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Trans Unioin CIBIL Report: भारत में गोल्ड लोन लेना 3.8 गुना बढ़ा, रिटेल कर्ज में बना दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर


भारत में गोल्ड लोन अब केवल आपातकालीन नकदी का विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि यह मुख्यधारा के सुरक्षित ऋण (सिक्योर्ड क्रेडिट) के रूप में एक मजबूत पहचान बना चुका है। ट्रांसयूनियन सिबिल द्वारा अप्रैल 2026 में जारी अपनी पहली ‘गोल्ड लोन लैंडस्केप रिपोर्ट’ में यह खुलासा किया गया है कि मार्च 2022 से दिसंबर 2025 के बीच भारत के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में 3.8 गुना की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। इस तेज उछाल के साथ, रिटेल क्रेडिट पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 11.1% पर पहुंच गई है, जो अब केवल होम लोन के बाद दूसरे स्थान पर है।

टिकट साइज और कर्ज सीमा में ऐतिहासिक वृद्धि

सिबिल के आंकड़ों के अनुसार, कर्ज लेने वालों की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है। गोल्ड लोन का औसत टिकट साइज  90,000 रुपये से दोगुना से भी अधिक होकर करीब दो लाख रुपये पर पहुंच गया है। वहीं, प्रति उधारकर्ता औसत बकाया राशि 1.9 लाख रुपये से बढ़कर 3.1 लाख रुपये हो गई है। इस शानदार ग्रोथ को गति देने में मुख्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी (8.9 गुना की वृद्धि) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (3.8 गुना की वृद्धि) का योगदान रहा है।

महिला उधारकर्ताओं की संख्या बढ़ रही

रिपोर्ट में ग्राहक जनसांख्यिकी में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव दर्ज किया गया है:


  • प्राइम ग्राहकों में बढ़ोतरी: क्रेडिट के मोर्चे पर मजबूत माने जाने वाले प्राइम और एबव प्राइम ग्राहकों की हिस्सेदारी 43% से बढ़कर लगभग 52% हो गई है। वहीं, ‘न्यू टू क्रेडिट’ (एनटीसी) यानी पहली बार कर्ज लेने वालों की संख्या 12% से घटकर मात्र 6% रह गई है।

  • महिला उधारकर्ताओं की अहम भूमिका: गोल्ड लोन बाजार के विस्तार में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। साल 2025 में, कुल गोल्ड लोन मूल्य (Value) का 40% हिस्सा महिलाओं द्वारा लिया गया है।

  • भौगोलिक विस्तार: यद्यपि दक्षिण भारतीय राज्य अभी भी बाजार का बड़ा हिस्सा रखते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में गोल्ड लोन सोर्सिंग में सबसे तेज वृद्धि देखी जा रही है।

बाजार के लिए जोखिम और स्ट्रेस सिग्नल

इस जोरदार वृद्धि के साथ-साथ सिबिल ने क्रेडिट बाजार में उभर रहे कुछ जोखिमों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। ग्राहकों द्वारा एक साथ कई गोल्ड लोन लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की सोर्सिंग में 54% ग्राहक ऐसे हैं, जिनका गोल्ड लोन एक्सपोजर 2.5 लाख रुपये से अधिक है। इसके अलावा, जिन ग्राहकों के वॉलेट का 100% हिस्सा सिर्फ गोल्ड लोन है, उनमें डिफ़ॉल्ट की दर 9 गुना तक अधिक पाई गई है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि डिफ़ॉल्ट इतिहास (90+ DPD) वाले स्ट्रेस्ड ग्राहकों का एक्टिव लोन क्लोजर रेट अन्य की तुलना में 1.6 गुना अधिक है।

आरबीआई  के नए नियम और एलटीवी सीमाएं

इस बढ़ते जोखिम को नियंत्रित करने के लिए 2025-26 के नए आरबीआई निर्देशों के तहत टियर-आधारित एलटीवी सीमाएं लागू की गई हैं:


  •  2.5 लाख रुपये तक के छोटे लोन पर 85% एलटीवी की अनुमति है।

  •  2.5 लाख से 5 लाख रुपये के बीच के लोन पर यह सीमा 80% रखी गई है।

  •  5 लाख रुपये से अधिक के लोन के लिए एलटीवी को 75% तक सीमित कर दिया गया है।

  • टॉप-अप या लोन रिन्यूअल के लिए अब लेंडर्स को फ्रेश क्रेडिट चेक करना अनिवार्य है।

मुथूट फिनकॉर्प के सीईओ शाजी वर्गीज के अनुसार गोल्ड लोन अब केवल संकटकालीन स्थिति में लिया जाने वाला उत्पाद नहीं रह गया है। यह एक मुख्यधारा का, भरोसेमंद ऋण विकल्प बन गया है। आज का ग्राहक ऋण के प्रति अधिक जागरूक और मूल्य-सचेत है, और गोल्ड लोन को एक व्यापक वित्तीय दृष्टिकोण के तहत देखा जा रहा है।



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Mumbai Metro Accident: बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में बड़ा हादसा, BKC मेट्रो का बीम गिरने से मचा हड़कंप


Mumbai Metro Accident: बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में बड़ा हादसा, BKC मेट्रो का बीम गिरने से मचा हड़कंप | Mumbai Metro Accident BKC Metro Construction Beam Falls from Pillar Crane Topples Over Latest News – Hindi Oneindia



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शिक्षा विभाग की लिस्ट में लड़कों के रामप्यारी-गंगोत्री जैसे नाम: 2950 नामों में ‘बासकरन’, ‘अहंकार’, ‘दहीभाई’ और ‘बेचारादास’ भी शामिल, मंत्री बोले- गलत नाम हटवाएंगे – Rajasthan News


शिक्षा विभाग के सुझाए नाम में कई हास्यास्पद और अजीबोगरीब हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसे नामों से बच्चों को हीन भावना से बचाया जाएगा। (AI इमेज)

राजस्थान के स्कूलों में पढ़ने वाले ‘घसीटाराम’, ‘नाहर’ और ‘शैतान’ जैसे अजीब नाम वाले बच्चों को हीन भावना से बचाने के लिए शिक्षा विभाग ने ‘सार्थक नाम अभियान’ शुरू किया है।

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बाकायदा 2950 नामों की सूची जारी की गई है। इनमें 409 नाम लड़कों और 1541 नाम लड़कियों के हैं। विभाग का दावा है कि नाम अद्वितीय, राजस्थानी संस्कृति एवं परम्परा के अनुरूप हैं।

इन नामों पर गौर किया गया तो शिक्षा विभाग की हास्यास्पद कारगुजारी सामने आई। सूची में गलतियों की भरमार है। सामान्य हिंदी शब्द भी गलत लिखे गए हैं।

सूची में शामिल तमाम नाम ‘अजीबोगरीब’ हैं। जैसे- बीकानेर, दहीभाई, अहंकार, अहित और बेचारादास। ये ऐसे नाम हैं, जिन्हें सुनकर बच्चा आत्मविश्वास से भरेगा नहीं, बल्कि सहम जाएगा।

लिस्ट को केवल लंबा करने के लिए एक ही नाम के पीछे सिंह, चंद, कुमार और दास जोड़कर संख्या बढ़ाई गई है। हद तो यह है कि लड़कों की लिस्ट में लड़कियों के और लड़कियों की लिस्ट में लड़कों के नाम जोड़ दिए गए हैं। सूची में लड़कों के लिए गंगोत्री, गोदावरी, रामप्यारी जैसे नाम सुझाए गए हैं।

‘अहंकार’ और ‘दहीभाई’ से बढ़ेगा आत्मविश्वास? विभाग का तर्क है कि नाम व्यक्ति की सामाजिक छवि का दर्पण होता है। लेकिन कक्षा पहली से 9वीं के बच्चों के लिए विभाग की सुझाई लिस्ट में ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिन्हें सुनकर किसी को भी हैरानी हो सकती है।

अटपटे नाम : बीकानेर, दहीभाई, अहंकार, अहित, बेचारादास। इनके अलावा मक्खन, अंतरद्वीप, आविष्कार, अवकाश, बासकरन, फकीराम, दत्त (उपनाम), धीमान (उपनाम) और टोडरमल भी शामिल हैं।

जेंडर का घालमेल : लड़कों के लिए सुझाए गए नामों में गंगोत्री, गोदावरी और रामप्यारी जैसे नाम शामिल हैं।

कॉपी-पेस्ट का कमाल: कई नाम तो हूबहू रिपीट किए गए हैं। जैसे दीनानाथ और दीनानाथ दो बार, जयपाल और जयपाल सिंह।

गिनती बढ़ाने के लिए ‘सरनेम’ का सहारा विभाग ने 1409 लड़कों और 1541 लड़कियों के नामों की लिस्ट जारी की है। इसमें रचनात्मकता की जगह ‘फॉर्मूले’ का इस्तेमाल ज्यादा दिखा है। अंग्रेजी वर्णमाला- ए, बी, सी, डी (अ,ब,स,द) के क्रम में नाम लिखे हैं।

गोपाल सीरीज : गोपालदास, गोपालकिशोर, गोपाललाल, गोपालप्रसाद और गोपालसिंह।

हरि सीरीज: हरिगोपाल, हरिनारायण, हरिदत्त, हरिकांत, हरिकुमार, हरिमंगल, हरिनाथ, हरिपाल, हरिराज, हरिसिंह। इसी तरह कैलाश, मंगल, मथुरा और अयोध्या के साथ भी अलग-अलग उपनाम जोड़कर लिस्ट लंबी की गई है।

ये कुछ उदाहरण हैं…

अयोध्या प्रसाद और अयोध्या सिंह। बुद्धिमाल, बुद्धिप्रकाश, बुद्धिराम और बुद्धिसिंह। दलपत और दलपतसिंह। दयाल, दयालदास और दयालसिंह। दीनानाथ और दीनानाथ। ध्रुवकुमार, ध्रुवलाल, ध्रुवराज और ध्रुवसिंह। द्वारकानाथ, द्वारकाधीश, द्वारकाप्रसाद और द्वारकासिंह। गंभीर और गंभीरसिंह।

गोपालदास, गोपालकिशोर, गोपाललाल, गोपालप्रसाद और गोपालसिंह। गोवर्धन और गोवर्धनसिंह। गोविंदचंद, गोविंदलाल, गोविंदप्रसाद और गोविंदसिंह। हरिगोपाल, हरिनारायण, हरिदत्त, हरिकांत, हरिकुमार, हरिमंगल, हरिनाथ, हरिपाल, हरिराज, हरिसिंह। जगतपाल, जगतराम और जगतसिह।

जयपाल और जयपाल सिंह। जयसिंह और जयसिंहराज। कैलाशचंदर कैलाश सिंह, कैलाश प्रसाद और कैलाशचंद। कालीदत्त, कालीप्रसाद, कालीराम और कालीसिंह। मंगलदास, मंगलदेव, मंगललाल, मंगलप्रसाद और मंगलसिह। मथुरा, मथुराप्रसाद, मथुरासिंह और मथुरादास। भोला, भोलानाथ।

चेतन और चेतन देव। हिम्मत और हिम्मतसिंह। जितेंदर और जितेंद्र, कुंवर और कुंवरसिंह। रतन और रतनलाल, संग्राम और संग्रामसिंह। सवाई और सवाईसिंह, श्याम, श्यामलाल और श्यामसिंह। ठाकुर और ठाकुर सिंह। उदय और उदयसिंह। उत्तम और उत्तमसिंह। विजय और विजयसिंह।

स्वरूप और स्वरूपसिंह। शार्दूल और शार्दूलसिंह। शेर और शेरसिंह। टीकम, टीकमचंद और टीकमसिंह। अजित,अजितदेव और अजित सिंह। अमोघ और अमोघलाल। अमृत, अमृतलाल और अमृतराज। आनंद कुमार और आनंदलाल।

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अभियान का असल मकसद क्या? संयुक्त शासन सचिव की तरफ से शिक्षा विभाग के निदेशक को भेजे गए पत्र में लिखा है- व्यक्ति का नाम उसके व्यक्तित्व, संस्कार और सामाजिक छवि का दर्पण होता है। नाम सुनते ही हमारे मन में उस व्यक्ति की एक छवि बनने लगती है। नाम व्यक्ति की पहचान और विशिष्टता को दर्शाता है।

प्रत्येक नाम के साथ एक अर्थ, एक भावना एवं सांस्कृतिक संदर्भ जुड़ा होता है। नाम का व्यक्ति के आत्मविश्वास और व्यवहार पर भी प्रभाव पड़ता है। एक अच्छा, सरल और सकारात्मक अर्थ वाला नाम व्यक्ति में गर्व और आत्मबल बढ़ाता है, जबकि जटिल या नकारात्मक अर्थ वाले नाम कभी-कभी संकोच का कारण बन सकते हैं।

इस सम्बन्ध में निर्देशानुसार राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले ऐसे विद्यार्थी जिनके नाम अर्थहीन अथवा नकारात्मक लगते हैं, जिससे उनके आत्मविश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, ऐसे विद्यार्थियों के नामों को अधिक सार्थक, सरल एवं शुद्ध बनाने के उद्देश्य से ‘सार्थक नाम अभियान’ शुरू किया जाना है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे नामों का चयन कर संशोधन करना है, जो सकारात्मक अर्थ लिए हुए हों तथा विद्यार्थियों के आत्मसम्मान एवं व्यक्तित्व विकास में सहायक सिद्ध हों।

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शिक्षा विभाग के सुझाए नामों पर उठ रहे सवाल…

  • वरिष्ठ समाजशास्त्री और राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर, राजीव गुप्ता ने सूची के नामों का विश्लेषण करके बताया- इनमें से कई नाम सामान्य नहीं हैं और आम बोलचाल में इस्तेमाल नहीं होते। जब माता-पिता ने बच्चों के नाम रखे, तब उनकी चेतना में कोई ना कोई कारण रहा होगा।
  • राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र विभाग के डीन शास्त्री कौसलेंद्रदास कहते हैं- भारतीय शास्त्र परपंरा में नामकरण जीवन का प्रमुख संस्कार है। भारतीय संस्कृति में नाम को व्यक्ति से अधिक महत्व दिया गया है। शिक्षा विभाग की सूची में दिए गए नामों में सुधार की आवश्यकता है।
  • ग्रामीण अंचल में बुरे नाम रखने के पीछे कारणों की चर्चा करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता यशवर्धन सिंह कहते हैं- पहले शादी के कई वर्षों के बाद जन्म लेने वालों और अपने से बड़े भाई-बहनों की मृत्यु के बाद पैदा होने वाले बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए उनके नकारात्मक भाव वाले नाम रखने का चलन था। इस सूची में शिक्षा विभाग ने जो नाम दिए हैं, वे हास्यास्पद हैं।
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स्कूलों में घसीटाराम, नाहर जैसे अटपटे नाम बदल सकेंगे बच्चे, सरकार देगी नए नामों का ऑप्शन

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घसीटाराम, नाहर, नन्नूमल, शैतान, खोजाराम…ये कुछ ऐसे नाम हैं, जो स्कूलों के रजिस्टर में दर्ज रहते हैं। कई बार सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ‘अटपटे’ और ‘अर्थहीन-अजीब’ नामों के कारण शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। ऐसे नामों को लेकर शिक्षा विभाग ने नई पहल की है। पढ़ें पूरी खबर…



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Bengal Election: ‘TMC में रहकर पाप किया, अब प्रायश्चित’, बेटे दिब्येंदु के लिए घुटनों पर बैठे शिशर अधिकारी


Bengal Election: ‘TMC में रहकर पाप किया, अब प्रायश्चित’, बेटे दिब्येंदु के लिए घुटनों पर बैठे शिशर अधिकारी | Bengal Election Dibyendu Adhikari father Sisir Adhikari apologizes Egra Assembly stage Latest News Hindi – Hindi Oneindia



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नोएडा बवाल- RJD की 2 महिला प्रवक्ताओं पर FIR: गलत VIDEO पोस्ट कर माहौल बिगाड़ने का आरोप; 2 दिन बाद फैक्ट्रियां खुलीं, फोर्स तैनात – Noida (Gautambudh Nagar) News




नोएडा में 2 दिन हुए बवाल के बाद आज यानी बुधवार को फैक्ट्रियां खुल गई हैं। हालात सामान्य हैं। जगह-जगह फोर्स तैनात है। CCTV और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। 16 कंपनी RAF और पीएसी लगाई गई है। नोएडा सेक्टर 63, 84, 85, 80, फेस 2 में पुलिस ने फ्लैगमार्च किया। कंपनियों के बाहर सैलरी हाईक के नोटिस चस्पा किए गए हैं। हालांकि, कुछ कंपनियों में आज छुट्‌टी कर दी गई है। कंपनियों ने बाहर नोटिस चिपकाकर कर्मचारियों को बताया गया कि आज कंपनी बंद रहेगी। कल के लिए सूचना आपको पहले से ही दे दी जाएगी। इस बीच, नोएडा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में राजद की दो महिला प्रवक्ताओं कंचना यादव और प्रियंका भारती पर FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि दोनों ने सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो शेयर कर माहौल खराब करने की कोशिश की। कानून-व्यवस्था और पुलिस कर छवि खराब करने का प्रयास किया। डीएम मेधा रुपम ने कहा- अगर कोई आउटसोर्सिंग एजेंसी या उसका कर्मचारी गड़बड़ी या उपद्रव करता है तो उसकी जिम्मेदारी एजेंसी की भी होगी। ऐसी स्थिति में एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। उसका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है। दरअसल, सैलरी बढ़ाने को लेकर सोमवार-मंगलवार को फैक्ट्री कर्मचारियों ने बवाल किया। 80 से अधिक जगहों पर पथराव किया। 350 कंपनियों में तोड़फोड़ की गई। मंत्री अनिल राजभर ने कहा- इस पूरी घटना में बड़ी साजिश की बू आ रही है। कुछ देश विरोधी ताकतें इसमें शामिल हो सकती हैं। वहीं, कंपनी मालिकों कहना है कि बाहरी लोगों ने माहौल को भड़काया। मजदूर कभी हिंसक प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं। फिलहाल, 7 थानों में 1800 लोगों और 4 हैंडलर्स के खिलाफ 12 मुकदमा दर्ज किया गया है। 4 महिलाओं समेत 700 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तस्वीरें देखिए- नोएडा में बवाल से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…



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पंजाब में श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी, 8 मरे: बच्चों-महिलाओं समेत 21 घायल, शरीर में कांच घुसे; डेढ़ किमी दूर उतरना था, PM ने दुख जताया – Khanna News




पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में श्रद्धालुओं से भरी बस बिजली के खंभे से टकराकर पलट गई। जिससे बस में करंट भी आ गया। बस पलटने से उसमें सवार 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। मरने वालों में सगे भाई भी शामिल हैं। वहीं बच्चों-महिलाओं समेत 21 श्रद्धालु घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिस वक्त हादसा हुआ, बस में 40 लोग सवार थे और करीब डेढ़ किमी बाद ही सबको बस से उतरकर अपने घर जाना था। हादसे का पता चलते ही स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बस में फंसे घायलों को बाहर निकाला। फतेहगढ़ साहिब के SSP डॉ. शुभम अग्रवाल ने कहा कि पुलिस हादसे की वजहों की जांच कर रही है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया। PM ने कहा- हादसे के बारे में सुनकर मुझे अत्यंत दुख हुआ है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। घायलों के जल्दी स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। बस में सवार होकर बैसाखी मेले में गए थे श्रद्धालु
पुलिस के मुताबिक श्री आनंदपुर साहिब में 14 अप्रैल को बैसाखी का मेला लगा था। इसी में हिस्सा लेने के लिए फतेहगढ़ साहिब से श्रद्धालुओं की बस श्री आनंदपुर साहिब गई थी। दिन में मेले में हिस्सा लेने के बाद रात को वह सभी बस में सवार होकर घर लौट रहे थे। बस में टेक्निकल प्रॉब्लम आई, खंभे से टकराकर पलटी
रात करीब 9-10 बजे जब उनकी बस गांव हिम्मतपुरा के पास पहुंची तो बस में अचानक कोई टेक्निकल प्रॉब्लम आ गई। जिसके बाद बस ड्राइवर के कंट्रोल से बाहर हो गई। फिर तेज रफ्तार बस बेकाबू होकर रोड किनारे लगे बिजली के खंभे से टकरा गई। जिसके बाद बस में हल्का करंट भी आ गया। हालांकि बस एक झटके से पलट गई, जिस वजह से करंट से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। एक-दूसरे के ऊपर गिरी सवारियां, कांच टूटकर शरीर में घुसे
बस के पलटते ही सवारियां एक-दूसरे के ऊपर गिर गईं। जिससे कई लोगों के हाथ-पैर पर भी गंभीर चोटें लगीं। इसके अलावा कई लोगों को सिर में चोट लगी, खिड़की के कांच टूटकर शरीर में घुस गए। इस वजह से 8 लोगों की मौत हो गई। जिनमें गांव मैण माजरी के रहने वाले जगविंदर सिंह, गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी इकबाल सिंह, लखबीर सिंह, हरवीर सिंह, परदीप कौर और रणजीत कौर की मौत हो गई। इसके साथ कज्जल माजरा गांव के कुलविंदर सिंह की भी जान चली गई। लखबीर सिंह और हरवीर सिंह सगे भाई थे। बस में फंसे श्रद्धालु चिल्लाने लगे, स्थानीय लोगों ने बाहर निकाला
हादसे के बाद बस में फंसे श्रद्धालुओं ने जोर-जोर से चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया। इसी दौरान इलाके के कुछ लोग रात को रोटी खाने के बाद घूमने के लिए निकले तो उन्हें हादसे के बारे में पता चला। उन्होंने तुरंत फोन कर दूसरे लोगों को भी बुला लिया। जिसके बाद एंबुलेंस और पुलिस का इंतजार किए बिना लोगों ने खुद बस के शीशे तोड़कर अंदर फंसे यात्रियों को निकाला। इसके बाद एंबुलेंस पहुंची तो उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया। 12 घायलों को मोरिंडा और 9 को फतेहगढ़ साहिब ले गए। SSP बोले- हादसे की वजह की जांच कर रहे
इस बारे में SSP डॉ. शुभम अग्रवाल ने बताया कि जिस गांव हिम्मतपुरा में हादसा हुआ, उसके डेढ़ किमी दूर गांव मैण माजरा में सभी श्रद्धालुओं को उतरना था, लेकिन उससे पहले ही यह दुर्घटना हो गई। इसके बाद तुरंत पुलिस टीमें मौके पर भेजी गईं। घायलों को अस्पताल और गंभीर घायलों को PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया है। बस को भी टो कर साइड कर दिया गया। हादसा क्यों और कैसे हुआ, इसके बारे में जांच की जा रही है। बठिंडा की सांसद ने जताया दुख
बठिंडा से शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर लिखा- दुखद समाचार। श्री आनंदपुर साहिब से आ रहे तीर्थयात्रियों की बस पलटने से कई श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार सुनकर गहरा दुख हुआ है। गुरु साहिब दिवंगत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान दें और घायलों को शीघ्र स्वस्थ करें। PM मोदी ने पंजाबी में ट्वीट कर दुख जताया..



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सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं: यहां ब्रह्मचारी देवता, महिलाएं क्यों आना चाहती हैं; SC ने कहा- करोड़ों की आस्था को गलत ठहराना मुश्किल




केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में चौथे दिन सुनवाई हुई। मंदिर का मैनेजमेंट देखने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने कहा कि यह खिलौने की दुकान या रेस्टोरेंट का मामला नहीं है। यह आजन्म ब्रह्मचारी माने जाने वाले देवता का मंदिर है। TDB का पक्ष रखते हुए एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- 10 से 50 साल के उम्र की महिलाएं देवता के स्वरूप और पहचान के विपरीत हैं। भारत में अयप्पा के लगभग 1,000 मंदिर हैं। अगर महिलाओं को दर्शन करना है, तो वहां जाएं। उन्हें इसी खास मंदिर में क्यों आना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था को गलत ठहराना सबसे मुश्किल कामों में से एक है। साथ ही यह भी कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर बैन लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए बैन हटा दिया। इस फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं। सुप्रीम कोर्ट में इनके आधार पर 7 महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों पर बहस हो रही है। आज की सुनवाई के 5 अहम पॉइंट्स- सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान भी महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखी गईं। केंद्र सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछली 3 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा सबरीमाला केस पर पल-पल के अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…



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सबरीमाला केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: महिलाओं की एंट्री के लिए दलीलें रखी जाएंगी; विरोध में सरकार, कहा- कई देवी मंदिरों में पुरुष बैन


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नई दिल्ली15 मिनट पहले

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केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री और धर्मस्थलों पर भेदभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को चौथे दिन सुनवाई होगी। 14 अप्रैल से 16 अप्रैल के दौरान सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री के समर्थन में दलीलें रखी जाएंगी।

इससे पहले 7 से 9 अप्रैल तक सुनवाई के दौरान महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखी गईं। केंद्र सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की बेंच ने कहा था कि मंदिरों और मठों में एंट्री का अधिकार सभी लोगों को होना चाहिए। किसी एक संप्रदाय को बाहर रखना हिंदू धर्म पर नकारात्मक असर डालेगा। इससे समाज बंटेगा।

केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर बैन लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए बैन हटा दिया। इसके बाद दायर पुनर्विचार याचिकाओं के आधार पर 7 महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न तय किए गए हैं, जिन पर अब बहस हो रही है।

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सुप्रीम कोर्ट में 3 सुनवाई में अब तक क्या हुआ

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता: महिलाओं की मंदिर में एंट्री पर 2018 का फैसला गलत तरीके से लिया गया। उन्हें मंदिर में न जाने देना उनका अपमान करना नहीं है। भारत में उन्हें पूजा जाता है। हमें इस बात पर ऐतराज है कि मंदिर की इस परंपरा को ‘अस्पृश्यता’ (छुआछूत या अनुच्छेद 17) कहा गया। छुआछूत जाति के आधार पर होती थी, यह मामला उससे अलग है। जैसे हम मस्जिद, मजार या गुरुद्वारे में जाते समय सिर ढंकते हैं, वैसे ही सबरीमाला की भी एक अनोखी परंपरा है, जिसका सम्मान होना चाहिए। ये धार्मिक आस्था और संप्रदाय की स्वायत्तता का मुद्दा है, जो न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है। पूरी खबर पढ़ें…

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि जो लोग भगवान अयप्पा के भक्त नहीं हैं, वे केरल के सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को कैसे चुनौती दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर 7 सवाल तय किए हैं। इनमें से एक सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति, जो किसी धार्मिक संप्रदाय या समूह से संबंधित नहीं है, उस ‘धार्मिक संप्रदाय या समूह’ की किसी प्रथा को जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से चुनौती दे सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला केस की सुनवाई के दौरान मंदिरों के रीति-रिवाजों का जिक्र हुआ। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि मंदिरों में सिर्फ खास समुदाय की एंट्री और बाहरी लोगों की मनाही से समाज बंटेगा। यह हिंदु धर्म के लिए ठीक नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि मान लीजिए (सबरीमाला केस को छोड़कर), अगर यह कहा जाए कि सिर्फ गौड़ सारस्वत लोग ही एक मंदिर में आएं या कांची मठ के लोग सिर्फ कांची ही जाएं, दूसरे मठ (जैसे शृंगेरी) न जाएं तो यह ठीक नहीं होगा। बल्कि जितने ज्यादा लोग अलग-अलग मंदिरों और मठों में जाएंगे, उतना ही धर्म मजबूत बनेगा।

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सबरीमाला मामले पर सुनवाई करने वाले 9 जजों के नाम

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सबरीमाला सहित 5 मामले, जिन पर SC फैसला करेगा

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश: सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में जाने का अधिकार दिया था। अब बड़ी पीठ तय करेगी कि यह फैसला सही था या नहीं।

दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना: एडवोकेट सुनीता तिवारी ने 2017 में इसके खिलाफ याचिका दायर की और कहा कि यह प्रथा महिलाओं के साथ भेदभाव करती है और यह नाबालिग बच्चियों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या यह प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है?

मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश: यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा नाम की महिला ने 2016 में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट तय करेगा कि क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा सकता है।

पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश: 2012 में पारसी महिला गुलरुख एम गुप्ता ने हिंदू व्यक्ति से शादी के बाद अग्नि मंदिर में प्रवेश से रोके जाने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या गैर-पारसी से शादी करने पर पारसी महिला को मंदिर में प्रवेश से रोका जा सकता है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े लैंगिक भेदभाव के प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या धार्मिक गतिविधियों में जेंडर के आधार पर भेदभाव को क्या मौलिक अधिकार का हनन माना जा सकता है?

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Crisis: तेल कंपनियों का घाटा बढ़ा, पेट्रोल पर 18 डीजल पर 35 रुपये/लीटर का नुकसान; चुनाव के बाद समीक्षा संभव


चुनाव के बाद सरकार कर सकती है पेट्रोल-डीजल कीमतों की समीक्षा कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है। तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 35 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मार्च में हुए भारी घाटे ने जनवरी और फरवरी के मुनाफे को लगभग खत्म कर दिया है, जिसके चलते जनवरी-मार्च तिमाही में इन कंपनियों के नुकसान में जाने की आशंका जताई जा रही है।

बढ़ सकता है कंपनीयों का घाटा

वित्तीय सेवा कंपनी मैक्वेरी की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत 135-165 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो यह घाटा और बढ़ने की आशंका है। क्रूड में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से प्रति लीटर नुकसान करीब 6 रुपये तक बढ़ सकता है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अप्रैल 2022 के बाद खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। मार्च तक तीनों कंपनियों का संयुक्त दैनिक नुकसान करीब 2,400 करोड़ रुपये था। केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद ये घटकर रोजाना लगभग 1,600 करोड़ रह गया है। 

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विकास दर घटने की आशंका

भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद कच्चे तेल के झटकों को काफी हद तक संभाल सकती है। हालांकि, अगर औसत मूल्य 130 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है तो देश की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 0.8 फीसदी कम हो सकती है। रेटिंग एजेंसी एसएंडपी के अनुसार, 2026-27 के दौरान तेल कंपनियों की परिचालन आय में 15 से 25 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। इसके चलते कॉरपोरेट कर्ज और बैंकिंग क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। बैंकों का एनपीए बढ़कर 3.5 फीसदी तक पहुंच सकता है।

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