पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार अपनी मजबूती का प्रदर्शन कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरींचस ने बताया है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और अस्थिरता के बावजूद भारत की विकास दर स्थिर बनी हुई है। यह रिपोर्ट उन चिंताओं को काफी हद तक कम करती है जिनमें कहा जा रहा था कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारत जैसी तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
विकास दर के मजबूत और सकारात्मक आंकड़े
भारत, जापान, यूएई, नीदरलैंड और चिली के पत्रकारों के साथ एक साक्षात्कार के दौरान गौरींचस ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की सराहना की। आईएमएफ के अनुसार, वित्त वर्ष के आधार पर 2025 में भारत का आर्थिक विकास ‘बहुत ही शानदार’ रहा है, जिसे 7.6 प्रतिशत आंका गया है। यह सकारात्मक गति यहीं रुकने वाली नहीं है, बल्कि अगले साल भी इसके जारी रहने की पूरी उम्मीद है।
मुख्य अर्थशास्त्री ने जानकारी दी है कि आईएमएफ ने 2026 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत रखा है, जो उनके पिछले अनुमानों की तुलना में थोड़ा अधिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व युद्ध का अर्थव्यवस्था पर कुछ नकारात्मक प्रभाव जरूर पड़ रहा है, लेकिन 2025 से मिली मजबूत आर्थिक गति इस नुकसान की आसानी से भरपाई कर रही है।
महंगाई और ऊर्जा निर्भरता की बड़ी चुनौतियां
एक तरफ जहां विकास दर के आंकड़े उत्साहजनक हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत के सामने मुद्रास्फीति (महंगाई) एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। आईएमएफ का अनुमान है कि 2026 में भारत की महंगाई दर बढ़कर 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। गौरींचस ने इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल और भारत में 2026 की शुरुआत में खाने-पीने की चीजों (खाद्य पदार्थों) की बढ़ती कीमतों को जिम्मेदार बताया है।
इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी है कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक माहौल में भारत की ऊर्जा और कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भरता एक बड़ी कमजोरी साबित हो सकती है। यह संरचनात्मक निर्भरता आने वाले समय में अर्थव्यवस्था की रफ्तार के लिए कुछ नई बाधाएं खड़ी कर सकती है।
सुधरते व्यापारिक संबंध और भारत की वैश्विक भूमिका
इन तमाम चुनौतियों के बीच एक बड़ी राहत अमेरिका और भारत के बीच सुधरते व्यापारिक संबंध हैं। दोनों देशों के बीच हालिया व्यापारिक चर्चाओं से न केवल टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर अनिश्चितता कम हुई है, बल्कि टैरिफ का स्तर भी घटा है। ऐसे समय में जब दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मंदी और अनिश्चितता से जूझ रही हैं, आईएमएफ का यह आकलन भारत को वैश्विक विकास के एक प्रमुख इंजन के रूप में स्थापित करता है।
हाल के वर्षों में भारत ने मजबूत घरेलू मांग, शानदार निवेश, नीतिगत स्थिरता और एक लचीले निजी क्षेत्र के दम पर अपनी तेज विकास दर को बनाए रखा है। मध्य पूर्व संकट के कारण हालांकि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और कमोडिटी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन इसका व्यापक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह वैश्विक झटका कितने समय तक और कितनी तीव्रता के साथ बना रहता है। कुल मिलाकर, आईएमएफ की यह रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि भारत की वर्तमान विकास यात्रा उसकी 6.5 प्रतिशत की दीर्घकालिक क्षमता के बिल्कुल अनुरूप है।



