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राहुल बोले- नेता नहीं होता,तो एयरोस्पेस कारोबारी होता: चीन की तारीफ में कहा- इसका इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन सिस्टम बेजोड़, लेकिन वह लोकतांत्रिक देश नहीं है


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त्रिवेंद्रम2 मिनट पहले

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी केरल के दौरे पर हैं। उन्होंने शनिवार को त्रिवेंद्रम में कहा कि अगर वे पॉलिटिक्स में नहीं होते, तो एयरोस्पेस की दुनिया में एंटरप्रेन्योरशिप करते। राहुल ने कहा कि वे एक पायलट हैं। उनके पिता और चाचा भी पायलट थे। यह परिवार में चलता है।

राहुल गांधी केरल के दो दिन के दौरे पर हैं। वे टेक्नोपार्क में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) फ्रेटरनिटी के साथ बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने चाइना के इंडस्ट्रियल सिस्टम की तारीफ की।

राहुल ने कहा- चीन ने एक शानदार इंडस्ट्रियल सिस्टम बनाया है जिसका दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है। लेकिन हमें उनका जबरदस्ती वाला सिस्टम पसंद नहीं। वे डेमोक्रेटिक नहीं हैं।

राहुल गांधी ने केरल के इडुक्की जिले के कुट्टिकनम में चाय बागान के मजदूरों से बातचीत की और वर्कला के शिवगिरी मठ में श्री नारायण गुरु की समाधि पर भी गए।

राहुल ने ये बातें भी कहीं…

  • चीन ने इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन सेक्टर पर मजबूत पकड़ बना ली है। वहीं अमेरिका, भारत और दुनिया के ज्यादातर देश सामान बनाने के बजाय उन्हें इस्तेमाल करने या बेचने वाले सेक्टर पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। असल में ज्यादा और स्थायी नौकरियां फैक्ट्रियों में उत्पादन वाले सेक्टर में बनती हैं, जबकि IT जैसे सेक्टर ज्यादातर सेवाएं और खपत से जुड़े होते हैं।
  • चीन अभी पूरी आजादी से काम कर रहा है, लेकिन वह चाहते हैं कि वे इस बात को लेकर चिंतित हों कि भारत उस स्पेस में आगे आ रहा है।
  • भारत में बहुत कम बिजनेस इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में लगे हुए हैं। अडाणी, अंबानी जैसे बड़े बिजनेसमैन कुछ भी प्रोड्यूस नहीं करते हैं। वे ऐसे प्रोडक्ट बेचते हैं जो हमारे लोकल प्रोडक्शन को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • इसका एक पॉलिटिकल पहलू भी है। गुड्स एंड सेल्स टैक्स (GST) का मौजूदा फॉर्म इस तरह से डिजाइन किया गया है जो प्रोड्यूसर्स को नुकसान पहुंचाता है।
  • यह असल में प्रोड्यूसिंग स्टेट्स को खत्म करता है और कंज्यूमर स्टेट्स की मदद करता है।
  • अगर भारत देश की डेमोक्रेटिक वैल्यूज को बनाए रखते हुए एक इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन सिस्टम बना सकता है, तो यह भारत और दुनिया के लोगों की बहुत बड़ी सेवा होगी।

रूस-यूक्रेन और इजराइल-ईरान जंग का उदाहरण दिया

राहुल ने जियोपॉलिटिकल कंडीशन का उदाहरण देते हुए कहा- अगर आप यूक्रेन जाकर देखें कि युद्ध के मैदान में क्या हो रहा है, तो आप पाएंगे कि सर्कुलर मोशन, ड्रोन इंटरनल कम्बशन इंजन को पूरी तरह से खत्म कर रहा है। ईरान में, आप देखेंगे कि मिलिट्री हिस्सा बैटरी ऑप्टिक्स और इलेक्ट्रिक मोटर की तरफ जा रहा है। इन टेक्नोलॉजी पर किसका दबदबा है? चीन का। यह, हमारे लिए, एक बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि हम ही ऐसे लोग हैं जो यह बदलाव ला सकते हैं। सही पॉलिसी और विजन होने पर, भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सर्कुलर मोशन पर चीन से मुकाबला कर सकता है।

शिवगिरी मठ भी गए राहुल, देखें तस्वीरें…

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अब विश्व स्तरीय होगी पंजाब के सरकारी स्कूलों की पढ़ाई, CM मान ने प्रिंसिपलों के 8वें बैच को दिखाई हरी झंडी


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जींद की फैक्ट्री में आग, 4 महिलाओं की मौत: 17 मजदूर झुलसे; मेन गेट पर बाहर से ताला लगा था, बाहर नहीं निकल पाए लोग – Jind News




हरियाणा के जींद में शनिवार को होली के गुलाल और रंग बनाने वाली फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। हादसे में 4 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 20 मजदूर झुलस गए। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। घटना सफीदों की भाट कॉलोनी की है। आरोप है कि फैक्ट्री के मेन गेट पर बाहर से ताला लगा हुआ था। जब फैक्ट्री में आग लगी तो मजदूर बाहर नहीं निकल पाए। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। घायलों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभी यह नहीं पता चल पाया है कि आग कैसे लगी। सूचना पर DC मोहम्मद इमरान रजा और SP कुलदीप सिंह भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। 5 पॉइंट में जानिए कैसे हुआ हादसा…. 30 मजदूर काम कर रहे थे, अचानक आग भड़की जानकारी के अनुसार, सफीदों की भाट कॉलोनी में स्थित एक रंग फैक्ट्री में शनिवार को अन्य दिनों की तरह लगभग 30 मजदूर काम कर रहे थे। तभी अचानक आग लग गई और कुछ ही मिनटों में यह पूरे परिसर में फैल गई। चारों ओर धुएं और आग की लपटें उठने के कारण मजदूरों में चीख-पुकार मच गई। उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। आसपास के लोगों ने धुआं उठता देख बचाव कार्य शुरू किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। बाहर से बंद था मेन गेट, लोगों ने तोड़ा मजदूरों के अनुसार, काम के दौरान फैक्ट्री के मुख्य दरवाजे पर बाहर से ताला लगा हुआ था। आग लगने के बाद जब मजदूरों ने बाहर निकलने की कोशिश की, तो ताला लगा होने के कारण वे अंदर ही कैद होकर रह गए। बाहर मौजूद लोगों और स्थानीय लोगों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कड़ी मशक्कत के बाद दरवाजा तोड़ा, जिसके बाद कुछ मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। 2 महिलाओं की मौके पर ही मौत दो महिलाओं की झुलसने से मौके पर ही मौत हो चुकी थी। फैक्ट्री से निकाले गए मजदूरों को सफीदों के अस्पताल में लाया गया। कई लोगों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें पानीपत अस्पताल रेफर कर दिया गया। बाद में 2 और महिलाओं ने दम तोड़ दिया। माना जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट से आग लगी है। फिलहाल घटना को लेकर छानबीन चल रही है। कुछ जान बचाने के लिए छत से कूदे आग फैक्ट्री के प्रवेश द्वार के पास लगी थी, जिसका संभावित कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है। आग लगने के बाद अंदर मौजूद महिलाएं और अन्य लोग घबरा गए। कुछ लोग ऊपर की मंजिल पर चढ़ गए, तो कुछ अंदर के कमरों में छिप गए। कुछ लोगों ने ऊपर से कूदकर अपनी जान बचाई और बाहर शोर मचाया। युवाओं ने बचाई फंसे लोगों की जान स्थानीय युवाओं ने अपनी जान पर खेलकर फैक्ट्री में घुसकर लोगों को बाहर निकाला। पुलिस ने दीवार तोड़कर रास्ता बनाया ताकि फंसे हुए लोगों को निकाला जा सके। इसके बाद फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस सेवाओं ने रेस्क्यू ऑपरेशन को संभाला। घायलों में ये शामिल, मृतकों की पहचान नहीं हादसे के बाद, दो एंबुलेंस की मदद से घायलों को जींद नागरिक अस्पताल ले जाया गया। पहली एंबुलेंस में सफीदों निवासी रानी (45), आदर्श कॉलोनी (सफीदों) निवासी जगबीर (40), और निसिंग (करनाल) निवासी पवन कुमार (30) को लाया गया। जगबीर और पवन कुमार को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। इसके अलावा, सफीदों की शिव कॉलोनी निवासी कश्मीरी (39), गीता कॉलोनी निवासी कमलेश (54) को भी गंभीर रूप से झुलसी हुई हालत में अस्पताल लाया गया। सफीदों निवासी एक अन्य घायल, बिमला (60) को भी उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों और कुछ घायलों की अभी पहचान नहीं हो पाई है। 4 पॉइंट में जानें हादसे को लेकर डीसी ने क्या कहा… डीसी बोले- जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई जींद के डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने बताया कि सफीदों की फैक्ट्री में लगी आग में वहां काम कर रहे 17 व्यक्ति प्रभावित हुए हैं। 4 की मौत हो चुकी है। बाकी घायलों का इलाज चल रहा है। कुछ को रोहतक रेफर किया गया है और कुछ जींद के जनरल हॉस्पिटल में भर्ती हैं। इनमें 2 पुरुष हैं जबकि शेष सभी महिलाएं हैं। फैक्ट्री के अवैध तौर से चलाने के आरोप: डीसी ने कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार मालिक ने जगह को किराये पर दिया हुआ था। पुलिस संदिग्धों को हिरासत में लेने की कार्रवाई में लगी है। भविष्य के लिए पूरे जिले में एक अभियान चलाया जाएगा ताकि बिना अनुमति चल रही ऐसी खतरनाक फैक्ट्रियों को बंद किया जा सके। गेट पर बाहर से लगाया था ताला: डीसी ने कहा कि ताला लगाने या अवैध संचालन जैसी शिकायतों पर जांच के बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस-फायर विभाग पर कार्रवाई: थाना मात्र 200 मीटर दूर था, फिर भी पुलिस देरी से पहुंची? फायर ब्रिगेड वालों ने कहा कि उनके पास अंदर जाने के लिए उपकरण नहीं हैं? पर डीसी ने कहा कि सरकार ने फायर विभाग को सभी जरूरी संसाधन दिए हैं। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी की कमी पाई जाती है, तो उस पर जांच बिठाई जाएगी। दावा किया कि पुलिस की फर्स्ट रिस्पॉन्डर टीम मौके पर समय से पहुंच गई थी।



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क्या हिंदू हैं Adnaan Shaikh की पत्नी आएशा? क्यों छुपा रखा है चेहरा? अब यूट्यूबर ने बताया ऐसा सच और खोला राज


Entertainment

oi-Purnima Acharya

Adnaan Shaikh: सोशल मीडिया स्टार और ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ से चर्चा में आए अदनान शेख इन दिनों अपनी शादी को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उनकी शादी के बाद सोशल मीडिया पर ये चर्चा तेज हो गई थी कि उन्होंने निकाह के लिए अपनी पत्नी का धर्म बदलवाया है। अब इन आरोपों पर अदनान शेख ने खुद सामने आकर सफाई दी है।

यूट्यूबर अदनान शेख ने साल 2025 में किया था निकाह
यूट्यूबर अदनान शेख ने साफ कहा कि उनकी पत्नी का धर्म परिवर्तन नहीं कराया गया है और वह पहले से ही मुस्लिम हैं। आपको बता दें कि अदनान शेख ने अपनी लॉन्ग-टाइम गर्लफ्रेंड आएशा शेख के साथ 25 सितंबर 2025 को निकाह किया था। शादी की तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे।

Adnaan Shaikh

अदनान शेख की पत्नी ने नहीं दिखाया था चेहरा

हालांकि शादी के दौरान एक बात ने सबका ध्यान खींचा था और वो था अदनान शेख की पत्नी पूरे समय मास्क पहनकर अपना चेहरा छिपाए नजर आई थीं। इसके बाद लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे थे और उनकी पहचान को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आने लगी थीं।

अदनान शेख की बहन ने लगाए थे गंभीर आरोप

-विवाद तब और बढ़ गया था जब अदनान शेख की बहन इफत शेख ने दावा किया था कि उनके भाई की पत्नी पहले हिंदू थीं और शादी के लिए उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया था।

-अदनान की बहन इफत का कहना था कि भाई की पत्नी का असली नाम रिद्धि जाधव है और उन्होंने निकाह से पहले अपना धर्म बदलकर नाम आएशा शेख रख लिया है।

धर्म परिवर्तन को लेकर अदनान शेख ने दी ऐसी सफाई

-इन आरोपों के बीच अदनान शेख ने सोशल मीडिया पर फैंस के सवालों का जवाब देते हुए कहा है कि उनकी पत्नी पहले से ही मुस्लिम हैं और धर्म परिवर्तन की बात पूरी तरह से गलत है।

-अदनान शेख ने ये भी कहा कि उनके धर्म में इंटर-कास्ट मैरिज की अवधारणा को सही नहीं माना जाता है इसलिए उनकी शादी को लेकर फैल रही अफवाहों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

शादी के बाद उमराह पर गया था कपल

जानकारी के अनुसार निकाह के कुछ समय बाद अदनान शेख अपनी पत्नी आएशा शेख के साथ उमराह के लिए भी गए थे। एयरपोर्ट और मक्का से उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इन तस्वीरों में भी उनकी पत्नी ने बुर्का और हिजाब पहन रखा था और उनका चेहरा पूरी तरह से ढका हुआ था।

पत्नी के धर्म को लेकर अभी भी बरकरार है सस्पेंस

हालांकि अदनान शेख ने अपनी पत्नी के धर्म परिवर्तन की खबरों को गलत बताया है लेकिन उनकी आएशा शेख की असली पहचान और चेहरा अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर इस शादी को लेकर अब भी चर्चाओं और अटकलों का दौर जारी है।



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पहले पति को मौत की नींद, फिर हार्ट अटैक का नाटक कर रचाई शादी; कब्र खोदने के बाद खुला राज


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पति को सुलाया मौत की नींद, फिर हार्ट अटैक का ड्रामा; कब्र खुदी तो खुला राज

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Karnataka Crime News: कर्नाटक के तुमकुर जिले में एक महिला ने कथित तौर पर अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी. हद तो हो गई जब उसे हार्ट अटैक बताकर मामला छिपाने की कोशिश की. पति की मौत के महज 20 दिन बाद महिला ने उसी प्रेमी से शादी कर ली. परिवार को शक हुआ तो पुलिस ने शव को कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया. इसमें हत्या का खुलासा हो गया.

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आशा और उसका प्रेमी चंद्रप्पा पहले से ही एक-दूसरे के संपर्क में थे. (फोटो News18)

News18 कन्नड़
Karnataka Crime News: कर्नाटक से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस घटना ने रिश्तों और भरोसे दोनों को झकझोर दिया है. एक महिला पर आरोप है कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पहले अपने ही पति की हत्या कर दी. इसके बाद पूरे मामले को हार्ट अटैक का रूप दे दिया. परिवार और आसपास के लोगों को बताया गया कि पति की अचानक तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई. अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. कुछ ही दिनों बाद ऐसा खुलासा हुआ जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया.

पति की मौत के महज 20 दिन बाद महिला ने अपने कथित प्रेमी से शादी रचा ली. यहीं से शक की सुई परिवार की तरफ घूमने लगी. मृतक की बहनों को लगा कि मामला साधारण नहीं है. उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद जांच शुरू हुई. पुलिस ने अदालत की अनुमति से शव को कब्र से बाहर निकलवाया और पोस्टमॉर्टम कराया. रिपोर्ट में जो सामने आया उसने पूरे मामले को हत्या की साजिश में बदल दिया.

पोस्टमॉर्टम में खुला राज

  • पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान 50 वर्षीय परमेश के रूप में हुई है, जो कर्नाटक के तुमकुर जिले में दिहाड़ी मजदूरी करता था. 29 जनवरी की रात उसकी मौत हो गई थी. उसकी पत्नी पी. आशा ने परिवार को बताया कि परमेश को दिल का दौरा पड़ा था. परिवार ने उसी आधार पर अगले दिन अंतिम संस्कार कर दिया और शव को दफना दिया गया. उस समय किसी को भी शक नहीं हुआ कि इसके पीछे कोई साजिश हो सकती है.
  • लेकिन जब 19 फरवरी को आशा ने 48 वर्षीय चंद्रप्पा नाम के व्यक्ति से शादी कर ली, तो मृतक के परिवार को शक हुआ. उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और शव को कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया. रिपोर्ट में सामने आया कि परमेश की मौत हार्ट अटैक से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई थी. पूछताछ में पुलिस का दावा है कि आशा और उसके प्रेमी चंद्रप्पा ने तकिये से मुंह दबाकर परमेश की हत्या की थी और इसे हार्ट अटैक जैसा दिखाने की कोशिश की.

पति की मौत पर शक कैसे पैदा हुआ?

परमेश की मौत के समय परिवार को बताया गया था कि उन्हें हार्ट अटैक आया था. इसलिए परिवार ने बिना ज्यादा सवाल किए अंतिम संस्कार कर दिया. लेकिन जब उनकी पत्नी आशा ने मात्र 20 दिनों के भीतर ही अपने कथित प्रेमी चंद्रप्पा से शादी कर ली, तो मृतक की बहनों को शक हुआ. उन्हें लगा कि मौत के पीछे कोई साजिश हो सकती है. इसी शक के आधार पर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई.

पुलिस ने मामले का खुलासा कैसे किया?

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कोर्ट से अनुमति लेकर परमेश के शव को कब्र से बाहर निकलवाया. तहसीलदार और राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में शव को निकाला गया और उसका पोस्टमॉर्टम कराया गया. फोरेंसिक जांच में यह सामने आया कि मौत हार्ट अटैक से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई थी. इसके बाद पुलिस ने दोनों संदिग्धों से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने हत्या की साजिश कबूल कर ली.

पुलिस जांच में क्या सामने आया?

पुलिस के अनुसार आशा और उसका प्रेमी चंद्रप्पा पहले से ही एक-दूसरे के संपर्क में थे. दोनों ने मिलकर परमेश को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. आरोप है कि जिस रात घटना हुई, उस समय परमेश सो रहे थे और संभवतः उन्होंने शराब भी पी रखी थी. उसी दौरान दोनों ने तकिये से उनका मुंह दबाकर हत्या कर दी. इसके बाद पूरे मामले को हार्ट अटैक का रूप देने की कोशिश की गई.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



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हिमाचल के मंत्री का विदेश नीति-कूटनीति पर कटाक्ष: विक्रमादित्य बोले- तेल खरीदने की भी अनुमति लेनी पड़ रही, ‘छूट भी वही दें, नियम भी वही बनाएं’ – Shimla News




हिमाचल प्रदेश के PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने विदेश नीति और कूटनीति पर सवाल खड़े किए। विक्रमादित्य ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ द ट्रेजरी ‘स्कॉट बसेंट’ के ट्वीट को पोस्ट करते हुए लिखा- ‘बड़े-बड़े मंचों से विश्वगुरु का दम भरते हैं’ और अब रूस से तेल खरीदने की अनुमति लेनी पड़ रही है। स्कॉट बसेंट के ट्वीट में भारत की रिफाइनरी को रूस से तेल खरीदने की 30 दिन की अस्थायी छूट का जिक्र है। इस पर हिमाचल के PWD मंत्री नाराज़ हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा- ‘अमेरिका से मिली छूट को वरदान माना जा रहा है और खूब तालियां बज रही हैं। उन्होंने केंद्र पर तंज कसते हुए लिखा- छूट भी वही (अमेरिका) दें, नियम भी वही (अमेरिका) बनाए। विक्रमादित्य ने आगे लिखा- फिर हम मंच से गर्व से बोलें – ‘हम तो बिल्कुल आत्मनिर्भर हैं साहब।’ ऊर्जा हमारी, ज़रूरत हमारी, पर टाइमटेबल किसी और का, ये कैसा स्वाभिमान है, जो हर बार मुहर बाहर से ढूंढता है? उन्होंने लिखा- उधर, तेल खरीदने की छूट मिली और इधर हम मुस्कुरा कर चुप हो जाते हैं, क्योंकि ज़्यादा बोलेंगे तो, कहीं अगली बार छूट पर स्थायी रोक न लग जाए। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव पर चिंता जाहिर विक्रमादित्य सिंह ने चिंता जाहिर करते हुए लिखा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात, विशेषकर पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, तेल बाज़ार में अस्थिरता और वैश्विक शक्तियों की खींचतान का असर सीधे-सीधे हमारे देश की अर्थव्यवस्था, रोज़गार, महंगाई व सुरक्षा पर डाल रहा है। विदेश नीति-कूटनीति को कसौटी पर परखे जाने की जरूरत: मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आगे लिखा- इस समय हमारी (इंडिया) विदेश नीति और कूटनीति को केवल बड़े-बड़े मंचों पर भाषणबाज़ी नहीं, बल्कि इसे कसौटी पर परखे जाने की जरूरत है। वह आगे लिखते हैं कि हमें ईमानदारी से यह विचार करना होगा कि आज जो निर्णय लिए जा रहे हैं, वे सच में देश और प्रदेश के हित में हैं या आने वाले समय में हमें और बड़े संकट की ओर धकेल सकते हैं। विक्रमादित्य ने 2 दिन पहले भी 56 इंच पर सवाल खड़े किए विक्रमादित्य सिंह ने 2 दिन पहले भी एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए खाड़ी देशों की लड़ाई में लाशों पर भी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को लेकर तंज कसा। इस पर हिमाचल भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने विक्रमादित्य के सोशल मीडिया पोस्ट को विवादित बताते हुए निंदा की थी। उन्होंने कहा कि दुखद घटनाओं पर राजनीति करना आसान है, लेकिन देश की प्रतिष्ठा बढ़ाना बेहद कठिन कार्य है। राजनीति नहीं देश-प्रदेश हित में टिप्पणी: विक्रमादित्य मंत्री ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि उनकी यह टिप्पणी राजनीति या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश और हिमाचल प्रदेश के हित में है। उन्होंने कहा कि अपनी राजनीतिक यात्रा में उन्होंने हमेशा सत्य का समर्थन और गलत का विरोध किया है, और यह प्रवचन उसी दिशा का हिस्सा है।



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Uttarakhand News: भारतीय न्याय संहिता सहित नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तराखंड देश में प्रथम


उत्तराखंड ने एक डेटा एक एंट्री सिस्टम द्वारा संचालित ICJS 2.0 कार्यान्वयन में शीर्ष राष्ट्रीय रैंकिंग हासिल की है। राज्य ने 23,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया, तकनीकी बुनियादी ढांचे को बढ़ाया, और पुलिस, अदालतों और फोरेंसिक के बीच वास्तविक समय के डेटा साझाकरण पर जोर दिया, जिससे राष्ट्रीय नेतृत्व से प्रशंसा मिली।

India

-Oneindia Staff

देहरादून। भारत की न्यायिक और कानून-व्यवस्था प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में उत्तराखंड ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 के राष्ट्रीय क्रियान्वयन में देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, यह उपलब्धि तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Uttarakhand tops ICJS 2.0 implementation

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के CCTNS/ICJS प्रोग्रेस डैशबोर्ड के अनुसार, उत्तराखंड ने 93.46 अंकों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। राष्ट्रीय रैंकिंग में हरियाणा 93.41 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर, असम 93.16 अंकों के साथ तीसरे, सिक्किम 91.82 अंकों के साथ चौथे और मध्य प्रदेश 90.55 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहा।

राज्य में यह सफलता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और निरंतर निगरानी का परिणाम मानी जा रही है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) जैसे नए कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने मिशन मोड में कार्य किया।

मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों और जिला स्तर के फील्ड अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें कीं। इस सतत निगरानी से तकनीकी चुनौतियों का समय पर समाधान हुआ और पुलिस विभाग नए कानूनी ढांचे को प्रभावी रूप से लागू कर सका।

“वन डेटा, वन एंट्री” प्रणाली की अहम भूमिका

इस उपलब्धि की आधारशिला ICJS 2.0 के तहत “वन डेटा, वन एंट्री” प्रणाली रही। इस व्यवस्था के माध्यम से पुलिस (CCTNS), ई-कोर्ट्स, ई-प्रिज़न्स, ई-प्रोसिक्यूशन और ई-फॉरेंसिक्स के बीच डेटा का निर्बाध आदान-प्रदान सुनिश्चित हुआ है।

इस प्रणाली में एक बार डेटा दर्ज होने पर वह सभी संबंधित विभागों को तुरंत उपलब्ध हो जाता है, जिससे कागजी प्रक्रिया कम होती है और मामलों के निपटारे में तेजी आती है। साथ ही पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए “ई-साक्ष्य” ऐप के माध्यम से अपराध स्थल की वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संग्रह अनिवार्य किया गया है।

उपलब्धि के प्रमुख बिंदु

* व्यापक प्रशिक्षण: राज्य में 23 हजार से अधिक पुलिस कर्मियों को नए कानूनों के प्रावधानों पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
* तकनीकी सुदृढ़ीकरण: “न्याय श्रुति” के माध्यम से वर्चुअल कोर्ट सुनवाई और फॉरेंसिक मोबाइल वैन जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई।

राज्य पुलिस के प्रवक्ता और पुलिस महानिरीक्षक (अपराध एवं कानून-व्यवस्था) सुनील कुमार मीणा ने बताया कि उत्तराखंड ने न केवल तकनीकी ढांचे के विकास में बल्कि रियल-टाइम डेटा एंट्री के मामले में भी रिकॉर्ड स्थापित किया है।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उच्चस्तरीय बैठकों में “वन डेटा, वन एंट्री” प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उत्तराखंड की सराहना की है। इस समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ उत्तराखंड देश के लिए स्मार्ट पुलिसिंग का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है।

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कैसा होगा ईरान का सुप्रीम लीडर? धार्मिक नेता या कोई और? ट्रंप ने किया अब खुलासा, खामेनेई के बेटे का क्या होगा?


International

oi-Pallavi Kumari

Iran Supreme Leader: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मध्य-पूर्व की राजनीति में बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। करीब तीन दशक से ज्यादा समय तक सत्ता के सबसे ताकतवर पद पर रहने वाले खामेनेई के जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान का अगला सुप्रीम लीडर कैसा होगा-क्या कोई धार्मिक नेता ही इस पद पर बैठेगा या फिर किसी नए तरह के नेतृत्व की शुरुआत होगी। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

ट्रंप का बड़ा बयान: खामेनेई का बेटा नहीं चलेगा (Mojtaba Khamenei Iran Supreme Leader)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि वह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का अगला सर्वोच्च नेता बनने के पक्ष में नहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने मोजतबा को “लाइटवेट” बताते हुए कहा कि वह इस पद के लिए सही विकल्प नहीं हैं।

Iran Supreme Leader

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान में ऐसा नेता आए जो देश में स्थिरता और शांति ला सके। उनके मुताबिक अगर खामेनेई की नीतियों को ही आगे बढ़ाया गया तो अमेरिका और ईरान के बीच टकराव फिर बढ़ सकता है।

क्या धार्मिक नेता ही बनेगा सुप्रीम लीडर? (Iran Supreme Leader)

सीएनएन को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी साफ किया कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि ईरान का अगला नेता धार्मिक होगा या नहीं। उनके लिए सबसे अहम बात यह है कि वह नेता निष्पक्ष हो और क्षेत्र में शांति बनाए रखे।

ट्रंप ने कहा कि वह कई धार्मिक नेताओं के साथ काम कर चुके हैं और उनमें से कई बेहद प्रभावशाली रहे हैं। इसलिए ईरान में अगर कोई धार्मिक व्यक्ति सत्ता संभालता है तो अमेरिका को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी।

इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा,

”मेरे लिए ये जरूरी है कि ईरान का सुप्रीम लीडर निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से काम करने वाला हो। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह व्यक्ति कौन है। मुझे किसी भी धार्मिक नेताओं से कोई दिक्कत नहीं है। मैं कई धार्मिक नेताओं के साथ काम करता हूं वे सभी बहुत शानदार काम करते हैं। वो नेता ऐसा होना चाहिए, जो मध्य-पूर्व के दूसरे देशों के साथ भी अच्छा बर्ताव करे…क्योंकि वे सभी हमारे साझेदार हैं। मैं ये भी नहीं कर रहा कि वहां लोकतंत्र ही होना चाहिए लेकिन एक ऐसा नेता होना चाहिए, जो निष्पक्ष हो, अच्छा काम करे और अमेरिका-इजराइल के साथ हमेशा अच्छा व्यवहार करे।

अमेरिका क्यों चाहता है नई भूमिका? (US Role in Iran Leadership)

ट्रंप ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका को ईरान के अगले नेता के चयन में भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे कुछ अन्य देशों में राजनीतिक बदलाव के दौरान अमेरिका ने हस्तक्षेप किया था, वैसे ही ईरान में भी स्थिर नेतृत्व जरूरी है। उनका कहना है कि अमेरिका चाहता है कि ईरान का नया नेतृत्व ऐसा हो जो अमेरिका, इजरायल और मध्य-पूर्व के दूसरे देशों के साथ टकराव की जगह सहयोग का रास्ता चुने।

युद्ध के बीच चल रही है नेतृत्व की तलाश (US-Israel Strike on Iran)

खामेनेई की मौत ऐसे समय हुई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया था। 28 फरवरी को हुए इस संयुक्त हमले में ईरान के कई बड़े सैन्य और राजनीतिक नेता भी मारे गए थे। इसके बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ठिकानों और इजरायली ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इस बीच अमेरिका ने दावा किया कि उसकी सैन्य कार्रवाई में ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा है।

मोजतबा खामेनेई के नाम पर क्या है सच्चाई? (Iran Leadership Succession)

खामेनेई की मौत के बाद कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को उत्तराधिकारी बना दिया गया है। हालांकि ईरान के अधिकारियों ने इन खबरों को खारिज कर दिया है।

भारत में मौजूद ईरान के प्रतिनिधि अयातुल्ला डॉ. अब्दुल मजीद हकीमेलाही ने साफ कहा कि अभी तक किसी नए सुप्रीम लीडर का चुनाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि मोजतबा जरूर संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं, लेकिन केवल इसलिए नहीं कि वह खामेनेई के बेटे हैं।

कैसे चुना जाता है ईरान का सुप्रीम लीडर? (Iran Supreme Leader)

ईरान में सर्वोच्च नेता का चुनाव सीधे जनता नहीं करती। इसके लिए 88 सदस्यों की एक विशेष संस्था होती है, जिसे “असेम्बली ऑफ एक्सपर्ट्स” कहा जाता है। यही संस्था नए सुप्रीम लीडर का चयन करती है।

फिलहाल ईरान में युद्ध जैसे हालात होने की वजह से इस प्रक्रिया में देरी हो रही है। विशेषज्ञों की यह परिषद अभी एक साथ बैठकर अंतिम फैसला नहीं कर पाई है। जैसे ही हालात सामान्य होंगे, नए नेता के नाम का ऐलान किया जा सकता है।

खामेनेई और भारत का दिलचस्प रिश्ता

इस बीच ईरान के अधिकारियों ने खामेनेई से जुड़ी एक खास बात भी साझा की है। बताया गया कि अली खामेनेई भारत के इतिहास में खास दिलचस्पी रखते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि अगर किसी को ईरान के इतिहास को गहराई से समझना है तो उसे भारत के इतिहास का अध्ययन जरूर करना चाहिए।

दुनिया की नजर अब तेहरान पर

ईरान का सुप्रीम लीडर देश की राजनीति और सेना दोनों पर सबसे बड़ा नियंत्रण रखता है। इसलिए यह पद केवल धार्मिक या राजनीतिक नेतृत्व का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की दिशा तय करने वाला पद है।

यही वजह है कि खामेनेई के बाद अब पूरी दुनिया की नजर तेहरान पर टिकी हुई है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि नया नेता कौन होगा, बल्कि यह भी है कि क्या ईरान की नीतियां बदलेंगी या फिर वही पुराना टकराव जारी रहेगा।

FAQs Iran Supreme Leader

1. ईरान का सुप्रीम लीडर कौन होता है?

ईरान का सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है। वही सेना, न्यायपालिका और सरकार की प्रमुख नीतियों पर अंतिम फैसला लेता है।

2. ईरान में सुप्रीम लीडर कैसे चुना जाता है?

ईरान में 88 सदस्यों वाली संस्था असेम्बली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है। यह परिषद धार्मिक विद्वानों और नेताओं से मिलकर बनी होती है।

3. अली खामेनेई के बाद अगला सुप्रीम लीडर कौन हो सकता है?

अभी आधिकारिक तौर पर किसी नाम की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मोजतबा खामेनेई समेत कई धार्मिक नेताओं के नाम संभावित उम्मीदवारों में बताए जाते हैं।

4. मोजतबा खामेनेई कौन हैं?

मोजतबा खामेनेई, अली खामेनेई के बेटे हैं और ईरान की धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था में उनका प्रभाव माना जाता है।

5. क्या ईरान में सुप्रीम लीडर जनता चुनती है?

नहीं, ईरान में सुप्रीम लीडर का चुनाव सीधे जनता नहीं करती। यह फैसला असेम्बली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा लिया जाता है।

6. क्या ईरान में सुप्रीम लीडर जीवनभर के लिए होता है?

हाँ, आम तौर पर सुप्रीम लीडर का कार्यकाल जीवनभर का होता है, जब तक कि वह इस्तीफा न दें या स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ना न पड़े।

7. ईरान के पहले सुप्रीम लीडर कौन थे?

ईरान के पहले सुप्रीम लीडर आयतुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी थे, जिन्होंने 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यह पद संभाला था।

8. क्या अमेरिका ईरान के नए नेता के चुनाव में भूमिका निभा सकता है?

आधिकारिक तौर पर ईरान के नेतृत्व का चुनाव उसकी अपनी संस्थाएं करती हैं, लेकिन वैश्विक राजनीति में अमेरिका के बयान और दबाव का असर पड़ सकता है।

9. असेम्बली ऑफ एक्सपर्ट्स क्या है?

यह ईरान की एक संवैधानिक संस्था है, जिसके सदस्य धार्मिक विद्वान होते हैं और उनका मुख्य काम सुप्रीम लीडर का चुनाव करना होता है।

10. ईरान का सुप्रीम लीडर कितना शक्तिशाली होता है?

ईरान में सुप्रीम लीडर राष्ट्रपति से भी ज्यादा शक्तिशाली होता है और सेना, विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े अहम फैसलों पर उसका नियंत्रण होता है।



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Gold Rate Today : जंग के बीच भारत में सस्ता हो रहा सोना, 8000 गिरे दाम, अब कितना है 18K,22K गोल्ड का नया रेट


Business

oi-Pallavi Kumari

Gold Rate Today 07 March 2026: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध संकट के बीच भारत में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे सैन्य टकराव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन भारतीय बाजार में पिछले तीन दिनों से सोना लगातार सस्ता हो रहा है। बीते तीन दिनों में सोने के दाम ₹8,720 तक गिर चुके हैं, जबकि चांदी की कीमत में भी बड़ी कमी दर्ज की गई है।

7 मार्च 2026 की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर ₹1,61,270 प्रति 10 ग्राम रह गई है। वहीं मुंबई में इसका भाव ₹1,61,120 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। एक दिन पहले यानी 6 मार्च को दिल्ली के सराफा बाजार में सोना लगभग ₹1,100 टूटकर ₹1,64,100 प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। बाजार के जानकारों के मुताबिक लगातार दो दिन तक हुई प्रॉफिट बुकिंग के कारण कीमतों में यह गिरावट आई है।

Gold Rate Today 07 March 2026

Gold Rate Today In India: 07 मार्च 2026: देश के 20 बड़े शहरों में सोने के ताजा भाव

शहर 24 कैरेट (₹/10 ग्राम) 22 कैरेट (₹/10 ग्राम) 18 कैरेट (₹/10 ग्राम)
दिल्ली 1,61,270 1,47,840 1,15,780
मुंबई 1,61,120 1,47,690 1,15,660
अहमदाबाद 1,61,170 1,47,740 1,15,700
चेन्नई 1,61,120 1,47,690 1,15,660
कोलकाता 1,61,120 1,47,690 1,15,660
हैदराबाद 1,61,120 1,47,690 1,15,660
जयपुर 1,61,270 1,47,840 1,15,780
भोपाल 1,61,170 1,47,740 1,15,700
लखनऊ 1,61,270 1,47,840 1,15,780
चंडीगढ़ 1,61,270 1,47,840 1,15,780
पुणे 1,61,120 1,47,690 1,15,660
बेंगलुरु 1,61,120 1,47,690 1,15,660
सूरत 1,61,170 1,47,740 1,15,700
नागपुर 1,61,170 1,47,740 1,15,700
पटना 1,61,270 1,47,840 1,15,780
इंदौर 1,61,170 1,47,740 1,15,700
कोच्चि 1,61,120 1,47,690 1,15,660
भुवनेश्वर 1,61,120 1,47,690 1,15,660
अमृतसर 1,61,270 1,47,840 1,15,780
देहरादून 1,61,270 1,47,840 1,15,780

Gold Silver Rate Today: चांदी 26,000 सस्ती, 10 ग्राम सोना 7000 लुढ़का, खरीदारी से पहले देख लें लेटेस्ट रेट

🔶Silver Rate In India 07 March 2026: चांदी का क्या है हाल (Chandi ka aaj ka Bhav)

सोने के साथ-साथ चांदी भी सस्ती हुई है। 7 मार्च की सुबह चांदी का भाव ₹2,84,900 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में इसकी कीमत ₹600 गिरकर ₹2,71,700 प्रति किलोग्राम रह गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालांकि चांदी 1.4% बढ़कर 83.40 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

🔶जंग का असर लेकिन बाजार में गिरावट (Gold Market Update)

हालांकि मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार में सुरक्षित निवेश यानी गोल्ड की मांग बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 14.70 डॉलर (0.29%) बढ़कर 5,095.81 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया। इसके बावजूद घरेलू बाजार में मुनाफावसूली और डॉलर के उतार-चढ़ाव के कारण कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।

🔶 सोना-चांदी के दाम कैसे तय होते हैं? (Gold Price Determination)

भारत में सोने और चांदी के दाम कई फैक्टर्स पर निर्भर करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, जीएसटी और स्थानीय मांग-आपूर्ति का इसमें बड़ा रोल होता है। इसके अलावा लंदन बुलियन मार्केट के ट्रेंड और भारतीय सराफा बाजार की ट्रेडिंग भी कीमतों को प्रभावित करती है। त्योहारों या शादी के सीजन में मांग बढ़ने से कीमतें ऊपर जा सकती हैं, जबकि प्रॉफिट बुकिंग के समय गिरावट देखने को मिलती है।

(नोट: सोना-चांदी खरीदने से पहले या निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। ये खबर सिर्फ जानकारी देने के लिए लिखी गई है)



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Esmail Qaani Death News: खामेनेई के धोखेबाज को ईरान ने दी मौत की सजा, मोसाद के साथ मिलकर रची थी साजिश!


International

oi-Smita Mugdha

Esmail Qaani Death News: ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और उनके सहयोगियों के मारे जाने के बाद से अटकलों का दौर जारी है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के ही कुछ लोगों ने मोसाद के साथ मिलकर साजिश रची थी। अब यूएई की एक अखबार में दावा किया गया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की स्पेशल यूनिट कुद्स फोर्स के प्रमुख इस्माइल कानी को जासूसी के आरोप में मार दिया है। अभी तक ईरान की सरकार या आधिकारिक एजेंसियों की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस्माइल कानी पर इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम करने का शक था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को धोखा दिया। खामनेई की लोकेशन लीक करने से लेकर कई और संवेदनशील जानकारी मोसाद को देने का दावा किया गया है। इसी वजह से उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में मौत की सजा दी गई है।

Esmail Qaani Death News

Esmail Qaani को दी गई मौत की सजा

– बताया जा रहा है कि हाल ही में ईरान में हुए एक बड़े हमले के बाद कानी पर शक गहराया था। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम लीडर के परिसर पर हुए हमले से कुछ मिनट पहले ही कानी वहां से निकल गए थे।

– इस हमले में कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे और खामेनेई का शव मलबे के नीचे से बरामद होने का दावा किया गया था। इसी घटना के बाद उन पर संदेह और बढ़ गया।

– हालांकि, इन सभी दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। UAE के अखबार The National ने भी बिना आधिकारिक स्रोतों के हवाले से यह खबर प्रकाशित की हैख दावा किया गया है कि कानी को मोसाद से जुड़े होने के शक में मार दिया गया है।

Esmail Qaani पहले भी हो चुके हैं गुमशुदा

इससे पहले भी कई बार इस्माइल कानी के मारे जाने या गायब होने की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2024 में बेरुत में इजरायल के हमले के दौरान भी यह अफवाह फैली थी कि वह हिजबुल्लाह के संभावित उत्तराधिकारी हाशिम सफीद्दीन के साथ मारे गए हैं। हालांकि कुछ दिनों बाद वह सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए थे।

Iran Isreale Conflict: ईरान और इजरायल के बीच जंग जारी

इस्माइल कानी ने जनवरी 2020 में कुद्स फोर्स की कमान संभाली थी, जब अमेरिका ने उनके पूर्व प्रमुख कासिम सुलेमानी को बगदाद एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमले में मार गिराया था। कुद्स फोर्स ईरान की वह विशेष इकाई है जो विदेशों में ईरान समर्थित संगठनों और प्रॉक्सी नेटवर्क को समर्थन देने के लिए जानी जाती है। फिलहाल इस खबर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है, लेकिन ईरान की आधिकारिक पुष्टि आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।



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