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अजमेर साइबर थाना पुलिस ने पॉलिसी रिन्यूअल के नाम पर करीब 6 लाख 50 हजार रुपए की ठगी के मामले में दिल्ली से विकास कुमार को गिरफ्तार किया है. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी फर्म के नाम पर बैंक खाता खुलवाकर साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर किया. विकास ठगी की रकम का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखता था, जबकि बाकी रकम अमृत, आसिफ समेत अन्य आरोपियों के खातों में भेजी जाती थी.
आरोपी विकास कुमार
अजमेर. साइबर थाना पुलिस ने पॉलिसी रिन्यूअल के नाम पर करीब 6 लाख 50 हजार रुपए की साइबर ठगी के मामले में कार्रवाई करते हुए दिल्ली से विकास कुमार नामक युवक को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अन्य साथियों के साथ मिलकर अजमेर निवासी राजकुमार हेड़ा से पॉलिसी रिन्यूअल कराने के नाम पर ठगी की वारदात को अंजाम दिया था. शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.
जांच के दौरान, पुलिस ने ठगी की रकम के लेन-देन की जानकारी जुटाई. रकम जिन बैंक खातों में पहुंची थी, पुलिस ने उन खातों के खाताधारकों की पहचान की. बैंकिंग ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई, इसी क्रम में पुलिस टीम दिल्ली पहुंची और विकास कुमार को गिरफ्तार कर लिया.
फर्जी फर्म के खाते का किया इस्तेमाल
प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस के सामने आया कि विकास कुमार ने सूर्यांश के नाम से कपड़ों की दुकान के नाम पर आईजीएमएस कॉरपोरेशन फर्म का बैंक खाता खुलवाया था. पुलिस के मुताबिक, इस खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था. खाता उपलब्ध कराने के बदले सूर्यांश को प्रतिदिन 500 रुपए दिए जाते थे, पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्म और बैंक खाते का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था और इसके जरिए कितनी रकम का लेन-देन हुआ.
ठगी की रकम में हिस्सा रखता था विकास
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी के जरिए खाते में पहुंचने वाली रकम में से करीब 10 प्रतिशत हिस्सा विकास कुमार अपने पास रखता था. इसके बाद बची हुई रकम को अमृत, आसिफ और अन्य आरोपियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था. इससे पुलिस को साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है.
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
मामले में पुलिस विकास कुमार के साथ सूर्यांश, अमृत और आसिफ को भी अजमेर लेकर पहुंची है. यहां आरोपियों से पूछताछ कर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क, रकम के लेन-देन और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह ने इससे पहले कितने लोगों को पॉलिसी रिन्यूअल के नाम पर अपना शिकार बनाया. फिलहाल मामले में अन्य संदिग्ध आरोपियों की तलाश जारी है. पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से पूछताछ के बाद साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क और रकम के प्रवाह को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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