अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाला केस की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को फिर से हटाने की मांग की है। केजरीवाल ने बुधवार को जस्टिस कांता की अदालत में एक और हलफनामा दायर किया है। इसमें केजरीवाल ने जज के दो बच्चों के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करने का मुद्दा उठाया है। केजरीवाल ने लिखा- जज के दोनों बच्चे तुषार मेहता के साथ काम करते हैं। तुषार मेहता उनके बच्चों को केस सौंपते हैं। तुषार मेहता CBI की तरफ से पेश होने वाले वकील हैं। ऐसे में, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा तुषार मेहता के खिलाफ आदेश कैसे जारी कर पाएंगी? इससे पहले 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा था कि जस्टिस शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें केस से हटाया जाए।
केजरीवाल ने जज को हटाने की अर्जी क्यों लगाई, 5 पॉइंट्स में समझिए ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस आदेश को CBI ने चुनौती दी, जिसकी सुनवाई वर्तमान में जस्टिस शर्मा कर रही हैं। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने नोटिस जारी किया और उस आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी, जिसमें जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात कही गई थी। उन्होंने प्रारंभिक तौर पर यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत थीं और ट्रायल कोर्ट को PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) की कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया। इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर, अरुण पिल्लई और चनप्रीत सिंह रायट ने जस्टिस शर्मा को हटाने की अर्जी दाखिल की। 13 अप्रैल: केजरीवाल की कोर्टरूम में 10 बड़ी दलीलें… – 9 मार्च को सुनवाई के दौरान CBI के अलावा कोई मौजूद नहीं था। बिना उनकी बात सुने कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहली नजर में गलत बता दिया। ट्रायल कोर्ट ने पूरे दिन सुनवाई कर फैसला दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने 5 मिनट की सुनवाई में उसे गलत बता दिया। आदेश आया तो मुझे लगा कि मामला पक्षपात की तरफ जा रहा है। मैंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद मैंने यह आवेदन दिया। – पहले आपने कहा था कि ‘एप्रूवर’ (गवाह बने आरोपी) के बयान मान्य हैं। लेकिन यहां सिर्फ 5 मिनट की सुनवाई के बाद आपने कहा कि ट्रायल कोर्ट की एप्रूवर के बयानों पर की गई टिप्पणियां गलत हैं। यह मेरे लिए सबसे चिंताजनक बात थी। – मैं इस अदालत के सत्येंद्र जैन बनाम ED फैसले पर भरोसा करना चाहता हूं। उस मामले में जमानत पर सुनवाई चल रही थी। 6 दिन की सुनवाई हो चुकी थी और वह आखिरी तारीख थी। अचानक ED ने पक्षपात की आशंका जताई। जिला न्यायाधीश ने इसे स्वीकार कर लिया। मामला हाईकोर्ट आया और वहां भी इसे स्वीकार कर लिया गया। उस मामले और मेरे मामले में काफी समानताएं हैं। उस मामले में अदालत ने कहा था कि सवाल जज की ईमानदारी का नहीं है, बल्कि पक्षकार के मन में उत्पन्न आशंका का है। मेरा मामला भी वैसा ही है। यहां भी सवाल जज की ईमानदारी का नहीं है। – जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ चल रही कार्रवाई को भी हाईकोर्ट ने रोक दिया। ट्रायल कोर्ट ने जो बातें लिखी थीं, वो CBI के खिलाफ नहीं, बल्कि IO के खिलाफ थीं। IO ने हाईकोर्ट में कोई राहत नहीं मांगी थी और वह वहां मौजूद भी नहीं था। फिर भी सिर्फ CBI के कहने पर उसके खिलाफ कार्रवाई रोक दी गई। इससे मेरे मन में शंका पैदा होती है। – कानून के मुताबिक डिस्चार्ज आदेश को बहुत कम मामलों में ही रोका जाता है, लेकिन हमें सुने बिना ही आदेश का एक हिस्सा रोक दिया गया और बाकी हिस्सा भी बदल दिया गया। ऐसा लग रहा है कि इस एकतरफा आदेश से ट्रायल कोर्ट का ज्यादातर फैसला खत्म कर दिया गया। मुझे CBI की याचिका की कॉपी भी नहीं दी गई थी। – मैंने देखा है कि इस केस और इसी मामले से जुड़े अन्य आरोपियों, जैसे मनीष सिसोदिया के केस की सुनवाई बहुत तेजी से हो रही है। ऐसी गति किसी और केस में नहीं दिखती। दोनों ही मामले विपक्षी नेताओं से जुड़े हैं। – इस कोर्ट में CBI और ED की लगभग हर दलील मान ली जाती है। उनकी हर मांग आदेश बन जाती है। सिर्फ एक मामला (अरुण पिल्लई केस) अलग रहा। जब भी ED या CBI कुछ कहती है, उसे स्वीकार कर लिया जाता है और आदेश उनके पक्ष में दिया जाता है। ट्रायल कोर्ट के लंबे फैसले के खिलाफ CBI ने सिर्फ 4 घंटे में याचिका दाखिल कर दी, जिसमें ज्यादा ठोस बात नहीं थी। फिर भी पहली ही सुनवाई में एकतरफा आदेश दे दिया गया। – इस अदालत के सामने पहले ही 5 मामले आ चुके हैं। मेरा मामला गिरफ्तारी से संबंधित था। संजय सिंह, के कविता और अमन ढल्ल की जमानत याचिकाएं भी यहां सुनी गई थीं। उन मामलों में इस अदालत द्वारा की गई टिप्पणियां अपने आप में निर्णय के समान हैं। – अधिवक्ता परिषद नाम का एक संगठन है, जो RSS से जुड़ा है। आपने उसके कार्यक्रमों में चार बार हिस्सा लिया है। हम उसकी विचारधारा के पूरी तरह खिलाफ हैं और खुलकर विरोध करते हैं। यह मामला राजनीतिक है। अगर कोई जज किसी खास विचारधारा से जुड़े कार्यक्रमों में जाता है, तो इससे पक्षपात की आशंका बनती है। ऐसे में मेरे मन में यह सवाल उठता है कि क्या मुझे निष्पक्ष न्याय मिलेगा या नही? – सोशल मीडिया पर भी एक मुद्दा चर्चा में है कि अगर जज के करीबी लोग किसी पक्ष या वकीलों से जुड़े हों, तो जज खुद को उस केस से अलग कर लेते हैं। अगर जज के करीबी लोग किसी पक्ष से जुड़े हों, तो वे खुद को मामले से अलग कर लेते हैं। मेरा निवेदन है कि इस बात पर भी विचार किया जाए। 27 फरवरी: ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित 23 आरोपियों को बरी किया था 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था। ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है। साथ ही, जस्टिस शर्मा की कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली शराब नीति केस-हाइकोर्ट का सभी 23 आरोपियों को नोटिस:CBI अफसर के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक, मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुनवाई नहीं करने का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 मार्च को दिल्ली शराब नीति केस में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की CBI अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी। पूरी खबर पढ़ें…
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केजरीवाल बोले-जज के बच्चे तुषार मेहता के साथ काम करते: तुषार CBI के वकील हैं, ऐसे में जज कांता मेहता के खिलाफ आदेश कैसे दे पाएंगी
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TIME 100 List 2026: टाइम की 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में पिचाई, मोहन और रणबीर कपूर, जानिए सबकुछ
वैश्विक स्तर पर तकनीकी नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था का नेतृत्व कर रहे भारतीय दिग्गजों को टाइम ने अपने 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है।प्रतिष्ठित ‘टाइम 100: द वर्ल्ड्स मोस्ट इन्फ्लुएंशियल पीपल ऑफ 2026’ सूची में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई और यूट्यूब के प्रमुख नील मोहन को शामिल किया गया है। इनके साथ ही न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी, शेफ विकास खन्ना और अभिनेता रणबीर कपूर ने भी इस सूची में अपनी जगह बनाई है। यह सूची वैश्विक व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और नीति-निर्माण में बदलती ताकत को दिखाती है।
गूगल का एआई विस्तार और पिचाई का नेतृत्व
तकनीकी क्षेत्र में एआई संचालित व्यापार का दबदबा कायम है। टाइम प्रोफाइल के अनुसार, 27 साल पुरानी कंपनी होने के बावजूद पिचाई के नेतृत्व में गूगल ने ‘स्टार्टअप जैसी फुर्ती’ दिखाई है। पिचाई ने 2015 से सीईओ के रूप में कार्य करते हुए एआई अनुसंधान को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादों में तब्दील किया है।
- नवाचार: गूगल ने एआई स्टूडियो, नोटबुक एलएम, जेमिनी सीएलआई और एंटीग्रेविटी जैसे इनोवेटिव एआई उत्पाद लॉन्च किए हैं।
- वैश्विक प्रभाव: डीपलर्निंग.एआई के संस्थापक एंड्रयू एनजी के अनुसार, पिचाई के नेतृत्व में गूगल एक ‘एआई डीप-टेक पावरहाउस’ बना हुआ है, जो दुनिया भर में ज्ञान और सूचना प्रणाली को नया आकार दे रहा है।
नील मोहन के बारे में क्या बताया गया?
डिजिटल स्ट्रीमिंग और विज्ञापन बाजार में यूट्यूब की स्थिति और मजबूत हुई है। नील मोहन ने प्लेटफॉर्म की वृद्धि और सर्वव्यापकता को ‘सुपरचार्ज’ किया है।
- रणनीतिक साझेदारियां: मोहन ने दुनिया की सबसे बड़ी खेल लीगों (जैसे एनएफएल) के साथ अहम व्यावसायिक सौदे किए हैं, जिससे प्लेटफॉर्म के राजस्व में विस्तार हुआ है।
- प्लेटफॉर्म का संतुलन: विज्ञापनदाताओं को लुभाने के साथ-साथ क्रिएटर्स के बीच वफादारी हासिल करने में मोहन सफल रहे हैं। यूट्यूब अब एनएफएल गेम्स और पॉडकास्ट का प्रमुख केंद्र बन गया है।
जोहरान ममदानी का नाम प्रमुखता से उभरा
व्यापार और तकनीक के अलावा, नीति-निर्माण में न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी का नाम प्रमुखता से उभरा है। आलोचकों को डर था कि उनके आवास एजेंडे से निवेश पर असर पड़ेगा, लेकिन व्यवसायों और धनी निवासियों का पलायन नहीं हुआ। उन्होंने संघीय आवास कोष हासिल किया है। शेफ विकास खन्ना को न्यूयॉर्क स्थित उनके रेस्तरां बंगलो के जरिए भारतीय विरासत को वैश्विक मंच देने के लिए लिस्ट में शामिल किया गया है। वहीं, रणबीर कपूर को भारतीय सिनेमा को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने के लिए इस सूची में जगह मिली है। इस सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाल के 35 वर्षीय प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह जैसे वैश्विक नेता भी शामिल हैं।
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IMF: 2029 तक वैश्विक कर्ज पहुंचेगा खतरनाक स्तर पर, भारत के लिए क्या संकेत? आईएमएफ प्रमुख ने किया यह दावा
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और बढ़ते कर्ज को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बार-बार आ रहे वैश्विक झटकों के कारण दुनिया भर में सार्वजनिक कर्ज “खतरनाक” स्तर पर पहुंच रहा है। जॉर्जीवा के अनुसार, दुनिया भर में बढ़ते वित्तीय दबावों के बीच अनुमान है कि वर्ष 2029 तक वैश्विक सार्वजनिक ऋण जीडीपी के 100% को पार कर जाएगा। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऋण का सबसे उच्चतम स्तर होगा। इसके साथ ही, मौजूदा संकट के बीच 20 से 50 अरब डॉलर की नई वैश्विक वित्तीय मांग पैदा होने की संभावना है।
भारत और आसियान के लिए राहत के संकेत
वैश्विक स्तर पर मंडराते इस कर्ज संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बीच, आईएमएफ प्रमुख ने भारत की स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। इस संबंध में मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- भारत की मजबूत स्थिति: जॉर्जीवा के अनुसार, भारत जैसी मजबूत बुनियादी अर्थव्यवस्थाओं के इस संकट के बीच बेहतर प्रदर्शन करने की पूरी संभावना है।
- मंदी का जोखिम नहीं: उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारत में किसी भी प्रकार की तीव्र आर्थिक मंदी का कोई खतरा नहीं दिखाई देता है।
- निगरानी की आवश्यकता: हालांकि भारत सुरक्षित स्थिति में है, लेकिन जॉर्जीवा ने भारतीय वित्तीय क्षेत्र को अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘प्रमुख निगरानी बिंदु’ (मॉनिटरिंग पॉइंट) बताया है, जिस पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।
- आसियान का प्रदर्शन: भारत के अलावा, आसियान देश भी वैश्विक झटके को अपेक्षाकृत काफी अच्छी तरह से झेल रहे हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव और संभावित आपूर्ति संकट
एक तरफ जहां भारत और आसियान मजबूत बने हुए हैं, वहीं अन्य क्षेत्रों में गहराता संकट चिंता का विषय है। जॉर्जीवा के मुताबिक, मौजूदा संघर्षों के कारण मध्य पूर्व को विकास के मोर्चे पर भारी झटका लगेगा और वहां के आर्थिक आउटलुक (अनुमान) में 2.3% तक की कटौती की गई है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एशिया में तेल, गैस, नेफ्था और हीलियम की कमी होने की आशंका भी जताई है। जॉर्जीवा ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष जल्दी समाप्त भी हो जाता है, तब भी वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान और अधिक बढ़ सकता है। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें लंबी अवधि तक ऊंची बनी रहती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को “आगे आने वाले कठिन समय” के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।
मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों के लिए नीतिगत सलाह
महंगाई और मौद्रिक नीति को लेकर आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि फिलहाल अल्पकालिक मुद्रास्फीति (महंगाई) की उम्मीदें बढ़ रही हैं, लेकिन इसका दीर्घकालिक दृष्टिकोण अभी भी स्थिर बना हुआ है। उन्होंने नीति निर्माताओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि केंद्रीय बैंकों को मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देनी चाहिए, लेकिन ब्याज दरों या नीतियों पर जल्दबाजी में कार्रवाई करने से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कमजोर विश्वसनीयता वाले केंद्रीय बैंकों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए बाजार में मजबूत संकेत भेजने की आवश्यकता हो सकती है।
मौजूदा वैश्विक झटकों से बचाव का रास्ता सुझाते हुए आईएमएफ प्रमुख ने देशों से ऊर्जा-बचत के कदम उठाने का आग्रह किया है। इसमें उन्होंने परिवहन प्रोत्साहन औररिमोट वर्क/वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों का हवाला दिया है। उनका मानना है कि मजबूत अर्थव्यवस्थाएं ही संकट के समय सबसे अच्छा बचाव होती हैं, इसलिए उन्होंने सभी देशों से आह्वान किया है कि वे मौजूदा संकट के बाद अपनी नीतिगत गुंजाइश को फिर से बनाने पर काम करें।
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