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‘सुरक्षा के मामले में वो कमज़ोर हैं’, ईरान युद्ध के मुद्दें पर वरिष्‍ठ अधिकारी के पद छोड़ने पर बोले ट्रंप


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oi-Bhavna Pandey

Donald Trump reacts to Joe Kent’s resignation:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान युद्ध को लेकर आतंकवाद-रोधी निकाय के डॉयरेक्‍टर जो केंट के इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने इस इस्तीफे को “एक अच्छी बात” करार दिया और केंट को सुरक्षा के मामलों में “बहुत कमजोर” बताया।

ट्रंप का यह बयान केंट के उस आकलन के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए ईरान से कोई तत्‍काल खतरा नहीं था। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यद्यपि वह हमेशा जो केंट को “एक अच्छा व्यक्ति” मानते थे, लेकिन साथ ही वह “हमेशा सोचते थे कि वह सुरक्षा के मामले में कमजोर थे।”

Donald Trump reacts to Joe Kent s resignation

राष्ट्रपति ने आगे कहा, “जब मैंने उनका बयान पढ़ा, तो मुझे एहसास हुआ कि उनका बाहर होना एक अच्छी बात है, क्योंकि उन्होंने कहा था कि ईरान कोई खतरा नहीं है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “हर देश को पता है कि ईरान कितना बड़ा खतरा था, सवाल यह है कि क्या वे इसके बारे में कुछ करना चाहते थे या नहीं।”

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने जो केंट के इस्तीफे पत्र पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस पत्र में कई “झूठे दावे” किए गए थे, खासकर यह कि ईरान अमेरिका के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं है। लीविट ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए इसे डेमोक्रेट्स और उदारवादी मीडिया द्वारा फैलाया गया नैरेटिव कहा।

ईरान को लेकर ट्रंप का रुख

लीविट ने जोर देकर कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के पास इस बात के “मजबूत और पुख्ता सबूत” थे कि ईरान अमेरिका पर पहले हमला करने की योजना बना रहा था। उनके अनुसार, ट्रंप ने हमेशा स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सैन्य निर्णय और प्रक्रिया

प्रेस सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप किसी भी विदेशी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ सैन्य संपत्ति तैनात करने का निर्णय अकेले नहीं लेते। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे फैसले व्यापक सुरक्षा और खुफिया आकलनों के आधार पर लिए जाते हैं, न कि किसी एक व्यक्ति के व्यक्तिगत विचार पर।

ईरान पर गंभीर आरोप

लीविट ने ईरान को “दुनिया का अग्रणी राज्य प्रायोजक देश” बताया जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी शासन ने पहले भी अमेरिकियों को नुकसान पहुंचाया है, अमेरिका के खिलाफ युद्ध जैसी गतिविधियां की हैं और खुले तौर पर धमकियां दी हैं, खासकर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” से पहले।

राष्ट्रपति के अधिकार और जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि केवल अमेरिका के कमांडर-इन-चीफ को ही यह तय करने का संवैधानिक अधिकार है कि कौन-सा खतरा वास्तविक है। लीविट के अनुसार, अमेरिकी जनता ने चुनाव के माध्यम से राष्ट्रपति को यह जिम्मेदारी सौंपी है, इसलिए अंतिम निर्णय उन्हीं का होता है।

विदेशी प्रभाव के आरोपों का खंडन

अंत में, लीविट ने उन आरोपों को “बेतुका, अपमानजनक और हास्यास्पद” बताया जिनमें कहा गया था कि ट्रंप ने किसी विदेशी प्रभाव में आकर निर्णय लिया। उन्होंने दोहराया कि ट्रंप का ईरान के प्रति रुख वर्षों से सुसंगत रहा है और वे लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।



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