देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले केंद्र सरकार ने चीनी की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी के डीलरों और थोक विक्रेताओं के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा (स्टॉक लिमिट) को सीधे आधा कर दिया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के कड़े रुख के बीच लिया गया यह फैसला सीधे तौर पर बाजार में जमाखोरी रोकने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए है।
सरकार ने स्टॉक लिमिट को आधा क्यों किया है?
देशभर में चीनी की खुदरा कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 63.28 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जो पिछले साल की समान अवधि (46.02 रुपये प्रति किलोग्राम) की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह थोक कीमतों में भी साल-दर-साल 36.28 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है और यह 58.40 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। इसी बेकाबू महंगाई को रोकने के लिए सरकार ने डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट को 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दिया है।
नए नियम क्या हैं और यह कब से प्रभावी होंगे?
खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्टॉक लिमिट में की गई यह कटौती 15 सितंबर से लागू होगी और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। नए नियमों के तहत अब कोई भी डीलर देश में कहीं भी एक समय में 2,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। इसके अलावा, डीलरों के लिए यह भी अनिवार्य किया गया है कि वे किसी भी स्टॉक को प्राप्ति की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक अपने पास नहीं रख सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और सट्टा व्यापार पर रोक लगाना है।
कोलकाता को इस पाबंदी से राहत क्यों दी गई है?
इस कड़े फैसले के बीच पश्चिम बंगाल के कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों को एक विशेष राहत दी गई है। वहां के लिए पुरानी स्टॉक सीमा यानी 4,000 क्विंटल को ही बरकरार रखा गया है। खाद्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कोलकाता क्षेत्र अपनी चीनी की जरूरत के लिए मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र पर निर्भर है। इसके अलावा, कोलकाता पूरे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों के लिए चीनी आपूर्ति का मुख्य केंद्र (सप्लाई हब) है। इसी विशिष्ट भौगोलिक और बाजार की मांग को देखते हुए कोलकाता को इस नियम से छूट दी गई है।
क्या देश में वाकई चीनी की कोई कमी है?
सरकार का साफ मानना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और मिलें कृत्रिम रूप से कीमतों को बढ़ा रही हैं। हालांकि, चालू विपणन वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए देश में चीनी का उत्पादन अनुमान पहले के 343 लाख टन से संशोधित कर 306 लाख टन कर दिया गया है। इसके बावजूद, यह उत्पादन देश की अनुमानित वार्षिक घरेलू मांग (लगभग 280 से 285 लाख टन) से अधिक है। राहत की बात यह है कि मिल स्तर पर कीमतें कुछ ठंडी हुई हैं; महाराष्ट्र में एक्स-मिल कीमतें 18 अगस्त के 67 रुपये प्रति किलो के उच्चतम स्तर से 30 प्रतिशत गिरकर 1 सितंबर को 45-46 रुपये प्रति किलो पर आ गई हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से खुदरा बाजार में भी कीमतों में जल्द गिरावट आएगी।



