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US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग से इन मुस्लिम देशों की बल्ले बल्ले, हो रही तगड़ी कमाई


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oi-Smita Mugdha

US Iran War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। जंग ने अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर असर डालना शुरू कर दिया है। युद्ध के 15 दिन पूरे होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इस टकराव से किसे नुकसान हुआ और किसे फायदा मिला? दरअसल, जब भी खाड़ी क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो इसका सबसे पहला असर ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।

पर्शियन गल्फ दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में संघर्ष की स्थिति बनने पर तेल की सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली जाती हैं।

US Iran War

US Iran War: तेल निर्यातक देशों को मिलता है लाभ

– तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से उन देशों को सीधा फायदा होता है जो बड़े पैमाने पर तेल निर्यात करते हैं। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और रूस जैसे देशों की अर्थव्यवस्था को महंगे तेल से बड़ा लाभ मिलता है।

– हालांकि, इस बार स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। क्षेत्र में बढ़ते हमलों और सुरक्षा खतरों की वजह से कई रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है।

– इससे कुछ खाड़ी देशों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का फायदा तेल निर्यातक मुस्लिम देशों को मिल रहा है।

US Iran war Impact: रूस को मिला आर्थिक और राजनीतिक फायदा

इस पूरे संघर्ष से सबसे ज्यादा फायदा रूस को मिलने की चर्चा हो रही है। रूस पहले से ही दुनिया के बड़े तेल और गैस निर्यातकों में शामिल है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो रूस की आय में भी तेजी से इजाफा होता है। इसके अलावा, राजनीतिक स्तर पर भी रूस को अवसर मिलता है। जब अमेरिका का ध्यान मध्य पूर्व में युद्ध पर केंद्रित रहता है तो यूरोप और पूर्वी यूरोप के अन्य मुद्दों पर उसकी सक्रियता कम हो सकती है। इससे रूस को अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश मिलती है।

चीन की रणनीति भी मजबूत

इस संघर्ष से चीन को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलता दिखाई दे रहा है। चीन लंबे समय से मध्य पूर्व में अपनी आर्थिक और राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को अपने तेल के लिए वैकल्पिक खरीदारों की तलाश रहती है। ऐसे में चीन अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईरान से तेल खरीद सकता है। इससे उसे सस्ता ईंधन मिलता है और साथ ही क्षेत्र में उसका प्रभाव भी बढ़ता है।

हथियार उद्योग की बढ़ती मांग

युद्ध का एक बड़ा आर्थिक लाभ हथियार बनाने वाली कंपनियों को भी मिलता है। अमेरिका, फ्रांस, यूके और रूस की रक्षा कंपनियों को ऐसे समय में बड़े ऑर्डर मिलने लगते हैं। मध्य पूर्व के कई देश क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए मिसाइल सिस्टम, फाइटर जेट और अन्य आधुनिक हथियार खरीदते हैं। इससे रक्षा उद्योग को अरबों डॉलर का कारोबार मिलता है।

इजराइल की रणनीतिक सोच

ईरान और इजराइल के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। इजराइल हमेशा ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमता को अपने लिए बड़ा खतरा मानता रहा है। ऐसे में यदि युद्ध के कारण ईरान का सैन्य ढांचा कमजोर होता है तो इसे इजराइल अपने लिए रणनीतिक राहत के रूप में देखता है, भले ही संघर्ष के दौरान उसे भी नुकसान झेलना पड़े।

घरेलू राजनीति पर भी असर

कई बार युद्ध का लाभ सीधे देशों को नहीं बल्कि वहां के नेताओं को मिलता है। राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद के मुद्दे को आगे रखकर सरकारें घरेलू असंतोष से ध्यान हटाने की कोशिश करती हैं। ईरान और अमेरिका दोनों में यह रणनीति अलग-अलग समय पर देखने को मिलती रही है। अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, हथियार उद्योग, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।



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मजदूर की मौत; अडाणी पावर प्लांट में आगजनी: पुलिस की गाड़ियां फोड़ी, सिंगरौली में कर्मचारी को पीटा; काम छोड़ घर लौटे कई मजदूर – Singrauli News




सिंगरौली जिले के माडा थाना क्षेत्र के बधौरा स्थित अडाणी पावर प्लांट में शनिवार सुबह मजदूर की मौत के बाद जमकर हंगामा हो गया। गुस्साए मजदूरों ने प्लांट परिसर में तोड़फोड़ करते हुए आग लगा दी। सामने आए वीडियो में दूर से काले धुएं का बड़ा गुबार नजर आ रहा है। प्लांट के अंदर एक साइट के नीचे भी आग लगी हुई है। हालात को काबू में करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात किए गए हैं। जानकारी के अनुसार, प्लांट में काम करने वाले मजदूर लल्लन सिंह की शुक्रवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। मृतक मूल रूप से झारखंड के गढ़वा जिले का रहने वाला था और लंबे समय से इसी प्लांट में काम कर रहा था। मजदूर की मौत की खबर फैलते ही साथी मजदूरों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने शव छिपाने का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि ये अफवाह भी फैली कि मजदूर लल्लन की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हुई है। कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन का दावा है कि मजदूर की मौत देर रात हार्ट अटैक से हुई। कंपनी के अंदर स्थिति तनावपूर्ण है। मजदूरों ने एक दर्जन से अधिक गाड़ियों को क्षतिग्रस्त किया और पलट दिया। पुलिस चौकी प्रभारी की गाड़ी में भी तोड़फोड़ कर पलटा दी। प्रशासन बोला- मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी पावर प्लांट के अंदर मजदूर की निष्पक्ष जांच और साथी मजदूर की मौत का कारण स्पष्ट करने की मांग कर रहे थे। इस पर प्रशासन ने उन्हें भरोसा दिया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच होगी। कोई दोषी पाया जाएगा उसपर कार्रवाई की जाएगी। अगर प्रबंधन की तरफ से कोई लापरवाही हुई है तो उसकी भी जांच होगी। इसके बाद मजदूर शांत हुए। देखिए तोड़फोड़ और आगजनी की 6 तस्वीरें… एक हजार से ज्यादा मजदूर अभी प्लांट के अंदर सिंगरौली बधौरा पावर प्लांट में हुए हादसे के बाद करीब 200 से ज्यादा पुलिस बल मौके पर तैनात है, वहीं मौके पर एसडीएम, तहसीलदार, एडिशनल एसपी सहित कई थानों का पुलिस बल भी तैनात था। कंपनी में 10 हजार से ज्यादा मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें से 8 से 9 मजदूर घटना होने के बाद अपना-अपना सामान लेकर प्लांट के बाहर निकल गए। एक हजार से ज्यादा मजदूर अभी प्लांट के अंदर हैं। जिला प्रशासन लगातार उन्हें समझाइश दे रहा है। अभी स्थिति सामान्य नहीं है। मृतक लल्लन सिंह के रूम मेट के मुताबिक, प्लांट में काम कर रहे मजदूरों ने बताया कि जब हादसा हुआ, उसके बाद प्लांट के अंदर भगदड़ मच गई। गुस्साए मजदूरों ने ठेकेदार के ऑफिस को आग के हवाले कर दिया। थाना प्रभारी एवं चौकी प्रभारी के गाड़ियों में तोड़फोड़ कर दी। कंपनी के अधिकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई। अधिकारी 150 से ज्यादा पुलिस बल लेकर मजदूरों का समझाने का प्रयास कर रहे हैं। खबर के मिनट-टु-मिनट अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…



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भोपाल में LPG संकट के बीच बड़ा एक्शन, ममता भारत गैस एजेंसी पर केस दर्ज, जानिए कैसे हुई कार्रवाई


Bhopal

oi-Laxminarayan Malviya

Bhopal LPG Crisis: ईरान-अमेरिका-इसराइल युद्ध के असर से पैदा हुए वैश्विक LPG संकट का असर अब भोपाल में प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में भी दिखाई देने लगा है।

घरेलू सिलेंडरों की किल्लत, कमर्शियल गैस की सप्लाई ठप होने और कालाबाजारी की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच भोपाल प्रशासन ने बैरागढ़ तहसील क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए ममता भारत गैस एजेंसी के खिलाफ Essential Commodities Act (EC Act) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

action amid LPG crisis in Bhopal case registered against Mamta Bharat Gas Agency under EC Act

भोपाल में LPG संकट के बीच बड़ा एक्शन

प्रशासन के अनुसार एजेंसी द्वारा बंद गोदाम स्थल से गैस सिलेंडरों का वितरण किया जा रहा था, साथ ही शासन के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत कमर्शियल सिलेंडरों का वितरण भी पाया गया। इस पूरे मामले की पुष्टि बैरागढ़ एसडीएम रविशंकर राय ने की है। प्रशासन का कहना है कि संकटकाल में गैस वितरण व्यवस्था से किसी भी तरह की छेड़छाड़, नियमों की अनदेखी या गुप्त तरीके से सप्लाई करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

भोपाल में पहले से ही गैस संकट ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घरेलू सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं को कई-कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से बुरी तरह प्रभावित हैं। ऐसे माहौल में यदि कोई एजेंसी बंद गोदामों से गुपचुप सप्लाई करती पाई जाती है, तो यह न केवल शासन के आदेशों का उल्लंघन है, बल्कि संकट को और गहरा करने वाला कदम भी माना जा रहा है।

बंद गोदाम से हो रहा था वितरण, प्रशासन ने पकड़ी गड़बड़ी

जानकारी के मुताबिक बैरागढ़ तहसील क्षेत्र में स्थित ममता भारत गैस एजेंसी, जो भारत गैस (BPCL) की डीलर बताई जा रही है, पर जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। प्रशासन को सूचना मिली थी कि एजेंसी द्वारा ऐसे गोदाम स्थल से गैस वितरण किया जा रहा है, जो अधिकृत रूप से संचालित नहीं था या सामान्य तौर पर बंद रहता है।

जांच में यह भी सामने आया कि एजेंसी के स्तर पर कमर्शियल गैस सिलेंडरों के वितरण में भी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। जबकि मौजूदा संकट को देखते हुए शासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि उपलब्ध LPG स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर केवल घरेलू उपभोक्ताओं, अस्पतालों, सेना-पुलिस कैंटीन, रेलवे, एयरपोर्ट और अन्य आपात सेवाओं के लिए सुरक्षित रखा जाए। इसके उलट होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और अन्य व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं को कमर्शियल सप्लाई फिलहाल सीमित या बंद रखने के निर्देश हैं।

ऐसे में यदि बंद गोदाम से सिलेंडरों का वितरण और कमर्शियल सप्लाई के निर्देशों की अनदेखी की जा रही थी, तो यह संकट की स्थिति में गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है। प्रशासन ने इस मामले को हल्के में लेने के बजाय सीधे EC Act के तहत कार्रवाई की है, जो संकेत देता है कि आगे इस तरह के मामलों में और भी सख्त रवैया अपनाया जा सकता है।

EC Act के तहत प्रकरण दर्ज, सख्त सजा का प्रावधान

प्रशासन ने एजेंसी के खिलाफ Essential Commodities Act के तहत मामला दर्ज किया है। यह कानून आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, गलत वितरण और आपूर्ति व्यवस्था में छेड़छाड़ के मामलों में कड़ी कार्रवाई की अनुमति देता है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर सिलेंडर जब्ती, जुर्माना और जेल की सजा तक का प्रावधान है।

अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात सामान्य समय जैसे नहीं हैं। LPG जैसी आवश्यक वस्तु पर लोगों की सीधी निर्भरता है। ऐसे में यदि कोई डीलर या एजेंसी वितरण नियमों से खिलवाड़ करती है, तो उसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है। यही कारण है कि प्रशासन ने इसे महज विभागीय गड़बड़ी न मानकर कानूनी उल्लंघन की श्रेणी में लिया।

संकट के बीच क्यों अहम है यह कार्रवाई

भोपाल शहर पिछले कई दिनों से LPG संकट के दबाव में है। घरेलू सिलेंडरों की डिलीवरी में 5 से 7 दिन तक की वेटिंग बताई जा रही है। दूसरी तरफ कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है। इसका सीधा असर होटल, ढाबे, चाय की दुकानों, कैंटीनों और छोटे खान-पान व्यवसायों पर पड़ा है।

स्थिति यह है कि कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान या तो सीमित मेन्यू पर काम कर रहे हैं या वैकल्पिक ईंधन जैसे लकड़ी, कोयला और इंडक्शन का सहारा लेने को मजबूर हैं। इस बीच ब्लैक मार्केट में कमर्शियल सिलेंडर ₹2000 से ₹5000 तक में बिकने की खबरें भी सामने आई हैं। आम तौर पर तय दरों पर मिलने वाली गैस की इस तरह ऊंची कीमत पर बिक्री, प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

जब घरेलू उपभोक्ता अपने सिलेंडर के लिए इंतजार कर रहे हों और कमर्शियल सेक्टर खुले बाजार या अवैध चैनल से सिलेंडर जुटाने की कोशिश कर रहा हो, तब एजेंसियों की भूमिका बेहद संवेदनशील हो जाती है। ऐसे समय यदि कहीं बंद गोदामों से गुपचुप वितरण होने लगे, तो इससे असंतुलन और बढ़ता है। इसीलिए बैरागढ़ में हुई यह कार्रवाई सिर्फ एक एजेंसी के खिलाफ कदम नहीं, बल्कि पूरे शहर के गैस वितरण तंत्र के लिए सख्त संदेश मानी जा रही है।

पहले भी हुई हैं छापेमार कार्रवाई

भोपाल प्रशासन और खाद्य विभाग पहले से ही गैस संकट को देखते हुए अलग-अलग इलाकों में निगरानी बढ़ाए हुए हैं। हाल के दिनों में कई स्थानों पर जांच और छापेमारी की कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि न्यू लोहा मंडी क्षेत्र में भी कार्रवाई के दौरान 66 सिलेंडर जब्त किए गए थे।

लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद कलेक्टर कार्यालय, खाद्य विभाग, आपूर्ति विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें सक्रिय हैं। खासतौर पर उन गोदामों, एजेंसियों और सप्लाई पॉइंट्स पर नजर रखी जा रही है, जहां से अनियमित वितरण, स्टॉक छिपाने या गलत श्रेणी में सिलेंडर सप्लाई करने की सूचना मिल रही है।

प्रशासन ने कहा- पारदर्शिता से होगा वितरण

बैरागढ़ एसडीएम रविशंकर राय ने स्पष्ट किया है कि गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। उनके मुताबिक बंद गोदामों से वितरण पूरी तरह अवैध है और कमर्शियल सिलेंडरों का उपयोग या वितरण शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही होना चाहिए।

प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है और अन्य एजेंसियों के रिकॉर्ड, गोदाम संचालन और वितरण प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई भी एजेंसी घरेलू उपभोक्ताओं को दरकिनार कर गलत चैनल के जरिए सिलेंडर खपाने की कोशिश करेगी, तो उसके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई होगी।

जनता से अपील: शिकायत करें, कालाबाजारी रोकें

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं गैस सिलेंडर की कालाबाजारी, अधिक कीमत वसूली, बंद गोदाम से गुप्त वितरण, फर्जी बुकिंग या घरेलू सिलेंडर के दुरुपयोग जैसी गतिविधियां दिखें, तो तत्काल इसकी सूचना प्रशासन या खाद्य विभाग को दें।

अधिकारियों का मानना है कि केवल सरकारी निगरानी से ही नहीं, बल्कि नागरिक सहयोग से भी इस संकट को नियंत्रित किया जा सकता है। यदि लोग शिकायत दर्ज कराएं और प्रमाण उपलब्ध कराएं, तो अवैध नेटवर्क पर जल्दी कार्रवाई संभव होगी।

घरेलू उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद, लेकिन संकट अभी बरकरार

बैरागढ़ की ममता भारत गैस एजेंसी पर हुई कार्रवाई को प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह उम्मीद जरूर बनी है कि गैस वितरण व्यवस्था में कुछ हद तक अनुशासन आएगा और घरेलू उपभोक्ताओं तक उपलब्ध स्टॉक को प्राथमिकता के साथ पहुंचाया जा सकेगा।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर LPG आपूर्ति का संकट लंबा खिंचता है, तो स्थानीय स्तर की कार्रवाई से केवल आंशिक राहत ही मिल पाएगी। शहर में मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना रहेगा, और इससे कालाबाजारी की कोशिशें भी जारी रह सकती हैं।

फिलहाल इतना तय है कि भोपाल प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि गैस संकट के इस दौर में नियमों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई होगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस सख्ती का असर अन्य एजेंसियों और सप्लाई नेटवर्क पर कितना पड़ता है, और आम उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने की स्थिति कितनी जल्दी सुधरती है।



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Baghdad US Embassy Attack: बगदाद में अमेरिकी एंबेसी पर मिसाइल हमले से हड़कंप, हेलीपैड पर धमाका



Baghdad US Embassy Attack: अमेरिकी हमले का जवाब देते हुए ईरान ने बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर बड़ा हमला किया है। इससे अफरा तफरी का माहौल बन गया और मिसाइल अटैक के बाद पूरा परिसर धू-धू कर जलने लगा।



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Indians Arrested in USA: अमेरिका में 11 भारतीय गिरफ्तार, USA वीजा के लिए करवा डाली डकैती, क्या है पूरा मामला?


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oi-Sumit Jha

Indians arrested in USA: विदेशी धरती पर बसने की चाहत कभी-कभी लोगों से ऐसे काम करवा देती है जो कानून की नजर में भारी पड़ जाते हैं। हाल ही में अमेरिका से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कुछ भारतीय नागरिकों ने वहां का वीज़ा हासिल करने के लिए एक अनोखा और खतरनाक रास्ता चुना।

संघीय जांच एजेंसी (FBI) ने इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ किया है और 11 भारतीय को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना से न केवल इन लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, बल्कि अमेरिका में रह रहे प्रवासी समुदाय के बीच भी यह चर्चा का विषय बन गया है।

Indians arrested in USA

U-Visa fraud case: क्या है पूरा मामला?

यह मामला अमेरिका में कानूनी रूप से बसने के लिए रची गई एक फिल्मी साजिश जैसा है। साल 2023 में मैसाचुसेट्स और आसपास के राज्यों की शराब दुकानों और फास्ट-फूड रेस्तरां में अचानक सशस्त्र डकैतियों की बाढ़ सी आ गई। शुरुआती जांच में ये घटनाएं सामान्य अपराध लगीं, लेकिन जब एफबीआई (FBI) ने सीसीटीवी फुटेज और पीड़ितों के बयानों की बारीकी से जांच की, तो उन्हें दाल में कुछ काला नजर आया।

जांच में खुलासा हुआ कि ये डकैतियां असली नहीं, बल्कि पूरी तरह ‘स्क्रिप्टेड’ थीं। आरोपी जानबूझकर सीसीटीवी कैमरों के ठीक सामने डकैती का नाटक करते थे ताकि पुख्ता सबूत बन सके। लुटेरा बंदूक दिखाकर कैश लेकर भागता और दुकान का मालिक या कर्मचारी (जो खुद इस साजिश का हिस्सा थे) जानबूझकर 5 से 10 मिनट तक पुलिस को फोन नहीं करते थे। इसका मकसद केवल पुलिस रिकॉर्ड में खुद को ‘गंभीर अपराध का पीड़ित’ दर्ज कराना था, ताकि वे इसके आधार पर अमेरिका में विशेष ‘U-Visa’ के लिए आवेदन कर सकें और वहां पक्का ठिकाना बना सकें।

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U-Visa का लालच और खेल

अमेरिका में ‘U-Visa’ उन लोगों को मिलता है जो किसी गंभीर अपराध का शिकार हुए हों और जांच में पुलिस की मदद कर रहे हों। आरोपियों का मकसद यही वीज़ा हासिल करना था। अगर वे खुद को डकैती का शिकार दिखा देते, तो उन्हें अमेरिका में रहने का कानूनी अधिकार और भविष्य में ग्रीन कार्ड मिलने का रास्ता साफ हो जाता। इसी आव्रजन लाभ (Immigration Benefit) के चक्कर में उन्होंने अपनी ही सुरक्षा को दांव पर लगाकर फर्जी एफआईआर दर्ज कराईं।

Fake robbery for US Visa: साजिश रचने का तरीका

इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड रामभाई पटेल नाम का व्यक्ति बताया जा रहा है। वह दुकान मालिकों और क्लर्कों से पैसे लेकर उनके यहां फर्जी लूट की सेटिंग करता था। योजना के मुताबिक, एक फर्जी लुटेरा दुकान में आता, बंदूक दिखाकर डराता और कैश लेकर भाग जाता। यह सब कैमरे में रिकॉर्ड होता था। लूट के बाद दुकानदार जानबूझकर 5-10 मिनट बाद पुलिस को फोन करते थे ताकि ‘लुटेरा’ सुरक्षित निकल जाए और पुलिस को लगे कि वारदात असली थी।

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America Indian nationals arrested: कहां-कहां हुई गिरफ्तारियां?

FBI ने इस मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए अमेरिका के अलग-अलग राज्यों से कुल 10 भारतीयों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 6 आरोपियों (जितेंद्र, महेश, संजय, अमिताबेन, संगीताबेन और मितुल) को मैसाचुसेट्स में पकड़ा गया। अन्य 4 आरोपियों (रमेशभाई, रोनाकुमार, सोनल और मिनकेश) को केंटकी, मिसौरी और ओहियो से गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि एक अन्य आरोपी को पहले ही भारत वापस भेज दिया गया है। इन सभी पर वीज़ा धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप है।

World News Hindi: कितनी सख्त होगी सजा?

अमेरिकी कानून के मुताबिक, वीज़ा के लिए धोखाधड़ी करना एक गंभीर संघीय अपराध है। पकड़े गए आरोपियों पर दोष सिद्ध होने के बाद उन्हें 5 साल तक की जेल की सजा काटनी पड़ सकती है। इसके साथ ही, उन पर 2,50,000 डॉलर (करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक) का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। सजा पूरी होने के बाद इन लोगों को अमेरिका से डिपोर्ट (निर्वासित) किया जा सकता है, जिससे उनका भविष्य में अमेरिका लौटने का सपना हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।



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US: टिकटॉक सौदे से अमेरिका को मिलेंगे अरबों डॉलर, अमेरिकी यूजर्स का डेटा भी सुरक्षित होगा


अमेरिका की ट्रंप सरकार को टिकटॉक के सौदे से बड़ा फायदा होने जा रहा है। दरअसल इस सौदे के तहत अमेरिका को निवेशकों से करीब 10 अरब डॉलर की फीस मिलेगी। साथ ही सौदे के तहत अमेरिकी यूजर्स का डेटा भी सुरक्षित होगा। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है। 

अमेरिकी सरकार को सौदे से हुआ बड़ा फायदा

टिकटॉक की मूल कंपनी चीनी कंपनी बाइट डांस है, लेकिन जनवरी में अमेरिकी सरकार के दबाव के बाद बाइट डांस ने अमेरिकी कंपनी के साथ संयुक्त रूप से टिकटॉक चलाने का सौदा किया था।

इस सौदे के तहत अमेरिका के यूजर्स का डेटा सुरक्षित होगा। अमेरिका में टिकटॉक के करीब 20 करोड़ यूजर्स हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बीते सितंबर में बताया था कि चीनी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम वाली अमेरिकी कंपनी का मूल्य करीब 14 अरब डॉलर होगा। 

सौदे के तहत अमेरिकी निवेशक ट्रंप प्रशासन को फीस के तौर पर 10 अरब डॉलर का भुगतान करेंगे। अमेरिकी निवेशकों में ओरेकल, सिल्वर लेक हैं।

ट्रंप सरकार के अधिकारियों का कहना है कि यह शुल्क जायज है क्योंकि टिकटॉक के अधिग्रहण में चीन के साथ बातचीत में ट्रंप की अहम भूमिका थी। 



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उपराष्ट्रपति आज हिमाचल दौरे पर: केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे, मेधावी छात्रों को डिग्रियां देंगे, 52 को मिलेंगे गोल्ड मेडल – Dharamshala News




भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन आज हिमाचल प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। सीपी राधाकृष्णन हिमाचल के कांगड़ा स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय में मेधावी छात्रों को डिग्रियां व पदक प्रदान करेंगे। इस मौके पर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहेंगे, जबकि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। केंद्रीय विश्वविद्यालय कांगड़ा का यह नौवां दीक्षांत समारोह है। इस वर्ष कुल 802 स्टूडेंट को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी, जिनमें 420 छात्राएं और 382 छात्र शामिल हैं। कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल के अनुसार, 37 पीएचडी, 665 स्नातकोत्तर, 89 स्नातक और 11 एम.फिल की डिग्रियां वितरित की जाएंगी। 52 मेधावियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाएगा शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 52 मेधावियों को स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया जाएगा। दीक्षांत समारोह की परंपरा के अनुसार, सभी विद्यार्थी भारतीय परिधानों में अपनी उपाधियां ग्रहण करेंगे। उपराष्ट्रपति के इस अति-विशिष्ट (VVIP) दौरे के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हैं। पैराग्लाइडिंग, ड्रोन, हॉट एयर बैलूनिंग जैसी हवाई गतिविधियों पर प्रतिबंध अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कांगड़ा, शिल्पी बेक्टा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के बाद धर्मशाला, कांगड़ा, शाहपुर और पालमपुर क्षेत्र में पैराग्लाइडिंग, ड्रोन उड़ाने, हॉट एयर बैलूनिंग और सभी प्रकार की हवाई गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया है और समारोह के दौरान किसी भी चूक से बचने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है।



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Dubai Gold Rate Today: 10 ग्राम सोने पर ₹21,080 की सीधी बचत, यहां देखें 14 मार्च को दुबई में क्या है रेट


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oi-Sumit Jha

Dubai Gold Rate Today: आज, 14 मार्च 2026 को दुनिया भर में चल रहे तनाव और अनिश्चितता के कारण सोने के दाम एक बार फिर आसमान छू रहे हैं। सुरक्षित निवेश के लिए सोने की मांग बढ़ने से दुबई और भारत दोनों जगहों पर कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर हैं।

भारत में शादियों का सीजन होने से गहनों की मांग बहुत ज्यादा है, वहीं दुबई अपनी ‘टैक्स-फ्री’ छवि की वजह से भारतीय खरीदारों के लिए अब भी फायदे का सौदा बना हुआ है। आइए देखते हैं आज के ताजा रेट।

Dubai Gold Rate Today

Dubai Gold price: दुबई में सोने का आज का भाव

दुबई के बाजारों में आज 24 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹14,242 प्रति ग्राम चल रही है। वहीं, गहनों के लिए सबसे ज्यादा बिकने वाला 22 कैरेट सोना ₹13,188 और 18 कैरेट सोना ₹10,841 प्रति ग्राम के आसपास मिल रहा है। दुबई में मेकिंग चार्ज कम होने और कोई एक्स्ट्रा टैक्स न होने की वजह से भारतीय पर्यटक और निवेशक यहां से सोना खरीदना काफी पसंद कर रहे हैं, क्योंकि यहां कीमतें पारदर्शी रहती हैं।

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Gold Rate Today: भारत में सोने के ताजा रेट

भारतीय सर्राफा बाजार में आज सोने की कीमतों में बड़ा उछाल देखा जा रहा है। यहां 24 कैरेट (शुद्ध सोना) का भाव ₹16,350 प्रति ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, 22 कैरेट सोने की कीमत ₹14,985 और 18 कैरेट की कीमत ₹12,260 प्रति ग्राम दर्ज की गई है। भारत में लगने वाले भारी टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से यहाँ के दाम दुबई के मुकाबले काफी ज्यादा बने हुए हैं।

Gold price comparison India vs Dubai: कहां है ज्यादा फायदा?

अगर आज के रेट की तुलना करें, तो दुबई और भारत के बीच 24 कैरेट सोने की कीमत में प्रति ग्राम करीब ₹2,108 का बड़ा अंतर है। यानी अगर आप दुबई से सिर्फ 10 ग्राम सोना खरीदते हैं, तो आप भारतीय बाजार के मुकाबले सीधे तौर पर लगभग ₹21,080 तक की बचत कर सकते हैं। यही वजह है कि बजट के हिसाब से चलने वाले लोग दुबई से खरीदारी करना ज्यादा बेहतर समझते हैं।

Silver price India today: चांदी की कीमतों में भी आई तेजी

सोने के साथ-साथ चांदी की चमक भी आज काफी तेज रही। भारत में आज चांदी की कीमत ₹292 प्रति ग्राम है, जो ₹2,92,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। फैक्ट्रियों में बढ़ती मांग और छोटे निवेशकों के बीच चांदी की लोकप्रियता ने इसकी कीमतों को काफी बढ़ा दिया है। कम बजट वाले निवेशकों के लिए आज के माहौल में चांदी निवेश का एक बहुत ही अच्छा और आसान जरिया साबित हो रही है।



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उद्योगों को बड़ी राहत: सरकार ने बदले कैप्टिव पावर जनरेशन के नियम, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगी रफ्तार


भारत के ऊर्जा क्षेत्र और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। ‘इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026’ को अधिसूचित करते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने कैप्टिव पावर जनरेशन के नियमों में अहम बदलाव किए हैं। हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किए गए इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य उद्योगों के लिए नियामक अस्पष्टता को खत्म करना और भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों को हासिल करना है।

नए नियमों के तहत कैप्टिव पावर प्लांट्स के स्वामित्व की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है। अब इसमें उस इकाई की सहायक कंपनियों, होल्डिंग कंपनियों और होल्डिंग कंपनी की अन्य सहायक कंपनियों को भी शामिल किया गया है, जो कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट स्थापित करती हैं। यह स्पष्टीकरण आधुनिक कॉर्पोरेट संरचनाओं को मान्यता देता है, जहां बिजली संपत्तियों को अक्सर समूह संस्थाओं या स्पेशल पर्पस व्हीकल के माध्यम से विकसित किया जाता है। 

इस नीतिगत बदलाव से यह सुनिश्चित होगा कि कॉरपोरेट समूहों के वैध कैप्टिव निवेश को केवल उनकी संगठनात्मक संरचना के कारण कैप्टिव दर्जे से वंचित न किया जाए। इसके अलावा, नियमों के अनुपालन को आसान बनाने के लिए कई प्रावधानों को सरल किया गया है।

कैप्टिव पावर जेनरेशन का मतलब है किसी उद्योग या व्यावसायिक प्रतिष्ठान द्वारा अपनी बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वयं का बिजली संयंत्र स्थापित करना। यह बिजली ग्रिड से खरीदने के बजाय, साइट पर ही (कोयला, गैस, या नवीकरणीय ऊर्जा से) पैदा की जाती है, जो निरंतर और सस्ती बिजली सुनिश्चित करती है।

सरचार्ज और सत्यापन से जुड़ी बड़ी राहत

उद्योगों के लिए अनुपालन और वित्तीय मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण नियम तय किए गए हैं:


  • शुल्क से बचाव: एक नया प्रावधान जोड़ा गया है जिससे कैप्टिव स्थिति के सत्यापन के दौरान डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसधारियों द्वारा उपभोक्ताओं पर शुल्क लगाने से बचा जा सकेगा।

  • सीएसएस और एएस पर छूट: यदि कैप्टिव उपयोगकर्ता एनएलडीसी (अंतर-राज्यीय मामलों के लिए) या राज्य नोडल एजेंसी (अंतर-राज्यीय मामलों के लिए) की प्रक्रियाओं के अनुसार निर्धारित घोषणा जमा करते हैं, तो उन पर क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज (सीएसएस) और अतिरिक्त सरचार्ज (एस) नहीं लगाया जाएगा।

  • जुर्माने का प्रावधान: यदि कोई प्लांट सत्यापन में कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट के रूप में विफल रहता है, तो लागू सीएसएस और एएस, कैरिंग कॉस्ट के साथ देय होंगे। इस कैरिंग कॉस्ट की गणना 2022 के ‘इलेक्ट्रिसिटी (लेट पेमेंट सरचार्ज एंड रिलेटेड मैटर्स) रूल्स’ के तहत लेट पेमेंट सरचार्ज की बेस दर पर की जाएगी।

  • सत्यापन की अवधि: कैप्टिव स्थिति के सत्यापन की प्रक्रिया अब पूरे वित्तीय वर्ष के लिए की जा सकेगी।



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