अमेरिकी प्रशासन ने कुछ औद्योगिक और कृषि उपकरणों पर लगने वाले कर (टैरिफ) को 25 से घटाकर 15 फीसदी करने की घोषणा की है। यह छूट उन उपकरणों पर लागू होगी, जिनमें इस्पात (स्टील), एल्युमीनियम या कॉपर का उपयोग किया गया है। थिंक टैंक जीटीआरआई ने मंगलवार को यह बात कही।
भारत को सीमित लाभ की संभावना: अजय श्रीवास्तव
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, इन बदलावों से भारत को सीमित लाभ मिलने की संभावना है। इंजीनियरिंग की वस्तुएं, हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर-कंडीशनिंग (एचवीएसी) उपकरण, इलेक्ट्रिकल उपकरण और कृषि उपकरणों के निर्यातकों को इससे कुछ फायदा हो सकता है, लेकिन कुल प्रभाव बहुत बड़ा नहीं होगा।
नई दरें 8 जून से लागू होंगी
नई दरें 8 जून 2026 से 31 दिसंबर 2027 तक लागू रहेंगी। इसके दायरे में हीटिंग और एयर-कंडीशनिंग उपकरण, बुलडोजर, फोर्कलिफ्ट, हार्वेस्टर, कृषि मशीनरी और कुछ इलेक्ट्रिकल ग्रिड उपकरण शामिल हैं।
नई 10 फीसदी टैरिफ श्रेणी
इसके साथ एक नई 10 फीसदी टैरिफ श्रेणी भी बनाई गई है। यह उन आयातित उत्पादों पर लागू होगी, जिनमें कम से कम 85 फीसदी अमेरिका मूल के स्टील, एल्युमीनियम या कॉपर का वजन के अनुसार उपयोग हुआ हो। जिन उत्पादों में 15 फीसदी या उससे कम स्टील, एल्युमीनियम या कॉपर है, उन पर सेक्शन 232 टैरिफ से छूट जारी रहेगी।
मुख्य टैरिफ में कोई बदलाव नहीं
हालांकि, मुख्य धातु टैरिफ में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अधिकतर आयातित स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ पहले की तरह लागू रहेगा। जबकि इन धातुओं से बने कई डाउनस्ट्रीम और डेरिवेटिव उत्पादों पर 25 फीसदी शुल्क जारी रहेगा।
ये भी पढ़ें: सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार वापसी; सोना 1.61 लाख रुपये के पार, जानें बाजार का हाल
भारत के लिए अवसर और चुनौती
भारत ने वित्त वर्ष 2026 में अमेरिका से लगभग 2.9 अरब डॉलर के स्टील, एल्युमीनियम, कॉपर और संबंधित उत्पादों का आयात किया है, जिससे भारतीय निर्माताओं को अमेरिकी मूल के इनपुट का उपयोग करके कम टैरिफ का लाभ लेने का कुछ अवसर मिल सकता है।
लेकिन मुख्य समस्या वही बनी हुई है कि भारतीय स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर उत्पादों पर अब भी 50 फीसदी का सेक्शन 232 टैरिफ लागू है, जबकि कई डाउनस्ट्रीम धातु उत्पादों पर 25 फीसदी टैरिफ जारी है।



