभी भी बनी हुई है। ऑनलाइन बुकिंग बेहतर हुई है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर के यहां अब भी लंबी लाइनें लग रही हैं। हाल ही में 2300 से ज्यादा आउटलेट्स पर जांच भी की गई हैं।

दरअसल होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने से दुनियाभर में तेल सप्लाई पर असर पड़ा है। हालांकि युद्ध के माहौल में भारत के तीन जहाज शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी तेल-गैस लेकर गुजरात के पोर्ट्स पर पहुंचे हैं।

नंदा देवी जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार करके मंगलवार रात 2:30 बजे गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंचा।

नंदा देवी जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार करके मंगलवार रात 2:30 बजे गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंचा।

सरकार की अपील- LPG की जगह PNG अपनाएं

पेट्रोलियम मंत्रालय की अधिकारी ने बताया कि घरेलू एलपीजी उत्पादन 40% बढ़ा है, लेकिन फिर भी हालात पूरी तरह ठीक नहीं हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि जहां PNG सुविधा है, वहां LPG की जगह PNG अपनाएं, इससे सप्लाई का दबाव कम होगा और यह ज्यादा सुरक्षित भी है।

उन्होंने कहा कि आज 93% LPG बुकिंग ऑनलाइन हुई है। सरकार ने लोगों से कहा है कि एजेंसी पर जाने से बचें और सिर्फ आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से ही बुकिंग करें, अफवाहों पर ध्यान न दें। कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार सख्ती कर रही है। इसी के तहत मंगलवार को देशभर में 2300 से ज्यादा LPG दुकानों पर अचानक जांच की गई।

अधिकारी ने बताया कि LPG कैरिअर नंदादेवी और शिवालिक से LPG डिस्चार्ज चल रहा है। किसी भी पोर्ट पर कोई कंजेक्शन नहीं है। मंत्रालय पूरे हालात की निगरानी कर रही है।

खबरें और भी हैं…



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Khamenei Death: खामेनेई की तरह मारे जाते मुजतबा, मिसाइल गिरने से 2 मिनट पहले हुआ ‘चमत्कार’, बची जान


International

oi-Sumit Jha

Khamenei Death: तेहरान से आ रही विनाशकारी खबरों के बीच एक सनसनीखेज ऑडियो लीक ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। दावा किया जा रहा है कि 28 फरवरी के उस भीषण अमेरिकी-इजराइल हमले में ईरान के नए संभावित उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई मौत के मुंह से बाल-बाल बच गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस ‘अभेद्य’ परिसर को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत निशाना बनाया गया, वहां अयातुल्ला अली खामेनेई और ईरान के शीर्ष सैन्य सिपहसालार मौजूद थे, जिनका इस हमले में अंत हो गया। मुजतबा की जान महज कुछ मिनटों के फासले से बची, लेकिन इस प्रहार ने खामेनेई वंश और ईरानी सत्ता के रसूख को मलबे में तब्दील कर दिया है। यह लीक ऑडियो अब क्षेत्र के बदलते भूगोल और सत्ता के नए संघर्ष की गवाही दे रहा है।

Khamenei Death

Ali Khamenei Death Reason: किस्मत ने कैसे बचाया?

लीक हुए उस खौफनाक ऑडियो से सुबह 9:32 बजे की वो दहला देने वाली दास्तां सामने आई है, जिसने ईरान के भविष्य को एक मामूली से फैसले पर टिका दिया। मुजतबा खामेनेई उस वक्त मौत के केंद्र यानी अपने पिता के मुख्य परिसर में ही मौजूद थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

हमले से महज कुछ पल पहले, मुजतबा एक सामान्य से ‘मॉर्निंग वॉक’ के लिए बगीचे की ओर निकले थे। जैसे ही मिसाइलें अभेद्य दीवारों को चीरती हुई भीतर गिरीं, पूरा इलाका मलबे और आग के गोले में तब्दील हो गया। धमाके की तीव्रता इतनी भीषण थी कि बाहर होने के बावजूद मुजतबा मलबे की चपेट में आ गए, जिससे उनके पैर में चोट आई है। ऑडियो के अनुसार, अगर वे बगीचे की ओर कदम न बढ़ाते, तो ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के उस नरसंहार में उनका बचना नामुमकिन था।

ये भी पढे़ं: Khamenei Death: मौत सामने थी, फिर भी बंकर में क्यों नहीं गए खामेनेई? दिल्ली में ईरानी दूत ने खोला वो गहरा राज

Mujtaba Khamenei Attacked: परिवार और करीबियों का नुकसान

लीक हुए उस ऑडियो की रूह कंपा देने वाली आवाज़ें एक ऐसी तबाही की तस्दीक करती हैं, जिसने खामेनेई राजवंश की जड़ें हिला दी हैं। 28 फरवरी की उस सुबह, अमेरिकी-इजरायली मिसाइलों ने केवल सत्ता के केंद्र को ही नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार को मलबे में दफन कर दिया।

दावा किया जा रहा है कि मुजतबा खामेनेई की पत्नी और बेटे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि उनके साले की भी इस भीषण प्रहार में मौत हो गई। यह हमला कितना सटीक था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ईरान की अभेद्य सुरक्षा दीवार माने जाने वाले IRGC प्रमुख मोहम्मद पाकपुर और रक्षा मंत्री अजीज नासिरज़ादेह भी इस ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की भेंट चढ़ गए। जिस परिसर से कभी पूरे मध्य पूर्व की बिसात बिछाई जाती थी, वह अब एक खामोश खंडहर बन चुका है, जहाँ सत्ता के उत्तराधिकारी के पास अब केवल अपनों की लाशें और जख्मी पैर बचा

Iran Israel war Update: हमले का सटीक निशाना

खुफिया जानकारी के मुताबिक, इस हमले के लिए ‘ब्लू स्पैरो’ मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। हमला इतना सटीक था कि एक साथ परिसर की कई इमारतों को निशाना बनाया गया। प्रोटोकॉल प्रमुख मजाहिर हुसैनी की रिकॉर्डिंग बताती है कि हमलावरों का मकसद सिर्फ अली खामेनेई नहीं, बल्कि उनके पूरे उत्तराधिकार और परिवार को खत्म करना था। तेहरान के जिस सुरक्षित इलाके में यह घर था, वहां इतनी बड़ी चूक ने ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मुजतबा खामेनेई अब कहां हैं?

28 फरवरी के बाद से मुजतबा खामेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। कुछ खबरें कह रही हैं कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी गुप्त बंकर से देश चला रहे हैं। वहीं, कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि गंभीर चोटों के इलाज के लिए उन्हें सीक्रेट तरीके से रूस ले जाया गया है। डोनाल्ड ट्रंप के ‘कोमा’ वाले दावे ने भी अफवाहों के बाजार को गर्म कर रखा है।

ये भी पढे़ं: US Iran War: जंग के बीच Khamenei की फौज ने पहली बार दिखाया हथियारों का जखीरा, Trump की हालत पतली!- Video

Iran leaked audio: क्षेत्र में युद्ध के हालात

इस हमले के बाद ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच सीधी जंग छिड़ चुकी है। पिछले तीन हफ्तों से लगातार मिसाइल और हवाई हमले जारी हैं। मुजतबा खामेनेई ने भले ही अपने पिता की जगह ले ली हो, लेकिन उनके सामने अब देश को बिखरने से बचाने और अपने परिवार की मौत का बदला लेने की दोहरी चुनौती है। दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि यह तनाव किसी भी वक्त बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।



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13 लाख का कर्ज और डॉन बनने की चाहत, अपने ही जाल में फंस गया रेस्टोरेंट मालिक, पुलिस ने खोली पोल


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Delhi Crime News: दिल्ली के पश्चिम विहार के ‘नाइट आउल’ रेस्टोरेंट के बाहर हुई फायरिंग की कहानी झूठी निकली. पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि रेस्टोरेंट मालिक तपन दास ने 13 लाख का कर्ज चुकाने से बचने और खुद को विदेशी गैंगस्टरों का शिकार बताकर प्रभाव जमाने के लिए खुद ही फायरिंग की साजिश रची थी. दिल्ली पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत शूटर और मददगार को हथियार व स्कूटी के साथ दबोच लिया है.

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दिल्ली पुलिस ने रेस्टोरेंट मालिक सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया है.

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में 15 मार्च को हुई फायरिंग की एक घटना ने पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए थे. लेकिन जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ और पश्चिम विहार ईस्ट थाने की टीम ने जांच की परतें खोलीं, तो एक ऐसी साजिश सामने आई जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया. जिस रेस्टोरेंट मालिक ने खुद को खूंखार गैंगस्टरों का शिकार बताया था, वही इस पूरी वारदात का मास्टरमाइंड निकला. ‘नाइट आउल’ रेस्टोरेंट के बाहर फायरिंग की सूचना मिली तो पुलिस की टीम मौके पर पहुंची. पुलिस को रेस्टोरेंट के लोहे के गेट पर गोलियों के दो निशान और खाली खोखे मिले. हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ था, लेकिन इलाके में दहशत फैल गई थी. पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ बीएएनएस और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की.

डीसीपी, बाहरी जिला विक्रम सिंह के निर्देश पर एक तेज तर्रार टीम को इस गुत्थी को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के दर्जनों सीसीटीवी फुटेज खंगाले. फुटेज में संदिग्धों की तस्वीरें साफ हुईं, जिन्हें इलाके में सर्कुलेट किया गया. 17 और 18 मार्च की दरमियानी रात पुलिस को सूचना मिली कि एक संदिग्ध ‘सनी उर्फ बोंग’ निहाल विहार नाले के पास देखा गया है. पुलिस ने जाल बिछाकर उसे दबोच लिया. सख्ती से पूछताछ करने पर सनी टूट गया और उसने जो राज खोला, उसने पुलिस को चौंका दिया.

पकड़े गए सनी ने बताया कि यह फायरिंग किसी गैंग ने नहीं, बल्कि रेस्टोरेंट के मालिक तपन दास उर्फ विश्वास के कहने पर की गई थी. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सोनिया कैंप की झुग्गियों से तपन दास को गिरफ्तार किया. पूछताछ में तपन ने कबूल किया कि उसने अलग-अलग फाइनेंसर्स से करीब 13 लाख रुपये का कर्ज ले रखा था. ऐसे में वह गैंगस्टर वाला आइडिया से इससे बचना चाहा. खुद को विदेशी गैंगस्टरों का शिकार बताकर फाइनेंसर्स पर दबाव बनाना ताकि वे पैसे न मांगें. इलाके में पब्लिसिटी पाना और खुद का रसूख स्थापित करना ताकि लोग उसे ‘पहुंच वाला आदमी’ समझें.

शूटर भी गिरफ्तार, हथियार बरामद

तपन के खुलासे के बाद पुलिस ने फायरिंग करने वाले मुख्य शूटर कमलेश उर्फ गांजा को भी गिरफ्तार कर लिया. कमलेश और तपन दोनों ही इलाके के घोषित अपराधी हैं. इस काम में तपन का कर्मचारी सनी उर्फ बोंग को भी पुलिस ने मदद करने के जुर्म में गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी, एक देसी कट्टा, दो जिंदा कारतूस, दो खाली खोखे और वारदात के समय पहने गए कपड़े बरामद कर लिए हैं.

दिल्ली पुलिस की इस कांड का पर्दाफाश कर न केवल झूठी कहानी गढ़ने वाले अपराधियों को बेनकाब किया, बल्कि दिल्ली में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार जैसे गैंगस्टरों के नाम पर चल रहे फर्जी फिरौती वसूलने के रैकेट का भी पर्दाफाश किया है. पुलिस अब इस मामले में अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें



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Kim Jong-un की 99.93% वाली जीत पर दुनिया हैरान, कौन हैं वो 0.07% ‘बहादुर वोटर्स’, जिन्‍होंने खिलाफ वोट डाला?


International

oi-Bhavna Pandey

North Korea election 2026: उत्तर कोरिया में चुनाव हुए और नतीजे हमेशा की तरह Kim Jong Un के पक्ष में एकतरफा आए। चुनावों में लगभग पूर्ण समर्थन से शानदार जीत दर्ज की। किम की पार्टी ने 99.97% वोट हासिल कर सभी सीटें जीती लेकिन 0.07% असहमति वाले वोटों ने ऑनलाइन खूब चर्चा बटोरी और किम सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रहे हैं। लोग सवाल कर रहे हैं आखिर कौन वो 0.07% लोग हैं जिन्‍होंने “ना” कहने की हिम्मत दिखाई।

बता दें KCNA के अनुसार, किम जोंग उन की वर्कर्स पार्टी ऑफ़ कोरिया और उसके सहयोगियों ने 15 मार्च को हुए 2026 के संसदीय चुनावों में 99.97% मतों के साथ 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली की सभी सीटें जीतीं।

North Korea Election 2026

0.07% ‘ना’ ने इंटरनेट पर मचा दी हलचल

पीपुल्स कोरिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया में मतदान करना अनिवार्य है। मतदान न करना राजद्रोह के समान है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 99.99% रजिस्‍टर्ड वोटर्स ने इन चुनावों में हिस्‍सा लिया। इनमें सिर्फ 0.0037% विदेश में या समुद्र में कार्यरत होने के कारण और 0.00003% ने मतदान से परहेज किया। मतदान करने वालों में, 99.93% ने उम्मीदवारों का समर्थन किया, जबकि 0.07% ने उनके खिलाफ वोट किया, जो उत्तर कोरियाई चुनावों में एक असामान्य आंकड़ा था।

हर सीट पर सिर्फ एक ही उम्मीदवार

हर सीट पर केवल एक ही उम्मीदवार चुनाव लड़ता है। यदि कोई मतदाता किसी उम्मीदवार के विरोध में वोट डालना चाहता है, तो उसे सार्वजनिक तौर पर सबके सामने ऐसा करना होता है। DPRK चुनाव कानूनों के तहत, 687 प्रतिनिधियों का चुनाव हुआ, जैसे श्रमिक, किसान, बुद्धिजीवी और अधिकारी। इसलिए के पर्यवेक्षकों ने इसे ‘दिखावटी चुनाव’ कहा। इन्हीं चुने गए उम्‍मीदवारों में किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने भी कल्लिमगिल निर्वाचन क्षेत्र संख्या 5 से जीत हासिल की।

कौन हैं किम जोंग के खिलाफ वोट डालने वाले लोग?

संख्या के लिहाज़ से देखा जाए तो, किम की वर्कर्स पार्टी के विरोध में पड़े ये वोट लगभग 18 हज़ार हैं। दिलचस्प है कि उत्तर कोरिया में अनुमानित तौर पर कुल 18 हज़ार ही मतदाता बताए गए हैं। यह स्पष्ट है कि विरोध में पड़े 0.07 प्रतिशत वोट सीधे तौर पर किम जोंग उन के खिलाफ नहीं थे। दरअसल, किम स्वयं इन चुनावों में उम्मीदवार नहीं होते।

ये विरोध मत स्थानीय उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं, जो सभी 687 सीटों पर फैले हुए हैं। औसतन, हर सीट पर लगभग 26 वोट विरोध में डाले गए। खास बात यह है कि राज्य मीडिया ने 1957 के बाद पहली बार सुप्रीम पीपुल्स असेंबली चुनाव में विरोधी वोटों को स्वीकार किया था।

जानकारों का मानना है कि किम जोंग उन ने ‘विरोध मत’ की यह व्यवस्था स्थानीय स्तर के गुस्से को शांत करने के लिए शुरू की। इसका उद्देश्य उन्हें छोटी-मोटी समस्याओं के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराए जाने से बचाना है। यदि उम्मीदवारों के खिलाफ जायज़ विरोध सामने आता है, तो किम उस पर कार्रवाई भी करते हैं।

इंटनेट यूजर्स बोले- मुझे उन 0.07% लोगों के नाम दो

उत्तर कोरिया में ऐसी भारी जीत सामान्य ही है, लेकिन 0.07% असहमति वाले वोटों ने ऑनलाइन तेज़ी से ध्यान खींचा। सोशल मीडिया यूजर्स ने मीम्‍स शेयर करना शुरू कर दिया। एक यूज़र ने लिखा, “0.07% के लिए एक पल का मौन।” एक और यूजर ने मज़ाक में कहा, “मुझे उन 0.07% बहादुर लोगों के नाम दो।”

‘लगता है इस गर्मी में 0.07% लोग गायब होने वाले हैं’

तीसरे यूज़र ने चुटकी लेते हुए कहा, “असंबंधित खबर में, इस गर्मी में जनसंख्या में 0.07% की कमी आने की उम्मीद है।” एक अन्य यूज़र ने एक्स पर लिखा, “वह 0.07% बस देश के सबसे वांछित लोग बन गए हैं।”



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US Iran War: इजरायल करेगा Al-Aqsa मस्जिद पर हमला? एक्सपर्ट ने दी चेतावनी, अमेरिका खाली करेगा मिलिट्री बेस?


International

oi-Siddharth Purohit

US Iran War: अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान की जंग उस वक्त और तेज हो गई जब एक हमले में ईरान के बड़े नेता और सैन्य प्रमुख अली लारीजानी की मौत हो गई। जिसके जवाब में ईरान ने तेल अवीव पर हमले किए और इन हमलों में 2 और लोगों की मौत हो गई। वहीं, वनइंडिया ने जब इस घटना और युद्ध में आगे क्या हो सकता है इसको लेकर डिफेंस एक्सपर्ट कमर आगा से बात की तो उन्होंने बताया कि अब मिडिल में क्या होगा।

सवाल- अली लारीजानी की मौत के बाद लीडरशिप बिखरेगी?

जवाब- इस पर डिफेंस एक्सपर्ट कमर आगा कहते हैं कि अली लारीजानी की मौत से ईरानी सेना और लीडरशिप में एक खालीपन जरूर आया है लेकिन ये इतना बड़ा नहीं है। ईरान में अली खामेनेई की मौत से पहले ही यह तय था कि कोई लीडर अमेरिका-इजरायल के हमलों में मरता है तो उसकी जगह कौन लेगा। अमेरिका-इजरायल कितने भी नेताओं को मार लें हर बार एक नया लीडर आता रहेगा। ये कुछ वैसा ही है जैसा लीबिया और इराक में लीडरशिप खत्म करने बाद तक अमेरिका और इजरायल अपनी रिजीम नहीं बना सके हैं।

us-iran-war

सवाल- क्या रिजीम चेंज कर पाएगा अमेरिका?

जवाब- IRGC वाले बहुत कमिटेंड हैं इस्लामिक क्रांति को लेकर। इसलिए ईरान के पीछे हटने की कोई संभावना नहीं है। हां, ईरान का नुकसान बहुत हो रहा है जिससे वह कमजोर जरूर पड़ जाएगा। लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि इस दौरान अमेरिका को सत्ता में बैठने या किसी कठपुतली सरकार को बिठाने का मौका मिलेगा।

सवाल- क्या खाड़ी देशों से अमेरिका की होगी रवानगी?

जवाब- कुवैत, यूएई और कतर में जब ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया तो वहां के लोग इस बात से खुश थे। यहां तक कि कुवैत में जब फाइटर पायलट गिरा और उसे वहां के आम लोगों ने पकड़ा तो उसकी चप्पलों से पिटाई की। ये घटना बताती है कि कुवैत में भले ही सरकार का झुकाव अमेरिका की तरफ हो लेकिन जनता में इस बात की भयंकर नाराजगी है कि अमेरिका ईरान पर हमले कर रहा है। खाड़ी देश पहली बार अमेरिकी बेस उनके देश में होने का नुकसान भोग रहे हैं। बावजूद इसके वे अमेरिका को जाने के लिए नहीं कह सकते। हां, अगर भविष्य में मौजूदा प्रो-अमेरिका रिजीम कमजोर हुई और कोई नया लीडर आता है जो अमेरिका को नहीं चाहता तो उस स्थिति में ऐसा संभव होगा।

सवाल- क्या अल-अक्सा मस्जिद को निशाना बना सकता है इजरायल?

जवाब- डिफेंस एक्सपर्ट कमर आगा के कहते हैं कि अल-अक्सा को निशाना बनाया जा सकता है, इसकी पूरी संभावना है। अल-अक्सा हमेशा से इजरायल के लोगों के निशाने पर रही है। अब इजरायल के पास बहाना था तो उन्होंने रमजान के बीच लोगों के लिए अल-अक्सा को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इस मामले पर हैरतअंगेज ढंग से सारे अरब मुल्क भी खामोश हैं। ऐसा लगता है सब अमेरिका के साथ मिले हुए हैं। कोई ऐसा बड़ा लीडर नहीं है जो इस बात का विरोध कर सके। अगर ऐसी स्थिति में इजरायल हमला करता है तो स्थानीय स्तर पर थोड़ा-बहुत विरोध होगा। इस जंग के पहले भी इजरायली फोर्सेस अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए वहां घुस चुकी हैं, जिस पर ज्यादातर अरब देश चुप ही रहे थे।

सवाल- ईरान की हेरिटेज साइट्स को निशाना क्यों बनाया जा रहा?

जवाब- अमेरिका और इजरायल का ये मोडस ऑपरेंडी रहा है। वे सिर्फ लोगों के मन में डर पैदा करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और हेरिटेज साइट्स को निशाना बनाते हैं ताकि सरकार पर दबाव पड़े। लेकिन यूनाइटेड नेशन्स को इस मामले में दखल देना चाहिए।

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Nepal Helicopter Crash: अंतिम विदाई से पहले हादसा! नेपाल के पहाड़ों में क्रैश हुए शव ले जा रहा हेलीकॉप्टर


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oi-Kumari Sunidhi Raj

Nepal Helicopter Crash: नेपाल के खोटांग जिला से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां एक हेलीकॉप्टर खेत में लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जानकारी के मुताबिक, यह हेलीकॉप्टर काठमांडू से उड़ान भरकर आया था और इसमें एक शव ले जाया जा रहा था। हादसा उस समय हुआ जब हेलीकॉप्टर खेत में उतरने की कोशिश कर रहा था।

राहत की बात यह है कि इस दुर्घटना में किसी भी व्यक्ति की मौत या घायल होने की खबर नहीं है। खोटांग की मुख्य जिला अधिकारी रेखा कंडेल ने एएनआई को बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन और बचाव टीमें मौके पर मौजूद हैं और पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।

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लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर काठमांडू से खोटांग जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में शव पहुंचाने के लिए उड़ान पर था। इलाके में हवाई पट्टी नहीं होने के कारण पायलट खेत में लैंडिंग करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान हेलीकॉप्टर अचानक असंतुलित हो गया और जमीन पर गिर पड़ा। हादसे में हेलीकॉप्टर को नुकसान पहुंचा, लेकिन बड़ा खतरा टल गया।

बताया जा रहा है कि हेलीकॉप्टर में एक शव रखा हुआ था, जिसे स्थानीय परिवार को सौंपा जाना था ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सके। नेपाल के पहाड़ी और दूरदराज इलाकों में इस तरह शव को हवाई रास्ते से ले जाना आम है, क्योंकि सड़क मार्ग हर जगह उपलब्ध नहीं होता।

अधिकारी ने दी अहम जानकारी

खोटांग की मुख्य जिला अधिकारी रेखा कंडेल ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “हेलीकॉप्टर खेत में उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ। यह काठमांडू से आया था और एक शव लेकर जा रहा था। इस घटना में किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई है। आगे की जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।” उनके अनुसार, हादसे के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इलाके को सुरक्षित कर लिया।

मौके पर पहुंची राहत टीम

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। टीम ने सबसे पहले हेलीकॉप्टर में मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और आसपास के लोगों को भी दूर किया गया। इसके बाद मलबे की जांच शुरू की गई और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

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बस किराया बढ़ा तो बुजुर्ग को पार्सल करने की कोशिश: बेंगलुरु में कूरियर खुला तो जिंदा निकला, पकड़ने जाने पर कहा- विरोध जता रहे थे




कर्नाटक के बेंगलुरु में एक परिवार ने बुजुर्ग को बोरे में बांधकर कूरियर से पार्सल करने की कोशिश की। परिवार ने यह कदम बस किराया बढ़ने के विरोध में उठाया। घटना मंगलवार शाम की है, जिसका वीडियो बुधवार को सामने आया। कूरियर सेंटर के कर्मचारियों को बोरे में हलचल दिखी तो उन्होंने उसे खोलकर देखा। अंदर से एक बुजुर्ग व्यक्ति निकला। इसके बाद कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के मुताबिक परिवार एक निजी कूरियर सेंटर पहुंचा और कहा कि वे बुजुर्ग को पार्सल करना चाहते हैं। बोरी में बंद होने के कारण बुजुर्ग को सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। दो तस्वीरों में देखिए कैसे पकड़ा गया पारर्सल… माफी के बाद चेतावनी देकर छोड़ा पुलिस की पूछताछ में बुजुर्ग की बेटी ने बताया कि यह पूरा मामला सोशल मीडिया रील बनाने के लिए किया गया था। परिवार ने बुजुर्ग को एक बोरी में डालकर यह स्टंट किया। परिवार ने पुलिस और लोगों से माफी मांगी। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह का स्टंट किसी की जान को खतरे में डाल सकता है और इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। हालांकि पुलिस ने इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया। परिवार से वीडियो के जरिए माफी मंगवाकर सख्त चेतावनी देकर छोड़ दिया। ———– रील बनाने के दौरान हुई घटना की ये खबर भी पढ़ें… रील बना रहे युवक ने खुद पर गोली चलाई, मौत:VIDEO शूट कर रहा दोस्त अरे नहीं–अरे नहीं चिल्लाया, पुलिस बोली– पिस्तौल दोस्त की थी दिल्ली के न्यू अशोका गार्डन में मंगलवार को रील बनाते वक्त एक युवक की मौत हो गई। वह अपने दोस्त की पिस्तौल लेकर रील बना रहा था। दोस्त ही इसे शूट कर रहा था। पुलिस का कहना है पिस्तौल का लाइसेंस वीडियो शूट करने वाले दोस्त के नाम पर है। मामले की जांच की जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…



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