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Tamal Roy Choudhury Death Reason: मशहूर एक्टर तमाल रॉय चौधरी की अचानक कैसे हुई मौत? परिवार ने खोला शौकिंग राज


Entertainment

oi-Divyansh Rastogi

Tamal Roy Choudhury Death Reason: मशहूर बंगाली अभिनेता तमाल रॉय चौधरी का 9 मार्च 2026 को 80 साल की उम्र में कोलकाता में निधन हो गया। परिवार के सूत्रों के मुताबिक, दक्षिण कोलकाता स्थित उनके घर पर नींद में ही उन्हें कार्डियक अरेस्ट (हृदयाघात) आया, जिससे उनकी अचानक मौत हो गई। यह खबर तेजी से फैली और टेलीविजन, फिल्म तथा थिएटर इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई।

तमाल रॉय चौधरी को एक वर्सेटाइल एक्टर के तौर पर जाना जाता था, जिन्होंने रंगमंच से अपना सफर शुरू किया और बाद में बंगाली टीवी सीरियल्स व फिल्मों में मजबूत पहचान बनाई। उनकी मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई जा रही है, जो नींद के दौरान हुआ। हाल के सालों में स्वास्थ्य समस्याओं के चलते वे एक्टिंग से कुछ दूरी बना चुके थे, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है।

Tamal Roy Choudhury Death Reason

इंडस्ट्री से श्रद्धांजलि का सिलसिला:

अभिनेता और राजनीतिज्ञ देबदूत घोष ने उन्हें याद करते हुए कहा, ‘वे बेहद मिलनसार और स्नेही इंसान थे। उन्हें लंबी बातें करना पसंद था और जूनियर्स की हमेशा मदद करते थे।’ कई सहकर्मियों ने उन्हें एक सहयोगी और मार्गदर्शक के रूप में याद किया। सोशल मीडिया पर फैंस और कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं, उनकी फिल्मों और थिएटर के रोल्स को याद कर रहे हैं।

Tamal Roy Choudhury Career: कैरियर की मुख्य बातें:

  • तमाल रॉय चौधरी ने अपना करियर स्टेज परफॉर्मेंस से शुरू किया, जहां उन्होंने मजबूत एक्टिंग की बुनियाद रखी। थिएटर उनके दिल के करीब रहा और जीवनभर जुड़े रहे।
  • 1990 के दशक के मध्य से वे बंगाली टेलीविजन सीरियल्स में नियमित दिखाई दिए। ज्यादातर सपोर्टिंग रोल्स में, लेकिन उनकी पहचान इतनी मजबूत थी कि राज्य भर के दर्शक उन्हें जानते थे।
  • उन्होंने कई हिट और क्रिटिकली अक्लेम्ड फिल्मों में काम किया। कुछ प्रमुख नाम- चैलेंज, ले हलुआ ले, बिंदास, अमेजन ओभिजान, चंदर पहाड़, जतिस्वर और गोरस्थाने सावधान। ये फिल्में उनकी कैरेक्टर एक्टिंग की बहुमुखी प्रतिभा दिखाती हैं।

तमाल रॉय चौधरी ने दशकों तक बंगाली एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को समृद्ध किया। भले ही हाल के सालों में स्वास्थ्य कारणों से वे कम काम कर रहे थे, लेकिन उनकी यादें और परफॉर्मेंस फैंस के दिलों में जिंदा रहेंगी। उनकी अचानक मौत ने एक बार फिर याद दिलाया कि कार्डियक अरेस्ट जैसी समस्या कितनी गंभीर और अप्रत्याशित हो सकती है, खासकर बुजुर्गों में। यह घटना बंगाली सिनेमा के एक युग के अंत की तरह लग रही है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।



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ईरान युद्ध पर कितना खर्च कर रहा है अमेरिका? रोज का आंकड़ा देखकर ट्रंप के उड़े होश


International

oi-Bhavna Pandey

US-Israel-Iran War: मिडिल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान का टकराव अब सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी भारी पड़ रहा है। ईरान को हराने के लिए अमेरिका युद्ध पर हर दिन पानी की तरह पैसा बहा रहा है। आलम ये है कि आर्थिक रूप से सबसे संपन्‍न देश अमेरिका में युद्ध पर की जा रही अंधाधुंध खर्च का विरोध शुरू हो चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका इस संघर्ष पर रोज़ करीब 891 मिलियन डॉलर यानी लगभग 7400 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। सिर्फ पहले हफ्ते में ही खर्च 6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह टकराव लंबा चला तो इसकी कुल लागत दसियों अरब डॉलर तक जा सकती है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और तेल-गैस बाजार पर भी दिखने लगा है।

US-Israel-Iran War

पहले हफ्ते में ही 6 बिलियन डॉलर खर्च

अमेरिकी रक्षा विभाग ने कांग्रेस को बताया कि युद्ध के शुरुआती सात दिनों में करीब 6 बिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। वॉशिंगटन के थिंक टैंक Center for Strategic and International Studies (CSIS) के मुताबिक यह खर्च औसतन 891.4 मिलियन डॉलर प्रतिदिन बैठता है।
रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि आने वाले समय में सरकार को युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस से अतिरिक्त बजट मांगना पड़ सकता है।

गोला-बारूद पर ही 4 बिलियन डॉलर

इस भारी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा हथियारों और इंटरसेप्टर मिसाइलों पर गया है।
लगभग 4 बिलियन डॉलर सिर्फ गोला-बारूद पर खर्च हुए, जिनमें मुख्य रूप से ईरानी मिसाइलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर शामिल हैं। यह खर्च पिछले साल ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हुए Operation Midnight Hammer से भी ज्यादा है, जिसमें करीब दो घंटे के हमलों में लगभग 2.04 से 2.26 बिलियन डॉलर खर्च हुए थे।

क्षेत्र में 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक

मौजूदा समय में मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ी है। करीब 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक, दो विमानवाहक पोत और दर्जनों युद्धपोत तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही अतिरिक्त बमवर्षक और हमलावर विमान भी लगातार क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, जिससे सैन्य अभियान और तेज हो गया है।

युद्ध की दैनिक लागत का हिसाब

CSIS के अनुसार रोजाना खर्च का मोटा-मोटा बंटवारा कुछ इस तरह है

हवाई अभियानों पर: लगभग 30 मिलियन डॉलर

नौसैनिक अभियानों पर: करीब 15 मिलियन डॉलर

जमीनी अभियानों पर: लगभग 1.6 मिलियन डॉलर

ये आंकड़े बताते हैं कि संघर्ष कितनी तेजी से संसाधन निगल रहा है।

छोटे देशों की अर्थव्यवस्था से भी ज्यादा खर्च

युद्ध की लागत को समझने के लिए तुलना करें तो तस्वीर और चौंकाने वाली हो जाती है। अमेरिका हर दो दिन में भारत के पूरे साल के अंतरिक्ष बजट के बराबर पैसा खर्च कर रहा है। 10 दिनों में पाकिस्तान के पूरे रक्षा बजट जितना खर्च और दो महीने से भी कम समय में नेपाल के पूरे जीडीपी केबराबर रकम खर्च हो सकती है।

तेल और गैस बाजार में हलचल

मिडिल-ईस्‍ट में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। Strait of Hormuz से गुजरने वाला तेल टैंकर यातायात लगभग रुक गया है। यह रास्ता दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 25% संभालता है।

इस बीच Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार ड्रोन हमले के बाद Ras Tanura Refinery को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इसके चलते Brent Crude Oil की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई और 119.50 डॉलर तक चली गई।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा

ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल से यूरोप की अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा बढ़ गया है।
ईंधन महंगा होने से परिवहन और उद्योगों की लागत बढ़ रही है, जिसका असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ सकता है।

अमेरिका में भी शुरू हुआ विरोध

इस युद्ध को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। हाउस डेमोक्रेटिक कॉकस के अध्यक्ष Pete Aguilar ने आरोप लगाया कि प्रशासन अरबों डॉलर युद्ध पर खर्च कर रहा है जबकि देश के अंदर स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं में कटौती हो रही है। वहीं राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग दोहराई है।



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Khamenei Five Mistakes: वो 5 गलतियां, जिसके कारण खामेनेई मारे गए? नस्ल का खात्मा-Iran के नए लीडर के लिए सबक?


International

oi-Divyansh Rastogi

Khamenei Five Mistakes of Death Reason: 28 फरवरी 2026 को तेहरान में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों (Operation Epic Fury) में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई (86) की मौत हो गई। यह हमला उनके कंपाउंड पर हुआ, जहां वे टॉप सिक्योरिटी ऑफिशियल्स के साथ मीटिंग में थे। खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद, पोते-पोतियां, बहू और अन्य परिवारजन मारे गए। उनकी बीवी मंसूरेह खोजस्तेह बगेरजादेह घायल हुईं और 2 मार्च को अस्पताल में दम तोड़ दिया। कुल मिलाकर खामेनेई की फैमिली की कई पीढ़ियों का खात्मा हो गया।

ईरानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपूर, डिफेंस मिनिस्टर और अन्य हाई-रैंकिंग लोग भी मारे गए। ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया। 8-9 मार्च 2026 को असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (56) को नया सुप्रीम लीडर चुना, जो हार्डलाइनर माने जाते हैं। लेकिन खामेनेई की मौत से साफ है कि कई रणनीतिक चूकें हुईं, जिन्होंने दुश्मनों को मौका दिया। यहां वो 5 प्रमुख गलतियां हैं, जो सामने आई हैं…

Khamenei Five Mistakes of Death Reason

1. सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी पर अंधभरोसा-डेथ ट्रैप में फंसना

खामेनेई ने सिक्योरिटी काउंसिल के एडवाइजर अली शमखानी और IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपूर से मीटिंग के लिए कंपाउंड में जाने का फैसला किया। रिपोर्ट्स (खलीज टाइम्स और इंटेलिजेंस सोर्सेज) के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका शमखानी की हर मूवमेंट पर नजर रख रहे थे। जून 2025 में भी शमखानी पर अटेम्प्ट हुआ था, लेकिन वे बच गए। इस बार खामेनेई ने शमखानी के जरिए मीटिंग फिक्स की, जो इंटेलिजेंस लीक का जरिया बन गया। दुश्मनों ने इसी मीटिंग को टारगेट किया। अगर खामेनेई ने सलाहकारों पर इतना भरोसा न किया होता, तो शायद यह ट्रैप बच जाता।

2. सुरक्षित बंकर में न जाना-खुले में रहना सबसे बड़ी चूक

युद्ध के बढ़ते खतरे के बावजूद खामेनेई बंकर या हाई-सिक्योरिटी लोकेशन पर नहीं गए। उनके कंपाउंड में सिक्योरिटी थी, लेकिन वे खुद खुले में मीटिंग कर रहे थे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वे अंडरग्राउंड बंकर में होते, तो प्रिसिजन स्ट्राइक्स से बच सकते थे। लगातार अमेरिकी-इजरायली थ्रेट्स के बीच बेसिक सिक्योरिटी प्रोटोकॉल इग्नोर करना उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।

3. अमेरिका से वार्ता पर ज्यादा भरोसा-दुश्मनों को मौका मिला

खामेनेई ने चल रही कूटनीतिक बातचीत को गंभीरता से लिया और सोचा कि इससे डायरेक्ट अटैक रुक जाएगा। लेकिन दुश्मनों ने वार्ता के दौरान ही हमले का मौका चुना। कूटनीति में भरोसा करना अच्छा है, लेकिन सावधानी की कमी ने उन्हें कमजोर बनाया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इंटेलिजेंस ने वार्ता के पीछे की तैयारी को ट्रैक किया और हमले को टाइम किया।

4. परमाणु हथियार फतवे को कमजोरी समझा जाना

1990 के दशक में खामेनेई ने परमाणु हथियार बनाने पर फतवा जारी किया था कि ईरान कभी न्यूक्लियर बम नहीं बनाएगा। यह इंटरनेशनल इमेज सुधारने के लिए था, लेकिन इजरायल -अमेरिका ने इसे ईरान की मिलिट्री वीकनेस माना। इस फतवे ने ईरान को अटैक के लिए ज्यादा वल्नरेबल बना दिया। अगर न्यूक्लियर डिटरेंस मजबूत होता, तो शायद हमले की हिम्मत न होती।

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5. युद्ध की अस्थिरता में पर्सनल सिक्योरिटी का गलत आकलन

बढ़ते तनाव और आक्रामक पॉलिसी के बावजूद खामेनेई ने रिस्क का सही अंदाजा नहीं लगाया। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बेसिक सिक्योरिटी, थ्रेट असेसमेंट और स्ट्रैटेजिक कैशन की कमी थी। वे हाई-रिस्क सिचुएशन में भी रूटीन मीटिंग्स कर रहे थे, जो घातक साबित हुई।

Mojtaba Khamenei Lessons: Iran के नए लीडर मोजतबा खामेनेई के लिए सबक?

यह हमला CIA (केंद्रीय खुफिया एजेंसी) और मोसाद की लंबे समय की इंटेलिजेंस ऑपरेशन का नतीजा था। ट्रैफिक कैमरा हैकिंग, ह्यूमन सोर्सेज और साइबर डिसरप्शन से खामेनेई की लोकेशन कन्फर्म हुई। हमले में 60 सेकंड में कई टारगेट्स हिट हुए। खामेनेई की मौत ने ईरान में पावर वैक्यूम पैदा किया, लेकिन मोजतबा को जल्द चुना गया। 9 मार्च को ईरान टीवी ने दावा किया कि इजरायल के हमले में मोजतबा जख्मी हुए। ऐसे में मोजतबा को पिता की इन गलतियों से सबक लेना होगा। सिक्योरिटी को प्राथमिकता दें, ट्रस्ट पर ज्यादा भरोसा न करें, रिस्क असेसमेंट सख्त रखें और डिटरेंस मजबूत करें। वरना इतिहास दोहराया जा सकता है।

यह घटना मिडिल ईस्ट की जियोपॉलिटिक्स बदल रही है-ईरान रिटेलिएट कर रहा है, गल्फ देश प्रभावित हैं, और वैश्विक ऑयल मार्केट हिल गया है। शांति की उम्मीद कम है, लेकिन सिक्योरिटी की सीख बड़ी है।



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गुजरात में बोले अरविंद केजरीवाल- मुफ्त बिजली, इलाज, शिक्षा, हर महिला को हजार रुपए चाहिए तो AAP सरकार बनवाएं


India

oi-Bhavna Pandey

गुजरात दौरे पर आए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दूसरे दिन भी भाजपा और कांग्रेस पर जमकर बरसे। उन्होंने जनता से भाजपा सरकार के दमन को खत्म करने का आह्वान करते हुए कहा कि जागो और झाड़ू चलाकर इस बार अपनी सरकार बनाओ। 30 साल में भाजपा वाले गुजरात का व्यापार, रोजगार, स्कूल, अस्पताल, सड़कें, नरेगा सब कुछ खा गए।

उन्होंने लोगों से पूछा कि भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार, पेपर लीक, टूटी सड़कों, गिरे पूलों, अस्पतालों में बच्चों की मौतों पर कब तक चुप रहेंगे? इस बार पूरे गुजरात में विसावदर करने का मौका है। जिस तरह विसावदर की जनता ने बड़े-बड़ों के सिंहासन हिला दिए, वैसे ही इस बार पूरे गुजरात में करना है। ”आप” की अपनी सरकार होगी तो पंजाब की तरह मुफ्त बिजली, इलाज, शिक्षा, हर महिला को एक हजार रुपए समेत सारी सुविधाएं मिलेंगी।

AAM AADMI PARTY

सोमवार को सूरत में आयोजित आम आदमी पार्टी के क्षेत्रीय बूथ सम्मेलन को संबोधित करने पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने गुजरात की जनता की आवाज़ को मज़बूती देने का संकल्प लेते हुए कहा कि आज पूरे गुजरात के किसान बहुत नाराज और गुस्से में हैं। हर जगह लोग एक ही बात कह रहे हैं कि इस बार बोटाद का बदला लेना है।

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले बोटाद में कुछ किसान इकट्ठा होकर करदा प्रथा के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने कोई पत्थर नहीं चलाया, किसी को मारा नहीं। लेकिन पुलिस ने उनके ऊपर लाठीचार्ज किया, उन्हें उनके घरों से खींच-खींच कर ले गए और 85 किसानों को कई महीनों तक जेल के अंदर रखा गया। इसे लेकर किसानों में जबरदस्त विद्रोह और गुस्सा है। किसान इस बार चुनाव में भाजपा से बदला लेना चाहते हैं और उन्हें मजा चखाएंगे।

AAM AADMI PARTY

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले 30 साल से गुजरात में भाजपा की सरकार है और इन 30 सालों में इन्होंने गुजरात को पूरी तरह चूस लिया है। ये लोग किसानों के बीज, खाद, पानी, और पैसा भी खा गए। इन्होंने व्यापारियों का व्यापार, बेरोजगारों का रोजगार, स्कूल, अस्पताल, सड़कें और पुल तक खा लिए। ये लोग मजदूरों का नरेगा, बजरी, लोहा और मिट्टी तक खा गए हैं। जो भी इनके भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, उस पर ये अत्याचार करते हैं और झूठे केस करके जेल में डाल देते हैं।

AAM AADMI PARTY in gujrat news

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि “आप” विधायक चैतर वसावा ने नरेगा में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी। नरेगा के अंदर ये लोग फर्जी रिकॉर्ड भरते हैं, काम होता नहीं है पर दिखा देते हैं कि काम हुआ और इनके मंत्री व नेता पैसा खा जाते हैं। जब चैतर वसावा ने रिकॉर्ड मांगे, तो उन्हें उठाकर जेल में डाल दिया गया। चैतर वसावा और प्रवीण राम जनता के लिए लड़ रहे थे। इसलिए उन्हें चार-चार महीने जेल में रखा गया। जो भी इनके खिलाफ आवाज उठाता है, ये उसे पकड़कर जेल में डाल देते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज हमारे नौजवान बेरोजगार घूम रहे हैं और जब वे रोजगार मांगने जाते हैं, तो ये उनके हाथ में नकली दारू की बोतल पकड़ा देते हैं। पूरे गुजरात में नकली दारू बिक रही है और उससे न जाने कितने बच्चे मर गए। युवाओं के हाथ में कोकेन, हेरोइन और गांजे की पुड़िया पकड़ा दी जाती है।

ये हमारे बच्चों और परिवारों को बर्बाद करने में लगे हुए हैं। मैं गुजरात के कई ऐसे परिवारों को जानता हूं जिनके बच्चे नकली दारू पीकर और ड्रग्स खाकर मर गए और उनके घर बर्बाद हो गए। लेकिन कसूर हमारा भी है। हमारे बच्चे मर रहे हैं, बर्बाद हो रहे हैं, फिर भी हम जाकर कमल का बटन दबा आते हैं। हम लोग कब जागेंगे? हम और कितने परिवारों के बर्बाद होने का इंतजार कर रहे हैं?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोरबी का पुल गिरा तो 140 लोगों की मौत हो गई, बड़ौदा में पुल गिरा तो 22 लोग मारे गए। पिछले 5 साल में 12 पुल गिर चुके हैं। हम और कितनी मौतों का इंतजार कर रहे हैं? एक गरीब किसान अपनी जमीन और पत्नी के जेवर बेचकर बच्चे को पढ़ने भेजता है।

वह बच्चा अहमदाबाद, सूरत, राजकोट जैसे शहरों में जाकर दिन-रात मेहनत करता है, लेकिन जब पेपर देने जाता है तो पेपर लीक हो जाता है। यहां हर पेपर लीक हो रहा है और लाखों बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। क्या हम तब भी चुप बैठे रहेंगे? क्या पेपर लीक होते रहेंगे, भ्रष्टाचार होता रहेगा, सड़कें टूटती रहेंगी, प्राइवेट स्कूल लूटते रहेंगे और सरकारी अस्पतालों में बच्चे मरते रहेंगे और हम चुप बैठे रहेंगे?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले साल बरसात के समय पूरे मीडिया में सूरत की तस्वीरें आ रही थीं। सूरत में एक बारिश होते ही घर-घर में पानी भर जाता है, बेडरूम और ड्राइंग रूम तक डूब जाते हैं और टीवी तक पानी पहुंच जाता है। यह भाजपा के 30 साल के शासन का नतीजा है। हर्ष संघवी और सी.आर. पाटिल भी सूरत में रहते हैं, लेकिन उनके घरों में पानी नहीं भरता, सिर्फ आम लोगों के घरों में भरता है। ये लोग जनता को कीड़े-मकौड़े भी नहीं समझते और हम फिर भी इनके पीछे-पीछे घूमते रहते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह सब बदलना है। भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी बंद होनी चाहिए। जनता की सुनवाई होनी चाहिए और सरकारी पैसा जनता के लिए खर्च होना चाहिए। तो इस बार विसावदर जैसा ही पूरे गुजरात में करना है। विसावदर वालों ने दिखा दिया कि जब जनता खड़ी हो जाए, तो बड़े-बड़े सिंहासन डोल जाते हैं।

गोपाल इटालिया विसावदर से चुनाव में उतरे, जो एक अत्यंत साधारण परिवार के आम आदमी हैं। वे किसी नेता या कोई अमीर अरबपति के बेटे नहीं हैं, बल्कि एक किसान के बेटे हैं। गोपाल इटालिया के सामने विसावदर में बड़े-बड़े नेता और रसूखदार धनवान लोग खड़े थे। वहां भाजपा और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियां थीं, लेकिन विसावदर की जनता ने संकल्प लिया और सबको हराकर एक आम आदमी को विजयी बनाया। जनता ने स्वयं को वोट दिया। इस बार पूरे गुजरात में विसावदर जैसा ही दोहराना है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम लोग हर 5 साल में वोट डालते हैं और हर चुनाव में ये नेता हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं और लोगों का दरवाजा खटखटाते हैं। उनके पैर पकड़ते हैं, उनके बच्चे को गोद में उठाकर फोटो खिंचवाते हैं और बहुत स्नेह दिखाते हैं। वे उनकी दादी के पांव छूते हैं और घर के सभी सदस्यों को सम्मान देते हैं। लेकिन जैसे ही चुनाव समाप्त होते हैं और जब आम लोग इनके घर किसी काम के लिए जाते हैं, तो ये उन पर कुत्ता छोड़ देते हैं। ये दरवाजा तक नहीं खोलते, उनसे मिलते नहीं हैं और गाली देते हैं। ये कहलवा देते हैं कि साहब बिजी हैं। ये लोग पूरे 5 साल तक आम लोगों से नहीं मिलते हैं। आखिर ये 5 साल करते क्या हैं? ये लोग केवल पैसा, पैसा और पैसा कमाने में लग जाते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति विधायक बन जाए, तो उसके पास लंबी-लंबी गाड़ियां आ जाती हैं। यदि वह मंत्री बन जाए, तो उसकी कई कोठियां और मॉल बन जाते हैं। इन नेताओं के पास बड़े-बड़े मॉल और विशाल संपत्तियां हैं। इनके बच्चों को ही विधायक का टिकट मिलता है, आपके बच्चों को ये टिकट नहीं मिलते। न भाजपा वाले आपके बच्चों को टिकट देते हैं और न ही कांग्रेस वाले।

इनके बच्चे विधायक और मंत्री बनते हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी में ऐसा नहीं होता। आम आदमी पार्टी आपके बच्चों को टिकट देगी। अभी पंचायत का चुनाव है, आपका बच्चा सरपंच और वार्ड सदस्य बनेगा। हमारे यहां नेताओं के बच्चों को नहीं, बल्कि आपके बच्चों को टिकट मिलेगा। इस बार चुनाव में हमें व्यवस्था परिवर्तन करना है। इस बार किसी पार्टी को वोट नहीं देना है। इस बार स्वयं को वोट देना है और अपनी सरकार बनानी है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब जनता की सरकार बनेगी, तभी सारे काम पूरे होंगे। जनता की सरकार बनने पर वही कार्य होंगे जो जनता चाहेगी। तभी जनता को सम्मान मिलेगा और नेताओं का भ्रष्टाचार व गुंडागर्दी समाप्त होगी। जनता की सरकार बनने पर गरीबों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, अच्छे पुल और सड़कें बनेंगी तथा सबका उचित इलाज होगा। उन्होने कहा कि पंजाब में आज जनता की सरकार है। मुख्यमंत्री भगवंत मान एक किसान के बेटे हैं। आज पंजाब में किसानों की खेती और घरों की बिजली मुफ्त है। जिस-जिस को गुजरात को मुफ्त बिजली चाहिए, वह अपनी सरकार बनाए। भाजपा और कांग्रेस की सरकारें बनाना अब बंद कीजिए। अपनी सरकार के लिए स्वयं को वोट दीजिए।

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि पंजाब के अंदर खेती के लिए दिन में 8 घंटे बिजली आती है। मुझे पता चला है कि गुजरात में रात को 3 बजे और 4 बजे बिजली आती है। पंजाब में किसानों के लिए दिन में लगातार 8 घंटे बिजली आती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां जनता की सरकार है, आपकी अपनी सरकार है और आम आदमी की सरकार है। अभी पंजाब के अंदर हर परिवार का 10 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा किया गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि मैक्स और अपोलो जैसे जितने भी बड़े अस्पताल हैं, जिनमें बड़े अमीर लोग इलाज कराते हैं, वहां अब एक गरीब मजदूर भी जाकर अपना इलाज करा सकता है। उसका इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भगवान न करे, यदि किसी गरीब मजदूर, किसान या उसके परिवार के किसी सदस्य को हार्ट अटैक आ जाए, कैंसर हो जाए, या उसे किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट जैसा बड़ा ऑपरेशन कराना पड़े, तो बड़े से बड़े अमीरों वाले अस्पताल में उसका 10 लाख रुपए तक का सारा इलाज मुफ्त होगा। उसके सिटी स्कैन, एमआरआई, सभी टेस्ट और सारी दवाइयां मुफ्त होंगी। पंजाब की “आप” सरकार ने अभी-अभी यह योजना पास की है और 60 लाख परिवारों का बीमा करवाया है। क्या गुजरात में ऐसा होना चाहिए या नहीं? इसके लिए आपको अपनी सरकार बनानी होगी। झाड़ू चलाइए और अपनी सरकार बनाइए। जब झाड़ू की सरकार बनेगी, तो सब कुछ मिलेगा।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि रविवार को ही पंजाब का बजट आया है, जिसमें घोषणा की गई है कि हर महिला के खाते में प्रति माह 1,000 रुपए दिए जाएंगे। गुजरात में भी यह संभव है, लेकिन आपको अपनी सरकार बनानी पड़ेगी। आप में से कुछ लोग भाजपा और कुछ कांग्रेस के होंगे, लेकिन अब इन पार्टियों का साथ छोड़ दीजिए। भाजपा और कांग्रेस से आपको कुछ नहीं मिला है। इस बार अपनी सरकार बनाइए। गुजरात आपका है, यह इनके पिताजी का नहीं है। हम सबको मिलकर गुजरात को बचाना है। अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए गुजरात को सुरक्षित करना है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने कुर्बानियां दी थीं। सरदार पटेल ने बलिदान दिया और महात्मा गांधी ने संघर्ष किया था, जबकि इन लोगों ने केवल मलाई खाई है। आप लोग इस गुजरात को बचा लीजिए। हम सबको जागना होगा और जिम्मेदारी लेनी होगी। मैं विशेषकर युवाओं से कहना चाहता हूं कि 2027 में चुनाव हैं और अभी दो साल का समय है। ये दो साल आप आम आदमी पार्टी को दे दीजिए। यदि छुट्टी ले सकते हैं, तो ले लीजिए, लेकिन ये दो साल पार्टी के लिए समर्पित कर दें। आप देखेंगे कि गुजरात की तकदीर बदल जाएगी।



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ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदेगा इंडोनेशिया: $200 मिलियन से $350 मिलियन की डील पर बातचीत जारी; इससे पहले फिलीपींस ने खरीदा था


नई दिल्ली24 मिनट पहले

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इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए भारत के साथ एक एग्रीमेंट किया है। इंडोनेशिया डिफेंस मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन रिको रिकार्डो सिरैत ने सोमवार को न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को ये जानकारी दी।

भारत और रूस की को-ओनरशिप वाली कंपनी ब्रह्मोस ने रॉयटर्स को बताया कि वह जकार्ता के साथ $200 मिलियन से $350 मिलियन की डील पर एडवांस्ड बातचीत कर रही है।

रिको ने कहा कि यह एग्रीमेंट मिलिट्री हार्डवेयर और डिफेंस कैपेबिलिटीज़ के मॉडर्नाइजेशन का हिस्सा है। इससे पहले फिलीपींस ने भी ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदा था।

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19 अप्रैल 2024: भारत ने फिलीपींस को भेजी थी ब्रह्मोस मिसालइ की पहली खेप, 3130 करोड़ में डील

भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की पहली खेप 19 अप्रैल 2024 को सौंपी थी। ब्रह्मोस पाने वाला फिलीपींस पहला बाहरी देश है। भारत ने जनवरी 2022 में फिलीपींस से ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री के लिए 375 मिलियन डॉलर (3130 करोड़ रुपए) की डील की थी।

इंडियन एयरफोर्स ने C-17 ग्लोब मास्टर विमान के जरिए इन मिसाइलों को फिलीपींस मरीन कॉर्प्स को सौंपा। इन मिसाइलों की स्पीड 2.8 मैक और मारक क्षमता 290 किमी है। एक मैक ध्वनि की गति 332 मीटर प्रति सेकेंड होती है।

फिलीपींस को उस समय मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी मिली है, जब उसके और चीन के बीच साउथ चाइना सी में तनाव बढ़ा हुआ है। फिलीपींस ब्रह्मोस के 3 मिसाइल सिस्टम को तटीय इलाकों (साउथ चाइना सी) में तैनात करेगा, ताकि चीन के खतरे से निपटा जा सके।

ब्रह्मोस के हर एक सिस्टम में दो मिसाइल लॉन्चर, एक रडार और एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर होता है। इसके जरिए सबमरीन, शिप, एयक्राफ्ट से दो ब्रह्मोस मिसाइलें 10 सेकेंड के अंदर दुश्मन पर दागी जा सकती है। इसके अलावा भारत फिलीपींस को मिसाइल ऑपरेट करने की भी ट्रेनिंग देगा। ​​​​पूरी खबर पढ़ें…

भारत ने मिसाइल की खेप C-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिए फिलीपींस को पहुंचाई।

भारत ने मिसाइल की खेप C-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिए फिलीपींस को पहुंचाई।

कैसे नाम पड़ा ब्रह्मोस?

ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के फेडरल स्टेट यूनिटरी इंटरप्राइज NPOM के बीच साझा समझौते के तहत विकसित किया गया है। ब्रह्मोस एक मध्यम श्रेणी की स्टील्थ रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इस मिसाइल को जहाज, पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट या फिर धरती से लॉन्च किया जा सकता है।

रक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ब्रह्मोस का नाम भगवान ब्रह्मा के ताकतवर शस्त्र ब्रह्मास्त्र के नाम पर दिया गया। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि इस मिसाइल का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि ये एंटी-शिप क्रूज मिसाइल के रूप में दुनिया में सबसे तेज है।

ब्रह्मोस पर एक नजर

  • ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बी, शिप, एयरक्राफ्ट या जमीन कहीं से भी छोड़ा जा सकता है।
  • ब्रह्मोस रूस की P-800 ओकिंस क्रूज मिसाइल टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस मिसाइल को भारतीय सेना के तीनों अंगों, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को सौंपा जा चुका है।
  • ब्रह्मोस मिसाइल के कई वर्जन मौजूद हैं। ब्रह्मोस के लैंड-लॉन्च, शिप-लॉन्च, सबमरीन-लॉन्च एयर-लॉन्च वर्जन की टेस्टिंग हो चुकी है।
  • जमीन या समुद्र से दागे जाने पर ब्रह्मोस 290 किलोमीटर की रेंज में मैक 2 स्पीड से (2500किमी/घंटे) की स्पीड से अपने टारगेट को नेस्तनाबूद कर सकती है।
  • पनडुब्बी से ब्रह्मोस मिसाइल को पानी के अंदर से 40-50 मीटर की गहराई से छोड़ा जा सकता है। पनडुब्बी से ब्रह्मोस मिसाइल दागने की टेस्टिंग 2013 में हुई थी।

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भारत बना रहा बेबी ब्रह्मोस, 20 गुना कम कीमत:भविष्य की जंग की तैयारी, सुरक्षा का नया फॉर्मूला

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रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने साफ कर दिया है कि भविष्य की जंग अब महीनों और सालों खिंचेगी। इस हकीकत को देख भारत भी तैयारी में जुट गया है। हाल ही में पिनाका रॉकेट सिस्टम के ‘हवाई संस्करण’ के परीक्षण को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। दरअसल, ब्रह्मोस जैसी अचूक सटीकता और मारक क्षमता के कारण इसे ‘बेबी ब्रह्मोस’ भी कहा जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

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ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदेगा इंडोनेशिया: $200 मिलियन से $350 मिलियन की डील पर बातचीत जारी; इससे पहले फिलीपींस ने खरीदी थी


नई दिल्ली11 मिनट पहले

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इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए भारत के साथ एक एग्रीमेंट किया है। इंडोनेशिया डिफेंस मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन रिको रिकार्डो सिरैत ने सोमवार को न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को ये जानकारी दी।

भारत और रूस की को-ओनरशिप वाली कंपनी ब्रह्मोस ने रॉयटर्स को बताया कि वह जकार्ता के साथ $200 मिलियन से $350 मिलियन की डील पर एडवांस्ड बातचीत कर रही है।

रिको ने कहा कि यह एग्रीमेंट मिलिट्री हार्डवेयर और डिफेंस कैपेबिलिटीज़ के मॉडर्नाइजेशन का हिस्सा है। इससे पहले फिलीपींस ने भी ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदा था।

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19 अप्रैल 2024: भारत ने फिलीपींस को भेजी थी ब्रह्मोस मिसालइ की पहली खेप, 3130 करोड़ में डील

भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की पहली खेप 19 अप्रैल 2024 को सौंपी थी। ब्रह्मोस पाने वाला फिलीपींस पहला बाहरी देश है। भारत ने जनवरी 2022 में फिलीपींस से ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री के लिए 375 मिलियन डॉलर (3130 करोड़ रुपए) की डील की थी।

इंडियन एयरफोर्स ने C-17 ग्लोब मास्टर विमान के जरिए इन मिसाइलों को फिलीपींस मरीन कॉर्प्स को सौंपा। इन मिसाइलों की स्पीड 2.8 मैक और मारक क्षमता 290 किमी है। एक मैक ध्वनि की गति 332 मीटर प्रति सेकेंड होती है।

फिलीपींस को उस समय मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी मिली है, जब उसके और चीन के बीच साउथ चाइना सी में तनाव बढ़ा हुआ है। फिलीपींस ब्रह्मोस के 3 मिसाइल सिस्टम को तटीय इलाकों (साउथ चाइना सी) में तैनात करेगा, ताकि चीन के खतरे से निपटा जा सके।

ब्रह्मोस के हर एक सिस्टम में दो मिसाइल लॉन्चर, एक रडार और एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर होता है। इसके जरिए सबमरीन, शिप, एयक्राफ्ट से दो ब्रह्मोस मिसाइलें 10 सेकेंड के अंदर दुश्मन पर दागी जा सकती है। इसके अलावा भारत फिलीपींस को मिसाइल ऑपरेट करने की भी ट्रेनिंग देगा। ​​​​पूरी खबर पढ़ें…

भारत ने मिसाइल की खेप C-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिए फिलीपींस को पहुंचाई।

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कैसे नाम पड़ा ब्रह्मोस?

ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के फेडरल स्टेट यूनिटरी इंटरप्राइज NPOM के बीच साझा समझौते के तहत विकसित किया गया है। ब्रह्मोस एक मध्यम श्रेणी की स्टील्थ रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इस मिसाइल को जहाज, पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट या फिर धरती से लॉन्च किया जा सकता है।

रक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ब्रह्मोस का नाम भगवान ब्रह्मा के ताकतवर शस्त्र ब्रह्मास्त्र के नाम पर दिया गया। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि इस मिसाइल का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि ये एंटी-शिप क्रूज मिसाइल के रूप में दुनिया में सबसे तेज है।

ब्रह्मोस पर एक नजर

  • ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बी, शिप, एयरक्राफ्ट या जमीन कहीं से भी छोड़ा जा सकता है।
  • ब्रह्मोस रूस की P-800 ओकिंस क्रूज मिसाइल टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस मिसाइल को भारतीय सेना के तीनों अंगों, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को सौंपा जा चुका है।
  • ब्रह्मोस मिसाइल के कई वर्जन मौजूद हैं। ब्रह्मोस के लैंड-लॉन्च, शिप-लॉन्च, सबमरीन-लॉन्च एयर-लॉन्च वर्जन की टेस्टिंग हो चुकी है।
  • जमीन या समुद्र से दागे जाने पर ब्रह्मोस 290 किलोमीटर की रेंज में मैक 2 स्पीड से (2500किमी/घंटे) की स्पीड से अपने टारगेट को नेस्तनाबूद कर सकती है।
  • पनडुब्बी से ब्रह्मोस मिसाइल को पानी के अंदर से 40-50 मीटर की गहराई से छोड़ा जा सकता है। पनडुब्बी से ब्रह्मोस मिसाइल दागने की टेस्टिंग 2013 में हुई थी।

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रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने साफ कर दिया है कि भविष्य की जंग अब महीनों और सालों खिंचेगी। इस हकीकत को देख भारत भी तैयारी में जुट गया है। हाल ही में पिनाका रॉकेट सिस्टम के ‘हवाई संस्करण’ के परीक्षण को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। दरअसल, ब्रह्मोस जैसी अचूक सटीकता और मारक क्षमता के कारण इसे ‘बेबी ब्रह्मोस’ भी कहा जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

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रमजान के महीने में मुस्लिम पत्नी की दुआ हुई कबूल, हिंदू क्रिकेटर बना चैम्पियन, आखिर कौन है यह महिला


Cricket

oi-Naveen Sharma

T20 World Cup 2026: टीम इंडिया ने टी20 वर्ल्ड कप तो जीत लिया, लेकिन इस जीत के पीछे कई खिलाड़ियों ने न जाने कितने मानसिक तूफान झेले हैं। इन्हीं में से एक नाम है शिवम दुबे। फाइनल में जब दुबे का बल्ला गरजा और भारत चैंपियन बना, तो उनकी पत्नी अंजुम खान का एक ऐसा पोस्ट सामने आया है जिसे पढ़कर हर कोई तारीफ कर रहा है।

शिवम दुबे के ऊपर पहले मीम्स भी बनते रहे हैं लेकिन इस वर्ल्ड कप में उन्होंने मौका मिलने पर कई बार टीम के लिए धमाकेदार प्रदर्शन करने का काम किया है। उनकी पत्नी अंजुम ने टीम इंडिया की वर्ल्ड कप जीत के बाद एक के बाद एक कई स्टोरीज शेयर की और प्यार भी लुटाया।

t20 world cup

मुस्लिम धर्म का पवित्र महीना रमजान इस समय चल रहा है, शायद अंजुम ने रोजा रखा होगा। टीम इंडिया के लिए उनकी दुआ कबूल हो गई। शिवम दुबे ने इस वर्ल्ड कप में अपने लंबे-लंबे छक्कों से दर्शकों का दिल जीतने का काम किया। फाइनल में अंतिम समय में आकर उन्होंने 8 गेंदों में नाबाद 26 रनों की पारी खेली थी।

शिवम दुबे को लेकर कई लोगों ने इंस्टाग्राम पर स्टोरीज शेयर की, उनमें कई शिवम के रिश्तेदार ही थे, उनके स्टोरीज भी अंजुम ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर की। अपने किसी करीबी के साथ अंजुम मैदान पर थीं। शिवम दुबे की सफलता पर अंजुम की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। ऐसा लग रहा था, जैसे रमजान पर अंजुम की दुआ कबूल हो गई और पति ने विश्व कप का टाइटल अपने नाम कर लिया।

अंजुम का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं है, बल्कि उस खिलाड़ी के परिवार के लिए एक अग्निपरीक्षा जैसा होता है। हर खिलाड़ी की पत्नी या गर्लफ्रेंड वहां दिखाई दी थीं लेकिन अंजुम का फोटो सामने नहीं आया, हालांकि अंजुम वहां पर मौजूद थीं। अंजुम ने खुद के इंस्टाग्राम पर कोई फोटो पोस्ट नहीं किया है लेकिन कुछ फोटो और वीडियो सामने आए हैं।



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महाराष्ट्र में गोरक्षकों ने ट्रक हेल्पर को गोबर खिलाया: ड्राइवर पर हमला किया, दो गिरफ्तार; मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर भैंसों से भरी गाड़ी को रोका था


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  • Maharashtra Cow Vigilantes Attack Driver, Force Man To Eat Dung | Pune Highway

पुणे6 घंटे पहले

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AI Generated

महाराष्ट्र के पुणे में मुंबई बेंगलुरु हाइवे पर एक ट्रक के समुदाय विशेष हेल्पर को गो रक्षकों ने गोबर खाने के लिए मजबूर किया। साथ ही गोरक्षकों ने ट्रक के ड्राइवर पर भी हमला किया।

पुलिस ने सोमवार को बताया कि मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक घटना पिछले हफ्ते 6 मार्च की है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि तीन आरोपियों ने कथित तौर पर ट्रक ड्राइवर और उसके हेल्पर पर हमला किया, यह आरोप लगाते हुए कि वे नकली कागजों पर भैंसों को ले जा रहे थे।

मामले में तीन आरोपी शामिल

पुलिस ने कहा कि तीन गोरक्षकों बिपाशा उर्फ ​​आकाश मणिकम, हेमंत गायकवाड़, और विराज सोले ने 6 मार्च की सुबह मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर अंबेगांव के पास भैंसों से भरे एक ट्रक को रोका।

उन्होंने कहा कि तीनों ने आरोप लगाया कि वे नकली कागजो पर भैंसों को ले जा रहे थे। इसके बाद ट्रक ड्राइवर और हेल्पर के साथ मारपीट की।

हेल्पर ने गोबर खिलाए जाने की जानकारी पहले नहीं दी थी

पुणे जिले के अंबेगांव पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने कहा, हमने शुरू में तीन गौरक्षकों के खिलाफ एक नॉन-कॉग्निजेबल (NC) अपराध दर्ज किया था। उन्होंने बताया कि ड्राइवर ने दावा किया कि उसके और उसके असिस्टेंट के साथ मारपीट की गई थी।

बाद में, एक वीडियो ऑनलाइन सामने आया जिसमें तीनों आरोपी असिस्टेंट को गाय का गोबर खाने के लिए मजबूर करते और उसके और उसके धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें करते हुए देखे गए।

अधिकारी ने कहा, जब हमने ट्रक हेल्पर से पूछा कि जब NC दर्ज किया गया था तो उसने पुलिस को इस घटना के बारे में क्यों नहीं बताया। पुलिस के मुताबिक हेल्पर ने कहा कि वह डर गया था।

बाद में, वीडियो और हेल्पर के बयान के आधार पर, पुलिस ने मणिकम, सोले और गायकवाड़ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत FIR दर्ज की गई। अधिकारी ने कहा कि हमने अब तक मणिकम और गायकवाड़ को गिरफ्तार कर लिया है, और आगे की जांच चल रही है।

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‘सजधजकर जरा बनठन के’, Google की बेहद खूबसरत मैनेजर ने बताए सफलता के अजब रास्ते, सोशल मीडिया पर मचा बवाल


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oi-Bhavna Pandey

Google Senior Manager Success Mantra: वर्क फ्रॉम होम के टाइम में कई लोग आरामदायक कपड़ों में काम करते हैं, लेकिन गूगल की सीनियर मैनेजर अंचल ऐसे लोगों के लिए सोशल मीडिया पर सफलता पाने का ऐसे अजब तरीके शेयर किए हैं जो देखते ही देखते वायरल हो गया है।

दरअसल, गूगल में स्ट्रैटेजी और ऑपरेशंस की सीनियर मैनेजर अंचल मिर्जा ने अपने अनुभव के आधार पर सफलता के टिप्‍स शेयर किए हैं जिस पर लोग चर्चा कर रहे हैं।

Google senior manager Anchal Mirza

अंचल के अनुसार वर्क फ्रॉम होम करते समय तैयार होकर बैठना और हल्का मेकअप करना आपको ज्यादा प्रोडक्टिव और कॉन्फिडेंट बनाता है। उनका कहना है कि अच्छा दिखना सिर्फ लुक का मामला नहीं है, बल्कि इससे आपके काम करने के तरीके और डिजिटल मीटिंग्स में प्रभाव भी बढ़ता है।

सजधजकर काम करने बढ़ती है प्रोडक्टिविटी

फिलाडेल्फिया के बाहर अपने परिवार के साथ शिफ्ट होने के बाद अंचल मिर्जा न्यूयॉर्क के ऑफिस हफ्ते में दो दिन जाती हैं और बाकी दिन घर से काम करती हैं। बड़ी टेक कंपनियों में आमतौर पर लोग आरामदेह कपड़े पहनते हैं, लेकिन मिर्जा कहती हैं कि उन्हें थोड़ी सधी और पॉलिश लुक पसंद है। उन्होंने बिजनेस इनसाइडर को बताया जब वो काम के लिए तैयार होती हैं, तो खुद को ज्यादा प्रोडक्टिव और मोटिवेटेड महसूस करती हैं। चाहे ऑफिस में हों या घर से काम कर रही हों, थोड़ा सजा-संवरा लुक उनके मूड और काम करने के नजरिए को बदल देता है।

अंचल ने शेयर की वर्क यूनिफॉर्म

अंचल ने अपने लिए दो आरामदायक वर्क आउटफिट्स तय किए हैं। या तो पॉलिश टॉप या स्वेटर के साथ जींस पहनती हैं, या फिर कैजुअल शर्ट के साथ अच्छी स्लैक्स। इससे वो कैजुअल और प्रोफेशनल दोनों लुक में बैलेंस बना पाती हैं।

वर्क फ्रॉम होम में भी प्रोफेशनल दिखना जरूरी

कोविड-19 से पहले भी उनकी टीम ज्यादातर वीडियो मीटिंग्स पर काम करती थी। इसलिए घर से काम करते हुए भी उन्होंने ऑफिस वाला लुक बनाए रखा और हल्का मेकअप किया। उनका मानना है कि इससे वर्चुअल मीटिंग में उनकी प्रेजेंस और आत्मविश्वास बना रहता है।

सिंपल वॉर्डरोब से कम टेंशन

36 वर्षीय अंचल ने बताया उनके वॉर्डरोब में ज्यादातर न्यूट्रल कलर्स के ड्रेस हैं। इससे आउटफिट्स आसानी से मैच हो जाते हैं और रोज “क्या पहनें” की चिंता नहीं रहती। साधारण ज्वेलरी या अच्छे से स्टाइल किए बाल भी उन्हें ऑर्गनाइज्ड और कॉन्फिडेंट महसूस कराते हैं।

महिलाओं के लिए आत्मविश्वास जरूरी

टेक इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए आत्मविश्वास बहुत मायने रखता है। अंचल कहती हैं कि तैयार होकर काम करना उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाता है और प्रोफेशनल माहौल में बेहतर परफॉर्म करने में मदद करता है। IAS Taruni Pandey: चार महीने तैयारी कर बिना कोचिंग तरुणी पांडेय बनीं IAS, एक हादसे ने बदल दी पूरी जिंदगी



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LPG Gas Cylinder Price Hike: भारत में अब सिलेंडर ₹1500 का हो गया? वाकई ईरान युद्ध ने गैस की कीमतें बढ़ाईं?


India

oi-Divyansh Rastogi

LPG Gas Cylinder Price Hike Update: मार्च 2026 में भारत के घरों में खाना पकाने की गैस (एलपीजी) को लेकर अफरा-तफरी मची हुई है। ईरान के साथ चल रहे युद्ध (अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मची।

सोशल मीडिया पर वीडियो और खबरें वायरल हो रही हैं, जहां लोग लंबी कतारों में खड़े दिख रहे हैं, और कुछ जगहों पर काला बाजार में सिलेंडर 1,500 रुपये तक बिकने की बातें हो रही हैं। लेकिन क्या वाकई देश में एलपीजी की भारी कमी है? आइए पूरी स्थिति समझते हैं…

LPG Gas Cylinder Price Hike Update

LPG Gas Price Hike: कीमतों में बढ़ोतरी- कितनी और क्यों?

7 मार्च 2026 से सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने घरेलू (नॉन-सब्सिडाइज्ड) 14.2 किलो एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की। दिल्ली में अब यह 913 रुपये का हो गया है (पहले 853 रुपये था)। अन्य शहरों में भी समान वृद्धि:

  • कोलकाता: 939 रुपये
  • मुंबई: 912.50 रुपये
  • चेन्नई: 928.50 रुपये

वाणिज्यिक (19 किलो) सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये (कुछ रिपोर्टों में 114.50) की बढ़ोतरी हुई, दिल्ली में अब 1,883 रुपये। यह घरेलू उपभोक्ताओं के लिए लगभग एक साल में पहली बड़ी बढ़ोतरी है।

यह बढ़ोतरी ईरान युद्ध के कारण वैश्विक एलपीजी और क्रूड ऑयल कीमतों में उछाल से आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारत की लगभग 80-90% एलपीजी आयात होती है, जो खाड़ी देशों (UAE, कतर, सऊदी अरब, कुवैत) से आती है। युद्ध ने इस रूट को बाधित किया, फ्रेट और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़े, और ग्लोबल स्पॉट प्राइस में तेजी आई। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है, और आयात पर 60-65% निर्भर है।

क्या वाकई कमी है? घबराहट vs हकीकत

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगीं। इसमें नोएडा, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, कोलकाता, हैदराबाद, रांची शामिल है। वायरल वीडियो में सैकड़ों लोग सिलेंडर लेकर बैठे दिखे। कुछ जगहों पर काला बाजार में 1,500 रुपये तक कीमत बताई गई, खासकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR में। लेकिन सरकार और विशेषज्ञों का कहना साफ है-देशव्यापी कमी नहीं है।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 6 मार्च को कहा कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है, उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं। हमारी प्राथमिकता किफायती और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 25-30 दिनों की मांग के लिए पर्याप्त स्टॉक और रणनीतिक भंडार हैं। रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अमेरिका से एलपीजी आयात बढ़ रहा है (2026 के लिए 2.2 मिलियन टन का कॉन्ट्रैक्ट)। अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नॉर्वे से वैकल्पिक स्रोत तलाशे जा रहे हैं। इंडियन ऑयल ने सोशल मीडिया पर अफवाहों को खारिज किया-स्टॉक पर्याप्त, सप्लाई नॉर्मल।

घबराहट के पीछे क्या कारण?

  • पैनिक बाइंग: युद्ध की खबरों से लोग एहतियातन ज्यादा बुकिंग कर रहे हैं, जिससे लोकल लेवल पर दबाव बढ़ा।
  • बुकिंग नियम सख्त: जमाखोरी रोकने के लिए नई बुकिंग की वेटिंग पीरियड बढ़ाई गई-सिंगल सिलेंडर वाले के लिए 21-25 दिन, डबल के लिए 30 दिन। इससे पहले बुकिंग करने की होड़ मची।

कालाबाजारी: कुछ डीलरों ने संकट का फायदा उठाया, 1,500 रुपये तक चार्ज किए। लेकिन कुल सप्लाई स्थिर है।
वाणिज्यिक प्रभाव: होटल, रेस्तरां, फैक्टरियां (जैसे सिरेमिक इंडस्ट्री में 94 रुपये/किलो तक पहुंची), और यहां तक कि पुणे के श्मशान घाट में गैस आधारित अंतिम संस्कार अस्थायी रूप से रोके गए (घरेलू को प्राथमिकता देने के कारण)।

क्या होगा आगे?

युद्ध लंबा खिंचा तो आयात बिल बढ़ेगा, सब्सिडी पर दबाव आएगा, और कीमतें और बढ़ सकती हैं। लेकिन सरकार ने इमरजेंसी पावर इस्तेमाल कर रिफाइनरियों को प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है। वैकल्पिक रूट्स और US से आयात से स्थिति संभालने की कोशिश है।

1,500 रुपये वाला सिलेंडर काला बाजार की अफवाह/स्थानीय गड़बड़ी है, न कि ऑफिशियल रेट। आधिकारिक कीमत दिल्ली में 913 रुपये है। घबराहट से बचें, ऑनलाइन/ऐप से बुकिंग करें, और अफवाहों पर यकीन न करें। सरकार का दावा है-सप्लाई सुरक्षित है, बस पैनिक न फैलाएं। यह स्थिति वैश्विक संकट और लोकल व्यवहार का मिश्रण है, लेकिन पूर्ण संकट नहीं।



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