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Fuel Price Hike: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की बात को सरकार ने बताया गलत, कहा- बाजार में फैलाई जा रही अफवाह


पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों को भ्रामक बताया है। मंत्रालय ने कहा कि कुछ समाचार रिपोर्टों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का दावा किया जा रहा है। सरकार के सामने फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

लोगों के मन में डर पैदा करने के लिए फैलाई जा रही ऐसी खबरें- मंत्रालय

सरकार के अनुसार, ऐसी खबरें लोगों में डर और घबराहट फैलाने के उद्देश्य से चलाई जा रही हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहां पिछले चार वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।


जनता को रहात देने का प्रयास जारी- सरकार 

मंत्रालय के मुताबिक, भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद आम जनता को राहत देने के लिए लगातार कदम उठाए हैं, ताकि लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

 

किन कारणों से बढ़ते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई अहम कारकों से तय होती हैं। इनमें सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों का होता है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल इसी से तैयार किए जाते हैं। वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल महंगा होने पर घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।

इसके अलावा डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है, इसलिए रुपये के कमजोर होने पर आयात लागत बढ़ जाती है, जिसका असर पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ता है।

ईंधन कीमतों में केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट (VAT) का भी बड़ा योगदान होता है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स दरें भिन्न होने के कारण विभिन्न शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम अलग-अलग देखने को मिलते हैं।

वहीं, रिफाइनिंग लागत भी कीमत निर्धारण में भूमिका निभाती है। कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल में बदलने की प्रक्रिया में आने वाला खर्च, रिफाइनरी की क्षमता और उपयोग किए जाने वाले क्रूड ऑयल के प्रकार पर निर्भर करता है।

इसके साथ ही मांग और आपूर्ति की स्थिति भी ईंधन कीमतों को प्रभावित करती है। घरेलू बाजार में मांग बढ़ने या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।



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