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पाकिस्तान क्रिकेट में मचा हड़कंप, टी-20 वर्ल्ड कप में फ्लॉप शो के बाद खिलाड़ियों पर लगा भारी जुर्माना


Cricket

oi-Amit Kumar

Pakistan ICC T20 WC26 Exit: टी20 वर्ल्ड कप 2026 से शर्मनाक तरीके से बाहर होने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने कड़ा रुख अपनाया है। बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने टीम के खराब प्रदर्शन को गंभीरता से लेते हुए खिलाड़ियों पर भारी वित्तीय जुर्माना (Financial Penalty) लगाने का फैसला किया है। पाकिस्तान का प्रदर्शन इस टी-20 वर्ल्ड कप में बेहद निराशाजनक रही है।

खिलाड़ियों पर लगा भारी जुर्माना (Pakistan ICC T20 WC26 Exit)

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुपर-8 चरण में टीम की विफलता और भारत के खिलाफ मिली अपमानजनक हार के बाद सलमान अली आगा और उनकी टीम को प्रति खिलाड़ी 50 लाख पाकिस्तानी रुपये (लगभग 16 लाख भारतीय रुपये) का जुर्माना भरना होगा। क्रिकेट जगत में खराब प्रदर्शन के बाद टीम में बदलाव या कप्तानी छीने जाने की खबरें आम हैं, लेकिन खिलाड़ियों पर इस तरह का सीधा वित्तीय प्रतिबंध लगाना एक अनोखी घटना है।

Pakistan 1

सुपर-8 में सिर्फ श्रीलंका से मिली थी जीत

इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। वे आईसीसी रैंकिंग की टॉप-10 टीमों में से केवल श्रीलंका को हराने में सफल रहे, जबकि अन्य महत्वपूर्ण मुकाबलों में टीम पूरी तरह बेअसर नजर आई। विशेष रूप से भारत के खिलाफ मिली हार ने बोर्ड और फैंस के सब्र का बांध तोड़ दिया है। पाकिस्तान के केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ियों को वर्तमान में भारी-भरकम रिटेनर राशि मिलती है। इस जुर्माने का सबसे बड़ा असर खिलाड़ियों की मासिक आय पर पड़ेगा।

खिलाड़ियों की सैलरी पर सीधा असर

B कैटेगरी श्रेणी के खिलाड़ियों को प्रति माह 30 लाख पाकिस्तानी मिलते हैं। 50 लाख के जुर्माने का मतलब है कि उनकी लगभग पौने दो महीने की सैलरी साफ हो जाएगी। C और D कैटेगरी श्रेणियों के खिलाड़ियों के लिए यह झटका और भी बड़ा है, क्योंकि उनकी मासिक रिटेनर राशि क्रमशः 10 लाख और 7.5 लाख PKR है। बता दें कि जुलाई 2025 से जून 2026 के अनुबंध चक्र में किसी भी खिलाड़ी को ‘ए’ कैटेगरी में जगह नहीं दी गई थी, जिससे यह स्पष्ट था कि बोर्ड पहले से ही प्रदर्शन को लेकर सख्त रवैया अपनाए हुए था।

दिग्गजों के भविष्य पर संकट के बादल

वर्ल्ड कप से बाहर होने और दूसरी ओर चिर-प्रतिद्वंद्वी भारत के सेमीफाइनल में पहुंचने ने जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। मोहसिन नकवी द्वारा घोषित यह फैसला अब केवल जुर्माने तक सीमित नहीं रहने वाली है। सूत्रों की मानें तो बाबर आजम, शाहीन अफरीदी, शादाब खान और खुद कप्तान सलमान आगा के भविष्य पर तलवार लटक रही है।



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PM Kisan Beneficiary List: री-वेरिफिकेशन में सामने आई बड़ी गड़बड़ी! आपका नाम भी हट गया लिस्ट से? अभी करें चेक


India

oi-Kumari Sunidhi Raj

PM Kisan Samman Nidhi Yojana 22nd Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) की 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे करोड़ों किसानों के लिए एक बेहद अहम अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार जल्द ही लाभार्थियों के बैंक खातों में 2,000 रुपये की अगली किस्त जारी करने की तैयारी में है। हालांकि, इस बार सरकार ने योजना में पारदर्शिता और अनियमितताओं को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर लाभार्थियों का री-वेरिफिकेशन (दोबारा सत्यापन) कराया है।

इस गहन जांच प्रक्रिया के बाद कई अपात्र लोगों के नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए गए हैं। जिन किसानों ने हाल ही में जमीन खरीदी है या जिनके परिवार में एक से अधिक सदस्य लाभ ले रहे थे, उन पर सबसे ज्यादा गाज गिरी है। यदि आप भी इस योजना के लाभार्थी हैं, तो किस्त रुकने से बचने के लिए तुरंत अपना स्टेटस ऑनलाइन चेक करें।

PM Kisan 22nd Installment Alert

PM Kisan: री-वेरिफिकेशन में सामने आई ये बड़ी खामियां

सरकार द्वारा कराए गए सत्यापन में कई गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिसके कारण अपात्रों के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। सबसे प्रमुख कारण ये हैं:

जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ी (Land Seeding Issue)

वे किसान जिन्होंने 1 फरवरी 2019 के बाद जमीन अपने नाम कराई है, उनके दस्तावेजों की विशेष जांच की गई है। यदि आपके जमीन के रिकॉर्ड अपडेट नहीं हैं या जमीन का ब्यौरा आधार से लिंक नहीं है, तो आपकी किस्त अटक सकती है। ऐसी स्थिति में, जब तक रिकॉर्ड सही नहीं हो जाते, लाभ अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है।

‘एक परिवार, एक लाभार्थी’ का नियम

PM किसान योजना के नियमानुसार, एक परिवार में पति, पत्नी और नाबालिग बच्चों में से केवल एक सदस्य ही इस योजना का लाभ पाने का पात्र है। जांच में पाया गया कि कई परिवारों में पति और पत्नी दोनों गलत तरीके से किस्त ले रहे थे। ऐसे मामलों में एक नाम सूची से हटा दिया गया है।

e-KYC अनिवार्य, वरना नहीं आएगी किस्त

सरकार ने e-KYC को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। जिन किसानों ने अभी तक अपनी e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उनके खाते में 22वीं किस्त ट्रांसफर नहीं की जाएगी।

कैसे करें: आप अपने नजदीकी CSC केंद्र पर जाकर या आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in के माध्यम से घर बैठे e-KYC पूरा कर सकते हैं।

PM Kisan Status: ऐसे चेक करें अपना स्टेटस (Step-by-Step)

अपनी पात्रता और किस्त की स्थिति जानने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें:

  • सबसे पहले PM किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं।
  • होमपेज पर ‘Know Your Status’ के विकल्प पर क्लिक करें।
  • अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा कोड दर्ज करें।
  • ‘Get Data’ पर क्लिक करें।
  • स्टेटस में ध्यान से जांचें कि e-KYC, Land Seeding, और Aadhaar Bank Account Seeding के आगे ‘Yes’ लिखा हो।

PM Kisan: कब आएगी 22वीं किस्त?

सरकार ने अभी तक आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की है। लेकिन पिछले पैटर्न के आधार पर, 22वीं किस्त फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह या मार्च 2026 के पहले हफ्ते में जारी होने की प्रबल संभावना है।

With AI Inputs

ये भी पढ़ें: PM Kisan 22nd Installment: बिहार के किसानों के लिए अलर्ट! कर दी है ये छोटी सी गलती तो रुक जाएगी किस्त



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अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर किया: इसमें प्लेन कंपनी मालिक मेन पायलट सीट पर सोते दिखे, लिखा- ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं


मुंबई2 घंटे पहले

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महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे जय पवार ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों को तुरंत रोकने की मांग की।

महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे जय पवार ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों को तुरंत रोकने की मांग की। 28 जनवरी 2026 को इसी कंपनी के प्लेन क्रैश में जय के पिता अजित पवार का निधन हुआ था।

जय पवार ने वीडियो शेयर कर लिखा- मैंने अपने पिता को खो दिया है… यह पीड़ा जिंदगी भर मेरे साथ रहेगी। उन्होंने लिखा कि इस वीडियो में वीएसआर के मालिक रोहित सिंह मुख्य पायलट की सीट पर उड़ान के दौरान सोते हुए दिखाई दे रहे हैं।

आसमान में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। यह बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला है।

वीडियो में VSR के मालिक रोहित सिंह मुख्य पायलट की सीट पर उड़ान के दौरान सोते हुए दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो में VSR के मालिक रोहित सिंह मुख्य पायलट की सीट पर उड़ान के दौरान सोते हुए दिखाई दे रहे हैं।

तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए

जय ने लिखा कि मैं डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से मांग करता हूं कि इस मामले में तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। पूरी जांच होने तक VSR की सभी उड़ानों को तत्काल ग्राउंड किया जाए और रोहित सिंह को तुरंत गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

यह एक बेटे की पुकार है… मेरे पिता के लिए और हर यात्री की सुरक्षा के लिए।

VSR के प्लेन पहले ही ग्राउंड

28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के बारामती में हुए Learjet 45 क्रैश में अजित पवार की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद किए गए स्पेशल सेफ्टी ऑडिट के दौरान नियमों के उल्लंघन सामने आया था। इसके बाद DGCA ने VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के चार प्लेन को ग्राउंड कर दिया है।

डीजीसीए के बयान में कहा गया ‘28.01.2026 को बारामती में VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के Learjet 45 एयरक्राफ्ट (VT-SSK) के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद, डीजीसीएने स्पेशल सेफ्टी ऑडिट का आदेश दिया।

ऑडिट टीम ने एयरवर्दीनेस, एयर सेफ्टी और फ्लाइट ऑपरेशन में कई बार नियमों का पालन न होने की जानकारी दी।

इस आकलन के बाद, डीजीसीए ने चार एयरक्राफ्ट(VT-VRA, VT-VRS, VT-VRV और VT-TRI) को तुरंत ग्राउंड कर दिया कार्रवाई शुरू कर दी। ——————– ये खबर भी पढ़ें:

अजित पवार के बेटे बोले- VSR विमान पर बैन लगे:इंस्टाग्राम स्टोरी में हादसे पर सवाल उठाया, इमोशनल मेसेज शेयर कर लिखा- मिस यू डैड

बारामती एयरपोर्ट के बाहर मेन रोड किनारे लगे CCTV में अजित पवार के प्लेन क्रैश की घटना रिकॉर्ड हुई थी। प्लेन तेजी से गिरता नजर आया था।

बारामती एयरपोर्ट के बाहर मेन रोड किनारे लगे CCTV में अजित पवार के प्लेन क्रैश की घटना रिकॉर्ड हुई थी। प्लेन तेजी से गिरता नजर आया था।

महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी CM अजित पवार के बेटे जय पवार ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर लिखा कि VSR वेंचर्स के विमानों के उड़ने पर रोक लगा देनी चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र के बारामती में 28 जनवरी को हुए प्लेन क्रैश की पारदर्शी और पूरी जांच की मांग की। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…



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‘You son of… burn in hell’, खामेनेई को गाली देने वाली एंकर रीता पानाही कौन हैं? कहां की रहने वाली? Video Viral


International

oi-Pallavi Kumari

News Anchor Rita Panahi Ali Khamenei Abuses: ईरान की सियासत में उस वक्त भूचाल आ गया जब सरकारी टीवी पर यह घोषणा हुई कि देश के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) अमेरिकी-इजरायली हमले में मारे गए हैं। सुबह-सुबह प्रसारित इस खबर के दौरान एंकर की आवाज कांप रही थी। 36 साल तक देश की कमान संभालने वाले नेता की मौत की पुष्टि ने पूरे ईरान को भावनात्मक कर दिया। कुछ शहरों में मातम पसरा, तो कुछ जगहों पर लोग जश्न मनाते दिखे। लेकिन इसी बीच अंतरराष्ट्रीय टीवी पर एक और नजारा सामने आया, जिसने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया।

ऑस्ट्रेलिया के चैनल Sky News Australia की एंकर रीता पानाही (Rita Panahi) ने लाइव शो के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने लाखों दर्शकों को चौंका दिया। शो का नाम था “Rita’s Take on Strikes on Iran”। रीता ने इसे अपने करियर का “सबसे छोटा एडिटोरियल” बताया और कहा कि 47 साल की इस्लामिस्ट तानाशाही का अंत हो चुका है और अब ईरान आजादी के करीब है। इसके बाद उन्होंने गाली देते हुए अंग्रेजी में कहा – “You son of a b*tch, burn in Hell!”

News Anchor Rita Panahi Ali Khamenei Abuses

‘खामेनेई “बेकार कुत्ता” नरक में जाना चाहिए’

इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी मातृभाषा फारसी में भी कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और खामेनेई को “बेकार कुत्ता” बताते हुए नरक में जाने की बात कही। यह क्लिप कुछ ही घंटों में वायरल हो गई। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने लिखा – “That was perfect, Rita!” तो किसी ने कहा – “Protect this queen at all costs।” वहीं आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या उन्हें इसके लिए सजा मिल सकती है। ऐसे में आइए जानें कौन हैं रीता पनाही।

🇦🇺 Sky News Australia anchor, Rita Panahi, addressed Irans late leader, Ali Khamenei, in Persian:

“You son of a b*tch, shame on you, burn in hell!” pic.twitter.com/sNTiGNyhAZ

— Visegrád 24 (@visegrad24) March 1, 2026 “>

Who is News Anchor Rita Panahi: कौन हैं एंकर रीता पानाही?

  • 3 मार्च 1976 को अमेरिका के पाइन ब्लफ, अर्कांसस में जन्मीं रीता पानाही ईरानी मूल की अमेरिकी-ऑस्ट्रेलियाई राजनीतिक टिप्पणीकार और पत्रकार हैं। उनके माता-पिता ईरान से थे। पिता कृषि इंजीनियर और मां दाई थीं।
  • ईरानी क्रांति के बाद उनका परिवार मुश्किलों में घिर गया और 1984 में वे शरणार्थी के रूप में ऑस्ट्रेलिया आ गए। तब से रीता मेलबर्न में पली-बढ़ीं और फिर कभी ईरान नहीं लौटीं।
  • रीता ने मोनाश यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की, हालांकि उन्होंने फाइनेंस में बैचलर डिग्री पूरी नहीं की। बाद में उन्होंने स्विनबर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की।

Rita Panahi Media Career: रीता पानाही मीडिया करियर और पहचान

  • रीता ने अपने करियर की शुरुआत स्पोर्ट्स कॉलम लिखने से की। धीरे-धीरे वे ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख अखबार ‘Herald Sun’ की कॉलमिस्ट बनीं, जो News Corp Australia के स्वामित्व में है।
  • वह Sky News Australia पर ‘The Rita Panahi Show’ और ‘Lefties Losing It’ की होस्ट हैं। इसके अलावा Seven Network के ‘Sunrise’ में भी योगदान देती हैं। रेडियो पर 3AW और 2GB से भी जुड़ी रही हैं।
  • उनके विचारों को अक्सर कंजर्वेटिव और दक्षिणपंथी बताया जाता है। सितंबर 2025 तक उनका शो ‘Lefties Losing It’ अमेरिका में 15वां सबसे लोकप्रिय YouTube पॉडकास्ट माना गया।

रीता पानाही का विवादों से पुराना नाता (Rita Panahi Controversies)

रीता पानाही का नाम पहले भी कई विवादों से जुड़ चुका है। वे खुलकर इस्लामिस्ट विचारधारा और ईरान की मौजूदा सत्ता संरचना की आलोचना करती रही हैं। उनका कहना है कि वे उस शासन की पीड़ा को समझती हैं, जिससे उनका परिवार गुजरा। खामेनेई की मौत के बाद उनका ऑन-एयर बयान उसी लंबे वैचारिक संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर रीता पनाही के वीडियो को लेकर क्या बोली पब्लिक (Social Media Reaction)

रीता के बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ यूजर्स ने उनका समर्थन किया, तो कुछ ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। एक यूजर ने लिखा कि “यह ईरानियों के गुस्से का असली तरीका नहीं है।” वहीं कुछ ने उन्हें इजरायल के प्रधानमंत्री का समर्थक तक बता दिया।

Sky News Australia anchor, Rita Panahi, addressed Irans late leader, Ali Khamenei, in Persian:

“You son of a b*tch, shame on you, burn in hell!”

It is rightly said that after death a person is known by his deeds.#Khamenei#Iran pic.twitter.com/wT6XBjtrlb

— Rijuta (@ImRijuta) March 1, 2026 “>

रीता ने यहीं नहीं रुकते हुए मेलबर्न में खामेनेई की मौत पर शोक मना रहे लोगों की तस्वीरें पोस्ट कीं और उन्हें ‘imbeciles’ यानी मूर्ख बताया। उन्होंने लिखा कि अगर किसी को इस्लामिस्ट बनना है तो इस्लामिस्ट देश में जाकर रहे।

A Sky News Australia anchor has gone viral worldwide after closing a live broadcast with a savage farewell directed at Ayatollah Ali Khamenei, delivered entirely in Persian.

“A message to the late Supreme Leader: You son of a b*tch-burn in hell.” pic.twitter.com/9DLHXUT0GC

— Kerry Slone(Stilettos&Shotguns) (@thereal_SnS) March 1, 2026 “>

Sky News Australia anchor Rita Panahi doesn’t hold back in calling Ali Khamenei a “Son of a b*tch” and telling him to “burn in hell.”

pic.twitter.com/4WrKfUNQ7t

— The Post Millennial (@TPostMillennial) March 1, 2026 “>

उनके इस ट्वीट पर भी बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने के बाद इस्लामिस्ट विचारधारा का समर्थन करना विरोधाभासी है। वहीं अन्य यूजर्स ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।





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Kashmir School Closed: विरोध प्रदर्शन की वजह से बंद हुए घाटी के स्कूल, बोर्ड परीक्षाओं को लेकर आया बड़ा अपडेट


Career

oi-Kumari Sunidhi Raj

Kashmir School Closed: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर के बाद कश्मीर घाटी में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसके चलते प्रशासन ने एहतियातन कड़े कदम उठाए हैं। श्रीनगर और बडगाम जैसे शिया-बहुल क्षेत्रों में विशेष रूप से उच्च तीव्रता के साथ प्रदर्शन हुए।

छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अशांति को देखते हुए, सभी शैक्षणिक संस्थान, जिनमें स्कूल और कॉलेज शामिल हैं, दो दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने सुरक्षा बढ़ा दी है, संवेदनशील क्षेत्रों में कर्मियों को तैनात किया गया है, और हिंसा के बढ़ने या गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा बल घाटी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।

Kashmir School Closed

File Photo

तनाव और सार्वजनिक आक्रोश

अयातुल्ला खामेनेई के निधन की खबर ने कश्मीर में तत्काल भावनात्मक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर दीं। हजारों प्रदर्शनकारी श्रीनगर और बडगाम की सड़कों पर उतर आए और अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ नाराजगी के नारे लगाए। प्रशासन को डर है कि ये विरोध प्रदर्शन हिंसक हो सकते हैं या छात्र इनमें शामिल हो सकते हैं, इसलिए उन्होंने कुछ क्षेत्रों में आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। बड़ी सभाओं को रोकने के लिए प्रमुख चौराहों पर बैरिकेडिंग की गई है और सुरक्षा बल कड़ी नजर रख रहे हैं।

शिक्षा पर असर, स्कूल बंद और परीक्षाएं स्थगित

स्कूलों और कॉलेजों के अचानक बंद होने से शैक्षणिक कार्यक्रम पर काफी असर पड़ा है:

  • दो दिवसीय बंदी: सुरक्षा उपाय के रूप में सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थान दो दिनों के लिए बंद हैं।
  • आंतरिक परीक्षाएं स्थगित: कई स्कूलों के यूनिट टेस्ट और कॉलेजों की आंतरिक परीक्षाएं टाल दी गई हैं।
  • विश्वविद्यालय में व्यवधान: कश्मीर विश्वविद्यालय ने तत्काल प्रभाव से होने वाली अपनी सभी परीक्षाएं रद्द कर दी हैं, नई तारीखों की घोषणा सामान्य स्थिति बहाल होने पर की जाएगी।
  • पढ़ाई की भरपाई: शिक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित की जाएंगी।

बोर्ड परीक्षाएं और छात्रों की सुरक्षा

अशांति के बावजूद, प्रशासन छात्रों, विशेष रूप से प्रमुख बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों के शैक्षणिक भविष्य की रक्षा के लिए प्रयास कर रहा है। आधिकारिक बयान में कहा गया है, “सबसे बड़ी प्राथमिकता छात्रों की सुरक्षा है। हालांकि, हमने यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए हैं कि परीक्षा केंद्रों पर जाने वाले छात्रों को रोका न जाए।”

10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए लागू किए गए निर्देश-

  • परीक्षाएं जारी: सीबीएसई और आईसीएसई जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहने की उम्मीद है।
  • एडमिट कार्ड पास के रूप में: छात्रों को अपने एडमिट कार्ड साथ रखने होंगे, जिन्हें सुरक्षाकर्मी प्रतिबंधित क्षेत्रों के माध्यम से आवाजाही की अनुमति देने के लिए पहचानेंगे।
  • कड़ी सुरक्षा निगरानी: अधिकारी जमीनी हकीकत के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करने के लिए स्थिति की हर घंटे निगरानी कर रहे हैं।

With AI Inputs

ये भी पढ़ें: CBSE Board Exams: बहरीन से लेकर दुबई तक, CBSE ने स्थगित की 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं



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Khamenei killing Story: खामेनेई की लोकेशन लीक कैसे हुई? किसने दिया पता? War Tech का खेल जान हैरान हो जाएंगे


International

oi-Pallavi Kumari

Khamenei killing Inside Story: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई तक अमेरिका और इजरायल की पहुंच आखिर कैसे बनी। किसी भी हाई-प्रोफाइल नेता की सटीक लोकेशन पता करना फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि महीनों की तैयारी, डेटा विश्लेषण और मल्टी-लेयर इंटेलिजेंस का नतीजा होता है।

खामेनेई ने करीब 36 साल तक ईरान की सत्ता संभाली। ऐसे में उनकी सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी मानी जाती थी। फिर भी अगर कोई ऑपरेशन सफल होता है, तो उसके पीछे टेक्नोलॉजी, खुफिया नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की लंबी कहानी छिपी होती है।

Khamenei killing Inside Story AI Model

आसमान से नजर, सैटेलाइट की पैनी निगरानी (Khamenei Satellite Surveillance)

आधुनिक युद्ध में पहला और सबसे मजबूत हथियार सैटेलाइट निगरानी माना जाता है। हाई-रिजोल्यूशन इमेजिंग सैटेलाइट अब इतनी एडवांस हो चुकी हैं कि जमीन पर वाहनों की मूवमेंट तक ट्रैक कर सकती हैं। लगातार ली गई तस्वीरों की तुलना कर यह समझा जाता है कि कौन-सी गाड़ी किस परिसर में जा रही है, किस इमारत के आसपास असामान्य गतिविधि बढ़ी है।

किसी भी वीआईपी मूवमेंट में सुरक्षा काफिला, रूट बदलना और सीमित पब्लिक अपीयरेंस शामिल होती है। लेकिन हर बदलाव एक पैटर्न भी बनाता है। लंबे समय तक निगरानी रखने पर यही पैटर्न लोकेशन का सुराग दे सकते हैं।

फोन, रेडियो और इंटरनेट, सिग्नल से सुराग (Signal Intelligence)

दूसरा अहम हथियार है सिग्नल इंटेलिजेंस। फोन कॉल, रेडियो फ्रीक्वेंसी, इंटरनेट ट्रैफिक और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के मेटाडेटा का विश्लेषण करके एजेंसियां यह समझने की कोशिश करती हैं कि कौन किससे संपर्क में है।

आधुनिक सिस्टम यह भी पकड़ सकते हैं कि किसी खास इलाके में कौन-सा डिवाइस अचानक एक्टिव हुआ या बंद हुआ। अगर किसी हाई-सिक्योरिटी जोन में अचानक सीमित डिवाइस एक्टिविटी दिखे, तो वह भी संकेत हो सकता है।

Khamenei killing Inside Story

ड्रोन और स्टेल्थ एयरक्राफ्ट, हवा से खामोश निगरानी (Surveillance Drones)

तीसरा तरीका है लंबी दूरी से निगरानी करने वाले ड्रोन और स्टेल्थ एयरक्राफ्ट। ये कई घंटों तक एक ही इलाके के ऊपर चक्कर लगाकर मूवमेंट रिकॉर्ड करते हैं। थर्मल कैमरा, नाइट विजन और रडार सिस्टम से ऐसी हलचल भी पकड़ी जा सकती है जो सामान्य कैमरे से दिखाई नहीं देती। रात के समय किसी परिसर में असामान्य गतिविधि या अचानक सुरक्षा बढ़ना भी शक की वजह बन सकता है।

जमीन से खबर, अंदरूनी सूत्रों की भूमिका (Human Intelligence)

टेक्नोलॉजी जितनी भी एडवांस हो जाए, जमीन पर मौजूद मानव स्रोतों की भूमिका खत्म नहीं होती। ह्यूमन इंटेलिजेंस कई बार सबसे निर्णायक साबित होती है। सुरक्षा घेरे में मौजूद कमजोरी, करीबी नेटवर्क से लीक या अंदरूनी जानकारी ऑपरेशन की दिशा बदल सकती है।

अक्सर टेक्नोलॉजी और मानव स्रोत मिलकर ही सटीक जानकारी देते हैं। महीनों की निगरानी के बाद मूवमेंट पैटर्न समझे जाते हैं। बड़े नेता लगातार लोकेशन बदलते रहते हैं, लेकिन डेटा एनालिसिस इन बदलावों में छिपी नियमितता पकड़ सकता है।

AI की एंट्री, डेटा से टारगेट तक (Artificial Intelligence)

आधुनिक युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका तेजी से बढ़ी है। हजारों सैटेलाइट इमेज, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा को इंसान नहीं, बल्कि एल्गोरिद्म (Algorithm) पहले स्कैन करते हैं। संदिग्ध पैटर्न मिलने पर अलर्ट तैयार होता है और फिर विश्लेषक उसे जांचते हैं। जंग अब सिर्फ मिसाइल और टैंक का नहीं रहा। पहले डेटा चलता है, फिर हथियार। जो डेटा को बेहतर समझ लेता है, वही बढ़त बना लेता है।

Claude पर रोक और फिर भी इस्तेमाल, US-Iran War में AI विवाद (Anthropic Claude AI)

इस पूरी कहानी में एक और दिलचस्प मोड़ जुड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमलों के दौरान सैन फ्रांसिस्को की एआई कंपनी एंथ्रॉपिक के Claude मॉडल का इस्तेमाल किया। यह वही मॉडल है जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय एजेंसियों को रोक लगाने का निर्देश दिया था।

बताया गया कि मिडिल ईस्ट में तैनात यूएस सेंट्रल कमांड समेत कई कमांड Claude का उपयोग इंटेलिजेंस आकलन, टारगेट पहचान और युद्ध परिदृश्य के सिमुलेशन में करते रहे हैं। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

ट्रंप प्रशासन और एंथ्रॉपिक के बीच विवाद तब बढ़ा जब कंपनी ने अपने एआई सिस्टम को सभी सैन्य परिस्थितियों में बिना शर्त उपयोग की अनुमति देने से इनकार किया। कंपनी के सीईओ डारियो अमोदेई ने कुछ सुरक्षा उपाय हटाने से मना कर दिया और इसे नैतिक सीमा बताया। इसके बाद प्रशासन ने एजेंसियों को एंथ्रॉपिक से दूरी बनाने को कहा और सप्लाई चेन रिस्क तक घोषित करने की बात सामने आई।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि Claude पहले से कुछ सैन्य प्लेटफॉर्म में एम्बेड था, इसलिए उसे तुरंत हटाना आसान नहीं था। इसी बीच यह भी चर्चा में रहा कि ओपनएआई और एलॉन मस्क की xAI जैसे विकल्पों से संपर्क किया गया।

AI, जंग और नैतिक बहस

एंथ्रॉपिक ने बयान में कहा कि वह व्यापक घरेलू निगरानी या पूरी तरह स्वायत्त हथियार प्रणालियों का समर्थन नहीं करेगा। कंपनी ने किसी भी नकारात्मक वर्गीकरण को अदालत में चुनौती देने की बात कही। यह विवाद दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में टेक्नोलॉजी कंपनियां भी रणनीतिक खिलाड़ी बन चुकी हैं। सवाल सिर्फ ताकत का नहीं, बल्कि नैतिक सीमाओं का भी है।

डिजिटल युद्ध का नया चेहरा

खामेनेई की लोकेशन कैसे ट्रैक हुई, इसकी पूरी सच्चाई शायद कभी सार्वजनिक न हो। आधिकारिक एजेंसियां ऑपरेशन की बारीकियां साझा नहीं करतीं। लेकिन इतना साफ है कि यह एक दिन का काम नहीं होता।

सैटेलाइट निगरानी, सिग्नल इंटेलिजेंस, ड्रोन सर्विलांस, ह्यूमन सोर्स और AI आधारित डेटा एनालिसिस का संयोजन ही किसी हाई-प्रोफाइल टारगेट तक पहुंच बनाता है।

आज का युद्ध मैदान सिर्फ जमीन या आसमान में नहीं, बल्कि डेटा की दुनिया में भी है। और जो देश डेटा को समझने और विश्लेषण करने में आगे है, वही रणनीतिक बढ़त हासिल कर सकता है। यही इस पूरी इनसाइड स्टोरी पर सबसे बड़ा संदेश है।



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Toxic Run Time Update: ‘धुरंधर 2’ को जबरदस्त टक्कर देगी ‘टॉक्सिक’, इतने घंटे लंबी होगी फिल्म


Entertainment

oi-Shashank Mani Pandey

Toxic Run Time Update: साल 2026 का मार्च का महीना या कहें कि होली फीकी रह रही है। ऐसा कई सालों बाद हो रहा है। लेकिन 19 मार्च को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त क्लैश होने जा रहा है। साउथ सुपरस्टार Yash की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘टॉक्सिक’ और रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ आ रही है। इन दोनों फिल्मों को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह भी बना हुआ है। दोनों फिल्में ईद के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी। टीज़र को भी फैंस का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।

Toxic Run Time Update

तीन घंटे से ज्यादा लंबी हो सकती है फिल्म
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘टॉक्सिक’ का रनटाइम लगभग 3 घंटे 20 मिनट यानी करीब 200 मिनट हो सकता है। हालांकि मेकर्स ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अगर यह खबर सही साबित होती है, तो यह हाल के समय की सबसे लंबी एक्शन फिल्मों में से एक होगी। बताया जा रहा है कि फिल्म में जबरदस्त एक्शन, ड्रामा और इमोशनल सीन्स शामिल हैं, इसलिए इसकी लंबाई ज्यादा रखी गई है। मेकर्स का मानना है कि कहानी इतनी दमदार है कि दर्शक पूरे समय फिल्म से जुड़े रहेंगे।

लंबी फिल्मों का बदलता ट्रेंड
पहले माना जाता था कि ज्यादा लंबी फिल्में दर्शकों को बोर कर सकती हैं। लेकिन हाल के सालों में यह सोच बदली है। Animal जैसी फिल्मों ने साबित किया है कि अगर कंटेंट मजबूत हो, तो दर्शक लंबी फिल्में भी पसंद करते हैं। इसी ट्रेंड को देखते हुए ‘टॉक्सिक’ का रनटाइम लंबा रखा गया है।

बॉक्स ऑफिस पर बड़ा मुकाबला
‘टॉक्सिक’ की रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ा क्लैश देखने को मिल सकता है। खबर है कि इसकी टक्कर Dhurandhar: The Revenge से होगी। दोनों फिल्मों को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। ट्रेड एक्सपर्ट्स इस मुकाबले को 2026 का बड़ा ‘महाक्लैश’ मान रहे हैं।

क्या दर्शक देंगे साथ?
अब सबकी नजर इस बात पर है कि लंबा रनटाइम दर्शकों को कितना पसंद आता है। अगर कहानी और एक्शन उम्मीद के मुताबिक रहा, तो ‘टॉक्सिक’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ा रिकॉर्ड बना सकती है। फिलहाल, फैंस को फिल्म के ट्रेलर और आधिकारिक रनटाइम घोषणा का इंतजार है।



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दोस्ती, धोखा और कत्ल… दिल्ली पुलिस ने सुलझाई द्वारका मर्डर केस की गुत्थी, मुख्य आरोपी समेत 4 गिरफ्तार


दिल्ली की द्वारका पुलिस ने छत्तीसगढ़ भवन के 48 साल के कैंटीन ऑपरेटर अनुरूप गुप्ता के हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली है. लालच और लूट में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था. मामले में द्वारका पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

दिल्ली पुलिस के अनुसार, 23 फरवरी को द्वारका नॉर्थ पुलिस थाने में कैंटीन ऑपरेटर अनुरूप गुप्ता के लापता होने की सूचना दर्ज कराई गई थी, जिसमें शिकायतकर्ता ने बताया था कि उसका भाई अनुरूप गुप्ता 18 फरवरी से लापता है और उसकी कार का भी पता नहीं चल रहा है. परिवार ने भी किसी पिछली दुश्मनी या झगड़े से इनकार किया और कहा कि अनुरूप गुप्ता शांति से अपनी जिंदगी जी रहा था.

द्वारका जिले के डीसीपी अंकित सिंह ने अनुरूप गुप्ता की तलाश के लिए टीम का गठन किया. शुरुआत में एनएचएआई अधिकारियों से कार का विवरण प्राप्त किया गया था और पाया गया कि कार को आखिरी बार 19-20 फरवरी की रात को यमुना एक्सप्रेसवे पर देखा गया था. इसके बाद टीम ने टोल प्लाजा पर वाहनों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की. द्वारका में भी मामले की जांच की गई और पता चला कि 18 फरवरी को अनुरूप गुप्ता ने एक बाइक बुक की थी और उसने अपनी कार छत्तीसगढ़ सदन में ही छोड़ दी थी.

सीडीआर एनालिसिस की मदद से रैपिडो राइडर का पता लगाया गया और रैपिडो राइडर के कहने पर मटियाला एक्सटेंशन में एक घर की पहचान की गई, जहां रैपिडो राइडर ने लापता व्यक्ति को छोड़ा था. ड्रॉप पॉइंट के आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई और लापता व्यक्ति को बिल्डिंग में घुसते हुए देखा गया, लेकिन वह कभी बाहर नहीं आया. अनुरूप के घुसने के बाद 4 और लोगों को भी बिल्डिंग में घुसते देखा गया.

इसके बाद, कथित लोगों की संदिग्ध हरकतें देखी गईं. उन्होंने एक स्कूटी का इस्तेमाल भी किया. 19 फरवरी को अनुरूप गुप्ता की कार कुछ समय बाद बिल्डिंग के बेसमेंट में घुसती हुई देखी गई. कार को फिर से बिल्डिंग से बाहर आते हुए देखा गया और उसके बाद कार वृंदावन की ओर चली गई.

आरोपी लोगों की स्कूटी का पता चल गया और पता चला कि वह हरियाणा के हांसी क्षेत्र के रहने वाले हैप्पी के नाम रजिस्टर्ड है. टेक्निकल सर्विलांस की मदद से आरोपी का पता लगाया गया और लगातार पूछताछ में उसने बताया कि उसने अपने दोस्तों भूपेंद्र, बलराम, नीरज और राखी के साथ मिलकर अनुरूप गुप्ता को किडनैप करने और उससे पैसे ऐंठने की साजिश रची थी. जब पीड़ित ने पैसे देने से मना कर दिया, तो उन्होंने उसे मार डाला.

हैप्पी उर्फ सूरज ने यह भी बताया कि करीब एक साल पहले वह छत्तीसगढ़ सदन कैंटीन में अनुरूप गुप्ता के संपर्क में आया था और उसने देखा कि अनुरूप सोने की कई अंगूठियां और ब्रेसलेट पहनता है. आरोपी ने अनुरूप गुप्ता को मटियाला एक्सटेंशन में अपने किराए के घर (जहां वह अपनी लिव-इन-पार्टनर राखी के साथ रह रहा था) पर एक पार्टी के लिए बुलाया और वे दोस्त बन गए. हैप्पी को यह भी पता था कि अनुरूप गुप्ता अपने परिवार से अलग रह रहा है. उसने अनुरूप गुप्ता से पैसे ऐंठने की साजिश रची और प्लान को पूरा करने के लिए भूपेंद्र, बलराम और नीरज (सभी हरियाणा से) से कॉन्टैक्ट किया.

दिल्ली पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कबूल किया कि उसने 18 फरवरी को अनुरूप गुप्ता को मटियाला एक्सटेंशन में अपने किराए के घर पर पार्टी के लिए बुलाया और उसके बाद भूपेंद्र, बलराम और नीरज घर में घुस आए. सभी आरोपियों ने अनुरूप को पीटा और उसे रस्सी से बांध दिया. अनुरूप ने आरोपियों को बताया था कि उसने अपनी अंगूठियां और ब्रेसलेट अपनी कार में छोड़ दिए हैं जो छत्तीसगढ़ सदन में पार्क थी.

आरोपियों ने अनुरूप गुप्ता से कार की चाबी जबरदस्ती ले ली और कार मटियाला एक्सटेंशन ले आए. सोने का सामान लेने के बाद सभी आरोपियों ने अनुरूप को पीटना शुरू कर दिया और उससे पैसे मांगे. अनुरूप ने आरोपियों को पैसे देने से मना कर दिया और सोने का सामान लेने के बाद आरोपियों ने उसे चाकू मारकर मार डाला.

अनुरूप गुप्ता की मौत के बाद 2 आरोपी बलराम और नीरज हरियाणा के झज्जर में उनके घर गए. आरोपी हैप्पी उर्फ ​​सूरज ने लाश के टुकड़े करने के लिए एक बड़ा चाकू खरीदा. फिर लाश के टुकड़ों को तीन प्लास्टिक बैग में पैक किया गया. आरोपियों ने खून के धब्बे धोए और खून से सने कपड़ों को एक पॉलीथीन में रख दिया. आरोपियों ने अनुरूप का मोबाइल फोन बंद नहीं किया और पुलिस को गुमराह करने के लिए मोबाइल को पीड़ित की कार में भी रख दिया.

आरोपियों ने पीड़ित के फोन से छत्तीसगढ़ सदन कैंटीन के स्टाफ को कैंटीन बंद करने का मैसेज भी भेजा और पीड़ित के परिवार वालों को भी मैसेज भेजा कि वह गोवा छुट्टी पर जा रहा है और उसे परेशान न किया जाए. पीड़ित के शरीर के अंगों को ठिकाने लगाने की जानकारी उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के पुलिस थानों के साथ शेयर की गई.

हैप्पी उर्फ ​​सूरज की निशानदेही पर भूपेंद्र को इंद्रलोक से और राखी को हांसी से पकड़ा गया. आरोपी बलराम को झज्जर से पकड़ा गया. वहीं, दिल्ली पुलिस की बहुत कोशिशों के बाद तीनों प्लास्टिक बैग मथुरा में यमुना नदी से बरामद किए गए.



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Khamenei killing Story: खामेनेई की लोकेशन लीक कैसे हुई? किसने दिया पता? War Tech का खेल जान हैरान हो जाएंगे


India

oi-Pallavi Kumari

Khamenei killing Inside Story: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई तक अमेरिका और इजरायल की पहुंच आखिर कैसे बनी। किसी भी हाई-प्रोफाइल नेता की सटीक लोकेशन पता करना फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि महीनों की तैयारी, डेटा विश्लेषण और मल्टी-लेयर इंटेलिजेंस का नतीजा होता है।

खामेनेई ने करीब 36 साल तक ईरान की सत्ता संभाली। ऐसे में उनकी सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी मानी जाती थी। फिर भी अगर कोई ऑपरेशन सफल होता है, तो उसके पीछे टेक्नोलॉजी, खुफिया नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की लंबी कहानी छिपी होती है।

Khamenei killing Inside Story AI Model

आसमान से नजर, सैटेलाइट की पैनी निगरानी (Khamenei Satellite Surveillance)

आधुनिक युद्ध में पहला और सबसे मजबूत हथियार सैटेलाइट निगरानी माना जाता है। हाई-रिजोल्यूशन इमेजिंग सैटेलाइट अब इतनी एडवांस हो चुकी हैं कि जमीन पर वाहनों की मूवमेंट तक ट्रैक कर सकती हैं। लगातार ली गई तस्वीरों की तुलना कर यह समझा जाता है कि कौन-सी गाड़ी किस परिसर में जा रही है, किस इमारत के आसपास असामान्य गतिविधि बढ़ी है।

किसी भी वीआईपी मूवमेंट में सुरक्षा काफिला, रूट बदलना और सीमित पब्लिक अपीयरेंस शामिल होती है। लेकिन हर बदलाव एक पैटर्न भी बनाता है। लंबे समय तक निगरानी रखने पर यही पैटर्न लोकेशन का सुराग दे सकते हैं।

फोन, रेडियो और इंटरनेट, सिग्नल से सुराग (Signal Intelligence)

दूसरा अहम हथियार है सिग्नल इंटेलिजेंस। फोन कॉल, रेडियो फ्रीक्वेंसी, इंटरनेट ट्रैफिक और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के मेटाडेटा का विश्लेषण करके एजेंसियां यह समझने की कोशिश करती हैं कि कौन किससे संपर्क में है।

आधुनिक सिस्टम यह भी पकड़ सकते हैं कि किसी खास इलाके में कौन-सा डिवाइस अचानक एक्टिव हुआ या बंद हुआ। अगर किसी हाई-सिक्योरिटी जोन में अचानक सीमित डिवाइस एक्टिविटी दिखे, तो वह भी संकेत हो सकता है।

Khamenei killing Inside Story

ड्रोन और स्टेल्थ एयरक्राफ्ट, हवा से खामोश निगरानी (Surveillance Drones)

तीसरा तरीका है लंबी दूरी से निगरानी करने वाले ड्रोन और स्टेल्थ एयरक्राफ्ट। ये कई घंटों तक एक ही इलाके के ऊपर चक्कर लगाकर मूवमेंट रिकॉर्ड करते हैं। थर्मल कैमरा, नाइट विजन और रडार सिस्टम से ऐसी हलचल भी पकड़ी जा सकती है जो सामान्य कैमरे से दिखाई नहीं देती। रात के समय किसी परिसर में असामान्य गतिविधि या अचानक सुरक्षा बढ़ना भी शक की वजह बन सकता है।

जमीन से खबर, अंदरूनी सूत्रों की भूमिका (Human Intelligence)

टेक्नोलॉजी जितनी भी एडवांस हो जाए, जमीन पर मौजूद मानव स्रोतों की भूमिका खत्म नहीं होती। ह्यूमन इंटेलिजेंस कई बार सबसे निर्णायक साबित होती है। सुरक्षा घेरे में मौजूद कमजोरी, करीबी नेटवर्क से लीक या अंदरूनी जानकारी ऑपरेशन की दिशा बदल सकती है।

अक्सर टेक्नोलॉजी और मानव स्रोत मिलकर ही सटीक जानकारी देते हैं। महीनों की निगरानी के बाद मूवमेंट पैटर्न समझे जाते हैं। बड़े नेता लगातार लोकेशन बदलते रहते हैं, लेकिन डेटा एनालिसिस इन बदलावों में छिपी नियमितता पकड़ सकता है।

AI की एंट्री, डेटा से टारगेट तक (Artificial Intelligence)

आधुनिक युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका तेजी से बढ़ी है। हजारों सैटेलाइट इमेज, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा को इंसान नहीं, बल्कि एल्गोरिद्म (Algorithm) पहले स्कैन करते हैं। संदिग्ध पैटर्न मिलने पर अलर्ट तैयार होता है और फिर विश्लेषक उसे जांचते हैं। जंग अब सिर्फ मिसाइल और टैंक का नहीं रहा। पहले डेटा चलता है, फिर हथियार। जो डेटा को बेहतर समझ लेता है, वही बढ़त बना लेता है।

Claude पर रोक और फिर भी इस्तेमाल, US-Iran War में AI विवाद (Anthropic Claude AI)

इस पूरी कहानी में एक और दिलचस्प मोड़ जुड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमलों के दौरान सैन फ्रांसिस्को की एआई कंपनी एंथ्रॉपिक के Claude मॉडल का इस्तेमाल किया। यह वही मॉडल है जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय एजेंसियों को रोक लगाने का निर्देश दिया था।

बताया गया कि मिडिल ईस्ट में तैनात यूएस सेंट्रल कमांड समेत कई कमांड Claude का उपयोग इंटेलिजेंस आकलन, टारगेट पहचान और युद्ध परिदृश्य के सिमुलेशन में करते रहे हैं। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

ट्रंप प्रशासन और एंथ्रॉपिक के बीच विवाद तब बढ़ा जब कंपनी ने अपने एआई सिस्टम को सभी सैन्य परिस्थितियों में बिना शर्त उपयोग की अनुमति देने से इनकार किया। कंपनी के सीईओ डारियो अमोदेई ने कुछ सुरक्षा उपाय हटाने से मना कर दिया और इसे नैतिक सीमा बताया। इसके बाद प्रशासन ने एजेंसियों को एंथ्रॉपिक से दूरी बनाने को कहा और सप्लाई चेन रिस्क तक घोषित करने की बात सामने आई।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि Claude पहले से कुछ सैन्य प्लेटफॉर्म में एम्बेड था, इसलिए उसे तुरंत हटाना आसान नहीं था। इसी बीच यह भी चर्चा में रहा कि ओपनएआई और एलॉन मस्क की xAI जैसे विकल्पों से संपर्क किया गया।

AI, जंग और नैतिक बहस

एंथ्रॉपिक ने बयान में कहा कि वह व्यापक घरेलू निगरानी या पूरी तरह स्वायत्त हथियार प्रणालियों का समर्थन नहीं करेगा। कंपनी ने किसी भी नकारात्मक वर्गीकरण को अदालत में चुनौती देने की बात कही। यह विवाद दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में टेक्नोलॉजी कंपनियां भी रणनीतिक खिलाड़ी बन चुकी हैं। सवाल सिर्फ ताकत का नहीं, बल्कि नैतिक सीमाओं का भी है।

डिजिटल युद्ध का नया चेहरा

खामेनेई की लोकेशन कैसे ट्रैक हुई, इसकी पूरी सच्चाई शायद कभी सार्वजनिक न हो। आधिकारिक एजेंसियां ऑपरेशन की बारीकियां साझा नहीं करतीं। लेकिन इतना साफ है कि यह एक दिन का काम नहीं होता।

सैटेलाइट निगरानी, सिग्नल इंटेलिजेंस, ड्रोन सर्विलांस, ह्यूमन सोर्स और AI आधारित डेटा एनालिसिस का संयोजन ही किसी हाई-प्रोफाइल टारगेट तक पहुंच बनाता है।

आज का युद्ध मैदान सिर्फ जमीन या आसमान में नहीं, बल्कि डेटा की दुनिया में भी है। और जो देश डेटा को समझने और विश्लेषण करने में आगे है, वही रणनीतिक बढ़त हासिल कर सकता है। यही इस पूरी इनसाइड स्टोरी पर सबसे बड़ा संदेश है।



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इजराइली राजदूत बोले- मोदी को पता नहीं था हमला होगा: PM का इजराइल दौरा खत्म होने के बाद ईरान पर अटैक को मंजूरी दी




PM मोदी इजराइल दौरे पर 25 और 26 फरवरी को थे, इसके ठीक बाद 28 फरवरी को इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर स्ट्राइक्स कर दीं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इजराइल दौर पर होते हुए पीएम मोदी को इसकी जानकारी दी गई थी? क्या हमले के बाद इजराइल ने भारत के विदेश मंत्रालय से इसके बारे में बात की है? कहीं पीएम मोदी के दौरे को इजराइल ने कवर की तरह तो इस्तेमाल नहीं किया? इजराइल ने सबसे पहले ईरान पर प्रिएंपटिव स्ट्राइक का नाम देकर हमले किए। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इन हमलों में अमेरिकी भागेदारी की जानकारी की पुष्टि की। लेकिन एक साल में दूसरी बार इजराइल ने क्यों ईरान पर हमला किया? और इजराइल में इस युद्ध को लेकर क्या माहौल है? हमने ये सवाल भारत में इजराइल के राजदूत रुवेन अजार से पूछे। सवाल: इजराइल ने साल में दूसरी बार प्रिएंपटिव स्ट्राइक की हैं, ईरान पर हमले का अंतिम लक्ष्य क्या है? जवाब: सबसे पहले हम सामने दिख रहे खतरे ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना चाहते हैं। ईरान दशकों से मिलिट्री न्यूक्लियर प्रोग्राम चलाने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा बैलेस्टिक मिसाइल की ताकत बढ़ाने के लिए काम कर रहा है, ताकि इजराइल को खत्म कर सके। ईरान पूरे रीजन में अपने प्रॉक्सी ग्रुप को फंड, हथियार और टेक्नोलॉजी दे रहा है। ईरान 2027 तक इजराइल को खत्म करना की बात करता था। जून में हमने उस पर हमले किए थे। ईरान ने अब सहयोग करने से इनकार किया, तो हमने फिर से ऑपरेशन शुरू किया है। सवाल: अगर आप अपने लक्ष्यों को हासिल कर लेते हैं और रिजीम चेंज होता है तो भविष्य में ईरान में किस तरह की सत्ता होगी? जवाब: हमें नहीं पता कि ईरान में सत्ता बदलेगी या नहीं, लेकिन हम चाहते हैं कि ये जरूर हो। कुछ हफ्ते पहले ही मौजूदा सरकार ने अपने हजारों नागरिकों को मार दिया था। सवाल: ईरान पर हमले PM मोदी के इजराइल दौरे के ठीक बाद हुए हैं, क्या पीएम मोदी को इन हमलों की जानकारी दी गई थी? जवाब: भारत हमारी स्थिति अच्छी तरह जानता है। PM मोदी इजराइल में थे, तब हमें नहीं पता था कि ऑपरेशन होने वाला है। इसकी मंजूरी 28 फरवरी की सुबह दी गई। तब तक PM मोदी दौरा पूरा करके लौट चुके थे। इजराइल के विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर को फोन करके बात की थी। सवाल: विदेश मंत्री जयशंकर का इस मामले पर क्या कहना था, अगर आप बता सकें? जवाब: भारत ने अपनी स्थिति पर खुलकर बात की। भारत बातचीत और स्थिरता चाहता है। हमने कई साल ईरान से डिप्लोमेसी के तहत बातचीत की कोशिश की है। अमेरिका ने महसूस किया कि ईरान डिप्लोमेसी के जरिए वक्त बिता रहा है और शर्तें मानने के लिए तैयार नहीं है। सवाल: इजराइल में लोग ईरान के नेता खामेनेई की मौत पर जश्न मना रहे हैं, आप बताइए कि इस वक्त इजराइल में कैसा माहौल है? जवाब: इजराइल खुद को सुरक्षित रखना चाहता है। इजराइल पर बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से लगातार हमले हो रहे हैं। कई लोग खामेनेई की मौत पर खुशी मना रहे हैं, क्योंकि ईरान का सुप्रीम लीडर इजराइल पर हमले के ऑर्डर देता था, इजराइल के लोगों को मारता था, अब वो नहीं है। हमने ईरान में भी जश्न की फोटो देखी हैं। मुझे लगता है कि ईरान के लोग इस मौके के जरिए सत्ता बदलेंगे।



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