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फ्लिपकार्ट ने 300 कर्मचारियों की छंटनी की; वार्षिक समीक्षा के बाद लिया बड़ा फैसला, जानिए कारण


ई-कॉमर्स प्रमुख फ्लिपकार्ट ने अपनी वार्षिक प्रदर्शन समीक्षा के बाद लगभग 250 से 300 कर्मचारियों की छंटनी की है। यह जानकारी मामले से परिचित सूत्रों ने शुक्रवार को दी। नौकरी में यह कटौती कई विभागों और कर्मचारी स्तरों पर की गई है। हालांकि वॉलमार्ट की फंडिंग वाली यह कंपनी अपनी प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) से पहले सीनियर स्तर पर नियुक्तियां जारी रखे हुए है।

फ्लिपकार्ट ने एक बयान में कहा कि नियमित रूप से अपने काम-काज की समीक्षा करती है। कंपनी ने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों का एक छोटा प्रतिशत संगठन से बाहर हो सकता है। प्रभावित कर्मचारियों को जरूरी सहायता प्रदान की जा रही है। हालांकि, कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों की संख्या के बारे में नहीं बताया है। लेकिन सूत्रों के हवाले से यहह संख्या 250 से 300 के बीच बताई जा रही है। यह छंटनी ऐसे समय में हुई है जब कंपनी अपने समूह की होल्डिंग संरचना को सरल बनाने के लिए पुनर्गठन कर रही है। भारतीय नियामक आवश्यकताओं के अनुरूप आठ सिंगापुर-आधारित संस्थाओं का फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड में विलय किया जा चुका है। यह कदम कंपनी के संभावित घरेलू सूचीकरण की योजनाओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

कंपनी में आईपीओ से पहले क्या तैयारी चल रही है?

दिसंबर 2025 में, कंपनी को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से अपनी कानूनी अधिवास सिंगापुर से भारत स्थानांतरित करने की मंजूरी मिली थी। यह कदम संभावित घरेलू सूचीकरण की उसकी योजनाओं में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पुनर्गठन का उद्देश्य समूह की होल्डिंग संरचना को सरल बनाना है। इसमें फैशन, स्वास्थ्य और लॉजिस्टिक्स में इसके विभिन्न कारोबार शामिल हैं। भारतीय नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप आठ सिंगापुर-आधारित संस्थाओं का फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड में विलय किया गया है।

फ्लिपकार्ट ने पिछले कुछ महीनों में कई प्रमुख नियुक्तियां की हैं। इनमें सोमनाथ दास को आपूर्ति शृंखला का उपाध्यक्ष बनाया गया है। दिग्विजय मिश्रा को कॉरपोरेट संचार का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। विपिन कपूरिया व्यवसाय वित्त के उपाध्यक्ष बने हैं। योगिता शानभाग एचआर की वाइस प्रेसिडेंट हैं, जबकि अमर हुसैन को किराना और मिनट (त्वरित वाणिज्य) व्यवसायों के लिए आपूर्ति शृंखला का वाइस प्रेसिडेंट बनाया है।

कैसा है कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन?

फ्लिपकार्ट इंडिया ने वित्त वर्ष 2024-25 में 5,189 करोड़ रुपये का व्यापक समेकित नुकसान दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष के 4,248.3 करोड़ रुपये के नुकसान से अधिक है। हालांकि, कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 में परिचालन से समेकित राजस्व में 17.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की, जो 82,787.3 करोड़ रुपये रहा। यह राजस्व वित्त वर्ष 2023-24 के 70,541.9 करोड़ रुपये से अधिक है। कुल खर्च 17.4 फीसदी बढ़कर 88,121.4 करोड़ रुपये हो गया, जिसका मुख्य कारण स्टॉक-इन-ट्रेड खरीद थी। फ्लिपकार्ट समूह की कंपनियों में फ्लिपकार्ट, मिंत्रा, फ्लिपकार्ट होलसेल, क्लियरट्रिप और सुपर.मनी शामिल हैं।





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India-US Deal: ‘भारत से व्यापार में चीन वाली गलती नहीं दोहराएगा अमेरिका’, क्यों बोले अमेरिकी उप विदेश मंत्री


अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने नई दिल्ली में आयोजित रायसीना संवाद में अमेरिका फर्स्ट नीति पर विस्तार से बात की। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक संबंधों में चीन के साथ की गई पिछली गलतियों को नहीं दोहराएगा। यह नीति अमेरिकी आर्थिक हितों को घरेलू और विदेश नीति दोनों में प्राथमिकता देती है।

लैंडौ ने फरवरी 2026 के अमेरिका-भारत अंतरिम शुल्क ढांचे का उल्लेख किया, जिसके तहत 50 फीसदी शुल्क को घटाकर 18 फीसदी किया गया था। उन्होंने संकेत दिया कि यह समझौता अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए ‘अमेरिका प्रथम’ दृष्टिकोण से बातचीत के बाद हुआ था। अमेरिका ने चीन को विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने का समर्थन करके सबक सीखा है, यह मानते हुए कि इससे अमेरिकी कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, चीन ने बाद में कई वाणिज्यिक मामलों में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया।

लैंडौ ने कहा, “भारत को समझना चाहिए, हम चीन के साथ हुई 20 साल पहले की गलतियां नहीं दोहराएंगे।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘अमेरिका प्रथम’ का अर्थ अलगाववादी दृष्टिकोण नहीं है, बल्कि यह अन्य देशों के साथ सहयोग के माध्यम से उद्देश्यों को प्राप्त करने में विश्वास रखता है। अमेरिका भारत के उदय को महत्वपूर्ण मानता है और पारस्परिक लाभ पर जोर देता है।

चीन से सीखे गए सबक पर क्या बोले अमेरिकी उप विदेश मंत्री?

अमेरिका ने चीन को विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने का समर्थन किया था। उस समय अमेरिका का मानना था कि इससे उसे विशाल बाजार और कुशल आपूर्ति शृंखलाओं तक पहुंच मिलेगी। हालांकि, चीन ने बाद में कई वाणिज्यिक क्षेत्रों में अमेरिका को चुनौती दी और उसे पीछे छोड़ दिया। इसी अनुभव के आधार पर अमेरिका अब भारत के साथ व्यापार में अधिक सतर्कता बरत रहा है। वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके लोगों के लिए व्यापारिक संबंध निष्पक्ष हों।

लैंडौ की नजर में अमेरिका फर्स्ट का क्या मतलब?

लैंडौ ने स्पष्ट किया कि ‘अमेरिका प्रथम’ का मतलब अमेरिका अकेला नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्देश्यों को प्राप्त करने का एक तरीका अन्य देशों के साथ सहयोग करना है। ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका फिर से महान बने, और वे भारत के प्रधानमंत्री या अन्य विश्व नेताओं से भी यही उम्मीद करते हैं कि वे अपने देशों को महान बनाना चाहेंगे। यह नीति पारस्परिक राष्ट्रवाद का एक रूप है, जो परोपकारिता के बजाय पारस्परिक लाभ पर केंद्रित है।





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IND vs NZ: इतिहास रचने के करीब भारत, न्यूजीलैंड से होगा फाइनल मुकाबला, टीम से दो खिलाड़ी की छुट्टी तय!


Cricket

oi-Amit Kumar

IND vs NZ T20 World Cup 2026: वानखेड़े के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ 7 रनों की रोमांचक जीत के साथ ही टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में प्रवेश कर चुकी है। 8 मार्च (रविवार) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने वाले इस महामुकाबले में भारत का सामना न्यूजीलैंड से होगा। अब भारतीय फैंस की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत फाइनल जैसे बड़े मंच के लिए अपनी प्लेइंग-11 में रणनीतिक बदलाव करेगा।

भारत के पास इतिहास रचने का मौका (IND vs NZ T20 World Cup 2026)

इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भारत ने 253 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया था। जैकब बेथेल की तूफानी बल्लेबाजी के बावजूद भारतीय गेंदबाजों ने संयम बनाए रखा और जीत सुनिश्चित की। अब भारत के पास इतिहास रचने का मौका है। यदि टीम इंडिया रविवार को जीतती है, तो वह लगातार दो टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन जाएगी।

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टीम में हो सकते हैं बदलाव

हालांकि, कीवी टीम (न्यूजीलैंड) इस समय प्रचंड फॉर्म में है। उन्होंने पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 65 रनों से हराकर फाइनल में जगह बनाई है, जहां फिन एलेन ने टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे तेज शतक जड़ा है। अहमदाबाद की बड़ी बाउंड्री और फाइनल के दबाव को देखते हुए टीम मैनेजमेंट दो अहम बदलावों पर विचार कर सकता है।

अभिषेक शर्मा की जगह रिंकू सिंह

सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा का बल्ला इस टूर्नामेंट में खामोश रहा है। सेमीफाइनल में भी वे मात्र 9 रन बनाकर आउट हो गए। क्रिकेट दिग्गजों का मानना है कि फाइनल जैसे बड़े मैच में मध्यक्रम को मजबूती देने के लिए रिंकू सिंह को शामिल करना मास्टरस्ट्रोक हो सकता है। रिंकू न केवल दबाव में पारी को संभाल सकते हैं, बल्कि अंत में बड़े शॉट्स खेलकर फिनिशर की भूमिका बखूबी निभाते हैं। ऐसे में संजू सैमसन और ईशान किशन की जोड़ी से ही ओपनिंग कराई जा सकती है।

वरुण चक्रवर्ती की जगह कुलदीप यादव

वरुण चक्रवर्ती ने अब तक अच्छा नहीं प्रदर्शन किया है। अहमदाबाद की काली मिट्टी वाली पिच पर ‘चाइनामैन’ गेंदबाज कुलदीप यादव अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। न्यूजीलैंड के पास फिन एलेन और टिम सीफर्ट जैसे आक्रामक बल्लेबाज हैं, जिन्हें रोकने के लिए कुलदीप की फिरकी और विकेट चटकाने की क्षमता भारत के लिए ‘एक्स-फैक्टर’ बन सकती है। कुलदीप का अनुभव बड़े मैचों में अक्सर टीम के काम आता है।

खबर AI इनपुट के साथ



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चारधाम यात्रा 2026- ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू: घर बैठे कर सकते हैं आवेदन, 9 स्टेप में जानिए पूरा प्रोसेस; 19 अप्रैल से शुरू होगी यात्रा – Uttarakhand News


केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे।

उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा के लिए शुक्रवार (6 मार्च) सुबह 7 बजे से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। पर्यटन विभाग ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वेबसाइट और मोबाइल एप दोनों माध्यमों से रजिस्ट्रेशन पोर्टल खोल दिया है।

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पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, श्रद्धालु 4 तरीकों से अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं-

  • आधिकारिक वेबसाइट: registrationandtouristcare.uk.gov.in
  • मोबाइल एप: ‘Tourist Care Uttarakhand’ एप के माध्यम से।
  • आवश्यक दस्तावेज: भारतीय श्रद्धालुओं के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है, जबकि विदेशी श्रद्धालु अपनी ई-मेल आईडी के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।
  • ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन: 17 अप्रैल से ऋषिकेश (ट्रांजिट कैंप), हरिद्वार (ऋषिकुल मैदान) और विकासनगर (देहरादून) में काउंटर शुरू होंगे।

सरकार ने यात्रियों की सुविधा और किसी भी समस्या के समाधान के लिए 24 घंटे सक्रिय टोल-फ्री नंबर जारी किया है

हेल्पलाइन नंबर: 0135-1364

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9 स्टेप में जानिए पूरा प्रोसेस

1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट खोलें- चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के लिए मोबाइल या कंप्यूटर में ब्राउजर खोलें और उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वेबसाइट: https://registrationandtouristcare.uk.gov.in

2. रजिस्टर/साइन-अप का विकल्प चुनें- वेबसाइट खुलने के बाद होमपेज पर Register / Sign Up का विकल्प दिखाई देगा। नए यूजर को पहले अपना अकाउंट बनाना होगा।

3. मोबाइल नंबर और बेसिक जानकारी भरें- रजिस्ट्रेशन फॉर्म में अपना नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और राज्य जैसी जरूरी जानकारी भरनी होती है।

4. OTP से मोबाइल नंबर वेरिफाई करें- फॉर्म भरने के बाद आपके मोबाइल नंबर पर OTP आएगा। OTP दर्ज करते ही आपका अकाउंट वेरिफाई हो जाएगा।

5. लॉग-इन कर डैशबोर्ड खोलें- अकाउंट बनने के बाद उसी वेबसाइट पर मोबाइल नंबर और पासवर्ड से लॉग-इन करें। लॉग-इन करते ही आपका डैशबोर्ड खुल जाएगा।

6. ‘Add / Register for Yatra’ पर क्लिक करें- डैशबोर्ड में Add / Register for Yatra का विकल्प दिखाई देगा। इस पर क्लिक करके यात्रा पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करें।

7. यात्रा की डिटेल भरें- अब जिस धाम में जाना है, उसका चयन करें और यात्रा की तारीख, यात्रियों की संख्या और अन्य जरूरी जानकारी भरें। एक अकाउंट से परिवार या ग्रुप के अन्य सदस्यों को भी जोड़ा जा सकता है।

8. पहचान पत्र अपलोड करें- हर यात्री के लिए पहचान पत्र अपलोड करना जरूरी होता है। इसके लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज लगाए जा सकते हैं।

9. रजिस्ट्रेशन सबमिट कर पास डाउनलोड करें- सभी जानकारी भरने के बाद फॉर्म सबमिट करें। इसके बाद आपकी चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन स्लिप या QR कोड पास जनरेट हो जाएगा, जिसे डाउनलोड कर यात्रा के दौरान साथ रखना जरूरी है।

22 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट

केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह तिथि महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) के अवसर पर ऊखीमठ में पारंपरिक पंचांग गणना के बाद घोषित की गई थी।

इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, जबकि इस बार 22 अप्रैल को खुलेंगे। यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।

23 अक्टूबर 2025 को कपाट बंद होने के बाद धाम की तस्वीर।

23 अक्टूबर 2025 को कपाट बंद होने के बाद धाम की तस्वीर।

भाई दूज पर बंद हुए थे धाम के कपाट

इससे पहले 23 अक्टूबर 2025 को भाई दूज के अवसर पर केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। कपाट बंद होने के बाद बाबा की डोली पैदल मार्ग से रवाना होकर लगभग 55 किलोमीटर की यात्रा तय करते हुए 25 अक्टूबर को उखीमठ पहुंची थी, जहां ओंकारेश्वर मंदिर में शीतकालीन प्रवास शुरू हुआ।

मंदिर समिति के अनुसार 2025 की यात्रा के दौरान 17,68,795 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। 2013 की आपदा के बाद यह दूसरा अवसर था जब इतनी बड़ी संख्या में भक्त धाम पहुंचे।

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23 अप्रैल को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट

बद्रीनाथ धाम के कपाट 2026 में 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे। बसंत पंचमी के मौके पर नरेंद्रनगर राजदरबार में पंचांग गणना के बाद यह तिथि तय की गई थी। चमोली में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट इस बार पिछले साल के मुकाबले 11 दिन पहले खुलेंगे।

वहीं उत्तरकाशी के गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विधि-विधान से भक्तों के लिए खोले जाएंगे।

2025 में कब बंद हुए थे बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट

2025 में उत्तरकाशी में स्थित गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को विधि-विधान के साथ बंद किए गए। इसके अगले दिन ही दिन 23 अक्टूबर को यमुनोत्री धाम के कपाट विधि विधान से बंद कर दिए गए थे इसके बाद यात्रियों के लिए इन दोनों धामों में नियमित दर्शन बंद हो गए और शीतकालीन पूजा की व्यवस्थाएं शुरू कर दी गईं।

वहीं चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। फिलहाल बद्रीनाथ की शीतकालीन पूजा जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में चल रही है।

पिछले पांच सालों में श्रद्धालुओं के आंकड़े

साल संख्या यात्रा प्रभाव
2021 1,97,997 कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण संख्या कम रही।
2022 17,63,549 यात्रा पूरी तरह खुलने पर भारी भीड़ उमड़ी।
2023 18,35,000 श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया।
2024 14,35,341 मानसून और मौसम के प्रभाव से संख्या में उतार-चढ़ाव रहा।
2025 16,60,224 2025 में भी भक्तों में भारी उत्साह देखा गया।

बद्रीनाथ धाम में अप्रैल 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य

बद्रीनाथ धाम में पीएम नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत मास्टर प्लान पूरा होने के बाद धाम साफ और परिसर बड़ा दिख रहा है। ड्रीम प्रोजेक्ट का उद्देश्य अगले 50 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बद्रीनाथ को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है।

बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान का पूरा नक्शा गुजरात की कंपनी आईएनआई ने डिजाइन किया है।

बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान का पूरा नक्शा गुजरात की कंपनी आईएनआई ने डिजाइन किया है।

करीब 424 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को अप्रैल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अगली चारधाम यात्रा से पहले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं मिल सकें। यह मास्टर प्लान 85 एकड़ क्षेत्र में तीन चरणों में लागू किया जा रहा है।

फेज-1 में शेषनेत्र और बद्रीश झील का सौंदर्याकरण, अलकनंदा रिवर फ्रंट और वन-वे लूप रोड का काम अंतिम चरण में है। फेज-2 में मंदिर परिसर का विस्तार और अस्पताल का निर्माण शामिल है।

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बद्रीनाथ-केदारनाथ में मोबाइल बैन करने की तैयारी: BKTC अध्यक्ष बोले- ब्लॉगिंग करने वालों पर कार्रवाई होगी; गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लग सकती है

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बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले श्रद्धालुओं के लिए नए नियम बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) इस मुद्दे पर जल्द बैठक करेगी। (पढें पूरी खबर)



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Forex: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर, पश्चिम एशिया तनाव के बीच 4.885 अरब डॉलर की वृद्धि


वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 27 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में 4.885 अरब डॉलर की प्रभावशाली वृद्धि के साथ अब तक के उच्चतम स्तर 728.494 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। यह अभूतपूर्व वृद्धि देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के प्रति निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

क्या कहते हैं आरबीआई के आंकड़े?

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख घटकों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।


  • स्वर्ण भंडार: गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.141 अरब डॉलर बढ़कर 131.630 अरब डॉलर हो गया है। यह वृद्धि सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता को इंगित करती है।

  • विदेशी मुद्रा अस्तियां: विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक, फॉरेन करेंसी एसेट्स, 56.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 573.125 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। एफसीए में डॉलर के साथ-साथ जापानी येन, यूरो और ब्रिटिश पाउंड जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं का भंडार शामिल होता है, जिनका मूल्य डॉलर में मापा जाता है।

  • विशेष आहरण अधिकार: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से जारी विशेष आहरण अधिकारका मूल्य 2.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.866 अरब डॉलर हो गया है।

  • रिजर्व पोजीशन: भारत की आईएमएफ में रिजर्व पोजीशन भी 15.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.873 अरब डॉलर हो गई है।

यह ध्यान देने योग्य है कि इससे पहले विदेशी मुद्रा भंडार का उच्चतम स्तर फरवरी के मध्य में 725.727 अरब डॉलर दर्ज किया गया था।

विदेशी मुद्रा भंडार अर्थव्यवस्था के लिए कितना महत्वपूर्ण?

किसी भी देश के लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यह न केवल देश की वित्तीय सेहत को दर्शाता है, बल्कि मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।


  • विनिमय दर स्थिरता: डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ने की स्थिति में, केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करके डॉलर की बिक्री कर सकता है, जिससे रुपये को गिरने से रोका जा सके और विनिमय दर में स्थिरता लाई जा सके।

  • आर्थिक मजबूती: विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि यह भी संकेत देती है कि देश में डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है, जो अर्थव्यवस्था को बल प्रदान करती है।

  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आसानी: बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार से देश के लिए विदेशों में व्यापार करना और वित्तीय लेन-देन करना अधिक सुगम हो जाता है।

अनिश्चितताओं के बीच स्थिरता, अब आगे क्या?

मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में आई यह रिकॉर्ड वृद्धि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता का प्रमाण है। यह दर्शाता है कि निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा कर रहे हैं और देश की वित्तीय नीतियां प्रभावी साबित हो रही हैं। यह भंडार देश को भविष्य में किसी भी अप्रत्याशित आर्थिक झटके से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में रखता है।



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Surya Nakshatra Parivartan 2026: सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन, इन 6 राशियों का शुरू हुआ अच्छा वक्त, होगी तरक्की


Astrology

oi-Ankur Sharma

Surya Nakshatra Parivartan 2026: सूर्य ऊर्जा, प्रगति और शौर्य का मानक है, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य किसी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसका प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक मार्च 2026 में सूर्य देव तीन बार नक्षत्र बदलेंगे, पहला परिवर्तन उनका 5 मार्च को हुआ है तो वहीं दूसरी बार 18 मार्च को उनका नक्षत्र बदलेगा तो वहीं तीसरी बार 31 मार्च को ऐसा होगा।

इस बार का नक्षत्र परिवर्तन बहुत सारी राशियों के लिए सुखद संदेश लेकर आया है तो वहीं कुछ राशियों के लिए ये अप्रत्याशित रूप से काफी लकी साबित होने वाला है। मालूम हो कि जब इस तरह का परिवर्तन होता है उसका असर 15 दिनों तक रहता है।

Surya Nakshatra Parivartan 2026

मालूम हो कि 5 मार्च को सूर्य ने पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश किया है, जो कि काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक ये परिवर्तन करियर, लीडरशिप, सरकारी काम और बिजनेस के लिए काफी अच्छा रहने वाला है, 6 राशियों के लिए ये काफी लकी साबित होगा, ये राशियां हैं- मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और मकर।

Surya Nakshatra Parivartan 2026 Effect:आत्मविश्वास में वृद्धि होगी

  • मेष राशि: करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
  • मिथुन राशि: मिथुन राशि के लोगों के लिए यह समय नई योजनाएं शुरू करने का हो सकता है। नौकरी और व्यापार में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। धन लाभ होगा।
  • सिंह राशि: सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। समाज में मान-सम्मान मिल सकता है और रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं।

Surya Nakshatra Parivartan 2026 Prabhav:करियर में सफलता मिलेगी

  • तुला राशि: तुला राशि के जातकों के लिए यह समय रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा। परिवार और मित्रों के साथ संबंध मजबूत होंगे। करियर में सफलता मिलेगी।
  • धनु राशि: यह समय भाग्यशाली रहेगा। नौकरी के नए अवसर मिलने के साथ परिवार में शुभ कार्य होंगे। समाज में सम्मान मिलेगी।
  • मकर राशि: नौकरी में पदोन्नति या सैलरी बढ़ने की संभावना है। नए ज्ञान और अनुभव प्राप्त हो सकते हैं।

Surya Nakshatra Parivartan: पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष के अनुसार पूर्व भाद्रपद नक्षत्र रहस्यमयी और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है। जब सूर्य इस नक्षत्र में आता है, तो व्यक्ति के भीतर आत्मचिंतन, परिवर्तन और नए विचारों की ऊर्जा बढ़ जाती है।

यह पढ़ें: 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन? किसे मिलेगी सफलता?

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी चीज को अमल लाने के लिए किसी ज्योतिषी और किसी पंडित से अवश्य बातें करें। हमारा मकसद किसी भी तरह का अंधविश्वास फैलाना नहीं है।



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ईरान युद्ध भारतीय GDP के लिए चुनौती कैसे?: क्रूड-गैस के दाम बढ़ने से कंपनियों की कमाई पर असर; यहां जानिए सबकुछ


पश्चिम एशिया में युद्ध भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट अवधि में बड़ी चुनौती है, लेकिन इससे लंबे समय में वृद्धि प्रभावित नहीं होगी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य नागेश कुमार ने कहा, मौजूदा हालात में तेल की कीमतों में वृद्धि, निर्यात में बाधा और धनप्रेषण पर पड़ने वाला असर जीडीपी के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में वृद्धि दर को उच्च पथ पर ले जाने के लिए राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों को समन्वित तरीके से काम करने की जरूरत है।

एमपीसी सदस्य ने कहा, ईरान हमलों के साथ निकट भविष्य में संघर्ष तेज होने और क्रूड में उछाल की आशंका है। हालांकि, इस क्षेत्र में दुनिया के उच्च दांव को देखते हुए संकट का जल्द ही समाधान हो जाएगा।

उधर, कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज ने कहा, अगर ईरान युद्ध कुछ सप्ताह से अधिक समय तक चलता रहा, तो भारत में कॉरपोरेट जगत की कमाई प्रभावित हो सकती है।

बाजार पर दबाव डाल सकती है तेल-गैस की कीमतें

युद्ध ने पहले से ही निवेशकों की धारणा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। विदेशी निवेशक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को लेकर संवेदनशील बने हुए हैं। तेल-गैस की ऊंची कीमतें अर्थव्यवस्था एवं बाजार पर दबाव डाल सकती हैं। माल ढुलाई दरें 15-20 फीसदी बढ़ गई हैं। खाड़ी देशों को जाने वाली खेपों के लिए युद्ध-जोखिम अधिभार और बीमा प्रीमियम में काफी बढ़ोतरी हुई है। समुद्री ईंधन की कीमतें भी 520 डॉलर से बढ़कर 580 डॉलर प्रति टन पहुंच गई हैं।

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होर्मुज मार्ग में जोखिम के बावजूद 63 डॉलर से अधिक नहीं पहुंचेगी ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत

होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर जोखिम के बावजूद 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहने का अनुमान नहीं है। फिच रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को रिपोर्ट में कहा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की अतिरिक्त आपूर्ति से कीमतों में तेज बढ़ोतरी सीमित रह सकती है। इसके अलावा, होर्मुज में मौजूदा व्यवधान अस्थायी है। यह अभी औपचारिक रूप से बंद नहीं हुआ है, लेकिन ईरान या उससे जुड़े समूहों के संभावित हमलों के जोखिम को देखते हुए कई जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं।

व्यापार-एलएनजी पर निर्भर क्षेत्र होंगे प्रभावित

क्रिसिल रेटिंग्स ने कहा, ईरान युद्ध लंबे समय तक चलता रहा, तो यह बासमती चावल, उर्वरक, हीरा पॉलिश, एयरलाइंस और यात्रा परिचालकों सहित उन कई भारतीय क्षेत्रों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है, जिनका पश्चिम एशिया के साथ सीधा व्यापारिक संबंध है। एजेंसी ने कहा, सिरेमिक और उर्वरक जैसे एलएनजी पर निर्भर क्षेत्र उत्पादन व्यवधान का सामना कर सकते हैं। वहीं, क्रूड से जुड़े उद्योग (रिफाइनी, टायर, पेंट, विशेष रसायन, पैकेजिंग, सिंथेटिक कपड़े) पर लागत का दबाव बढ़ेगा।

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सस्ती तेल आपूर्ति से होगा लाभ

पश्चिम एशिया संकट जल्द समाप्त हो जाता है और ईरान पर से प्रतिबंध हटा लिए जाते हैं, तो भारत को सस्ती तेल आपूर्ति से लाभ हो सकता है। भारत के लिए वेनेजुएला से तेल आपूर्ति का खुलना भी मददगार हो सकता है, क्योंकि यह विकल्पों में विविधता लाता है। -नागेश कुमार, एमसीपी सदस्य, आरबीआई



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Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh: होली की छुट्टियों के बाद आज बाजार खुले हैं या बंद? चेक करें छुट्टियों की डिटेल


Delhi

oi-Kumari Sunidhi Raj

Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज, 6 मार्च 2026 को जनजीवन पूरी तरह सामान्य है। होली के त्यौहार के बाद अक्सर लोगों के मन में छुट्टियों को लेकर संशय रहता है, लेकिन प्रशासन की ओर से स्पष्ट है कि आज शुक्रवार को दिल्ली में कोई सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) नहीं है।

होली की छुट्टी 4 मार्च को थी, जिसके बाद 5 मार्च से ही सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल और वित्तीय संस्थान अपने निर्धारित समय पर खुल चुके हैं। आज बैंक भी सामान्य रूप से कामकाज कर रहे हैं और बाजारों में भी रौनक लौट आई है। अगर आप आज किसी महत्वपूर्ण काम से बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं, तो निश्चिंत रहें क्योंकि मेट्रो सेवा से लेकर अन्य परिवहन साधन पूरी क्षमता के साथ चल रहे हैं।

Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh

Delhi: आज क्या खुला है और क्या बंद?

स्कूल और कॉलेज (खुले हैं): दिल्ली के सभी शिक्षण संस्थान आज सामान्य रूप से खुले हैं। होली का अवकाश 4 मार्च को समाप्त हो चुका है।

बैंक (खुले हैं): राजधानी में आज सभी सरकारी और निजी बैंक खुले हैं। यहाँ बैंकिंग कामकाज के लिए कोई सार्वजनिक छुट्टी नहीं है।

बाजार और शॉपिंग मॉल (खुले हैं): कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, लाजपत नगर और करोल बाग जैसे सभी प्रमुख व्यापारिक केंद्र और मॉल अपनी नियमित टाइमिंग पर खुले हैं।

सरकारी दफ्तर (खुले हैं): केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के सभी कार्यालयों में आज कामकाज हो रहा है।

दिल्ली मेट्रो और परिवहन (सामान्य): मेट्रो की सभी लाइनें और डीटीसी बसें अपने नियमित समय सारिणी (Schedule) के अनुसार चल रही हैं।

अस्पताल और इमरजेंसी सेवा (खुले हैं): सभी ओपीडी (OPD) और इमरजेंसी सेवाएं सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट (आंशिक अवकाश): दिल्ली हाई कोर्ट के कैलेंडर के अनुसार आज स्थानीय अवकाश (Local Holiday) हो सकता है, लेकिन निचली अदालतें और अन्य प्रशासनिक सेवाएं चालू हैं।

ध्यान दें: पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में स्थानीय प्रशासन ने 6 मार्च को भी स्कूलों की छुट्टी घोषित की है, लेकिन दिल्ली में आज सभी संस्थान खुले हैं।

With AI Inputs

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Bengaluru: BMTC ने नए AC रूट लॉन्च किए, बेंगलुरू से इन जगहों के लिए शुरू हुई एसी बस, जानें समय और किराया


India

oi-Bhavna Pandey

Bengaluru BMTC new Ruter AC Bus: बेंगलुरु और उसके पड़ोसी शहरों के बीच आवागमन में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क अब पारंपरिक शहरी सीमाओं से आगे बढ़कर रामनगर और कनकपुरा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक विस्तार कर रहा है। ये क्षेत्र लंबे समय से राज्य की राजधानी के लिए जीवनदायिनी विस्तार रहे हैं, जहां हजारों पेशेवर, छात्र और व्यवसायी रहते हैं।

ये निवासी हर दिन व्यस्त राजमार्गों पर यात्रा करते हैं। बीएमटीसी का यह विस्तार बढ़ती शहरी आबादी और धुंधली होती शहरी सीमाओं के जवाब में आया है। इससे पता चलता है कि कैसे शहरों की मूलभूत संरचनाएं बदल रही हैं और आधुनिक जीवनशैली की मांगों को पूरा करने के लिए नई सर्विस जरूरी हो गई हैं।

Bengaluru BMTC new Ruter AC Bus

आरामदायक हुआ सफर

इन क्षेत्रों में बीएमटीसी सर्विस का लंबे समय से था। ऐतिहासिक रूप से, बेंगलुरु के केंद्र तक की यात्रा एक कठिन परीक्षा थी। यात्रियों को पहले लगभग पूरी तरह से केएसआरटीसी बसों पर निर्भर रहना पड़ता था, जो विश्वसनीय तो थीं, लेकिन अक्सर यात्रियों की अत्यधिक भीड़ के कारण क्षमता से अधिक भरी रहती थीं।

पीक आवर्स में यात्रियों को मिलेगी राहत

पीक आवर्स के दौरान बसों में जगह मिलना मुश्किल होता था, जिससे काम या कॉलेज जाने वालों के लिए लंबी यात्रा शारीरिक रूप से थका देने वाली बन जाती थी। इस चुनौती को देखते हुए, नई सेवा का महत्व और भी बढ़ जाता है, जो यात्रियों को बेहतर विकल्प प्रदान करती है।

प्रीमियम बसें मैजेस्टिक से रामनगर और बानशंकरी से कनकपुरा तक चलेंगी

अब ‘वज्र विस्तारा’ वातानुकूलित (एसी) सेवाएं एक बेहतर अनुभव का वादा करती हैं। ये प्रीमियम बसें मैजेस्टिक से रामनगर और बानशंकरी से कनकपुरा तक चलेंगी। यात्रियों को भीड़भाड़ और असुविधा के बजाय वातानुकूलित और आरामदायक वातावरण मिलेगा, जो राजमार्ग की सालों पुरानी गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए एक बड़ी राहत है।

निगम ने बढ़ाई बीएमटीसी की सीमा

निगम ने अपनी परिचालन सीमा को 45 किलोमीटर तक बढ़ाकर यह बदलाव संभव किया है। यह कदम यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और उन्हें शहर के मुख्य हिस्सों से जोड़ने के लिए उठाया गया है, जिससे दैनिक आवागमन अब अधिक सुलभ और सुखद बन सकेगा।

इस विस्तार के पीछे का तर्क मौजूदा मानचित्र को देखकर स्पष्ट हो जाता है। बीएमटीसी की पहले से ही बिदादी और हारोहल्ली में मजबूत उपस्थिति थी। रामनगर बिदादी से सिर्फ 15 किलोमीटर आगे है, जबकि कनकपुरा हारोहल्ली से केवल 18 किलोमीटर दूर स्थित है।

क्‍या होगा रूट?

नई सेवाएं ‘वज्र विस्तारा’ (एसी) ब्रांड के तहत संचालित होंगी, जिसका अर्थ है कि किराया बीएमटीसी के मानक एसी दूरी स्लैब के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। विस्तारित 45 किमी के दायरे के लिए, किराया संरचना इस प्रकार है: मैजेस्टिक से रामनगर (केंपेगौड़ा बस स्टेशन से रामनगर जिला स्टेडियम तक) के लिए अनुमानित किराया ₹85 से ₹95 होगा।

कितना होगा किराया?

इसी तरह, बानशंकरी से कनकपुरा (बानशंकरी टीटीएमसी से कनकपुरा टाउन तक) के लिए किराया ₹70 से ₹85 के बीच रहेगा। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जहां भी नॉन-एसी सेवाएं उपलब्ध होंगी, उनका किराया आमतौर पर ऊपर सूचीबद्ध एसी किरायों से 40-50% कम होगा, जिससे विभिन्न बजट वाले यात्रियों को विकल्प मिल सके।

दैनिक यात्रियों की भारी संख्या को पूरा करने के लिए निगम ने एक टाइमटेबल जारी किया है, जो पीक-आवर्स की यात्रा को प्राथमिकता देती है। मैजेस्टिक से रामनगर मार्ग पर पहली बस सुबह 6:30 बजे और आखिरी बस रात 9:45 बजे चलेगी, जिसकी पीक-आवर्स (सुबह और शाम) में हर 30 से 45 मिनट पर आवृत्ति होगी।

बानशंकरी से कनकपुरा रूट का समय क्‍या होगा?

बानशंकरी से कनकपुरा मार्ग पर पहली बस सुबह 6:00 बजे और आखिरी रात 10:15 बजे उपलब्ध होगी। इस मार्ग पर आवृत्ति लगभग हर 20 से 30 मिनट होगी, क्योंकि यह आर्ट ऑफ लिविंग और हारोहल्ली क्षेत्रों की ओर मौजूदा यातायात का लाभ उठाता है, जिससे यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सके।

राजमार्ग के किनारे रहने वालों के लिए, बसें कई प्रमुख चौराहों पर रुकेंगी। यह “सिटी-स्टाइल” स्टॉपिंग पैटर्न है जो बीएमटीसी सेवा को केएसआरटीसी की लंबी दूरी की बसों से अलग करता है। रामनगर मार्ग के प्रमुख पड़ाव हैं: मैजेस्टिक, सैटेलाइट बस स्टैंड (मैसूर रोड), राजराजेश्वरी नगर गेट, केंगेरी टीटीएमसी, बिदादी और रामनगर।

कनकपुरा मार्ग के प्रमुख स्‍टेशन क्‍या हैं?

बानशंकरी टीटीएमसी, कोनन्कुंटे क्रॉस, थालागट्टपुरा, कग्गालिपुरा, हारोहल्ली और कनकपुरा। ये स्टॉप यात्रियों को उनके घरों के करीब सुविधाजनक बोर्डिंग और डी-बोर्डिंग विकल्प प्रदान करते हैं।



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राज्यसभा के बाद भी 6 महीने तक CM रह सकते हैं नीतीश कुमार! क्या सांसद-मुख्यमंत्री दोनों संभव? संवैधानिक नियम


Bihar

oi-Pallavi Kumari

Nitish Kumar Rajya Sabha Decision: बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ तब आया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च को राज्यसभा के लिए नामांकन किया। उससे पहले सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार ने खुद ऐलान किया कि वह अब राज्यसभा जाना चाहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि सार्वजनिक जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों का हिस्सा बनें। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने इस बार राज्यसभा चुनाव में उतरने का फैसला किया है।

नीतीश कुमार के इस ऐलान के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि बिहार को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में कई संभावित नामों को लेकर चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। हालांकि संविधान के नियमों के मुताबिक नीतीश कुमार चाहें तो राज्यसभा सदस्य बनने के बाद भी कुछ महीनों तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। आइए जानें पूरा संवैधानिक नियम क्या कहता है।

Nitish Kumar Rajya Sabha Decision

क्या राज्यसभा सांसद रहते हुए CM बने रह सकते हैं? (CM And Rajya Sabha MP Rule)

संविधान के प्रावधानों के मुताबिक मुख्यमंत्री को राज्यपाल नियुक्त करते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 (1) में इसका जिक्र है। वहीं अनुच्छेद 164 (4) में यह व्यवस्था दी गई है कि कोई भी व्यक्ति बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने अधिकतम 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर रह सकता है।

अनुच्छेद 164 (1) क्या कहता है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के अनुसार किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। राज्यपाल ही मुख्यमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद के अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी करते हैं। इस अनुच्छेद में यह भी प्रावधान है कि पूरी मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है। यानी सरकार तभी तक बनी रह सकती है, जब तक उसे विधानसभा में बहुमत का समर्थन हासिल हो। इसी कारण मुख्यमंत्री को राज्य सरकार का प्रमुख माना जाता है और वही मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करता है।

सरल शब्दों में कहें तो मुख्यमंत्री की नियुक्ति औपचारिक रूप से राज्यपाल करते हैं, लेकिन आमतौर पर वही नेता मुख्यमंत्री बनता है जिसके पास विधानसभा में बहुमत का समर्थन होता है।

अनुच्छेद 164 (4) क्या व्यवस्था देता है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164 (4) एक विशेष स्थिति को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्री या मुख्यमंत्री बनता है लेकिन वह उस समय राज्य की विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो उसे अधिकतम 6 महीने के भीतर राज्य की किसी एक विधायिका का सदस्य बनना अनिवार्य होगा।

अगर वह छह महीने के भीतर विधायक (MLA) या विधान परिषद सदस्य (MLC) नहीं बन पाता, तो उसे अपने पद से हटना पड़ेगा। दूसरे शब्दों में, कोई भी व्यक्ति बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने केवल छह महीने तक ही मंत्री या मुख्यमंत्री पद पर रह सकता है।

यह नियम इसलिए रखा गया है ताकि सरकार में शामिल हर मंत्री अंततः जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह रहे।

मुख्यमंत्री पर भी यही नियम लागू होता है

क्योंकि मुख्यमंत्री भी मंत्रिपरिषद का हिस्सा होता है, इसलिए अनुच्छेद 164 (4) का यह नियम उस पर भी लागू होता है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई नेता मुख्यमंत्री बनता है लेकिन उस समय वह विधायक या एमएलसी नहीं है, तो उसे छह महीने के भीतर किसी भी सदन का सदस्य बनना होगा।

इसका मतलब यह है कि अगर नीतीश कुमार विधान परिषद यानी MLC पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा चले जाते हैं, तब भी वे तुरंत मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ते तो भी 6 महीने तक इस पद पर बने रह सकते हैं। लेकिन इस अवधि के बाद उन्हें विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होगा, नहीं तो उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।

क्या नीतीश जल्द दे सकते हैं इस्तीफा? (Nitish Kumar Resignation Possibility)

हालांकि संविधान उन्हें 6 महीने की छूट देता है, लेकिन राजनीतिक परंपरा अक्सर अलग राह दिखाती है। आमतौर पर जब कोई मुख्यमंत्री राज्यसभा या लोकसभा की राजनीति में सक्रिय भूमिका लेने का फैसला करता है, तो वह कुछ ही समय में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी दे देता है।

अगर नीतीश कुमार इस्तीफा देते हैं, तो राज्यपाल के पास नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति का अधिकार होता है। इसके लिए आमतौर पर सत्तारूढ़ दल के विधायक दल की बैठक बुलाई जाती है, जिसमें नए नेता का चुनाव किया जाता है। पार्टी नेतृत्व और आलाकमान की राय के बाद विधायक दल का नेता चुना जाता है और वही मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालता है।

नई सरकार को मेरा पूरा समर्थन रहेगा: नीतीश कुमार (Nitish Kumar Statement)

राज्यसभा चुनाव के फैसले से पहले नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी मंशा स्पष्ट की। उन्होंने लिखा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा में जाने के बाद भी बिहार में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा समर्थन रहेगा। उनके इस बयान से यह संकेत मिला है कि वह राज्य की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होने वाले हैं।

तेजस्वी यादव का आरोप, बीजेपी पर साधा निशाना (Tejashwi Yadav Reaction)

नीतीश कुमार के फैसले पर विपक्ष की भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में बीजेपी ने महाराष्ट्र मॉडल लागू किया है। उनके मुताबिक भाजपा ने नीतीश कुमार पर इतना दबाव बनाया कि उन्हें पद छोड़ने की नौबत आ गई।

तेजस्वी ने यह भी कहा कि भाजपा अपने सहयोगी दलों को कमजोर करने की रणनीति पर काम करती है और नीतीश कुमार को भी इसी तरह राजनीतिक तौर पर ‘हाइजैक’ किया गया है।

बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री (Nishant Kumar JDU Entry)

इस पूरे घटनाक्रम के बीच जेडीयू के अंदर एक और बड़ी राजनीतिक हलचल की चर्चा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 8 मार्च को जनता दल यूनाइटेड में औपचारिक रूप से शामिल हो सकते हैं।

बताया जा रहा है कि पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर बाद में फैसला लिया जाएगा। पहले उनकी ज्वाइनिंग आज ही कराई जानी थी और इसके लिए जेडीयू कार्यालय में कार्यकर्ताओं के लिए भोज की भी व्यवस्था की गई थी। लेकिन राज्यसभा नामांकन से जुड़े कार्यक्रम के कारण यह कार्यक्रम टाल दिया गया।

बिहार की राजनीति में नया अध्याय (Bihar Political Transition)

नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। अगर वह मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं तो राज्य में सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी, इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि नीतीश कुमार राज्यसभा की राजनीति पर पूरा फोकस करते हैं या कुछ समय तक मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभालते रहते हैं। फिलहाल इतना तय है कि उनका यह फैसला बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट दे रहा है।



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