Home Blog Page 413

खबर हटके- महिला को डराने पर रोबोट गिरफ्तार: ईरान में लाल रेत से बनी मछली की चटनी खा रहे लोग; टॉयलेट की पूजा करने की परम्परा


महिला को डराने पर पुलिस ने एक रोबोट को गिरफ्तार कर लिया। वहीं ईरान के हॉर्मुज आइलैंड पर लोग लाल रेत से बनी मछली की चटनी खा रहे है। उधर चीन में लोग हर साल टॉयलेट की पूजा करने की परम्परा मनाते हैं।

.

आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें…

khabar hatke 15 march 1773613601
khabar hatke 15 march7 1773613557
khabar hatke 15 march2 1 1773613611
khabar hatke 15 march8 1773613557
khabar hatke 15 march3 1773613622
khabar hatke 15 march9 1773613557
khabar hatke 15 march4 1773613628
khabar hatke 15 march10 1773613557
khabar hatke 15 march5 1773613633

तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ…

खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…



Source link

पश्चिम एशिया संकट: ‘रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर, भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा रहा’, आशंकाओं पर सरकार का जवाब


पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत सरकार ने घरेलू ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए बहुआयामी रणनीति  लागू की है। सरकार ने अपने ताजा बयान में बताया कि एक ओर ईरान से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू मोर्चे पर ईंधन आपूर्ति शृंखला पूरी तरह से सामान्य है और देश की रिफाइनरियां अपनी अधिकतम क्षमता पर काम कर रही हैं।

ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन आपूर्ति की ताजा स्थिति


  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि मौजूदा वैश्विक तनाव का भारत की ईंधन आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है। 

  • देश की सभी रिफाइनरियां अपनी उच्चतम क्षमता पर संचालित हो रही हैं। 

  • पेट्रोल पंपों पर कामकाज पूरी तरह से सामान्य है और देश के किसी भी हिस्से से ईंधन खत्म होने की कोई सूचना नहीं मिली है। 

  •  परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली सीएनजी और घरों में उपयोग होने वाली पीएनजी  की आपूर्ति उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत सुनिश्चित की जा रही है।

पीएनजी अपनाने पर विशेष जोर और प्रोत्साहन 


  • ऊर्जा स्थिरता को और मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार स्वच्छ ईंधन के उपयोग पर जोर दे रही है। संयुक्त सचिव के अनुसार, वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ताओं से आग्रह किया गया है कि वे जहां भी संभव हो, पीएनजी कनेक्शन अपनाएं। इसके साथ ही, पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए गैस कंपनियों ने विशेष प्रोत्साहन की घोषणा की है:

  • इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड  ने ऑफर दिया है कि यदि कोई घरेलू उपभोक्ता 31 मार्च से पहले पीएनजी कनेक्शन लेता है और गैस खरीदना शुरू करता है, तो उसे 500 रुपये की मुफ्त गैस मिलेगी।

  • गेल  और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) जैसी प्रमुख कंपनियां भी उपभोक्ताओं को स्वच्छ ईंधन की ओर आकर्षित करने के लिए इसी तरह के प्रोत्साहन दे रही हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री लॉजिस्टिक्स की सफलता


पश्चिम एशिया संकट के दौरान ऊर्जा शिपमेंट के सुरक्षित परिवहन को लेकर भी सकारात्मक खबर आई है। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फारस की खाड़ी से रवाना हुआ ‘शिवालिक एलपीजी कैरियर’ होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर चुका है और भारत की ओर बढ़ रहा है। इस पोत के शाम 5 बजे के आसपास भारतीय बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। इसके आगमन से पूर्व ही बंदरगाह पर दस्तावेज़ीकरण और प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग की सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं, ताकि आपूर्ति में कोई विलंब न हो।



ईरान से भारतीय नागरिकों की निकासी 


अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में आर्थिक मोर्चे के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी अपडेट साझा किए गए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ईरान में फंसे भारतीयों की स्थिति पर जानकारी दी। 


  • अब तक 550 से अधिक भारतीय नागरिक ईरान से भूमि सीमा के माध्यम से आर्मेनिया  में सुरक्षित प्रवेश कर चुके हैं। 

  • इसके अलावा, लगभग 90 अन्य भारतीय नागरिकों ने ईरान से भूमि सीमा के रास्ते ही अज़रबैजान  में प्रवेश किया है। 

  • इन सभी नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही को तेहरान स्थित भारतीय दूतावास द्वारा सुगम बनाया गया है, जिसने वीज़ा और आव्रजन औपचारिकताओं में पूरी सहायता प्रदान की है।

सरकारी अधिकारियों के ताजा बयान बताते हैं कि भारत पश्चिम एशिया के संकट से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का मजबूती से सामना कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग से एलपीजी पोत की सुरक्षित वापसी और घरेलू रिफाइनरियों का पूर्ण क्षमता पर चलना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत है। इसके साथ ही, एलपीजी से पीएनजी की ओर स्थानांतरण के दीर्घकालिक प्रयास और नागरिकों की त्वरित निकासी सरकार के सक्रिय नीतिगत प्रबंधन को रेखांकित करते हैं।





Source link

एलपीजी संकट से निपटने का मास्टरप्लान: सरकार क्यों कर रही है पीएनजी पर फोकस? 10 सवालों में समझें पूरी कहानी


पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक मार्ग बाधित होने के कारण भारत में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। इस अभूतपूर्व संकट से निपटने और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) के उपयोग को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के पीछे की सोच क्या है, ऐसी परिस्थिति क्यों बनी? सवाल-जवाब के जरिए पूरी कहानी समझें।

1. भारत में अचानक एलपीजी का संकट क्यों पैदा हो गया?

जवाब: भारत में इन दिनों एलपीजी संकट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर उत्पन्न हुए गंभीर व्यवधानों का परिणाम है। भारत अपनी घरेलू एलपीजी खपत का लगभग 60 से 62 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। इस आयातित एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ओमान और ईरान के बीच स्थित संकरे समुद्री मार्ग, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के माध्यम से आता है। मार्च 2026 की शुरुआत से, ईरानी बलों की चेतावनी के बाद इस मार्ग से टैंकरों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है, इससे कतर और सऊदी अरब से भारत में एलपीजी की आवक में अनुमानित 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

2. क्या भारत के पास इस संकट से निपटने के लिए पर्याप्त गैस भंडार मौजूद नहीं है?

कच्चे तेल के विपरीत, भारत के पास एलपीजी के लिए पर्याप्त रणनीतिक भंडारण की सुविधा नहीं है। वर्तमान में, देश के पास एलपीजी भंडारण के लिए केवल मंगलुरु और विशाखापत्तनम में दो भूमिगत गुफाएं हैं। इन दोनों सुविधाओं की कुल क्षमता मात्र 1.4 लाख टन है, जो राष्ट्रीय स्तर पर दो दिन की खपत से भी कम है। अगर सभी स्थानीय भंडारों को भी मिला लिया जाए, तो कुल राष्ट्रीय बफर मुश्किल से 12 लाख टन तक पहुंचता है, जो पूरे देश की मांग को केवल 15 दिनों तक ही पूरा कर सकता है।

3. पेट्रोलियम मंत्रालय ने शहरी उपभोक्ताओं के लिए क्या नया आदेश जारी किया है?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सख्त अधिसूचना जारी कर उन सभी परिवारों को तुरंत अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने का आदेश दिया है जिनके पास पहले से ही पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) कनेक्शन है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति को पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन एक साथ रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे भविष्य में किसी भी पीएनजी उपयोगकर्ता को एलपीजी सिलेंडर की रिफिल न दें। 

4. सरकार शहरी उपभोक्ताओं को पीएनजी पर शिफ्ट करके एलपीजी किसके लिए बचा रही है?

इस नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (पीएमयूवाई) के तहत ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए एलपीजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। 2025 तक देश भर में 10.33 करोड़ से अधिक पीएमयूवाई कनेक्शन हो चुके हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के कारण देश में एलपीजी की कमी होती है, तो इसका सबसे भयानक प्रभाव ग्रामीण गरीबों पर पड़ेगा, जो वापस लकड़ी या गोबर जैसे पारंपरिक प्रदूषक ईंधनों की ओर लौट सकते हैं। शहरी क्षेत्रों में पीएनजी को अनिवार्य बनाकर सरकार आयातित और भारी सब्सिडी वाली एलपीजी को केवल गरीब वर्गों के लिए संरक्षित कर रही है।

5. एलपीजी और पीएनजी के बीच बुनियादी और तकनीकी अंतर क्या है?

एलपीजी पृथ्वी से सीधे नहीं निकाली जाती, बल्कि यह प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण और कच्चे तेल के शोधन का उप-उत्पाद है। एलपीजी मुख्य रूप से भारी हाइड्रोकार्बन का मिश्रण है, जिसमें प्रोपेन और ब्यूटेन की प्रमुखता होती है। इसके विपरीत, पीएनजी गैस कुओं से निकाली जाने वाली प्राकृतिक गैस है, जो लगभग शुद्ध मीथेन (85-95%) होती है। एलपीजी का ऊष्मांक मान (कैलोरिफिक वैल्यू)  लगभग 93 MJ/m3 होता है, जबकि पीएनजी का लगभग 38 MJ/m3 होता है, इसलिए पीएनजी स्थिर और निरंतर गर्मी प्रदान करती है। भारत में घरेलू एलपीजी सिलिंडर आमतौर पर 14.2 किलोग्राम का होता है, जिसकी कीमत शहर और वितरण के आधार पर लगभग 800 से 1100 रुपये तक हो सकती है। वहीं, पीएनजी (पाइपलाइन गैस) में मीटर लगाया जाता है और बिल गैस के वास्तविक उपयोग के आधार पर आता है। अधिकांश शहरों में पीएनजी की कीमत लगभग 40 से 60 रुपये प्रति यूनिट के आसपास होती है। इसका मतलब है कि पीएनजी में उपयोग के अनुसार बिल आता है, जबकि एलपीजी में पूरे सिलिंडर की कीमत अग्रिम चुकानी होती है। यदि घर में गैस की खपत अधिक है, तो पीएनजी कनेक्शन मासिक खर्च को नियंत्रित करने में अधिक लाभकारी साबित हो सकता है।

6. एलपीजी और पीएनजी- दोनों तरह के गैस हम कहां से और कितना आयात करते हैं?

एलपीजी और पीएनजी (प्राकृतिक गैस) दोनों ही मामलों में भारत अपनी जरूरतों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) और अन्य व्यापारिक डेटाबेस के आंकड़े इस निर्भरता और आपूर्ति शृंखला की असलियत बताते हैं। 

पिछले एक दशक में भारत में एलपीजी की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। इसका मुख्य कारण सरकार की ओर से ग्रामीण भारत में स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराने के लिए ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (पीएमयूवाई) का सफलतापूर्वक विस्तार करना रहा है । हालांकि, इस भारी मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन में आनुपातिक रूप से वृद्धि नहीं हुई है। 

वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली छमाही के पीपीएसी डेटा के अनुसार, भारत ने कुल 6,219 टीएमटी एलपीजी का उत्पादन किया, जबकि इसी अवधि में खपत 16,200 टीएमटी दर्ज की गई । इस बड़े अंतर को पाटने के लिए भारत को 10,731 टीएमटी एलपीजी का आयात करना पड़ा, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत अपनी कुल एलपीजी मांग का 62 प्रतिशत विदेशों से आयात करता है । वर्ष 2024 में, भारत पेट्रोलियम गैस के आयात पर लगभग 30.7 बिलियन डॉलर खर्च करके दुनिया का 5वां सबसे बड़ा आयातक देश बन गया था । भारत की एलपीजी आयात आपूर्ति शृंखला पूरी तरह से पश्चिम एशिया पर केंद्रित है। नीचे दी गई तालिका भारत के शीर्ष पेट्रोलियम गैस आपूर्तिकर्ताओं को दर्शाती है।


एलपीजी के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता







































सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता देश आयात अरब डॉलर में स्थिति
कतर $9.96 बिलियन सबसे बड़ा प्राथमिक आपूर्तिकर्ता
संयुक्त अरब अमीरात $7.51 बिलियन सबसे तेजी से बढ़ता स्रोत (2023 से $1.76B की वृद्धि)
सऊदी अरब $2.40 बिलियन स्थिर और प्रमुख आपूर्तिकर्ता
संयुक्त राज्य अमेरिका $2.35 बिलियन उभरता हुआ आपूर्तिकर्ता (2023 से $846M की वृद्धि)
कुवैत $2.33 बिलियन स्थिर और प्रमुख आपूर्तिकर्ता

स्रोत: OEC World 2024 / PPAC सांख्यिकी



  • प्राकृतिक गैस



दूसरी ओर, भारत अपनी प्राकृतिक गैस की मांग का लगभग 50 प्रतिशत घरेलू उत्पादन से पूरा करता है, जबकि शेष 50 प्रतिशत की पूर्ति तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात के जरिए पूरी की जाती है । 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक देश है, इसने 2.2 ट्रिलियन क्यूबिक फीट (Tcf) प्राकृतिक गैस की खपत की । एलएनजी आयात का यह परिमाण निरंतर बढ़ रहा है। दिसंबर 2024 तक के चालू वित्तीय वर्ष के लिए संचयी आयात 28,586 MMSCM दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 24.1 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है । एलएनजी आयात के मोर्चे पर भारत की स्थिति एलपीजी की तुलना में अधिक सुरक्षित है क्योंकि इसके स्रोत भौगोलिक रूप से बहुत अधिक विविध हैं।

एलएनजी के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता







































सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता देश आयात अरब डॉलर में स्थिति
कतर $9.96 बिलियन सबसे बड़ा प्राथमिक आपूर्तिकर्ता
संयुक्त अरब अमीरात $7.51 बिलियन सबसे तेजी से बढ़ता स्रोत (2023 से $1.76B की वृद्धि)
सऊदी अरब $2.40 बिलियन स्थिर और प्रमुख आपूर्तिकर्ता
संयुक्त राज्य अमेरिका $2.35 बिलियन उभरता हुआ आपूर्तिकर्ता (2023 से $846M की वृद्धि)
कुवैत $2.33 बिलियन स्थिर और प्रमुख आपूर्तिकर्ता

स्रोत: WITS विश्व बैंक व्यापार प्रवाह 2024 

7. सुरक्षा के दृष्टिकोण से दोनों ईंधनों में से कौन सा अधिक सुरक्षित है?

सुरक्षा के लिहाज से पीएनजी निर्विवाद रूप से एलपीजी से अधिक सुरक्षित विकल्प है। एलपीजी हवा से भारी होती है; रिसाव होने पर यह फर्श के पास जमा हो जाती है जिससे विस्फोट का अत्यधिक जोखिम रहता है। वहीं, पीएनजी का मुख्य घटक मीथेन हवा से हल्का होता है, जो रिसाव की स्थिति में तेजी से ऊपर उठकर वातावरण में वाष्पित हो जाता है। इसके अलावा, एलपीजी को सिलेंडर में आठ बार के अत्यधिक उच्च दबाव पर रखा जाता है, जबकि पीएनजी घरेलू पाइपलाइनों में केवल 21 मिलीबार के बहुत ही कम दबाव पर वितरित की जाती है।

8. क्या पीएनजी का इस्तेमाल करना एलपीजी से सस्ता है?

हां, उपभोक्ता के नजरिए से पीएनजी को अपनाना आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, समान मात्रा में खाना पकाने के लिए पीएनजी उपभोक्ता एलपीजी उपभोक्ताओं की तुलना में प्रति माह लगभग 300 से 400 रुपये कम भुगतान करते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि पीएनजी में बॉटलिंग, गैस एजेंसियों के कमीशन और ट्रकों द्वारा भारी सिलेंडरों के परिवहन का खर्च शामिल नहीं होता। साथ ही, पीएनजी मीटर-आधारित है, जहां उपभोक्ता केवल उपयोग की गई गैस का ही भुगतान करता है।

9. पीएनजी नेटवर्क के विस्तार से रसद और पर्यावरण को क्या फायदे होंगे?

पारंपरिक एलपीजी वितरण में लाखों भारी सिलेंडरों को ट्रकों के माध्यम से घुमाना पड़ता है, जो रसद के दृष्टिकोण से एक दुःस्वप्न है। पीएनजी इस पूरी लॉजिस्टिक (रसद) बाधा को खत्म कर देती है क्योंकि इसमें ईंधन भूमिगत पाइपलाइनों से 24/7 सीधे रसोई तक पहुंचता है। पर्यावरणीय मोर्चे पर भी, पीएनजी के दहन से प्रति मिलियन Btu केवल 53.06 किलोग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड गैस (CO2) निकलती है। इसके अलावा, पाइपलाइन ट्रांसमिशन नेटवर्क की ऊर्जा दक्षता उच्च होने के कारण इसका ‘वेल-टू-बर्नर’ कार्बन फुटप्रिंट एलपीजी के समुद्री और सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम होता है।

10. भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पीएनजीआरबी की क्या योजना है?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के अनुसार, सरकार का लक्ष्य भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 2022 के 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 2030 तक 15 प्रतिशत करना है। 2030 तक शहरी गैस वितरण (सीजीडी) की खपत 2.5 से 3.5 गुना तक बढ़ने का अनुमान है। इसके लिए पूरे देश को जोड़ने हेतु लगभग 33,500 किलोमीटर के प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (एनजीपीएल) नेटवर्क को अधिकृत किया गया है, जिसमें से लगभग 25,000 किलोमीटर का संचालन शुरू हो चुका है। चूंकि प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका जैसे विविध देशों से होता है, इसलिए यह भारत को एलपीजी की तरह किसी एक भौगोलिक बिंदु पर भू-राजनीतिक बंधक नहीं बनने देगा।



Source link

The Bonus Market Update: हरे निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 939 अंक चढ़ा, निफ्टी 23400 के पार


पिछले तीन कारोबारी दिनों में भारी गिरावट झेलने के बाद सोमवार को शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई, जिसका मुख्य कारण ब्लू-चिप बैंकिंग शेयरों में मूल्य-आधारित खरीदारी थी।

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 938.93 अंक या 1.26 प्रतिशत बढ़कर 75,502.85 पर बंद हुआ। दिन के दौरान इसने 75,805.27 का उच्च स्तर और 73,949.76 का निम्न स्तर छुआ। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 257.70 अंक या 1.11 प्रतिशत चढ़कर 23,408.80 पर बंद हुआ। रुपया 10 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 92.40 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स की कंपनियों का हाल

सेंसेक्स में सूचीबद्ध 30 कंपनियों में से अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में 4.22 प्रतिशत की तेजी आई। ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एटर्नल, बजाज फाइनेंस, आईटीसी, टाटा स्टील और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, सन फार्मा, पावर ग्रिड और भारती एयरटेल प्रमुख पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि घरेलू स्तर पर केंद्रित क्षेत्रों जैसे ऑटो, बैंकिंग और एफएमसी में मूल्य खरीद के समर्थन से शेयर बाजार में सत्र के अंत में तेजी आई, जो हालिया बिकवाली के बाद एक राहत रैली थी।

उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में, निवेशकों की भावना होर्मुज जलडमरूमध्य में होने वाले घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी, जहां आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों में किसी भी प्रकार की कमी से और अधिक समर्थन मिल सकता है।

यूरोपीय बाजारों में दिखी गिरावट 

एशियाई बाजारों में, जापान का निक्केई 225 सूचकांक और शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोप के बाजार ज्यादातर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुआ।

ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 104.4 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 1.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 104.4 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 10,716.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 9,977.42 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। शुक्रवार को सेंसेक्स 1,470.50 अंक या 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,563.92 पर बंद हुआ। निफ्टी 488.05 अंक या 2.06 प्रतिशत गिरकर 23,151.10 पर बंद हुआ।


 



Source link

Trade: व्यापार घाटा फरवरी में घटकर 27.1 अरब डॉलर पर, क्या ईरान संकट और टैरिफ की अनिश्चितता से नई चुनौतियां?


फरवरी 2026 में भारत के व्यापारिक मोर्चे पर एक मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का व्यापार घाटा मासिक आधार पर कम होकर 27.1 अरब डॉलर रह गया है। हालांकि, यह राहत अस्थाई साबित हो सकती है, क्योंकि पश्चिमी एशिया में ईरान विवाद के कारण बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक टैरिफ नीतियों में अनिश्चितता ने व्यापार प्रवाह और भारतीय निर्यातकों की धारणा पर दबाव डालना शुरू कर दिया है। 

आयात-निर्यात की ताजा स्थिति

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा 27.10 अरब डॉलर दर्ज किया गया। यह आंकड़ा जनवरी महीने के 34.68 अरब डॉलर के व्यापार घाटे से काफी कम है। रॉयटर्स पोल में अर्थशास्त्रियों ने इस घाटे के 28.8 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया था, जिससे ताज़ा आंकड़े बेहतर साबित हुए हैं। 

हालांकि, पिछले साल फरवरी के 14.42 अरब डॉलर के मुकाबले वार्षिक आधार पर घाटे में विस्तार हुआ है, जिसका मुख्य कारण आयात में भारी वृद्धि है। आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में भारत का निर्यात 36.61 अरब डॉलर और आयात 63.71 अरब डॉलर रहा। वहीं, चालू वित्त वर्ष (2025-26) में अप्रैल से फरवरी की अवधि के लिए, भारत का कुल वस्तु निर्यात पिछले वर्ष के 395.66 अरब डॉलर से 1.84% बढ़कर 402.93 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

भू-राजनीतिक तनाव और निर्यातकों पर असर

भले ही मासिक घाटे में कमी आई हो, लेकिन वैश्विक व्यापार प्रवाह पर नए संकट मंडरा रहे हैं। 


  • आपूर्ति शृंखला में बाधा: मध्य पूर्व, विशेषकर ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष ने ऊर्जा बाज़ारों और पश्चिमी एशिया के प्रमुख समुद्री मार्गों को बाधित कर दिया है।

  • लॉजिस्टिक्स लागत में उछाल: समुद्री रास्तों में बदलाव के कारण मालभाड़ा और बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि हुई है, जिसका सीधा आर्थिक बोझ निर्यातकों को उठाना पड़ रहा है।

  • प्रमुख क्षेत्रों पर प्रभाव: परिधान और विनिर्माण क्षेत्र के निर्यातकों को अपनी शिपमेंट अनुसूची में बदलाव करना पड़ रहा है और डिलीवरी बनाए रखने के लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी पड़ रही है।


जानकारों का मानना है कि फरवरी के आंकड़ों में अभी खाड़ी क्षेत्र के इन तनावों का पूरा असर प्रतिबिंबित नहीं हुआ है। जैसे-जैसे पश्चिमी एशिया में आपूर्ति बाधित होगी, आने वाले महीनों के डेटा में इसका स्पष्ट प्रभाव देखने को मिल सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और कच्चे तेल का संकट

इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताएं फिर से गहरी हो गई हैं, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा शिपिंग मार्गों में से एक है। इस महत्वपूर्ण मार्ग में किसी भी तरह की बाधा से भारत के मासिक आयात का लगभग 50% हिस्सा (विशेष रूप से तेल और ऊर्जा शिपमेंट) प्रभावित हो सकता है।



ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों ने पहले ही प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी आई है। यदि यह सिलसिला जारी रहता है, तो भारत का आयात बिल काफी बढ़ जाएगा, जिससे व्यापार घाटे के और चौड़ा होने का खतरा है। इसके परिणामस्वरूप उभरते बाज़ारों में निवेशकों की धारणा भी कमज़ोर हुई है।

टैरिफ नीतियों की अनिश्चितता

भू-राजनीतिक जोखिमों के साथ-साथ अमेरिकी टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता निर्यातकों के लिए एक और बड़ा मुद्दा है। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले टैरिफ को अवैध करार देते हुए बड़ा झटका दिया था। इसके बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘अन्य रूपों’ में टैरिफ वापस लाने का संकल्प लिया है। इससे भारत के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के साथ टैरिफ विवाद बढ़ने की आशंका है, जो निर्यात की गति को असंतुलित कर सकता है।



मासिक आधार पर व्यापार घाटे में कमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए तात्कालिक रूप से एक सकारात्मक खबर है, लेकिन वैश्विक व्यापारिक अस्थिरता भविष्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मालभाड़े में उछाल और अमेरिकी टैरिफ नीतियों में संभावित बदलाव- ये सभी कारक मिलकर आने वाले समय में भारत के आयात बिल और निर्यात वृद्धि की दिशा तय करेंगे। इन बाहरी झटकों के असर को कम करने के लिए आने वाले महीनों में डेटा पर करीबी नजर रखनी होगी।





Source link

Air India: न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही एअर इंडिया फ्लाइट तकनीकी खामी के चलते आयरलैंड डायवर्ट, जानिए अपडेट


एअर इंडिया की न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही एक ए350 विमान सेवा को सोमवार सुबह संदिग्ध तकनीकी खराबी की आशंका के चलते एहतियातन आयरलैंड के शैनन एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया। विमान में करीब 300 यात्री सवार थे।

एअर इंडिया के प्रवक्ता ने बयान में कहा कि 15 मार्च को न्यूयॉर्क (जेएफके) से दिल्ली के लिए रवाना हुई फ्लाइट AI102 को संभावित तकनीकी समस्या के बाद शैनन, आयरलैंड की ओर डायवर्ट किया गया। एयरलाइन के अनुसार विमान ने स्थानीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे शैनन एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की और सभी यात्री व चालक दल सुरक्षित हैं।

प्रवक्ता ने क्या बताया?

प्रवक्ता ने बताया कि विमान की स्थापित सुरक्षा मानकों के तहत विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है। एयर इंडिया ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी के मद्देनजर यह एहतियाती फैसला लिया गया। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटराडार24 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विमान करीब छह घंटे तक हवा में रहने के बाद शैनन की ओर मोड़ा गया।



Source link

Biz Updates: इंडिया पोस्ट का ’24 स्पीड पोस्ट’ सेवा कल से, 24 घंटे में मिलेगी डिलीवरी


डाक विभाग 17 मार्च 2026 से अपनी नई 24 स्पीड पोस्ट सेवा शुरू करने जा रहा है। इस सेवा का शुभारंभ केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी नई दिल्ली के आकाशवाणी भवन स्थित रंगभवन सभागार में दोपहर 12:30 बजे करेंगे। इस दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

नई 24 स्पीड पोस्ट सेवा के तहत ग्राहकों को तत्काल और समयबद्ध शिपमेंट के लिए अगले दिन डिलीवरी की गारंटी दी जाएगी। पहले चरण में यह सुविधा दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बंगलूरू और हैदराबाद में उपलब्ध होगी। डाक विभाग का कहना है कि इस पहल से प्रीमियम एक्सप्रेस डिलीवरी सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही विभाग 24 और 48 स्पीड पोस्ट सेवाओं के जरिए क्रमशः डी+1 और डी+2 डिलीवरी समय-सीमा सुनिश्चित करेगा। इसके लिए समर्पित प्रोसेसिंग विंडो और प्राथमिकता वाले हवाई परिवहन की व्यवस्था की गई है, ताकि पार्सल और दस्तावेज तय समय के भीतर पहुंच सकें।

नई सेवा में ग्राहकों को कई आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी। इनमें ओटीपी आधारित सुरक्षित डिलीवरी, एसएमएस अलर्ट के साथ एंड-टू-एंड ट्रैकिंग, व्यावसायिक ग्राहकों के लिए बीएनपीएल सुविधा, बल्क बुकिंग पर मुफ्त पिकअप, एपीआई इंटीग्रेशन और केंद्रीकृत बिलिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि तय समय से देरी होने पर मनी-बैक गारंटी दी जाएगी।



Source link

बंगाल- चुनाव से पहले मुख्य और गृह सचिव बदले गए: नंदिनी चक्रवर्ती को हटाया, दुष्यंत नरियाला नए चीफ सेक्रेटरी; राज्य में 23-29 अप्रैल को वोटिंग


  • Hindi News
  • National
  • West Bengal Assembly Elections 2026 Chief Secretary Principal Home Secretary Changed

नई दिल्ली17 मिनट पहलेलेखक: शुभम बोस

  • कॉपी लिंक

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग (EC) ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पद से हटा दिया है। उनकी जगह 1993 बैच के आईएएस दुष्यंत नरियाला को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है।

साथ ही राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा की जगह 1997 बैच की आईएएस संघमित्रा घोष को गृह सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है।

चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। नए अधिकारियों के कार्यभार ग्रहण करने की रिपोर्ट सोमवार दोपहर 3 बजे तक आयोग को भेजनी होगी।

आदेश में कहा गया है कि जिन अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया है, उन्हें चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी चुनाव से जुड़े पद पर तैनात नहीं किया जाएगा।

चुनाव आयोग ने रविवार को राज्य के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। बंगाल की 294 सीटों पर 2 फेज में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। 4 मई को रिजल्ट आएगा।

EC ने कहा- चुनाव तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया फैसला

चुनाव आयोग ने आदेश में कहा कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद वह लगातार प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। इसी क्रम में यह फैसला लिया गया है। आयोग का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक बदलाव किए जा रहे हैं।

5 मार्च: बंगाल के राज्यपाल का इस्तीफा, आरएन रवि नए गवर्नर

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस्तीफा दे दिया था। उनकी जगह तमिलनाडु के गवर्नर रहे आरएन रवि को बंगाल भेजा गया है। बोस 23 नवंबर 2022 को बंगाल के राज्यपाल बने थे।

बोस के कार्यकाल के दौरान कई बार ममता सरकार और राजभवन के बीच मतभेद भी सामने आए थे। हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोस के इस्तीफे पर हैरानी जताते हुए कहा था कि ये केंद्र का एकतरफा फैसला है। गृह मंत्री अमित शाह ने मुझसे राय नहीं ली है।

पश्चिम बंगाल- 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री

14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं।

11773576036 1773606350

—————————————–

ये खबर भी पढ़ें…

चुनाव के ऐलान से सवा घंटे पहले ममता का ऐलान, बंगाल में पुजारियों-मुअज्जिनों का मानदेय ₹500 बढ़ा, हर महीने ₹2000 मिलेंगे

image resize color correction and ai 71773568562 1773606604

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा से सवा घंटे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुजारियों और मुअज्जिनों (अजान के लिए आवाज देने वाला) के मानदेय में ₹500 की बढ़ोतरी की है। इन्हें अब हर महीने 2 हजार रुपए मिलेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

उत्तराखंड पुलिस अधिकारियों को मकान गिराने के मामले में लापरवाही बरतने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।


India

-Oneindia Staff

उत्तराखंड में एक पूर्व नौसेना अधिकारी की विधवा के घर में कथित डकैती और विध्वंस के दौरान निष्क्रियता के लिए राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने एक आईपीएस अधिकारी सहित दो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सलाह दी है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश एन. एस. धनिक के नेतृत्व वाले प्राधिकरण ने इस मामले में तत्कालीन एसएसपी जन्मेजय खंडूरी और क्लेमेंटटाउन एसएचओ नरेंद्र गहलोत द्वारा घोर लापरवाही की पहचान की।

 उत्तराखंड पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई

Representative image

प्राधिकरण के आदेश के अनुसार, लापरवाही के कारण शिकायतकर्ता, कुसुम कपूर को महत्वपूर्ण आर्थिक, शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान हुआ, जिससे उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ। अधिकारियों को कपूर के घर की लूटपाट और विध्वंस को रोकने में विफल रहने और प्राथमिकी दर्ज करने में विफल रहने का दोषी पाया गया। उत्तराखंड सरकार के गृह विभाग को इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने और प्राधिकरण को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।

पूर्व नौसेना अधिकारी कमोडोर विनोद कुमार कपूर की विधवा कुसुम कपूर ने बताया कि वह 25 वर्षों से अपनी अविवाहित और मानसिक रूप से विक्षिप्त बेटी टीना के साथ घर में रह रही थीं। जनवरी 2022 में, जब उनके पति चिकित्सा उपचार के लिए नोएडा में थे, कथित तौर पर 30 से 40 सशस्त्र व्यक्तियों के एक समूह ने उनके घर पर धावा बोल दिया।

सूत्रों के अनुसार, घुसपैठियों ने घरेलू सहायकों और किरायेदारों को बंधक बना लिया, कीमती सामान लूट लिया और जेसीबी मशीन का उपयोग करके घर को ध्वस्त कर दिया। घटना की सूचना पुलिस को देने के बावजूद, कपूर ने दावा किया कि तत्कालीन डीजीपी के हस्तक्षेप से मामला दर्ज होने तक कोई समय पर कार्रवाई नहीं की गई।

प्राधिकरण की सिफारिशें

प्राधिकरण ने अपने आदेश की एक प्रति पुलिस महानिदेशक को भेज दी है। 2007 बैच के आईपीएस अधिकारी खंडूरी, वर्तमान में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के साथ प्रतिनियुक्ति पर हैं। यह सिफारिश प्राधिकरण द्वारा एक आईपीएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का सुझाव देने का दूसरा अवसर है। दिसंबर 2025 में, 2014 बैच के अधिकारी लोकेश्वर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।

यह मामला गंभीर आरोपों से निपटने में पुलिस की जवाबदेही और प्रतिक्रिया के संबंध में चल रही चिंताओं को उजागर करता है। प्राधिकरण का यह निर्णय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के भीतर उपेक्षा को संबोधित करने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

With inputs from PTI



Source link

West Asia Crisis: क्या पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय रिफाइनरों को हो सकता है फायदा? जानें रिपोर्ट का दावा


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सप्लाई बाधाओं के बीच भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए मुनाफे का नया मौका बनता दिख रहा है। मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ भारत की कच्चे तेल आपूर्ति शृंखला पर अल्पकालिक दबाव है, वहीं दूसरी तरफ एशिया में सप्लाई तंगी से रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ने के कारण विविध स्रोतों से तेल खरीदने वाले भारतीय रिफाइनरों को फायदा हो सकता है।

होर्मुज संकट भारत के लिए क्यों खतरा?

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि भारत अभी भी पश्चिम एशिया से आने वाले तेल प्रवाह पर काफी हद तक निर्भर है, क्योंकि उसकी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर आता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन की 40-50 प्रतिशत तेल जरूरतें होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते पूरी होती हैं। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला के लिए खतरा बन सकती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 46 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। इससे साफ है कि देश की रिफाइनिंग जरूरतें अब भी खाड़ी उत्पादक देशों पर काफी हद तक टिकी हुई हैं।

भारत के पास क्या है समाधान?

हालांकि, मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि मौजूदा समय में भंडार और वैकल्पिक सप्लाई रूट भारत को राहत दे सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार 30 से 200 दिनों तक का है। इसके अलावा भारत पहले से ही दूसरे सप्लायर्स से खरीद बढ़ाने में जुटा है।

आपूर्ति जोखिम कम करने के लिए भारत ने रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी कच्चे तेल, खासकर यूराल्स ग्रेड, की खरीद बढ़ाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा रूसी तेल आयात पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिनों की छूट दिए जाने के बाद भारत ने इस दिशा में तेजी दिखाई है। साथ ही, भारत ईरान के साथ भी बातचीत कर रहा है ताकि एलपीजी और कच्चा तेल लेकर आने वाले 20 से अधिक टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिल सके।

पश्चिम एशिया जंग से भारतीय रिफाइनिंग सेक्टर को कैसे मिलेगा फायदा?

मॉर्गन स्टैनली ने यह भी कहा कि अगर पश्चिम एशिया में यह व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है, तो भारत का रिफाइनिंग सेक्टर इससे फायदा भी उठा सकता है। एशिया में सप्लाई की तंगी और निर्यात पर अंकुश के कारण रिफाइनिंग मार्जिन बढ़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल, नैफ्था और फ्यूल ऑयल की कीमतों में 18 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।



ऐसे में जिन रिफाइनरों के पास कच्चे तेल के विविध स्रोत हैं, खासकर बड़ी एकीकृत कंपनियां और सरकारी तेल विपणन कंपनियां, उन्हें अधिक मुनाफा हो सकता है। मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि अगर रिफाइनरों का ग्रॉस मार्जिन 1 से 1.5 डॉलर प्रति बैरल बढ़ता है, तो वर्ष 2026 में उनकी आय में 15 से 30 प्रतिशत तक उछाल आ सकता है।



रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट की अवधि ही आगे का सबसे बड़ा निर्णायक कारक होगी। फिलहाल भंडार और वैकल्पिक खरीद भारत के लिए सुरक्षा कवच बने हुए हैं, लेकिन अगर आपूर्ति में बाधा लंबी चली तो एशिया की ऊर्जा और औद्योगिक सप्लाई चेन पर दबाव और बढ़ सकता है।







Source link