Eid UL Fitr Date update : ईद-उल-फितर 2026 की तारीखों को लेकर भारत, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में उत्सुकता बनी हुई है। इस समय इंटरनेट पर लोग सबसे ज्यादा यही सर्च कर रहे हैं कि ईद-उल-फितर किस दिन मनाई जाएगी या ईद कब है? आपको बता दें कि सऊदी अरब और अधिकांश खाड़ी देशों में रमजान का पवित्र महीना बुधवार, 18 फरवरी को चांद का दीदार होने के बाद शुरू हुआ था।
तो वहींभारत में पहला रोजा गुरुवार, 19 फरवरी को रखा गया था। इस पवित्र महीने के दौरान मुस्लिम समुदाय सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा (उपवास) रखते हैं। ईद-उल-फितर, जिसे ‘मीठी ईद’ या ‘रोजा तोड़ने का त्योहार’ भी कहते हैं, रमजान के रोजे के अंतिम दिन मनाई जाती है, ये खुशी और इबादत का दिन है।
अगर संभावित तारीखों की बात करें, तो सऊदी अरब और खाड़ी देशों में ईद 20 मार्च, शुक्रवार को पड़ने की प्रबल संभावना है इसलिए भारत और पाकिस्तान में ईद की संभावित तारीख 21 मार्च बताई जा रही है।
ईद की तारीख इस्लामी चंद्र कैलेंडर और चांद दिखने पर निर्भर करती है, इसी कारण कई बार भारत में ईद अरब देशों से एक दिन बाद मनाई जाती है। इसके पीछे मुख्य कारण भौगोलिक अंतर है। दरअसल अरब देशों (जैसे Saudi Arabia) में चांद अक्सर भारत से पहले दिखाई दे जाता है। पृथ्वी की स्थिति और समय क्षेत्र अलग होने के कारण वहां चांद जल्दी नजर आता है।
Eid 2026 Moon Time: मध्य पूर्व और भारत के समय में होता है अंतर
मध्य पूर्व और भारत के समय में लगभग 2 से 3 घंटे का अंतर होता है, इस कारण चांद की स्थिति भी अलग समय पर दिखाई देती है। भारत में चांद देखने का फैसला स्थानीय रूयत-ए-हिलाल कमेटी करती है, जबकि अरब देशों में उनकी अपनी चांद देखने की व्यवस्था होती है।
भारत में ईद का त्योहार बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है, इस दिन लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज़ पढ़ते हैं, घरों में सेवइयां और मीठे पकवान बनते हैं तो वहीं बच्चों को ईदी दी जाती है। ये आपसी नफरत मिटाकर एक -दूसरे को प्यार से गले लगाने वाला पर्व है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।
Assam Assembly Elections 2026: असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है, दिग्गज नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है आपको बता दें कि बोरदोलोई कांग्रेस सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के काफी करीबी सहयोगी रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को अपना इस्तीफा पत्र सौंपा, उनके इस्तीफे वाले पत्र में लिखा है कि’वह बहुत दुख के साथ कांग्रेस के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं।’
इस्तीफे के पीछे की वजह
सांसद ने कहा “मैं अपने जीवन भर कांग्रेस से जुड़ा रहा लेकिन हाल ही में मेरी स्थिति इतनी कठिन हो गई कि मुझे यह फैसला लेना पड़ा। मैंने यह इस्तीफा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) अध्यक्ष को सौंप दिया है।” प्रद्युत बोरदोलोई की यह घोषणा असम कांग्रेस में आंतरिक मतभेदों और नेताओं के बीच बढ़ते तनाव की तरफ इशारा करती है।
सीएम हिमंत सरमा बोले-आगे संपर्क की संभावना
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि उनका फिलहाल कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरदोलोई से कोई संपर्क नहीं है, लेकिन भविष्य में बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राजधानी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया कि अभी तक उनकी प्रद्युत बोरदोलोई से कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बोरदोलोई ने केंद्रीय गृह मंत्री से संपर्क किया होता, तो उन्हें इसकी जानकारी जरूर होती। फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि उन्होंने किसी भाजपा नेता से बात की है।
Assam Congress Lok Sabha MP Pradyut Bordoloi tenders his resignation from the party
“With an overwhelming sense of sadness today, I hereby tender my resignation from all posts, privileges and the primary membership of the Indian National Congress, ” reads his resignation letter pic.twitter.com/gZeFA1SebN
#WATCH | Delhi | Assam Congress Lok Sabha MP Pradyut Bordoloi says, “Today, I have abandoned one of the most important principles of my life, and I am not happy with it…. However, I made this decision because I was being insulted on many issues by anyone who approached me from… https://t.co/ub6vTa6GuPpic.twitter.com/COKSyYauRx
राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को चांदी की कीमतों में 6,000 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी 1,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया। अखिल भारतीय सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, यह गिरावट मुनाफावसूली और कमजोर घरेलू धारणा के कारण हुई है।
सफेद धातु चांदी 2.28 फीसदी की गिरावट के साथ 2,56,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। मंगलवार को यह 2,62,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। इसी तरह, 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 0.62 फीसदी गिरकर 1,60,300 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। मंगलवार को यह 1,61,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने बताया कि व्यापारियों द्वारा मुनाफावसूली और भौतिक मांग में कमी के कारण सोने की कीमतों में गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 0.79 फीसदी बढ़कर 79.92 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। वहीं, सोना 0.32 फीसदी गिरकर 4,989.65 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
वैश्विक बाजार का क्या रुख?
लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक गौरव गर्ग ने कहा कि सर्राफा बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत निर्णय से पहले निवेशकों की धारणा के कारण है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ी ऊंची तेल कीमतों के कारण बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच यह एक सतर्क माहौल बना रहा है। निवेशक ब्याज दर के प्रक्षेपवक्र पर संकेतों के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के परिणाम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। इससे नीतिगत दृष्टिकोण और सोने-चांदी की कीमतों पर असर पड़ने की उम्मीद है।
घरेलू बाजार में गिरावट क्यों आई?
घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण व्यापारियों द्वारा मुनाफावसूली करना रहा। इसके साथ ही, भौतिक मांग में भी कमी देखी गई, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ा। अखिल भारतीय सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, बाजार में मंदी की घरेलू धारणा ने भी कीमतों को नीचे लाने में भूमिका निभाई। चांदी की कीमतों में भी इसी तरह की मुनाफावसूली और कमजोर मांग का असर देखा गया।
State Assembly Election West Bengal Assam Tamilnadu Kerala Puducherry Live
गुवाहाटी/कोलकाता/चेन्नई/तिरुवनंतपुरम1 घंटे पहले
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तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौजूदा विधायक को टिकट ना दिए जाने पर विरोध प्रदर्शन किया।
असम के कांग्रेस से लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा राज्य में विधानसभा चुनावों से ठीक 20 दिन पहले आया है। राज्य मीडिया विभाग के अध्यक्ष बेदाब्रत बोरा ने PTI को बताया कि बोरदोलोई ने अपना इस्तीफा पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेज दिया है।
राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री और नगांव निर्वाचन क्षेत्र से दो बार सांसद रहे बोरदोलोई के बेटे, 9 अप्रैल को होने वाले राज्य चुनावों के लिए मार्घेरिटा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। सांसद ने खड़गे को भेजे पत्र में कहा, आज अत्यंत दुख के साथ, मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं।
उधर, पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना में मौजूदा विधायक शौकत मोल्ला को कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र से टिकट न दिए जाने के बाद उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किया। TMC कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाए और नारेबाजी की।
असम CM बोले- अभी बोरदोलोई के संपर्क में नहीं, आगे हो सकता है
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि वह कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरदोलोई के संपर्क में नहीं हैं। बोरदोलोई ने मंगलवार को नगांव से मौजूदा सांसद के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। CM ने आगे कहा कि भविष्य में उनसे संपर्क होने की संभावना है।
TMC कार्यतकर्ताओं ने टायर जलाए, नारेबाजी की…
पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना में TMC कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाएं।
TMC कार्यकर्ताओं मौजूदा विधायक शौकत मोल्ला को टिकट ना दिए जाने पर नारेबाजी की।
ममता ने 74 विधायकों के टिकट काटे
तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की कुल 294 सीटों में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। बाकी 3 सीटें सहयोगी बीजीपीएम को दी हैं। ममता ने 74 विधायकों (करीब एक तिहाई) के टिकट काट दिए हैं। 15 विधायकों की सीटें बदली गई हैं।
TMC ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाई, 52 महिलाएं उम्मीदवार
ममता ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाई। जमीनी नेता और कार्यकर्ताओं पर ज्यादा भरोसा जताया। 2021 में 15 सेलिब्रिटी को टिकट दिया था। इस बार 2 सेलिब्रिटीज को टिकट मिला है।
लिस्ट में 52 महिलाएं हैं। 47 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। 40 साल से कम उम्र के 42 उम्मीदवारों को टिकट मिला। लिस्ट में 95 कैंडिटेट्स SC/ST कैंडिडेंट्स हैं।
खाड़ी की जंग पर केरल-तमिलनाडु में दंगल शुरू, प्रवासी नए ‘वोट फैक्टर’
खाड़ी देशों में करीब 90 लाख भारतीय हैं। इनमें से 35 लाख से ज्यादा केवल केरल और तमिलनाडु से हैं। युद्ध क्षेत्र में उनकी सुरक्षा और रोजगार जाने का खतरा इन राज्यों के लाखों परिवारों को सीधे प्रभावित कर रहा है। इसे देखते हुए सभी पार्टियां अपनी रणनीति बदल रही हैं।
एक ओर, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने तमाम अमले को सक्रिय कर दिया है। दूसरी ओर तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक और केरल में वामपंथी दलों की सरकारों ने भी केंद्र पर हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और आर्थिक संकट को बड़ा मुद्दा बना रही है। इस सबके बीच, भाजपा दक्षिण के दुर्ग में सेंध लगाने के लिए विकास और नए नारों के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश में है।
केरल में 40 तो तमिलनाडु में 50 सीट पर निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते बुधवार को केरल और तमिलनाडु में 16 हजार करोड़ की रेलवे सहित अनेक विकास योजनाओं का उदघाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से केरल में 35-40 तो तमिलनाडु में 45-50 विधानसभा क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
भाजपा ने ईसाई बहुल सीटों पर पिता-पुत्र की जोड़ी उतारी
केरल में भाजपा ने कोट्टायम जिले की दो महत्वपूर्ण ईसाई बहुल सीटों पर पिता-पुत्र की जोड़ी को मैदान में उतारा है। अनुभवी नेता पीसी जॉर्ज अपनी पारंपरिक सीट पूंजार से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके बेटे शोन जॉर्ज को पास की पाला सीट से टिकट दिया गया है। पीसी सात बार विधायक रह चुके हैं।
तमिलनाडु में पहले दो दिन में ही 23 करोड़ रुपए जब्त
तमिलनाडु में 15 मार्च से आचार संहिता लागू हो गई है। यहां दो दिनों में ही 23.28 करोड़ की नकदी और सामान जब्त किया गया है। 2021 में पिछले विधानसभा चुनाव में 428 करोड़ रुपए की जब्ती की गई थी।
4 मई को आएंगे 5 राज्यों को चुनाव के नतीजे
चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया। बंगाल में दो फेज 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में सिंगल फेज में चुनाव होंगे। तमिलनाडु में 23 अप्रैल, केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा। पांचों राज्यों का रिजल्ट 4 मई को आएगा।
राज्यवार विधानसभा चुनाव शेड्यूल…
4 राज्यों में SIR, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा नाम कटे
जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें SIR के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं। राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं।
वहीं पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। फिर केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) कराया गया था।
अब 5 राज्यों में चुनौती और मौजूदा स्थिति
पश्चिम बंगाल- 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री: 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं।
तमिलनाडु- भाजपा-कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आ सकीं: आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है।
फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही।
केरल- दक्षिण का इकलौता राज्य जहां लेफ्ट सत्ता में: देश का इकलौता राज्य है, जहां आज भी लेफ्ट सत्ता में है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा (LDF) ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन की कोशिश इस बार एंटी इनकम्बेंसी को कैश करानी की रहेगी।
वहीं, BJP अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट जीत पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां उसने त्रिशूर लोकसभा सीट जीती थी। इसके अलावा दिसंबर 2025 में भी BJP ने पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव जीता।
असम- कांग्रेस ने किया 8 पार्टियों से अलायंस: राज्य में 10 साल से भाजपा की सरकार है। पार्टी तीसरे चुनाव की तैयारियों में जुटी है। पीएम मोदी 6 महीने में 3 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। यहां पार्टी ने 126 सीटों में से 100+ सीटें जीतने का टारगेट रखा है। असम में बांग्लादेश, घुसपैठियों/सीमा सुरक्षा, असमिया पहचान जैसे मुद्दे हैं। भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने 10 पार्टियों के साथ गठबंधन किया है। इसमें वामपंथी और क्षेत्रीय दल शामिल हैं।
पुडुचेरी- सबसे कम सीटों वाली विधानसभा: 2021 में कांग्रेस सरकार गिरने के बाद AINRC-BJP गठबंधन ने सत्ता हासिल की और एन. रंगास्वामी एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। यह पहली बार था जब BJP सत्ता में सीधे तौर पर भागीदार बनी। इस बार कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन में वापसी की कोशिश कर रही है और सरकार गिरने के मुद्दे को एंटी-इनकम्बेंसी में बदलना चाहती है।
गुजरात-महाराष्ट्र सहित 6 राज्यों की 8 सीटों पर उपचुनाव
Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए आज यानी 18 मार्च 2026, बुधवार को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। अक्सर त्योहारों और सरकारी कैलेंडर की वजह से लोगों के मन में भ्रम रहता है कि आज दिल्ली में स्कूल, बैंक या सरकारी दफ्तर खुले हैं या नहीं।
ताजा जानकारी के अनुसार, आज 18 मार्च को दिल्ली में किसी भी प्रकार की आधिकारिक छुट्टी नहीं है। दिल्ली के सभी निजी और सरकारी स्कूल अपने निर्धारित समय पर खुलेंगे। साथ ही, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक भी पूरी तरह कार्यरत रहेंगे।
Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh: क्या खुला है और क्या बंद? (18 मार्च 2026)
आज बुधवार का दिन एक सामान्य कार्य दिवस (Working Day) है। दिल्ली में सभी महत्वपूर्ण सेवाएं और संस्थान नीचे दिए गए विवरण के अनुसार संचालित होंगे:
स्कूल और कॉलेज: दिल्ली सरकार और शिक्षा निदेशालय (DoE) की ओर से आज के लिए किसी अवकाश की घोषणा नहीं की गई है। सभी शैक्षणिक संस्थान खुले हैं।
बैंक और वित्तीय संस्थान: आज कोई भी बैंक हॉलिडे नहीं है। ग्राहक अपने बैंकिंग कार्यों के लिए ब्रांच जा सकते हैं। नेट बैंकिंग और UPI सेवाएं भी सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी।
सरकारी और निजी कार्यालय: दिल्ली सचिवालय समेत सभी सरकारी दफ्तर और प्राइवेट कंपनियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं।
सार्वजनिक परिवहन: दिल्ली मेट्रो (DMRC) और DTC बसों का परिचालन अपने नियमित समय और फ्रीक्वेंसी के साथ जारी है।
बाजार और मॉल्स: शहर के सभी व्यापारिक केंद्र और शॉपिंग मॉल्स आज खुले रहेंगे।
Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh: मार्च 2026 की आगामी प्रमुख छुट्टियां
भले ही आज वर्किंग डे है, लेकिन मार्च के बचे हुए दिनों में त्योहारों के कारण कई छुट्टियां आने वाली हैं। यदि आप बैंक जाने या किसी काम की योजना बना रहे हैं, तो इन तारीखों को नोट कर लें:
तारीख
दिन
अवसर
स्टेटस
21 मार्च
शनिवार
ईद-उल-फितर (Id-ul-Fitr)
बैंक और स्कूल बंद रहेंगे
26 मार्च
गुरुवार
राम नवमी (Ram Navami)
सरकारी छुट्टी
28 मार्च
शनिवार
चौथा शनिवार
बैंक अवकाश
31 मार्च
मंगलवार
महावीर जयंती
सार्वजनिक अवकाश
मार्च का महीना वित्तीय वर्ष (Financial Year) का आखिरी महीना होता है, इसलिए बैंक और टैक्स संबंधित कार्यों के लिए अंतिम तिथि का इंतजार न करें। आज शहर में ट्रैफिक और कामकाज सामान्य रहने की उम्मीद है।
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गुवाहाटी/कोलकाता/चेन्नई/तिरुवनंतपुरम6 मिनट पहले
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तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौजूदा विधायक को टिकट ना दिए जाने पर विरोध प्रदर्शन किया।
असम के कांग्रेस से लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा राज्य में विधानसभा चुनावों से ठीक 20 दिन पहले आया है। राज्य मीडिया विभाग के अध्यक्ष बेदाब्रत बोरा ने PTI को बताया कि बोरदोलोई ने अपना इस्तीफा पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेज दिया है।
राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री और नगांव निर्वाचन क्षेत्र से दो बार सांसद रहे बोरदोलोई के बेटे, 9 अप्रैल को होने वाले राज्य चुनावों के लिए मार्घेरिटा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। सांसद ने खड़गे को भेजे पत्र में कहा, आज अत्यंत दुख के साथ, मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं।
उधर, पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना में मौजूदा विधायक शौकत मोल्ला को कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र से टिकट न दिए जाने के बाद उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किया। TMC कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाए और नारेबाजी की।
असम CM बोले- अभी बोरदोलोई के संपर्क में नहीं, आगे हो सकता है
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि वह कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरदोलोई के संपर्क में नहीं हैं। बोरदोलोई ने मंगलवार को नगांव से मौजूदा सांसद के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। CM ने आगे कहा कि भविष्य में उनसे संपर्क होने की संभावना है।
TMC कार्यतकर्ताओं ने टायर जलाए, नारेबाजी की…
पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना में TMC कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाएं।
TMC कार्यकर्ताओं मौजूदा विधायक शौकत मोल्ला को टिकट ना दिए जाने पर नारेबाजी की।
ममता ने 74 विधायकों के टिकट काटे
तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की कुल 294 सीटों में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। बाकी 3 सीटें सहयोगी बीजीपीएम को दी हैं। ममता ने 74 विधायकों (करीब एक तिहाई) के टिकट काट दिए हैं। 15 विधायकों की सीटें बदली गई हैं।
TMC ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाई, 52 महिलाएं उम्मीदवार
ममता ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाई। जमीनी नेता और कार्यकर्ताओं पर ज्यादा भरोसा जताया। 2021 में 15 सेलिब्रिटी को टिकट दिया था। इस बार 2 सेलिब्रिटीज को टिकट मिला है।
लिस्ट में 52 महिलाएं हैं। 47 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। 40 साल से कम उम्र के 42 उम्मीदवारों को टिकट मिला। लिस्ट में 95 कैंडिटेट्स SC/ST कैंडिडेंट्स हैं।
खाड़ी की जंग पर केरल-तमिलनाडु में दंगल शुरू, प्रवासी नए ‘वोट फैक्टर’
खाड़ी देशों में करीब 90 लाख भारतीय हैं। इनमें से 35 लाख से ज्यादा केवल केरल और तमिलनाडु से हैं। युद्ध क्षेत्र में उनकी सुरक्षा और रोजगार जाने का खतरा इन राज्यों के लाखों परिवारों को सीधे प्रभावित कर रहा है। इसे देखते हुए सभी पार्टियां अपनी रणनीति बदल रही हैं।
एक ओर, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने तमाम अमले को सक्रिय कर दिया है। दूसरी ओर तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक और केरल में वामपंथी दलों की सरकारों ने भी केंद्र पर हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और आर्थिक संकट को बड़ा मुद्दा बना रही है। इस सबके बीच, भाजपा दक्षिण के दुर्ग में सेंध लगाने के लिए विकास और नए नारों के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश में है।
केरल में 40 तो तमिलनाडु में 50 सीट पर निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते बुधवार को केरल और तमिलनाडु में 16 हजार करोड़ की रेलवे सहित अनेक विकास योजनाओं का उदघाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से केरल में 35-40 तो तमिलनाडु में 45-50 विधानसभा क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
भाजपा ने ईसाई बहुल सीटों पर पिता-पुत्र की जोड़ी उतारी
केरल में भाजपा ने कोट्टायम जिले की दो महत्वपूर्ण ईसाई बहुल सीटों पर पिता-पुत्र की जोड़ी को मैदान में उतारा है। अनुभवी नेता पीसी जॉर्ज अपनी पारंपरिक सीट पूंजार से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके बेटे शोन जॉर्ज को पास की पाला सीट से टिकट दिया गया है। पीसी सात बार विधायक रह चुके हैं।
तमिलनाडु में पहले दो दिन में ही 23 करोड़ रुपए जब्त
तमिलनाडु में 15 मार्च से आचार संहिता लागू हो गई है। यहां दो दिनों में ही 23.28 करोड़ की नकदी और सामान जब्त किया गया है। 2021 में पिछले विधानसभा चुनाव में 428 करोड़ रुपए की जब्ती की गई थी।
4 मई को आएंगे 5 राज्यों को चुनाव के नतीजे
चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया। बंगाल में दो फेज 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में सिंगल फेज में चुनाव होंगे। तमिलनाडु में 23 अप्रैल, केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा। पांचों राज्यों का रिजल्ट 4 मई को आएगा।
राज्यवार विधानसभा चुनाव शेड्यूल…
4 राज्यों में SIR, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा नाम कटे
जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें SIR के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं। राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं।
वहीं पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। फिर केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) कराया गया था।
अब 5 राज्यों में चुनौती और मौजूदा स्थिति
पश्चिम बंगाल- 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री: 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं।
तमिलनाडु- भाजपा-कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आ सकीं: आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है।
फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही।
केरल- दक्षिण का इकलौता राज्य जहां लेफ्ट सत्ता में: देश का इकलौता राज्य है, जहां आज भी लेफ्ट सत्ता में है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा (LDF) ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन की कोशिश इस बार एंटी इनकम्बेंसी को कैश करानी की रहेगी।
वहीं, BJP अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट जीत पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां उसने त्रिशूर लोकसभा सीट जीती थी। इसके अलावा दिसंबर 2025 में भी BJP ने पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव जीता।
असम- कांग्रेस ने किया 8 पार्टियों से अलायंस: राज्य में 10 साल से भाजपा की सरकार है। पार्टी तीसरे चुनाव की तैयारियों में जुटी है। पीएम मोदी 6 महीने में 3 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। यहां पार्टी ने 126 सीटों में से 100+ सीटें जीतने का टारगेट रखा है। असम में बांग्लादेश, घुसपैठियों/सीमा सुरक्षा, असमिया पहचान जैसे मुद्दे हैं। भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने 10 पार्टियों के साथ गठबंधन किया है। इसमें वामपंथी और क्षेत्रीय दल शामिल हैं।
पुडुचेरी- सबसे कम सीटों वाली विधानसभा: 2021 में कांग्रेस सरकार गिरने के बाद AINRC-BJP गठबंधन ने सत्ता हासिल की और एन. रंगास्वामी एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। यह पहली बार था जब BJP सत्ता में सीधे तौर पर भागीदार बनी। इस बार कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन में वापसी की कोशिश कर रही है और सरकार गिरने के मुद्दे को एंटी-इनकम्बेंसी में बदलना चाहती है।
गुजरात-महाराष्ट्र सहित 6 राज्यों की 8 सीटों पर उपचुनाव
Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पर्व नवसंवत्सर (हिंदू नववर्ष) का प्रतीक है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, मान्यता है कि इस दौरान विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और सभी कष्ट दूर होते हैं।
माना जाता है कि नवरात्रि में माता की कृपा पाने के लिए विधिपूर्वक पूजन करना अत्यंत आवश्यक होता है जिसके लिए पूजा सामग्री की व्यवस्था करनी होती है। यहां हम आपके लिए पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट,जिसे देखकर आप अपनी पूजा अच्छे से कर सकते हैं।
Chaitra Navratri 2026 Puja Samagri : चैत्र नवरात्रि पूजा सामग्री
सबसे पहले सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को शुद्ध करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसके ऊपर जल से भरा कलश रखें। कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें।
दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें
मां दुर्गा का ध्यान करते हुए रोली, चावल, फूल अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। प्रतिदिन मां के अलग-अलग स्वरूप की पूजा करें और भोग लगाएं। नवरात्रि के अंतिम दिन (अष्टमी या नवमी) कन्या पूजन करें और उन्हें भोजन कराकर आशीर्वाद लें।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बातें करें।
केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन के लिए गठित आठवें वेतन आयोग ने अपनी 18-सूत्रीय प्रश्नावली पर सुझाव और प्रतिक्रियाएं जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। जहां एक ओर आयोग ने विभिन्न हितधारकों को अपनी राय रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया है, वहीं दूसरी ओर भारतीय रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ (आईआरटीएसए) ने आयोग को पत्र लिखकर प्रश्नावली में कई महत्वपूर्ण बदलावों और भत्तों व पेंशन से जुड़े नए विषयों को शामिल करने की पुरजोर मांग की है।
आठवें वेतन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी प्रश्नावली का उत्तर देने की समय सीमा 16 मार्च 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी है। आयोग की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इस प्रश्नावली में वेतन, पेंशन, भत्तों में संशोधन और रोजगार की शर्तों से जुड़े 18 सवाल शामिल हैं, जिन पर मंत्रालयों, विभागों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से फीडबैक मांगा गया है। आयोग को अपनी सिफारिशों की अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
आईआरटीएसए की प्रमुख मांगें क्या हैं?
डेडलाइन बढ़ने के बीच, आईआरटीएसए के महासचिव केवी रमेश ने आठवें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना देसाई को लिखे पत्र में प्रश्नावली के वर्तमान स्वरूप को अपर्याप्त बताया है। रेलवे यूनियन की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
भत्तों के दायरे का विस्तार: यूनियन का तर्क है कि सातवें वेतन आयोग ने 196 प्रकार के भत्तों पर विचार किया था, लेकिन आठवें आयोग की प्रश्नावली की थीम में केवल 12 समूहों का जिक्र है। इसे विस्तारित रूप दिए जाने की जरूरत है।
पेंशन से जुड़े मुद्दे: यूनियन ने ध्यान दिलाया है कि वर्तमान प्रश्नावली में पेंशन और पारिवारिक पेंशन के बारे में कोई विशेष उल्लेख नहीं है, जिसे तुरंत शामिल किया जाना चाहिए।
कर्मचारियों का नया वर्गीकरण: समय के साथ आई तकनीकी और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए ग्रुप ए, बी और सी कर्मचारियों की मौजूदा वर्गीकरण संरचना की व्यापक समीक्षा की मांग की गई है।
आईआरटीएसए ने ‘कैरियर प्रोग्रेसन’ के मुद्दे पर भी विशेष ध्यान आकर्षित किया है। यूनियन का कहना है कि प्रश्नावली में केवल ‘मोडिफाइड एश्योर्ड कैरियर प्रोग्रेसन स्कीम’ का जिक्र है, जबकि मुख्य फोकस कार्यात्मक पदोन्नति पर होना चाहिए।
संघ ने सुझाव देने के लिए तय की गई सीमाओं पर क्या कहा?
इसके अलावा, डिजिटल सुझाव प्रस्तुत करने के लिए तय की गई तकनीकी सीमाओं पर भी आपत्ति जताई गई है। यूनियन ने नौ विषयों के लिए निर्धारित 3500 शब्दों की सीमा को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने और अटैचमेंट के आकार पर लगी पाबंदी खत्म करने की मांग की है। साथ ही, ऑनलाइन सबमिशन के अलावा यूनियनों को भौतिक रूप से भी ज्ञापन सौंपने की अनुमति देने का आग्रह किया गया है।
आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों और लाखों पेंशनभोगियों को वेतन वृद्धि और सुविधाओं से बड़ी उम्मीदें हैं। रेलवे यूनियन आईआरटीएसए) की ओर से उठाई गई मांगें इस बात का संकेत देते हैं कि कर्मचारी संगठन इस पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समावेशी और व्यावहारिक बनाना चाहते हैं। 31 मार्च तक सुझावों के संकलन के बाद, आयोग की ओर से इस दिशा में उठाए जाने वाले कदम देश के केंद्रीय कर्मचारियों के भविष्य का आर्थिक ढांचा तय करेंगे।
Ashwini Kalsekar: टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में अपने दमदार अभिनय के लिए पहचानी जाने वाली अश्विनी कालसेकर ने हाल ही में अपनी जिंदगी के उस पहलू पर खुलकर बात की, जिसके बारे में वह अब तक कम ही बोली थीं।
निजी जिंदगी के दर्द पर खुलकर बोलीं अश्विनी कालसेकर पर्दे पर सशक्त किरदार निभाने वाली इस एक्ट्रेस ने अपनी निजी जिंदगी के दर्द को शेयर करते हुए बताया कि मां बनने का सपना अधूरा रह जाना उनके लिए कितना भावनात्मक सफर रहा है, एक ऐसा सच, जो उनके दिल में आज भी कहीं गहराई से बसता है। उन्होंने बताया है कि वह जिंदगीभर मां नहीं बन पाईं और ये दर्द आज भी उनके दिल में कहीं न कहीं मौजूद है।
मां बनने की ख्वाहिश रह गई अधूरी
अश्विनी कालसेकर ने बताया कि वह और उनके पति मुराली शर्मा (Murali Sharma) बच्चे चाहते थे लेकिन ये सपना कभी पूरा नहीं हो सका। हॉटरफ्लाई को दिए इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने कहा कि उन्होंने कोशिश जरूर की लेकिन उनकी स्वास्थ्य समस्या इस राह में सबसे बड़ी बाधा बन गई।
किडनी की बीमारी बनी सबसे बड़ी वजह
अश्विनी कालसेकर ने खुलासा किया कि उन्हें किडनी से जुड़ी समस्या थी जिसकी वजह से प्रेग्नेंसी उनके लिए बेहद जोखिम भरी हो सकती थी। डॉक्टरों ने साफ कहा था कि अगर वह मां बनने की कोशिश करती हैं तो इससे उनकी खुद की जान या बच्चे की सेहत को खतरा हो सकता है। यही वजह रही कि उन्हें ये कठिन फैसला लेना पड़ा।
‘सरोगेसी की भी नहीं ले पाई मदद’
अश्विनी कालसेकर ने ये भी बताया कि उस समय सरोगेसी इतना आम विकल्प नहीं था और अगर था भी तो आर्थिक स्थिति इसकी अनुमति नहीं देती थी। अश्विनी के मुताबिक उस दौर में वह और उनके पति अपने करियर को संभालने और जीवन को स्थिर करने में लगे थे इसलिए ये विकल्प अपनाना संभव नहीं हो पाया।
‘मां न बन पाना बहुत दुखद होता है’
-एक्ट्रेस अश्विनी कालसेकर का मानना है कि मां न बन पाना उनके लिए दुखद जरूर है लेकिन अब वह इसे किस्मत का हिस्सा मान चुकी हैं। उन्होंने कहा कि वह पारंपरिक सोच रखती हैं और जीवन के उस पूरे चक्र को जीना चाहती थीं लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
-अश्विनी कालसेकर ने बताया कि अब वह अपने माता-पिता और सास-ससुर की देखभाल को ही अपना कर्तव्य और खुशी मानती हैं। उनके लिए यही लोग उनके बच्चों जैसे हैं, जिनकी सेवा करके उन्हें संतुष्टि मिलती है।
पालतू जानवरों में ढूंढा मां बनने का एहसास
-मां बनने का एहसास पाने के लिए अश्विनी कालसेकर ने अपने पालतू कुत्तों को ही बच्चों की तरह अपनाया। वह उनकी देखभाल वैसे ही करती हैं जैसे कोई मां अपने बच्चों की करती है। यहां तक कि उनके लिए उन्होंने एक नैनी भी रखी हुई है।
-अश्विनी कालसेकर की ये कहानी उन कई महिलाओं की भावनाओं को दर्शाती है, जो किसी वजह से मां नहीं बन पातीं। दर्द और अधूरेपन के बावजूद उन्होंने अपनी जिंदगी को सकारात्मक नजरिए से अपनाया और मजबूत होकर आगे बढ़ीं।
ओडिशा में कटक के श्रीराम चंद्र भंज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 14-15 मार्च की दरम्यानी रात करीब 3 बजे आग लग गई। हादसे में 10 मरीजों की मौत हो गई है। इनमें से 7 ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, 3 की मौत इलाज के दौरान हुई। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया है।
आग पहली मंजिल पर ट्रॉमा केयर के ICU में लगी थी। यहां करीब 23 मरीज भर्ती थे। उन्हें बचाने में अस्पताल के कम से कम 11 कर्मचारी झुलस गए।
एक मरीज के रिश्तेदार ने बताया- आग बहुत तेजी से फैल गई थी। उन्होंने वहां मौजूद कुछ और मरीजों के रिश्तेदारों ने मिलकर 8 से 10 मरीजों को बाहर निकालने में मदद की।
उनका कहना था कि मरीजों की मदद के लिए स्टाफ में बहुत कम लोग थे। इसलिए समय रहते मरीजों को बाहर नहीं निकाला जा सका।
पहले देखें, हादसे की तीन तस्वीरें…
हादसे के बाद अस्पताल के बाहर मची अफरातफरी।
हादसे की खबर लगते ही मरीजों के परिजन हॉस्पिटल के बाहर जमा हो गए।
परिजन को ही ऑक्सीजन सिलेंडर समेत बाकी जरूरी सामान लाना पड़ा।
अस्पताल में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं थे
घटना के बाद परिजन में काफी गुस्सा देखने को मिला। लोग सवाल उठा रहे थे कि ICU में फायर सेफ्टी का सही इंतजाम नहीं था। एक मृतक के भाई का कहना था कि अगर समय पर सही व्यवस्था होती, तो शायद कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
उन्होंने बताया कि आग पहली मंजिल पर ही लगी थी। लेकिन घना धुआं बाकी मंजिलों तक फैल गया था। इससे कर्मचारियों को अलग-अलग वार्डों से मरीजों को बाहर निकालना पड़ा।
कर्मचारियों ने बताया कि फायर टेंडर को घटनास्थल तक पहुंचने में लगभग 30 मिनट लगे, जबकि फायर स्टेशन एससीबी परिसर के अंदर ही मौजूद था।
अस्पताल के डॉक्टर और नर्सों ने तुरंत मरीजों को वहां से बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। इसी बीच फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया गया।
अलार्म या पब्लिक अनाउंसमेंट सुनाई नहीं दिया
एक मरीज के रिलेटिव ने बताया कि आईसीयू में कोई फायर प्रोटेक्शन नहीं था। आग लगने के वक्त उन्हें किसी तरह का अलार्म या पब्लिक अनाउंसमेंट भी सुनाई नहीं दिया। अगर समय रहते अलर्ट मिलता, तो शायद हालात इतने खराब नहीं होते।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि आग लगने के बाद शुरुआती कुछ मिनटों तक लोगों को यह समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। धुआं बढ़ने के बाद ही लोगों में घबराहट फैली और तब जाकर मरीजों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई।
डॉक्टर ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार किया
डॉक्टर और स्टाफ की भूमिका जानने के बाद हम पोस्टमॉर्टम काउंटर के सामने मौजूद एक डॉक्टर से भी बात करने की कोशिश की। हम उनसे पूछना चाहते थे कि आखिर कुल कितने लोगों की मौत हुई है। क्योंकि वहां मौजूद कुछ लोग कह रहे थे कि जितनी संख्या मीडिया में सामने आ रही है, संख्या कहीं उससे ज्यादा है।
लेकिन जब हमने डॉक्टर से सवाल पूछने की कोशिश की, तो उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया और कुछ ही देर बाद मोटरसाइकिल के पीछे बैठकर वहां से चले गए।
चश्मदीदों ने बताया कि धुआं तेजी से फैलने के कारण ICU में भर्ती कई मरीजों की हालत बिगड़ने लगी थी। जो मरीज पहले से गंभीर थे और ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर थे, उन्हें सांस लेने में और ज्यादा परेशानी हो रही थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में करीब 10 मरीजों की मौत हो गई।
सुबह जब आग बुझी तब ICU के अंदर बेड और मशीनें जले हुए नजर आए।
10 साल पहले भी हुई 22 मौतें, दोबारा हुआ ऐसा हादसा
2016 में ओडिशा में भुवनेश्वर के एक निजी SUM हॉस्पिटल में आग लगी थी। इसमें 22 मरीजों की मौत हो गई थी। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल के मालिक के करीबी थे। इसलिए उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। अस्पताल के मालिक को भी हत्या के केस में जेल जाना पड़ा था।
2016 में SUM हॉस्पिटल की घटना के बाद उसके मालिक मनोज को गिरफ्तार किया गया था। आज SCB मेडिकल की इस घटना के बाद लोगों के मन में यही सवाल है- इस बार जिम्मेदार कौन होगा और सरकार किस पर कार्रवाई करेगी?
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हॉस्पिटल में आग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
जयपुर के SMS हॉस्पिटल में आग से 8 मरीजों की मौत हुई थी, ट्रॉमा सेंटर के ICU में शॉर्ट सर्किट से हादसा
अक्टूबर 2025 में जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में भी आग लगी थी। इस हादसे में 8 मरीजों की मौत हुई थी। हादसे के समय आईसीयू में 11 मरीज थे। हादसे का शिकार मरीज वेंटिलेटर पर थे। यह भी पता चला था कि स्टोर रूम में लगे स्मोक डिटेक्टर ने सही से काम नहीं किया। इसके कारण अलार्म सिस्टम समय पर एक्टिवेट नहीं हुआ। पढ़ें पूरी खबर…