संसद की एक समिति ने सोमवार को देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल व डीजल के लिए लंबी कतारों और राशनिंग को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों से सवाल-जवाब किए। इस पर अधिकारियों ने बताया कि देश में पेट्रोल एवं डीजल की कमी नहीं है और अगले 78 दिनों के लिए कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है।
अधिकारियों ने जनता दल (यू) के सांसद संजय झा की अध्यक्षता वाली परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी संसदीय समिति को यह भी बताया कि युद्ध की समाप्ति पर अनिश्चितता के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण पश्चिम एशिया में 37 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। सूत्रों ने बताया कि जब कई सदस्यों ने मंत्रालय के अधिकारियों से पेट्रोल और एलपीजी की कमी पर सवाल उठाया, तो कुछ विपक्षी सदस्यों ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने उन्हें कोई आधिकारिक डाटा नहीं दिया है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ विपक्षी सांसदों ने जानना चाहा कि पश्चिम एशिया युद्ध की समाप्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बावजूद सुधारात्मक कदम पहले से क्यों नहीं उठाए गए। अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए हैं कि कोई कमी न हो। हालांकि, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि युद्ध कब खत्म होगा। कुछ सांसदों ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें आम लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए पहले से योजना बनानी चाहिए थी, जिन्हें तेल और उर्वरक की ऊंची कीमतों का खामियाजा भुगतना पड़ता है।
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उर्वरक की कमी न होने का भी दिलाया भरोसा
समिति के समक्ष उपस्थित उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को यह भी सूचित किया है कि खरीफ की बुआई से पहले देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था की है। जब कुछ विपक्षी सदस्यों ने उर्वरकों की उच्च वैश्विक कीमतों का मुद्दा उठाया, तो अधिकारियों ने समिति को सूचित किया कि सरकार ने वैकल्पिक तरीकों से 80 लाख टन उर्वरक खरीदे हैं। फिलहाल 78 लाख टन उर्वरक की मांग है, जिसे पूरा किया जा रहा है। समिति ने पोत परिवहन, पेट्रोलियम और उर्वरक मंत्रालयों के अधिकारियों के साथ एक बैठक की थी। पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों पर समिति के सदस्यों के सामने एक प्रस्तुति दी।



