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पड़ोसी लड़के से दोस्‍ती पड़ी भारी, 17 साल की किशोरी अचानक हुई लापता, 6 महीने बाद आई यह खबर


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दिल्ली पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने 17 साल की लापता किशोरी को छह महीने बाद दरियागंज से बरामद किया. लड़की पड़ोसी लड़के से दोस्ती के कारण घर छोड़कर गई थी. पुलिस ने काउंसलिंग की व्यवस्था की.

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क्राइम न्‍यूज. दिल्‍ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए छह महीने से लापता 17 साल की नाबालिग लड़की को बरामद कर लिया है. यह लड़की 25 अगस्त 2025 से बुराड़ी इलाके से गायब थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने उसी दिन बुराड़ी थाने में बीएनएस की धारा 137(2) के तहत एफआईआर दर्ज किया था.

पुलिस के अनुसार, लड़की के अचानक लापता होने से परिवार काफी परेशान था. चूंकि मामला एक नाबालिग से जुड़ा था, इसलिए इसे संवेदनशील मानते हुए दिल्ली पुलिस की नोडल एजेंसी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने जांच अपने हाथ में ली. इस टीम में इंस्पेक्टर मुकेश कुमार, एसआई विशाल गुप्ता और हेड कांस्टेबल अमित शामिल थे. पूरी कार्रवाई एसीपी एएचटीयू सुरेश कुमार की निगरानी में की गई.

जांच के दौरान पुलिस टीम ने लड़की के परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों से विस्तार से पूछताछ की. साथ ही तकनीकी सर्विलांस और मैनुअल इनपुट्स के आधार पर सुराग जुटाए गए. कई संभावित स्थानों पर छापेमारी भी की गई. लगातार प्रयासों के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि लड़की दिल्ली के दरियागंज इलाके में मौजूद है. इसके बाद टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे सुरक्षित बरामद कर लिया.

पुलिस जांच में सामने आया कि लड़की के पड़ोस में रहने वाले एक लड़के से उसकी दोस्ती हो गई थी. जब परिवार को इस दोस्ती के बारे में पता चला तो उन्होंने उसे डांटा-फटकारा. इसी बात से नाराज होकर लड़की गुस्से में घर छोड़कर चली गई थी और किसी को इसकी जानकारी नहीं दी थी. पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में अपहरण जैसी कोई बात सामने नहीं आई है, हालांकि मामले की आगे की कानूनी जांच जारी है.

बरामद की गई नाबालिग को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बुराड़ी थाने के जांच अधिकारी को सौंप दिया गया है. अब आगे की कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जाएगी. पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि लड़की को काउंसलिंग और आवश्यक सहायता मिले, ताकि वह सामान्य जीवन में लौट सके.

क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस पंकज कुमार (आईपीएस) के अनुसार, नाबालिगों से जुड़े मामलों में पुलिस विशेष सतर्कता बरतती है और ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि परिवारों को बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए, ताकि ऐसी परिस्थितियां पैदा न हों.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें



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Amit Shah पटना क्यों पहुंच रहे? Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की सुर्खियों के बीच बड़ा ‘खेला’ होने की उम्मीद?


Bihar

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Bihar CM Realignment: बिहार की राजनीति इन दिनों उबाल पर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो दो दशकों से राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे हैं, अब राज्यसभा की ओर रुख कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश ने नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और 5 मार्च 2026 को नामांकन दाखिल करने की तैयारी है।

इसी बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पटना पहुंचने की खबरों ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। क्या यह NDA गठबंधन में सत्ता हस्तांतरण का संकेत है? क्या आखिरी समय में कोई बड़ा ‘खेला’ होने वाला है? आइए इसकी परतें खोलते हैं….

Bihar CM Realignment

PTI- फाइल फोटो।

Amit Shah Patna Visit Reason: अमित शाह का पटना दौरा: क्यों और कब?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 मार्च को सुबह पटना पहुंचने वाले हैं। सूत्र बताते हैं कि वे नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के दौरान मौजूद रहेंगे। यह दौरा महज औपचारिकता नहीं लगता। 2025 विधानसभा चुनावों में NDA की भारी जीत के बाद से ही BJP बिहार में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

शाह का आना गठबंधन की आंतरिक चर्चाओं को अंतिम रूप देने का हिस्सा हो सकता है। नीतीश के राज्यसभा जाने से CM पद खाली होगा, और शाह की मौजूदगी में नए समीकरण तय हो सकते हैं। BJP के सूत्रों का कहना है कि शाह नीतीश से मुलाकात करेंगे और JDU-BJP के बीच सत्ता साझेदारी पर बात होगी। क्या यह BJP के CM बनाने की दिशा में कदम है? राजनीतिक गलियारों में यही सवाल गूंज रहा है।

Nitish Kumar Rajya Sabha Entry: नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना

नीतीश कुमार ने हाल ही में 75 वर्ष पूरे किए। उनके स्वास्थ्य और राष्ट्रीय भूमिका की चर्चाएं पहले से चल रही हैं। JDU सूत्रों के अनुसार, नामांकन पत्र तैयार हैं – सिर्फ औपचारिकताएं बाकी। 4 मार्च को पार्टी नेताओं ने नीतीश को मनाने में पूरा दिन लगा दिया। नीतीश से ‘अनएक्सपेक्टेड’ की उम्मीद हमेशा रहती है, लेकिन इस बार राज्यसभा शिफ्ट लगभग तय लगता है। रामनाथ ठाकुर का भी राज्यसभा जाना तय है।

नीतीश की ‘समृद्धि यात्रा’ का अगला चरण स्थगित होना इसी ओर इशारा करता है। अगर नीतीश राज्यसभा गए, तो बिहार में नई लीडरशिप उभरेगी। NDA की विधानसभा में 202+ सीटें हैं, इसलिए बदलाव आसान होगा।

Bihar BJP CM Possibility: नई सत्ता व्यवस्था- BJP का CM और JDU की भूमिका

नीतीश के जाने पर CM पद BJP की ओर शिफ्ट होने की संभावना प्रबल है। सूत्र बताते हैं कि BJP अपना CM बनाएगी, जबकि JDU को डिप्टी CM मिल सकता है। नीतीश के बेटे निशांत कुमार JDU में शामिल होकर कैबिनेट में आ सकते हैं – यह जनरेशनल शिफ्ट का संकेत है। BJP से CM के टॉप कंटेंडर में दलित नेता जनक राम का नाम चर्चा में है। जनक राम SC/ST Welfare मंत्री रह चुके हैं, और BJP उन्हें ‘सुरक्षित’ विकल्प मानती है। पार्टी कभी महत्वाकांक्षी नेता को CM नहीं बनाती – जनक राम कम प्रोफाइल लेकिन भरोसेमंद हैं। लेकिन अंतिम फैसला शाह की मीटिंग पर निर्भर।

आखिरी समय में ‘खेला’ की संभावना?

नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की अनिश्चितता हमेशा बिहार राजनीति का हिस्सा रही है। 4 मार्च को उन्हें मनाने में लगे समय से लगता है कि आखिरी घड़ी में कोई ट्विस्ट आ सकता है। तेजस्वी यादव की 2025 की भविष्यवाणी – कि BJP नीतीश को ‘कठपुतली’ बनाकर इस्तेमाल करेगी – अब हकीकत लग रही है। RJD इसे गठबंधन की ‘धोखाधड़ी’ बताएगी। लेकिन NDA मजबूत है – कोई बड़ा खेला होने की बजाय यह सुगम हस्तांतरण हो सकता है। शाह का दौरा अंतिम मुहर लगा सकता है।

क्या प्रभाव पड़ेगा?

यह बदलाव NDA में पावर बैलेंस शिफ्ट करेगा। BJP बिहार पर पूरा कंट्रोल लेगी, जबकि JDU नीतीश की छत्रछाया में रहेगी। विपक्ष को नया मुद्दा मिलेगा। 2025 की जीत के बाद यह NDA की रणनीति का हिस्सा लगता है। नीतीश राज्यसभा में NDA को मजबूत करेंगे, लेकिन बिहार में BJP का डायरेक्ट रूल नया अध्याय होगा।

बिहार की सत्ता में यह मोड़ क्या लाएगा? शाह का दौरा और नामांकन के बाद तस्वीर साफ होगी। राजनीतिक चश्मे से देखें तो यह NDA की मजबूती का प्रमाण है, लेकिन विपक्ष इसे कमजोरी बताएगा। क्या लगता है – अमित शाह का दौरा बड़ा खेला है या रूटीन? कमेंट में बताएं!



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 Maoist Ganapathy Surrender: माओवादी ‘गणपति’ का तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण, लाल आतंक की कैसे टूटी कमर?


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Maoist Ganapathy Surrender: केंद्र सरकार के 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह ‘नक्सल मुक्त’ बनाने के संकल्प के बीच नक्सली आंदोलन से जुड़ा एक बेहद अहम और निर्णायक घटनाक्रम सामने आया है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के पूर्व महासचिव और नक्सल आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ ‘गणपति’ के तेलंगाना पुलिस के संपर्क में आने की खबरों से सुरक्षा एजेंसियों में जबरदस्त हलचल मच गई है।

सूत्रों के मुताबिक, गणपति बढ़ती उम्र और गंभीर बीमारियों के चलते जल्द ही आत्मसमर्पण कर सकते हैं। तेलंगाना पुलिस सूत्रों का कहना है कि करीब चार दशकों तक अंडरग्राउंड रहकर माओवादी हिंसा का नेतृत्व करने वाले 76 वर्षीय गणपति लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

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लगातार सिकुड़ते संगठन, सुरक्षाबलों के दबाव और इलाज की जरूरत ने उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए मजबूर किया है। बताया जा रहा है कि वे फिलहाल किसी गुप्त स्थान पर हैं और नेपाल या किसी शहरी इलाके से पुलिस के संपर्क में हैं। उनके संभावित सरेंडर को लेकर उच्च स्तर पर गोपनीय बातचीत चल रही है।

Who Is Maoist Ganapathy: कौन है मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ ‘गणपति’?

मुप्पला लक्ष्मण राव का जन्म 16 जून 1949 को तेलंगाना के जगतियाल जिले में हुआ था। पढ़ाई के दौरान वे विज्ञान स्नातक और बी.एड योग्यताधारी रहे और शुरुआती दौर में शिक्षक के रूप में भी काम किया। लेकिन 1970-80 के दशक में वे वामपंथी उग्रवाद से जुड़े और धीरे-धीरे नक्सली आंदोलन के सबसे बड़े रणनीतिकार और विचारक बन गए।

साल 2004 में पीपुल्स वॉर और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर के विलय के बाद बनी भाकपा (माओवादी) के वे पहले महासचिव बने और 2018 तक इस पद पर रहे। भारत सरकार ने उन पर कुल 3.6 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। गणपति को देश में माओवादी विचारधारा का सबसे बड़ा स्तंभ और संगठन का ‘ब्रेन’ माना जाता रहा है।

देवजी के बाद गणपति: ताश के पत्तों की तरह ढहा नेतृत्व

यह खबर ऐसे समय में आई है जब महज एक हफ्ते पहले ही माओवादियों के शीर्ष कमांडर और रणनीतिकार थिप्पिरी तिरुपति उर्फ ‘देवजी’ (5 करोड़ का इनामी) और मल्ला राजी रेड्डी ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है।

गणपति का संभावित आत्मसमर्पण नक्सली संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। हाल के महीनों में शीर्ष कमांडर थिप्पिरी तिरुपति उर्फ ‘देवजी’ और मल्ला राजी रेड्डी जैसे बड़े नेताओं के सरेंडर से पहले ही संगठन नेतृत्व संकट से जूझ रहा है।

हालांकि गणपति ने 2018 में स्वास्थ्य कारणों से महासचिव पद छोड़ा था, लेकिन वे संगठन के वैचारिक मार्गदर्शक बने हुए थे। उनके सरेंडर से नक्सली कैडर का मनोबल बुरी तरह टूट सकता है और बचे-खुचे नेतृत्व में आपसी खींचतान और तेज होने की आशंका है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके बाद नक्सली संगठन का केंद्रीय नियंत्रण लगभग खत्म हो जाएगा।

‘Operation Kagar 2026’ और 31 मार्च की डेडलाइन

गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने की स्पष्ट डेडलाइन तय की है। इसी लक्ष्य के तहत सुरक्षाबलों द्वारा ‘ऑपरेशन कगार’ जैसे अभियानों के जरिए नक्सलियों के ठिकानों, जंगलों और सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त किया जा रहा है। साथ ही, NIA और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नक्सलियों के फंडिंग नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई कर उनकी आर्थिक कमर तोड़ दी है।

सुरक्षा बलों ने ‘ऑपरेशन कगार’ के जरिए नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म कर दिया है। NIA और ED द्वारा फाइनेंशियल नेटवर्क को ध्वस्त करने से नक्सलियों के लिए हथियारों और रसद की व्यवस्था करना असंभव हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि गणपति का सरेंडर माओवादी आंदोलन के लिए ताबूत की आखिरी कील साबित होगा।

जब आंदोलन का सबसे बड़ा नेता हथियार डालता है, तो निचले स्तर के कैडरों में लड़ने का जज्बा खत्म हो जाता है। पिछले एक साल में मल्तोजुला वेणुगोपाल उर्फ सोनू और हिडमा के उत्तराधिकारियों के खात्मे या सरेंडर के बाद अब संगठन चलाने के लिए कोई प्रभावी ‘पोलित ब्यूरो’ सदस्य नहीं बचा है।



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MP News: खाड़ी देशों में रह रहे मध्यप्रदेश के लोगों के लिए 24×7 कंट्रोल रूम, दिल्ली के मध्यप्रदेश भवन में की गई व्यवस्था


मध्य प्रदेश सरकार ने खाड़ी देशों में मध्य प्रदेश के निवासियों को पढ़ाई, रोजगार, व्यवसाय, पर्यटन और आपात स्थितियों में मदद करने के लिए नई दिल्ली में एमपी भवन में 24/7 कंट्रोल रूम शुरू किया है, जो केंद्र सरकार और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय करता है।

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-Oneindia Staff

मध्यप्रदेश सरकार ने खाड़ी देशों में रह रहे प्रदेश के नागरिकों की सहायता के लिए नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन में 24 घंटे संचालित होने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया है। यह निर्णय वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि विदेशों में रह रहे मध्यप्रदेश के लोगों को आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सहायता और मार्गदर्शन मिल सके।

MP Establishes 24/7 Gulf Help Desk

सरकार के अनुसार यह कंट्रोल रूम खाड़ी देशों में अध्ययन, रोजगार, व्यवसाय, पर्यटन या अन्य कारणों से रह रहे प्रदेशवासियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा। किसी भी प्रकार की आपात या सामान्य स्थिति में संबंधित व्यक्ति या उनके परिजन इस कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। कंट्रोल रूम के माध्यम से जरूरत पड़ने पर भारत सरकार और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मध्यप्रदेश सरकार ने नागरिकों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम के संपर्क विवरण भी जारी किए हैं—

* दूरभाष: 011-26772005
* व्हाट्सएप: 9818963273
* ई-मेल: [email protected]

प्रदेश सरकार ने खाड़ी देशों में रह रहे सभी मध्यप्रदेशवासियों से अपील की है कि आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध कराए गए संपर्क माध्यमों का उपयोग कर सहायता प्राप्त करें।

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Janak Ram कौन हैं, जिन्हें बिहार CM बना सकती है BJP? राजनीति में कितने प्रबल?-समझें


Bihar

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Janak Ram Bihar CM Contender: बिहार की राजनीति में इन दिनों नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों के साथ एक नाम बार-बार चर्चा में आ रहा है – जनक राम (या जनक चमार), BJP के वरिष्ठ दलित नेता। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और सूत्रों के मुताबिक, अगर नीतीश राज्यसभा चले जाते हैं और BJP मुख्यमंत्री पद पर दावा करती है, तो जनक राम जैसे कम प्रोफाइल लेकिन भरोसेमंद और कंट्रोलेबल नेता प्रमुख प्रत्याशी बन सकते हैं।

BJP कभी ‘ओवर एम्बिशियस’ या बहुत बड़े चेहरे वाले नेता को CM नहीं बनाती – इसलिए जनक राम जैसे नाम रेस में आते हैं। लेकिन क्या यह सिर्फ अटकलें हैं या वाकई संभावना? आखिर कौन हैं जनक राम? आइए डिटेल में समझते हैं…

Janak Ram Bihar CM Contender

Who Is Janak Ram: जनक राम कौन हैं?

  • पूरा नाम: जनक राम (खुद को अक्सर जनक चमार कहलवाते हैं, ताकि जातीय पहचान मजबूत रहे)।
  • जन्म: 5 दिसंबर 1973, इंद्रावा गांव, गोपालगंज जिला, बिहार।
  • शिक्षा: एमए (राजेंद्र कॉलेज, छपरा, 1995), एलएलबी (गंगा सिंह कॉलेज, छपरा, 1997, जेपी यूनिवर्सिटी)।
  • पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (BJP)।
  • वर्तमान पद: बिहार विधान परिषद (MLC) सदस्य (17 मार्च 2021 से गवर्नर नामांकन पर)।

पिछले पद:

  • 2014-2019: गोपालगंज लोकसभा से सांसद (BJP टिकट पर जीते, 2.86 लाख वोटों से जीत)।

बिहार सरकार में मंत्री:

  • Mines & Geology मंत्री (2021-22)।
  • SC/ST Welfare मंत्री (2024-2025)।

Janak Ram Family Tree: जनक राम के परिवार में कौन-कौन?

  • पिता रामबली राम
  • माता इलायची देवी।
  • एक पत्नी से 1 बेटा और 1 बेटी।

Janak Ram Net Worth-Criminal Record: जनक राम की नेटवर्थ कितनी?

  • आपराधिक रिकॉर्ड: 1 मामला (2014 एफिडेविट के अनुसार)।
  • संपत्ति (2014 लोकसभा एफिडेविट): लगभग ₹10.43 लाख (देनदारियां शून्य)।

Janak Ram Caste: किस जाति समुदाय से जनक राम?

जनक राम दलित (चमार/रविदास समुदाय) से आते हैं और BJP में दलित चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने SC/ST कल्याण जैसे संवेदनशील विभाग संभाले हैं, जिससे दलित वोट बैंक में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।

Janak Ram Political Career: राजनीतिक करियर का सफर

  • शुरुआत: स्थानीय स्तर से BJP में सक्रिय।
  • बड़ा ब्रेक: 2014 लोकसभा चुनाव में गोपालगंज से BJP टिकट पर जीत। यह सीट आरक्षित (SC) है, जहां उन्होंने कांग्रेस की ज्योति भारती को हराया।
  • 2019: BJP ने टिकट नहीं दिया (सीट JDU को चली गई, NDA गठबंधन के तहत)।
  • 2021: बिहार विधान परिषद में गवर्नर नामांकन से MLC बने।
  • मंत्री पद: नीतीश सरकार में दो बार मंत्री – Mines और SC/ST Welfare। उन्होंने दलित कल्याण योजनाओं पर फोकस किया, लेकिन कभी बड़े विवादों में नहीं रहे।
  • वर्तमान: MLC के रूप में सक्रिय, पार्टी में भरोसेमंद माने जाते हैं।

जनक राम का स्टाइल लो-प्रोफाइल है – वे ज्यादा मीडिया में नहीं आते, लेकिन पार्टी लाइन पर चलते हैं। BJP में वे दलित संतुलन के लिए उपयोगी माने जाते हैं, खासकर जब Jitan Ram Manjhi या Chirag Paswan जैसे अन्य दलित नेता अलग रास्ते पर हों।

CM बनने की चर्चा क्यों? – वर्तमान कयास

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों के साथ NDA में CM पद BJP की ओर शिफ्ट होने की अटकलें तेज हैं। NDA की विधानसभा में मजबूत बहुमत (202+ सीटें) है, इसलिए फैसला आसान।

  • BJP की रणनीति: पार्टी ‘ओवर एम्बिशियस’ (जैसे सम्राट चौधरी या अन्य बड़े चेहरे) को CM नहीं बनाती, क्योंकि वे बाद में चैलेंज दे सकते हैं। इसलिए जनक राम जैसे भरोसेमंद, दलित चेहरे सुरक्षित विकल्प लगते हैं।
  • जातीय संतुलन: बिहार में दलित वोट महत्वपूर्ण। जनक राम SC/ST Welfare मंत्री रह चुके हैं, इसलिए दलित समाज में स्वीकार्यता है।
  • संभावित चुनौती: जनक राम MLC हैं (विधान परिषद सदस्य), जबकि CM बनने के लिए विधानसभा सदस्य होना जरूरी। संविधान के अनुसार, मंत्री/CM बनने के बाद 6 महीने में विधानसभा सदस्य बनना होगा (उपचुनाव या अन्य तरीके से)। अगर ऐसा हुआ, तो BJP का पहला दलित CM बिहार में आ सकता है।

लेकिन ध्यान दें: अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। जनक राम का नाम सिर्फ अटकलों और विश्लेषकों की चर्चा में है। BJP ने CM चेहरा तय करने की कोई बात नहीं की।

यह सब नीतीश के राज्यसभा जाने पर निर्भर। अगर ऐसा हुआ, तो बिहार में BJP का डायरेक्ट CM बनना बड़ा टर्निंग पॉइंट होगा। RJD और तेजस्वी यादव इसे ‘कठपुतली’ वाली थ्योरी का सबूत बताएंगे। जनक राम CM बनें तो बिहार की राजनीति में क्या बदलाव आएगा? कमेंट में बताएं!



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MP News: खाड़ी देशों में रह रहे मध्यप्रदेश के निवासियों के लिए 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित



मध्य प्रदेश ने खाड़ी में रहने वाले निवासियों को जरूरी सहायता के लिए नई दिल्ली में MP भवन में 24×7 कंट्रोल रूम बनाया है।



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SA Vs NZ: ईडन गार्डन्स में फिन एलन का तूफान, टी-20 वर्ल्ड कप में जड़ा सबसे तेज शतक, फाइनल में पहुंची टीम


Cricket

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SA Vs NZ ICC T20 WC26 Semi-Final: ईडन गार्डन्स के मैदान पर बुधवार को चौके-छक्कों की बारिश देखने को मिली। टी20 विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड ने दक्षिण अफ्रीका को करारी शिकस्त देकर फाइनल का टिकट कटा लिया है। इस जीत के साथ ही कीवी टीम अब 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने वाले खिताबी मुकाबले में भारत या इंग्लैंड में से किसी एक से भिड़ेगी।

फिन एलन ने किया कमाल (SA Vs NZ ICC T20 WC26 Semi-Final)

न्यूजीलैंड की इस ऐतिहासिक जीत के नायक सलामी बल्लेबाज फिन एलन रहे। 170 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी कीवी टीम को एलन ने ऐसी शुरुआत दी कि दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजी आक्रमण पूरी तरह बिखर गया। एलन ने मात्र 19 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया, जो टी20 विश्व कप के इतिहास में न्यूजीलैंड के किसी भी बल्लेबाज द्वारा लगाया गया सबसे तेज अर्धशतक है। उन्होंने ग्लेन फिलिप्स के पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया।

SA Vs NZ 1

जड़ डाला सबसे तेज शतक

इतना ही नहीं फिन एलन ने अपनी पारी को आगे बढ़ाते हुए टी20 वर्ल्ड कप का सबसे तेज शतक जड़कर इतिहास रच दिया। उन्होंने साल 2016 में क्रिस गेल द्वारा बनाए गए सबसे तेज शतक के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा लिया। एलन की इस पारी में 6 चौके और 3 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे, जिसने ईडन गार्डन्स में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दक्षिण अफ्रीका की विदाई

दक्षिण अफ्रीका इस टूर्नामेंट में अब तक अजेय रही थी, एक बार फिर नॉकआउट के दबाव को नहीं झेल सकी। पहले बल्लेबाजी करते हुए प्रोटियाज ने 20 ओवर में 169 रन बनाए थे, जो एक चुनौतीपूर्ण स्कोर माना जा रहा था। लेकिन फिन एलन की आक्रामक बल्लेबाजी ने इस लक्ष्य को बौना साबित कर दिया। न्यूजीलैंड ने बेहद पेशेवर अंदाज में लक्ष्य का पीछा किया और फाइनल में अपनी जगह पक्की की।

न्यूजीलैंड की टीम अब अहमदाबाद रवाना होगी, जहां वह देश के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम में विश्व विजेता बनने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। कीवी टीम का सामना किससे होगा, इसका फैसला गुरुवार को मुंबई में भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल से होगा।



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Aaj Ka Match Kon Jeeta 4 March: आज का मैच कौन जीता- साउथ अफ्रीका vs न्यूजीलैंड


Cricket

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Aaj Ka Match Kon Jeeta: कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डंस मैदान पर टी20 विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका ने न्यूजीलैंड के सामने जीत के लिए 170 रनों का लक्ष्य रखा है। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी प्रोटियाज टीम एक समय ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी, लेकिन निचले क्रम के बल्लेबाजों ने सूझबूझ भरी बल्लेबाजी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।

साउथ अफ्रीका की शुरुआत बेहद खराब रही। सलामी बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक (10) और रयान रिकलटन (0) सस्ते में पवेलियन लौट गए। कप्तान एडन मार्करम भी 18 रनों से आगे नहीं बढ़ सके। अनुभवी डेविड मिलर (6) के आउट होने के बाद स्कोरबोर्ड पर रन कम और विकेट ज्यादा नजर आ रहे थे। ऐसे में युवा डेवाल्ड ब्रेविस ने 34 रनों की पारी खेलकर पारी को थोड़ा स्थिरता दी, लेकिन उनके आउट होते ही टीम फिर संकट में दिख रही थी।

aaj ka match kon jeeta

जब टीम का शीर्ष और मध्य क्रम लड़खड़ा गया था, तब मार्को यानसेन ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कीवी गेंदबाजों की जमकर खबर ली और मात्र 30 गेंदों में 55 रनों की नाबाद आतिशी पारी खेली। यानसेन ने अपनी इस पारी में 5 गगनचुंबी छक्के जड़े और टीम का स्कोर 169/8 तक पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। ट्रिस्टन स्टब्स ने भी 29 रनों का महत्वपूर्ण योगदान देकर यानसेन का अच्छा साथ निभाया।

न्यूजीलैंड की ओर से कोल मैककोन्ची, रचिन रवींद्र और मैट हेनरी ने शानदार गेंदबाजी की। मैकोन्ची और रवींद्र ने शुरुआती झटके देकर साउथ अफ्रीका को बैकफुट पर धकेल दिया था, लेकिन अंतिम ओवरों में मार्को यानसेन के प्रहार ने न्यूजीलैंड की रणनीति को थोड़ा डगमगा दिया है।

साउथ अफ्रीका द्वारा रखे गए 170 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने तूफानी शुरुआत की। कीवी ओपनर्स, टिम साइफर्ट और फिन एलन ने प्रोटियाज गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए मात्र 7 ओवर में 91 रन बोर्ड पर बना दिए।



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Rajya Sabha में शरद पवार होंगे विपक्ष के साझा उम्मीदवार! क्या सुलझ गया MVA के भीतर ‘सीट विवाद’


Maharashtra

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Sharad Pawar Rajya Sabha 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में ‘महाविकास अघाड़ी’ (MVA) के भीतर जारी खींचतान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। 16 मार्च 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार को अपना समर्थन देने का एलान कर दिया है।

काफी दिनों से जारी सस्पेंस और गठबंधन के भीतर चल रही रस्साकशी के बाद, इस फैसले के बाद महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में विपक्ष ने अपना दांव चल दिया है।

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कांग्रेस आलाकमान और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हस्तक्षेप के बाद, महाराष्ट्र कांग्रेस ने दिग्गज नेता शरद पवार की उम्मीदवारी पर मुहर लगा दी है। इससे पहले इस अकेली ‘जीतने योग्य’ सीट को लेकर कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा था।

कांग्रेस का ‘त्याग’ और गठबंधन की मर्यादा

कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने ‘राष्ट्रीय दल’ होने के नाते पहले इस सीट पर दावा ठोका था। लेकिन अंततः गठबंधन की एकता को सर्वोपरि रखते हुए शरद पवार का नाम तय किया गया।

वडेट्टीवार ने कहा, शरद पवार साहब सबसे वरिष्ठ नेता हैं। हमने महाविकास अघाड़ी की नैतिकता और मर्यादा का पालन करते हुए उन्हें समर्थन देने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि शरद पवार के करीबियों ने सीधे मल्लिकार्जुन खड़गे और उद्धव ठाकरे से संपर्क किया था, जिसके बाद यह सहमति बनी।

राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर कहांं फंसा था पेंच? समझिए सीटों का गणित

दरअसल, महाराष्ट्र की इस अकेली राज्यसभा सीट को लेकर महा विकास आघाड़ी के तीनों घटक दल एनसीपी (SP), कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने पहले अपना-अपना दावा पेश किया था। कांग्रेस ने खुद को राष्ट्रीय पार्टी बताते हुए सीट पर दावा किया था, जबकि शिवसेना (UBT) का तर्क था कि विधानसभा में संख्या बल के आधार पर उसे पहला हक मिलना चाहिए।

इन दावों के बीच सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन में शुरुआती असहमति सामने आई, जिससे विपक्षी एकता पर सवाल उठने लगे थे। हालांकि, वरिष्ठता और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए लास्ट में शरद पवार के नाम पर सहमति बनी। बता दें कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च 2026 है। यदि सात सीटों के लिए केवल सात ही उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो चुनाव निर्विरोध हो जाएगा।

बीजेपी और महायुति की क्या है रणनीति

सत्ताधारी महायुति गठबंधन ने अपनी छह सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। BJP पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, माया इवनाते और रामराव वडकुते को मैदान में उतारा है। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ हुई चर्चा के बाद, एनसीपी (अजीत पवार) की ओर से पार्थ पवार (अजीत पवार के बेटे) का नामांकन दाखिल होना तय माना जा रहा है।

शरद पवार की उम्मीदवारी के क्या हैं मायने

शरद पवार का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। 85 वर्षीय पवार का राज्यसभा जाना न केवल एनसीपी (एसपी) के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह केंद्र की राजनीति में विपक्ष की आवाज को मजबूती देगा। उनके नाम पर सहमति बनने से यह संदेश गया है कि उद्धव ठाकरे और कांग्रेस, पवार के अनुभव को सम्मान देने के लिए पीछे हटने को तैयार हैं।

राज्यसभा चुनाव के इस समझौते को आने वाले विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। गठबंधन सहयोगियों ने यह साबित करने की कोशिश की है कि सीटों के बंटवारे पर मतभेद होने के बावजूद वे अंततः एकजुट होकर बीजेपी का मुकाबला करेंगे।



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SA vs NZ: एडन मारक्रम ने 16 पुराना रिकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास, फिर हुए ऐसे OUT कि मचा बवाल!


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oi-Amit Kumar

SA vs NZ T20 World Cup 2026: ईडन गार्डन्स के मैदान पर आज टी20 वर्ल्ड कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में कई बड़े रिकॉर्ड बने। दूसरी तरफ खेल के नियमों और अंपायरिंग फैसलों पर बहस छिड़ गई। न्यूजीलैंड के खिलाफ इस नॉकआउट मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी साउथ अफ्रीकी टीम ने कप्तान एडन मारक्रम के ऐतिहासिक कीर्तिमान और मार्को येनसन के जुझारू अर्धशतक की बदौलत चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया।

मारक्रम ने तोड़ा ग्रीम स्मिथ का 16 साल पुराना रिकॉर्ड (SA vs NZ T20 World Cup 2026)

मैदान पर कदम रखते ही एडन मारक्रम ने दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया। वह टी20 वर्ल्ड कप में बतौर कप्तान सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी बन गए हैं। यह मारक्रम का बतौर कप्तान विश्व कप में 17वां मैच है। उन्होंने पूर्व दिग्गज ग्रीम स्मिथ के 16 मैचों (2007-2010) के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।

SA vs NZ 1

अंपायरिंग विवाद: मारक्रम के कैच पर छिड़ी बहस

मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 8वें ओवर में आया, जब रचिन रवींद्र की गेंद पर मारक्रम ने एक लंबा शॉट खेलने का प्रयास किया। लॉन्ग-ऑन पर फील्डिंग कर रहे डेरिल मिचेल ने आगे की ओर गोता लगाते हुए एक बेहद निचला कैच लपका। मैदानी अंपायर एलेक्स वार्फ ने फैसला थर्ड अंपायर नितिन मेनन को भेजा। रिप्ले में फ्रंट एंगल से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि गेंद जमीन को छू गई है, लेकिन साइड-ऑन एंगल ने अंपायर को संतुष्ट किया कि मिचेल की उंगलियां गेंद के नीचे थीं।

कैच को लेकर मचा बवाल

नितिन मेनन ने मारक्रम को आउट करार दिया, जिसने न केवल फैंस बल्कि कमेंट्री बॉक्स में भी विशेषज्ञों के बीच मतभेद पैदा कर दिए। मारक्रम 20 गेंदों में 18 रन बनाकर पवेलियन लौटे। शुरुआती झटकों के बाद जब टीम 77 रन पर 5 विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी, तब युवा ट्रिस्टन स्टब्स और ऑलराउंडर मार्को येनसन ने मोर्चा संभाला। दोनों के बीच हुई 50 से अधिक रनों की साझेदारी ने टीम को सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाया। मार्को येनसन ने संकट की स्थिति में बेहतरीन अर्धशतक जड़ा, जिसकी मदद से साउथ अफ्रीका ने निर्धारित 20 ओवरों में 8 विकेट खोकर 169 रन बनाए।



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