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अमेरिका-इजरायल हमले के बीच भारत छोड़ ईरान जाना चाहती है ये बॉलीवुड एक्ट्रेस, वहां के हालत पर हैं दुखीं


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oi-Shashank Mani Pandey

मिडिल ईस्ट में चल रहे संकटों की बीच कई एक्टर और एक्ट्रेसेस ने अपनी बात रखी। इसमें ईरानी मॉडल और एक्ट्रेस भी शामिल हैं। अब हाल ही में ईरानी एक्ट्रेस मंदाना करीमी ने खुलासा किया है कि पॉलिटिकल मुद्दों पर खुलकर बोलने की वजह से उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। उनका कहना है कि ईरान के हालात पर आवाज उठाने के बाद उनके कई प्रोजेक्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए। इतना ही नहीं, कुछ करीबी दोस्त भी उनसे दूरी बना ली है। इन सबके बीच मंदाना ने एक बड़ी बात कही है।

Mandana Karimi

ईरान के मुद्दों पर रही हैं मुखर
मंदाना लंबे समय से ईरान में महिलाओं और युवाओं के अधिकारों को लेकर खुलकर बोलती रही हैं। उन्होंने वहां के शासन की आलोचना करते हुए उसे तानाशाही बताया था। उनका दावा है कि कई मासूम लोगों को अपनी आवाज उठाने की कीमत चुकानी पड़ी है। वह एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ईरान की समर्थक हैं। मंदाना ने बताया कि जनवरी से उन्होंने काम करना बंद कर दिया है। राजनीतिक रूप से सक्रिय होने के कारण उनके कई प्रोजेक्ट्स उनसे छिन गए। उन्होंने ईरान की असली स्थिति दिखाने के लिए वीडियो और तस्वीरें अलग-अलग मंचों पर साझा कीं, लेकिन उन्हें लगा कि मीडिया में सही तस्वीर सामने नहीं आ रही।

सोशल मीडिया पर जताई चिंता
एक इंटरव्यू में मंदाना ने सोशल मीडिया के “60 सेकंड ओपिनियन” ट्रेंड पर चिंता जताई। उनका कहना है कि लोग छोटी-छोटी क्लिप देखकर तुरंत राय बना लेते हैं। उन्होंने अपील की कि किसी भी युद्ध या हिंसा से जुड़े वीडियो को देखते समय पहले सहानुभूति रखें और अलग-अलग सोर्सेस से जानकारी भी चेक करें।

भारत छोड़ने का इरादा
मंदाना ने यह भी कहा कि वह फिलहाल भारत छोड़ने की प्लानिंग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों से वह खुद को अकेला और अलग-थलग महसूस कर रही हैं। हालांकि भारत ने उन्हें करियर, प्यार और दोस्ती दी, फिर भी वह अपने देश की याद में भावुक हैं। उन्होंने साफ कहा कि जैसे ही ईरान में मौजूदा शासन खत्म होगा, वह तुरंत अपने वतन लौट जाएंगी। फिलहाल, वहां की परिस्थितियों को देखते हुए एक मॉडल और अभिनेत्री के रूप में रहना उनके लिए संभव नहीं है।



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सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान को एक और झटका, खिलाड़ियों ने बीच मैदान पर किया विद्रोह, पूरी दुनिया हैरान


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oi-Naveen Sharma

खेल के मैदान अक्सर जीत और हार के गवाह बनते हैं, लेकिन सोमवार की रात ऑस्ट्रेलिया के सीबस सुपर स्टेडियम में जो हुआ, उसने खेल के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया। महिला एशियन कप के अपने शुरुआती मुकाबले में दक्षिण कोरिया के खिलाफ उतरी ईरान की महिला नेशनल फुटबॉल टीम ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरी दुनिया की राजनीति और खेल जगत में खलबली मचा दी है।

मैच शुरू होने से ठीक पहले जब स्टेडियम के लाउडस्पीकर्स पर ईरान का राष्ट्रगान गूंजना शुरू हुआ, तब ईरानी महिला खिलाड़ी एक कतार में खड़ी थीं। आम तौर पर खिलाड़ी जोश के साथ अपना राष्ट्रगान गाते हैं, लेकिन यहां दृश्य बिल्कुल अलग था। पूरी टीम पत्थर की तरह अडिग और शांत खड़ी रही।

iran football team

प्लेयर्स ने नहीं दिया कोई रिएक्शन

खिलाड़ियों ने अपने होंठ तक नहीं हिलाए। उनकी यह ख़ामोशी उस वक्त और भी गहरी हो गई जब स्टैंड्स में मौजूद दर्शकों ने हूटिंग शुरू कर दी। दक्षिण कोरिया ने यह मैच 3-0 से जीता, लेकिन मैच खत्म होने के बाद चर्चा स्कोर की नहीं, बल्कि उन 11 खिलाड़ियों के मौन विद्रोह की थी।

ईरानी खिलाड़ियों का यह साहसिक कदम ऐसे समय में आया है जब उनका देश एक विनाशकारी मोड़ पर खड़ा है। पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान की नींव हिला दी है। इस हमले में ईरान के सबसे ताकतवर नेता और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई।

इस घटना के बाद से ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले पड़ोसी देशों (जैसे बहरीन और कतर) पर मिसाइलों और ड्रोन्स की बौछार कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने पलटवार किया, तो उसे ऐसी सैन्य ताकत का सामना करना पड़ेगा जो इतिहास में कभी नहीं देखी गई।

मैच के बाद भी रहा तनाव

मैच के बाद का माहौल और भी तनावपूर्ण रहा। जब टीम की कप्तान ज़हरा घनबारी और मैनेजर मरज़िया जाफ़री से सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत और टीम के भविष्य पर सवाल पूछे गए, तो एशियन फुटबॉल कॉन्फेडरेशन (AFC) के अधिकारियों ने तुरंत दखल दिया। जाफ़री ने अपनी भाषा (फारसी) में जवाब देना चाहा, लेकिन मीडिया प्रतिनिधियों ने अनुवाद होने से पहले ही उन्हें रोक दिया और सिर्फ खेल पर ध्यान देने की हिदायत दी।





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‘मुझे मार डालेंगे’, खामेनेई की मौत पर जश्न मनाने पर 33 साल की बॉलीवुड हसीना के साथ ये क्या हुआ? बड़ा खुलासा


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oi-Purnima Acharya

Elnaaz Norouzi Iran War: मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल युद्ध के चलते बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मिसाइल हमलों, राजनीतिक बयानबाजी और लगातार बिगड़ते हालात के बीच सिर्फ राजनेता ही नहीं बल्कि मनोरंजन जगत से जुड़े लोग भी खुलकर अपनी राय रख रहे हैं।

एक्ट्रेस एलनाज नौरोजी के बयान ने काटा बवाल
इसी बीच ईरानी मूल की एक्ट्रेस एलनाज नौरोजी का बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। वेब सीरीज सैक्रेड गेम्स और फिल्म तेहरान से पहचान बनाने वाली एलनाज नौरोजी ने ईरान के मौजूदा हालात और सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया है कि अगर वह अपने देश लौटीं तो उनकी जान खतरे में पड़ सकती है।

Elnaaz Norouzi

एलनाज नौरोजी के जान को खतरा?

युद्ध के माहौल और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एलनाज नौरोजी का ये बयान अब ग्लोबल डिबेट का हिस्सा बन गया है। दरअसल एक्ट्रेस एलनाज नौरोजी इस समय अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में छाई हुई हैं। एक्ट्रेस ने दावा किया है कि अगर वह ईरान लौटती हैं तो उनकी जान को खतरा हो सकता है।

खामेनेई पर बयान के बाद चर्चा में आईं एलनाज नौरोजी

दरअसल हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद एलनाज नौरोजी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो और पोस्ट शेयर कर अपनी प्रतिक्रिया दी थी, जिसमें उन्होंने इस खबर पर खुशी जताई थी। इसके बाद उनका बयान तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो गया था।

’47 साल से जिस खुशखबरी का इंतजार था’

एलनाज नौरोजी ने अपने पोस्ट में लिखा था कि ये वह खबर है जिसका इंतजार कई ईरानी नागरिक दशकों से कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि उनकी प्रतिक्रिया किसी देश के खिलाफ नहीं बल्कि मौजूदा शासन व्यवस्था के खिलाफ है। एक्ट्रेस का कहना है कि ईरान के लोगों और वहां की सरकार को अलग-अलग नजरिए से देखना जरूरी है।

‘ईरान नहीं लौट सकती, मुझे मार देंगे’

फिलहाल एक इंटरव्यू में एलनाज नौरोजी ने खुलकर कहा है कि वह लंबे समय से अपने देश नहीं गई हैं और फिलहाल वहां जाना उनके लिए सुरक्षित नहीं है। उनके शब्दों में अगर वह ईरान में कदम रखती हैं तो उनकी मौत हो सकती है। उन्होंने बताया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल और उनके सार्वजनिक बयानों के कारण जोखिम काफी ज्यादा बढ़ गया है।

ईरान के हालातों को लेकर एक्ट्रेस का शॉकिंग खुलासा

-एलनाज नौरोजी ने बातचीत में कहा कि ईरान के अधिकांश लोग शिक्षित और प्रगतिशील सोच रखते हैं लेकिन इस्लामिक रिपब्लिक की नीतियां आम नागरिकों की सोच से अलग हैं।

-एक्ट्रेस ने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि एक समय ईरान के अमेरिका और इजरायल दोनों के साथ बेहतर संबंध थे लेकिन मौजूदा शासन की नीतियों ने हालात बदल दिए हैं। सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाती है और विरोध प्रदर्शनों को दबाया जाता है।

‘महसा अमिनी आंदोलन ने बदली सोच’

-एलनाज नौरोजी ने साल 2022 में हुई 22 साल की कुर्द महिला महसा अमिनी की मौत का भी जिक्र किया, जिसने पूरे ईरान में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था।

-एलनाज नौरोजी ने कहा- हिजाब नियमों को लेकर गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस हिरासत में हुई महसा अमिनी की मौत ने महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों पर वैश्विक बहस छेड़ दी थी। एलनाज नौरोजी के अनुसार उसी समय उन्होंने खुलकर शासन के खिलाफ आवाज उठाई थी जिससे उनका परिवार भी उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गया था।

‘अगर लोग मारे जाएंगे तो जिम्मेदार सरकार होगी’

हालिया संघर्ष पर प्रतिक्रिया देते हुए एलनाज नौरोजी ने कहा था कि युद्ध में आम नागरिकों की मौत के लिए सत्ता में बैठे लोग जिम्मेदार होंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि वर्षों से जनता की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है और यही असंतोष की बड़ी वजह है।

तेहरान से रिफ्यूजी कैंप तक का सफर

-एलनाज नौरोजी का बचपन भी संघर्षों से भरा रहा है। वह करीब 8 साल की उम्र तक तेहरान में रहती थीं जिसके बाद उनका परिवार जर्मनी चला गया था। वहां उन्हें शरणार्थी शिविर में रहना पड़ा था, जहां जीवन बेहद कठिन था।

-एलनाज नौरोजी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कई बार घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद सिर्फ साधारण खाना मिलता था। आर्थिक रूप से साधारण परिवार से आने वाली एलनाज ने मुश्किल हालातों के बीच अपना करियर बनाया।

एलनाज ने भारत में बनाई नई पहचान

युवावस्था में भारत आकर एलनाज ने मॉडलिंग और अभिनय की दुनिया में कदम रखा था और धीरे-धीरे हिंदी वेब सीरीज और फिल्मों में अपनी पहचान बनाई। आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही हैं लेकिन अपने देश से दूरी और राजनीतिक हालात अब भी उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बने हुए हैं।

एलनाज नौरोजी के बयान ने मचाया हंगामा

एलनाज नौरोजी के बयान ने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मनोरंजन जगत में नई बहस छेड़ दी है। जहां कुछ लोग उनके साहस की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कई लोग उनके बयान को विवादित भी बता रहे हैं।



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होली पर जरूर जाएं भारत की इन 8 जगहों पर, रंगों से हो जाएंगे सराबोर!


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Holi Travel Guide: भारत में होली का त्योहार सिर्फ़ एक सेलिब्रेशन नहीं, बल्कि एक भावना है. अगर आप इस होली घर से बाहर निकलकर रंगों के असली दंगल में डूबना चाहते हैं, तो भारत की ये आठ जगहें आपके लिए सबसे अच्छी हैं. यहां की होली इतनी मशहूर है कि दुनिया भर से लोग इसे देखने आते हैं…

मथुरा और वृंदावन: होली का सेंटर, जहां कई दिनों तक सेलिब्रेशन चलता है. बांके बिहारी मंदिर में “फूलों वाली होली” का अनुभव करें, जहां पुजारी भक्तों पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाते हैं, जिससे आध्यात्मिक और वाइब्रेंट माहौल बनता है. भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में होली का उत्साह हफ्तों पहले शुरू हो जाता है. यहां के द्वारकाधीश मंदिर की होली और विश्राम घाट पर होने वाले आयोजन आपको भक्ति और रंगों के अनूठे संगम में सराबोर कर देंगे.

Holi Travel Guide: Must-Visit Places Across India For The Festival Of Colours

बरसाना: मशहूर “लट्ठमार होली” के लिए जाना जाता है, जिसमें औरतें पूजा करते समय आदमियों पर लाठियां फेंकती हैं. यह पुरानी परंपरा राधा और कृष्ण की कहानी को ज़िंदा करती है और एक एडवेंचरस, ड्रामाटिक और दिलकश नज़ारा पेश करती है.

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जयपुर: पिंक सिटी होली में रॉयल्टी लाती है। महल के आंगनों में लोक संगीत, पारंपरिक डांस और कुदरती रंगों के साथ होली मनाएं, जहां राजस्थान की शाही विरासत को अच्छी तरह से प्लान किए गए, सुरक्षित और वाइब्रेंट सेलिब्रेशन के ज़रिए खूबसूरती से दिखाया जाता है.

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उदयपुर: सिटी पैलेस में होली की फॉर्मल शुरुआत के साथ एक शानदार होली सेलिब्रेशन का अनुभव करें. शाही जुलूस, लोक परफॉर्मेंस और झील के खूबसूरत नज़ारे इसे सेलिब्रेट करने का एक शानदार और वाइब्रेंट तरीका बनाते हैं.

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पुष्कर: युवाओं के लिए एक स्वर्ग, पुष्कर होली के दौरान एक शानदार, खुली हवा में सेलिब्रेशन से भर जाता है. पवित्र झील के आस-पास म्यूज़िक, डांस और सुकून भरे माहौल के साथ, यह उन लोगों के लिए एकदम सही जगह है जो एक एनर्जेटिक सेलिब्रेशन चाहते हैं.

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वाराणसी: गंगा नदी के किनारे पुराने घाटों पर होली मनाएं। यहां का जोश बेमिसाल है, सड़कें रंगों और म्यूज़िक से भरी होती हैं, और पास में ही अनोखी, अचानक होने वाली और दिल को छू लेने वाली “मसान की होली” की रस्म होती है.

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आनंदपुर साहिब: रंगों के बजाय, ज़बरदस्त “होला घुला” का अनुभव करें. यह सिख परंपरा मार्शल आर्ट, घुड़सवारी और तलवारबाज़ी दिखाती है, जो भारत में पारंपरिक, रंगीन त्योहारों के जश्न का एक ज़ोरदार और अनुशासित विकल्प देती है.

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शांतिनिकेतन: रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शुरू किया गया ‘बसंत उत्सव’ शांतिनिकेतन में बेहद शालीनता और सांस्कृतिक तरीके से मनाया जाता है. यहां छात्र पीले वस्त्र पहनकर नृत्य और संगीत के माध्यम से बसंत का स्वागत करते हैं और गुलाल से होली खेलते हैं.



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चंद्र ग्रहण आज, देशभर में मंदिरों के कपाट बंद: शाम 7 बजे बाद खोले जाएंगे, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्मारती के दौरान होली उत्सव मनाया गया


नई दिल्ली16 मिनट पहले

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उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार सुबह भस्मारती के दौरान होली उत्सव मनाया गया।

साल 2026 के पहले चंद्र ग्रहण से पहले ‘सूतक काल’ शुरू हो गया है। देशभर के मंदिरों के पट मंगलवार सुबह मंगल आरती के बाद बंद कर दिए गए हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम 7 बजे दरवाजे खोले जाएंगे, भगवान को स्नान कराया जाएगा और श्रृंगार होगा। भोग आरती के बाद मंदिर रात तक खुले रहेंगे। उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार सुबह भस्म आरती के दौरान होली उत्सव मनाया गया।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मंगलवार (3 मार्च 2026) को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। आज का चंद्रग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। ग्रहण दोपहर 3.21 बजे शुरू होगा और शाम 6.47 मिनट तक रहेगा।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह भस्मारती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह भस्मारती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।

बंद मंदिरों की 5 तस्वीरें :

तिरुमाला में तिरुपति मंदिर बंद कर दिया गया है।

तिरुमाला में तिरुपति मंदिर बंद कर दिया गया है।

अयोध्या में रामलला मंदिर को जाने वाले रास्ते बंद कर दिया गया।

अयोध्या में रामलला मंदिर को जाने वाले रास्ते बंद कर दिया गया।

मदुरै (तमिलनाडु) का मीनाक्षी मंदिर बंद है।

मदुरै (तमिलनाडु) का मीनाक्षी मंदिर बंद है।

दिल्ली का लक्ष्मीनारायण मंदिर मंगला मंदिर के बाद बंद कर दिया गया।

दिल्ली का लक्ष्मीनारायण मंदिर मंगला मंदिर के बाद बंद कर दिया गया।

मथुरा में बांके बिहारी मंदिर के कपाट को पूजा के बाद बंद किया गया।

मथुरा में बांके बिहारी मंदिर के कपाट को पूजा के बाद बंद किया गया।

ग्रहण के बाद मंदिरों का शुद्धिकरण होता है

हिंदू संस्कृति में चंद्र ग्रहण को धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इसके दौरान और बाद में विशेष नियम और पूजा-पाठ किए जाते हैं।

हिंदू परंपरा के अनुसार, सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है, जो चंद्र या सूर्य ग्रहण से कुछ घंटे पहले शुरू होता है। इस दौरान मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, धार्मिक गतिविधियां रोक दी जाती हैं और श्रद्धालुओं को भोजन करने या कोई शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।

ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया की जाती है, जिसमें भगवान को स्नान कराना और विशेष पूजा करना शामिल है। इसके बाद मंदिर श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए जाते हैं

चंद्र ग्रहण क्या होता है?

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गुरुत्वाकर्षण बल यानी ग्रेविटेशनल फोर्स की वजह से पृथ्वी और सभी दूसरे ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। पृथ्वी, 365 दिनों में सूर्य का एक चक्कर लगाती है।

जबकि चंद्रमा एक प्राकृतिक उपग्रह है, जो पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। उसे पृथ्वी के एक चक्कर लगाने में 27 दिन लगते हैं।

सूर्य के चक्कर लगाने के दौरान कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। इस दौरान सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने से चंद्र ग्रहण होता है।

चंद्र ग्रहण की घटना तभी होती है जब सूर्य, पृथ्‍वी और चंद्रमा एक सीध में हों, खगोलीय विज्ञान के अनुसार ये केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होता है। इसी वजह से ज्यादातर चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन होते हैं।

चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते हैं

1.पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total lunar eclipse): पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य तथा चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं। इसके कारण पृथ्वी की छाया पूरी तरह से चंद्रमा को ढंक लेती है, जिससे पूरी तरह से चंद्रमा पर अंधेरा छा जाता है।

2.आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial lunar Eclipse): जब पृथ्वी की परछाई चंद्रमा के पूरे भाग को ढंकने की बजाय किसी एक हिस्से को ही ढंके तब आंशिक चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान चंद्रमा के केवल एक छोटे हिस्से पर ही अंधेरा होता है।

3. उपछाया चंद्र ग्रहण (Penumbral lunar Eclipse): उपछाया चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा के बाहरी भाग पर पड़ती है। इस तरह के चंद्र ग्रहण को देखना मुश्किल होता है।

पहली बार चंद्र ग्रहण के बारे में कब पता लगा

280 ईस्वी यानी 1742 साल पहले चीन के ‘झोऊ राजवंश’ से जुड़े मकबरे में एक किताब मिली थी। चीनी भाषा में लिखी गई इस किताब का नाम ‘झोऊ शू’ था। इस किताब में सैकड़ों साल पहले चंद्र ग्रहण लगने की बात लिखी गई थी। रिसर्चर प्रोफेसर एस. एम. रसेल ने इस किताब के हवाले से इंसान के पहली बार चंद्र ग्रहण की घटना पर गौर करने की तारीख बताई है। उनके मुताबिक 3158 साल पहले यानी 1137 ईसापूर्व में 29 जनवरी को पहली बार इंसानों ने चंद्र ग्रहण को नोटिस किया था। चंद्र ग्रहण के दिन चंद्रमा लाल क्यों दिखाई देता है?

जब चंद्रमा पृथ्वी की प्रच्छाया में होता है, सिर्फ तभी चंद्र ग्रहण के दिन चंद्रमा देखने पर लाल दिखाई देता है। इसकी वजह यह है कि सूर्य का प्रकाश जैसे ही पृथ्वी के वायुमंडल में आता है वो अपने सात रंगों में बंट जाता हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा वेवलेंथ गहरे लाल रंग की होती है और सबसे कम वेवलेंथ बैगनी रंग की होती है। ऐसे में कम वेवलेंथ वाले रंग तो पृथ्वी के वायुमंडल में फैल जाते हैं, लेकिन गहरे लाल रंग वाली रोशनी चंद्रमा से टकराती है और वापस लौटकर हम तक पहुंचती है। इसीलिए चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है और इसे हम ब्लड मून भी कहते हैं।

एक साल में कितनी बार चंद्र ग्रहण लग सकता है?

NASA के मुताबिक एक साल में ज्यादातर 2 बार चंद्र ग्रहण होता है। किसी साल चंद्र ग्रहण लगने की संख्या 3 भी हो सकती है। सैकड़ों साल में लगने वाले कुल चंद्र ग्रहणों में से लगभग 29% चंद्र ग्रहण पूर्ण होते हैं। औसतन, किसी एक स्थान से हर 2.5 साल में पूर्ण चंद्र ग्रहण देखा जा सकता है। चंद्र ग्रहण 30 मिनट से लेकर एक घंटे के लिए लगता है।

चंद्र ग्रहण के दौरान पता चली पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी

1. 150 ईसा पूर्व यानी आज से करीब 2100 साल पहले चंद्र ग्रहण के दौरान ग्रीस के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी का व्यास यानी डायमिटर पता किया था। इससे पता चला कि पृथ्वी कितनी बड़ी है। 2. 400 ईसा पूर्व ग्रीस के वैज्ञानिक अरिस्तर्खुस ने चंद्र ग्रहण की मदद से ही पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी पता की थी। 3. आगे चलकर ग्रीस के एस्ट्रोलॉजर क्लाडियस टॉलमी ने दूसरी सदी यानी 1800 साल पहले इसी के आधार पर दुनिया के सबसे पुराने वर्ल्ड मैप में से एक बनाया था, जिसका नाम टॉलमी वर्ल्ड मैप था।

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चंद्रग्रहण आज:सूतक शाम 6.47 बजे चंद्रग्रहण के साथ होगा खत्म, सूतक में करें मंत्र जप और दान-पुण्य

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आज (3 मार्च) भी फाल्गुन पूर्णिमा है। कल 2 तारीख की रात होलिका दहन हुआ, लेकिन आज चंद्रग्रहण की वजह से अधिकतर क्षेत्रों में धुलंडी नहीं मनाई जा रही है, इन क्षेत्रों में कल यानी 4 मार्च को होली खेली जाएगी। पढ़ें पूरी खबर…

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क्या आप जानते हैं आलू सबसे ज्यादा किस देश में उगाया और खाया जाता हैं? जानिए


FAO और अन्य वैश्विक कृषि रिपोर्टों के अनुसार, दुनिया में सबसे अधिक आलू चीन में उगाए जाते हैं. चीन हर वर्ष लगभग 93–95 मिलियन टन आलू का उत्पादन करता है, जो दुनिया की कुल उत्पादन मात्रा का लगभग एक‑चौथाई है.

दूसरे स्थान पर भारत है, जहां लगभग 56–60 मिलियन टन आलू का उत्पादन होता है. चीन और भारत दोनों ही विशाल भूमि क्षेत्र और अनुकूल जलवायु के कारण आलू उत्पादन में अग्रणी हैं.

दुनिया में सबसे ज्यादा आलू कौन खाता है?
आलू खाने के मामले में भी चीन ही दुनिया में सबसे आगे है. 2023 के आंकड़ों के अनुसार चीन ने लगभग 69.8 मिलियन टन आलू का उपभोग किया, जो किसी भी अन्य देश से अधिक है. हालांकि प्रति व्यक्ति सबसे अधिक आलू बेलारूस में खाया जाता है, जहां एक व्यक्ति साल में लगभग 167 किलो आलू खाता है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति खपत है.

आलू से बनी कुछ खास रेसिपियां
1. आलू पराठा
सबसे लोकप्रिय भारतीय नाश्ते में से एक. गेहूं के आटे की लोई में मसालेदार आलू का मिश्रण भरकर तवे पर घी के साथ सेंका जाता है. इसे दही या अचार के साथ परोसा जाता है.

2. आलू टिक्की
उबले आलू में मसाले डालकर गोल टिक्कियां बनाई जाती हैं और तेल में कुरकुरी तली जाती हैं. इसे चटनी और दही के साथ चाट के रूप में भी खाया जाता है.

3. दम आलू
छोटे आलू को तला जाता है और फिर दही, टमाटर व काजू की गाढ़ी मसालेदार ग्रेवी में पकाया जाता है. कश्मीरी दम आलू इसका विशेष रूप है.

4. फ्रेंच फ्राइज
दुनिया भर में लोकप्रिय, आलू की लम्बी स्टिक्स को डीप फ्राई कर के खाया जाता है. यह फास्ट‑फूड का सबसे पसंदीदा आइटम है.

5. आलू का हलवा
उपवास के दिनों में बनाया जाने वाला मीठा व्यंजन. उबले आलू को घी, चीनी और इलायची के साथ पकाकर तैयार किया जाता है.

आलू दुनिया के सबसे अधिक खाए जाने वाले और उगाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में से एक है.

सबसे ज्यादा उत्पादन: चीन
सबसे ज्यादा कुल खपत: चीन
सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति खपत: बेलारूस



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Khamenei Family Tree: खामेनेई की मौत के बाद के परिवार में अब कौन-कौन बचा? कौन थीं पत्नी, पूरे खानदान का हिसाब


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oi-Pallavi Kumari

Khamenei Family Tree: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की इजरायली-अमेरिकी हमले में 28 फरवरी 2026 को मौत हो चुकी है। इस हमले में खामेनेई के बेटी-दामाद,बहू-पोती समेत कुछ सदस्य भी मारे गए हैं। हालांकि किन-किन की मौत हुई, इसे लेकर आधिकारिक तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। अब 2 मार्च सोमवार को ईरान की सरकारी मीडिया ने खबर दी है कि खामेनेई की पत्नी मंसूरेह खोजस्ते बाघेरजादेह की भी मौत हो गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब खामेनेई के परिवार में कौन-कौन बचा है और उनकी विरासत किसके हाथ में है।

खामेनेई की मौत बाद परिवार की स्थिति (Khamenei Family After Death)

रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में खामेनेई की एक बेटी, दामाद, बहू और पोती के मारे जाने की खबर है, लेकिन नामों की पुष्टि नहीं हुई है। उनकी मौत के बाद उनके दूसरे सबसे बड़े बेटे मोजतबा हुसैनी खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि यह भी बताया गया कि हमले में मोजतबा की पत्नी जहरा हद्दा अदील की भी जान चली गई। इससे परिवार को व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका लगा है।

Ali Khamenei family tree after death who survived wife children grandchildren details in hindi

अयातुल्लाह अली खामेनेई के कितने बच्चे और कौन हैं ये? (Ayatollah Ali Khamenei Children)

  • अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनकी पत्नी मंसूरा खोजस्तेह बाघेरजादेह के छह बच्चे बताए जाते हैं। चार बेटे-मोस्तफा, मोजतबा, मसूद और मेयसाम। दो बेटियां-बोशरा और होदा।
  • खामेनेई का सबसे बड़े बेटे मोस्तफा एक धर्मगुरु हैं। उन्होंने ईरानी दार्शनिक अजीजुल्लाह खोशवक्त की बेटी से शादी की और ईरान-इराक युद्ध में भी हिस्सा लिया। मसूद ने ईरानी नेता मोहसिन खराजी की बेटी से विवाह किया, लेकिन वे किसी सरकारी पद पर नहीं हैं।
  • मोजतबा का नाम समय-समय पर राजनीतिक चर्चाओं में आता रहा है। वहीं मेयसाम के बारे में सार्वजनिक जानकारी सीमित है। बेटियों में बोशरा और होदा की शादी प्रभावशाली धार्मिक परिवारों में हुई है।
  • खामेनेई की बेटी बोशरा की शादी मिस्बाह अल-होदा बाघेरी कानी से हुई है। वहीं दूसरी बेटी होदा की शादी मोहम्मद मोहम्मदी गोलपायगानी से हुई है। इजरायली-अमेरिकी हमले में खामेनेई के किस दामाद की मौत हुई है, फिलहाल इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
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खामेनेई की पत्नी मंसूरा खोजस्तेह बाघेरजादेह कौन थीं? (Who is Ayatollah Ali Khamenei wife Mansoureh Khojasteh Bagherzadeh)

खामेनेई की पत्नी मंसूरा खोजस्तेह बाघेरजादेह ( Mansoureh Khojasteh Bagherzadeh) लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से दूर रहीं। उन्होंने 1964 में खामेनेई से शादी की थी। मशहद के एक धार्मिक और कारोबारी परिवार में जन्मीं मंसूरा बेहद लो प्रोफाइल रहीं। उनके पिता मोहम्मद इस्माइल खोजस्तेह बाघेरजादेह मशहद के जाने-माने व्यापारी थे।

मंसूरा के भाई हसन, ईरान के सरकारी प्रसारण नेटवर्क इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े रहे। बावजूद इसके, मंसूरा ने कभी राजनीतिक मंच साझा नहीं किया और उन्हें अक्सर ईरानी नेतृत्व की “इनविजिबल वुमन” कहा गया।

खामेनेई के पोते-पोतियां और विदेश कनेक्शन (Grandchildren & Extended Family)

खामेनेई के परिवार में कई नाती-पोते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से सिर्फ एक नाम सामने आया है-मोहम्मद बाघेर खामेनेई। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक परिवार के कुछ सदस्य विदेशों, खासकर पेरिस में भी रहते हैं।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई फैमिली ट्री टेबल

संबंध नाम विवरण
पिता सैयद जावद खामेनेई इराक में जन्मे इस्लामी विद्वान (आलिम) और मुजतहिद, अज़रबैजानी तुर्क मूल
माता खदीजे मिर्दामादी हाशेम मिर्दामादी की बेटी, फारसी मूल, यज्द से संबंध

दूसरी पीढ़ी (Ali Khamenei & Siblings)

संबंध नाम विवरण
स्वयं अयातुल्लाह अली खामेनेई जन्म 19 अप्रैल 1939, मशहद
भाई Hadi Khamenei मौलवी और अखबार संपादक
भाई मोहम्मद खामेनेई धर्मगुरु
बहन फातेमेह होसैनी खामेनेई निधन 2015
अन्य कुल 8 भाई-बहन अली खामेनेई दूसरे नंबर पर थे

तीसरी पीढ़ी (Wife & Children)

संबंध नाम विवरण
पत्नी मंसूरा खोजस्तेह बाघेरजादेह विवाह 1964, लो-प्रोफाइल सार्वजनिक जीवन
बेटा मोस्तफा खामेनेई धर्मगुरु, ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया
बेटा मोजतबा हुसैनी खामेनेई रिपोर्ट्स अनुसार नया सुप्रीम लीडर घोषित
बहू जहरा हद्दा अदील हमले में मौत की खबर
बेटा मसूद खामेनेई किसी सरकारी पद पर नहीं
बेटा मेयसाम खामेनेई सीमित सार्वजनिक जानकारी
बेटी बोशरा खामेनेई विवाह: मिस्बाह अल-होदा बाघेरी कानी
बेटी होदा खामेनेई विवाह: मोहम्मद मोहम्मदी गोलपायगानी

चौथी पीढ़ी (Grandchildren)

संबंध नाम विवरण
पोता मोहम्मद बाघेर खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने आया एकमात्र नाम
अन्य कई नाती-पोते कुछ विदेश (संभवत: पेरिस) में रहते बताए जाते हैं

वंश परंपरा (Ancestral Line)

पूर्वज विवरण
सैय्यद हुसैन तफरेशी अफ्तासी सैय्यद वंश
वंश संबंध चौथे शिया इमाम अली अल-सज्जाद के वंशज सुल्तान-उल-उलमा अहमद तक परंपरा जोड़ी जाती है
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खामेनेई के माता-पिता कौन थे और कितने भाई-बहन थे (Khamenei Brothers & Sisters)

  • खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद में हुआ था। उनके पिता का नाम सैयद जावद खामेनेई (Javad Khamenei) थाजो एक इराक में जन्मे इस्लामी विद्वान (alim) और मुजतहिद थे। उनकी माता खदीजे मिर्दामादी (Khadijeh Mirdamadi) थीं, जो हाशेम मिर्दामादी की बेटी थीं।
  • खामेनेई आठ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। उनके दो भाई भी धर्मगुरु बने। उनके छोटे भाई Hadi Khamenei एक अखबार संपादक और मौलवी हैं। उनकी बड़ी बहन फातेमेह होसैनी खामेनेई का निधन 2015 में 89 वर्ष की उम्र में हुआ।
  • उनके पिता नस्लीय रूप से अजरबैजानी तुर्क थे और खामानेह क्षेत्र से ताल्लुक रखते थे, जबकि उनकी मां यज्द की मूल निवासी फारसी पृष्ठभूमि से थीं। उनके कुछ पूर्वज वर्तमान मरकजी प्रांत के तफरेश इलाके से खामानेह (तबरीज के पास) आकर बसे थे।
  • उनके पूर्वज सैय्यद हुसैन तफरेशी बताए जाते हैं, जिन्हें अफ्तासी सैय्यद वंश का माना जाता है। वंश परंपरा को चौथे शिया इमाम अली अल-सज्जाद के वंशज सुल्तान-उल-उलमा अहमद तक जोड़ा जाता है।
  • खामेनेई की शिक्षा चार साल की उम्र में मकतब में कुरान पढ़ने से शुरू हुई। बाद में उन्होंने मशहद की हौजा (इस्लामी धार्मिक शिक्षण संस्थान) में बुनियादी और उच्च स्तर की पढ़ाई की। उनके प्रमुख शिक्षकों में शेख हाशेम क़ज़विनी और आयतुल्लाह मिलानी शामिल थे।
  • मशहद में पढ़ाई के दौरान वे कुछ धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवियों और “गॉड-वर्शिपिंग सोशलिस्ट मूवमेंट” नामक संगठन के संपर्क में भी रहे। यह संगठन इस्लामी समाजवाद की वकालत करता था और कार्ल मार्क्स, चे ग्वेरा, टीटो और अली शरियती जैसे विचारकों से प्रभावित था। इन बैठकों और भाषणों ने उनके राजनीतिक नजरिए को प्रभावित किया।
  • 1957 में वे नजफ गए, लेकिन पिता की इच्छा के कारण जल्द ही वापस मशहद लौट आए। 1958 में वे कोम में बस गए, जहां उन्होंने सैय्यद हुसैन बोरुजेर्दी और Ruhollah Khomeini की कक्षाओं में शिक्षा ली। उस दौर के कई अन्य सक्रिय मौलवियों की तरह खामेनेई भी धार्मिक अध्ययन की तुलना में राजनीति में ज्यादा सक्रिय रहे।
  • खामेनेई का परिवार हमेशा लो प्रोफाइल रहा। दुनिया के कई बड़े राजनीतिक परिवारों के उलट, उनके बच्चों और पत्नी ने कभी खुलकर सार्वजनिक भूमिका नहीं निभाई। अब उनकी मौत के बाद सत्ता और परिवार दोनों की कमान किस तरह संभाली जाएगी, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि खामेनेई का परिवार ईरान की राजनीति में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ चुका है।
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अब जानिए अयातुल्ला अली खामेनेई के बारे में ( Ayatollah Ali Khamenei Profile In Hindi)

  • 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में जन्में अयातुल्ला अली खामेनेई एक धार्मिक नेता और राजनेता थे। 1989 में वे ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर बने थे। अली खामेनेई 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे, उन्होंने कुल 36 साल तक देश का नेतृत्व किया। वे फरवरी 2026 में मौत के पहले तक मिडिल ईस्ट के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले राष्ट्र प्रमुख थे। वे शाह मोहम्मद रजा पहलवी (Mohammad Reza Pahlavi) के बाद ईरान के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेता भी थे।
  • अयातुल्ला अली खामेनेई ने अपनी आत्मकथा ‘सेल नम्बर 14’ में लिखा है कि स्कूल के दिनों में वे पढ़ाई में तेज थे, खासकर गणित और अंग्रेजी में। एक कार्यक्रम में कुरान की आयतें सुनाने पर उनकी खूब सराहना हुई और तभी उन्होंने पिता की राह पर चलकर मौलवी बनने का फैसला किया। आगे की धार्मिक शिक्षा के लिए वे कोम गए, जहां उन्होंने Ruhollah Khomeini से तालीम हासिल की। कम उम्र में ही वे धर्मगुरु के रूप में पहचान बनाने लगे।
  • उनका युवाकाल उस दौर में बीता जब ईरान में मोहम्मद रजा पहलवीका शासन था। शाह पश्चिमी संस्कृति और पंथनिरपेक्ष नीतियों को बढ़ावा देते थे, जिससे धार्मिक तबके में असंतोष था।
  • 1963 में शाह विरोधी भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसके बाद वे धीरे-धीरे सरकार विरोधी आंदोलन का अहम चेहरा बन गए और खोमैनी के करीबी सहयोगी माने जाने लगे।
  • 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद शाह की सत्ता समाप्त हुई और खोमैनी के नेतृत्व में नई व्यवस्था बनी। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में शामिल किया गया और बाद में उप रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
  • 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान उन पर बम हमला हुआ, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुए। उसी साल हुए चुनाव में वे ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने और 1989 तक इस पद पर रहे।
  • 1989 में खोमैनी के निधन के बाद उन्हें देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ चुना गया। इसके लिए संविधान में संशोधन भी किया गया। उन्होंने करीब 36 वर्षों तक देश की कमान संभाली। अपने समर्थकों के लिए वे इस्लामी व्यवस्था के संरक्षक रहे, जबकि आलोचक उन्हें सख्त और कट्टर शासन का प्रतीक मानते रहे।



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भारत-इंग्लैंड सेमीफाइनल टाई होने पर किस्मत का खेल, सुपर ओवर में आई बारिश तो कौन खेलेगा फाइनल?


Cricket

oi-Naveen Sharma

IND vs ENG: टी20 विश्व कप 2026 का सबसे बड़ा मुकाबला 5 मार्च को मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाना है। टीम इंडिया और इंग्लैंड की टीमें फाइनल की टिकट पाने के लिए आमने-सामने होंगी। क्रिकेट की अनिश्चितताओं के बीच अगर यह ‘करो या मरो’ का मुकाबला टाई हो जाए, तो फैसला कैसे होगा?

अगर मैच के निर्धारित 20-20 ओवरों के बाद स्कोर बराबर रहता है, तो मैच का फैसला सुपर ओवर से होगा। आईसीसी के नियमों के मुताबिक, जब तक कोई स्पष्ट विजेता नहीं मिल जाता, तब तक सुपर ओवर जारी रह सकते हैं।

ind vs eng

बारिश या समय की कमी बनी बाधा, तो क्या?

वानखेड़े में अगर सुपर ओवर के दौरान बारिश आ जाती है या किसी तकनीकी कारण से सुपर ओवर नहीं हो पाता, तो असली पेंच यहीं फंसेगा। आईसीसी ने सेमीफाइनल के लिए ‘रिजर्व डे’ का प्रावधान रखा है। यानी अगर 5 मार्च को मैच पूरा नहीं होता, तो अगले दिन खेल वहीं से शुरू होगा जहां रुका था।

सुपर-8 की टेबल तय करेगी फाइनल का विजेता

अगर रिजर्व डे पर भी लगातार बारिश होती है और सुपर ओवर भी संभव नहीं हो पाता, तो विजेता का फैसला टॉस या सिक्का उछालकर नहीं, बल्कि टीम के पिछले प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

पॉइंट्स टेबल का गणित: नियम कहता है कि अगर सेमीफाइनल धुला या टाई होने के बाद फैसला नहीं हो सका, तो जो टीम अपने सुपर-8 ग्रुप की स्टैंडिंग्स में ऊपर रही होगी, उसे सीधे फाइनल का टिकट मिल जाएगा।

भारत की स्थिति: इंग्लैंड की टीम अपने ग्रुप में टॉपर थी और टीम इंडिया अपने ग्रुप में दूसरे स्थान पर थी, इसे देखते हुए इंग्लैंड की टीम को फाइनल का टिकट मिल जाएगा।

इससे पहले 4 मार्च को साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच कोलकाता में पहला सेमीफाइनल मुकाबला खेला जाएगा, इस मैच में भी टाई और सुपर ओवर के दौरान यही नियम लागू होने वाला है। उस मैच में साउथ अफ्रीका टेबल टॉपर होने के नाते अगले चरण में जाने की हकदार है।



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West Asia Tension: भारतीय नाविकों की मौत के बाद डीजी शिपिंग ने जारी की एडवाइजरी, सतर्कता बरतने के दिए निर्देश


पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत के जहाजरानी महानिदेशालय ने समुद्री क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। महानिदेशालय ने कहा है कि वह फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में तेजी से बदलती सुरक्षा स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।

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क्या दिए गए निर्देश?

एडवाइजरी में जहाज संचालकों, प्रबंधन कंपनियों और कप्तानों को उच्च स्तर की सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सभी ऑपरेटरों से कहा गया है कि वे हर यात्रा से पहले मार्ग-विशेष जोखिम आकलन करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित प्राधिकरण को दें।

तीन भारतीय नाविकों की हुई मौत

महानिदेशालय ने यह भी बताया कि अब तक चार ऐसी घटनाओं की सूचना मिली है, जिनमें भारतीय नाविक प्रभावित हुए हैं। ये सभी घटनाएं विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर हुईं। इन घटनाओं में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई है, जबकि एक घायल हुआ है। डीजी शिपिंग ने स्पष्ट किया है कि स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और समुद्री सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाना आवश्यक है। 

 



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‘खामेनेई की हत्या पर मोदी की चुप्पी क्यों? हमले से 48 घंटे पहले इजराइल से लौटे’, सोनिया गांधी का सरकार पर हमला


India

oi-Pallavi Kumari

Sonia Gandhi on Ali Khamenei Death: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ali Khamenei) की टारगेट किलिंग के बाद भारत सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार की चुप्पी हैरान करने वाली है। उनके शब्दों में, यह तटस्थता नहीं बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा कदम है।

सोनिया गांधी ने इंडियन एक्प्रेस अखबार में लिखे अपने लेख में ईरान पर इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले की निंदा की है। सोनिया गांधी ने अपने लेख में लिखा कि 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या एक दिन पहले अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में की गई। उन्होंने कहा कि जब कूटनीतिक बातचीत जारी हो और उसी दौरान किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष को निशाना बनाया जाए, तो यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर दरार का संकेत है।

Sonia Gandhi on Ali Khamenei Death

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का हवाला देते हुए कहा कि किसी देश की संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी देना नियमों के खिलाफ है। अगर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी इस पर स्पष्ट आपत्ति दर्ज नहीं करता, तो अंतरराष्ट्रीय मानदंड कमजोर पड़ सकते हैं। आइए जानें सोनिया गांधी के लेख की 5 बड़ी बातें?

1. मोदी सरकार के स्टैंड पर सवाल (Sonia Gandhi on Govt Silence)

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने न तो इस हत्या की निंदा की और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन पर स्पष्ट रुख लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने शुरुआत में केवल ईरान की यूएई पर जवाबी कार्रवाई की आलोचना की, जबकि अमेरिका-इजराइल हमले को अनदेखा किया। बाद में ‘गहरी चिंता’ और ‘संवाद’ की बात जरूर कही गई, लेकिन वह भी तब जब हमला हो चुका था। उनके मुताबिक, ऐसी चुप्पी तटस्थता नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के सवाल पर असहज दूरी है।

2. इजराइल दौरे पर भी सोनिया गांधी ने कसा तंज

सोनिया गांधी ने यह भी जिक्र किया कि अयातुल्ला अली खामेनेई हत्या से महज 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री मोदी इजराइल यात्रा से लौटे थे, जहां उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू सरकार के समर्थन की बात दोहराई थी। उन्होंने कहा कि गाजा संघर्ष में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत पर वैश्विक नाराजगी के बीच यह समर्थन अलग संदेश देता है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि ग्लोबल साउथ के कई देश और ब्रिक्स साझेदार रूस व चीन ने इस मामले में दूरी बनाए रखी है। ऐसे में भारत का स्पष्ट नैतिक रुख न लेना चिंताजनक है।

3. कांग्रेस का रुख और संवेदना

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ईरान की जमीन पर बमबारी और टारगेट किलिंग की साफ निंदा की है। सोनिया गांधी ने कहा कि यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरनाक है। उन्होंने ईरान की जनता और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51 का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति का आधार हमेशा विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, संप्रभु समानता और गैर-हस्तक्षेप रहा है। मौजूदा चुप्पी इन सिद्धांतों से मेल नहीं खाती।

4. सोनिया गांधी ने भारत-ईरान रिश्तों की दिलाई याद (India-Iran Relations)

सोनिया गांधी ने 1994 की घटना का जिक्र किया जब OIC के कुछ देशों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी और ईरान ने अहम भूमिका निभाकर उसे रुकवाया। उन्होंने ज़ाहेदान में भारत की कूटनीतिक मौजूदगी और रणनीतिक महत्व का भी उल्लेख किया। साथ ही 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी के तेहरान दौरे को याद दिलाते हुए दोनों देशों के गहरे रिश्तों पर जोर दिया।

5. सोनिया ने उठाए विश्वसनीयता और रणनीतिक स्वायत्तता का सवाल

सोनिया ने कहा कि भारत-इजराइल संबंध रक्षा, कृषि और तकनीक के क्षेत्र में बढ़े हैं, लेकिन भारत के तेहरान और तेल अवीव दोनों से संबंध होने के कारण उसके पास संयम की अपील करने का अवसर है। यह तभी संभव है जब भारत सिद्धांत आधारित रुख अपनाए।

उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं और पिछले संकटों में भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा इसलिए कर पाया क्योंकि उसे निष्पक्ष और स्वतंत्र देश माना जाता था।

संसद में बहस की मांग (Parliament Debate)

सोनिया गांधी ने मांग की कि संसद के अगले सत्र में इस पूरे मुद्दे पर खुली बहस होनी चाहिए। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय नियमों का क्षरण और भारत की विदेश नीति की दिशा पर स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ केवल नारा नहीं बल्कि न्याय, संयम और संवाद की प्रतिबद्धता है। ऐसे समय में चुप रहना जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा है।



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