अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर छाई अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है। विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली के दबाव के कारण इक्विटी बाजारों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारी दबाव दिखा। वहीं दूसरी ओर, कमोडिटी बाजार में सरकार के एक बड़े फैसले के बाद सोने और चांदी की कीमतें नए स्तर पर पहुंच गईं हैं। बुधवार को शुरुआती कारोबार में मामूली बढ़त के बाद बेंचमार्क इक्विटी सूचकांक नकारात्मक दायरे में फिसल गए।
सेंसेक्स और निफ्टी में सुस्ती और बिकवाली का दौर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक लंबे भू-राजनीतिक संकट की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। इस तनाव के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह (रिस्क एपेटाइट) काफी कमजोर हो गया है। यही वजह है कि 13 मई 2026 के शुरुआती कारोबार में भी बाजारों में लगातार बिकवाली का दौर जारी रहा।
- सेंसेक्स: तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 75.64 अंक चढ़कर 74,614.51 पर पहुंच गया था। पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी भी 17.10 अंक बढ़कर 23,391.10 पर पहुंच गया था।
- निफ्टी: दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी 50 में 18.11 अंक (0.08 प्रतिशत) की बेहद मामूली बढ़त दर्ज की गई और यह 23,397.65 के स्तर पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितता इसका मुख्य कारण रही। विदेशी फंडों की निकासी ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, दोनों बेंचमार्क सूचकांक इस गति को बनाए रखने में विफल रहे। बीएसई सेंसेक्स 182.60 अंक गिरकर 74,362.19 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 41.05 अंक गिरकर 23,352.25 पर आ गया।
सेंसेक्स की तीस कंपनियों में पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, भारतीय स्टेट बैंक, टाइटन और एक्सिस बैंक सबसे बड़े नुकसान में रहे। एशियन पेंट्स, अडानी पोर्ट्स, टाटा स्टील और कोटक महिंद्रा बैंक लाभ में रहे।
वैश्विक कारक और मुद्रास्फीति
वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 106.6 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार, 12 मई को 1,959.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में मामूली बढ़कर 3.48 फीसदी हो गई। यह मुख्य रूप से सोने और चांदी के आभूषणों तथा कुछ रसोई वस्तुओं की ऊंची कीमतों के कारण हुआ। लिवेलॉन्ग वेल्थ के शोध विश्लेषक और संस्थापक हरिप्रासद के ने कहा कि अमेरिकी मुद्रास्फीति के अनुमान से अधिक आने के बाद एसएंडपी 500 में गिरावट आई।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार पर असर
बाजारों को चिंता है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितता वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा सकती है। एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर ने बताया कि ईरान की नवीनतम टिप्पणियों ने तत्काल राजनयिक समाधान की उम्मीदें कम कर दी हैं। अमेरिका-ईरान गतिरोध वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। मंगलवार, 12 मई को सेंसेक्स 1,456.04 अंक या 1.92 फीसदी गिरकर 74,559.24 पर बंद हुआ था। निफ्टी 436.30 अंक या 1.83 फीसदी गिरकर 23,379.55 पर समाप्त हुआ।
कस्टम ड्यूटी में 15% तक की बढ़ोतरी
शेयर बाजार की सुस्ती के बिल्कुल विपरीत, घरेलू कमोडिटी बाजार में मजबूत खरीदारी (बाइंग मोमेंटम) के कारण भारी तेजी देखने को मिल रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर सरकार का वह फैसला है, जिसके तहत सोने और चांदी के आयात पर कुल कस्टम ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। इस नई 15 प्रतिशत की ड्यूटी में 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (एआईडीसी) शामिल किया गया है।
सरकार के इस फैसले से मूल्य निर्धारण की धारणा (प्राइसिंग सेंटीमेंट) बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे वायदा बाजार में कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है:
- चांदी ने लगाई बड़ी छलांग: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर जुलाई 2026 के लिए चांदी का वायदा भाव 16,743 रुपये (6 प्रतिशत) की भारी बढ़त के साथ 2,95,805 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया।
- सोना भी ऐतिहासिक ऊंचाई पर: इसी तरह, एमसीएक्स पर जून 2026 के लिए सोने का वायदा भाव 9,206 रुपये (6 प्रतिशत) उछलकर 1,62,648 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया।
घरेलू व्यापार में कीमती धातुओं में यह रैली ऐसे समय में आई है, जब ठीक पिछले सत्र में चांदी बढ़त के साथ बंद हुई थी और सोने में मामूली गिरावट दर्ज की गई थी। पश्चिम एशिया के हालातों और अमेरिका-ईरान वार्ता पर छाई अनिश्चितता ने फिलहाल शेयर बाजार में निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे इक्विटी में लगातार बिकवाली हो रही है। वहीं, सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी में कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी के कारण रिकॉर्ड तेजी दर्ज की जा रही है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक संकेतों पर ही निर्भर करेगी।



