पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि देशभर में एलपीजी की आपूर्ति स्थिर और पर्याप्त बनी हुई है। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे घबराकर खरीदारी न करें और जिम्मेदारी से रसोई गैस का इस्तेमाल करना जारी रखें।
वैश्विक संकट और आपूर्ति शृंखला की चुनौतियों के बीच भारत में घरेलू एलपीजी (एलपीजी) की आपूर्ति पूरी तरह से सुचारू बनी हुई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने अंतर-मंत्रालयी प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए आश्वस्त किया है कि देश में किसी भी वितरक के पास गैस की कमी की कोई सूचना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चल रहे वैश्विक संकट के बावजूद आवश्यक वस्तुओं की कमी से बचने, आपूर्ति शृंखला के व्यवधानों को रोकने और औद्योगिक संचालन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं।
गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे?
घरेलू और व्यावसायिक ऊर्जा सुरक्षा पर विस्तृत जानकारी देते हुए सुजाता शर्मा ने बताया कि गैस वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन बुकिंग का आंकड़ा लगभग 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है। गैस के डायवर्जन या कालाबाजारी को रोकने के लिए ओटीपी आधारित डिलीवरी प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। व्यावसायिक (कॉमर्शियल) गैस आपूर्ति के संदर्भ में उन्होंने बताया कि 70 प्रतिशत आपूर्ति बहाल कर दी गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, 14 मार्च से लेकर अब तक लगभग 1,82,900 टन व्यावसायिक एलपीजी की बिक्री की जा चुकी है।
मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को अंतर मंत्रालयी प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि मौजूदा वितरण नेटवर्क की मजबूती को देखते हुए, देशभर के घरों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, एलपीजी की उपलब्धता पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और उसका प्रबंधन किया जा रहा है।
मंत्रालय ने बताया कि ने एलपीजी बुकिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग पर भी जोर दिया। मंत्रालय ने कहा कि लगभग 95% उपभोक्ता अब आईवीआरएस, एसएमएस, व्हाट्सएप और मोबाइल एप्लिकेशन जैसे ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को वितरक केंद्रों पर भीड़ से बचने और निर्बाध सेवा सुनिश्चित करने के लिए इन सुविधाजनक और कुशल डिजिटल चैनलों का उपयोग जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने क्या बताया?
ऊर्जा आपूर्ति के साथ-साथ समुद्री व्यापार मार्गों और शिपिंग क्षेत्र के प्रभाव पर बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने निम्नलिखित प्रमुख जानकारियां साझा कीं:
- जहाजों की वापसी के प्रयास: मंत्रालय विदेश मंत्रालय (एमईए) के साथ समन्वय स्थापित कर होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद 15 भारतीय ध्वज और स्वामित्व वाले जहाजों को वापस लाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है। इस मार्ग से नौकायन संभव होते ही इन जहाजों को सुरक्षित वापस लाया जाएगा।
- ‘जग विक्रम’ की सुरक्षित यात्रा: एक बड़ी राहत के रूप में, भारतीय ध्वज वाला एलपीजी पोत ‘जग विक्रम’ 11 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। यह जहाज 20,400 मीट्रिक टन गैस और 24 नाविकों के साथ 14 अप्रैल को कांडला बंदरगाह पहुंचेगा।
- बंदरगाहों की स्थिति: वर्तमान में भारत के सभी बंदरगाहों पर संचालन पूरी तरह से सामान्य है और कहीं से भी किसी प्रकार के कंजेशन (भीड़भाड़) की कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
खाड़ी क्षेत्र के इस संवेदनशील माहौल में कूटनीतिक समाधान और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत सरकार उच्च स्तर पर सक्रिय है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए खाड़ी देशों के साथ भारत अपनी पहुंच और संपर्क को मजबूत कर रहा है। इसी पहल के तहत, विदेश मंत्री ने 11 से 12 अप्रैल, 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का महत्वपूर्ण दौरा किया है।
































































