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अहमदाबाद पुलिस ने ‘ऑपरेशन हॉकआई’ के तहत 10 महीने से फरार चल रहे सेमीकॉइन के शातिर नीलेश पटेल को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है. 7 मामलों में वांछित नीलेश फर्जी कंपनियां के नाम पर अब तक 14 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी कर चुका है. सेमीकंडक्टर सेक्टर पर थी आरोपी की नजर. क्या है पूरा मामला जानने के लिए पढ़ें आगे…
दस महीनों से गुजरात पुलिस के लिए सिरदर्द बने शातिर फ्रॉड को मध्य प्रदेश के बैतूल से अरेस्ट किया गया है. (एआई इमेज)
क्राइम न्यूज. यह मामला एक ऐसे ठग की कहानी है, जो हर बार अपनी नई पहचान, नई कंपनी और नए कारोबार के नाम पर निवेशकों और बैंकों को मोटी चपत लगाता रहा. करीब 10 महीने की लंबी तलाश के बाद अहमदाबाद पुलिस ने शातिर खिलाड़ी को मध्य प्रदेश से दबोच लिया है. दरअसल, इस कहानी की शुरुआत पिछले साल अहमदाबाद के जोन-7 में शुरू हुए ‘ऑपरेशन हॉकआई’ से हुई. पुलिस ने इलाके के 8 थानों में फरार और वांछित अपराधियों की तलाश शुरू की.
इस अभियान के दौरान 32 भगोड़ों की पहचान हुई, जिनमें एक नाम था नीलेश पटेल का. पुलिस की गिरफ्त से अचने के लिए आरोपी नीलेश लंबे समय से अपने ठिकाने और पहचान बदल रहा था. उसका अंदाज इतना शातिराना था कि कई कोशिशों के बावजूद वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा. 10 महीनों की लंबी जद्दोजहद के बाद अहमदाबाद पुलिस को जानकारी मिली कि नीलेश मध्य प्रदेश के बैतूल इलाके में छिपा हुआ है. जानकारी मिलते ही पुलिस की एक टीम को बैतूल के लिए रवाना कर दिया गया.
- बैतूल पहुंचने के बाद गुजरात पुलिस ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर आरोपी नीलेश की तलाश शुरू की. कुछ ही घंटों की कवायद के बाद ज्वाइंट पुलिस टीम उसतक पहुंचने में कामयाब रहीं. 18 अगस्त को बैतूल से गिरफ्तार करने के बाद गुराजत पुलिस आरोपी को लेकर अहमदाबाद आ गई.
- इसके बाद, शुरू हुआ पूछताछ का लंबा सिलसिला. पूछताछ जैसे-जैसे आगे बढ़ रही, वैसे-वैसे हैरान करने वाली जानकारियों सामने आती गईं. पुलिस की जांच में सामने आया कि नीलेश पटेल फर्जी कंपनियां बनाकर बड़े पैमाने पर बैंक धोखाधड़ी करता था.
- वह मशीनरी खरीदने के नाम पर बैंकों में फर्जी कोटेशन जमा करता और लोन हासिल करने की कोशिश में जुट जाता था. लोन के लिए दिखाई जाने वाली संपत्तियों में भी पर फर्जीवाड़ा किया जाता था. कभी संपत्ति के मालिक को इसकी जानकारी नहीं होती थी, तो कभी दस्तावेज ही फर्जी होते थे.
- वासना थाने में उसके खिलाफ करीब 90 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है. वहीं क्राइम ब्रांच में दर्ज तीन अन्य मामलों में उस पर 14 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया है.
‘सेमीकॉइन’ के नाम पर थी करोड़ों की ठगी की तैयारी
पुलिस का दावा है कि फरार होने के बाद उसने मुंबई में ‘टॉर्शन’ नाम से करीब 20 कंपनियां बनाईं और इनके बीच फंड ट्रांसफर कर खेल कर गया. उसने इस कंपनियों के नाम पर बड़े बैंकों से हजारों करोड़ रुपये के लोन की कोशिश भी की थी. जांच यह भी पता चला कि अब उसकी नजर भारत के तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर सेक्टर पर थी. उसने ‘टॉर्शन लिबरल साइंटिफिक’ नाम से फर्जी सेमीकंडक्टर कंपनी बनाई और ‘सेमीकॉइन’ नाम का कॉइन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा था. लेकिन निवेशकों तक पहुंचने से पहले ही पुलिस उसके दरवाजे तक पहुंच गई.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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