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पिछले 5 महीने में दाल ₹8, तेल ₹6 महंगा हुआ: दूध-चीनी समेत राशन की 99% चीजों के दाम बढ़े; त्योहारों में और बढ़ेगी महंगाई




28 फरवरी से 3 अगस्त तक, यानी पिछले 5 महीनों में आम आदमी के खाने-पीने का खर्च तेजी से बढ़ा है। 28 फरवरी वही दिन है, जब अमेरिका-ईरान-इजराइल में जंग शुरू हुई थी। उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के मुताबिक इन 5 महीनों में 16 मुख्य खाद्य वस्तुओं में से 15 के दाम बढ़े हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा तेजी दालों और तेल में रही। इसके अलावा चना दाल ₹4.65 प्रति किलो, अरहर दाल ₹5.96, उड़द ₹5.71, चीनी ₹2.25, मूंग दाल ₹4.55 प्रति किलो और दूध ₹3, सरसों तेल ₹7.56 प्र​ति लीटर महंगा हुआ। चावल के दाम ₹1.57 और नमक के ₹0.85 प्रति किलो बढ़े, जबकि आटे की कीमतों में ₹0.22 की मामूली बढ़ोतरी हुई है। देखें 5 महीनों में बढ़े हुए दाम की लिस्ट… चीनी के दाम बढ़ने के पीछे एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की लगातार ऊंची मांग और चीनी उत्पादन में अपेक्षाकृत कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। वहीं, गेहूं के पर्याप्त सरकारी भंडार और बाजार में बेहतर उपलब्धता से इसके दाम दबाव में रहे, जिससे आटे की कीमत भी लगभग स्थिर बनी रही। अगस्त से त्योहारी सीजन बढ़ाएगा दाम विशेषज्ञों का कहना है कि दालों की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह इस बार कमजोर और असमान मानसून है। जुलाई के अंत तक खरीफ दालों का रकबा पिछले साल से करीब 7% कम रहा, जिससे उत्पादन घटने और आयात बढ़ने की आशंका से बाजार में कीमतें चढ़ीं। अब अगस्त से शुरू हो रहे रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान दाल और खाद्य तेलों की मांग बढ़ने की संभावना है। अगर वैश्विक स्तर पर कीमतों और आयात लागत में नरमी नहीं आती है, तो इन दोनों कैटेगरी की कीमतों पर आगे भी दबाव बने रहने की आशंका दिख रही है। बड़ी वजह- ईरान जंग, कमजोर मानसून और दुनिया में बढ़े दाम इंफोमेरिक रेटिंग में चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा के मुताबिक दालों और खाद्य तेलों की कीमतों पर अभी दबाव बना हुआ है। कमजोर मानसून के कारण खरीफ बुवाई का रकबा घटने से दालों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं, खाद्य तेलों में भारत की आयात निर्भरता, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम और सोया तेल की कीमतों में तेजी, पश्चिम एशिया में जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण आयात की लागत बढ़ गई है।



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