कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने सोमवार को महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने द हिन्दू (अखबार) में लिखा कि पीएम विपक्षी दलों से उन बिलों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं, जिन्हें सरकार संसद के विशेष सत्र में जबरदस्ती पास कराना चाहती है।
उन्होंने लिखा कि यह सब तब हो रहा है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। इस जल्दबाजी का सिर्फ एक ही मकसद राजनीतिक फायदा उठाना है। सरकार ने 2023 में ही ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को संसद में पास कर लिया था, लेकिन इसे अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू करने की शर्त रखी गई।
उन्होंने कहा की दरअसल इस सत्र में सरकार का असली मुद्दा परिसीमन है और उसके बारे कोई जानकारी नहीं दी गई है। ये संविधान के लिए खतरनाक है।
विपक्ष ने 2024 में महिला आरक्षण लागू करने की मांग की थी
महिला आरक्षण पर सोनिया ने लिखा- राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि इसे 2024 के चुनाव से ही लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना। अब अनुच्छेद 334-A में बदलाव कर महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने की तैयारी है। ऐसे में प्रधानमंत्री को यू-टर्न लेने में 30 महीने क्यों लगे?
उन्होंने सवाल किया कि 5 राज्यों के चुनाव खत्म होने तक इंतजार क्यों नहीं किया गया। इतनी हड़बड़ी की क्या जरूरत है, जबकि विपक्ष तीन बार चिट्ठी लिखकर कह चुका है कि पहले 29 अप्रैल को सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
पीछले 2 दो दिनों में महिला आरक्षण पर क्या-क्या हुआ
विशेष सत्र पर पीएम ने चिट्ठी लिखकर सभी दलों का समर्थन मांगा।
कांग्रेस अध्यक्ष का पीएम को पत्र
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को पत्र लिखकर कहा कि राज्य चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना यह दिखाता है कि सरकार इस कानून को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में लागू करना चाहती है। खड़गे ने यह भी मांग की कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और परिसीम से जुड़े मुद्दों पर भई विस्तार से चर्चा की जाए।
BJP ने व्हिप जारी किया
BJP ने रविवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों को 3 लाइन का व्हिप जारी कर 16 से 18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहने को कहा है। इस दौरान किसी को भी छुट्टी नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई थी।
पीएम ने सभी दलों से समर्थन मांगा
इससे पहल रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर समर्थन मांगा। पीएम ने लिखा कि अब समय आ गया है कि इस कानून को पूरे देश में सही मायनों में लागू किया जा
परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग बिल लाएगी सरकार
राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके।
नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा।
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अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई युद्धविराम वार्ता के किसी भी समझौते तक पहुंचने में विफल रहने का सीधा असर सोमवार को घरेलू और वैश्विक सर्राफा बाजारों पर दिखाई दिया। कमजोर वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण, सोमवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं में बिकवाली और मुनाफावसूली का भारी दबाव देखा गया, जिससे सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
घरेलू बाजार में सोने-चांदी के भाव क्या रहे?
सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच चांदी की कीमतों में 1,800 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार के 2,47,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद स्तर की तुलना में सोमवार को चांदी करीब 1 प्रतिशत (1,800 रुपये) गिरकर 2,45,200 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर आ गई।
इसी तरह, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने के दाम में भी 300 रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
पिछले कारोबारी सत्र में 1,55,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद होने वाला सोना अब 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर आ गया है।
गिरावट के मुख्य कारण क्या हैं?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने बताया कि सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त होने के बाद सोमवार को कीमती धातुएं गिरावट के साथ खुलीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत में आई इस रुकावट ने बाजार की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, जिससे अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में उछाल को समर्थन मिला है।
इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंताएं सर्राफा बाजार पर हावी हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी वीपी रिसर्च एनालिस्ट, जतिन त्रिवेदी के अनुसार, ऐसी खबरें हैं कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए वहां सैनिकों की तैनाती और इस मार्ग को 100 प्रतिशत बंद करने पर विचार कर सकता है। इससे इस मार्ग में लंबे समय तक व्यवधान रहने और कच्चे तेल की कीमतों के ऊंचे स्तर पर बने रहने की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके कारण सोने में मुनाफावसूली देखी गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव क्या हैं?
घरेलू बाजार की तरह ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का रुख रहा।
हाजिर चांदी 1.58 डॉलर या 2.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74.31 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
वहीं, सोना 25.92 डॉलर गिरकर 4,722.26 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
जानकारों की क्या राय है?
हालांकि, शुरुआती गिरावट के बाद कीमतों में कुछ सुधार भी देखा गया। बाजार द्वारा तनाव बढ़ने और इसके कम होने की संभावित स्थितियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के चलते सोने की कीमतें वापस 4,700 डॉलर के पार चली गईं। जतिन त्रिवेदी का मानना है कि चूंकि भू-राजनीतिक अनिश्चितता बाजार की धारणा पर हावी है, इसलिए बाजार में अस्थिरता लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर जयंती के अवसर पर मंगलवार को सर्राफा बाजार बंद रहेंगे। आगे बाजार की दिशा पूरी तरह से वैश्विक तनाव और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी।
सरकार ने टैक्स की भाषा आसान बनाने के साथ कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों में भी बदलाव किया है। चलिए समझते हैं, नए टैक्स युग में आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा
एक अप्रैल, 2026 से आजादी के बाद का सबसे बड़ा टैक्स सुधार लागू हुआ है। इनकम टैक्स एक्ट 2025 सिर्फ पुराने कानून की मरम्मत नहीं है, बल्कि टैक्स की पूरी नई इमारत है। भाषा आसान की गई है और पुराने पड़ चुके प्रावधानों को हटाया गया है। तो आइए, समझते हैं उन बड़े बदलावों को, जो आपकी वित्तीय योजना को पूरी तरह बदल देंगे-
12.75 लाख तक कोई टैक्स नहीं
नए टैक्स कानून में नई टैक्स व्यवस्था को मुख्य आधार बनाया गया है, जो अब अधिकांश करदाताओं के लिए डिफॉल्ट बन चुकी है। भले ही टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन धारा 87A के तहत छूट को 60,000 रुपये तक बढ़ाया गया है। इसका सीधा असर यह है कि यदि किसी की कर योग्य आय 12 लाख रुपये तक है, तो उस पर लगने वाला पूरा टैक्स इस छूट के कारण शून्य हो जाता है।
वेतनभोगी के लिए नई व्यवस्था में 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन इस राहत को और बढ़ाता है, जिससे प्रभावी रूप से 12.75 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स शून्य हो सकता है।
कब होगी टैक्स प्लानिंग की जरूरत
जैसे ही आय 13 लाख या इससे अधिक होती है, टैक्स देनदारी शुरू हो जाती है और यहीं से वास्तविक टैक्स प्लानिंग की जरूरत होगी। धारा 87A की छूट हर प्रकार की आय पर लागू नहीं है। कैपिटल गेन, क्रिप्टो आय या लॉटरी से प्राप्त आय पर यह छूट उपलब्ध नहीं होगी। इसलिए करदाताओं को केवल अपनी सैलरी नहीं, बल्कि अपनी पूरी आय की संरचना को समझते हुए ही टैक्स प्लानिंग करनी होगी, नहीं तो बाद में अप्रत्याशित टैक्स देनदारी सामने आ सकती है।
एचआरए का बढ़ा दायरा
अब तक केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व चेन्नई को ही 50% एचआरए छूट के लिए ‘मेट्रो’ माना जाता था। अब इस लिस्ट में बंगलूरू, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी जोड़ा गया है। यानी इन शहरों में रहने वाले कर्मचारी बेसिक सैलरी का 50% हिस्सा एचआरए के रूप में क्लेम कर सकेंगे।
सावधानी भी जरूरी
अब मकान मालिक के साथ अपना रिश्ता बताना अनिवार्य होगा ताकि फर्जी रेंट रसीदों के खेल को रोका जा सके।
विदेश यात्रा और पढ़ाई में राहत
विदेश पैसे भेजने (LRS) के नियमों को सरल बनाया गया है और TCS की दरें कम की गई हैं।
शिक्षा और इलाज
पहले 7 लाख रुपये के ऊपर 5% लगता था, अब 2% लगेगा।
विदेश यात्रा
पहले 10 लाख के ऊपर 20% का भारी बोझ था। अब बिना किसी सीमा के 2% फ्लैट रेट लागू होगा।
रिटर्न भरने की समय सीमा में बदलाव
ITR-3 और ITR-4 (छोटे कारोबारी और प्रोफेशनल) आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त।
रिवाइज्ड रिटर्न
रिटर्न सुधारने के लिए अब 9 महीने के बजाय 12 महीने (अगले साल 31 मार्च तक) का समय !
निवेशकों का बढ़ेगा खर्च
शेयर बाजार के खिलाड़ियों के लिए खर्च बढ़ गया है। सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) की दरें बढ़ा दी गई हैं-
ऑप्शंसः प्रीमियम पर टैक्स 0.1% से बढ़कर 0.15%
फ्यूचर्सः 0.02% से बढ़कर 0.05%
सॉवरेन गोल्ड बॉन्डः अगर गोल्ड बॉन्ड बाजार से खरीदे गए हैं, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। पहले यह पूरी तरह टैक्स-फ्री था।
कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों और पर्क्स की सीमाओं में बड़े बदलाव किए गए हैं। भत्तों को अब हकीकत के करीब लाने की कोशिश की गई है।
शिक्षा (दो बच्चे)
100 रुपये/महीना प्रति बच्चा
3,000 रुपये/महीना प्रति बच्चा
हॉस्टल भत्ता (दो बच्चे)
300 रुपये/महीना प्रति बच्चा
9,000 रुपये/महीना प्रति बच्चा
फ्री मील (प्रति भोजन)
50 रुपये
200 रुपये
गैर-नकद उपहार (सालाना)
5,000 रुपये
15,000 रुपये
विदेश में इलाज
आय 2 लाख से कम होने पर छूट
आय 8 लाख से कम होने पर छूट
कार लीज (1.6 L इंजन से छोटा)
2,700 रुपये (ड्राइवर सहित)
8,000 रुपये (ड्राइवर सहित)
नए युग की शुरुआत
पहले निवेश का मुख्य उद्देश्य टैक्स बचाना होता था, अब फोकस बदलकर वेल्थ क्रिएशन है, जिसमें रिटर्न, जोखिम और जरूरत तीनों को संतुलित करना आवश्यक है। ये बदलाव ईमानदार करदाताओं के लिए राहत लेकर आए हैं। हर व्यक्ति आय और निवेश का सही और पारदर्शी विवरण दे। यदि इस नए सिस्टम को समझदारी और योजना के साथ अपनाया जाए, तो यह न केवल टैक्स बोझ को कम करेगा, बल्कि एक मजबूत और सुरक्षित वित्तीय भविष्य की दिशा भी तय करेगा।
जानकारों का क्या कहना?
चार्टर्ड अकाउंटेंट मुकेश जैन के अनुसार यह एक वास्तविक और महत्वपूर्ण पहल है। इसे विशेष रूप से पुराने विदेशी खातों वाले छात्र, विदेशी इक्विटी (RSUS/ESOPs) वाले टेक कर्मचारी और भारत लौटने वाले अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए तैयार किया गया है, जो अनजाने में विदेशी संपत्तियों की रिपोर्ट करने में विफल रहे थे।
अघोषित संपत्ति और आय का कुल मूल्य एक करोड़ रु. तक है, तो करदाता को 30% कर और 100% अतिरिक्त लेवी (संपत्ति मूल्य का कुल 60%) देना होगा। यदि संपत्तियों की घोषणा निवासी बनने पर नहीं की गई थी, तो वे एक लाख रु. का मामूली शुल्क देकर इसे नियमित कर सकते हैं (बशर्ते मूल्य 5 करोड़ तक हो)। ब्लैक मनी एक्ट, 2015 के प्रावधानों के तहत दंड और मुकदमे से पूर्ण सुरक्षा।
अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने से सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 1,600 अंक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 23,600 से नीचे पहुंच गया। बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट दिख रही है।
Gold Rate Today 13 April 2026: अगर आप भी सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक राहत भरी खबर है। पिछले कुछ दिनों से आसमान छू रही सोने की कीमतों पर सोमवार (13 अप्रैल) की सुबह ब्रेक लग गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल के कारण घरेलू बाजार में भी सोने और चांदी के भाव गिर गए हैं। 13 अप्रैल को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन राजधानी दिल्ली से लेकर मुंबई तक कीमतों में नरमी देखी जा रही है।
दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज 24 कैरेट सोने की कीमत गिरकर ₹1,52,980 प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। वहीं, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी भाव में गिरावट दर्ज की गई है, जहां 24 कैरेट सोना ₹1,52,830 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह का रिकॉर्ड देखें तो सोना करीब ₹1,910 तक महंगा हुआ है, लेकिन आज की गिरावट खरीदारों के लिए एक अच्छा मौका लेकर आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 1.1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,734.60 डॉलर प्रति औंस पर देखा गया।
Gold Price In India: भारत के 20 बड़े शहरों में सोने का ताजा भाव: 13 अप्रैल 2026
शहर
24 कैरेट (₹/10 ग्राम)
22 कैरेट (₹/10 ग्राम)
18 कैरेट (₹/10 ग्राम)
दिल्ली
1,52,980
1,40,240
1,13,130
मुंबई
1,52,830
1,40,090
1,13,000
कोलकाता
1,52,830
1,40,090
1,13,000
चेन्नई
1,54,100
1,41,260
1,14,200
बेंगलुरु
1,52,830
1,40,090
1,13,000
पुणे
1,52,830
1,40,090
1,13,000
हैदराबाद
1,52,830
1,40,090
1,13,000
अहमदाबाद
1,52,880
1,40,140
1,13,050
जयपुर
1,52,980
1,40,240
1,13,130
लखनऊ
1,52,980
1,40,240
1,13,130
चंडीगढ़
1,52,980
1,40,240
1,13,130
भोपाल
1,52,880
1,40,140
1,13,050
इंदौर
1,52,880
1,40,140
1,13,050
पटना
1,52,980
1,40,240
1,13,130
नागपुर
1,52,830
1,40,090
1,13,000
सूरत
1,52,880
1,40,140
1,13,050
वडोदरा
1,52,880
1,40,140
1,13,050
मैसूर
1,52,830
1,40,090
1,13,000
कोच्चि
1,54,100
1,41,260
1,14,200
भुवनेश्वर
1,52,830
1,40,090
1,13,000
चांदी की चमक भी हुई फीकी (Silver Price Today)
सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट आई है। आज सुबह चांदी का भाव गिरकर ₹2,59,900 प्रति किलोग्राम पर आ गया है। आपको बता दें कि इस साल जनवरी में चांदी ₹4 लाख के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई थी। ग्लोबल मार्केट में सिल्वर फ्यूचर्स 2.63 प्रतिशत गिरकर 74.47 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर साफ दिख रहा है।
कैसे तय होते हैं भारत में सोने-चांदी के भाव? (How Gold and Silver Prices are Determined in India)
भारत में सोने और चांदी की कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर निर्भर करती हैं। इसमें ‘लंदन बुलियन मार्केट’ के बेंचमार्क और अमेरिकी डॉलर की स्थिति सबसे अहम होती है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा, भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना आयात करता है, इसलिए आयात शुल्क (Import Duty) और रुपये-डॉलर का विनिमय दर भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। घरेलू स्तर पर ‘इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन’ (IBJA) और राज्यों के स्थानीय टैक्स (GST और मेकिंग चार्ज) मिलकर अंतिम खुदरा भाव तय करते हैं।
क्यों गिरा सोने का भाव? (Gold Price Fall Reason)
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स (COMEX) गोल्ड फ्यूचर्स करीब 1.1% गिरकर 4,734.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है।
इस गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण हैं:
अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पार
इन वजहों से निवेशक सोने से थोड़ा दूरी बना रहे हैं, जिससे कीमतों में दबाव आया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) 1. 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने में क्या अंतर है? 24 कैरेट सोना 99.9% शुद्ध होता है, जबकि 22 कैरेट में 91.6% सोना और बाकी अन्य धातुएं होती हैं। गहने बनाने के लिए 22 कैरेट का इस्तेमाल ज्यादा होता है।
2. हॉलमार्क वाला सोना ही क्यों खरीदना चाहिए? हॉलमार्किंग शुद्धता की गारंटी है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) सोने की जांच कर उस पर अपनी मुहर लगाता है, जिससे आप धोखाधड़ी से बचते हैं।
3. क्या आज सोना खरीदने का सही समय है? कीमतों में आज गिरावट आई है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल के $100 पार होने से भविष्य में महंगाई का जोखिम है, जिससे सोने के दाम फिर बढ़ सकते हैं।
4. डिजिटल गोल्ड और फिजिकल गोल्ड में क्या बेहतर है? डिजिटल गोल्ड को सुरक्षित रखने की चिंता नहीं होती, लेकिन गहने पहनने या फिजिकल होल्डिंग के शौकीनों के लिए फिजिकल गोल्ड ही पहली पसंद है।
5. क्या चांदी में निवेश सही है? चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह अच्छा रिटर्न दे सकती है।
English summary
Gold Rate Today 13 April 2026 india 22k 24k 18k gold price fall india major cities sone ka bhav
Chhattisgarh Kanker Encounter: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग से सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। कांकेर जिले के छोटे बेठिया थाना क्षेत्र के जंगलों में सोमवार सुबह हुई एक भीषण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने कुख्यात नक्सली एरिया कमांडर रुपी को मार गिराया है।
रुपी पर शासन की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। कांकेर के पुलिस अधीक्षक (SP) निखिल रखेचा ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों और नक्सलियों के बीच आमना-सामना हुआ। मौके से नक्सली का शव और हथियार बरामद कर लिए गए हैं।
सुरक्षा बलों के साथ कैसे हुई मुठभेड़?
पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि छोटे बेठिया थाना क्षेत्र के घने जंगलों में नक्सलियों का एक सक्रिय दस्ता किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए जमा हुआ है। इसके बाद डीआरजी (DRG) और सुरक्षाबलों की एक संयुक्त टीम को ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। जंगल में जैसे ही जवान एक विशेष पॉइंट पर पहुंचे, नक्सलियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
जवानों ने भी फौरन मोर्चा संभाला और जवाबी हमला किया। काफी देर तक चली गोलीबारी थमने के बाद जब इलाके की तलाशी ली गई, तो वहां नक्सली कमांडर रुपी का शव मिला। पुलिस ने शव के साथ एक आधुनिक हथियार और भारी मात्रा में नक्सली सामग्री भी जब्त की है। बता दें कि इससे पहले रुपी का गार्ड कई जवानों के साथ सरेंडर कर दिया था।
Who Is Naxal Commander Rupi: कौन था एरिया कमांडर रुपी?
मारे गए नक्सली रुपी की दहशत उत्तर बस्तर इलाके में काफी समय से बनी हुई थी। वह नक्सली संगठन में एक महत्वपूर्ण ओहदे पर था और कई सालों से सुरक्षाबलों की ‘मोस्ट वांटेड’ लिस्ट में शामिल था। रुपी नक्सली संगठन के उत्तर बस्तर डिवीजन में एरिया कमांडर के पद पर सक्रिय था।
उसकी खतरनाक गतिविधियों को देखते हुए सरकार ने उस पर 5 लाख रुपये का इनाम रखा था। रुपी कई बड़ी वारदातों की मास्टरमाइंड थी। उस पर पुलिस पार्टी पर घात लगाकर हमला करने, आईईडी (IED) ब्लास्ट कर जवानों को नुकसान पहुंचाने, सड़क निर्माण में लगी मशीनों को फूंकने और ग्रामीणों की हत्या जैसे कई संगीन मामले दर्ज थे। वह जंगलों के रास्तों का माहिर था और स्थानीय स्तर पर नक्सलियों की भर्ती और रसद जुटाने का काम भी देखता था। उसकी मौत को नक्सली संगठन के लिए एक बड़ा ‘सेटबैक’ माना जा रहा है।
बदलती हवा मुठभेड़ और आत्मसमर्पण का दौर
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ दोतरफा कार्रवाई चल रही है। जहां एक तरफ बंदूक उठाने वालों को मुठभेड़ में ढेर किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की आत्मसमर्पण नीति का असर भी दिखने लगा है। बता दें कि इसी महीने 2 अप्रैल को जेजेएमपी (JJMP) संगठन के सब-जोनल कमांडर सुरेंद्र लोहरा ने सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर हथियार डाल दिए थे। सुरेंद्र पर भी 5 लाख रुपये का इनाम था। लोहरा ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया था, जो नक्सलियों के टूटते मनोबल का प्रतीक है।
बस्तर में नक्सलियों पर ‘फाइनल प्रहार’
पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ के बस्तर, कांकेर और दंतेवाड़ा क्षेत्रों में सुरक्षाबलों ने अपने अभियान तेज कर दिए हैं। हाल ही में कई बड़े इनामी नक्सलियों को ढेर किया गया है या उन्होंने सरेंडर किया है।
SP निखिल रखेचा ने कहा कि इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि अन्य छिपे हुए नक्सलियों का पता लगाया जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं, उनके लिए आत्मसमर्पण की नीति खुली है, अन्यथा उनके खिलाफ इसी तरह की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
English summary
Chhattisgarh Naxal Commander Rupi Killed: Security forces have gunned down Rupi, a Naxal Area Commander carrying a bounty of ₹5 lakh, in Kanker, Chhattisgarh. Weapons were also recovered following this encounter, which took place in the forests of Chhote Bethiya.
Karnataka Congress: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर ‘दिल्ली की दौड़’ ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार के भीतर असंतोष के सुर अब खुलकर सामने आने लगे हैं। कर्नाटक कांग्रेस के लगभग 30 वरिष्ठ विधायकों के एक गुट ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डेरा डाल दिया है।
इन विधायकों का एकमात्र मिशन पार्टी आलाकमान और राहुल गांधी से मुलाकात कर राज्य कैबिनेट में आमूलचूल बदलाव (Cabinet Reshuffle) के लिए दबाव बनाना है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी राज्यों में चुनाव और दिल्ली में बजट सत्र की सरगर्मियां तेज हैं। विधायकों का यह खेमा अब सिद्धारमैया कैबिनेट में अपनी जगह पक्की करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है।
डिनर डिप्लोमेसी से शुरू हुई बगावत की पटकथा
कैबिनेट में बदलाव की यह मांग रातों-रात पैदा नहीं हुई है। इसकी नींव मार्च महीने में आयोजित एक ‘डिनर डिप्लोमेसी’ यानी गुप्त रणनीतिक बैठक के दौरान ही रख दी गई थी। हालिया उपचुनावों के नतीजों के बाद पार्टी के भीतर दबे स्वर अब विद्रोह की शक्ल ले रहे हैं।
दिल्ली पहुंचे विधायकों का कहना है कि सरकार के गठन को ढाई-तीन साल का समय बीत चुका है। ऐसे में जो मंत्री पहले दिन से कुर्सियों पर काबिज हैं, उन्हें हटाकर अब नए और अनुभवी वरिष्ठ सदस्यों को मौका दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे सरकार में नई ऊर्जा आएगी और उपचुनावों के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का रुख: दिल्ली जाना गलत नहीं
इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बेहद सधा हुआ बयान दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विधायकों के दिल्ली जाने का बचाव किया।
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि कैबिनेट फेरबदल का काम अभी बाकी है। उन्होंने कहा, पांच राज्यों में चुनाव और बजट सत्र की वजह से इसमें देरी हो रही है, यही मुख्य वजह है। उन्होंने लिखा, मंत्री पद के इच्छुक लोगों का दिल्ली जाना कोई बुरी बात या गलत नहीं है। हर विधायक की अपनी आकांक्षाएं होती हैं।
Karnataka CM Siddaramaiah tweets, “Theres nothing wrong with aspirants for ministerial positions visiting New Delhi. Cabinet reshuffle work is pending. The elections in five states and the budget session may be reasons for the delay in the cabinet reshuffle.” pic.twitter.com/IEDUm6vnOa
सीएम ने स्पष्ट किया कि उनके राजनीतिक सचिव नासिर अहमद ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है, हालांकि भविष्य में इसकी संभावना हो सकती है। पार्टी के भीतर गुटबाजी की खबरों के बीच उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस उपचुनावों में निश्चित रूप से जीत हासिल करेगी।
आलाकमान के पाले में गेंद, क्या करेंगे राहुल-खरगे
अब सबकी निगाहें दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर टिकी हैं। क्या राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे इन 30 विधायकों की मांग मानकर कैबिनेट में बड़ा फेरबदल करेंगे? या फिर आगामी चुनावों को देखते हुए सिद्धारमैया को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया जाएगा? कर्नाटक की राजनीति का यह ‘दिल्ली अध्याय’ आने वाले दिनों में और भी दिलचस्प मोड़ ले सकता है।
English summary
Karnataka Congress Cabinet Reshuffle 2026: 30 Karnataka Congress MLAs have arrived in Delhi demanding a cabinet reshuffle. Chief Minister Siddaramaiah stated that traveling to Delhi with the aspiration of securing a ministerial berth is not wrong. Read the full report.
केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने सोमवार को गुरुग्राम स्थित एक रियल एस्टेट समूह के खिलाफ छापेमारी की। यह कार्रवाई निवेशकों के साथ कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की जांच का हिस्सा है।प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने 32nd एवेन्यू नामक संस्था से जुड़े सात परिसरों पर छापा मारा। अधिकारियों ने बताया कि यह समूह दिल्ली-एनसीआर और गोवा में सक्रिय है। टिप्पणी के लिए कंपनी या उसके प्रमोटर से संपर्क नहीं हो सका।
ईडी के अधिकारियों ने कहा कि यह मामला हरियाणा पुलिस द्वारा निवेशकों की शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई कई एफआईआर से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर समूह द्वारा धोखा दिया गया था। उन्होंने बताया कि समूह के प्रमोटर-निदेशक फिलहाल फरार हैं या न्यायिक हिरासत में हैं।
Nari Shakti Vandan Adhiniyam (Parliament Special Session): भारतीय राजनीति में इस वक्त एक ही चर्चा सबसे ज्यादा गर्म है-महिला आरक्षण और संसद का विशेष सत्र। आखिर ऐसा क्या हुआ कि चुनाव के शोर के बीच सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक सांसदों को दिल्ली तलब कर लिया है? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। आइए, इस पूरे मामले की परतें खोलते हैं और समझते हैं कि 2029 का चुनावी रण कैसे बदलने वाला है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद के विशेष सत्र पर सवाल उठाए हैं। केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इसी दौरान महिला आरक्षण कानून में संशोधन और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है। बीजेपी ने अपने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी कर इस सत्र में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने को कहा है।
खड़गे का वार: चुनाव के बीच ‘विशेष सत्र’ पर सवाल
सियासत में टाइमिंग का बड़ा खेल होता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को जो पत्र लिखा है, उसमें सीधा आरोप लगाया है कि सरकार राज्यों में चल रहे चुनावों के बीच विशेष सत्र बुलाकर राजनीतिक लाभ (Political Mileage) लेना चाहती है। खड़गे का कहना है कि जब विपक्षी दल 29 अप्रैल 2026 के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग कर रहे थे, तो सरकार ने उन्हें विश्वास में लिए बिना यह फैसला क्यों किया?
विपक्ष का सबसे बड़ा पेच ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर फंसा है। खड़गे के मुताबिक, बिना पूरी जानकारी दिए इस ऐतिहासिक कानून पर सार्थक चर्चा संभव नहीं है। क्या यह वास्तव में महिला सशक्तिकरण है या फिर चुनाव जीतने की एक नई बिसात? यह सवाल अब हवा में तैर रहा है।
Congress president and Rajya Sabha LoP Mallikarjun Kharge writes to PM Narendra Modi, “I have just received your letter on the special session of Parliament for a discussion on the Nari Shakti Vandan Adhiniyam from the 16th of April…This special sitting has been called without… pic.twitter.com/SqkvavZmPs
मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में लिखा,
“मुझे 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के संबंध में आपका पत्र मिला है। यह विशेष सत्र हमें विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है और आपकी सरकार परिसीमन से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी साझा किए बिना फिर से हमारा सहयोग मांग रही है। आप समझ सकते हैं कि परिसीमन और अन्य अहम पहलुओं का विवरण जाने बिना इस ऐतिहासिक कानून पर कोई सार्थक चर्चा संभव नहीं है। आपने अपने पत्र में कहा है कि आपकी सरकार ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के साथ संवाद किया है। लेकिन मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि यह बात सच्चाई के विपरीत है, क्योंकि सभी विपक्षी दल लगातार सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि 29 अप्रैल 2026 को चल रहे चुनावों के समाप्त होने के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा हो सके। चुनावों के बीच इस विशेष सत्र को बुलाना हमारे इस विश्वास को और मजबूत करता है कि आपकी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस बिल को जल्दबाजी में लागू करना चाहती है। अगर यह विशेष सत्र वास्तव में ‘हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने’ और ‘सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने’ के उद्देश्य से बुलाया गया है, जैसा कि आपने अपने पत्र में लिखा है, तो मैं सुझाव दूंगा कि सरकार 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय एक सर्वदलीय बैठक आयोजित करे, ताकि परिसीमन के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जा सके, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ में संशोधन से जोड़ा जा रहा है।”
सरकार का रुख क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी ने सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर इस कानून के समर्थन की अपील की है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना अब समय की मांग है और 2029 के चुनाव इस दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकते हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए संविधान संशोधन के साथ-साथ परिसीमन कानून में भी बदलाव की तैयारी है।
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम? (What is Nari Shakti Vandan Adhiniyam)
सरल शब्दों में कहें तो यह कानून संसद (लोकसभा) और देश की सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% यानी एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। इसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए कोटा भी शामिल है।
मोदी सरकार ने 2023 में इसे 106वें संविधान संशोधन के तौर पर पारित कराया था। लेकिन, असली पेंच यह है कि यह कानून पास तो हो गया, पर लागू कब होगा? ताजा जानकारी के मुताबिक, इसे 31 मार्च 2029 से लागू करने की तैयारी है, ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव में पहली बार महिलाएं आरक्षित सीटों पर अपनी दावेदारी ठोक सकें।
543 से 816: लोकसभा की नई सूरत कैसी होगी? (New Structure of Parliament: From 543 to 816 Seats)
सरकार केवल आरक्षण नहीं दे रही, बल्कि लोकतंत्र का ‘कैनवास’ भी बड़ा करने जा रही है। इस योजना के तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है।
कुल सीटें: 816
महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें: लगभग 273 (करीब 33%)
यह बदलाव देश की बढ़ती आबादी और सही प्रतिनिधित्व के नाम पर किया जा रहा है। इसके लिए सरकार परिसीमन कानून में संशोधन के लिए एक अलग ‘साधारण बिल’ भी लाएगी। चौंकाने वाली बात यह है कि नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना को आधार मानकर किया जा सकता है।
16 से 18 अप्रैल: संसद में क्यों मचेगा घमासान? (Why a Special Session? BJP Issues 3-Line Whip)
बीजेपी ने अपने सभी सांसदों के लिए ‘3-लाइन व्हिप’ जारी कर दिया है। यानी 16 से 18 अप्रैल तक हर सांसद की हाजिरी अनिवार्य है। कैबिनेट ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है। इस विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा परिसीमन के मुद्दों को सुलझाना और कानून को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया तेज करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी नेताओं को पत्र लिखकर समर्थन मांगा है और कहा है कि अब समय आ गया है कि इस कानून को धरातल पर उतारा जाए।
Timeline of Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल की टाइमलाइन,कब-कब क्या हुआ?
महिला आरक्षण का इतिहास संघर्षों और हंगामों से भरा रहा है। एक नजर डालते हैं इस सफर पर…
1996: यूनाइटेड फ्रंट सरकार के दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा ने पहली बार महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश किया। हालांकि सहयोगी दलों के विरोध के चलते इसे आगे बढ़ाने के बजाय स्टैंडिंग कमेटी के पास भेज दिया गया।
1998 (13 जुलाई): अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने लोकसभा में बिल पेश करने की कोशिश की, लेकिन भारी हंगामे के बीच आरजेडी सांसद ने इसकी कॉपी फाड़ दी, जिससे कार्यवाही बाधित हो गई।
1998 (14 जुलाई): सरकार ने दोबारा बिल पेश करने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के विरोध और शोर-शराबे के कारण यह संभव नहीं हो सका।
1998 (11 दिसंबर): एक और प्रयास हुआ, लेकिन इस बार भी स्थिति काबू से बाहर रही और कुछ सांसद स्पीकर की कुर्सी तक पहुंच गए, जिससे प्रक्रिया फिर अटक गई।
1998 (23 दिसंबर): काफी विवादों के बीच सरकार बिल को पेश करने में सफल रही, लेकिन राजनीतिक सहमति न बन पाने के कारण इसे पास नहीं कराया जा सका।
2000: एनडीए सरकार ने एक बार फिर इस विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण सफलता हाथ नहीं लगी।
2002: फिर से प्रयास किया गया, लेकिन राजनीतिक मतभेदों के चलते यह पहल भी अधूरी रह गई।
2003: बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने सर्वदलीय बैठक के जरिए सहमति बनाने की कोशिश की, लेकिन दलों के बीच मतभेद खत्म नहीं हो सके।
2008: यूपीए सरकार के समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 6 मई को राज्यसभा में बिल पेश किया गया। इस दौरान भी सदन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला और इसे स्टैंडिंग कमेटी को सौंप दिया गया।
2010 (9 मार्च): राज्यसभा में बिल को दो-तिहाई बहुमत से पास कर लिया गया, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी गई। हालांकि लोकसभा में इसे पेश नहीं किया जा सका और अंततः यह बिल निष्प्रभावी हो गया।
2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसे नए नाम ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में संसद में पेश किया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिली और यह 106वां संविधान संशोधन बनकर कानून में तब्दील हो गया।
करीब तीन दशक की लंबी राजनीतिक जद्दोजहद के बाद यह बिल आखिरकार कानून बन पाया, जो भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
महिला शक्ति या चुनावी गणित?
प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि 2029 के चुनाव महिलाओं के आरक्षण के साथ होने चाहिए, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बढ़ी है। वहीं, विपक्ष इसे ‘हड़बड़ी में लिया गया फैसला’ बता रहा है। बहरहाल, सीटों का बढ़ना और महिलाओं को 33% आरक्षण मिलना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नई सुबह साबित हो सकता है। अब सबकी नजरें 16 अप्रैल से शुरू होने वाले उस विशेष सत्र पर हैं, जहां इस कानून की अंतिम रूपरेखा तय होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. महिला आरक्षण कानून कब से लागू होगा? यह कानून आधिकारिक तौर पर 31 मार्च 2029 से लागू होने की उम्मीद है।
2. लोकसभा में सीटों की संख्या कितनी बढ़ेगी? प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं।
3. क्या इसमें राज्यों की विधानसभाएं भी शामिल हैं? जी हां, यह कानून सभी राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू होगा।
4. खड़गे ने विशेष सत्र का विरोध क्यों किया? कांग्रेस का मानना है कि राज्यों के चुनावों के बीच सत्र बुलाना राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश है और परिसीमन के मुद्दों पर अभी और चर्चा की जरूरत है।
5. आरक्षण का आधार कौन सी जनगणना होगी? संभावना है कि सीटों का नया निर्धारण (परिसीमन) 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा।
English summary
Kya hai Nari Shakti Vandan Adhiniyam women reservation bill explained Parliament Special Session kharge-letter modi
भेल खाने मार्केट पहुंची युवती, तभी आए 2 मनचले, किया ऐसा कांड पूरा इलाका हैरान
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Acid Attack News: महाराष्ट्र के सोलापुर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जहां भेल खाने निकली 21 वर्षीय युवती पर बाइक सवार दो युवकों ने तेजाब जैसा पदार्थ फेंक दिया. घटना मुख्य सड़क पर हुई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. युवती को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है जबकि पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है.
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सोलापुर में भेल खाने निकली युवती पर बाइक सवार युवकों ने तेजाब जैसा पदार्थ फेंका. (फोटो AI)
न्यूज18 मराठी Solapur Acid Attack News: शहरों की भीड़भाड़ वाली सड़कों को अक्सर सुरक्षित माना जाता है. लोग सोचते हैं कि बाजार में, रोशनी के बीच, लोगों की मौजूदगी में खतरा कम होगा. लेकिन महाराष्ट्र के सोलापुर की यह घटना उस भरोसे को झकझोर देती है. एक 21 वर्षीय युवती सिर्फ भेल खाने घर से निकली थी. शाम का समय था, सड़क पर आवाजाही थी. लेकिन इसी भीड़ के बीच कुछ सेकंड में सब कुछ बदल गया. बाइक पर आए दो युवकों ने उसके चेहरे पर तेजाब जैसा पदार्थ फेंक दिया और फरार हो गए. यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हमारे शहर सच में सुरक्षित हैं, खासकर महिलाओं के लिए.
इस घटना ने पूरे शहर को हिला दिया है. पीड़िता अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है, परिवार सदमे में है और लोग गुस्से में हैं. यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज की मानसिकता का भी आईना है. ऐसी घटनाएं बताती हैं कि अपराधी अब खुलेआम वारदात को अंजाम देने से भी नहीं डरते.
मुख्य सड़क पर सनसनी: सरेआम वारदात, पुलिस जांच में जुटी
जानकारी के मुताबिक युवती रविवार शाम करीब 7:30 बजे बाजार क्षेत्र में भेल खाने पहुंची थी. जैसे ही वह बोहरी पेट्रोल पंप के पास पहुंची, बाइक पर सवार दो अज्ञात युवक उसके पास आए और अचानक उसके चेहरे पर तेजाब जैसा पदार्थ फेंककर फरार हो गए. हमले के तुरंत बाद युवती दर्द से चिल्लाने लगी. आसपास मौजूद लोगों ने उसे संभाला और परिवार को सूचना दी गई. बाद में उसे पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है.
इस घटना ने पूरे इलाके में डर और गुस्से का माहौल बना दिया है. पीड़िता के परिवार ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. घटनास्थल का पंचनामा किया गया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा.
घटना कहां और कैसे हुई?
यह घटना सोलापुर के व्यस्त इलाके में हुई, जहां आमतौर पर लोगों की काफी आवाजाही रहती है. युवती भेल खाने के लिए बाजार गई थी, तभी बाइक पर आए दो युवकों ने अचानक उस पर हमला कर दिया. उन्होंने उसके चेहरे पर तेजाब जैसा पदार्थ फेंका और मौके से फरार हो गए. यह सब इतनी तेजी से हुआ कि पीड़िता को संभलने का मौका तक नहीं मिला.
युवती की हालत कैसी है?
हमले में युवती को गंभीर चोटें आई हैं, खासकर चेहरे पर जलन और घाव की स्थिति बनी हुई है. उसे तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टर उसकी निगरानी कर रहे हैं. फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लग सकता है.
पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है?
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है. आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके. पुलिस टीम संदिग्धों की तलाश में जुटी है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है.
महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है. भीड़भाड़ वाले इलाके में इस तरह की वारदात होना बताता है कि अपराधियों के मन में कानून का डर कम होता जा रहा है. जरूरत है सख्त कानून के साथ-साथ समाज में जागरूकता बढ़ाने की, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके.
सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें