नेशनल स्टॉक एक्सचेंज इंडिया (एनएसई) के रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब यह बढ़कर 13 करोड़ से अधिक हो गई है। एक्सचेंज ने बताया कि सितंबर 2025 में एनएसई पर रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 12 करोड़ से अधिक थी। 25 अप्रैल 2026 तक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड कुल ग्राहक कोड 25.7 करोड़ रहे। एनएसई के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। पहले एक करोड़ निवेशकों तक पहुंचने में 14 साल लगे थे, उसके बाद 3 करोड़ निवेशक जोड़ने में 11 साल का समय लगा और अब 1 करोड़ निवेशक जोड़ने में लगभग 6 से 8 महीने लग रहे हैं। इससे पता चलता है कि रिटेल निवेशकों की भागीदारी लगातार पूंजी बाजार में बढ़ रही है।
निवेशकों की संख्या बढ़ने की मुख्य वजहें
एक्सचेंज के अनुसार निवेशकों की संख्या में वृद्धि होने की एक वजह यह भी है कि डिजिटल पहुंच बढ़ी है, जिससे वे आसानी अपना डीमैट खाता खोल पाते हैं। दूसरा निवेशकों में जागरुता आई है और नियामकों तथा बाजार इंफ्रास्टक्चर से जुड़ी एंटिटीज के जरिए पूंजी बाजारों में और अधिक समावेशी बनाने पर जोर दिया गया है।
निवेशक और कंपनियों का बाजार पूंजीकरण सीएजीआर बढ़ा
वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2026 तक के दौरान यानि कि 5 साल में निवेशकों की संख्या 26.4 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ी। इससे पहले के 5 वर्षों के दौरान यह दर 15.2 प्रतिशत थी। साथ ही एनएसई पर लिस्टेड कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 18 प्रतिशत की CAGR से बढ़कर 460.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं दिसंबर 2025 तक व्यक्तिगत निवेशकों की बाजार में हिस्सेदारी (सीधे तौर पर या म्यूचुअल फंड के जरिए) 18.6 प्रतिशत थी।
हर चार में से एक महिला निवेशक
एक्सचेंज के अनुसार निवेशकों की जनसांख्यिकी में बदलाव आया है, जिसमें निवेशकों की औसत आयु घटकर लगभग 33 साल रह गई है। वित्त वर्ष 2021 में यह 36 साल थी। वहीं यह भी देखा गया है कि 40 प्रतिशत निवेशक 30 साल से कम आयु के हैं। वहीं महिला निवेशकों की भी भागीदारी बढ़ी है, आज हर 4 में से एक महिला निवेशक है। भौगोलिक रूप से भी हिस्सेदारी बढ़ी है। देश में 99.85 प्रतिशत पिन कोड में निवेशक मौजूद है। महाराष्ट्र लगभग 2 करोड़ निवेशकों के साथ सबसे आगे है, उसके बाद यानी दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश जहां 1.5 करोड़ निवेशक हैं और गुजरात में 1.1 करोड़ निवेशकों के साथ तीसरे स्थान पर है।



