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The Bonus Market Update: बाजार में लगातार तीसरे दिन तेजी; सेंसेक्स 262 अंक चढ़ा, निफ्टी 24250 के पार


घरेलू शेयर बाजार में हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन समापन हरे निशान पर हुआ। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने और फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें घटने से घरेलू शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुए। इसके साथ ही, डॉलर इंडेक्स में गिरावट के चलते रुपये ने भी मुद्रा के मुकाबले शानदार वापसी की। हालांकि, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा है।

शेयर बाजार की इस तेजी के पीछे कौन से बड़े कारण रहे?

सेंसेक्स 261.79 अंक (0.33%) चढ़कर 77,763.91 और निफ्टी 95.15 अंक (0.39%) की बढ़त के साथ 24,270.85 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार की इस तेजी का नेतृत्व मुख्य रूप से आईटी, रियलिटी और फार्मा इंडेक्स ने किया, जिनमें से प्रत्येक में करीब 2% की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, ऑटो और पीएसयू बैंक इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। एनएसई पर कुल 1,823 शेयरों में तेजी और 1,513 शेयरों में गिरावट रही, जबकि 100 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए।

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये को कैसे मिला सहारा?

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे मजबूत होकर 95.21 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। गुरुवार को रुपया 19 पैसे टूटकर 95.35 पर बंद हुआ था। रुपया शुक्रवार को 95.16-95.35 के दायरे में रहा। डॉलर इंडेक्स भी अपने हालिया 15 महीने के उच्चतम स्तर 101.6 से गिरकर 100.75 पर आ गया। डॉलर इंडेक्स में नरमी और कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) के 71.96 डॉलर प्रति बैरल पर रहने के बीच रुपये को मजबूती मिली। हालांकि, आयातकों और कॉर्पोरेट हेजर्स की मजबूत डॉलर मांग से रुपये पर दबाव बना रहा।

क्या भारतीय रिजर्व बैंक डॉलर की भारी खरीद कर रहा है?

विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार, आयातकों की डॉलर मांग के बीच आरबीआई रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाजार में सक्रिय है। आरबीआई अपने विदेशी मुद्रा भंडार को फिर से बढ़ाने के लिए लगातार डॉलर की खरीद कर रहा है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी के रिकॉर्ड स्तर 728.49 अरब डॉलर से घटकर वर्तमान में लगभग 672.6 अरब डॉलर पर आ गया है, जिसे दुरुस्त करने के लिए रिजर्व बैंक सक्रिय रूप से डॉलर खरीद रहा है।

विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली क्या चिंता का विषय है?

बाजार में तेजी के बीच विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जून में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 49,340 करोड़ रुपये (5.16 अरब डॉलर) निकाले। इस बिकवाली की मुख्य वजह वैश्विक जोखिम, विकसित बाजारों के प्रति झुकाव, उच्च अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और घरेलू बाजार का महंगा वैल्यूएशन रहा। सीडीएसएल के अनुसार, साल 2026 में विदेशी निवेशकों की निकासी बढ़कर 2.7 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुकी है, जो साल 2025 की कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से काफी अधिक है। गुरुवार को भी विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुद्ध रूप से 311.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

भविष्य की राह किस ओर इशारा करती है?

घरेलू बाजार में सकारात्मक रुख और डॉलर इंडेक्स की कमजोरी ने फिलहाल बाजार और रुपये को संभाला हुआ है। लेकिन यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और घरेलू कंपनियों की डॉलर मांग आगे भी इसी तरह जारी रहती है, तो रुपये और घरेलू इक्विटी बाजार पर दबाव फिर बढ़ सकता। आरबीआई का मुद्रा भंडार बढ़ाने का प्रयास बाजार को भविष्य के बाहरी झटकों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



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