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Rishikesh News: बंजी जंपिंग को लेकर सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा का ही होता है. खासकर जब बात दिव्यांग व्यक्तियों की हो, तो सावधानियां और भी बढ़ जाती हैं. ऋषिकेश में मौजूद प्रोफेशनल बंजी ऑपरेटर्स अब इंटरनेशनल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को फॉलो करते हुए इस अनुभव को सभी के लिए संभव बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
ऋषिकेश: व्हीलचेयर से छलांग तक, यह सुनने में जितना रोमांचक लगता है, उतना ही भावनात्मक भी है. ऋषिकेश में बंजी जंपिंग अब सिर्फ एडवेंचर प्रेमियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि दिव्यांग लोग भी इस अनुभव को जीने की हिम्मत दिखा रहे हैं. गंगा घाटियों के बीच खड़े ऊंचे प्लेटफॉर्म से छलांग लगाना किसी के लिए भी आसान नहीं होता, लेकिन जब कोई व्हीलचेयर पर बैठा व्यक्ति यह कदम उठाता है, तो यह सिर्फ एक जंप नहीं बल्कि खुद पर जीत होती है.
बंजी जंपिंग को लेकर सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा का ही होता है. खासकर जब बात दिव्यांग व्यक्तियों की हो, तो सावधानियां और भी बढ़ जाती हैं. ऋषिकेश में मौजूद प्रोफेशनल बंजी ऑपरेटर्स अब इंटरनेशनल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को फॉलो करते हुए इस अनुभव को सभी के लिए संभव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. जंप से पहले प्रतिभागियों की पूरी मेडिकल जांच की जाती है, जिसमें उनकी शारीरिक स्थिति, बैलेंस और किसी भी तरह की गंभीर बीमारी का आकलन शामिल होता है. इसके बाद ही उन्हें जंप की अनुमति दी जाती है. प्रशिक्षित स्टाफ हर स्टेप पर मौजूद रहता है, ताकि किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश न रहे.
क्या होता है ‘Freestyle Variant’?
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान स्प्लैश बंजी के मार्केट मैनेजर और एक्सपर्ट आशीष के अनुसार, हर इंसान के अंदर बंजी जंपिंग करने की इच्छा होती है, लेकिन कई लोग अपनी शारीरिक सीमाओं या चोट के कारण इसे नहीं कर पाते हैं. इसी सोच को बदलने के लिए ‘Freestyle Variant’ तैयार किया गया है. इस तकनीक के जरिए व्हीलचेयर पर बैठे लोग भी सुरक्षित तरीके से जंप कर सकते हैं. इसमें जंप करने वाले व्यक्ति की पूरी बॉडी को एक खास तरह के सेफ्टी हार्नेस से अटैच किया जाता है, जिससे शरीर का हर हिस्सा सपोर्ट में रहता है. इतना ही नहीं, व्हीलचेयर को भी पूरी तरह लॉक और सिक्योर किया जाता है ताकि जंप के दौरान कोई भी मूवमेंट खतरा न बने.
सुरक्षित और आत्मविश्वास भरी जंपिंग
आशीष बताते हैं कि इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जंप के दौरान शरीर के किसी भी हिस्से पर अतिरिक्त दबाव या झटका महसूस नहीं होता है. पूरी प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया गया है कि व्यक्ति खुद को सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरा महसूस करे. साथ ही जंप से पहले पूरी ट्रेनिंग दी जाती है और हर स्टेप को विस्तार से समझाया जाता है. इससे डर कम होता है और अनुभव और भी बेहतर बन जाता है. यही वजह है कि अब धीरे-धीरे दिव्यांग लोग भी इस एडवेंचर को अपनाने लगे हैं और अपने डर को पीछे छोड़ रहे हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



