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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 अप्रैल को आएंगी हिमाचल: शिमला, अटल टनल और पालमपुर का दौरा तय, 2 मई को वापस लौटेंगी दिल्ली, रिट्रीट में रुकेंगी – Shimla News
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 अप्रैल से छह दिन के दौरे पर हिमाचल प्रदेश आ रही हैं। राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, वे शिमला, अटल टनल और पालमपुर यूनिवर्सिटी जाएंगी। राष्ट्रपति 27 अप्रैल को दिल्ली से चंडीगढ़ और चंडीगढ़ से सीधे शिमला के कल्याणी हेलिपेड आएंगी। वह दोपहर लगभग 12:15 बजे शिमला पहुंचेंगी और राष्ट्रपति निवास रिट्रीट (छराबड़ा) में ठहरेंगी। 29 अप्रैल को अटल टनल जाएंगी 28 अप्रैल की सुबह वे राष्ट्रपति निवास में आयोजित उद्घाटन समारोह में शामिल होंगी। 29 अप्रैल को राष्ट्रपति शिमला से अटल टनल रोहतांग जाएंगी, जहां वे सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगी। इसके बाद शाम को वे वापस छराबड़ा स्थित रिट्रीट लौटेंगी। 30 अप्रैल को पालमपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शामिल होगी 30 अप्रैल को राष्ट्रपति पालमपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय के 17वें दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी और उसी शाम शिमला वापस लौटेंगी। 1 मई को शिमला में “एट होम” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। 2 मई को राष्ट्रपति मुर्मू दिल्ली लौट जाएंगी। हर साल गर्मियों में शिमला आते रहे हैं राष्ट्रपति बता दें कि शिमला से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित छराबड़ा में राष्ट्रपति निवासी रिट्रीट है। परंपरागत रूप से राष्ट्रपति यहां ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान ठहरते हैं। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी दो बार शिमला का दौरा कर चुकी हैं। राष्ट्रपति के दौरे की पुष्टि होते ही प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
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बद्रीनाथ पहुंचे CDS, तैयारियों की ग्राउंड रियलिटी जांची: 3 दिन बाद शुरू हो रही चारधाम यात्रा; नीरज चोपड़ा बोले- कल से यहां 113km की दौड़ – Chamoli News
बद्रीनाथ पहुंचे CDS अनिल चौहान ने चारधाम यात्रा की तैयारियां जांची।
चारधाम यात्रा के शुरू होने से तीन दिन पहले सीडीएस अनिल चौहान आज चमोली स्थित बद्रीनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके बाद हाई लेवल मीटिंग की। मीटिंग में CDS ने कहा
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यात्रा में आने वाले किसी भी श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं आनी चाहिए। सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।

CDS ने कल से शुरू हो रही सूर्य देवभूमि चैलेंज 2026 अल्ट्रा ट्रेल रनिंग की तैयारियां देखी। इसके बाद उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए जोश भरा। इस समय केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी ITBP के पास है।
नीरज चोपड़ा बोले- अल्ट्रा ट्रेल रनिंग में हिस्सा लें
ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ने कहा कि 17 से 19 अप्रैल तक सेना और उत्तराखंड सरकार सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0 शुरू कर रही है। यह 113km अल्ट्रा ट्रेल रनिंग है, जो बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्ग पर होगी। नीरज चोपड़ा ने देशभर से युवा इसमें हिस्सा लेने की अपील की है।
अल्ट्रा ट्रेल रनिंग को सीडीएस अनिल चौहान ने भी प्रमोट किया।

ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा सूर्य देवभूमि चैलेंज 2026 अल्ट्रा ट्रेल रनिंग में हिस्सा लेने की अपील करते हुए।
‘सुरक्षा में कोई समझौता नहीं होना चाहिए’
जनरल चौहान ने ITBP, सेना और उत्तराखंड पुलिस के साथ हाई लेवल मीटिंग की। मीटिंग में आपदा प्रबंधन, यात्री सुविधाओं और यात्रा मार्ग की स्थिति पर डिटेल जानकारी शेयर की गई।

सीडीएस अनिल चौहान लोगों के साथ फोटो खिंचवाते हुए।
CDS को संबंधित अधिकारियों ने प्रेजेंटेशन के जरिए सुरक्षा इंतजामों और आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारियों का ब्योरा दिखाया। CDS ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगमता और सुविधा में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

कौन हैं नीरज चोपड़ा
हरियाणा के पानीपत (खंडरा गांव) के रहने वाले नीरज चोपड़ा दुनिया के नंबर-2 जेवलिन थ्रोअर हैं। वे भारत की ओर से लगातार दो ओलिंपिक गेम्स में मेडल जीत चुके हैं। नीरज ने पेरिस ओलिंपिक में सिल्वर और टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था।
इसके अलावा, वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे वर्ल्ड क्लास टूर्नामेंट में भारत को गोल्ड मेडल दिला चुके हैं। 2018 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार, 2021 में खेल रत्न पुरस्कार और 2022 में पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

नीरज चोपड़ा 26 अगस्त 2016 को सेना में नायब सूबेदार के पद पर भर्ती हुए थे। 2021 में उन्हें सूबेदार बनाया गया। टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्हें सेना द्वारा परम विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किया गया।
2022 में नीरज को सूबेदार मेजर के पद पर पदोन्नति मिली। इसके बाद सेना ने 14 मई को नीरज चोपड़ा को टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि दी थी।

2025 के मुकाबले 11 दिन पहले खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट
बद्रीनाथ धाम के कपाट इस बार पिछले साल के मुकाबले 11 दिन पहले खुल रहे हैं। तय हुआ है कि बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
2025 के यात्रा सीजन में रिपोर्ट के मुताबिक, बद्रीनाथ धाम में 16.52 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे।

22 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट
केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह तिथि महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) के अवसर पर ऊखीमठ में पारंपरिक पंचांग गणना के बाद घोषित की गई थी।
इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, जबकि इस बार 22 अप्रैल को खुलेंगे। यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।

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केदारनाथ धाम में बर्फ की चादर के बीच खुलेंगे कपाट: ग्लेशियर्स काटकर बना स्नो कॉरिडोर, अब तक 5.96 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो रही है, जिसके तीन दिन बाद 22 अप्रैल को बर्फ की चादर के बीच केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। यहां श्रद्धालुओं के लिए ग्लेशियर काटकर स्नो कॉरिडोर तैयार किया गया है, जिससे वे बर्फ की ऊंची दीवारों के बीच से होकर बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। (पढ़ें पूरी खबर)
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गाजियाबाद में 200 झोपड़ियों में भीषण आग, सिलेंडर फटे: 10 किमी दूर से दिखा धुआं, 22 गाड़ियों ने बुझाई आग – Ghaziabad News
गाजियाबाद में गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे 200 झुग्गी-झोपड़ियों में भीषण आग लग गई। सिलेंडरों में लगातार धमाके होते रहे। धुएं का गुबार करीब 10 किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने घरों का सामान और गैस सिलेंडर लेकर भागते नजर आए। आसपास की इमारतों को एहतियातन खाली करा लिया गया। फायर ब्रिगेड की 22 गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। प्रशासन ने नोएडा से भी दमकल की गाड़ियां मंगाईं। आग इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के कनवानी गांव में लगी। घटना में फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। प्रत्यक्षदर्शी आशीष गुप्ता ने बताया- कुछ लोग झुग्गियों में खाना बना रहे थे, तभी तिरपाल में आग लग गई। देखते-देखते आग भड़क गई और पास में स्थित पन्नी का गोदाम जलकर राख हो गया। डीएम रविंद्र कुमार ने बताया कि इलाके में कबाड़ का काम होता था। यही काम करने वाले लोग झुग्गियां बनाकर रहते हैं। किसी भी तरह की अनहोनी से निपटने के लिए एंबुलेंस मौके पर मौजूद हैं। पास के अस्पतालों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। इससे पहले, बुधवार को लखनऊ के विकासनगर में झुग्गी-झोपड़ियों में आग लगी थी। इसमें 250 झोपड़ियां जलकर राख हो गई थीं। 2 सगी बहनों की मौत भी हुई थी। आग की 5 तस्वीरें… गाजियाबाद में आग की घटना से जुड़े पल-पल की अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
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सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग:याचिका खारिज; CJI बोले- जरूरत जागरूकता की है, हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देश में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा आदेश नीतिगत दायरे में आता है और न्यायपालिका इसे जारी नहीं कर सकती। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जान-बूझकर वोट न डालने वालों के लिए दंडात्मक कार्रवाई की मांग और वोटिंग अनिवार्य बनाने वाली याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता। बेंच ने PIL याचिकाकर्ता अजय गोयल से कहा कि वे अपनी शिकायतों को लेकर संबंधित पक्षों से संपर्क करें।याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि जो लोग जान-बूझकर वोट डालने से दूर रहते हैं, उनके लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। CJI ने कहा- लोकतंत्र कानूनी दबाव के बजाय जन जागरूकता से फलता-फूलता है। एक ऐसे देश में जो कानून के शासन से चलता है और लोकतंत्र में विश्वास रखता है। जहां हमने 75 सालों में हमने दिखाया है कि हम इस पर कितना भरोसा और विश्वास करते हैं, वहां हर किसी से यह उम्मीद की जाती है कि वह वोट डालने जाए। अगर वे नहीं जाते, तो नहीं जाते। जरूरत जागरूकता की है, लेकिन हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते। CJI ने चुनाव के दौरान होने वाले परेशानिायं भी बताईं सुनवाई केदौरान बेंच ने अनिवार्य वोटिंग कानून की व्यावहारिक कठिनाइयों का जिक्र किया और कहा कि चुनाव के दिनों में, जजों समेत कई नागरिकों को काम करना पड़ता है। दरअसल, याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया था कि कोर्ट को चुनाव आयोग को निर्देश देना चाहिए कि वह वोट न डालने वालों के लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाए। इस पर CJI ने घर पर रहने के काम को अपराध बनाने के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “अगर हम आपका सुझाव मान लेते हैं, तो मेरे साथी जस्टिस बागची को वोट डालने के लिए पश्चिम बंगाल जाना पड़ेगा, भले ही उस दिन काम का दिन हो।” बेंच ने समाज के वंचित वर्गों के लिए भी चिंता जताई। बेंच ने पूछा, “अगर कोई गरीब व्यक्ति कहता है कि मुझे अपनी दिहाड़ी कमानी है, तो मैं वोट कैसे डालूं, हम उनसे क्या कहें।” याचिकाकर्ता ने कहा कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह एक समिति बनाए, जो उन लोगों पर रोक लगाने के प्रस्ताव दे, जो अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने में नाकाम रहते हैं। हालांकि CJI ने कहा, ‘हमें आशंका है कि ये मुद्दे नीतिगत दायरे में आते हैं।’
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