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रिटायर्ड IPS, DGP और सैन्य अफसरों का राहुल को लेटर: कहा- संसद परिसर में आचरण नियमों के खिलाफ, देश से माफी मांगें




204 रिटायर्ड सैन्य अधिकारी, IPS, IAS और वकीलों ने राहुल गांधी को ओपन लेटर लिखकर देश से माफी मांगने को कहा है। उन्होंने लिखा कि 12 मार्च को संसद परिसर में किया गया विरोध संसदीय नियमों और संसद की गरिमा के खिलाफ था। ओपन लेटर में कहा गया कि संसद परिसर में प्रदर्शन या विरोध न करने को लेकर स्पीकर की ओर से पहले ही निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में विरोध किया। लेटर में आगे कहा कि राहुल गांधी कुछ सांसदों के साथ संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय और बिस्कुट लेते हुए विरोध करते दिखाई दिए। यह संसदीय अधिकार और संसद की मर्यादा की अनदेखी है। संसद की सीढ़ियां राजनीतिक प्रदर्शन का मंच नहीं हैं। दरअसल, 12 मार्च को विपक्ष ने LPG संकट को लेकर सकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस दौरान राहुल गांधी कुछ सांसदों के साथ संसद की सीढ़ियों पर बैठे दिखाई दिए। वे वहां चाय और बिस्कुट लेते हुए विरोध कर रहे थे। संसद परिसर के हर हिस्से में मर्यादा जरूरी लेटर में कहा गया कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है और उसकी गरिमा हर समय बनी रहनी चाहिए। संसदीय परंपराओं के मुताबिक लोकसभा और राज्यसभा कक्ष ही नहीं, बल्कि संसद परिसर की सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी भी उसी संस्था का हिस्सा हैं। इसलिए वहां भी सांसदों का आचरण उसी मर्यादा के अनुरूप होना चाहिए। लेटर में कहा गया कि इस तरह की घटनाएं सार्वजनिक चर्चा के स्तर को गिराती हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं। लेटर पर 204 लोगों के सिग्नेचर यह ओपन लेटर जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद ने जारी किया है। लेटर पर 204 लोगों ने साइन किए हैं। इनमें 116 रिटायर्ड सैन्य अधिकारी और 84 पूर्व नौकरशाह शामिल हैं। इसके अलावा चार पूर्व राजदूत और चार सीनियर वकील भी सिग्रेचर करना वालों में शामिल हैं। लेटर में राहुल गांधी से अपने व्यवहार पर आत्ममंथन करने और देश से माफी मांगने को कहा गया है। शाह ने कहा- राहुल दुनिया भर में भारत की छवि खराब कर रहे अमित शाह ने 15 मार्च को असम के गुवाहाटी में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि राहुल कभी-कभी संसद के दरवाजे पर बैठकर चाय और पकौड़े खाते हैं। क्या उन्हें यह एहसास नहीं है कि नाश्ता करने के लिए कौन-सी जगह उचित होती है? शाह ने आगे कहा कि संसद हमारे लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है। वहां बैठकर विरोध करना भी लोकतांत्रिक परंपरा नहीं है। लेकिन आप तो विरोध से भी दो कदम आगे बढ़ गए हैं। आप वहां चाय और पकौड़े खा रहे हैं। इससे दुनिया भर में भारत की छवि खराब हो रही है। पूर्व PM देवगौड़ा ने भी राहुल के प्रदर्शन की आलोचना की पूर्व प्रधानमंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी देवगौड़ा ने संसद में विपक्ष के हंगामे के तरीके को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेटर लिखा। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना संसद उनके विरोध की आलोचना की। 92 साल के देवगौड़ा ने दो पेज के लेटर में राहुल के हाल के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार नारेबाजी, पोस्टर दिखाने और धरना-प्रदर्शन से लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है। संसद परिसर में सीढ़ियों पर बैठकर चाय-नाश्ते के साथ प्रदर्शन करना संस्थान की गरिमा को कम करता है। पढ़े पूरी खबर… ———— राहुल गांधी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… राहुल बोले-DU में जाति देखकर इंटरव्यू में फेल करते हैं:यूनिवर्सिटी ने कहा- बयान से पहले फैक्ट चेक करें, एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट से होते हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार को कांशीराम जयंती पर हुए संविधान सम्मेलन में हिस्सा लेने लखनऊ पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में जाति देखकर इंटरव्यू में फेल करने का आरोप लगाया। राहुल ने कहा- “मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी गया था। इंटरव्यू में बच्चों को निकालने का तरीका है। आपकी जाति क्या है भैया, आप इंटरव्यू में फेल।” पूरी खबर पढ़ें…



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Parliament Budget Session Day 7 Highlights: 8 सांसदों का निलंबन वापस, कई अहम रिपोर्ट भी पेश


India

oi-Smita Mugdha

Parliament Budget Session Day 7 Highlights: संसद का बजट सत्र काफी हंगामेदार रहा है और दूसरे चरण में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। विपक्षी दलों के साथ जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए स्पीकर ओम बिरला ने अहम बैठक की थी। इसके बाद पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित 8 विपक्षी सांसदों का सस्पेंशन वापस ले लिया गया। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान कई मुद्दों पर सांसदों ने सवाल पूछे, जबकि राज्यसभा में कई अहम रिपोर्ट पेश किए गए।

राज्यसभा में सरकार से उड़ान यात्री कैफे योजना को सभी एयरपोर्ट पर लागू करने का सुझाव दिया गया। विपक्षी सांसदों ने एलपीजी संकट और मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारत की स्थिति को लेकर सरकार पर हमला बोला। हालांकि, गतिरोध के बावजूद दोनों सदनों की कार्रवाई होती रही।

Parliament Budget Session Day 7 Highlights

Parliament Budget Session Day 7 Highlights: विपक्षी सांसदों का निलंबन खत्म

4 फरवरी को बजट सत्र के बाकी हिस्से के लिए 8 विपक्षी सांसदों को निलंबित किया गया था। आरोप था कि सदन में हंगामे के दौरान उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया और अध्यक्ष की कुर्सी की ओर कागज फेंके थे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के साथ हुई बैठक के बाद इन सांसदों का निलंबन वापस ले लिया गया है। अब निलंबन हटने के बाद सांसदों को फिर से संसद की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति मिल गई है।

Budget Session Day 7: लोकसभा में प्रश्नकाल, राज्यसभा में कई अहम रिपोर्ट पेश

संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में प्रश्नकाल चला, जिसमें सांसदों ने सरकार से विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे। इसमें रेलवे, हवाई यात्राओं समेत एम्स से जुड़े मुद्दों पर सांसदों ने प्रश्न पूछे। राज्यसभा में संसदीय समितियों की कई अहम रिपोर्ट पेश की गईं। इन रिपोर्टों में अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़े विषयों और नीतियों की समीक्षा शामिल है।

Budget Session: टैक्स व्यवस्था और बैंक जुर्माने में सुधार की मांग

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने संसद में आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए वित्तीय व्यवस्था में सुधार के लिए तीन अहम सुझाव दिए। उन्होंने अपने भाषण का शीर्षक आई डू नॉट ऑपोज, आई राइज टू प्रपोज रखा और कहा कि उनका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं बल्कि समाधान देना है। चड्ढा ने कहा कि देश की आर्थिक व्यवस्था को ज्यादा मानवीय और न्यायसंगत बनाने की जरूरत है।

महिला आरक्षण अधिनियम पर सर्वदलीय बैठक की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू से कहा है कि महिला आरक्षण अधिनियम के ‘क्रियान्वयन के तौर-तरीकों और रूपरेखा’ पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक जल्द से जल्द बुलाई जानी चाहिए। रिजिजू के लिखे पत्र का जवाब देते हुए, खरगे ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’, सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था।



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IPL 2026 से बाहर होने पर भी हर्षित राणा को मिलेंगे करोड़ों रुपये! KKR नहीं तो फिर कौन उठाएगा सैलरी का खर्च?


Cricket

oi-Amit Kumar

IPL 2026 Harshit Rana: आईपीएल 2026 का सीजन शुरू होने से पहले ही कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) मुश्किलों में फंस गई है। टीम के कई खिलाड़ियों के एक साथ चोटिल होने से फ्रेंचाइजी की चिंताएं बढ़ गई है। बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान की जगह टीम ने जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी को अपने साथ जोड़ने का काम किया है।

चोटिल खिलाड़ियों ने बढ़ाई केकेआर की मुश्किलें (IPL 2026 Harshit Rana)

श्रीलंका के मथीश पथिराना भी चोटिल होने के कारण आईपीएल 2026 से दूर ही रहने वाले हैं। केकेआर ने मेगा ऑक्शन में भारी बोली लगाकर मथीश पथिराना को खरीदने में कामयाबी हासिल की थी। लेकिन इस सीजन चोट के कारण उनका खेलना काफी मुश्किल दिखाई दे रहा है। वहीं भारतीय तेज गेंदबाज हर्षित राणा भी आईपीएल में केकेआर के लिए खेलते हैं। लेकिन मौजूदा समय में राणा भी चोट की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।

IPL 2026 1

बाहर होने के बाद भी मिलेंगे करोड़ों रुपये

घुटने की गंभीर चोट के कारण हर्षित राणा टी-20 वर्ल्ड कप से भी बाहर हो गए थे। अब वह इस सीजन पूरे आईपीएल से भी बाहर होने के कगार पर है। इसके बावजूद हर्षित राणा को उनके 4 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैंक्ट की पूरी राशि मिलेगी। यह मामला भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की सुरक्षा और उनके हितों को लेकर बने कड़े नियमों को फिर से सुर्खियों में ले आया है।

BCCI की बीमा पॉलिसी से होगा फायदा

हर्षित राणा को यह चोट फरवरी 2026 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप के वॉर्म-अप मैच के दौरान लगी थी। बीसीसीआई की 2011 से लागू बीमा पॉलिसी के तहत अगर कोई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए घायल होता है तो उसके आईपीएल सैलरी की पूरी जिम्मेदारी बोर्ड उठाता है। हर्षित राणा मौजूदा समय में BCCI के ग्रेड-सी अनुबंध में शामिल हैं।

राणा को यह चोट नेशनल ड्यूटी के दौरान लगी है, इसलिए उनकी 4 करोड़ की सैलरी का भुगतान केकेआर नहीं, बल्कि बीसीसीआई अपनी बीमा पॉलिसी के जरिए करेगा। यह नियम इसलिए बनाया गया था ताकि खिलाड़ी देश और फ्रेंचाइजी के बीच वित्तीय लाभ के कारण किसी दबाव में न आएं। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक हर्षित के दाएं घुटने में ‘लिगामेंट स्ट्रेन’ और ‘लेटरल मेनिस्कस टियर’ हुआ था। फरवरी 2026 में उनकी सफल सर्जरी की गई है। वर्तमान में वह बेंगलुरु स्थित BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैब की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।



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धरती पर उतरा रंगों का समंदर, कश्मीर का ट्यूलिप गार्डन खुला, सही समय चूक गए तो पछताएंगे


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Kashmir Tulip Garden: कश्मीर का ट्यूलिप गार्डन खुलते ही पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है. मार्च-अप्रैल इसका सबसे अच्छा समय है. शानदार नजारे, आसान पहुंच और रंगीन अनुभव इसे खास ट्रैवल डेस्टिनेशन बनाते हैं.

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कश्मीर ट्यूलिप गार्डन

Kashmir Tulip Garden: कभी सोचा है कि धरती पर रंगों का समंदर कैसा दिखता होगा? अगर नहीं, तो इस बार कश्मीर की वादियां आपको इसका जवाब दे सकती हैं. श्रीनगर में ट्यूलिप गार्डन खुलते ही यहां का नजारा बदल गया है बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच लाखों रंग-बिरंगे फूल ऐसे खिले हैं, जैसे किसी कलाकार ने घाटी को नई जिंदगी दे दी हो. हर साल कुछ ही हफ्तों के लिए खुलने वाला यह गार्डन पर्यटकों के लिए किसी सपने जैसा अनुभव बन जाता है. सुबह की हल्की धूप में खिलते ट्यूलिप, ठंडी हवा और दूर तक फैली खुशबू यह सब मिलकर एक ऐसा दृश्य रचते हैं जिसे शब्दों में बांधना आसान नहीं. यही वजह है कि गार्डन खुलते ही देश-विदेश से लोग यहां पहुंचने लगे हैं और सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें छा गई हैं.

कब जाएं ट्यूलिप गार्डन?
ट्यूलिप गार्डन घूमने का सबसे सही समय मार्च के आखिर से लेकर अप्रैल के मध्य तक होता है. इसी दौरान फूल पूरी तरह खिले होते हैं और हर रंग अपनी चमक पर होता है. हालांकि मौसम के मिजाज के कारण हर साल तारीखों में थोड़ा बदलाव हो सकता है, लेकिन अप्रैल का पहला या दूसरा हफ्ता आमतौर पर सबसे बेहतरीन माना जाता है. अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो सुबह का समय सबसे खास होता है, जब भीड़ कम और रोशनी नरम होती है.

क्यों खास है यह गार्डन?
यह गार्डन सिर्फ बड़ा ही नहीं, बल्कि अपनी बनावट के कारण भी बेहद खास है. यहां ट्यूलिप्स को अलग-अलग लेयर में लगाया गया है, जिससे दूर से देखने पर पूरा इलाका एक खूबसूरत पेंटिंग जैसा लगता है. लाल, पीले, गुलाबी, बैंगनी हर रंग अपनी कहानी कहता है. इसके अलावा यहां हर साल ट्यूलिप फेस्टिवल भी आयोजित किया जाता है, जिसमें स्थानीय संस्कृति, कश्मीरी खानपान और लोक कला की झलक देखने को मिलती है. यह अनुभव सिर्फ घूमने का नहीं, बल्कि कश्मीर को करीब से महसूस करने का मौका देता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

कैसे पहुंचें ट्यूलिप गार्डन?
श्रीनगर तक पहुंचना अब पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है. हवाई मार्ग से आने वालों के लिए श्रीनगर एयरपोर्ट सबसे नजदीकी विकल्प है, जहां से टैक्सी या कैब लेकर कुछ ही मिनटों में गार्डन पहुंचा जा सकता है. रेल से यात्रा करने वालों के लिए जम्मू तवी स्टेशन सबसे बड़ा कनेक्शन है, जहां से सड़क मार्ग के जरिए श्रीनगर तक सफर किया जा सकता है. शहर के अंदर भी लोकल टैक्सी और कैब आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे गार्डन तक पहुंचना बेहद सुविधाजनक हो जाता है.

कुदरत का जीवंत कैनवास
डल झील के पास स्थित यह गार्डन अपनी लोकेशन के कारण और भी आकर्षक बन जाता है. झील की शांति और ट्यूलिप्स की रंगीन दुनिया मिलकर ऐसा दृश्य बनाते हैं जो लंबे समय तक याद रहता है. कई पर्यटक इसे यूरोप के फूलों वाले मैदानों से भी बेहतर अनुभव बताते हैं. खास बात यह है कि यहां हर साल नए किस्म के ट्यूलिप्स भी जोड़े जाते हैं, जिससे हर बार कुछ नया देखने को मिलता है.

अगर आप इस साल कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह जगह आपकी लिस्ट में जरूर होनी चाहिए. बस ध्यान रखें कि यह खूबसूरती ज्यादा समय तक नहीं रहती इसलिए सही समय पर पहुंचना ही इस सफर का सबसे अहम हिस्सा है.

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Keerti Rajpoot

मीडिया की दुनिया में मेरा सफर एक रेडियो जॉकी के रूप में शुरू हुआ था, जहां शब्दों की ताकत से श्रोताओं के दिलों तक पहुंच बनाना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही. माइक के पीछे की यह जादुई दुनिया ही थी जिसने मुझे इलेक्ट्र…और पढ़ें



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पुलिस कैसे साबित किया सुसाइड नहीं मर्डर है? पति ने चौथी बार सुपारी देकर कराई पत्नी की हत्या, ऐसे खुला राज


Mumbai Powai Murder Case: मुंबई के पवई इलाके में लगभग दो साल पहले हुई एक मर्डर मिस्ट्री अब सुलझ गई है. अपनी पत्नी को रास्ते से हटाने के लिए एक पति किस हद तक गिर सकता है, यह मामला उसी की कहानी है. यह घटना हर पिता के लिए एक सबक है, जिसकी बेटी की शादी के बाद अचानक एक दिन मौत की खबर आती है. यह कहानी उस निर्दयी पति की है, जो सात जन्मों का रिश्ता निभाने की कसम खाता है, लेकिन दो बच्चों के होने के बावजूद पत्नी को ठिकाने लगाने के लिए एक बार नहीं बल्कि तीन बार प्रयास करता है. चौथी बार में वह शख्स पत्नी को सुपारी देकर हत्या करवा देता है और इसे आत्महत्या का रूप देता है. लेकिन एक पिता आखिरकार अपनी बेटी की मौत का असली कारण खोज निकालता है.

मुंबई के चांदिवली के संघर्ष नगर निवासी और एक हार्डवेयर दुकान का मालिक सखाराम चौधरी के 12 साल और पांच साल के दो बच्चे हैं. दोनों बच्चे अपने मां के साथ खुशी-खुशी रहते थे. इस बीच सखाराम की एक दूसरी महिला के साथ संबंध हो गया. सखाराम पत्नी छोड़कर दूसरी महिला के साथ रहना चाहता था. इसके लिए सखाराम ने साल 2024 में पत्नी की हत्या की योजना बनाना शुरू कर दिया. सखाराम ने इसके लिए अपने एक सहयोगी को 6 लाख रुपये दिया. लेकिन तीन बार हत्या का प्रयास असफल रहा. लेकिन 14 अक्टूबर 2024 को आखिरकार सखाराम अपनी पत्नी को मरवाने में कामयाब हो जाता है और इसे आत्महत्या का रंग दे देता है. लेकिन महिला के पिता का दिल नहीं मानता है.

महिला के अंतिम संस्कार के बाद पिता भानराम चौधरी ने राजस्थान के पाली जिले के रानी पुलिस स्टेशन में साजिश का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करा दिया. 18 अक्टूबर 2024 को हत्या का मामला दर्ज हो जाता है. बाद में घटना साकीनाका पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में होने से मुंबई ट्रांसफर कर दिया जाता है. अदालत के आदेश के बाद 8 जनवरी को 2025 को गीता का शव कब्र से निकाला जाता है. फिर मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाता है. सर जेजे अस्पताल के डॉक्टरों की रिपोर्ट में गले पर दो अलग-अलग निशान मिलने का सबूत मिलता है, जो आत्महत्या के सामान्य मामलों में असामान्य बात है.

मुंबई पुलिस के जांच में ऐसे खुला राज.

मुंबई पुलिस ने बदली दी जांच कि दिशा

मुंबई पुलिस की जांच कि दिशा बदल जाती है. मुंबई पुलिस के अनुसार महिला के गले पर निशानों की दिशा, लंबाई और चौड़ाई अलग-अलग थी. इनके बीच त्वचा पर रस्सी फिसलने के संकेत मिले. साक्ष्यों से पता चलता है कि शव को लटकाने से पहले पीड़ित का गला घोंटा गया था. इस रिपोर्ट के आने के बाद मुंबई की साकिनारा पुलिस ने फरवरी के पहले सप्ताह में पति से पूछताछ की. पुलिस का दावा है कि पति ने हत्या की साजिश रचने और सुपारी लेकर हत्या करने की बात कबूल कर ली है. मुंबई पुलिस ने कहा कि आरोपी शख्स ने हत्या के लिए 6 लाख नकद दिए और 70 हजार गूगल पे के जरिए ट्रांसफर किए.

एक साल पहले की वो काली रात

मामला साल 2024 के मध्य का है, जब पवई स्थित एक अपार्टमेंट में गीता चौधरी का शव छत के पंखे से लटका मिला था. पति सखाराम ने पुलिस को बताया कि गीता मानसिक तनाव में थी और उसने सुसाइड किया है. घर की स्थिति और सखाराम के ‘मगरमच्छी आंसुओं’ ने पुलिस को एक बार गुमराह कर दिया. लेकिन गीता के पिता और रिश्तेदारों को शुरू से ही सखाराम पर शक था. पुलिस ने जब वैज्ञानिक साक्ष्यों और सखाराम की कॉल डिटेल्स की दोबारा जांच शुरू की तो परतें दर परत सच सामने आने लगा.

तीन बार फेल, चौथी बार मिली ‘सफलता’

पहली कोशिश (2024): उसने पहली बार साल 2024 में गीता को जहर देने की कोशिश की थी, लेकिन वह बच गई.

दूसरी व तीसरी कोशिश: इसके बाद उसने एक्सीडेंट का रूप देने और करंट लगाने की भी कोशिश की, लेकिन हर बार किस्मत ने गीता का साथ दिया.

चौथी कोशिश: तीन बार नाकाम होने के बाद सखाराम ने सुपारी किलर्स का सहारा लिया. उसने तीन सुपारी किलर्स को बड़ी रकम देकर काम पर रखा. उन लोगों ने मिलकर पहले गीता की गला दबाकर हत्या की और फिर मामले को आत्महत्या दिखाने के लिए शव को पंखे से लटका दिया.

ये भी पढ़ें: क्या होता है ECA, जिसके लागू होने के बाद LPG की कीमत और सप्लाई दोनों पर हो जाता है सरकार का नियंत्रण?
यह घटना उन सभी पिताओं के लिए एक कड़ा सबक है जिनकी बेटियां ससुराल में प्रताड़ना सहती हैं. गीता के पिता को सखाराम की हरकतों पर पहले भी शक था, लेकिन घर टूटने के डर और लोग क्या कहेंगे की सामाजिक बेड़ियों ने उन्हें चुप रखा. ऐसे में अगर आपकी बेटी ससुराल में असुरक्षित महसूस कर रही है या दामाद के चरित्र पर संदेह है, तो उसे ‘समझौता’ करने के बजाय कानूनी सुरक्षा दें. घरेलू हिंसा की छोटी-छोटी घटनाओं को नजरअंदाज न करें, क्योंकि अक्सर यही छोटी चिंगारी भविष्य में बड़े अपराध का रूप ले लेती है. बेटियों को इतना आत्मनिर्भर बनाएं कि वे गलत साथी को छोड़ने का साहस जुटा सकें.



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Assam Election 2026: AIUDF की दूसरी लिस्ट जारी की, बदरुद्दीन अजमल इस सीट से लड़ेंगे चुनाव


India

oi-Smita Mugdha

Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में एआईयूडीएफ (AIUDF) ने अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। पार्टी प्रमुख बदरुद्दीन अजमल (Badruddin Ajmal) इस बार बिन्नाकांडी सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे, जिससे इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है।

AIUDF का यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य में सभी प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। बदरुद्दीन अजमल का बिन्नाकांडी से चुनाव लड़ना खास माना जा रहा है, क्योंकि वे राज्य की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। उनके इस फैसले से पार्टी अपने परंपरागत वोट बैंक को मजबूत करने के साथ-साथ नए मतदाताओं को भी आकर्षित करने की कोशिश में है।

Assam Election 2026

Assam Election: एआईयूडीएफ की दूसरी लिस्ट में 12 कैंडिडेट

असम विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियां अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर रही है। एआईयूडीएफ का प्रभाव खास तौर पर असम के ऊपरी हिस्से और मुस्लिम बहुत इलाकों में है। दूसरी लिस्ट में 12 उम्मीदवारों के नाम जारी किए गए हैं।

Assam | All India United Democratic Front (AIUDF) announces second list of candidates for Assembly Election-2026. AIUDF chief Badruddin Ajmal will contest from the Binnakandi seat.

Polls in Assam will be held on April 9, with counting of votes scheduled for May 4, 2026. pic.twitter.com/DQ1QJDUPIF

— ANI (@ANI) March 17, 2026 “>

Assam Election 2026: 9 अप्रैल को होगा मतदान, 4 मई को काउंटिंग

– चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी।

– राज्य में चुनावी माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है और विभिन्न दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।

Assam Election: बदरुद्दीन अजमल की पार्टी के प्रदर्शन पर नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव कई मायनों में अहम होने वाला है। एक ओर जहां सत्ताधारी दल अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश करेगा, वहीं विपक्षी दलों के लिए यह चुनाव अपनी जमीन मजबूत करने का बड़ा मौका होगा।

AIUDF की नई उम्मीदवार सूची और अजमल की सक्रियता से साफ है कि पार्टी इस बार चुनाव में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के इरादे से मैदान में उतरी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बिन्नाकांडी सीट पर बदरुद्दीन अजमल का प्रदर्शन कैसा रहता है और AIUDF राज्य की राजनीति में कितना असर छोड़ पाती है। असम की जनता 9 अप्रैल को अपने मताधिकार का उपयोग करेगी और 4 मई को चुनावी नतीजे राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।





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यूपी में अंडे पर एक्सपायरी और लेइंग डेट लिखनी होगी: 1 अप्रैल से लागू होगा नियम; 18 मार्च को अंडा डिस्ट्रीब्यूटर्स की बड़ी बैठक – Uttar Pradesh News


यूपी सरकार ने लोगों की सेहत से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। 1 अप्रैल, 2026 से प्रदेश में अंडे पर एक्सपायरी डेट लिखना होगा। इस नियम के लागू होने के बाद दुकानदार अब ताजा अंडा कहकर पुराने या खराब अंडे बेच नहीं पाएंगे। ग्राहक खुद तारीख देखकर फैसला ले पाएंग

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क्यों लाया गया यह नियम? पशुपालन विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की जांच में सामने आया कि कई जगहों पर पुराने या खराब अंडे ‘फ्रेश’ बताकर बेचे जा रहे थे, जिससे लोगों की सेहत को खतरा हो सकता था। नियमों का पालन नहीं हो रहा था।

FSDA के जॉइंट कमिश्नर हरिशंकर सिंह ने बताया, दो साल से इसकी कवायद चल रही थी। पहले बैच नंबर लिखने का निर्णय हुआ, लेकिन ये प्रैक्टिकली संभव नहीं था। क्योंकि अंडे अलग-अलग जगह आते हैं, ऐसे में बैच नंबर लिखना संभव नहीं था। इसलिए ये निर्णय लिया गया है कि अंडे पर डेट लिखा जाए। इसके लिए अंडों पर लेइंग और एक्सपायरी डेट को मुहर से अंकित किया जाएगा।

भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं…

पशुपालन और डेयरी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने कहा,

सरकार ने उपभोक्ताओं की सेहत की सुरक्षा के लिए ये कदम उठाया है। यह कदम खाद्य पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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18 मार्च को अंडा वितरकों की बैठक हरिशंकर सिंह ने बताया, 18 मार्च को प्रदेश के प्रमुख अंडा डिस्ट्रीब्यूटर्स की एक बैठक बुलाई है। इसमें शासनादेश को समझने और लागू करने के लिए उनसे चर्चा होगी। 1 अप्रैल से ये लागू होना है, हम समझना चाहते हैं कि इसे कैसे लागू किया जाए और कैसे इसकी निगरानी की जाएगी।

अगर अंडे को लगभग 30 डिग्री सेल्सियस के सामान्य तापमान पर रखा जाए, तो वह लेइंग डेट से दो हफ्तों के अंदर खाने के लिए सुरक्षित रहता है।

अगर अंडे को लगभग 30 डिग्री सेल्सियस के सामान्य तापमान पर रखा जाए, तो वह लेइंग डेट से दो हफ्तों के अंदर खाने के लिए सुरक्षित रहता है।

अंडे पर क्या-क्या छपा होगा?

लेइंग डेट: मुर्गी ने अंडा कब दिया यानी उत्पादन तारीख। एक्सपायरी डेट: अंडा कब तक सुरक्षित रहेगा यानी खराब होने की तारीख।

अभी क्या था नियम: अंडे की ट्रे पर उत्पादन तिथि लिखी जाती है, लेकिन हर अंडे पर व्यक्तिगत स्टैंपिंग नहीं।

नियम तोड़ने पर सजा क्या? अगर कोई उत्पादक, किसान, पोल्ट्री फार्म या दुकानदार इस नियम का पालन नहीं करता, तो सख्त कार्रवाई होगी। उनके अंडों को जब्त कर नष्ट किया जाएगा या उन पर ‘मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त’ की मुहर लगा दी जाएगी। ऐसे अंडे बाजार में नहीं बिक सकेंगे। नियम मानने के लिए सभी को मजबूर किया जाएगा।

अंडे कितने दिन तक सुरक्षित रहते हैं? हरिशंकर सिंह के मुताबिक–

  • सामान्य कमरे के तापमान (लगभग 25 से 35 डिग्री सेल्सियस) पर अंडा 2 हफ्ते तक सुरक्षित रहता है।
  • अगर 8-12 डिग्री सेल्सियस के कंट्रोल्ड तापमान पर रखा जाए, तो लगभग 5 हफ्ते तक सुरक्षित रहेगा।
बाजार में बिकने वाले खराब अंडे से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ता है। पेट में सूजन, डिहाइड्रेशन हो सकता है।

बाजार में बिकने वाले खराब अंडे से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ता है। पेट में सूजन, डिहाइड्रेशन हो सकता है।

अलग स्टोरेज क्यों जरूरी? फूड सेफ्टी नियमों के मुताबिक, अंडों को सब्जियों या अन्य खाद्य पदार्थों के साथ एक ही कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जा सकता। दोनों को अलग-अलग तापमान और परिस्थितियों की जरूरत होती है। सही स्टोरेज से अंडों की ताजगी लंबे समय तक बनी रहती है।

यूपी में कोल्ड स्टोरेज की हालत फिलहाल, राज्य में अंडों के लिए सिर्फ दो विशेष कोल्ड स्टोरेज हैं। एक आगरा में और दूसरा झांसी में। पूरे राज्य के लिए यह संख्या बहुत कम है। स्टोरेज की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार को भविष्य में और कोल्ड स्टोरेज बनाने की जरूरत होगी ताकि नए नियम आसानी से लागू हो सकें।

पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि व्यापारियों और मुर्गी पालन करने वालों को अनिवार्य तौर पर इस नियम का पालन करना होगा।

पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि व्यापारियों और मुर्गी पालन करने वालों को अनिवार्य तौर पर इस नियम का पालन करना होगा।

यूपी में प्रतिदिन 2.5 करोड़ अंडे की खपत प्रदेश में प्रतिदिन 2.50 करोड़ अंडों की खपत होती है। अभी प्रदेश में अंडा उत्पादन करीब 1.60 करोड़ है। 90 लाख से अधिक अंडे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों से मंगाए जाते हैं। इंड में अंडे की खपत 20 से 25 प्रतिशत बढ़ जाती है। देश में प्रति व्यक्ति अंडे की सालाना खपत 106 है। हालांकि यूपी में प्रति व्यक्ति सालाना खपत 30 अंडे की है। यदि राष्ट्रीय औसत 106 अंडे प्रतिवर्ष की तरह यूपी में भी खपत बढ़ जाए तो यहां प्रतिदिन 7 करोड़ अंडे चाहिए होगा।

खराब अंडे खाने से किस तरह का नुकसान FSDA के मुताबिक, खराब अंडे खाने से सबसे बड़ा खतरा फूड पॉइजनिंग का होता है। खासकर अंडे में पनपने वाले साल्मोनेला बैक्टीरिया के संक्रमण से ये होता है। खराब अंडे में अन्य बैक्टीरिया जैसे ई–कोलाई भी बढ़ सकते हैं, जो गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। इसकी वजह से पेट में तेज दर्द, ऐंठन, उल्टी, मतली, बुखार, सिर दर्द, थकान, पेट में सूजन, डिहाइड्रेशन हो सकता है। कई बार तो खून वाले दस्त भी हो सकते हैं। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और डायबिटीज या कैंसर पेशेंट के लिए यह जानलेवा भी हो सकता है।

अब अंडे के हेल्थ बेनिफिट्स जानिए…

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काशी में गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी, VIDEO:चिकन बिरयानी परोसी, हिंदू संगठन बोले- हडि्डयां नदी में फेंकीं; 14 गिरफ्तार

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काशी में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी की गई। सोमवार को हुई इस पार्टी में आयोजकों ने रोजेदारों को फल और मेवे के साथ चिकन बिरयानी भी परोसी। साथ ही इफ्तार पार्टी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। जल्द ही वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होने लगा। पढ़ें पूरी खबर…



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सेंट्रल स्कूलों में EWS बच्चों को एडमिशन..नवोदय में क्यों नहीं?: MP हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब; लाखों छात्र रहे प्रवेश से वंचित – Jabalpur News


देशभर के 650 से ज्यादा नवोदय विद्यालयों में 2019 के संवैधानिक प्रावधान के बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को प्रवेश में शामिल नहीं किए जाने के मुद्दे पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने एक सप्ताह में

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मामले की सुनवाई मंगलवार को जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की है।

जबलपुर निवासी छात्रा नव्या तिवारी की ओर से उनके अभिभावक धीरज तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन वर्तमान प्रवेश नीति में EWS वर्ग को शामिल नहीं किया गया है।

EWS(कमजोर वर्ग) को लेकर मुख्य आपत्ति

याचिका में बताया गया कि नवोदय विद्यालयों में प्रवेश के दौरान, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), ग्रामीण छात्र, बालिकाएं और दिव्यांग छात्र के लिए आरक्षण और प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए कोई आरक्षण या अलग व्यवस्था नहीं है, जिससे यह वर्ग पूरी तरह वंचित रह जाता है।

संवैधानिक आधार का दिया हवाला

याचिका में कहा गया है कि संविधान के 103वें संशोधन (2019) के तहत अनुच्छेद 15(6) जोड़ा गया, जिसमें EWS वर्ग के लिए शैक्षणिक संस्थानों में 10% तक आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद नवोदय विद्यालयों की प्रवेश नीति में इसे लागू नहीं किया गया, जिसे संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी बताया गया है।

एक ही मंत्रालय, अलग नियम क्यों? याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत संचालित केंद्रीय विद्यालय (KV) में EWS वर्ग को प्रवेश का लाभ मिलता है। वहीं उसी मंत्रालय के अधीन संचालित नवोदय विद्यालयों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसे याचिका में भेदभावपूर्ण और असंगत बताया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला याचिका में Atharv Chaturvedi बनाम राज्य मध्यप्रदेश (10 फरवरी 2026) फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें EWS छात्रों को अवसर न मिलने को गंभीर मुद्दा माना गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, देशभर में नवोदय विद्यालयों में करीब 2.9 लाख छात्र अध्ययनरत हैं। ऐसे में 2019 से अब तक बड़ी संख्या में EWS छात्र अवसर से वंचित रहे हैं।

वकील बोले- जरूरत पड़ी तो SC जाएंगे अधिवक्ता विकास मिश्रा ने कहा कि यह सिर्फ एक छात्रा का मामला नहीं, बल्कि देशभर के लाखों छात्रों से जुड़ा मुद्दा है। जरूरत पड़ने पर इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल उपस्थित रहे।

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MSCB Scam: 25,000 करोड़ केस में अजित पवार-सुनेत्रा पवार समेत सभी को क्लीन चिट, कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट मानी


Maharashtra

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MSCB Scam: महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSCB) से जुड़े कथित 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ा फैसला सामने आया है। मुंबई की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। साथ ही, इस मामले को बंद कर दिया है। इस फैसले के साथ ही राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे दिवंगत अजित पवार सहित सुनेत्रा पवार और रोहित पवार को बड़ी राहत मिल गई है।

विशेष न्यायाधीश महेश के. जाधव ने अपने विस्तृत आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और आधिकारिक रिपोर्टों से किसी भी तरह के आपराधिक षड्यंत्र या धोखाधड़ी के प्रमाण नहीं मिलते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि बैंक के दिए ऋण और उनकी प्रक्रिया में कुछ अनियमितताएं हो सकती हैं, लेकिन इन्हें आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता।

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MSCB Scam: 31 जिला सहकारी बैंकों से जुड़ा मामला

– यह मामला MSCB के तहत आने वाले 31 जिला सहकारी बैंकों से जुड़ा था, जिन्होंने कई चीनी मिलों को ऋण दिए थे।

– बाद में इन मिलों के डिफॉल्ट होने और उनकी नीलामी में कथित रूप से बैंक अधिकारियों के परिजनों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे थे।

– हालांकि, अदालत ने पाया कि इन प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की आपराधिक मंशा साबित नहीं होती।

Ajit Pawar समेत परिवार के कई सदस्यों को मिली राहत

रोहित पवार की कंपनी बारामती एग्रो को भी राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि 2012 में कन्नड़ सहकारी चीनी मिल की नीलामी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई थी। साथ ही, यह भी माना गया कि खरीदार कंपनी की वित्तीय स्थिति स्वस्थ थी और उसने भुगतान की क्षमता दिखाई थी। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे समेत करीब 50 लोगों द्वारा दायर विरोध याचिकाओं को भी अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य किसी संज्ञेय अपराध को साबित नहीं करते, इसलिए ‘सी समरी’ (क्लोजर रिपोर्ट) को स्वीकार करना उचित है।

कोर्ट ने स्वीकार की क्लोजर रिपोर्ट

न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि ‘मित्रा पैकेज’ जैसे सरकारी राहत उपायों का उस समय चीनी उद्योग पर बड़ा प्रभाव था, जिसके चलते कई वित्तीय निर्णय लिए गए थे। अदालत ने कहा कि नाबार्ड (NABARD) के कुछ दिशा-निर्देशों का पालन न होना अपने आप में आपराधिक अपराध नहीं बनता। फैसले में यह भी बताया गया कि बैंक की वसूली प्रक्रिया जारी है और अब तक करीब 850 करोड़ रुपये की रिकवरी हो चुकी है।

कोर्ट ने फैसले में कहा, ‘चूक को भ्रष्टाचार नहीं कह सकते’

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि MSCB सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता देकर जनता के हितों की रक्षा करता रहा है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक या अनियमितताओं को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जब तक कि उसमें धोखाधड़ी या आपराधिक मंशा साबित न हो।



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कांग्रेस ने ओडिशा में 3 विधायकों को पार्टी से निकाला: राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की; हरियाणा में 5 विधायकों नोटिस भेजने की तैयारी


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भुवनेश्वर, चंडीगढ़4 मिनट पहले

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ओडिशा में कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले तीन विधायकों को पार्टी से निकाल दिया है। पार्टी ने तीनों विधायकों को विधानसभा से अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर को लेटर भी लिखा है।

हरियाणा में कांग्रेस पांच विधायकों को नोटिस देने की तैयारी कर रही है। इस बीच हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने पार्टी छोड़ दी है।

ओडिशा में कांग्रेस ने रमेश जेना, दशरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस को पार्टी से निकाला है। तीनों विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में वोट दिया था। क्रॉस वोटिंग की वजह से कांग्रेस और BJD के संयुक्त उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा।

दरअसल, दोनों राज्यों में कांग्रेस के कुल 8 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। 16 मार्च को 11 सीटों पर हुए चुनाव में 9 सीटें एनडीए के खाते में गईं। इससे पहले 10 राज्यों की 37 सीटों में से 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे।

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राज्यसभा चुनाव को स्टेटवाइज समझिए…

हरियाणा: BJP-कांग्रेस को एक-एक सीट, क्रॉस वोटिंग करने वाले 5 MLA को नोटिस देने की तैयोरी में कांग्रेस

हरियाणा में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए नतीजा वोटिंग के करीब 9 घंटे बाद सोमवार की रात 1 बजे जारी हुआ। भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत हासिल की है। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में 90 विधायकों के वोट थे, जिनमें से इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के 2 विधायकों ने वोट नहीं डाला। कांग्रेस के 4 और भाजपा का 1 वोट रद्द हो गया, जिसके चलते 83 वोट वैध माने गए।

रामकिशन गुर्जर और उनकी पत्नी शैली चौधरी। (फाइल फोटो)

रामकिशन गुर्जर और उनकी पत्नी शैली चौधरी। (फाइल फोटो)

अब कांग्रेस पार्टी क्रॉस वोटिंग करने वाले 5 विधायकों को नोटिस देने के तैयारी में है। इससे पहले कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर पार्टी छोड़ दी है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी पत्नी और नारायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी भी पार्टी छोड़ सकती है। हालांकि उससे पहले पार्टी हाईकमान का रुख का इंतजार करेंगी। पार्टी उन्हें निकालती है तो विधायकी बरकरार रहेगी। खुद पार्टी छोड़ने पर अयोग्य घोषित होंगी।

नारायणगढ़ मुख्यमंत्री नायब सैनी का गृह क्षेत्र है। वह खुद 2014 में यहां से विधायक बने थे। तब उन्होंने रामकिशन गुर्जर को ही चुनाव हराया था। इससे पहले 2005 में गुर्जर ने नायब सैनी को हराया था।

ओडिशा: BJP की 3, BJD की एक सीट पर जीत; कांग्रेस ने तीन MLA को पार्टी ने निकाला

ओडिशा में भाजपा के मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे ने जीत हासिल की। चौथी सीट पर बीजू जनता दल (BJD) के संत्रुप्ता मिश्रा विजयी हुए। BJD के दत्तेश्वर होता को हार का सामना करना पड़ा।

क्रॉस वोटिंग करने पर पार्टी ने रमेश जेना, दशरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि तीनों विधायकों से इस तरह के कदम की उम्मीद नहीं थी। इन विधायकों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई कराने के लिए विधानसभा स्पीकर से अनुरोध किया गया है, ताकि उन्हें अयोग्य घोषित किया जा सके।

प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अरबिंद दास ने बताया कि विधायकों के कदम की समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की गई है। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी के हितों के खिलाफ माना है।

7 राज्यों में 26 उम्मीदवार निर्विरोध जीते…

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इन 37 राज्यसभा सांसदों का कार्यक्राल अप्रैल में खत्म हो रहा

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राज्यसभा चुनाव 2026- NDA ने 11 में 9 सीटें जीतीं:कांग्रेस-BJD को 1-1 सीट; हरियाणा में 5 घंटे देरी से काउंटिंग, बिहार में महागठबंधन ने 3 सीटें गंवाई

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हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए। इनमें 9 सीटों पर NDA कैंडिडेट्स या NDA समर्थित कैंडिडेट्स ने जीत दर्ज की। कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की। पूरी खबर पढ़ें…

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