सरकार ने व्हाट्सएप की उपयोगकर्ता नाम सुविधा पर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार का मानना है कि यह सुविधा साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने इस मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि सरकार टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े कथित डेटा लीक के आरोपों की भी जांच कर रही है।
कृष्णन ने सीआईआई सम्मेलन के दौरान व्हाट्सएप, सिग्नल और टेलीग्राम की यूजरनेम सुविधा पर सरकार की चिंताओं के बारे में बताया। उनका कहना था कि यह सुविधा अधिक साइबर अपराध करने में मदद करती है, जो एक गंभीर मुद्दा है। सरकार ने व्हाट्सएप को इस सुविधा पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। इसी तरह अन्य प्लेटफार्मों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अधिकारियों का मानना है कि ऐसी कार्यप्रणालियां साइबर अपराधियों को पहचान छिपाने में मदद कर सकती हैं। वे उपयोगकर्ताओं का प्रतिरूपण कर सकते हैं या ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों से बच सकते हैं। सरकार इन एन्क्रिप्टेड प्लेटफार्मों पर उपयोगकर्ता नाम-आधारित संदेश सुविधाओं की बढ़ती जांच कर रही है।
क्या है टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स डेटा लीक मामला?
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े कथित लीक पर कृष्णन ने कहा, “यह भी एक प्रकार का साइबर अपराध है।” उन्होंने पुष्टि की कि सरकार इसकी जांच कर रही है और उन्हें इसकी सूचना मिली है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कंपनी से संबंधित संवेदनशील आंतरिक जानकारी ऑनलाइन लीक हुई है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एप्पल की वैश्विक विनिर्माण आपूर्ति शृंखला का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। यह भारत में आईफोन के पार्ट्स बनाती है। सरकार इस घटना की प्रकृति, सीमा और संभावित साइबर सुरक्षा निहितार्थों का पता लगा रही है।
क्या व्हाट्सएप ने जवाब के लिए अतिरिक्त समय मांगा है?
जब कृष्णन से पूछा गया कि क्या व्हाट्सएप ने सरकार के सवालों का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है, तो उन्होंने कहा, “मुझे इसकी जानकारी नहीं है।” यह दर्शाता है कि सरकार को अभी तक व्हाट्सएप से कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है। सरकार इन प्लेटफार्मों से त्वरित और संतोषजनक प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रही है।
क्या वीपीएन के लिए नया कानूनी ढांचा बनेगा?
वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) के लिए कानूनी ढांचे पर कृष्णन ने कहा कि इस मुद्दे पर केवल कानून पर निर्भर रहने के बजाय कानूनी और तकनीकी दोनों तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उन्होंने इसे तकनीकी-कानूनी पहलू बताया। कृष्णन ने कहा कि मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत भारत में काम करने वाले वीपीएन सेवा प्रदाताओं को पंजीकरण करना अनिवार्य है। हालांकि, कई प्रदाता पंजीकरण नहीं करते हैं और देश के बाहर से सेवाएं प्रदान करते हैं। इससे प्रवर्तन अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
मंत्रालय के सचिव ने कहा कि सरकार इस मुद्दे की कानूनी और तकनीकी दोनों दृष्टिकोणों से जांच कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुप्रयोगों पर प्रतिबंध प्रभावी ढंग से लागू हों। साथ ही, भारत के अधिकार क्षेत्र से बाहर संचालित होने वाली सेवाओं से उत्पन्न चुनौतियों का भी समाधान किया जा सके।



