Holika Dahan 2026 Puja Samagri Update: होली का इंतजार हर किसी को बेसब्री से होता है, रंगों वाली होली से पहले हर जगह ‘होलिका -दहन’ किया जाता है, जो कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। कहते हैं कि होलिका की अग्नि में सारी नफरत, कड़वाहट और बुराईयों का नाश हो जाता है। इसे कई स्थानों पर ‘छोटी होली’ भी कहते हैं।
आज लोग ‘होलिका दहन’ के दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपने परिवार के लिए अग्निदेवता से खुशी और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। होलिका की अग्नि में कुछ विशेष चीजें चढ़ाई जाती हैं, जिसका कुछ खास अर्थ होता है, यहां पर हम आपको बताते हैं होलिका दहन की पूजा सामग्री के बारे में विस्तार से।
शुभ मुहूर्त में होलिका के स्थान पर जाएं, फिर होलिका की लकड़ियों के चारों ओर कच्चा सूत लपेटें। रोली, हल्दी, फूल और गुड़ अर्पित करें। जल चढ़ाकर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। विधि-विधान से अग्नि प्रज्वलित करें। होलिका की 3 या 7 परिक्रमा करें। गेहूं की बालियां अग्नि में सेंककर प्रसाद रूप में ग्रहण करें और एक दूसरे को गुलाल लगाएं।
Holika Dahan 2026 Do-Donts: होलिका दहन पर क्या करें और क्या ना करें?
शुभ मुहूर्त पर पूजा करें, कोशिश करें कि होलिका दहन की पूजा में पूरा परिवार साथ हो, परिक्रमा करते समय मन में सकारात्मक संकल्प लें। जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र दान करें। घर की साफ-सफाई कर नकारात्मकता दूर करें। तो वहीं अशुभ समय में होलिका दहन न करें। जलती होलिका में प्लास्टिक या हानिकारक वस्तुएं न डालें। विवाद या क्रोध से दूर रहें।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी चीज को अमल लाने के लिए किसी ज्योतिषी और किसी पंडित से अवश्य बात करें।
Iran-Israel War PM Modi Reactions: मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर बड़े हमले हो रहे हैं और ईरान ने जवाबी कार्रवाई में क्षेत्रीय देशों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए हैं। इसी संकट के बीच भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (2 मार्च 2026) को दो महत्वपूर्ण टेलीफोन बातचीत कीं, जिनमें उन्होंने सऊदी अरब और बहरीन पर हुए ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की। सबसे पहले PM मोदी ने बहरीन के किंग हमाद बिन ईसा अल खलीफा से बात की, उसके बाद सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से चर्चा की। ये बातचीत ऐसे समय में हुई जब ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों और कुछ नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता फैल गई है।
PM मोदी फाइल फोटो।
PM Modi Statement Iran-Israel War: PM मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों पर हुए हमलों की स्पष्ट निंदा की और कहा कि हिंसा और अस्थिरता क्षेत्रीय शांति को गहरा नुकसान पहुंचाती है। भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के रास्ते पर जोर देता रहा है, और इस बार भी यही संदेश दिया गया। उन्होंने भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर भी विस्तार से चर्चा की, क्योंकि मध्य पूर्व में लाखों भारतीय काम करते हैं और उनकी सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मिलकर प्रयास करने की बात हुई।
Bahrain-Saudi Arabia में कितने हमले हुए? कितनी जानें गईं?
ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में खाड़ी देशों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें मुख्य रूप से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन कुछ हमले नागरिक क्षेत्रों तक पहुंचे या मलबे से नुकसान हुआ।
बहरीन में: ईरान ने 45 मिसाइल और 9 ड्रोन हमले किए। US नेवी की फिफ्थ फ्लीट हेडक्वार्टर और मिना सलमान पोर्ट के पास सुविधाएं प्रभावित हुईं। एक कमर्शियल जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, आग लगी और क्रू को निकाला गया। कुल मिलाकर 1 मौत और 4 घायल हुए (कुछ रिपोर्ट्स में 4 घायल बताए गए)। ज्यादातर हमले इंटरसेप्ट हो गए, लेकिन मलबे से नुकसान हुआ।
सऊदी अरब में: रियाद और पूर्वी क्षेत्र (जैसे रास तनूरा रिफाइनरी) पर हमले। ड्रोन और मिसाइल हमलों में ज्यादातर इंटरसेप्ट हो गए, लेकिन रिफाइनरी में आग लगी (जो नियंत्रण में आ गई) और छोटा नुकसान हुआ। मौतों की स्पष्ट संख्या नहीं बताई गई, लेकिन कुल खाड़ी देशों में कुछ मौतें (UAE में 3, कुवैत और बहरीन में 1-1) रिपोर्ट हुईं। सऊदी में मुख्य रूप से इंटरसेप्शन सफल रहा, सीमित हताहत।
ये हमले 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल हमलों के जवाब में हुए, जिसमें ईरान में 555 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। कुल मिलाकर, बहरीन और सऊदी में हताहत सीमित रहे क्योंकि डिफेंस सिस्टम मजबूत हैं, लेकिन स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि भारत मध्य पूर्व की गतिविधियों पर सतर्क नजर रखे हुए है। ईरान-अमेरिका तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल कीमतों और प्रवासी भारतीयों पर पड़ सकता है। भारत की कूटनीति क्षेत्र में शांति बहाली के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
Punjabi Singer-Actor Ammy Virk: मशहूर पंजाबी सिंगर और एक्टर एमी विर्क ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया, जिसको पढ़ने के बाद हर किसी का कलेजा कचोटने लगेगा। उन्होंने बताया कि ‘ईरान-इजरायल के बीच पनपे तनाव के बीच उनकी पत्नी और 6 साल की बेटी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में फंसे हुए हैं। इस मुश्किल घड़ी में उनका परिवार घर से दूर डर और चिंता का सामना कर रहा है।’
एमी ने इमोशनल होते हुए कहा कि ‘मेरी 6 साल की मासूम बच्ची ने मुझसे कहा कि पापा चिंता ना करो, अगर कुछ हुआ तो मैं बेड के नीचे छिप जाऊंगी, मैं आपकी स्ट्रॉंग बेटी हूं, डोंट वरी डैड।’ इंस्टा पर इंस्टाग्राम पर अपना दर्द बयां करते हुए एमी ने लिखा कि ‘UAE के हालात काफी खराब हैं जो कि मेरे दिल को परेशान कर रहे हैं।’
‘मेरी पत्नी और मेरी 6 साल की बेटी वहीं हैं। एक पति और पिता के रूप में, ऐसे समय में भावुक और तनावग्रस्त महसूस न करना असंभव है, हम सार्वजनिक जीवन में कितने भी मजबूत बनने की कोशिश करें, दिन के अंत में हम सभी पारिवारिक लोग ही होते हैं।’
Ammy Virk: ऊपरवाला सभी की सलामत रखे, सिंगर ने मांगी दुआ
उन्होंने उन तमाम अन्य परिवारों के लिए भी प्रार्थना की जो इसी तरह के डर और चिंता से गुजर रहे हैं। उनकी प्रार्थना सिर्फ अपने प्रियजनों के लिए नहीं, बल्कि हर प्रभावित व्यक्ति के लिए हैं। एमी ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात की सरकार और वहां के अधिकारीगण लोगों को सुरक्षित और सहयोगपूर्ण रखने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए मैं वाकई आभारी हूं।’
आपको बता दें कि Ammy Virk का असली नाम अमनिंदरपाल सिंह विर्क है, 11 मई 1952 को जन्मे एमी पंजाबी इंडस्ट्री का बड़ा नाम है और उन्होंने अपनी एक्टिंग और गानों के दाम पर इंटरनेशनल लेवल पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। ‘निक्का जैलदार सीरीज’, ‘क़िस्मत’ और ‘क़िस्मत 2’ हरजीता और अंग्रेज उनकी मशहूर फिल्में हैं।
पंजाबी इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं Ammy Virk
उन्होंने ऐतिहासिक रोमांस पंजाबी फिल्म ‘अंग्रेज’ (2015) में हाकम की भूमिका निभाकर अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी, जिसके लिए उन्होंने पीटीसी पंजाबी फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का पुरस्कार मिला था। वह अपनी ‘पटियाला-शाही पगड़ी’ के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी फिल्में ‘अंग्रेज’ और ‘किस्मत’ सबसे ज्यादा कमाई करने वाली पंजाबी फिल्मों में से एक हैं।
भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया से किया बॉलीवुड डेब्यू
साल 2021 में, उन्होंने ‘भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया’ से अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था, उन्होंने कबीर खान द्वारा निर्देशित ‘फिल्म 83’ में तेज गेंदबाज बलविंदर संधू की भूमिका निभाई थी। उन्हें 2024 की हिंदी कॉमेडी फिल्म ‘बैड न्यूज़’ में विक्की कौशल और त्रिप्ति डिमरी के साथ भी काम किया है।
Bollywood Celebrities Stranded In Dubai List: मिडिल ईस्ट में युद्ध की आग भड़क चुकी है। 2 मार्च 2026 को ईरान और इजरायल (अमेरिका का सपोर्ट) के बीच खूनी संघर्ष को तीसरा दिन है। हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत (28 फरवरी) के बाद ईरान ने जवाबी मिसाइल और ड्रोन अटैक तेज कर दिए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में एयरस्पेस बंद हो गया, उड़ानें कैंसल, और हजारों यात्री, खासकर दुबई और अबू धाबी में लोग फंस गए हैं। इस संकट में कई बॉलीवुड और साउथ इंडियन सेलेब्स भी ट्रैप हो गए हैं।
नरगिस फाखरी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर नींद न आने वाली रातों और ‘हाई अलर्ट’ दिमाग की बात लिखकर फैंस को भावुक कर दिया। आइए जानते हैं कौन-कौन फंसे हैं, उनकी पोस्ट क्या कह रही हैं, और क्यों यह वक्त इतना डरावना है…
Nargis Fakhri Dubai Post: नरगिस फाखरी ने कहा- ‘चिंता और डर बना हुआ है, सो नहीं पाती’
रॉकस्टार फेम नरगिस फाखरी दुबई में फंसी हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर दिल छू लेने वाली पोस्ट शेयर की:- ‘यहां पिछले 2 दिन बहुत क्रेजी रहे। चिंता और भय बना हुआ है, क्योंकि पता नहीं आगे क्या होगा। सो भी नहीं पाती, दिमाग हाई अलर्ट पर रहता है। बहुत देर हो चुकी है और मैं पूरी तरह जाग रही हूं।’
फैंस उनकी पोस्ट देखकर परेशान हैं। नरगिस दुबई में रहती हैं (2025 में टोनी बेग से शादी के बाद), और अब युद्ध के बीच घर लौटना चाहती हैं। उनकी यह पोस्ट वायरल हो रही है, जहां लोग प्रार्थना कर रहे हैं।
Esha Gupta Trapped In Dubai: ईशा गुप्ता: ‘बस घर जाना चाहती हूं’
ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंसी हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर UAE सरकार की तारीफ की, लेकिन माना कि हालात ‘अप्रिय’ हैं। ‘UAE सरकार ने कमाल किया। एयरपोर्ट पर फंसे हर शख्स को खाना, होटल ट्रांसफर, ठहरने की व्यवस्था दी। अबू धाबी में सबको सुरक्षित रखा जा रहा है। लेकिन यहां हालात अच्छे नहीं, कॉल/मैसेज नहीं उठा पा रही। बस जल्द घर वापस जाना चाहती हूं।’ ईशा ने कहा कि ‘टाइम्स आर स्केरी, वेरी टफ। गॉड प्रोटेक्ट अस।’ फैंस उनकी सेफ्टी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
Sonal Chauhan Dubai Video: सोनल चौहान ने मांगी मदद
2008 की बॉलीवुड की फिल्म जन्नत की एक्ट्रेस सोनल चौहान दुबई में फंसीं। पहले उन्होंने X (ट्विटर) पर PM मोदी को टैग कर मदद मांगी थी। लिखा था- ‘माननीय PM मोदी जी, दुबई में फंसी हूं। फ्लाइट्स कैंसल, भारत लौटने का कोई रास्ता नहीं। सुरक्षित यात्रा के लिए मार्गदर्शन चाहती हूं।’ बाद में इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपडेट दिया- ‘सुरक्षित हूं, घबराने की कोई बात नहीं। दुबई दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह है। अधिकारी सबकी सुरक्षा में जुटे हैं। पैनिक न फैलाएं। ॐa नमः शिवाय।’ सोनल ने फैंस की चिंता के लिए शुक्रिया अदा किया और कहा कि सब कंट्रोल में है।
Subhashree Ganguly बेटे संग फंसी
फेमस बंगाली एक्ट्रेस सुभाश्री गांगुली (Subhashree Ganguly) इस समय चर्चा में हैं, क्योंकि वे अपने नाबालिग बेटे के साथ दुबई (Dubai) में फंसी हुई हैं। यह खबर सामने आते ही उनके फैंस काफी चिंतित हो गए। सोशल मीडिया पर लोग लगातार उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, जब वहां संघर्ष की स्थिति शुरू हुई, उस वक्त सुभाश्री अपने बेटे के साथ छुट्टियां मनाने Dubai गई हुई थीं। अचानक हालात बदल गए और हवाई सेवाएं प्रभावित हो गईं, जिसके चलते वे वहीं रुक गईं।
Ammy Virk Family: 6 साल की बेटी का दिल छूने वाला मैसेज
पंजाबी सुपरस्टार अम्मी विर्क भारत में हैं, लेकिन उनकी पत्नी और 6 साल की बेटी दुबई में फंसी हैं। अम्मी ने इंस्टाग्राम पर इमोशनल पोस्ट शेयर की:- ‘UAE के हालात मेरे दिल पर भारी पड़ रहे हैं। मेरी पत्नी और 6 साल की बेटी वहां हैं। पति और पिता के तौर पर इमोशनल और टेंशन कंट्रोल नहीं हो रही। बेटी ने कहा- ‘पापा, अगर कुछ हुआ तो मैं बिस्तर के नीचे छिप जाऊंगी। मैं मजबूत लड़की हूं, चिंता मत करो।’ यह मैसेज पढ़कर हर कोई रो पड़ा। अम्मी ने UAE सरकार की कोशिशों की तारीफ की, लेकिन डर साफ झलक रहा है।
Ajith Kumar In UAE: अजित कुमार रेसिंग के लिए UAE में, अब फंसे
तमिल सुपरस्टार अजित कुमार UAE में रेसिंग ट्रेनिंग और इवेंट्स के लिए थे। मैनेजर ने कन्फर्म किया कि ‘कल रवाना होना था, लेकिन एयरपोर्ट से वापस लौट आए। अब दुबई में सुरक्षित हैं।’ अजित 2026 मिशेलिन ले मैन्स कप की तैयारी कर रहे थे। उनकी टीम ने फैंस को भरोसा दिलाया कि सब ठीक है।
बड़ा सवाल: जान जोखिम में क्यों?
एयरस्पेस बंद: ईरान के मिसाइल अटैक से दुबई, अबू धाबी, दोहा समेत गल्फ एयरपोर्ट्स प्रभावित।
फ्लाइट्स कैंसल: Etihad, Emirates समेत सभी उड़ानें सस्पेंड। अबू धाबी ने फंसे पर्यटकों के होटल बिल सरकार उठाने का ऐलान किया।
इन हस्तियों की चिंता: नरगिस की नींद न आने वाली रातें, अम्मी की बेटी का ‘छिप जाऊंगी’ मैसेज, ईशा-सोनल की ‘घर जाना चाहती हूं’ – ये सब युद्ध के असर को दिखाते हैं।
सुरक्षा: UAE सरकार ने अच्छा मैनेजमेंट किया – होटल, फूड, ट्रांसफर। लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है।
Why India not tourism superpower: थाईलैंड क्षेत्रफल में हमसे 7 गुना छोटा है और आबादी में 20 गुना ज्यादा बड़ा. लेकिन हमारे देश में हर साल महज 1 करोड़ विदेशी पर्यटक आते हैं जबकि छोटा सा थाईलैंड हर साल साढ़े 3 करोड़ से ज्यादा विदेशी पर्यटक आकर्षित करते हैं. आखिर क्या वजह हैं कि हम विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में इतने पीछे हैं. जाने-माने उद्योगपति हर्ष गोयनका ने इसके लिए 10 कारण गिनाए हैं. हालांकि कारण इससे कहीं ज्यादा है.
विदेशी टूरिस्ट को आकर्षित करने में हम थाईलैंड से बहुत पीछे.
Why Low International tourists in India: भारत के पास किसी भी संपन्न देशों की तुलना में वो सारे टूरिस्ट स्पॉट हैं जो उनके देश में हैं. कुछ मामलों में हम इन सबसे कहीं आगे हैं. हमारी सभ्यता सबसे प्राचीन सभ्यता है. हमारे पास कुदरत का मुकूट मणि हिमालय पर्वत और उनसे जुड़े हजारों वादियां, घाटियां हैं तो मीलों तक पसरा हर रंग का समुद्र तट. पर आपको जानकर हैरत होगी कि इतनी प्राकृतिक खूबसूरती के बावजूद विदेशी पर्यटकों को रिझाने में हमारा देश छोटे से थाईलैंड से भी बहुत पीछे हैं. आखिर इसके पीछे क्या वजह है. आइए इसका विश्लेषण करते हैं.
कोरोना से पहले का इससे पहले कि इसका विश्लेषण करें कि क्यों हमारे देश में विदेशी पर्यटकों की आमद कम है, कुछ आंकड़ों पर नजर डालते हैं. कोरोना काल ने पूरी दुनिया के पर्यटन उद्योग को तहस-नहस कर दिया था. अब इसे पांच साल होने को है पर इसकी काली छाया अब भी बरकरार है. कई देशों में कोरोना काल तक जितने पर्यटक आते थे, अब तक नहीं लौटे. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2024 में भारत में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 9.95 लाख रही. यानी करीब-करीब एक करोड़. यह 2023 की तुलना में 4.52 प्रतिशत की बढ़ोतरी जरूर दिखाती है लेकिन 2019 यानी कोरोना महामारी से पहले के वर्ष की तुलना में अभी भी 8.95 प्रतिशत कम है. वहीं छोटे से देश थाईलैंड में साढ़े 3 करोड़ विदेशी पर्यटक आए. भूटान जैसे देशों में पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि देखी जा रही है. हकीकत यह है कि थाईलैंड में कुछ भी भारत से बेहतर नहीं है. इसके बावजूद वहां के लोगों की कई खूबियां विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर खींच लाती है.
भारत में कम पर्यटक के कारण हमसे ज्यादा मलेशिया, तुर्की, सिंगापुर और यहां तक कि संयुक्त अरब अमीरात में ज्यादा टूरिस्ट आते हैं. उद्योगपति हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया पर इसके 10 कारणों को बताया है. आइए पहले ये जानते हैं.
असुरक्षित सड़कें, आवारा जानवर- कई शहरों और पर्यटन स्थलों पर सड़कें टूटी-फूटी हैं और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित फुटपाथ नहीं हैं. रात में रोशनी की भी कमी रहती है. इसके अलावा आवारा पशु और जानवर यातायात और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं, जिससे असुविधा और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है.
गंदगी, कचरा और स्वच्छता की कमी-सार्वजनिक स्थानों, बाजारों और पर्यटन स्थलों पर कचरा प्रबंधन की कमी साफ दिखती है. खुले में कूड़ा, बदबू और अस्वच्छ शौचालय पर्यटकों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं. स्वच्छता की कमी से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ते हैं और देश की छवि प्रभावित होती है.
छोटी-मोटी भ्रष्टाचार की समस्या-कुछ स्थानों पर पर्यटकों से अनावश्यक शुल्क, ओवरचार्जिंग या सुविधा के बदले रिश्वत मांगने जैसी समस्याएं सामने आती हैं. यह अनुभव पर्यटकों के भरोसे को कम करता है. पारदर्शी व्यवस्था और सख्त निगरानी की कमी से यह समस्या बनी रहती है.
ट्रैफिक अव्यवस्था-भारत का ट्रैफिक दुनिया में बदनाम है. बड़े शहरों में भारी जाम, नियमों का पालन न करना और अनियोजित पार्किंग आम बात है. पर्यटकों को समय पर गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कत होती है. हॉर्न, भीड़ और अव्यवस्थित यातायात उनकी यात्रा के अनुभव को तनावपूर्ण बना देते हैं.
कमजोर वैश्विक ब्रांडिंग और छवि प्रबंधन-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन की सही मार्केटिंग और सकारात्मक छवि निर्माण की कमी रहती है. डिजिटल प्रचार, सोशल मीडिया रणनीति और वैश्विक अभियानों में निरंतरता नहीं होती. इससे देश की वास्तविक क्षमता दुनिया तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पाती.
राज्य स्तर की लालफीताशाही में फंसा पर्यटन-पर्यटन से जुड़ी कई मंजूरियां और प्रक्रियाएं जटिल और समय लेने वाली होती हैं. अलग-अलग राज्यों के नियम अलग होने से निवेश और प्रोजेक्ट धीमे हो जाते हैं. इस कारण नई सुविधाओं और परियोजनाओं का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो पाता.
प्रदूषण-वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण कई शहरों में गंभीर समस्या है. ऐतिहासिक स्मारकों और प्राकृतिक स्थलों पर भी प्रदूषण का असर दिखता है. इससे पर्यटकों के स्वास्थ्य और अनुभव दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और देश की पर्यटन छवि को नुकसान होता है.
पर्यटन ढांचे की कमी-कई पर्यटन स्थलों पर साफ शौचालय, साइन बोर्ड, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन और सूचना केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं. इस कारण वे दोबारा आने से हिचकते हैं.
सेवाओं के स्तर में असमानता- होटल, टैक्सी, गाइड और रेस्टोरेंट सेवाओं की गुणवत्ता हर जगह समान नहीं होती. कहीं उत्कृष्ट सेवा मिलती है तो कहीं बेहद खराब अनुभव. मानकों की एकरूपता और प्रशिक्षण की कमी से पर्यटन उद्योग की विश्वसनीयता प्रभावित होती है.
सबसे बड़ी समस्या – नागरिक शिष्टाचार की कमी-सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, लाइन न बनाना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना आम समस्याएं हैं. नागरिक जिम्मेदारी की कमी से देश की छवि खराब होती है.
अनदेखा कारण उपर के जितने कारण हैं वे सब दस्तावेजों में होते हैं लेकिन अनगिनत ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से हमारे देश में पर्यटक आने से कतराते हैं. हम वसुधैव कुटुबंकम का नारा देते हैं, मेहमान को भगवान मानते हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि इन मेहमानों को हम लुटने का जरिया बना लेते हैं. अधिकांश जगहों पर विदेशी पर्यटकों से आम नागरिकों से ज्यादा पैसा ऐंठा जाता है, उन्हें गलत जानकारी दी जाती है, बेवजह उन्हें परेशान करते हैं, उनपर फब्तियां कसते हैं. हमारे पास अगर कोई अफ्रीकी पर्यटक आ जाए तो उनपर नस्लीय टिप्पणी करते हैं. आम लोगों से ज्यादा विदेशी पर्यटकों से किराया वसूलते हैं. जो भी सामान बेचते हैं वे यहां के लोगों से ज्यादा में बेचते हैं. किसी भी पर्यटन स्थल पर ठीक से भीड़ मैनेज नहीं होता है जिसके कारण इन जगहों पर शांति नहीं होती. विदेश में हमारे देश के अपराध और रेप की घटनाओं को प्रमुखता से तरजीह दी जाती है. कुल मिलाकर विदेशियों के प्रति हमारी मानसिकता अच्छी नहीं है. हम सिर्फ कहने के लिए अतिथि देवों भवः का नारा देते हैं, हकीकत में यह कोसो दूर है. इसलिए हमें विदेशियों को वास्तव में पूजा करने की जरूरत है न कि दुत्कारने की.
18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने अपने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, स…और पढ़ें
अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन यात्रा को संबोधित किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में एक सभा में कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल को घुसपैठियों का स्वर्ग बना दिया है। उन्होंने कहा कि एक बार BJP की सरकार बन जाए, तो हम बंगाल से हर घुसपैठिए की पहचान करके उसे निकाल देंगे।
शाह ने आगे कहा कि अभी वोटर रोल से सिर्फ घुसपैठियों के नाम हटाए जा रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में पार्टी के पूरी बहुमत के साथ सत्ता में आने पर उन्हें राज्य से बाहर कर देंगे।
अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में भारतीय जनता पार्टी(BJP) की परिवर्तन यात्रा को संबोधित करने के दैरान ये बातें कहीं।
अमित शाह की स्पीच की बड़ी बातें…
हिंदू शरणार्थियों की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी। ममता बनर्जी की सरकार सीमाओं की सुरक्षा करने में नाकाम रही है। BJP के सत्ता में आने पर घुसपैठ और भ्रष्टाचार दोनों रुकेंगे।
ममता मंदिरों के उद्घाटन में व्यस्त थीं, जबकि राज्य में मस्जिद बनने दी जा रही थी। TMC नेता हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद बनाने की कोशिश एक साजिश का हिस्सा थी।
BJP ने राज्य में बदलाव लाने के लिए परिवर्तन यात्रा शुरू की है। परिवर्तन का मतलब सिर्फ मुख्यमंत्री बदलना नहीं, बल्कि बंगाल को घुसपैठ से मुक्त करना, भ्रष्टाचार खत्म करना, TMC सरकार हटाकर BJP सरकार बनाना है।
पूरे पश्चिम बंगाल में कुल 9 परिवर्तन यात्राएं निकाली जा रही हैं। चार यात्राएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं और बाकी अलग-अलग जिलों से शुरू होंगी।
दशकों के कम्युनिस्ट शासन और फिर TMC सरकार के कारण बंगाल की स्थिति खराब हुई है। अब सोनार बांग्ला को फिर से बनाने का समय आ गया है।
परिवर्तन यात्रा में 5000 किमी का सफर
परिवर्तन यात्रा 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा राज्यव्यापी कैंपेन है। यह 5,000 किमी से ज्यादा का सफर तय करेगा, जिसमें 63 बड़ी रैलियां और 282 छोटी सभाएं शामिल हैं।
इसका अंत कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक बड़ी रैली में होगा, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। पार्टी सूत्रों ने कहा कि इस कैंपेन का टारगेट 1 करोड़ से ज्यादा सीधे नागरिकों से जुड़ना, बूथ-लेवल पर जुड़ाव और संगठनात्मक पहुंच को मज़बूत करना है।
मार्च के दूसरे हफ्ते में बंगाल में चुनाव का ऐलान संभव
राज्य चुनाव आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान मार्च के दूसरे हफ्ते में होने की संभावना है। चुनाव कितने फेज में होंगे, इस पर लगातार अंदाजा लगाया जा रहा है।
अधिकारी ने कहा कि वोटिंग तीन फेज में हो सकती है। आयोग की पूरी बेंच पहले ही तमिलनाडु और असम का दौरा कर चुकी है, लेकिन अभी तक पश्चिम बंगाल का दौरा नहीं किया है।
28 फरवरी: फाइलन वोटर लिस्ट में 7.04 करोड़ से ज्यादा वोटर, 63 लाख नाम कटे
पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश हो गई। इसमें वोटर 7.66 करोड़ से घटकर 7,04,59,284 रह गए हैं। यानी SIR से अब तक 63.66 लाख नाम हटे हैं, जो कुल मतदाताओं का 8.3% है। दिसंबर में जारी मसौदा सूची में 58 लाख से अधिक नाम हटे थे।
CEO ने कहा- 60 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम की जांच अभी भी जारी है। हालांकि उन्हें नई वोटर लिस्ट में जोड़ा गया है। बाद में इन नामों पर फैसले के बाद लिस्ट में बदलाव हो सकता है।
2021 चुनाव में 294 में 166 सीटों पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था। इनमें टीएमसी ने 102, भाजपा ने 64 सीटें जीती थीं। 5,000 से कम अंतर वाली 36 सीटों में भाजपा 22, टीएमसी 13 जीती। ऐसे में एक-एक वोट अहम है। हालांकि 25 हजार से ज्यादा अंतर वाली 111 में 108, 50 हजार से ज्यादा अंतर वाली 43 सीटें टीएमसी जीती थी।
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पश्चिम बंगाल में 50 लाख घुसपैठिए वोटर लिस्ट से हटाए:भाजपा अध्यक्ष का दावा- ये देश की सुरक्षा के लिए खतरा, इन्हें बाहर करने का समय आया
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले में भाजपा की परिवर्तन यात्रा की शुरुआत की। इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए नवीन ने दावा किया कि बंगाल में 50 लाख से ज्यादा घुसपैठियों को वोटर लिस्ट से हटाया गया है। पश्चिम बंगाल में एक दिन पहले ही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद जारी वोटर लिस्ट से 63.66 लाख नाम हटाए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Iran America History Timeline: एक समय था जब ईरान अमेरिका को अपना दोस्त मानता था। इजरायल और अमेरिका मिलकर वहां की पहलवी सरकार की संप्रभुता के लिए लड़ते थे। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि अमेरिका और इज़राइल मिलकर ईरान पर बमबारी कर रहे हैं और उसके इस्लामी शासन को खत्म करने की कोशिश की बात करते हैं। आखिर दोनों देशों के रिश्ते दोस्ती से दुश्मनी तक कैसे पहुंचे? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
जब फारस को चाहिए था एक बाहरी दोस्त
बीसवीं सदी की शुरुआत में ईरान को फारस कहा जाता था और वहां क़ाजार राजवंश का शासन था। उस समय ब्रिटेन और रूस जैसी औपनिवेशिक ताकतें ईरान पर प्रभाव जमाने की कोशिश कर रही थीं। ऐसे में ईरान को एक ऐसे देश की तलाश थी जिसका पश्चिम एशिया में औपनिवेशिक (अंग्रेजों की तरह कॉलोनी बनाने वाला) इतिहास न हो। अमेरिका इस मामले में अलग दिखता था। अमेरिका ने भी Self-determination का समर्थन किया और क्षेत्रीय दावे नहीं किए। इसी वजह से ईरान ने उसे उन दिनों दोस्त माना।
एक शिक्षक ने कराई दोस्ती
इसी दौर में हॉवर्ड बास्केर्विल नाम के एक युवा अमेरिकी शिक्षक तबरेज़ पहुंचे। वे ईरान की संवैधानिक क्रांति (1905-1911) में शामिल हो गए, जो लोकतंत्र की मांग कर रही थी। 1909 में उनकी हत्या कर दी गई। ईरानियों ने उन्हें “फारस का लाफ़ायेट” कहा- अमेरिकी क्रांति के नायक मार्क्विस डी लाफायेट की तरह सम्मान दिया। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत हुआ।
मॉर्गन शूस्टर और ‘द स्ट्रैंग्लिंग ऑफ पर्शिया’
1911 में ईरान ने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अमेरिकी वकील मॉर्गन शूस्टर को कोषाध्यक्ष-जनरल नियुक्त किया। लेकिन ब्रिटेन और रूस के दबाव में उन्हें हटा दिया गया। शूस्टर ने बाद में “The Strangling of Persia” किताब लिखी, जिसमें उन्होंने यूरोपीय इम्पीरियलिज्म को ईरान की प्रगति रोकने का जिम्मेदार ठहराया।
रज़ा खान और पहलवी राजवंश की शुरुआत
1921 में रज़ा खान ने सैन्य तख्तापलट किया और 1925 में खुद को शाह घोषित कर पहलवी राजवंश की स्थापना की। वे तुर्की के मुस्तफा कमाल अतातुर्क से प्रेरित थे। उन्होंने मॉर्डनाइजेशन और धर्मनिरपेक्षता की नीति अपनाई। जिसमें ईरानी लोगों, खासकर कि महिलाओं के लिए स्वतंत्रता रखी गई।
दूसरा विश्व युद्ध और अमेरिका की भूमिका
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन और सोवियत संघ ने ईरान पर कब्जा कर लिया। रज़ा खान को अपने बेटे मोहम्मद रज़ा पहलवी के पक्ष में पद छोड़ना पड़ा। अमेरिका ने Persian Corridor के जरिए रसद (logistics) सपोर्ट दिया। इसके बाद, 1943 के तेहरान सम्मेलन में अमेरिका ने ईरान की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी का समर्थन किया। 1946 में उसने सोवियत सेनाओं को उत्तरी ईरान से हटाने में दबाव बनाया और इसमें सफलता भी हासिल की।
तेल का सवाल और मोसद्देग का उदय
युद्ध के बाद एंग्लो-ईरानी ऑयल कंपनी (AIOC) को लेकर नाराज़गी बढ़ी क्योंकि ईरान को कम रॉयल्टी मिलती थी। मोहम्मद मोसद्देग ने तेल के राष्ट्रीयकरण की मांग की। 1951 में मोसद्देग प्रधानमंत्री बने तो ब्रिटेन ने तेल पर नाकेबंदी लगा दी। इससे शाह और मोसद्देग के बीच टकराव हुआ। हालांकि कहा जाता है कि मोसद्देग ईरानी जनता के पक्ष में थे, जबकि शाह अमेरिका और ब्रिटेन की भाषा बोल रहे थे।
1953 का तख्तापलट
1953 में CIA और MI6 के समर्थन से शाह ने ईरान में तख्तापलट कर मोसद्देग को सत्ता हटा दिया और उन्हें जीवनभर नजरबंद रखा गया। शाह वापस सत्ता में आए और अमेरिका के साथ नजदीकी बढ़ी। इधर शाह ने सत्ता में आते ही अमेरिका और ब्रिटेन के इशारे पर तेल का काम शुरू किया। जिससे अमीर होते हुए भी ईरानी लोगों के हाथ गरीबी और महंगाई लगने लगी। यहीं से ईरानियों में अमेरिका के खिलाफ गुस्सा पनपने लगा।
असंतोष की शुरुआत?
शाह और अमेरिका के बीच तेल, खुफिया और सैन्य सहयोग बढ़ा। लेकिन शाह की गुप्त पुलिस SAVAK पर दमन के आरोप लगे। 1975 में सभी राजनीतिक दलों को खत्म कर एक ही रस्तखिज़ पार्टी बनाई गई। इसके बाद, 1977 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने शाह को “स्थिरता का द्वीप” कहा। लेकिन 1978-79 में देशभर में हड़तालें हुईं, तेल उद्योग ठप पड़ा।
शाह की अय्याश पार्टी और शासन का अंत
हड़ताल और तेल उद्योग ठप हो रहा था लेकिन मोहम्मद रेजा पहलवी की अय्याशियों में कोई कमी नहीं थी। इसी बीच दूसरे देशों के नेताओं को लुभाने के लिए शाह ने एक आलीशान पार्टी रखी जिसमें बहुत सारा पैसा खर्च किया। लिहाजा महंगाई से जूझ रही जनता को ये सहन नहीं हुआ। बड़ी तादाद में पूरे ईरान में प्रोटेस्ट हुए और जनवरी 1979 में शाह देश छोड़कर भाग गए।
1979 की इस्लामिक क्रांति और खुली दुश्मनी
इस्लामी क्रांति के बाद अमेरिका-ईरान रिश्ते पूरी तरह बदल गए। 1979 में अमेरिकी दूतावास बंधक संकट 444 दिनों तक चला। फिर ईरान-इराक युद्ध (8 साल) हुआ, जिसमें लाखों लोग मारे गए।अमेरिका ने ईरानी तेल प्लेटफॉर्म पर हमले किए और 1988 में ईरानी फ्लाइट 655 को मार गिराया।
प्रतिबंध और आर्थिक असर
अमेरिका ने रक्षा, ऊर्जा, बैंकिंग, आर्थिक, धातु और व्यापार जैसे क्षेत्रों पर प्रतिबंध लगाए। आज खुले बाजार में ईरान की मुद्रा लगभग 16,64,000 रियाल प्रति 1 अमेरिकी डॉलर के आसपास बताई जाती है। इससे आर्थिक दबाव साफ दिखता है।
वैचारिक दुश्मनी और प्रॉक्सी युद्ध
1979 के बाद ईरान ने अमेरिका को “शैतान” और इज़राइल को “ज़ियोनिस्ट शासन” कहा। ईरान हमास, हिजबुल्लाह और हौथी जैसे समूहों के जरिए “प्रतिरोध” की नीति अपनाता रहा है। हाल की झड़पों में ईरान ने उन खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई की संभावित हत्या से यह टकराव और गहरा होता जा रहा है। तो ये पूरी टाइमलाइन थी कि कैसे अमेरिका और ईरान जो कभी दोस्त होते थे आज उनके बीच में मिसाइलें दागी जा रही हैं।
इस टाइमलाइन पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।
Iran Nuclear Radiation Alert: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई चिंता सामने आई है। ईरान ने दावा किया है कि हालिया अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाई के दौरान उसके नतांज न्यूक्लियर साइट (परमाणु केंद्र) को निशाना बनाया गया।
इसके बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने संभावित रेडियोलॉजिकल खतरे को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। ईरान में न्यूक्लियर रेडिएशन अलर्ट की बातें चल रही हैं। सवाल यह है कि क्या स्थिति परमाणु बम जैसी हो सकती है या मामला सीमित दायरे का है।
नतांज न्यूक्लियर साइट पर हमले के दावे के बाद IAEA की बड़ी चेतावनी?
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की बोर्ड बैठक में ईरान के प्रतिनिधि रजा नजाफी ने कहा कि देश की “शांतिपूर्ण और निगरानी में चल रही” परमाणु सुविधाओं को फिर निशाना बनाया गया है। जब उनसे पूछा गया कि कौन-सी साइट प्रभावित हुई, तो उन्होंने नतांज का नाम लिया। हालांकि एजेंसी की ओर से अभी तक किसी बड़े नुकसान या रेडिएशन रिसाव की पुष्टि नहीं की गई है।
IAEA की चेतावनी क्या कहती है (IAEA Warning Explained)
IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी (Rafael Mariano Grossi) ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की विशेष बैठक में कहा कि क्षेत्र में जारी सैन्य हमलों से न्यूक्लियर सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रेडियोलॉजिकल रिलीज की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
ग्रॉसी के मुताबिक, अगर किसी परमाणु साइट को गंभीर नुकसान हुआ तो बड़े शहरों जितने इलाके खाली कराने की नौबत आ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक ईरान या उसके पड़ोसी देशों में सामान्य स्तर से अधिक रेडिएशन दर्ज नहीं हुआ है। IAEA का इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर सक्रिय है और क्षेत्रीय सुरक्षा निगरानी नेटवर्क अलर्ट पर है।
न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा ईरान में कहां-कहां है? (Nuclear Risk Locations)
🔹ईरान में कई अहम परमाणु प्रतिष्ठान हैं, जहां खतरा सैद्धांतिक रूप से हो सकता है।
🔹नतांज यूरेनियम संवर्धन का प्रमुख केंद्र है। यहां सेंट्रीफ्यूज मशीनें लगी हैं। अगर हमला होता है तो यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड गैस लीक हो सकती है, जो जहरीली और हल्की रेडियोएक्टिव होती है।
🔹फोर्डो पहाड़ के अंदर बना बंकर है, जहां उच्च संवर्धित यूरेनियम रखा जाता है।
🔹इस्फहान में यूरेनियम कन्वर्जन और फ्यूल फैब्रिकेशन की सुविधाएं हैं।
🔹अराक हेवी वॉटर रिएक्टर साइट है।
🔹परचिन सैन्य अनुसंधान से जुड़ा परिसर माना जाता है।
🔹बुशहर ईरान का एकमात्र ऑपरेशनल परमाणु बिजलीघर है।
🔹IAEA के मुताबिक अभी तक इनमें से किसी पर भी रेडिएशन लीक या बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या यह परमाणु बम जैसा असर होगा (Bomb-Like Impact?)
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी न्यूक्लियर साइट केंद्र पर हमला होता है तो रेडिएशन का असर स्थानीय स्तर तक सीमित रहने की संभावना ज्यादा है। यह चेर्नोबिल जैसी व्यापक तबाही नहीं होगी, क्योंकि ईरान में इस समय कोई बड़ा पावर रिएक्टर विस्फोट जैसी स्थिति में नहीं है। खतरा मुख्य रूप से जहरीली गैस या (Radioactive Materials) के सीमित रिसाव का है।
रेडिएशन लीक होने पर शरीर पर क्या असर होता है? क्या चेरनोबिल जैसा हादसा दोहराया जा सकता है, और क्या हैं ‘रेडिएशन सिकनेस’ के लक्षण?
परमाणु संयंत्रों या न्यूक्लियर साइट्स से रेडिएशन लीक की खबरें आते ही लोगों के मन में सबसे पहला सवाल उठता है कि इसका असर इंसानी शरीर पर कितना गंभीर हो सकता है। क्या यह स्थिति 1986 में हुए Chernobyl disaster जैसी तबाही में बदल सकती है? और आखिर ‘रेडिएशन सिकनेस’ होती क्या है? यहां इन सभी सवालों के सीधे, वैज्ञानिक और विश्वसनीय जवाब।
रेडिएशन शरीर में क्या करता है?
रेडिएशन अदृश्य ऊर्जा है, जो शरीर की कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती है। नुकसान की तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति कितनी मात्रा में और कितनी देर तक रेडिएशन के संपर्क में रहा।
World Health Organization (WHO) के मुताबिक उच्च मात्रा में आयनाइजिंग रेडिएशन के संपर्क में आने से कोशिकाएं तेजी से नष्ट हो सकती हैं, खासकर वे जो जल्दी-जल्दी विभाजित होती हैं, जैसे बोन मैरो, आंतों की परत और त्वचा की कोशिकाएं। यही कारण है कि गंभीर मामलों में खून बनने की प्रक्रिया, इम्यून सिस्टम और पाचन तंत्र सबसे पहले प्रभावित होते हैं।
क्या यह चेरनोबिल जैसा हादसा बन सकता है?
चेरनोबिल हादसा एक बड़े रिएक्टर विस्फोट और लंबे समय तक खुले रेडिएशन उत्सर्जन का परिणाम था। आधुनिक न्यूक्लियर प्लांट्स में सुरक्षा मानक पहले से कहीं ज्यादा सख्त हैं। हर रेडिएशन लीक चेरनोबिल जैसी आपदा में बदले, यह जरूरी नहीं।
IAEA बार-बार यह स्पष्ट करता रहा है कि किसी भी न्यूक्लियर घटना की गंभीरता का आकलन रेडिएशन के स्तर, फैलाव के दायरे और कंटेनमेंट सिस्टम की स्थिति पर निर्भर करता है। छोटे या सीमित लीक को समय रहते कंट्रोल कर लिया जाए तो व्यापक तबाही रोकी जा सकती है।
‘रेडिएशन सिकनेस’ क्या है?
उच्च मात्रा में रेडिएशन के अचानक संपर्क में आने से जो स्थिति बनती है, उसे मेडिकल भाषा में Acute Radiation Syndrome कहा जाता है, जिसे आम बोलचाल में ‘रेडिएशन सिकनेस’ कहते हैं।
WHO के मुताबिक, इसके लक्षण रेडिएशन की डोज पर निर्भर करते हैं।
शुरुआती लक्षण
मतली और उल्टी
तेज कमजोरी
सिरदर्द
बुखार
मध्यम से गंभीर स्थिति
बाल झड़ना
त्वचा पर जलन या छाले
खून की कमी
बार-बार संक्रमण
अत्यधिक डोज के मामलों में
आंतरिक अंगों को स्थायी नुकसान
बोन मैरो फेल होना
जान का खतरा
WHO यह भी बताता है कि कम स्तर के रेडिएशन के लंबे समय तक संपर्क से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, खासकर थायरॉयड कैंसर।
क्या हर रेडिएशन एक्सपोजर घातक होता है?
नहीं। यह एक बड़ा भ्रम है। हम सभी रोजमर्रा की जिंदगी में प्राकृतिक बैकग्राउंड रेडिएशन के संपर्क में रहते हैं, जो आमतौर पर सुरक्षित स्तर पर होता है। खतरा तब पैदा होता है जब एक्सपोजर तय सीमा से कहीं अधिक हो।
IAEA के मानकों के मुताबिक रेडिएशन की मात्रा को मापकर ही वास्तविक जोखिम का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसलिए किसी भी न्यूक्लियर घटना के बाद आधिकारिक आंकड़ों और वैज्ञानिक आकलन का इंतजार करना जरूरी होता है।
अमेरिका की चेतावनी और ईरान की प्रतिक्रिया (US Warning & Iran Response)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ने जून में निशाना बनाए गए परमाणु स्थलों को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश की तो नए हमले हो सकते हैं।
वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि इमारतें नष्ट होने से देश का कार्यक्रम नहीं रुकेगा। उनके अनुसार परमाणु गतिविधियां स्वास्थ्य और नागरिक जरूरतों के लिए हैं, न कि हथियारों के लिए।
कूटनीति ही रास्ता (Return to Diplomacy)
IAEA प्रमुख ने साफ कहा कि परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला कभी नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे गंभीर रेडियोधर्मी परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की।
ग्रॉसी ने दोहराया कि परमाणु मसलों का स्थायी समाधान केवल कूटनीति से ही संभव है। एजेंसी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर सदस्य देशों की मदद के लिए तैयार है। फिलहाल हालात चिंताजनक जरूर हैं, लेकिन पैनिक की स्थिति नहीं है।
ईरान का भविष्य कैसा होगा? जंग, संकट या कोई नया मोड़
ईरान आने वाले वर्षों में किस दिशा में जाएगा, यह सवाल जितना अहम है उतना ही जटिल भी। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार कमर आगा ने वनइंडिया हिंदी से बातचीत में कहा, ”फिलहाल इसका साफ-साफ जवाब देना मुश्किल है। हालात तेजी से बदल रहे हैं और क्षेत्रीय राजनीति में अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दबाव पहले से ही देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर चुका है। लेकिन इसके बावजूद यह उम्मीद कम है कि ईरान पर लगे प्रतिबंध जल्द हटेंगे या मौजूदा सैन्य तनाव अचानक थम जाएगा।”
उनका कहना है कि ईरान के भीतर एक स्पष्ट सोच काम कर रही है कि अमेरिका के सामने झुकना विकल्प नहीं है। यही कारण है कि दबाव के बावजूद तेहरान अपनी रणनीति बदलने के मूड में नजर नहीं आता। सैन्य मोर्चे पर भी ईरान पूरी तरह खाली हाथ नहीं है। कमर आगा के अनुसार, मौजूदा हालात में ईरान के पास इतने संसाधन और हथियार हैं कि वह कम से कम एक महीने तक बड़े स्तर की लड़ाई लड़ सकता है।
हालांकि वे यह भी जोड़ते हैं कि युद्ध किसी के लिए स्थायी समाधान नहीं होता। आने वाले समय में टकराव बढ़ने की आशंका है, लेकिन स्थिरता फिलहाल दोनों पक्षों में से किसी की प्राथमिकता या संभावना के रूप में दिखाई नहीं देती। कुल मिलाकर, ईरान का भविष्य फिलहाल अनिश्चितता, आर्थिक दबाव और संभावित सैन्य तनाव के बीच झूलता नजर आ रहा है।
English summary
Iran Nuclear Radiation Alert IAEA Warns of Possible Radiological Risk After Strikes Explained News
Israel Lebanon Tension: इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ संघर्ष अब मिडिल ईस्ट के दूसरे देशों तक पहुंच गया है। आईडीएफ ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि बेरूत में हिज्बुल्लाह के कई आतंकियों को मार गिराया गया।
Supreme Court Vs AI; Fake Judgement | Bar Council Andhra Pradesh Property Case
नई दिल्ली/विजयवाड़ा58 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) की मदद से बनाए गए सबूतों पर फैसला लिखना गलत काम है। कोर्ट ने कहा कि ये कोई गलती से होने वाला काम नहीं है।
जस्टिस पी एस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि इसके नतीजों और जवाबदेही की जांच करना चाहते हैं क्योंकि इसका सीधा असर फैसले की प्रक्रिया की ईमानदारी पर पड़ता है। कोर्ट ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है।
दरअसल, पिछले साल अगस्त में आंध्र प्रदेश की एक ट्रायल कोर्ट ने विवादित प्रॉपर्टी के केस में AI से बनी तस्वीर के आधार पर फैसला दिया था। फैसले के खिलाफ आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसी साल जनवरी में हाइकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा…
अगर किसी फैसले का आधार गैर-मौजूद या नकली सबूत हों, तो यह सिर्फ गलती नहीं बल्कि गंभीर गलत आचरण (मिसकंडक्ट) है।
ऐसे मामले में कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया जाता है।
ट्रायल कोर्ट ने केस के दौरान विवादित प्रॉपर्टी की स्थिति देखने के लिए एक एडवोकेेट-कमिश्नर नियुक्त किया था। याचिकाकर्ताओं ने कमिश्नर की रिपोर्ट पर ऑब्जेक्शन जताया।
यह मामला फैसले के नतीजे से ज्यादा, न्याय देने की प्रक्रिया (प्रोसेस) को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए
बेंच पिटीशन पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई और उस पर नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा, स्पेशल लीव पिटीशन का निपटारा होने तक, हम निर्देश देते हैं कि ट्रायल कोर्ट एडवोकेट-कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर आगे नहीं बढ़ेगा। और मामले की सुनवाई 10 मार्च तय की।
इससे पहले 17 फरवरी को एक अलग मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने AI टूल्स से तैयार की गई पिटीशन फाइल करने के बढ़ते ट्रेंड पर गंभीर चिंता जताई थी।
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