भारत की शीर्ष कंपनियों ने अमेरिका में निवेश के लिए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मैरीलैंड में आयोजित 2026 ‘सेलेक्टयूएसए’ निवेश शिखर सम्मेलन में भारतीय कंपनियों की ओर से अमेरिका में 20.5 अबर डॉलर के रिकॉर्ड निवेश की घोषणा की गई है। यह निवेश विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
निवेश के प्रमुख क्षेत्र और प्रभाव
यह भारी-भरकम निवेश मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल्स, उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में केंद्रित है। इन निवेशों से न केवल अमेरिका में हजारों नई नौकरियों पेदा होने की उम्मीद है, बल्कि यह दोनों देशों में उत्पादन क्षमता का विस्तार करेगा और संयुक्त नवाचार को बढ़ावा देगा।
‘सेलेक्टयूएसए’ निवेश शिखर सम्मेलन, अमेरिकी वाणिज्य विभाग की एक पहल है, जिसका उद्देश्य संयुक्त राज्य अमेरिका में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को आकर्षित करना है। इस वर्ष के सम्मेलन में भारतीय कंपनियों की भागीदारी ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत की है।
द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य
इस अवसर पर, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली में ‘सेलेक्टयूएसए’ के किक-ऑफ रिसेप्शन में कहा, “मुझे 2030 तक अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के हमारे लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर गर्व है। निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार के माध्यम से, हम संयुक्त राज्य अमेरिका में विश्व स्तरीय निवेश आकर्षित कर रहे हैं और दोनों राष्ट्रों के लिए साझा समृद्धि का निर्माण कर रहे हैं।”
यह बयान भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। दोनों देश एक-दूसरे के बाजारों में निवेश को प्रोत्साहित कर रहे हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूती मिल रही है और आर्थिक विकास को गति मिल रही है।
भविष्य की संभावनाएं
भारतीय कंपनियों द्वारा किया गया यह रिकॉर्ड निवेश, अमेरिका में भारतीय उद्यमों की बढ़ती क्षमता और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। यह न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद है, बल्कि भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति का विस्तार करने और नई तकनीकों को अपनाने का अवसर मिलता है।



