Home Blog Page 430

सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में दो आरोपियों को जमानत: सुप्रीम कोर्ट ने पवन बिश्नोई और जगतार सिंह को दी राहत, अगली सुनवाई 20 मार्च को – Mansa News




सुप्रीम कोर्ट ने पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के दो नामजद आरोपियों पवन बिश्नोई और जगतार सिंह को जमानत दे दी है। इस फैसले पर सिद्धू मूसेवाला के परिवार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह राहत पवन बिश्नोई और जगतार सिंह मूसा को मिली है, जो शुभदीप सिंह सिद्धू उर्फ सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में आरोपी हैं। 29 मई 2022 में हुई थी हत्या सिद्धू मूसेवाला की हत्या 29 मई 2022 को मानसा जिले के जवाहरके गांव में गोली मारकर की गई थी। पुलिस जांच में पवन बिश्नोई पर शूटरों को राजस्थान नंबर की बोलेरो गाड़ी उपलब्ध कराने का आरोप था, जबकि जगतार सिंह पर मूसेवाला की रेकी करने का आरोप लगाया गया था। हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका जमानत मिलने से पहले, दोनों आरोपी पंजाब की गोबिंदगढ़ जेल में बंद थे। उन्होंने पहले हाईकोर्ट में भी जमानत याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड का ट्रायल मानसा की अदालत में जारी है। इस मामले में कई गवाहों की गवाही हो चुकी है, और सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह की गवाही भी चल रही है। केस की अगली सुनवाई 20 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।



Source link

IPL 2026: क्या चिन्नास्वामी में होगा RCB vs SRH का ओपनिंग मैच? सरकार से अब तक आखिर क्यों नहीं मिली मंजूरी!



IPL 2026, RCB vs SRH: आरसीबी ने पिछले सीजन की ट्रॉफी जीतकर इतिहास रचा था। लेकिन इसके तुरंत बाद स्टेडियम के बाहर अफरा-तफरी का माहौल मच गया था।



Source link

SC बोला-पेरेंट्स की सैलरी OBC क्रीमी लेयर का आधार नहीं: सिविल सेवा पास करने वाले कैंडिडेट्स को राहत, आरक्षण का फायदा नहीं मिला था




सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर का फैसला केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। माता-पिता या अभिभावकों के पद (पोस्ट) और सामाजिक स्थिति (स्टेटस) को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। साथ ही कहा कि अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों और प्राइवेट या PSU कर्मचारियों के बच्चों को अलग-अलग तरीके से आरक्षण दिया जाए तो यह अनुचित भेदभाव होगा। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह फैसला दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए दिल्ली, मद्रास और केरल हाईकोर्ट के फैसलों को सही माना। कोर्ट ने उन UPSC कैंडिडेट्स को बड़ी राहत दी है, जिन्हें सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद नौकरी नहीं दी गई थी। सरकार ने उनके माता-पिता की सैलरी को आधार मानकर उन्हें क्रीमी लेयर की श्रेणी में डाल दिया था। कोर्ट ने साफ किया कि सरकार ने कैंडिडेट्स को आरक्षण से बाहर करने के लिए गलत पैमाना अपनाया।

सरकार ने सैलरी को आय में जोड़ दिया कोर्ट ने कहा- एक पत्र मुख्य नीति को नहीं बदल सकता कोर्ट ने कहा कि 2004 का एक पत्र मुख्य नीति को नहीं बदल सकता। कोर्ट यह भी पाया कि सरकारी कर्मचारियों और पीएसयू कर्मचारियों के बीच भेदभाव करना गलत है। अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को पद के आधार पर छूट मिलती है, तो पीएसयू कर्मचारियों के बच्चों को केवल सैलरी के आधार पर आरक्षण से बाहर करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह 6 महीने के भीतर इन कैंडिडेट्स के दावों पर फिर से विचार करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरी हो तो इन कैंडिडेट्स को नौकरी देने के लिए अलग से पद बनाए जाएं। ———————— ये खबर भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत दी:13 साल से कोमा में है बेटा, माता-पिता ने लगाई थी गुहार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (11 मार्च) को इच्छामृत्यु मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दे दी। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। पढ़ें पूरी खबर…



Source link

अगर वो गाना न होता तो हार जाता भारत? T20 World Cup जीत के बाद कप्तान सूर्यकुमार ने किया चौंकाने वाला खुलासा!


Cricket

oi-Sohit Kumar

T20 World Cup 2026: अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में टीम इंडिया ने 8 मार्च को वो कर दिखाया जिसका पूरे देश को इंतजार था। फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रनों से धूल चटाकर सूर्यकुमार यादव और उनकी पलटन ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 की चमचमाती ट्रॉफी उठा ली है। इस जीत के साथ ही भारत तीन बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई है। इस जीत के बाद अब कप्तान सूर्यकुमार यादव ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है।

पूरे टूर्नामेंट में भारत का जलवा रहा, बस सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक हार मिली थी। उस हार ने ऐसी टेंशन दी कि सेमीफाइनल की राह मुश्किल लगने लगी और वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच ‘करो या मरो’ जैसा हो गया। लेकिन टीम ने जबरदस्त कमबैक किया और विंडीज को रौंदते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई।

Suryakumar Yadav and teammates

सूर्यकुमार ने किया जीत के सीक्रेट का खुलासा

वर्ल्ड कप फतह करने के बाद कप्तान सूर्या ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के साथ बातचीत में वो सीक्रेट बताया जिससे टीम की किस्मत पलट गई। सूर्या ने बताया कि कैसे साउथ अफ्रीका से मिली उस कड़वी हार के बाद टीम ने फिर से जोश भरा। उन्होंने बताया कि फील्डिंग कोच टी दिलीप ने प्रैक्टिस के दौरान बेस्ट फील्डर के लिए 10,000 रुपये का कैश प्राइज शुरू किया था।

सूर्या की टीम को दिखाया 10 मिनट का VIDEO

सूर्या ने कहा कि, ‘पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों का बड़ा रोल रहा। फील्डिंग कोच टी दिलीप ने प्रैक्टिस में बेस्ट फील्डर के लिए 10,000 रुपये का इनाम रखा। साउथ अफ्रीका वाले मैच के बाद हमारे वीडियो एनालिस्ट ने हमें पिछले दो साल का एक 10 मिनट का वीडियो दिखाया। इसमें बल्लेबाजों के लिए एक रील बनी थी जिसके बैकग्राउंड में ‘बाहुबली’ का गाना बज रहा था और गेंदबाजों के लिए ‘ओ शेरा तीर ते ताज’ गाना सेट किया गया था। ये छोटी-छोटी चीजें ही टीम को फौलादी बनाती हैं।’

ड्रेसिंग रूम के माहौल पर ‘मिस्टर 360’ ने कहा कि वहां हर खिलाड़ी को अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। सूर्या ने बताया, ‘टीम में ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ बहुत जरूरी है, आपको सबकी बात सुननी पड़ती है। मैं एकदम जमीनी लेवल पर जाकर सबसे बात करता हूं। कई बार टेंशन वाले माहौल में भी खूब हंसी-मजाक होता था।

सूर्या ने बताया कि, जैसे जब रिंकू सिंह इंग्लिश बोलने की कोशिश करते थे, तो हम अपनी हंसी नहीं रोक पाते थे। ऐसा ही कुछ तिलक वर्मा के साथ होता था जब वो अपने हैदराबादी अंदाज में बात करते थे। ये सब चीजें टीम को एकजुट करने का काम करती हैं।’



Source link

अय्यर के लेटर का थरूर ने दिया जवाब: कहा- मेरी देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत; अय्यर ने लिखा था- क्या आप मोदी की कृपा चाहते हैं




कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं शशि थरूर और मणि शंकर अय्यर के बीच तनाव अब और बढ़ गया है। शशि थरूर ने गुरुवार को अय्यर के ओपन लेटर का जवाब ओपन लेटर लिखकर दिया है। थरूर ने भी कहा है कि विदेश नीति पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इससे किसी की नीयत या देशभक्ति पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। मणि शंकर अय्यर ने 10 मार्च को अपने लेटर में विदेश नीति पर थरूर के रुख की आलोचना की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शशि थरूर ने अमेरिका-इजराइल और ईरान से जुड़े मुद्दों पर भारत के नैतिक रुख को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि भारत को शक्तिशाली देशों के दबाव में चुप नहीं रहना चाहिए और गांधी-नेहरू की नैतिक राजनीति से प्रेरणा लेनी चाहिए। अय्यर ने लेटर में लिखा था कि क्या आप सचमुच नरेंद्र मोदी की कृपा पाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वे आपको वह लाभ दे सकते हैं जो विपक्ष आपको नहीं दे सकता? अय्यर ने लिखा- यहीं से हमारे रास्ते अलग हो जाते हैं। इसपर थरूर ने जवाब में कहा है कि आपरेशन सिंदूर पर मेरे बोलने के बाद से ही आप लगातार मेरे बारे में कई टिप्पणियां कर रहे थे। मैंने अब तक सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन आपकी हाल की टिप्पणियों के बाद जवाब देना जरूरी हो गया था। थरूर का लेटर पढ़िए- लोकतंत्र की खूबी यही है कि लोग अलग-अलग राय रख सकते हैं। असहमति होना गलत नहीं है। लेकिन सिर्फ इसलिए कि कोई विदेश नीति को थोड़ा अलग तरीके से देखता है, उसकी नीयत या देशभक्ति पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। आपने मेरे विचारों और मेरे चरित्र के बारे में जो सार्वजनिक टिप्पणी की है, उसका जवाब देना जरूरी हो गया है।मैंने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों को भारत के राष्ट्रीय हित के नजरिए से देखा है। मेरे लिए भारत की सुरक्षा, भारत की अर्थव्यवस्था और दुनिया में भारत की इज्जत सबसे ऊपर है। दुनिया की राजनीतिक हकीकत को समझना और भारत के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेना कोई “मोरल सरेंडर” नहीं है — यह जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट है। भारत की विदेश नीति हमेशा principle और pragmatism दोनों का संतुलन रही है। Jawaharlal Nehru की Non-Alignment policy से लेकर आज की multi-alignment diplomacy तक भारत का मकसद हमेशा एक ही रहा है, अपनी संप्रभुता की रक्षा करना और दुनिया में न्याय की बात करना। संसद में हो या संसद के बाहर, मेरा रिकॉर्ड इसी संतुलन को दिखाता है।देशभक्ति पर किसी एक पीढ़ी का अधिकार नहीं है। और न ही गांधी जी या नेहरू जी को समझने का अधिकार किसी एक समूह के पास है। असली सम्मान यही है कि उनके विचारों को आज के समय की हकीकत के साथ समझकर लागू किया जाए। इतिहास में भी भारत ने कई बार ऐसा किया है कि किसी देश की गलत कार्रवाई को तुरंत सार्वजनिक रूप से नहीं ललकारा, क्योंकि हमारे अपने राष्ट्रीय हित उससे जुड़े हुए थे। उदाहरण के लिए, सोवियत यूनियन के साथ हमारे रिश्ते इतने महत्वपूर्ण थे कि हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और अफगानिस्तान के मामलों में भी भारत ने बहुत संतुलित रुख अपनाया।आज भी खाड़ी देशों के साथ भारत के बहुत बड़े हित जुड़े हैं। लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार, हमारी एनर्जी सिक्योरिटी और करीब 90 लाख भारतीय वहां काम कर रहे हैं। ऐसे में विदेश नीति बनाते समय इन सब बातों को ध्यान में रखना पड़ता है।यथार्थ को समझना किसी के आगे झुकना नहीं होता। आज अमेरिका में ऐसी सरकार है जो अंतरराष्ट्रीय कानून को हमेशा उसी तरह प्राथमिकता नहीं देती जैसे हम देना चाहते हैं। लेकिन अगर हम उसे खुलकर चुनौती देते हैं तो उसके परिणाम भी हो सकते हैं।अपने हाल के Indian Express लेख में मैंने साफ लिखा है कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और इसे तुरंत खत्म होना चाहिए। लेकिन साथ ही मैंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ हमारे कई महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं, उन्हें खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी। विदेश नीति आखिरकार राष्ट्रीय हित के बारे में ही होती है, केवल भाषण देने या दिखावे की राजनीति करने के बारे में नहीं। मेरी विदेश यात्राओं को लेकर जो आरोप लगाए गए हैं, वे बिल्कुल बेबुनियाद हैं। ऑपरेशन सिंदूर को छोड़कर मेरी बाकी विदेश यात्राएं मेरी प्राइवेट कैपेसिटी में होती हैं। न उन्हें सरकार आयोजित करती है, न सरकार उनका खर्च उठाती है। दुनिया भर के कई विश्वविद्यालय और संस्थान मुझे बुलाते हैं, जितने निमंत्रण आते हैं, उनमें से ज्यादातर को मैं अपने काम के कारण स्वीकार भी नहीं कर पाता।जहाँ तक क्षेत्रीय राजनीति की बात है, मेरे विचार सालों से एक जैसे रहे हैं।मैंने हमेशा Israel और Palestine के बीच two-state solution का समर्थन किया है। और यह भी कहा है कि पाकिस्तान में अक्सर ऐसा लगता है कि वहाँ सेना के पास देश है, न कि देश के पास सेना। ऑपरेशन सिंदूरके बाद जब हमने दुनिया में भारत का पक्ष रखा, तो मेरा संदेश साफ था — “भारत बुद्ध और गांधी की भूमि है। हम शांति चाहते हैं। लेकिन शांति का मतलब कमजोरी नहीं होता। अगर आतंकवाद हमारे लोगों की जान लेगा, तो भारत मजबूती से जवाब देगा।”सबरीमाला के मुद्दे पर भी आपकी आलोचना मुझे थोड़ी अजीब लगी। एक तरफ आप मुझे “गलत विचारों” के लिए कोसते हैं, दूसरी तरफ उसी मुद्दे पर पार्टी के निर्णय के साथ खड़े होने के लिए भी आलोचना करते हैं। मेरी जन्मतिथि को लेकर की गई टिप्पणी भी इस बहस से जुड़ी नहीं है। महात्मा गांधी का सम्मान करने के लिए यह जरूरी नहीं कि किसी को उनकी गोद में खेलने का मौका मिला हो। मैंने गांधी जी और नेहरू जी पर काफी लिखा है और उनका सम्मान मेरे विचारों में गहराई से मौजूद है।विदेश नीति के तरीकों पर मतभेद होना स्वाभाविक है। लेकिन principled pragmatism को गलत समझना ठीक नहीं है।मेरा मानना है कि भारत को ऐसी राष्ट्रवादी सोच की जरूरत है जो नैतिक मूल्यों और वास्तविक दुनिया की राजनीति, दोनों को साथ लेकर चले।आपने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मेरा समर्थन किया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं।और जब आपको पार्टी से निलंबित किया गया था, तब मैंने भी आपके समर्थन में आवाज उठाई थी। मुझे खुशी है कि वह निर्णय बाद में ठीक किया गया।आपने अपने पत्र के अंत में “रास्ते अलग होने” की बात कही। सच यह है कि आपरेशन सिंदूर पर मेरे बोलने के बाद से ही आप लगातार मेरे बारे में कई टिप्पणियां कर रहे थे। मैंने अब तक सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन आपकी हाल की टिप्पणियों के बाद जवाब देना जरूरी हो गया, इसलिए दे रहा हूं। अय्यर ने लिखा था- थरूर के लिए गांधी और नेहरू सिर्फ नाम कल रात (शुक्रवार, 6 मार्च 2026) आपके जवाबों ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया। ये सवाल इजराइल की तरफ से अमेरिका और व्यापक रूप से पश्चिम के साथ मिलकर ईरान पर चलाए जा रहे अवैध और पापपूर्ण युद्ध से जुड़े थे। मैं इतना विचलित हो गया कि मुझे नींद नहीं आई और सुबह 3 बजे उठकर आपको यह खुला पत्र लिख रहा हूं। मैंने अपने राजनीतिक करियर को दांव पर लगाकर न केवल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव में आपको वोट दिया, जबकि मुझे पता था कि आप बुरी तरह हार जाएंगे, बल्कि अगले दिन द इंडियन एक्सप्रेस में यह भी लिखा कि विजेता मल्लिकार्जुन खड़गे को उदारता दिखाते हुए आपके लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करना चाहिए, भले ही उन्हें गांधी परिवार और जी-23 के बचे-खुचे नेताओं का पूरा समर्थन मिला हुआ था। मैंने जोरदार तरीके से तर्क दिया कि एक परिपक्व राजनीतिक दल के अनुरूप, कांग्रेस संगठन में आपको सम्मानजनक स्थान दिया जाना चाहिए ताकि आपकी कई प्रतिभाओं का पूरा उपयोग हो सके। इसके परिणामस्वरूप गांधी परिवार और खड़गे तब से मुझसे मिलने से इनकार करते रहे हैं। फिर भी मुझे नैतिक आधार पर अपनी बात सही लगी। अब मुझे लगता है कि मुझे किसी अधिक योग्य उद्देश्य का समर्थन करना चाहिए था। कल रात “जिसकी ताकत उसकी बात” जैसी सोच का आपका शर्मनाक समर्थन मुझे भयभीत कर गया।आप कहते हैं कि आप अच्छी तरह समझते हैं कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका का सामना करने से क्यों बेहद सतर्क रहते हैं—क्योंकि भारत, खासकर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले “परिणामों” का डर है। स्थायी समिति के चेयरमैन के रूप में आप विदेश नीति पर निर्णय लेने का अधिकार सरकार को सौंप देते हैं, क्योंकि आपके अनुसार पूरी जानकारी केवल सरकार के पास होती है। तो फिर आप अपने इस उच्च पद पर कर क्या रहे हैं? आप अमेरिकी प्रभाव को स्वीकार करने के लिए “यथार्थवाद” की बात करते हैं। ऐसा लगता है कि आपने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की उस पुकार के बारे में न तो सुना है और न ही उस पर ध्यान दिया है, जिसमें कहा गया था—“अहंकारी शक्ति के आगे कभी घुटने मत टेकना।” आप कहते हैं कि बहुत कम विकासशील देशों में अमेरिका के खिलाफ खुलकर बोलने का साहस है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र के सौ से अधिक सदस्य देशों ने गाजा में हुए नरसंहार की कड़ी निंदा की है, और इस तरह उन देशों की भी आलोचना की है जो इसमें सहभागी हैं, जैसे अमेरिका। साथ ही ऐसा लगता है कि आप गुरुदेव के “एकला चलो रे” के संदेश से भी अनभिज्ञ हैं, जो नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति की आधारशिला था। ऐसा लगता है कि आपने रूस और चीन जैसे दो बड़े शक्तिशाली देशों के बारे में भी नहीं सुना, जो ईरान के लोगों पर हो रहे हमले की क्रूरता, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन और ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या जैसी बर्बर घटनाओं पर खुलकर बोल रहे हैं—जैसा नेहरू के दौर में भारत करता था और करता। आप चाहते हैं कि भारत इस अपराध पर इसलिए चुप रहे क्योंकि अमेरिका की सेना हमसे अधिक ताकतवर है? शर्म की बात है! मैंने अपने मन में बहुत खोजा कि आपकी इस सिद्धांतहीन, अनैतिक और लेन-देन आधारित सार्वजनिक नीति—खासकर विदेश नीति—की सोच का मूल कारण क्या है। और मुझे जो एकमात्र कारण समझ आया, वह यह है कि आपका जन्म 1956 में हुआ, मुझसे 15 साल बाद, इसलिए आप महात्मा गांधी और पंडित नेहरू के प्रत्यक्ष प्रभाव के दायरे से बाहर रहे। वे आपके लिए केवल नाम भर थे। लेकिन मेरे लिए वे जीवित स्मृतियां थीं।जब मैं केवल छह साल का था, तब महात्मा गांधी ने अपने शहीद होने से कुछ हफ्ते पहले मुझे और मेरे पांच साल के छोटे भाई को गोद में उठाया था और मैंने उन्हें कहते सुना—“ये मेरे आंखों के चांद और सूरज हैं।”मेरा नैतिक संसार हमेशा महात्मा गांधी के सिद्धांतों से ही प्रेरित रहा है।उन्होंने मिट्टी से हमें इंसान बनाया।लेकिन शायद इससे भी अधिक प्रभाव जवाहरलाल नेहरू का रहा। जब भारत को स्वतंत्रता मिली और वे देश के पहले प्रधानमंत्री बने, तब मैं छह साल का था।और जब उनका निधन हुआ, तब मैं 23 साल का था और भारतीय विदेश सेवा में प्रशिक्षु था। अपने पूरे युवावस्था के वर्षों में मैं उस नैतिक छाया में रहा जो पंडितजी ने इस नए राष्ट्र पर डाली थी।जब मैंने नेहरू की विदेश नीति पर आपकी तीखी आलोचना पढ़ी, तब मुझे हमारे बीच की पीढ़ीगत दूरी समझ लेनी चाहिए थी—लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया।मुझे लगा कि आप केवल छोटी-छोटी कमियां निकाल रहे हैं। लेकिन वास्तव में आप विदेश नीति पर एक वैकल्पिक और पूरी तरह अनैतिक तथा लेन-देन आधारित दृष्टिकोण पेश कर रहे थे।उम्र में 15 साल का अंतर कितना बड़ा फर्क पैदा कर सकता है!जब देश स्वतंत्रता के लिए लड़ रहा था, तब भी आपके जैसे कई लोग थे।उन्हें वी.एस. नायपॉल ने तीखे अंदाज में “जमशेद से जिमी” कहा था—यानी शासन के साथ सहयोग करने वाले लोग।बेशक, अब जब साम्राज्यवादी जा चुके हैं, तो आप साम्राज्य की अतिरेकताओं के एक बेहद जानकार आलोचक बनकर उभरे हैं।ऑक्सफोर्ड यूनियन में आपका प्रदर्शन सचमुच शानदार था, एक ऐसा भाषण जिसका कोई मुकाबला नहीं था।लेकिन सच्चाई यह है कि जब आप ऑक्सफोर्ड गए, तब तक अंग्रेज जा चुके थे, इसलिए आपको अपनी आवाज़ मिल गई।लेकिन अमेरिकी अभी गए नहीं हैं, इसलिए आप उनके सामने झुकते हैं।यही होता है जब जयशंकर जैसी “व्यावहारिकता” नैतिक भावना पर हावी हो जाती है।और आप भी उसी सोच के साथ खड़े दिखाई देते हैं।क्या आप सचमुच नरेंद्र मोदी की कृपा पाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वे आपको वह लाभ दे सकते हैं जो विपक्ष आपको नहीं दे सकता?हालांकि इस बात के काफी सबूत हैं कि स्थायी समिति के चेयरमैन के रूप में विदेश यात्राओं के दिखावे और वैभव में आपकी खुशी का यही कारण है, फिर भी मैं इस विचार से सहमत नहीं हूं।मैं इस विचार से इसलिए सहमत नहीं हूं क्योंकि आप अपने हर भाषण और कार्रवाई के लिए हमेशा कोई न कोई ऊंचा देशभक्ति का कारण पेश करते हैं।उदाहरण के तौर पर, पहलगाम के बाहर घास के मैदान में हुए आतंकी हमले के बाद आपने खुद को देश का प्रवक्ता बनना अपना देशभक्तिपूर्ण कर्तव्य बताया।पूरी दुनिया, पाकिस्तान सहित, उस हमले की निंदा कर रही थी।लेकिन उन्होंने पाकिस्तान की निंदा नहीं की।आपका राष्ट्रीय कर्तव्य यह था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को “आतंकवाद का अपराधी, वित्तपोषक, हथियार आपूर्तिकर्ता और प्रायोजक” घोषित करे और उसे सजा दिलाई जाए—जैसा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सर्वसम्मत प्रेस बयान में कहा गया था।आप और आपके सहयोगी हर जगह जाते रहे और अपनी उपलब्धियों का खूब बखान करते रहे।लेकिन क्या यह सच नहीं है कि केवल दो देशों—आतंकी तालिबान शासित अफगानिस्तान और घोषित युद्ध अपराधी के नेतृत्व वाले नरसंहारकारी इज़राइल—ने ही आपके तर्क का समर्थन किया?संयुक्त राष्ट्र के 193 में से 191 सदस्य देशों ने पाकिस्तान का नाम लेकर उसकी निंदा करने से इनकार कर दिया है, और पाकिस्तान का फील्ड मार्शल तो अमेरिकी राष्ट्रपति का खुलकर घोषित “पसंदीदा फील्ड मार्शल” है—जिसके सामने आप चाहते हैं कि हमारा देश झुके।क्या आपने कभी सार्वजनिक रूप से, या खुद से भी, यह स्वीकार किया है?बल्कि “यस मिनिस्टर” के हैकर की तरह, ऐसा लगता है कि आप “अपनी मौजूदगी पर तभी विश्वास करते हैं जब उसके बारे में अखबारों में पढ़ते हैं।”महात्मा गांधी से भी गलतियां हुई थीं और उन्होंने खुद को आखिरकार एक “साधारण व्यक्ति” ही बताया था।यहां तक कि उन्होंने अपनी एक बड़ी गलती को “हिमालयन ब्लंडर” कहकर खुद की कड़ी आलोचना की थी।क्या आप भी ऐसा करने के लिए तैयार हैं?अगर नहीं, तो यह निंदनीय है। आप केवल सुर्खियां चाहते हैं। यह कोई सम्मानजनक उद्देश्य नहीं है।जहां तक धर्मनिरपेक्षता का सवाल है, कई साल पहले दोपहर के भोजन के दौरान हुई बातचीत में ही मुझे आप पर संदेह होने लगा था।इसके बाद मैंने देशभक्ति और राष्ट्रवाद पर लिखी आपकी मोटी किताब का गहराई से अध्ययन किया और ओपन पत्रिका में 8,000 शब्दों की समीक्षा लिखी।तब मुझे लगा था कि हम तार्किक तरीके से असहमति पर सहमत हो सकते हैं।लेकिन सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आपके खारिज करने के बाद मेरी आंखों से पर्दा हट गया।मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि सेंट स्टीफेंस के पढ़े-लिखे, आधुनिक सोच वाले और आइवी लीग कॉलेज से पोस्टग्रेजुएट व्यक्ति इतने पिछड़े विचार रख सकते हैं कि वे एक ऐसे लैंगिक भेदभावपूर्ण और स्त्री-विरोधी प्रथा का समर्थन करें जो महिलाओं को उनके प्राकृतिक शारीरिक कार्य के कारण दंडित करती है।लेकिन वही शुरुआती संकेत थे कि आप वास्तव में “हम में से एक” नहीं हैं।अब एक ऐसे शासन के प्रति आपकी गहरी सहानुभूति, जो सांप्रदायिक दुर्भावना से भरा है, ने इस बात पर अंतिम मुहर लगा दी है।यहीं से हमारे रास्ते अलग हो जाते हैं।



Source link

‘वो गुस्से में था और मैंने माफ़ी मांगी, टी20 विश्व कप के बाद सूर्यकुमार यादव का सनसनीखेज खुलासा


Cricket

oi-Naveen Sharma

T20 World Cup 2026: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की हार ने करोड़ों फैंस का दिल तोड़ दिया था लेकिन अब उस हार के पीछे की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है। भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पहली बार खुलकर यह स्वीकार किया है कि उस अहम मैच में स्टार ऑलराउंडर अक्षर पटेल को प्लेइंग-11 से बाहर रखना उनकी एक बड़ी गलती थी।

सूर्यकुमार यादव ने खुलासा किया कि जब उन्होंने अक्षर पटेल को बताया कि वे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नहीं खेल रहे हैं, तो अक्षर बहुत ज्यादा गुस्से में थे। सूर्या ने कहा, वह बहुत नाराज था और उसे होना भी चाहिए था। वह एक अनुभवी खिलाड़ी है, जो अपनी फ्रेंचाइजी का नेतृत्व करता है। वह गुस्सा होने का पूरा हक रखता था।

t20 world cup 2026

क्यों लिया गया था अक्षर को बाहर करने का फैसला?

कप्तान सूर्या के मुताबिक अक्षर को बाहर करने का फैसला पूरी तरह रणनीतिक था। टीम मैनेजमेंट को लगा था कि दक्षिण अफ्रीका के बाएं हाथ के बल्लेबाजों को रोकने के लिए वॉशिंगटन सुंदर की ऑफ-स्पिन ज्यादा कारगर साबित होगी। हालांकि, यह दांव उल्टा पड़ गया और भारत को उस वर्ल्ड कप की अपनी एकमात्र हार का सामना करना पड़ा।

सूर्या ने मांगी माफी

मैच के बाद जब टीम को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो सूर्यकुमार ने एक बड़े कप्तान का परिचय देते हुए अक्षर पटेल से माफी मांगी। उन्होंने बताया, मैंने उससे माफी मांगी और कहा कि मुझसे गलती हुई है, मुझे माफ कर दो। लेकिन वह फैसला टीम के हित के लिए लिया गया था। यह एक कठिन बातचीत थी, लेकिन अगले दिन हमने आपस में बात करके इसे सुलझा लिया।

अक्षर पटेल का शानदार प्रदर्शन

बता दें कि उस टूर्नामेंट में अक्षर पटेल ने 8 मैचों में 11 विकेट झटके थे। सिर्फ गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में उनके दो गेम-चेंजिंग कैच ने ही भारत को फाइनल का टिकट दिलाया था।



Source link

गैरसैंण समेत तीन शहरों को धामी सरकार बनाएगी स्मार्ट सिटी, जानिए कैसे और क्या है प्लान


Uttarakhand

oi-Pavan Nautiyal

Dhami government धामी सरकार स्मार्ट सिटी के कॉन्सेप्ट को पहाड़ के तीन शहरों में लेकर जा रही है। इसके लिए सरकार ने बजट में प्रावधान किया है। गैरसैंण, बाडाहाट-उत्तरकाशी और पिथौरागढ़, इन तीनों निकायों को स्मार्ट सिटी बनाने का सरकार का निर्णय पहाड़ में अवस्थापना विकास के लिहाज से मील का पत्थर साबित होगा।

उत्तराखंड में अवस्थापना विकास के लिए बजट में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई है। गांव से लेकर शहर हो या फिर पहाड़ से लेकर मैदान, अवस्थापना विकास के लिए धामी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में वो सब इंतजाम कर दिए हैं, जिन्हें विकास के लिए अपेक्षित माना जा रहा था।

Dhami government will make three cities Gairsain smart cities know how what is plan

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्त मंत्री के तौर पर बजट का खाका खींचते हुए हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखा है। मसलन, सड़क, पुलों के निर्माण के लिए यदि बजट आवंटन हुआ है, तो गड्ढा भरने जैसी बातों की भी अनदेखी नहीं की गई है। बिजली, पानी समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े आधारभूत ढांचे की मजबूती पर खास फोकस किया गया है, जो आने वाले दिनों में एक सुखद तस्वीर के प्रति आश्वस्तकारी है।

बजट के प्रावधान:

  • सड़कों के लिए लोनिवि के पूंजीगत मद में 2501 करोड़ और पीएमजीएसवाई के लिए 1050 करोड़ बजट प्रावधान
  • शहरी विकास विभाग का बजट इस बार रूपये 1814 करोड़, पिछली बार रूपये 1161 करोड़ का बजट था
  • ऊर्जा क्षेत्र में रूपये 1609 करोड़ का बजट प्रावधान
  • सड़कों पर गड्ढ़ा मुक्ति अभियान रूपये 400 करोड़
  • रिस्पना, बिंदाल यूटिलिटी शिफ्टिंग योजना बजट रूपये 350 करोड़
  • आवास विभाग का बजट रूपये 130 करोड़
  • पुलिस आवास, जेलों का निर्माण इत्यादि का बजट रूपये 135 करोड़
  • नगरीय अवस्थापना के लिए अतिरिक्त बजट रूपये 60 करोड़
  • नागरिक उड्डयन विभाग का पूंजीगत मद में बजट प्रावधान रूपये 52 .50 करोड़
  • तीन नगर निकायों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए बजट प्रावधान रूपये 30 करोड़
  • टिहरी रिंग रोड निर्माण कार्य का बजट रूपये 10 करोड़
  • शहरी क्षेत्रों में पैदल मार्ग का बजट रूपये 10 करोड़



Source link

मोनालिसा और फरमान की शादी को लव जिहाद बताने वाले सनोज मिश्रा को मिली धमकी, बोले- ‘मुझे सर तन से’


Entertainment

oi-Shashank Mani Pandey

Monalisa की केरल में Farman Khan के साथ हुई शादी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में दोनों ने कोर्ट मैरिज की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इस रिश्ते को लेकर काफी चर्चा शुरू हो गई। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब मोनालिसा की पहली फिल्म के निर्देशक Sanoj Mishra ने इस विवाह को लेकर गंभीर आरोप लगाए और इसे “लव जिहाद” करार दिया।

Sanoj Mishra

निर्देशक सनोज मिश्रा ने लगाए गंभीर आरोप
सनोज मिश्रा का कहना है कि उन्हें मोनालिसा की शादी की खबर से गहरा झटका लगा है। उनका आरोप है कि अभिनेत्री के मैनेजर ने उनके साथ धोखा किया और पूरे मामले में साजिश रची गई। उन्होंने दावा किया कि मोनालिसा के करियर की शुरुआत उन्होंने ही करवाई थी और उन्हें अभिनय के लिए तैयार किया था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं।

सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कही अपनी बात
सनोज मिश्रा ने इस मुद्दे पर इंस्टाग्राम के जरिए भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि उन्हें गंभीर धमकियां मिल रही हैं और कुछ लोग उन्हें जान से मारने की बात कह रहे हैं। अपनी पोस्ट में उन्होंने Popular Front of India (PFI) का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि एक साजिश के तहत यह शादी कराई गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस
निर्देशक की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई लोग सनोज मिश्रा का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स मोनालिसा के निजी फैसले को लेकर उन्हें ट्रोल भी कर रहे हैं।
कमेंट सेक्शन में कुछ लोगों ने फरमान खान के बारे में भी अलग-अलग दावे किए, हालांकि इन दावों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

मोनालिसा को लेकर निर्देशक की पुरानी पोस्ट भी चर्चा में
इस विवाद के बीच सनोज मिश्रा की पुरानी पोस्ट भी फिर से वायरल हो रही है। इसमें उन्होंने बताया था कि किस तरह उन्होंने मोनालिसा को महाकुंभ में देखा और उनकी सादगी से प्रभावित होकर उन्हें फिल्म में मौका देने का फैसला किया। मिश्रा के अनुसार, उन्होंने काफी संघर्ष के बाद अपनी फिल्म की योजना बनाई थी और इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

आरोपों के बीच बढ़ा विवाद
मिश्रा का दावा है कि मोनालिसा को पढ़ाने और मार्गदर्शन देने के लिए उन्होंने एक व्यक्ति को रखा था, लेकिन बाद में वही व्यक्ति उनके अनुसार मैनेजर बनकर बीच में आ गया और हालात बदल गए। फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। दूसरी ओर, मोनालिसा या फरमान खान की ओर से इन आरोपों पर कोई ऑफिशियल रिएक्शन सामने नहीं आया है।



Source link

देश में LPG की किल्लत, इंडक्शन की मांग बढ़ी: अमेजन में प्रोडक्ट की 30 गुना तक बिक्री, कई ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर आउट ऑफ स्टॉक


नई दिल्ली18 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

देश में एलपीजी की उपलब्धता की बढ़ती चिंता के बीच की ऑनलाइन शॉपिग प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन की मांग अचानक बढ़ गई है। कई ई-कॉमर्स साइट्स पर ये प्रोडक्ट आउट ऑफ स्टॉक हो गया है।

अमेजन, फ्लिपकार्ट और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन के स्टॉक में खासी कमी देखने को मिल रही है। ब्लिंकिट पर तो लगभग सभी मॉडल आउट ऑफ स्टॉक दिख रहे हैं, जबकि अमेजन और फ्लिपकार्ट पर भी कुछ ही ब्रांड मिल रहे हैं।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और गैस सप्लाई पर असर के कारण कई शहरों में लोग एलपीजी सिलेंडर न मिलने से परेशान हैं। इसी वजह से बैकअप के तौर पर इंडक्शन कुकटॉप खरीद रहे हैं।

अमेजन पर इंडक्शन आउट ऑफ स्टाक

1000252480 1773306403

फ्लिपकार्ट पर इंडक्शन के कुछ ही मॉडल मिल रहे, कई आउट ऑफ स्टॉक

1000252477 1 1773306380

ब्लिंकिट पर इंडक्शन का एक ही मॉडल दिखा रहा, वह भी आउट ऑफ स्टॉक

ब्लिंकिट पर भी सभी मॉडल आउट ऑफ स्टॉक।

ब्लिंकिट पर भी सभी मॉडल आउट ऑफ स्टॉक।

इंडक्शन की मांग बढ़ने के कारण कीमत बढ़ी

भारत में आमतौर पर इंडक्शन की कीमत ₹1300 से ₹2000 से शुरू होती हैं। वहीं, मिड रेंज जाने पर यह ₹2,000 – ₹3,500 में मिलता हैं। प्रीमियम मॉडल ₹3,500 – ₹4,500+ का होता है।

इंडक्शन कुकटॉप की मांग बढ़ने के बाद कई ब्रांड के मॉडल की कीमतों में करीब 10-20% तक बढ़ोतरी देखी जा रही है। वही दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में इंडक्शन की बिक्री तेजी से बढ़ी है।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड बिक्री

ई-कॉमर्स कंपनियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन की बिक्री में तेज उछाल आया है। अमेजन पर बिक्री करीब 30 गुना और फ्लिपकार्ट पर बिक्री करीब चार गुना हो गई। इसके अलावा इलेक्ट्रिक केटल, राइस कुकर और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर क्रोमा के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की मांग करीब 3 गुना बढ़ गई है। वहीं, किचन अप्लायंस बनाने वाली कंपनी स्टोवक्राफ्ट ने बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उनकी साप्ताहिक बिक्री करीब चार गुना तक बढ़ गई है।

सरकार बोली- घबराने की जरूरत नहीं

हालांकि सरकार ने लोगों से कहा हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है। देश की ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित है और एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है। अधिकारियों के अनुसार घरेलू एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और सिलेंडर बुकिंग के बाद लगभग ढाई दिन में डिलीवरी हो रही है।

————————— ये खबर भी पढ़ें…

भारत के पास कितने दिन की LPG बची:जंग लंबी छिड़ी तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; आपको क्या करना चाहिए

explainer12 march cover1773235241 1773308566

भोपाल के रहने वाले आदित्य ने 6 मार्च को IVRS कॉल से एक LPG सिलेंडर बुक किया। आमतौर पर 1 दिन बाद सिलेंडर की होम डिलीवरी हो जाती थी। जब 3 दिन बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, तो उन्होंने वापस IVRS डायल किया। नंबर इनवैलिड बताने लगा। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में सबसे बड़ा उलटफेर, सुप्रीम कोर्ट ने पवन बिश्नोई को दी जमानत, क्या अब बदल जाएगी पूरी कहानी?


होमताजा खबरक्राइम

सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में सबसे बड़ा उलटफेर, SC ने पवन बिश्नोई को दी जमानत

Last Updated:

Sidhu Moose Wala Murder Case: सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में गुरुवार को एक चौंकाने वाला मोड़ आ गया. सुप्रीम कोर्ट ने इस हत्याकांड के आरोपियों में से एक पवन बिश्नोई को नियमित जमानत दे दी है. पवन पर गोल्डी बरार के कहने पर हत्यारों के लिए बोलेरो गाड़ी का इंतजाम करने और इस पूरी साजिश का हिस्सा होने का आरोप था. अधिवक्ता अभय कुमार की दलीलों के बाद कोर्ट ने यह बड़ा फैसला सुनाया है. जानें अब इस केस में आगे क्या होगा?

Zoom

पंजाब के मशहूर गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है.

नई दिल्ली. पंजाब के मशहूर गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में एक बार फिर कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है. देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के एक महत्वपूर्ण आरोपी पवन बिश्नोई को नियमित जमानत दे दी है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस की जांच और ट्रायल अभी भी जारी है. पवन बिश्नोई पर आरोप था कि वह उस बड़ी साजिश का हिस्सा था, जिसने 29 मई 2022 को मानसा में सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हत्या कर दी थी.

क्या थे पवन बिश्नोई पर आरोप?

जांच एजेंसियों और पंजाब पुलिस के अनुसार, पवन बिश्नोई का सीधा संबंध गोल्डी बरार और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से बताया गया था. पुलिस का आरोप था कि कनाडा में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बरार ने पवन बिश्नोई को फोन किया था. इस फोन कॉल का मुख्य उद्देश्य हत्यारों के लिए एक सुरक्षित वाहन का इंतजाम करना था. आरोप लगाया गया कि पवन बिश्नोई ने ही वह ‘बोलेरो’ गाड़ी उपलब्ध कराई थी, जिसका इस्तेमाल शूटरों ने मूसेवाला का पीछा करने और उन पर गोलियां बरसाने के लिए किया था. अभियोजन पक्ष ने उसे पूरी साजिश का एक अहम मोहरा बताया था.

अदालत में अधिवक्ता अभय कुमार की दलीलें

सुप्रीम कोर्ट में पवन बिश्नोई का पक्ष रखते हुए उनके अधिवक्ता अभय कुमार ने मजबूती से अपनी बात रखी. उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल को केवल आरोपों और कथित फोन कॉल्स के आधार पर जेल में रखा गया है. अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पवन बिश्नोई के खिलाफ पर्याप्त प्रत्यक्ष सबूतों का अभाव है जो उसे सीधे तौर पर हत्या की साजिश से जोड़ सकें. उन्होंने कहा, “यह आरोप लगाया गया था कि गोल्डी बरार ने मेरे मुवक्किल को बोलेरो वाहन की व्यवस्था करने के लिए बुलाया था और उस बोलेरो का इस्तेमाल हत्यारों ने सिद्धू मूसेवाला को मारने के लिए किया था. यह भी आरोप लगाया गया था कि वह इस साजिश का हिस्सा था, लेकिन तथ्यों की गहराई में जाने पर स्थिति अलग नजर आती है.”





Source link