देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक ने नए सीईओ की तलाश तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा सीईओ शशिधर जगदीशन के कार्यकाल विस्तार की दौड़ से बाहर होने के बाद बैंक नए चेहरे की तलाश के लिए इसी सप्ताह एक एग्जीक्यूटिव सर्च फर्म नियुक्त कर सकता है।
क्या एचडीएफसी बैंक देश में सबसे मूल्यवान?
करीब 115 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण वाला एचडीएफसी बैंक देश का सबसे मूल्यवान बैंक है। जून 2026 के अंत तक बैंक के पास देश की कुल जमा राशि का करीब 12% हिस्सा था। सीईओ की दौड़ में बैंक के ही कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अनुभवी बैंकरों के नाम भी चर्चा में हैं।
कैजाद भरुचा
एचडीएफसी बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा (61) प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। तीन दशक से बैंक से जुड़े भरूचा अभी रिटेल और होलसेल बैंकिंग कारोबार संभालते हैं। वह 2014 से बैंक में पूर्णकालिक निदेशक हैं।
दिनेश खारा
एसबीआई के पूर्व चेयरमैन दिनेश खारा का नाम बाहरी उम्मीदवारों में शामिल है। उन्हें देश के सबसे बड़े बैंक की विशाल बैलेंस शीट और जटिल वित्तीय संस्थान को संभालने का करीब चार दशक का अनुभव है।
वी श्रीनिवास रंगन
66 वर्षीय वी श्रीनिवास रंगन बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। वह मानव संसाधन, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, कानूनी मामलों, सूचना सुरक्षा, एथिक्स, फ्रॉड और विजिलेंस जैसे महत्वपूर्ण विभाग का कार्यभार संभाल रहे हैं।
अमिताभचौधरी
एक्सिस बैंक के सीईओ अमिताभचौधरी भी संभावितों में शामिल हैं। उन्होंने जनवरी 2019 में बैंक की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल में सिटी बैंक के कंज्यूमर बिजनेस का अधिग्रहण पूरा किया गया।
ये भी पढ़ें- HDFC: चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक को मिला नया बॉस, पूर्व सीईसी राजीव कुमार होंगे नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन
कैसे खाली हुआ शीर्ष पद, किसे मिला प्रभार?
गौरतलब है कि इसी साल मार्च महीने में भारत के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक, एचडीएफसी बैंक में कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े विवाद के बीच पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अचानक पद छोड़ दिया था। इसके बाद जून में बैंक के निदेशक मंडल (बोर्ड) ने पूर्व आईएएस अधिकारी और भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को बैंक का नया पार्ट-टाइम (नॉन-एग्जीक्यूटिव) चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला लिया। बैंक ने कहा कि कुमार की स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति 30 जून से प्रभावी होगी और यह शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन है। अंशकालिक अध्यक्ष के रूप में उनका तीन साल का कार्यकाल आरबीआई की ओर से अनुमोदन मिलने की तारीख से शुरू होगा।



