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ठगी का गोल्डन-ट्रायंगल; म्यांमार, थाईलैंड, लाओस की सीमा पर अड्‌डे: म्यांमार के साइबर ठगी के अड्डों में कई देशों के 5000 से ज्यादा लोग फंसे


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नई दिल्ली35 मिनट पहले

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इन साइबर स्कैम सेंटरों का बड़ा हिस्सा म्यांमार-थाईलैंड सीमा के म्यावाडी इलाके में स्थित है। इन्हें स्थानीय सशस्त्र मिलिशिया (आतंकी गुटों) की सहायता से चीनी माफिया चलाते हैं।

भारत के पड़ोसी देश म्यांमार के साइबर क्राइम के अड्डे फिर सुर्खियों में हैं। इन अड्डों में फंसे महाराष्ट्र के नासिक निवासी 30 वर्षीय कौस्तुभ शेजवाल ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है।

बैंकॉक में 70,000 रुपए मासिक वेतन वाली कॉल सेंटर की नौकरी के झांसे में वे म्यांमार के ठगों के जाल में फंस गए। अपहरणकर्ताओं ने उसकी रिहाई के लिए 8 लाख रुपए की मांग की है। अप्रैल से म्यांमार में कथित तौर पर बंधक बनाए गए कौस्तुभ ने कहा है कि ठगी के इन अड्डों पर 800 से 1000 भारतीय फंसे हुए हैं।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के मोहम्मद उस्मान अंसारी और मोहम्मद हसन रजा, बिहार के सीतामढ़ी के अनुरंजन कुमार ऐसे ही कुछ पीड़ित हैं। इन्होंने भी वीडियो के जरिए बताया है कि इन्हें साइबर धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। लक्ष्य पूरा नहीं करने पर बिजली के झटके दिए जाते हैं, मारपीट की जाती है।

मानव तस्करी पीड़ित लोगों की सहायता करने वाले ‘सिविल सोसायटी नेटवर्क फॉर ह्यूमन ट्रैफिकिंग विक्टिम असिस्टेंस’ नामक समूह का अनुमान है कि कई बार कार्रवाई करके बंधकों को छुड़ाने के बावजूद इन अड्डों में 5300 से ज्यादा विदेशी नागरिक अब भी फंसे हो सकते हैं।

इनमें करीब 1,600 चीनी नागरिक हैं। करीब 200 बर्मी नागरिक, 20 थाई नागरिकों के साथ ही फिलीपींस, ताइवान, मलेशिया, ब्राजील, रूस, केन्या, युगांडा, रवांडा और जिम्बाब्वे के नागरिक शामिल हैं।

कार्रवाई: म्यांमार, संयुक्त राष्ट्र की मुहिम में कई बंधक छुड़ाए जा चुके

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि म्यांमार के इन स्कैम सेंटरों में 1 लाख से ज्यादा लोग ऐसे हो सकते हैं जो अपनी इच्छा के खिलाफ वहां काम करने को मजबूर हैं। संयुक्त राष्ट्र और विदेशी दबाव के बाद म्यांमार प्रशासन ने अरबों डॉलर के इस अवैध आपराधिक ‘उद्योग’ पर कार्रवाई की है।

भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, राष्ट्रीय जांच एजेंसी आदि की कोशिशों से पिछले डेढ़-दो वर्षों में म्यांमार, कंबोडिया और लाओस के साइबर स्कैम केंद्रों से 2400 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।

तीन देशों की सीमा पर बने हाई सिक्योरिटी कंपाउंड में हैं सेंटर

इन साइबर स्कैम सेंटरों का बड़ा हिस्सा म्यांमार-थाईलैंड सीमा के म्यावाडी इलाके में स्थित है। इन्हें स्थानीय सशस्त्र मिलिशिया (आतंकी गुटों) की सहायता से चीनी माफिया चलाते हैं। केके पार्क, श्वे कोक्को और आसपास के कई हाई-सिक्योरिटी कंपाउंड कुख्यात गोल्डन ट्रायंगल का हिस्सा माने जाते हैं, जहां म्यांमार, थाईलैंड और लाओस की सीमाएं मिलती हैं।



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